NYAYA SIGNAL
Central · 2005 · Bare Act

The Manipur University Act, 2005

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मणिपुर णिश् िणिद्यालय अणिणियम, 2005 
_________ 

िाराओं का क्रम 
_________ 

िााराएं 

1. संणिप् त िाम और प्रारंभ । 

2. पररभाषाएं । 

3. णिश् िणिद्यालय की स् थापिा । 

4. णिश् िणिद्यालय की स् थापिा का प्रभाि । 

5. णिश् िणिद्यालय के उद्देश् य । 

6. णिश् िणिद्यालय की शण‍ तयां । 

7. अणिकाररता । 

8. णिश् िणिद्यालय का सभी िर्गों, जाणतयों और पंथों के णलए खुला होिा । 

9. कुलाध् यि । 

10. मुख्य कुलाणिसणिि । 

11.णिश् िणिद्यालय के अणिकारी । 

12. कुलाणिपणत । 

13. कुलपणत । 

14. प्रणतकुलपणत । 

15. णिद्यापीठों के संकायाध् यि । 

16. कुलसणिि । 

17. णित्त अणिकारी । 

18. परीिा णियंत्रक । 

19. पुस् तकालयाध् यि । 

20. अन् य अणिकारी । 

21. णिश् िणिद्यालय के प्राणिकारी । 

22. सभा । 

23. कायय पररषद ्। 

24. णिद्या पररषद ्। 

25. महाणिद्यालय णिकास पररषद ्। 

26. अध् ययि बोर्य । 

27. णित्त सणमणत । 

28. णिश् िणिद्यालय के अन् य प्राणिकारी । 

29. पररणियम बिािे की शण‍ त । 

30. पररणियम कैं से बिाए जाएंर्गे । 

31. अध् यादशे बिािे की शण‍ त । 



 ii 

िाराएं 

32. णिणियम । 

33. िार्षयक ररपोर्य । 

34. िार्षयक लेखे । 

35. णििरणियां और जािकारी । 

36. कमयिाररयों की सेिा की शतें । 

37. छात्रों के णिरुद्ध अिुशासणिक मामलों में अपील और माध् यस् थम् की प्रक्रक्रया । 

38. अपील करिे का अणिकार । 

39. भणिष् य-णिणि और पेंशि णिणि । 

40. प्राणिकाररयों और णिकायों के र्गठि के बारे में णििाद । 

41. आकणस् मक ररण‍ तयों का भरा जािा । 

42. प्राणिकाररयों या णिकायों की काययिाणहयों का ररण‍ तयों के कारि अणिणिमान्य ि होिा । 

43. सद्भािपूियक की र्गई कारयिाई के णलए संरिि । 

44. णिश् िणिद्यालय के अणभलेखों को साणबत करिे का ढंर्ग । 

45. करठिाइयों को दरू करिे की शण‍ त । 

46. पररणियमों, अध् यादशेों और णिणियमों का राजपत्र में प्रकाणशत क्रकया जािा और संसद ्के समि रखा जािा । 

47. संक्रमिकालीि उपबंि । 

48. णिरसि और व् यािृणत । 

 अिुसूिी ।



मणिपुर णिश् िणिद्यालय अणिणियम, 2005 

(2005 का अणिणियम सखं् याकं 54) 

[28 क्रदसम् बर, 2005] 

मणिपरु राज् य में अध्यापि और सबंद्धक णिश् िणिद्यालय की स् थापिा और उसका णिर्गमि  

करि ेके णलए तथा उसस ेसबंणंित या उसके आिषुणंर्गक  

णिषयों का उपबिं करि ेके णलए 

अणिणियम  

 भारत र्गिराज् य के छप् पििें िषय में संसद ्द्वारा णिम् िणलणखत रूप में यह अणिणियणमत हो :—  

1. सणंिप् त िाम और प्रारंभ—(1) इस अणिणियम का संणिप् त िाम मणिपुर णिश् िणिद्यालय अणिणियम, 2005 ह ै।  

(2) यह 13 अ‍ तूबर, 2005 को प्रिृत्त हुआ समझा जाएर्गा । 

2. पररभाषाएं—इस अणिणियम में, और इसके अिीि बिाए र्गए सभी पररणियमों में, जब तक क्रक संदभय से अन् यथा अपेणित 

ि हो,— 

(क) “णिद्या पररषद”् से णिश् िणिद्यालय की णिद्या पररषद ्अणभप्रेत ह;ै 

(ख) “शैिणिक कमयिाररिृंद” से कमयिाररिृंद ऐसे प्रिर्गय अणभप्रेत हैं जो अध् यादशेों द्वारा शैिणिक कमयिाररिृंद के 

रूप  में अणभणहत क्रकए जाएं;  

(र्ग) “संबद्ध महाणिद्यालय” से णिश् िणिद्यालय के णिशेषाणिकारों में सणम् मणलत महाणिद्यालय अणभप्रेत ह;ै 

(घ) “अध् ययि बोर्य” से णिश् िणिद्यालय का अध् ययि बोर्य अणभप्रेत ह;ै  

(ङ) “कुलाणिपणत” “कुलपणत” और “प्रणतकुलपणत” से क्रमश: णिश् िणिद्यालय के कुलाणिपणत, कुलपणत और 

प्रणतकुलपणत अणभप्रेत हैं;  

(ि) “महाणिद्यालय णिकास पररषद”् से णिश् िणिद्यालय की महाणिद्यालय णिकास पररषद ्अणभप्रेत ह;ै 

(छ) “संघर्क महाणिद्यालय” से णिश् िणिद्यालय द्वारा अिुरणित महाणिद्यालय अणभप्रेत है; 

(ज) “सभा” से णिश् िणिद्यालय की सभा अणभप्रेत ह;ै  

(झ) “णिभार्ग” से अध् ययि णिभार्ग अणभप्रेत ह ैऔर इसके अंतर्गयत अध् ययि केन् र भी ह;ै  

(ञ) “दरू णशिा पद्धणत” से संिार के क्रकसी माध् यम जैसे क्रक प्रसारि, रे्लीणिजि प्रसारि, पत्रािार पाठ्यक्रमों, 

सेणमिार संपकय  काययक्रमों अथिा ऐसे क्रकन् हीं दो या अणिक माध् यमों के संयोजि द्वारा णशिा दिेे की पद्धणत अणभप्रेत ह;ै  

(र्) “कमयिारी” से णिश् िणिद्यालय द्वारा णियु‍ त कोई व् यण‍ त अणभप्रेत ह ै और इसके अंतर्गयत णिश् िणिद्यालय के 

णशिक और अन् य कमयिाररिृंद भी हैं;  

(ठ) “कायय पररषद”् से णिश् िणिद्यालय की कायय पररषद ्अणभप्रेत ह;ै  

(र्) “छात्र-णििास” से णिश् िणिद्यालय या णिश् िणिद्यालय द्वारा िलाए जा रहे क्रकसी महाणिद्यालय या संस् था के 

छात्रों के णलए णििास या सामूणहक जीिि की इकाई अणभप्रेत है;  

(ढ) “संस् था” से णिश् िणिद्यालय द्वारा िलाई जा रही या णिश् िणिद्यालय के णिशेषाणिकार प्राप् त ऐसी शैिणिक 

संस् था अणभप्रेत ह,ै जो महाणिद्यालय िहीं ह;ै 

(ि) “प्रािायय” से णिश् िणिद्यालय द्वारा िलाए जा रह ेक्रकसी महाणिद्यालय या क्रकसी संस् था का प्रिाि अणभप्रेत ह ै

और इसके अंतर्गयत, जहां कोई प्रािायय िहीं है िहां प्रािायय के रूप में कायय करिे के णलए तत् समय सम् यक् रूप से णियु‍ त व् यण‍ त 

और प्रािायय या काययकारी प्रािायय के ि होिे पर उप- प्रािायय के रूप में सम् यक् रूप से णियु‍ त व् यण‍ त भी ह;ै  

(त) “मान्यताप्राप् त णशिक” से ऐसे व्यण‍ त अणभप्रेत हैं जो णिश् िणिद्यालय के णिशेषाणिकार प्राप् त महाणिद्यालय या 

संस्था में णशिि दिेे के प्रयोजि के णलए णिश् िणिद्यालय द्वारा मान्यता प्राप् त हैं; 

(थ) “णिणियम” से इस अणिणियम के अिीि णिश् िणिद्यालय के क्रकसी प्राणिकारी द्वारा बिाए र्गए तत् समय प्रिृत्त 

णिणियम अणभप्रेत हैं;  

(द) “णिद्यालय” से णिश् िणिद्यालय में अध् ययि की णिद्यापीठ अणभप्रेत ह;ै  



 2 

(ि) “पररणियम” और “अध् यादशे” से क्रमश: तत् समय प्रिृत्त णिश् िणिद्यालय के पररणियम और अध् यादशे अणभप्रेत हैं;  

(ि) “णिश् िणिद्यालय के णशिक” से आिायय, उपािायय, प्राध्यापक और ऐसे अन् य व् यण‍ त अणभप्रेत हैं, जो 

णिश् िणिद्यालय में या णिश् िणिद्यालय द्वारा िलाए जािे िाले क्रकसी महाणिद्यालय या संस् था में णशिि दिेे या अिुसंिाि का 

संिालि करिे के णलए णियु‍ त क्रकए जाएं और अध् यादशेों द्वारा णशिक के रूप में अणभणहत क्रकए जाएं;  

(प) “णिश् िणिद्यालय” से इस अणिणियम के अिीि स् थाणपत मणिपुर णिश् िणिद्यालय अणभप्रेत ह ै।  

3. णिश् िणिद्यालय की स् थापिा—(1) मणिपुर राज्य में, मणिपुर णिश् िणिद्यालय अणिणियम, 1980 (1980 का मणिपुर 

अणिणियम 8) के अिीि स् थाणपत मणिपुर णिश् िणिद्यालय इस अणिणियम के अिीि “मणिपुर णिश् िणिद्यालय” के िाम से ही णिर्गणमत 

णिकाय के रूप में स् थाणपत क्रकया जाएर्गा ।  

(2) प्रथम कुलाणिपणत, प्रथम कुलपणत तथा सभा, कायय पररषद ्और णिद्या पररषद ्के प्रथम सदस् य और िे सभी व् यण‍ त, जो 

इसके पश् िात ऐसे अणिकारी या सदस् य बिें, जब तक िे ऐसे पद पर बिे रहते हैं या उिकी सदस् यता बिी रहती है, णिश् िणिद्यालय का 

र्गठि करेंर्गे ।  

(3) णिश् िणिद्यालय का शाश् ित् उत्तराणिकार होर्गा और उसकी सामान् य मुरा होर्गी तथा उ‍ त िाम से िह िाद लाएर्गा और 

उस पर िाद लाया जाएर्गा । 

(4) णिश् िणिद्यालय का मुख् यालय इम् फाल में होर्गा । 

4. णिश् िणिद्यालय की स् थापिा का प्रभाि—इस अणिणियम के प्रारंभ की तारीख से ही,—  

(क) क्रकसी संणिदा या अन् य णलखत में मणिपुर णिश् िणिद्यालय के प्रणत क्रकसी णिदशे को उस णिश् िणिद्यालय के 

प्रणतणिदशे समझा जाएर्गा;  

(ख) मणिपुर णिश् िणिद्यालय की सभी जंर्गम और स् थािर संपणत्त उस णिश् िणिद्यालय में णिणहत होंर्गी;  

(र्ग) मणिपुर णिश् िणिद्यालय के सभी अणिकार और दाणयत् ि उस णिश् िणिद्यालय को अंतररत हो जाएंर्गे और उस 

णिश् िणिद्यालय के अणिकार और दाणयत् ि होंर्गे;  

(घ) इस अध् यादशे के प्रारंभ के ठीक पूिय, मणिपुर णिश् िणिद्यालय द्वारा णियोणजत प्रत् येक व् यण‍ त, उस 

णिश् िणिद्यालय में अपिा पद या सेिा, उसी अिणि तक, उसी पाररश्रणमक पर और उन् हीं णिबंििों और शतों पर और पेंशि, 

छुट्टी, उपदाि, भणिष् य-णिणि तथा अन् य मामलों में, उन् हीं अणिकारों और णिशेषाणिकारों सणहत, तब तक िारि करेर्गा, जब 

तक िह उसे तब िारि करता यक्रद यह अणिणियम, अणिणियणमत ि हुआ होता और ऐसा तब तक करता रहरे्गा जब तक क्रक 

उसका णियोजि समाप् त िहीं कर क्रदया जाता ह ैया जब तक ऐसी प्रख् याणपत पदािणि, पाररश्रणमक और णिबंिि और शतें, 

पररणियम द्वारा सम् यक् रूप से पररिर्तयत िहीं कर दी जाती हैं :  

परन् तु यक्रद इस प्रकार क्रकया र्गया पररितयि ऐसे कमयिारी को स् िीकायय िहीं ह ै तो णिश् िणिद्यालय द्वारा उस 

कमयिारी के साथ क्रकए र्गए संणिदा के णिबंििों के अिसुार, या यक्रद इस णिणमत्त, उसमें कोई उपबंि िहीं क्रकया र्गया ह ै तो 

णिश् िणिद्यालय द्वारा उसको, स् थायी कमयिाररयों की दशा में, तीि मास के पाररश्रणमक के समतुल् य और अन् य कमयिाररयों की 

दशा में, एक मास के पाररश्रणमक के समतुल् य प्रणतकर के संदाय पर उसका णियोजि समाप् त क्रकया जा सकेर्गा :  

परन् तु यह और क्रक मणिपुर णिश् िणिद्यालय के कुलपणत और प्रणतकुलपणत को, तत् समय प्रिृत्त क्रकसी णिणि में या 

क्रकसी णलखत या अन् य दस् तािेज में, शब् दों के क्रकसी भी रूप द्वारा, क्रकए र्गए क्रकसी प्रणतणिदशे का यह अथय लर्गाया जाएर्गा क्रक 

िह उस णिश् िणिद्यालय के क्रमश: कुलपणत और प्रणतकुलपणत को क्रकया र्गया प्रणतणिदशे ह;ै  

(ङ) मणिपुर णिश् िणिद्यालय अणिणियम, 1980 (1980 का मणिपुर अणिणियम 8) के उपबंिों के अिीि णियु‍ त 

मणिपुर णिश् िणिद्यालय का कुलपणत, इस अणिणियम के अिीि कुलपणत के रूप में णियु‍ त क्रकया र्गया समझा जाएर्गा और िह 

तीि मास की अिणि के णलए या इस अणिणियम की िारा 47 के अिीि, प्रथम कुलपणत को णियु‍ त क्रकए जािे के समय तक, 

जो भी पूियतर हो, पद िारि करेर्गा; और  

(ि) मणिपुर णिश् िणिद्यालय से सबंद्ध या उसके द्वारा क्रदए र्गए णिशेषाणिकार प्राप् त या उसके द्वारा िलाए र्गए सभी 

महाणिद्यालय, संस् थाएं, णिद्यालय और णिभार्ग, इस णिश् िणिद्यालय से संबद्ध या णिशेषाणिकार प्राप् त या उसके द्वारा 

अिुरणित होंर्गे ।  

5. णिश् िणिद्यालय के उद्देश् य—णिश् िणिद्यालय के उद्देश् य णिद्या की ऐसी शाखाओं में, जो िह ठीक समझे, णशिि और 

अिुसंिाि की सुणििाएं प्रदाि करके ज्ञाि का प्रसार और अणभिृणद्ध करिा, णिश् िणिद्यालय के णशिा काययक्रमों में मािणिकी, प्राकृणतक 

और शारीररक णिज्ञाि, सामाणजक णिज्ञाि, िाणिकी तथा अन्य सहबद्ध णििाओं के समाकणलत पाठ्यक्रमों की व्यिस्था करिा; अध् यापि 

णिद्या की प्रक्रक्रयाओं, अंतर णिषयक अध् ययि और अिुसंिाि में उत्तरोत्तर ििीिता लािे के णलए समुणित उपाय करिा; मणिपुर राज्य के 

णिकास के णलए जिशण‍ त को णशणित और प्रणशणित करिा; और उस राज्य के लोर्गों की सामाणजक और आर्थयक दशा को सुिारिे तथा 

उिके कल् याि के णलए उिके बौणद्धक, शैणिक और सांस् कृणतक णिकास के णलए णिशेष ध् याि दिेा होंर्गे । 



 3 

6. णिश् िणिद्यालय की शण‍ तयां—(1) णिश् िणिद्यालय की णिम् िणलणखत शण‍ तयां होंर्गी, अथायत् :— 

(i) णिद्या की ऐसी शाखाओं में, जो णिश् िणिद्यालय समय-समय पर अििाररत करे, णशिि की व् यिस् था करिा तथा 

अिुसंिाि के णलए और ज्ञाि की अणभिृणद्ध और प्रसार के णलए व् यिस् था करिा; 

(ii) ऐसी शतों के अिीि, जो णिश् िणिद्यालय अििाररत करे, परीिा, मूल् यांकि या परीिि की क्रकसी अन् य प्रिाली 

के आिार पर व् यण‍ तयों को णर्प् लोमा या प्रमािपत्र दिेा और उन् हें उपाणियां या अन् य णिद्या संबंिी णिणशष् र् उपाणियां प्रदाि 

करिा तथा उणित और पयायप् त कारि होिे पर ऐसे णर्प् लोमाओं, प्रमािपत्रों, उपाणियों या अन् य णिद्या संबंिी णिशेष 

उपाणियों को िापस लेिा; 

(iii) णििेश बाह्य अध् ययि, प्रणशिि और णिस् तार सेिाओं का आयोजि करिा और उन् हें प्रारंभ करिा;  

(iv) पररणियमों द्वारा णिणहत रीणत से सम् माणिक उपाणियां या अन् य णिणशष् र्ताएं प्रदाि करिा;  

(v) उि व् यण‍ तयों को, णजन् हें िह अििाररत करे, दरू णशिा पद्धणत के माध् यम से सुणििाएं प्रदाि करिा;  

(vi) णिश् िणिद्यालय द्वारा अपेणित प्रािायय, आिायय, उपािायय, प्राध्यापक और अन् य अध् यापि या शैिणिक पद 

संणस् थत करिा और ऐसे प्रािायय, आिायय, उपािायय, प्राध्यापक या अन् य अध् यापि या शैिणिक पदों पर व् यण‍ तयों को   

णियु‍ त करिा;  

(vii) उच् ितर णिद्या की क्रकसी संस् था को ऐसे प्रयोजिों के णलए, जो णिश् िणिद्यालय अििाररत करे, मान् यता दिेा 

और ऐसी मान् यता को िापस लेिा;  

(viii) क्रकसी महाणिद्यालय या णिश् िणिद्यालय के णिशेषाणिकार प्राप् त क्रकसी संस्था में णशिि दिेे के णलए व्यण‍ तयों 

को मान्यता दिेा; 

(ix) क्रकसी अन् य णिश् िणिद्यालय या संर्गठि में कायय करिे िाले व् यण‍ तयों को णिणिर्दयष् र् अिणि के णलए 

णिश् िणिद्यालय के णशिकों के रूप में णियु‍ त करिा;  

(x) प्रशासणिक, अिुसणििीय और अन् य पदों का सृजि करिा और उि पर णियुण‍ तयां करिा;  

(xi) क्रकसी अन् य णिश् िणिद्यालय या प्राणिकारी या उच् ितर णिद्या की संस् था के साथ ऐसी रीणत से और ऐसे 

प्रयोजिों के णलए, जो णिश् िणिद्यालय अििाररत करे, सहकार या सहयोर्ग करिा या सहयु‍ त होिा;  

(xii) अिुसंिाि और णशिि के णलए केन् रीय सरकार के पूिय अिुमोदि से, ऐसे केन्र और णिशेणषत प्रयोर्गशालाएं या 

अन्य इकाइयां स्थाणपत करिा, जो णिश् िणिद्यालय की राय में, उसके उद्देश्यों को अग्रसर करिे के णलए आिश्यक हों; 

(xiii) अध् येतािृणत्त, छात्रिृणत्त, अध्ययििृणत्त, पदक और पुरस् कार संणस् थत करिा और प्रदाि करिा;  

(xiv) महाणिद्यालय, संस् थाएं और छात्र-णििास स् थाणपत करिा और िलािा;  

(xv) अिुसंिाि और सलाहकार सेिाओं के णलए व् यिस् था करिा और उस प्रयोजि के णलए अन्य संस्थाओं, 

औद्योणर्गक या अन्य संर्गठिों से ऐसे ठहराि करिा, जो णिश् िणिद्यालय आिश् यक समझे;  

(xvi) अध् यापकों, मूल् यांककों और अन् य शैिणिक कमयिाररिृंद के णलए पुिश् ियाय पाठ्यक्रमों, काययशालाओं, 

सेणमिारों और अन् य काययक्रमों का आयोजि और संिालि करिा;  

(xvii) मणिपुर राज्य के भीतर ऐसे महाणिद्यालयों और संस्थाओं को, जो णिश् िणिद्यालय द्वारा िहीं िलाई जाती हैं, 

णिश् िणिद्यालय के णिशेषाणिकार दिेा; उि सभी या उिमें से क्रकन्हीं णिशेषाणिकारों का ऐसी शतों के अिुसार जो पररणियमों 

द्वारा, णिणहत की जाएं, िापस लेिा; ऐसे छात्र-णििासों को, जो णिश् िणिद्यालय द्वारा िहीं िलाए जाते हैं और छात्रों के णलए 

अन्य िास-सुणििाओं को मान्यता दिेा, उिका मार्गयदशयि, पययिेिि और णियंत्रि करिा और ऐसी क्रकसी मान्यता को िापस 

लेिा;  

(xviii) अभ् यार्गत आिायों, प्रणतणष् ठत आिायों, परामशयदाताओं, णिद्वािों तथा ऐसे अन् य व् यण‍ तयों को जो 

णिश् िणिद्यालय के उद्देश् यों की अणभिृणद्ध में योर्गदाि द ेसकें  संणिदा पर या अन् यथा णियु‍ त करिा;  

(xix) यथाणस् थणत, क्रकसी महाणिद्यालय या संस् था या णिभार्ग को, पररणियमों के अिुसार, स् िायत्त प्राणस् थणत   प्रदाि 

करिा;  

(xx) णिश् िणिद्यालय में प्रिेश के णलए स् तरमाि अििाररत करिा, णजसके अंतर्गयत परीिा, मूल् यांकि या परीिि की 

कोई अन् य पद्धणत भी ह;ै  

(xxi) फीसों और अन् य प्रभारों संदाय की मांर्ग करिा और उन् हें प्राप् त करिा;  



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(xxii) णिश् िणिद्यालय के छात्रों के आिासों का पययिेिि करिा और उिके स् िास् ्  य और सामान् य कल् याि की 

अणभिृणद्ध के णलए प्रबंि करिा;  

(xxiii) सभी प्रिर्गों के कमयिाररयों की सेिा की शतें, णजिके अंतर्गयत उिकी आिार संणहता भी ह,ै अणिकणथत 

करिा;  

(xxiv) छात्रों और कमयिाररयों में अिुशासि का णिणियमि करिा और उिके द्वारा अिुशासि का पालि करािा 

तथा इस संबंि में ऐसे अिुशासणिक उपाय करिा, जो णिश् िणिद्यालय द्वारा आिश् यक समझ ेजाएं;  

(xxv) कमयिाररयों के स् िास् ्  य और सामान् य कल् याि की अणभिृणद्ध के णलए प्रबंि करिा;  

(xxvi) णिश् िणिद्यालयों के प्रयोजिों के णलए उपकृणत, संदाि और दाि प्राप् त करिा और क्रकसी स् थािर या जंर्गम 

संपणत्त को, णजसके अंतर्गयत न् यास और णिन् यास संपणत्त ह,ै अर्जयत करिा, िारि करिा, उसका प्रबंि और व् ययि करिा;  

(xxvii) केन् रीय सरकार के अिुमोदि से णिश् िणिद्यालय की संपणत्त की प्रणतभूणत पर णिश् िणिद्यालय के प्रयोजिों के 

णलए िि उिार लेिा;  

(xxviii) ऐसे अन् य सभी कायय और बातें करिा, जो उसके सभी या क्रकन् हीं उद्देश् यों की प्राणप् त के णलए आिश् यक, 

आिुषंणर्गक या सहायक हों ।  

7. अणिकाररता—णिश् िणिद्यालय की अणिकाररता का णिस्तार संपूिय मणिपुर राज्य पर होर्गा । 

 8. णिश् िणिद्यालय का सभी िर्गों, जाणतयों और पथंों के णलए खुला होिा—णिश् िणिद्यालय सभी णस् त्रयों और पुरुषों के णलए, 

िाह ेिे क्रकसी भी जाणत, िंश, मलूिंश या िर्गय के हों, खुला होर्गा और णिश् िणिद्यालय के णलए यह णिणिपूिय िहीं होर्गा क्रक िह क्रकसी 

व् यण‍ त को णिश् िणिद्यालय के णशिक के रूप में णियु‍ त क्रकए जािे या उसमें कोई अन् य पद िारि करिे या णिश् िणिद्यालय में छात्र के 

रूप में प्रिेश पािे या उसमें उपाणि प्राप् त करिे या उसके क्रकसी णिशेषाणिकार का उपभोर्ग या प्रयोर्ग करिे का हकदार बिािे के णलए 

क्रकसी िार्मयक णिश् िास या मान् यता संबंिी मािदरं् अपिाए या उि पर अणिरोणपत करे :  

परंतु इस िारा की कोई बात णिश् िणिद्यालय को मणहलाओं, शारीररक रूप से असुणििाग्रस् त या समाज के दबुयल िर्गों और 

णिणशणष् र्तया अिुसणूित जाणत, अिुसूणित जिजाणत के व् यण‍ तयों के णियोजि या प्रिेश के णलए णिशेष उपबंि करिे से णििाररत करिे 

िाली िहीं समझी जाएर्गी ।   

 9. कुलाध् यि—(1) भारत का राष् रपणत णिश् िणिद्यालय का कुलाध् यि होर्गा । 

(2) कुलाध् यि, णिश् िणिद्यालय के, णजसके अंतर्गयत उसके द्वारा िलाए जािे िाले महाणिद्यालय और संस् थाएं भी हैं, कायय और 

प्रर्गणत का पुिर्ियलोकि करिे के णलए और उस पर अपिी ररपोर्य प्रस् तुत करिे के णलए समय-समय पर एक या अणिक व् यण‍ तयों को 

णियु‍ त कर सकेर्गा और उस ररपोर्य की प्राणप् त पर कुलाध् यि, उस पर कुलपणत के माध् यम से कायय पररषद ्का णििार अणभप्राप् त करिे के 

पश् िात् ऐसी कारयिाई कर सकेर्गा और ऐसे णिदशे दे सकेर्गा जो िह ररपोर्य में िर्ियत णिषयों में से क्रकसी के बारे में आिश् यक समझे और 

णिश् िणिद्यालय  ऐसे णिदशेों का पालि करिे के णलए आबद्ध होर्गा ।  

 (3) कुलाध् यि को ऐसे व् यण‍ त या व् यण‍ तयों द्वारा, णजन् हें िह णिदेश द,े णिश् िणिद्यालय, उसके भििों, प्रयोर्गशालाओं तथा 

उपस् कर का और णिश् िणिद्यालय द्वारा िलाए जािे िाले या उसके णिशेषाणिकार प्राप् त क्रकसी महाणिद्यालय या संस् था का और 

णिश् िणिद्यालय द्वारा संिाणलत की र्गई परीिा, क्रदए र्गए णशिि और अन् य कायय का भी णिरीिि करािे का और णिश् िणिद्यालय, 

महाणिद्यालयों या संस् थाओं के प्रशासि या णित्त से संबंणित क्रकसी मामले की बाबत उसी रीणत से जांि करािे का अणिकार होर्गा ।  

 (4) कुलाध् यि, उपिारा (3) में णिर्दयष् र् प्रत् येक मामले में णिरीिि या जांि करािे के अपिे आशय की सूििा,—  

(क) णिश् िणिद्यालय को दरे्गा, यक्रद ऐसा णिरीिि या जांि, णिश् िणिद्यालय या उसके द्वारा िलाए जािे िाले 

महाणिद्यालय या संस्था के संबंि में है; या  

(ख) महाणिद्यालय या संस्था के प्रबंितंत्र को दरे्गा, यक्रद णिरीिि या जांि णिश् िणिद्यालय के णिशेषाणिकार प्राप् त 

महाणिद्यालय या संस्था के संबंि में ह,ै 

और, यथाणस्थणत, णिश् िणिद्यालय या प्रबंितंत्र को, कुलाध्यि को ऐसे अभ्यािेदि करिे का अणिकार होर्गा जो िह आिश्यक समझे ।   

 (5) कुलाध् यि, यथाणस्थणत, णिश् िणिद्यालय या प्रबंितंत्र द्वारा क्रकए र्गए अभ् यािेदिों पर, यक्रद कोई हों, णििार के पश् िात्, 

ऐसा णिरीिि या जांि करा सकेर्गा, जो उपिारा (3) में णिर्दयष् र् ह ै।  

 (6) जहां कुलाध् यि द्वारा कोई णिरीिि या जांि कराई जाती ह ैिहां, यथाणस्थणत, णिश् िणिद्यालय या प्रबंितंत्र एक प्रणतणिणि 

णियु‍ त करिे का हकदार होर्गा णजसे ऐसे णिरीिि या जांि में उपणस् थत होिे और सुिे जािे का अणिकार होर्गा ।  

 (7) यक्रद णिरीिि या जांि, णिश् िणिद्यालय या उसके द्वारा िलाए जािे िाले क्रकसी महाणिद्यालय या संस् था के संबंि में 

कराई जाती है तो कुलाध्यि ऐसे णिरीिि या जांि के पररिाम के संदभय में कुलपणत को संबोणित कर सकेर्गा और उस पर कारयिाई 



 5 

करिे के संबंि में ऐसे णििार और ऐसी सलाह द ेसकेर्गा जो कुलाध् यि दिेा िाह,े और कुलाध् यि से संबोिि की प्राणप् त पर कुलपणत कायय 

पररषद ्को कुलाध् यि के णििार तथा ऐसी सलाह के साथ संसूणित करेर्गा जो कुलाध् यि उस पर की जािे िाली कारयिाई के संबंि में द े।   

 (8) यक्रद णिरीिि या जांि, णिश् िणिद्यालय के णिशेषाणिकार प्राप् त क्रकसी महाणिद्यालय या संस्था के सबंंि में कराई जाती है 

तो कुलाध्यि, ऐसे णिरीिि या जांि के पररिाम, उस पर अपिे णििार और ऐसी सलाह जो िह उस पर की जािे िाली कारयिाई के 

संबंि में दिेा िाह,े के संदभय में कुलपणत के माध्यम से संबंणित प्रबंितंत्र को संबोणित कर सकेर्गा । 

 (9) यथाणस्थणत, कायय पररषद ्या प्रबंितंत्र, कुलपणत के माध् यम से कुलाध् यि को िह कारयिाई, यक्रद कोई हो, संसूणित करेर्गा 

जो िह ऐसे णिरीिि या जांि के पररिामस् िरूप करिे की प्रस् थापिा करता ह ैया की र्गई ह ै।  

 (10) जहां कायय पररषद ्या प्रबंितंत्र, कुलाध् यि के समािािप्रद रूप में कोई कारयिाई उणित समय के भीतर िहीं करता है 

िहां कुलाध् यि कायय पररषद ्या प्रबंितंत्र द्वारा क्रदए र्गए स् पष् र्ीकरि या अभ् यािेदि पर णििार करिे के पश् िात् ऐसे णिदशे जारी कर 

सकेर्गा जो िह ठीक समझे और, यथाणस्थणत, कायय पररषद ्या प्रबंितंत्र ऐसे णिदशेों का पालि करेर्गा ।  

 (11) इस िारा के पूियर्गामी उपबंिों पर प्रणतकूल प्रभाि र्ाले णबिा, कुलाध् यि णिश् िणिद्यालय की क्रकसी ऐसी काययिाही को, 

जो इस अणिणियम, पररणियमों या अध् यादशेों के अिुरूप िहीं हैं, णलणखत आदशे द्वारा, णिष् प्रभाि कर सकेर्गा : 

परन् तु कोई ऐसा आदशे करिे से पहले, िह कुलसणिि से इस बात का कारि बतािे की अपेिा करेर्गा क्रक ऐसा आदशे ‍ यों ि 

क्रकया जाए और यक्रद उणित समय से भीतर कोई कारि बताया जाता ह ैतो िह उस पर णििार करेर्गा ।  

(12) कुलाध् यि को ऐसी अन् य शण‍ तयां होंर्गी, जो पररणियमों द्वारा णिणहत की जाएं ।  

10. मखु्य कुलाणिसणिि—मणिपुर राज्य का राज्यपाल णिश् िणिद्यालय का मुख्य कुलाणिसणिि होर्गा । 

11.णिश् िणिद्यालय के अणिकारी—णिश् िणिद्यालय के णिम् िणलणखत अणिकारी होंर्गे—  

 (1) कुलाणिपणत;  

 (2) कुलपणत;  

 (3) प्रणतकुलपणत;  

 (4) णिद्यापीठों के संकायाध् यि;  

 (5) कुलसणिि;  

 (6) णित्त अणिकारी;  

 (7) परीिा णियंत्रक;  

 (8) पुस् तकालयाध् यि; और  

 (9) ऐसे अन् य अणिकारी, जो पररणियमों द्वारा णिश् िणिद्यालय के अणिकारी घोणषत क्रकए जाएं ।  

12. कुलाणिपणत—(1) कुलाणिपणत की णियुण‍ त कुलाध् यि, द्वारा ऐसी रीणत से की जाएर्गी जो पररणियमों द्वारा णिणहत की 

जाए ।  

(2) कुलाणिपणत, अपिे पदाणभिाि से, णिश् िणिद्यालय का प्रिाि होर्गा और यक्रद िह उपणस् थत ह ैतो उपाणियां प्रदाि करिे के 

णलए आयोणजत णिश् िणिद्यालय के दीिांत समारोहों और सभा के अणििेशिों की अध् यिता करेर्गा ।  

13. कुलपणत—(1) कुलपणत की णियुण‍ त, कुलाध् यि द्वारा ऐसी रीणत से की जाएर्गी, जो पररणियमों द्वारा णिणहत की जाए ।  

(2) कुलपणत, णिश् िणिद्यालय का प्रिाि काययपालक और शैिणिक अणिकारी होर्गा और णिश् िणिद्यालय के काययकलाप पर 

सािारि पययिेिि और णियंत्रि रखेर्गा तथा णिश् िणिद्यालय के सभी प्राणिकाररयों के णिणिश् ियों को कायायणन् ित करेर्गा ।  

(3) यक्रद कुलपणत की यह राय ह ैक्रक क्रकसी मामले में तुरन् त कारयिाई करिा आिश् यक ह ैतो िह क्रकसी ऐसी शण‍ त का प्रयोर्ग 

कर सकेर्गा जो णिश् िणिद्यालय के क्रकसी प्राणिकारी को इस अणिणियम द्वारा या उसके अिीि प्रदत्त ह ैऔर अपिे द्वारा उस मामले में की 

कारयिाई की ररपोर्य उस प्राणिकारी को दरे्गा :  

परन् तु यक्रद संबंणित प्राणिकारी की यह राय ह ैक्रक ऐसी कारयिाई िहीं की जािी िाणहए थी तो िह कुलाध् यि को ऐसा मामला 

णिदणेशत कर सकेर्गा णजसका उस पर णिणिश् िय अंणतम होर्गा :  

परन् तु यह और क्रक णिश् िणिद्यालय की सेिा में के क्रकसी ऐसे व् यण‍ त को, जो इस उपिारा के अिीि कुलपणत द्वारा की र्गई 

कारयिाई से व् यणथत ह,ै यह अणिकार होर्गा क्रक णजस तारीख को ऐसी कारयिाई का णिणिश् िय उसे संसूणित क्रकया जाता ह,ै उससे तीि 

मास के भीतर उस कारयिाई के णिरुद्ध अपील, कायय पररषद ्को करे और तब कायय पररषद ्कुलपणत द्वारा की र्गई कारयिाई को पुष् र् कर 

सकेर्गी, उपांतररत कर सकेर्गी या उसे उलर् सकेर्गी ।  



 6 

(4) यक्रद कुलपणत की यह राय ह ैक्रक णिश् िणिद्यालय के क्रकसी प्राणिकारी का कोई णिणिश् िय इस अणिणियम, पररणियमों या 

अध् यादशेों के उपबंिों द्वारा प्रदत्त प्राणिकारी की शण‍ तयों के बाहर है या क्रकया र्गया णिणिश् िय णिश् िणिद्यालय के णहत में िहीं ह ैतो िह 

संबंणित प्राणिकारी से अपिे णिणिश् िय का, ऐसे णिणिश् िय के साठ क्रदि के भीतर पुिर्ियलोकि करिे के णलए कह सकेर्गा और यक्रद िह 

प्राणिकारी उस णिणिश् िय का पूियत: या भार्गत: पुिर्ियलोकि करिे से इंकार करता है या उसके द्वारा उ‍ त साठ क्रदि की अिणि के भीतर 

कोई णिणिश् िय िहीं क्रकया जाता ह ैतो िह  मामला कुलाध् यि को णिर्दयष् र् क्रकया जाएर्गा, णजसका उस पर णिणिश् िय अंणतम होर्गा ।  

(5) कुलपणत ऐसी अन् य शण‍ तयों का प्रयोर्ग और ऐसे अन् य कतयव् यों का पालि करेर्गा जो पररणियमों या अध् यादशेों द्वारा 

णिणहत क्रकए जाएं ।  

14. प्रणतकुलपणत—प्रणतकुलपणत की णियुण‍ त ऐसी रीणत से और सेिा के ऐसे णिबंििों और शतों पर की जाएर्गी और िह ऐसी 

शण‍ तयों का प्रयोर्ग तथा ऐसे कतयव् यों का पालि करेर्गा जो पररणियमों द्वारा णिणहत क्रकए जाएं ।  

15. णिद्यापीठों के सकंायाध् यि—प्रत् येक णिद्यालय के संकायाध् यि की णियुण‍ त ऐसी रीणत से की जाएर्गी और िह ऐसी 

शण‍ तयों का प्रयोर्ग तथा ऐसे कतयव् यों का पालि करेर्गा जो पररणियमों द्वारा णिणहत क्रकए जाएं ।  

16. कुलसणिि—(1) कुलसणिि की णियुण‍ त ऐसी रीणत स े और सेिा के ऐसे णिबंििों और शतों पर की जाएर्गी जो 

पररणियमों द्वारा णिणहत की जाएं ।  

(2) कुलसणिि को णिश् िणिद्यालय की ओर से करार करिे, दस् तािेजों पर हस् तािर करिे और अणभलेखों को अणिप्रमाणित 

करिे की शण‍ त होर्गी और िह ऐसी शण‍ तयों का प्रयोर्ग तथा ऐसे कतयव् यों का पालि करेर्गा, जो पररणियमों द्वारा णिणहत क्रकए जाएं ।  

17. णित्त अणिकारी—णित्त अणिकारी की णियुण‍ त ऐसी रीणत से की जाएर्गी और िह ऐसी शण‍ तयों का प्रयोर्ग तथा ऐसे 

कतयव् यों का पालि करेर्गा, जो पररणियमों द्वारा णिणहत क्रकए जाएं ।  

18. परीिा णियतं्रक—परीिा णियतं्रक ऐसी रीणत से णियु‍ त क्रकया जाएर्गा और ऐसी शण‍ तयों का प्रयोर्ग तथा ऐसे कृत् यों का 

णिियहि करेर्गा, जो पररणियमों द्वारा णिणहत क्रकए जाएं ।  

19. पुस् तकालयाध् यि—पुस् तकालयाध् यि की णियुण‍ त ऐसी रीणत और सेिा के ऐसे णिबंििों और शतों पर की जाएर्गी और िह 

ऐसी शण‍ तयों का प्रयोर्ग तथा ऐसे कतयव् यों का पालि करेर्गा जो पररणियमों द्वारा णिणहत क्रकए जाएं ।  

20. अन् य अणिकारी—णिश् िणिद्यालय के अन् य अणिकाररयों की णियुण‍ त की रीणत और उिकी शण‍ तयां तथा कतयव् य 

पररणियमों द्वारा णिणहत क्रकए जाएंर्गे ।  

21. णिश् िणिद्यालय के प्राणिकारी—णिश् िणिद्यालय के णिम् िणलणखत प्राणिकारी होंर्गे—  

 (1) सभा;  

 (2) कायय पररषद;्  

 (3) णिद्या पररषद;्  

 (4) महाणिद्यालय णिकास पररषद;् 

 (5) अध् ययि बोर्य;  

 (6) णित्त सणमणत; और  

 (7) ऐसे अन् य प्राणिकारी, जो पररणियमों द्वारा णिश् िणिद्यालय के प्राणिकारी घोणषत क्रकए जाएं ।  

22. सभा—(1) सभा का र्गठि तथा उसके सदस् यों की पदािणि पररणियमों द्वारा णिणहत की जाएर्गी ।  

 (2) इस अणिणियम के उपबंिों के अिीि रहते हुए, सभा की णिम् िणलणखत शण‍ तयां और कृत् य होंर्गे, अथायत् :—  

(क) णिश् िणिद्यालय की व् यापक िीणतयों और काययक्रमों का, समय-समय पर पुिर्ियलोकि करिा तथा 

णिश् िणिद्यालय के सुिार और णिकास के णलए उपाय सुझािा;  

(ख) णिश् िणिद्यालय की िार्षयक ररपोर्य और िार्षयक लेखाओं पर तथा ऐसे लेखाओं की लेखापरीिा ररपोर्य पर 

णििार करिा और संकल् प पाररत करिा;  

(र्ग) कुलाध् यि को क्रकसी ऐसे मामले की बाबत सलाह दिेा, जो उसे सलाह के णलए णिदणेशत क्रकया जाए; और  

(घ) ऐसे अन् य कृत् यों का पालि करिा, जो पररणियमों द्वारा णिणहत क्रकए जाएं ।  

 23. कायय पररषद—्(1) कायय पररषद ्णिश् िणिद्यालय की प्रिाि काययपालक णिकाय होर्गी ।  

 (2) कायय पररषद ्का र्गठि, उसके सदस् यों की पदािणि तथा उसकी शण‍ तयां और कृत् य पररणियमों द्वारा णिणहत क्रकए जाएंर्गे ।  



 7 

24. णिद्या पररषद—्(1) णिद्या पररषद,् णिश् िणिद्यालय की प्रिाि शैिणिक णिकाय होर्गी और इस अणिणियम, पररणियमों 

और अध् यादशेों के अिीि रहते हुए, णिश् िणिद्यालय की शैिणिक िीणतयों का समन् िय करेर्गी और उि पर सािारि पययिेिि रखेर्गी ।  

(2) णिद्या पररषद ् का र्गठि, उसके सदस् यों की पदािणि तथा उसकी शण‍ तयां और कृत् य पररणियमों द्वारा णिणहत क्रकए   

जाएंर्ग े।  

 25. महाणिद्यालय णिकास पररषद—्(1) महाणिद्यालय णिकास पररषद ्महाणिद्यालय को णिश् िणिद्यालय के णिशेषाणिकार 

दिेे के णलए उत्तरदायी होर्गी । 

 (2) महाणिद्यालय णिकास पररषद ्का र्गठि, उसके सदस्यों की पदािणि तथा उसकी शण‍ तयां और कृत्य पररणियमों द्वारा 

णिणहत क्रकए जाएंर्गे । 

26. अध् ययि बोर्य—अध् ययि बोर्ों का र्गठि, उिकी शण‍ तयां और कृत् य पररणियमों द्वारा णिणहए क्रकए जाएंर्गे ।  

 27. णित्त सणमणत—णित्त सणमणत का र्गठि, उसकी शण‍ तयां और कृत् य पररणियमों द्वारा णिणहत क्रकए जाएंर्गे ।  

 28. णिश् िणिद्यालय के अन् य प्राणिकारी—ऐस ेअन् य प्राणिकाररयों का जो पररणियमों द्वारा णिश् िणिद्यालय के प्राणिकाररयों के 

रूप में घोणषत क्रकए जाएं, र्गठि, उिकी शण‍ तयां और कृत् य, पररणियमों द्वारा णिणहत क्रकए जाएंर्गे ।  

 29. पररणियम बिाि ेकी शण‍ त—इस अणिणियम के उपबंिों के अिीि रहते हुए, पररणियमों में णिम् िणलणखत सभी या क्रकन् हीं 

णिषयों के णलए उपबंि क्रकया जा सकेर्गा, अथायत् :—  

(क) णिश् िणिद्यालय के प्राणिकारी और अन् य णिकायों का, जो समय-समय पर र्गरठत क्रकए जाएं, र्गठि, उिकी 

शण‍ तयां और कृत् य;  

(ख) उ‍ त प्राणिकाररयों और णिकायों के सदस् यों की णियुण‍ त और उिका पदों पर बिे रहिा, सदस् यों के पदों की 

ररण‍ तयों का भरा जािा तथा उि प्राणिकाररयों और अन् य णिकायों से संबंणित अन् य सभी णिषय णजिके णलए उपबंि करिा 

आिश् यक या िांछिीय हो;  

(र्ग) णिश् िणिद्यालय के अणिकाररयों की णियुण‍ त, उिकी शण‍ तयां और कतयव् य तथा उिकी उपलणब् ियां;  

(घ) णिश् िणिद्यालय के णशिकों, शैिणिक कमयिाररिृंद तथा अन् य कमयिाररयों की णियुण‍ त और उिकी उपलणब् ियां 

तथा सेिा शतें;  

(ङ) णिश् िणिद्यालय के मान्यताप्राप् त णशिकों के रूप में व्यण‍ तयों की मान्यता; 

(ि) क्रकसी संयु‍ त पररयोजिा को कायायणन् ित करिे के णलए क्रकसी अन् य णिश् िणिद्यालय या संर्गठि में काम करिे 

िाले णशिकों, शैिणिक कमयिाररिृंद की णिणिर्दयष् र् अिणि के णलए णियुण‍ त;  

(छ) कमयिाररयों की, सेिा की शतें णजसके अंतर्गयत पेंशि, बीमा, भणिष् य-णिणि, सेिा समाणप् त की रीणत और 

अिुशासणिक कारयिाई भी ह;ै  

(ज) णिश् िणिद्यालय के कमयिाररयों की सेिा में ज् येष् ठता को शाणसत करिे िाले णसद्धांत;  

(झ) कमयिाररयों या छात्रों और णिश् िणिद्यालय के बीि णििाद के मामलों में माध् यस् थम् की प्रक्रक्रया;  

(ञ) णिश् िणिद्यालय के क्रकसी अणिकारी या प्राणिकारी की कारयिाई के णिरुद्ध क्रकसी कमयिारी या छात्र द्वारा कायय 

पररषद ्को अपील करिे की प्रक्रक्रया;  

(र्) क्रकसी महाणिद्यालय या क्रकसी संस् था या क्रकसी णिभार्ग को स् िायत्त प्राणस् थणत प्रदाि करिा;  

(ठ) णिद्यापीठों, णिभार्गों, केन् रों, छात्र-णििासों, महाणिद्यालयों और संस् थाओं की स् थापिा और समाणि;  

(र्) मािद उपाणियों का प्रदाि क्रकया जािा;  

(ढ) उपाणियों, णर्प् लोमाओं, प्रमािपत्रों और अन् य णिद्या संबंिी णिणशष् र्ताओं का िापस णलया जािा;  

(ि) िे शतें णजिके अिीि महाणिद्यालयों और संस्थाओं को णिश् िणिद्यालय के णिशेषाणिकार क्रदए जा सकें र्गे और 

ऐसे णिशेषाणिकारों का िापस णलया जािा;  

(त) णिश् िणिद्यालय द्वारा स्थाणपत महाणिद्यालयों और संस्थाओं का प्रबंि;  

(थ) णिश् िणिद्यालय के प्राणिकाररयों या अणिकाररयों में णिणहत शण‍ तयों का प्रत्यायोजि; 

(द) कमयिाररयों और छात्रों में अिुशासि बिाए रखिा;  

(ि) ऐसे सभी अन् य णिषय, जो इस अणिणियम के अिुसार पररणियमों द्वारा उपबंणित क्रकए जािे हैं या क्रकए जाएं ।  



 8 

 30. पररणियम कैं स ेबिाए जाएंर्ग—े(1) प्रथम पररणियम िे हैं जो अिुसूिी में उपिर्ियत हैं ।  

 (2) कायय पररषद,् समय-समय पर, िए या अणतरर‍ त पररणियम बिा सकेर्गी या उपिारा (1) में णिर्दयष् र् पररणियमों का 

संशोिि या णिरसि कर सकेर्गी :  

 परन् तु कायय पररषद,् णिश् िणिद्यालय के क्रकसी प्राणिकारी की प्राणस् थणत, शण‍ तयों का र्गठि पर प्रभाि र्ालिे िाले कोई 

पररणियम तब तक िहीं बिाएर्गी, उिका संशोिि िहीं करेर्गी या उिका णिरसि िहीं करेर्गी, जब तक उस प्राणिकारी को प्रस् थाणपत 

पररितयिों पर अपिी राय णलणखत रूप में अणभव् य‍ त करिे का अिसर िहीं द ेक्रदया र्गया ह ैऔर इस प्रकार अणभव् य‍ त क्रकसी राय पर 

कायय पररषद ्द्वारा णििार क्रकया जाएर्गा ।  

 (3) प्रत् येक िए पररणियम या क्रकसी पणिणियम में पररिियि या उसके क्रकसी संशोिि या णिरसि के णलए कुलाध् यि की 

अिुमणत अपेणित होर्गी, जो उस पर अिुमणत द ेसकेर्गा या अिमुणत णििाररत कर सकेर्गा या उसे कायय पररषद ्को पुिर्ियिार के णलए 

िापस भेज सकेर्गा ।  

 (4) क्रकसी िए पररणियम या णिद्यमाि पररणियम का संशोिि या णिरसि करिे िाला कोई पररणियम तब तक णिणिमान् य 

िहीं होर्गा जब तक कुलाध् यि द्वारा उसकी अिुमणत ि द ेदी र्गई हो ।  

 (5) पूियर्गामी उपिाराओं में क्रकसी बात के होते हुए भी, कुलाध् यि इस अणिणियम के प्रारंभ से ठीक पश् िात्िती तीि िषय की 

अिणि के दौराि िए या अणतरर‍ त पररणियम बिा सकेर्गा या उपिारा (1) में णिर्दयष् र् पररणियमों का संशोिि या णिरसि कर सकेर्गा :  

 परन् तु कुलाध् यि, तीि िषय की उ‍ त अिणि की समाणप् त पर, ऐसी समाणप् त की तारीख से एक िषय के भीतर ऐसे णिस् तृत 

पररणियम, जो िह आिश् यक समझे, बिा सकेर्गा और ऐसे णिस् तृत पररणियम संसद ्के दोिों सदिों के समि रखे जाएंर्गे ।  

 (6) पूियर्गामी उपिाराओं में क्रकसी बात के होते हुए भी, कुलाध् यि अपिे द्वारा णिणिर्दयष् र् क्रकसी णिषय के संबंि में पररणियमों 

में उपबंि करिे के णलए णिश् िणिद्यालय को णिदशे दे सकेर्गा और यक्रद कायय पररषद ्क्रकसी ऐसे णिदशे को उसकी प्राणप् त के साठ क्रदि के 

भीतर कायायणन् ित करिे में असमथय रहती ह ैतो कुलाध् यि कायय पररषद ्द्वारा ऐसे णिदशे का अिुपालि करिे में उसकी असमथयता के णलए 

संसूणित कारिों पर, यक्रद कोई हों, णििार करिे के पश् िात्, यथोणित रूप से पररणियमों को बिा सकेर्गा या उन् हें संशोणित कर सकेर्गा ।  

 31. अध् यादशे बिाि े की शण‍ त—(1) इस अणिणियम और पररणियमों के उपबंिों के अिीि रहते हुए, अध् यादशेों में 

णिम् िणलणखत सभी या क्रकन् हीं णिषयों के णलए उपबंि क्रकया जा सकेर्गा, अथायत् :—  

(क) णिश् िणिद्यालय में छात्रों का प्रिेश और उस रूप में उिका िाम दजय क्रकया जािा;  

(ख) णिश् िणिद्यालय की सभी उपाणियों, णर्प् लोमाओं और प्रमािपत्रों के णलए अणिकणथत क्रकए जािे िाले 

पाठ्यक्रम;  

  (र्ग) णशिि और परीिा का माध् यम; 

(घ) उपाणियों, णर्प् लोमाओं, प्रमािपत्रों और अन् य णिद्या संबंिी णिशेष उपाणियों का प्रदाि क्रकया जािा, उिके 

णलए अहयताएं, और उन् हें प्रदाि करिे और प्राप् त करिे के बारे में क्रकए जािे िाले उपाय; 

(ङ) णिश् िणिद्यालय के पाठ्यक्रमों के णलए और णिश् िणिद्यालय की परीिाओं, उपाणियों और णर्प् लोमाओं में प्रिेश 

के णलए ली जािे िाली फीस; 

(ि) अध् येतािृणत्तयां, छात्रिृणत्तयां, अध् ययििृणत्तयां, पदक और पुरस् कार प्रदाि क्रकए जािे की शतें; 

(छ) परीिाओं का संिालि, णजसके अंतर्गयत परीिा णिकायों, परीिकों और अिुसीमकों की पदािणि और णियुण‍ त 

की रीणत और उिके कतयव् य हैं; 

(ज) णिश् िणिद्यालय के छात्रों के णििास की शतें; 

(झ) छात्राओं के णििास, अिुशासि और अध् यापि के णलए क्रकए जािे िाले णिशेष प्रबंि, यक्रद कोई हों, और उिके 

णलए णिशेष पाठ्यक्रम णिणहत करिा; 

(ञ) अध् ययि केन् रों, अध् ययि बोर्ों, णिशेणषत प्रयोर्गशालाओं और अन् य सणमणतयों की स् थापिा; 

(र्) अन् य णिश् िणिद्यालयों, संस् थाओं और अन् य अणभकरिों के साथ, णजिके अंतर्गयत णिद्वत् णिकाय या संर्गम भी हैं, 

सहकार और सहयोर्ग करिे की रीणत; 

(ठ) क्रकसी अन् य ऐसे णिकाय का, जो णिश् िणिद्यालय के शैिणिक जीिि में सुिार के णलए आिश् यक समझा जाए, 

सृजि, संरििा और उिके कृत् य; 

(र्) अध् येतािृणत्त, अध् ययििृणत्त, पदकों और पुरस् कारों का संस् थापि; 

(ढ) णिश् िणिद्यालय के णिशेषाणिकार प्राप् त महाणिद्यालयों और संस्थाओं का पययिेिि और प्रबंि; 



 9 

(ि) कमयिाररयों की णशकायतों को दरू करिे के णलए क्रकसी तंत्र की स् थापिा; और 

(त) ऐसे सभी अन् य णिषय, जो इस अणिणियम या पररणियमों के अिुसार अध् यादशेों द्वारा उपबंणित क्रकए जाएं या 

क्रकए जािे हैं ।  

 (2) प्रथम अध् यादशे, केन्रीय सरकार के पूिय अिुमोदि से, कुलपणत द्वारा बिाए जाएंर्गे, और इस प्रकार बिाए र्गए अध् यादशे, 

पररणियमों द्वारा णिणहत रीणत से कायय पररषद ्द्वारा क्रकसी भी समय संशोणित, णिरणसत या पररिर्ियत क्रकए जा सकें र्गे । 

   परन् तु उस समय तक जब तक क्रक उि मामलों के संबंि में जो इस अणिणियम और पररणियमों के अिीि अध् यादशेों द्वारा 

उपबंणित क्रकए जािे हैं, कुलपणत द्वारा इस प्रकार प्रथम अध् यादशे िहीं बिाए जािे हैं, इस अणिणियम के प्रारंभ से ठीक पहले प्रिृत्त 

पररणियमों के और मणिपुर णिश् िणिद्यालय के अध् यादशेों से सुसंर्गत उपबंि, िहां तक लार्गू होंर्गे, जहां तक िे इस अणिणियम और 

पररणियमों के उपबंिों से अंसर्गत िहीं हैं । 

 32. णिणियम—णिश् िणिद्यालय के प्राणिकाररयों, स् ियं अपिे और अपिे द्वारा णियु‍ त सणमणतयों के, यक्रद कोई हों, कायय 

संिालि के णलए, णजसका इस अणिणियम, पररणियमों या अध् यादशेों द्वारा उपबंि िहीं क्रकया र्गया ह,ै पररणियमों द्वारा णिणहत रीणत स े

ऐसे णिणियम बिा सकें र्गे, जो इस अणिणियम, पररणियमों और अध् यादशेों से संर्गत हैं । 

33. िार्षयक ररपोर्य—(1) णिश् िणिद्यालय की िार्षयक ररपोर्य, कायय पररषद ्के णिदशेों के अिीि तैयार की जाएर्गी णजसमें, अन् य 

णिषयों के साथ, णिश् िणिद्यालय द्वारा अपिे उद्देश् यों की पूर्तय के णलए क्रकए र्गए उपाय होंर्गे और िह सभा को उस तारीख को या उसके 

पश् िात् भेजी जाएर्गी, जो पररणियमों द्वारा णिणहत की जाए और सभा अपिे िार्षयक अणििेशि में उस ररपोर्य पर णििार करेर्गी ।  

(2) सभा, अपिी र्ीका-रर्प् पिी सणहत, यक्रद कोई हो, िार्षयक ररपोर्य कुलाध् यि को भेजेर्गी । 

(3) उपिारा (1) के अिीि तैयार की र्गई िार्षयक ररपोर्य की एक प्रणत, केन् रीय सरकार को भी प्रस् तुत की जाएर्गी, जो उसे 

यथाशीघ्र संसद ्के दोिों सदिों के समि रखिाएर्गी ।  

34. िार्षयक लखेे—(1) णिश् िणिद्यालय के िार्षयक लेखे और तुलि-पत्र, कायय पररषद ्के णिदशेों के अिीि तैयार क्रकए जाएंर्गे 

और भारत के णियंत्रक-महालेखापरीिक द्वारा या ऐसे व् यण‍ तयों द्वारा, णजन् हें िह इस णिणमत्त प्राणिकृत करे, प्रत् येक िषय कम से कम एक 

बार और पन् रह मास से अिणिक के अंतरालों पर उिकी लेखापरीिा की जाएर्गी ।  

(2) िार्षयक लेखाओं की एक प्रणत, उस पर लेखापरीिा की ररपोर्य और कायय पररषद ्के संप्रेििों के साथ, सभा और कुलाध् यि 

को, प्रस् तुत की जाएर्गी ।  

(3) िार्षयक लेखाओं पर कुलाध् यि द्वारा क्रकए र्गए संप्रेिि सभा के ध्याि में लाए जाएंर्गे और सभा के संप्रेिि, यक्रद कोई हों, 

कायय पररषद ्द्वारा णििार क्रकए जािे के पश् िात् कुलाध् यि को प्रस् तुत क्रकए जाएंर्गे ।  

(4) िार्षयक लेखाओं की एक प्रणत, कुलाध् यि को यथा प्रस् तुत की र्गई संपरीिा ररपोर्य के साथ केन् रीय सरकार को भी प्रस् तुत 

की जाएर्गी, जो उसे यथाशीघ्र संसद ्के दोिों सदिों के समि रखिाएर्गी ।  

(5) संपरीणित िार्षयक लेखे संसद ्के दोिों सदिों के समि रखे जािे के पश् िात् भारत के राजपत्र में प्रकाणशत क्रकए जाएंर्गे ।  

35. णििरणिया ं और जािकारी—णिश् िणिद्यालय, केन् रीय सरकार को, अपिी संपणत्त या क्रक्रयाकलापों की बाबत ऐसी 

णििरणियां या अन् य जािकारी दरे्गा, जो केन् रीय सरकार, समय-समय पर अपेिा करे ।  

36. कमयिाररयों की सिेा की शतें—(1) णिश् िणिद्यालय का प्रत् येक कमयिारी, णलणखत संणिदा के अिीि णियु‍ त क्रकया जाएर्गा, 

जो णिश् िणिद्यालय के पास रखी जाएर्गी और उसकी एक प्रणत संबंणित कमयिारी को दी जाएर्गी ।  

(2) णिश् िणिद्यालय और क्रकसी कमयिारी के बीि संणिदा से उत् पन् ि होिे िाला कोई णििाद, कमयिारी के अिुरोि पर, 

माध् यस् थम् अणिकरि को णिर्दयष् र् क्रकया जाएर्गा, णजसमें कायय पररषद ्द्वारा णियु‍ त एक सदस् य, संबंणित कमयिारी द्वारा िामणिर्दयष् र् 

एक सदस् य और कुलाध् यि द्वारा णियु‍ त एक अणिणििाययक होर्गा ।  

(3) अणिकरि का णिणिश् िय अंणतम होर्गा और अणिकरि द्वारा णिणिश् णाित मामलों के संबंि में क्रकसी णसणिल न् यायालय में 

कोई िाद िहीं होर्गा :   

 (4) उपिारा (2) के अिीि कमयिारी द्वारा क्रकया र्गया प्रत् येक ऐसा अिुरोि माध् यस् थम् और सुलह अणिणियम, 1996 (1996 

का 26) के अथय में इस िारा के णिबंििों पर माध् यस् थम् के णलए णििेदि समझा जाएर्गा ।   

 (5) अणिकरि के कायय को णिणियणमत करिे की प्रक्रक्रया पररणियमों द्वारा णिणहत की जाएर्गी ।  

 37. छात्रों के णिरुद्ध अिशुासणिक मामलों में अपील और माध् यस् थम ्की प्रक्रक्रया—(1) कोई छात्र या परीिाथी, णजसका िाम 

णिश् िणिद्यालय की िामािली से, यथाणस् थणत, कुलपणत, अिुशासि सणमणत या परीिा सणमणत के आदेशों या संकल् प द्वारा हर्ाया र्गया है 

और णजसे णिश् िणिद्यालय की परीिाओं में बैठिे से एक िषय से अणिक के णलए णििर्जयत क्रकया र्गया है, उसके द्वारा ऐसे आदशेों की या 



 10 

ऐसे संकल् प की प्रणत की प्राणप् त की तारीख से दस क्रदि के भीतर कायय पररषद ्को अपील कर सकेर्गा और कायय पररषद ्यथाणस् थणत, 

कुलपणत या सणमणत के णिणिश् िय को पुष् र् या उपांतररत कर सकेर्गी या उलर् सकेर्गी ।  

 (2) णिश् िणिद्यालय द्वारा क्रकसी छात्र के णिरुद्ध की र्गई अिुशासणिक कारयिाई से उत् पन् ि होिे िाला कोई णििाद, उस छात्र के 

अिुरोि पर, माध् यस् थम् अणिकरि को णिदणेशत क्रकया जाएर्गा और िारा 36 की उपिारा (2), उपिारा (3), उपिारा (4) और उपिारा 

(5) के उपबंि, इस उपिारा के अिीि क्रकए र्गए णिदशे को यथाश‍ य लार्गू होंर्गे ।  

 38. अपील करि ेका अणिकार—इस अणिणियम में अंतर्ियष् र् क्रकसी बात के होते हुए भी, णिश् िणिद्यालय या णिश् िणिद्यालय 

द्वारा िलाए जा रहे या उसके णिशेषाणिकार प्राप् त महाणिद्यालय या संस् था के प्रत् येक कमयिारी या छात्र को, यथाणस् थणत, णिश् िणिद्यालय 

के क्रकसी अणिकारी या प्राणिकारी अथिा क्रकसी महाणिद्यालय या संस् था के प्रािायय या प्रबंितंत्र के णिणिश् िय के णिरुद्ध ऐसे समय के 

भीतर, जो पररणियमों द्वारा णिणहत क्रकया जाए, कायय पररषद ्को अपील करिे का अणिकार होर्गा और तब कायय पररषद, उस णिणिश् िय 

को, णजसके णिरुद्ध अपील की र्गई ह,ै पुष् र् या उपांतररत कर सकेर्गी या उलर् सकेर्गी ।  

 39. भणिष् य-णिणि और पेंशि णिणि—(1) णिश् िणिद्यालय अपिे कमयिाररयों के फायद ेके णलए, ऐसी रीणत से और ऐसी शतों के 

अिीि रहते हुए, जो पररणियमों द्वारा णिणहत की जाएं, ऐसी भणिष् य-णिणि या पेंशि णिणि का र्गठि करेर्गा या ऐसी बीमा स् कीमों की 

व् यिस् था करेर्गा जो िह ठीक समझे ।  

 (2) जहां ऐसी भणिष् य णिणि या पेंशि णिणि का इस प्रकार र्गठि क्रकया र्गया है िहां केन् रीय सरकार यह घोणषत कर सकेर्गी क्रक 

भणिष् य णिणि अणिणियम, 1925 (1925 का 19) के उपबंि ऐसी णिणि को इस प्रकार लार्गू होंर्गे मािो िह सरकारी भणिष् य णिणि हो ।  

 40. प्राणिकाररयों और णिकायों के र्गठि के बारे में णििाद—यक्रद यह प्रश् ि उठता है क्रक ‍ या कोई व् यण‍ त णिश् िणिद्यालय के 

क्रकसी प्राणिकारी या अन् य णिकाय के सदस् य के रूप में सम् यक् रूप से णििायणित या णियु‍ त क्रकया र्गया ह ैया उसका सदस् य होिे का 

हकदार ह ैतो िह मामला कुलाध् यि को णिदणेशत क्रकया जाएर्गा, णजसका उस पर णिणिश् िय अंणतम होर्गा ।  

 41. आकणस् मक ररण‍ तयों का भरा जािा—णिश् िणिद्यालय के क्रकसी प्राणिकारी या अन् य णिकाय के सदस् यों में (पदिे सदस् यों स े

णभन् ि) सभी आकणस् मक ररण‍ तयां, यथाशीघ्र, ऐसे व् यण‍ त या णिकाय द्वारा भरी जाएंर्गी, णजसिे उस सदस् य को, णजसका स् थाि रर‍ त 

हुआ ह,ै णियु‍ त, णििायणित या सहयोणजत क्रकया था और आकणस् मक ररण‍ त में णियु‍ त, णििायणित या सहयोणजत व् यण‍ त, ऐसे प्राणिकारी 

या णिकाय का सदस् य उस शेष अिणि के णलए होर्गा, णजस तक िह व् यण‍ त, णजसका स् थाि िह भरता ह,ै सदस् य रहता ।  

 42. प्राणिकाररयों या णिकायों की काययिाणहयों का ररण‍ तयों के कारि अणिणिमान्य ि होिा—णिश् िणिद्यालय के क्रकसी 

प्राणिकारी या अन् य णिकाय का कोई कायय या काययिाही केिल इस कारि अणिणिमान्य िहीं होर्गी क्रक उसके सदस्यों में कोई ररण‍ त या 

ररण‍ तयां हैं ।  

 43. सद्भािपिूयक की र्गई कारयिाई के णलए सरंिि—इस अणिणियम या पररणियमों या अणिणियमों के उपबंिों में से क्रकसी 

उपबंि के अिुसरि में सद्भािपूियक की र्गई या की जािे के णलए आशणयत क्रकसी बात के णलए कोई िाद या अन् य णिणिक काययिाणहयां 

णिश् िणिद्यालय के क्रकसी अणिकारी या अन् य कमयिारी के णिरुद्ध िहीं होंर्गी ।  

 44. णिश् िणिद्यालय के अणभलखेों को साणबत करि ेका ढंर्ग—भारतीय साक्ष् य अणिणियम, 1872 (1872 का 1) या तत् समय 

प्रिृत्त क्रकसी अन् य णिणि में क्रकसी बात के होते हुए भी, णिश् िणिद्यालय के क्रकसी प्राणिकरि या अन् य णिकाय की क्रकसी रसीद, आिेदि, 

सूििा, आदशे, काययिाही, संकल् प या अन् य दस् तािेज की, जो णिश् िणिद्यालय के कब् जे में ह,ै या णिश् िणिद्यालय द्वारा सम् यक् रूप से रखे 

र्गए क्रकसी रणजस् र्र की क्रकसी प्रणिणष् र् की प्रणतणलणप, कुलसणिि द्वारा सत्याणपत कर दीए जािे पर, उस दशा में, णजसमें उसकी मूल प्रणत 

पेश की जािे पर साक्ष् य में ग्राह्य होती, उस रसीद, आिेदि, सूििा, आदशे, काययिाही, संकल् प या दस् तािेज के या रणजस् र्र की प्रणिणष् र् 

के अणस् तत् ि के प्रथमदषृ् या साक्ष् य के रूप में ली जाएर्गी और उससे संबंणित मामलों और संव् यिहारों के साक्ष् य के रूप में ग्रहि की  

जाएर्गी ।  

 45. करठिाइयों को दरू करि ेकी शण‍ त—(1) यक्रद इस अणिणियम के उपबंिों को प्रभािी करिे में कोई करठिाई उत् पन् ि होती 

ह ैतो केन् रीय सरकार, राजपत्र में प्रकाणशत आदशे द्वारा, ऐस ेउपबंि कर सकेर्गी जो इस अणिणियम के उपबंिों से असंर्गत ि हों, और जो 

उस करठिाई को दरू करिे के णलए उसे आिश् यक या समीिीि प्रतीत हों :  

 परंतु इस िारा के अिीि ऐसा कोई आदशे इस अणिणियम के प्रारंभ से तीि िषय के अिसाि के पश् िात् िहीं क्रकया जाएर्गा ।  

 (2) उपिारा (1) के अिीि क्रकया र्गया प्रत् येक आदशे क्रकए जािे के पश् िात् यथाशीघ्र संसद ्के प्रत् येक सदि के समि, जब िह 

सत्र में हो, कुल तीस क्रदि की अिणि के णलए रखा जाएर्गा । यह अिणि एक सत्र में अथिा दो या अणिक आिुक्रणमक सत्रों में पूरी हो 

सकेर्गी । यक्रद उस सत्र के या पूिो‍ त आिुक्रणमक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अिसाि के पूिय दोिों सदि उस आदशे में कोई पररितयि 

करिे के णलए सहमत हो जाएं तो तत् पश् िात् िह ऐसे पररिर्तयत रूप में ही प्रभािी होर्गा । यक्रद उ‍ त अिसाि के पूिय दोिों सदि सहमत 

हो जाएं क्रक िह आदशे िहीं क्रकया जािा िाणहए तो तत् पश् िात् िह णिष् प्रभाि हो जाएर्गा । ककंतु आदशे के ऐसे पररिर्तयत या णिष् प्रभाि 

होिे से उसके अिीि पहले की र्गई क्रकसी बात की णिणिमान् यता पर प्रणतकूल प्रभाि िहीं पडेर्गा ।  

 46. पररणियमों, अध् यादशेों और णिणियमों का राजपत्र में प्रकाणशत क्रकया जािा और ससंद ्के समि रखा जािा—(1) इस 

अणिणियम के अिीि बिाया र्गया प्रत् येक पररणियम, अध् यादशे या णिणियम राजपत्र में प्रकाणशत क्रकया जाएर्गा ।  



 11 

 (2) इस अणिणियम के अिीि बिाया र्गया प्रत् येक पररणियम, अध् यादशे या णिणियम, बिाए जाि ेके पश् िात् यथाशीघ्र, संसद ्

के प्रत् येक सदि के समि, जब िह सत्र में हो, कुल तीस क्रदि की अिणि के णलए रखा जाएर्गा । यह अिणि एक सत्र में अथिा दो या 

अणिक आिुक्रणमक सत्रों में पूरी हो सकेर्गी । यक्रद उस सत्र के या पूिो‍ त आिुक्रणमक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अिसाि के पूिय दोिों 

सदि उस पररणियम, अध् यादशे या णिणियम में कोई पररितयि करिे के णलए सहमत हो जाएं तो, तत् पश् िात् िह ऐसे पररिर्तयत रूप में 

ही प्रभािी होर्गा । यक्रद उ‍ त अिसाि के पूिय दोिों सदि सहमत हो जाएं क्रक िह पररणियम, अध् यादशे या णिणियम िहीं बिाया जािा 

िाणहए तो तत् पश् िात ्िह णिष् प्रभाि हो जाएर्गा । क्रकन्तु पररणियम, अध् यादशे या णिणियम के ऐस ेपररिर्तयत या णिष् प्रभाि होिे से उसके 

अिीि पहले की र्गई क्रकसी बात की णिणिमान् यता पर प्रणतकूल प्रभाि िहीं पडेर्गा ।  

 (3) पररणियम, अध् यादशे या णिणियम बिािे की शण‍ त के अंतर्गयत पररणियमों, अध् यादशेों या णिणियमों या उिमें से क्रकसी 

को, उस तारीख से, जो इस अणिणियम के प्रारंभ की तारीख से पूियतर ि हों, भूतलिी प्रभाि दिेे की शण‍ त भी होर्गी, क्रकन् तु क्रकसी 

पररणियम, अध् यादशे या णिणियम को भूतलिी प्रभाि इस प्रकार िहीं क्रदया जाएर्गा, णजससे क्रक क्रकसी ऐसे व् यण‍ त के, णजसको ऐसा 

पररणियम, अध् यादशे या णिणियम लार्गू हो, णहतों पर प्रणतकूल प्रभाि परे्े़ ।  

 47. संक्रमिकालीि उपबंि—इस अणिणियम और पररणियमों में क्रकसी बात के होते हुए भी, —  

(क) प्रथम कुलाणिपणत और प्रथम कुलपणत, कुलाध् यि द्वारा ऐसी रीणत में और ऐसी शतों पर, जो ठीक समझी जाएं, 

णियु‍ त क्रकए जाएंर्गे और उ‍ त प्रत् येक अणिकारी पांि िषय से अिणिक की ऐसी अिणि तक, जो कुलाध् यि द्वारा णिणिर्दयष् र् की 

जाए, पद िारि करेर्गा;   

(ख) प्रथम कुलसणिि और प्रथम णित्त अणिकारी, कुलाध् यि द्वारा णियु‍ त क्रकए जाएंर्गे और उ‍ त प्रत् येक अणिकारी 

तीि िषय की अिणि तक पद िारि करेर्गा;  

(र्ग) प्रथम सभा और प्रथम कायय पररषद ्में क्रमश: तीस और ग् यारह से अिणिक सदस् य होंर्गे, जो कुलाध्यि द्वारा 

िामणिर्दयष् र् क्रकए जाएंर्गे और तीि िषय की अिणि तक पद िारि करेंर्गे; 

(घ) प्रथम महाणिद्यालय णिकास पररषद ्में दस से अिणिक सदस् य होर्गें, जो कुलाध् यि द्वारा िामणिर्दयष् र् क्रकए 

जाएंर्गे और तीि िषय की अिणि तक, पद िारि करेंर्गे;  

(ङ) प्रथम णिद्या पररषद ्में इ‍ कीस से अिणिक सदस्य होंर्गे, जो कुलाध् यि द्वारा िामणिर्दयष् र् क्रकए जाएंर्गे और ि े

तीि िषय की अिणि तक पद िारि करेंर्गे : 

परन् तु यक्रद उपरो‍ त पदों या प्राणिकाररयों में कोई ररण‍ त होती ह ैतो िह कुलाध् यि द्वारा, यथाणस् थणत, णियुण‍ त या 

िामणिदशेि द्वारा भरी जाएर्गी और इस प्रकार णियु‍ त या िामणिर्दयष् र् व् यण‍ त तब तक पद िारि करेर्गा जब तक िह 

अणिकारी या सदस् य, णजसके स् थाि पर उसकी णियुण‍ त या िामणिदशेि क्रकया र्गया ह ैपद िारि करता यक्रद ऐसी ररण‍ त िहीं 

हुई होती ।  

 48. णिरसि और व् यािणृत—(1) मणिपुर णिश् िणिद्यालय अध् यादशे, (2005 का अध् यादशे 3) इसके द्वारा णिरणसत क्रकया जाता 

ह ै।  

 (2) ऐसे णिरसि के होते हुए भी, उ‍ त अध् यादशे के अिीि की र्गई कोई बात या कोई कारयिाई, इस अणिणियम के तत् स् थािी 

उपबंिों के अिीि की र्गई समझी जाएर्गी— 

(क) मणिपुर णिश् िणिद्यालय अध् यादशे, 2005 के अिीि की र्गई सभी णियुण‍ तयां, जारी क्रकए र्गए आदशे, उपाणिया ं

और प्रदत्त की र्गई अन् य णिद्या संबंिी णिशेष उपाणियां, प्रदत्त क्रकए र्गए णर्प् लोमा और प्रमािपत्र, स् िीकृत क्रकए र्गए 

णिशेषाणिकार या की र्गई अन् य बातें इस अणिणियम के तत् स् थािी उपबंिों के अिीि क्रमश: की र्गई, जारी क्रकए र्गए, प्रदत्त की 

र्गई, प्रदाि क्रकए र्गए, स् िीकृत क्रकए र्गए या की र्गई समझी जाएंर्गी और इस अणिणियम या पररणियम द्वारा यथा उपबंणित के 

णसिाय तब तक प्रिृत्त बिे रहेंर्गे, जब तक क्रक िे इस अणिणियम या पररणियमों के अिीि क्रकए र्गए क्रकसी आदशे द्वारा 

अणिक्रांत िहीं कर क्रदए जाते हैं; 

(ख) णशिकों की णियुण‍ त या प्रोन् िणत के णलए, ियि सणमणतयों की सभी काययिाणहयां जो, इस अणिणियम के प्रारंभ 

से पहले हो िुकी थीं और ऐसी ियि सणमणतयों की णसफाररशों के संबंि में, कायय पररषद ्की सभी कारयिाइयां, जहां इस 

अणिणियम के प्रारंभ से पहले, उिके आिार पर णियुण‍ त के कोई आदशे पाररत िहीं क्रकए र्गए थे, इस बात के होते हुए भी क्रक 

ियि के णलए प्रक्रक्रया का इस अणिणियम द्वारा उपांतरि क्रकया जा िुका ह,ै णिणिमान् य समझी जाएंर्गी ककंतु ऐसे लंणबत ियि 

के संबंि में, आर्गे की काययिाही इस अणिणियम के उपबंिों के अिुसार की जाएर्गी और उस प्रक्रम से जारी रहरे्गी जहां पर िे 

ऐसे प्रारंभ के ठीक पहले थीं, णसिाय तब के, यक्रद संबद्ध प्राणिकारी, कुलाध् यि के अिुमोदि से तत् प्रणतकूल णिणिश् िय लें ।  



 12 

अिुसूिी 

(िारा  30 दणेखए) 

णिश् िणिद्यालय के पररणियम  

 1. कुलाणिपणत—(1) कुलाणिपणत की णियुण‍ त, कुलाध् यि द्वारा दशे के शैिणिक या साियजणिक जीिि के णिख् यात व् यण‍ तयों 

में से कायय पररषद ्द्वारा णसफाररश क्रकए र्गए तीि से अन् यूि व् यण‍ तयों के पैिल में से कुलाध् यि द्वारा की जाएर्गी :  

 परन् तु यक्रद कुलाध् यि इस प्रकार णसफाररश क्रकए र्गए व् यण‍ तयों में से क्रकसी का अिुमोदि िहीं करता तो िह कायय पररषद ्से 

िई णसफाररशें मंर्गा सकेर्गा । 

 (2) कुलाणिपणत पांि िषय की अिणि के णलए, पद िारि करेर्गा और पुिर्िययुण‍ त के णलए पात्र िहीं होर्गा :  

 परन् तु अपिी पदािणि के अिसाि पर भी कुलाणिपणत तब तक पद पर बिा रहेर्गा, जब तक उसका उत्तरिती अपिा पद ग्रहि 

िहीं कर लेता ।  

 2. कुलपणत—(1) कुलपणत की णियुण‍ त, कुलाध् यि द्वारा खंर् (2) के अिीि र्गरठत सणमणत द्वारा णसफाररश क्रकए र्गए तीि से 

अन्यूि व्यण‍ तयों के पैिल में से की जाएर्गी :  

 परन् तु यक्रद कुलाध् यि पैिल में सणम् मणलत व् यण‍ तयों में से क्रकसी का अिुमोदि िहीं करता तो िह णिस् ताररत िया पिैल मंर्गा 

सकेर्गा ।  

 (2) खंर् (1) में णिर्दयष् र् सणमणत में तीि ऐसे व् यण‍ त होंर्गे, णजिमें से दो कायय पररषद ् द्वारा और एक कुलाध् यि द्वारा 

िामणिर्दयष् र् क्रकए जाएंर्गे तथा कुलाध् यि का िामणिदणेशती सणमणत का संयोजक होर्गा :  

 परन् तु सणमणत का कोई भी सदस् य, उस णिश् िणिद्यालय या उस णिश् िणिद्यालय द्वारा िलाई जािे िाली क्रकसी संस् था या ऐसी 

संस्था का णजसे उस णिश् िणिद्यालय के णिशेषाणिकार प्राप् त हों, का कमयिारी या उस णिश् िणिद्यालय के क्रकसी प्राणिकारी का सदस् य िहीं 

होर्गा ।  

 (3) कुलपणत णिश् िणिद्यालय का पूियकाणलक िैतणिक अणिकारी होर्गा ।  

 (4) कुलपणत अपिा पद ग्रहि करिे की तारीख से पांि िषय की अिणि तक या पैंसठ िषय की आयु प्राप् त करिे तक, जो भी 

पहले हो, पद िारि करेर्गा और िह पुिर्िययुण‍ त का पात्र िहीं होर्गा :  

 परन् तु उ‍ त पांि िषय की अिणि की समाणप् त पर भी िह अपिे पद पर तब तक बिा रहरे्गा जब तक उसका उत्तरिती णियु‍ त 

िहीं क्रकया जाता ह ैऔर िह अपिा पद ग्रहि िहीं कर लेता ह ै:  

 परन् तु यह और क्रक कुलाध् यि यह णिदशे दे सकेर्गा क्रक णजस कुलपणत की पदािणि समाप् त हो र्गई ह,ै िह कुल णमलाकर एक िषय 

से अिणिक की ऐसी अिणि तक, जो उसके द्वारा णिणिर्दयष् र् की जाए या जब तक उसका उत्तरिती णियु‍ त िहीं हो जाता और पदभार 

ग्रहि िहीं कर लेता, इिमें से जो भी पूियतर हो, पद पर बिा रहरे्गा ।  

 (5) कुलपणत की उपलणब्ियां और सेिा की अन् य शतें णिम् िणलणखत होंर्गी— 

 (i) कुलपणत को केन् रीय सरकार द्वारा समय-समय पर णियत दर से माणसक िेति और मकाि क्रकराया भते्त से णभन् ि 

क्रदए जाएंर्गे और िह अपिी पदािणि के दौराि क्रकरायामु‍ त सुसणज् जत णििास-स् थाि का हकदार होर्गा तथा ऐसे        

णििास-स् थाि के अिुरिि की बाबत कुलपणत को कोई प्रभार िहीं दिेा होर्गा;  

 (ii) कुलपणत ऐसे सेिांत फायदों और भत्तों का हकदार होर्गा, जो केन् रीय सरकार द्वारा समय-समय पर णियत क्रकए 

जाएं :  

 परन् तु जहां णिश् िणिद्यालय या उसके द्वारा िलाए जा रह े या णिश् िणिद्यालय के णिशेषाणिकार प्राप् त क्रकसी 

महाणिद्यालय या संस् था का अथिा क्रकसी अन्य णिश् िणिद्यालय या ऐसे अन्य णिश् िणिद्यालय द्वारा िलाए जा रह े या 

णिश् िणिद्यालय के णिशेषाणिकार प्राप् त क्रकसी संस्था का कमयिारी कुलपणत णियु‍ त क्रकया जाता है, िहां उसे ऐसी       

भणिष् य-णिणि में, णजसका िह सदस् य ह,ै अणभदाय करते रहिे के णलए अिुज्ञात क्रकया जा सकेर्गा और णिश् िणिद्यालय उस 

भणिष् य-णिणि में ऐसे व् यण‍ त के खाते में उसी दर से अणभदाय करेर्गा णजससे िह व् यण‍ त कुलपणत के रूप में अपिी णियुण‍ त के 

ठीक पहले अणभदाय कर रहा था :  

 परन् तु यह भी क्रक जहां ऐसा कमयिारी क्रकसी पेंशि स् कीम का सदस् य रहा था, िहां णिश् िणिद्यालय ऐसी स् कीम में 

आिश् यक अणभदाय करेर्गा; 

 (iii) कुलपणत ऐसी दरों से, जो कायय पररषद ्द्वारा णियत की जाएं, यात्रा भते्त के णलए हकदार होर्गा;  



 13 

 (iv) कुलपणत क्रकसी कलैंर्र िषय में तीस क्रदि की दर पर पूिय िेति पर छुट्टी का हकदार होर्गा और छुट्टी, पन् रह क्रदि 

की दो अियिार्षयक क्रकस् तों में प्रत् येक िषय जििरी तथा जुलाई के प्रथम क्रदि को अणग्रम रूप से उसके खाते में जमा कर दी 

जाएर्गी : 

 परन् तु यक्रद कुलपणत क्रकसी आिे िषय के िालू रहिे के दौराि कुलपणत का पदभार ग्रहि करता ह ैया छोडता ह ैतो  

अिुपातत: सेिा के प्रत् येक संपूररत मास के णलए अढाई क्रदि की दर से छुट्टी को जमा क्रकया जाएर्गा;  

 (v) कुलपणत, उपखंर् (iv) में णिर्दयष् र् छुट्टी के अणतरर‍ त, सेिा के प्रत् येक संपूररत िषय के णलए बीस क्रदि की दर से 

अिय-िेति छुट्टी का भी हकदार होर्गा और इस अिय-िेति छुट्टी का उपभोर्ग णिक्रकत् सीय प्रमािपत्र के आिार पर पूिय िेति पर 

पररिर्तयत छुट्टी के रूप में भी क्रकया जा सकेर्गा : 

 परन् तु जब ऐसी पररिर्तयत छुट्टी का उपभोर्ग क्रकया जाता ह ैतो अिय-िेति छुट्टी की दरु्गुिी मात्रा बाकी अिय-िेति 

छुट्टी से णिकणलत की जाएर्गी ।  

 (6) यक्रद कुलपणत का पद मृत् यु, पदत् यार्ग के कारि या अन् यथा रर‍ त हो जाता ह,ै अथिा यक्रद िह अस् िस् थता के कारि या 

क्रकसी अन् य कारि से अपिे कतयव् यों का पालि करिे में असमथय ह ैतो प्रणतकुलपणत, कुलपणत के कतयव् यों का पालि करेर्गा :  

 परन् तु यक्रद प्रणतकुलपणत उपलब् ि िहीं ह,ै तो ज् येष् ठतम आिायय कुलपणत के कतयव् यों का तब तक पालि करेर्गा जब तक, 

यथाणस् थणत, िया कुलपणत पद ग्रहि िहीं कर लेता या णिद्यमाि कुलपणत अपिे पद के कतयव् यों को क्रफर से संभाल िहीं लेता ।   

 3. कुलपणत की शण‍ तया ंऔर कतयव् य—(1) कुलपणत, कायय पररषद,् णिद्या पररषद ्और णित्त सणमणत का पदिे अध् यि होर्गा 

और कुलाणिपणत की अिुपणस् थणत में उपाणियां प्रदाि करिे के णलए आयोणजत दीिांत समारोहों और सभा के अणििेशिों की अध् यिता 

करेर्गा ।  

 (2) कुलपणत णिश् िणिद्यालय के क्रकसी प्राणिकारी या अन् य णिकाय के क्रकसी अणििेशि में उपणस् थत रहिे और उसे संबोणित 

करिे का हकदार होर्गा, क्रकन् तु िह उसमें मत दिेे का तब तक हकदार िहीं होर्गा, जब तक िह ऐसे प्राणिकारी या णिकाय का सदस् य   ि 

हो ।  

 (3) यह दखेिा कुलपणत का कतयव् य होर्गा क्रक इस अणिणियम, पररणियमों, अध् यादशेों और णिणियमों का सम् यक् रूप से पालि 

क्रकया जाता ह ैऔर उसे ऐसा पालि सुणिणश् ित करिे के णलए आिश् यक सभी शण‍ तयां प्राप् त होंर्गी ।  

 (4) कुलपणत को णिश् िणिद्यालय में समुणित अिुशासि बिाए रखिे के णलए आिश् यक सभी शण‍ तयां होंर्गी और िह क्रकन् हीं 

ऐसी शण‍ तयों का क्रकसी ऐसे व् यण‍ त या व् यण‍ तयों को, णजन् हें िह ठीक समझे, प्रत् यायोजि कर सकेर्गा ।  

 (5) कुलपणत को कायय पररषद,् णिद्या पररषद ्और णित्त सणमणत के अणििेशि बुलािे या बुलिािे की शण‍ त होर्गी ।   

 4. प्रणतकुलपणत—(1) प्रणतकुलपणत की णियुण‍ त, कायय पररषद ्द्वारा कुलपणत की णसफाररश पर की जाएर्गी : 

 परन् तु जहां कुलपणत की णसफाररश कायय पररषद ्द्वारा स् िीकार िहीं की जाती ह ैिहां उस मामले को कुलाध् यि को णिर्दयष् र् 

क्रकया जाएर्गा, जो कुलपणत द्वारा णसफाररश क्रकए र्गए व् यण‍ त को या तो णियु‍ त करेर्गा या कुलपणत से कायय पररषद ्के णलए क्रकसी अन् य 

व् यण‍ त की णसफाररश करिे के णलए कह सकेर्गा :                                                                

 परन् तु यह और क्रक कायय पररषद ्कुलपणत की णसफाररश पर, क्रकसी आिायय को आिायय के रूप में अपिे कतयव् यों के अणतरर‍ त 

प्रणतकुलपणत के कतयव् यों का णिियहि करिे के णलए णियु‍ त कर सकेर्गी ।  

 (2) प्रणतकुलपणत की पदािणि िह होर्गी, जो कायय पररषद ्णिणिणश् ित करे, क्रकन् तु क्रकसी भी दशा में िह पांि िषय से अणिक 

िहीं होर्गी या कुलपणत की पदािणि की समाणप् त तक होर्गी, इिमें से जो भी पहले हो :  

 परन् तु ऐसा प्रणतकुलपणत, णजसकी पदािणि समाप् त हो र्गई ह,ै पुिर्िययु‍ णात का पात्र होर्गा :  

 परन् तु यह और क्रक प्रणतकुलपणत क्रकसी भी दशा में पैंसठ िषय की आयु प्राप् त करिे पर सेिाणििृत्त हो जाएर्गा :  

 परन् तु यह भी क्रक प्रणतकुलपणत, पररणियम 2 के खंर् (6) के अिीि कुलपणत के कतयव् यों का णिियहि करिे के दौराि, 

प्रणतकुलपणत के रूप में अपिी पदािणि की समाणप् त पर भी पद पर तब तक बिा रहरे्गा जब तक, यथाणस् थणत, कुलपणत अपिा पद क्रफर से 

िहीं संभाल लेता या िया कुलपणत अपिा पद ग्रहि िहीं कर लेता ।  

 (3) प्रणतकुलपणत की उपलणब् ियां तथा सेिा के अन् य णिबंिि और शतें िे होंर्गी जो अध् यादशेों द्वारा णिणहत की जाएं ।  

 (4) प्रणतकुलपणत, कुलपणत की ऐसे णिषयों के संबंि में सहायता करेर्गा जो इस णिणमत्त कुलपणत द्वारा समय-समय पर 

णिणिर्दयष् र् क्रकए जाएं और ऐसी शण‍ तयों का प्रयोर्ग और कतयव् यों का पालि भी करेर्गा जो कुलपणत द्वारा उसे सौंपे या प्रत् यायोणजत क्रकए 

जाएं ।  

 5. णिद्यापीठों के संकायाध् यि—(1) णिद्यापीठ के प्रत्येक संकायाध् यि की णियुण‍ त, कुलपणत द्वारा उस णिद्यापीठ के आिायों में 

से ज् येष् ठता के क्रम में िक्रािुक्रम से तीि िषय की अिणि के णलए की जाएर्गी :  



 14 

 परन् तु यक्रद णिद्यापीठ में केिल एक आिायय ह ैया कोई आिायय िहीं ह ैतो तत् समय संकायाध् यि, णिद्यापीठ के आिायय, यक्रद 

कोई हों, और उपािायों में से ज् येष् ठता के क्रम में िक्रािुक्रम से णियु‍ त क्रकया जाएर्गा :  

 परन् तु यह और क्रक संकायाध् यि बासठ िषय की आयु प्राप् त कर लेिे पर उस पद पर िहीं रहरे्गा ।  

 (2) जब संकायाध् यि का पद रर‍ त ह ैया जब संकायाध् यि, रुग् िता, अिुपणस् थणत के कारि या क्रकसी अन् य कारि से अपिे पद 

के कतयव् यों का पालि करिे में असमथय ह,ै तब उस पद के कतयव् यों का पालि, ऐसे व् यण‍ तयों द्वारा क्रकया जाएर्गा, णजसे कुलपणत उस 

प्रयोजि के णलए णियु‍ त करे ।  

 (3) संकायाध् यि, णिद्यापीठ का अध् यि होर्गा और णिद्यापीठ में अध् यापि और अिुसंिाि के संिालि तथा उिका स् तर बिाए 

रखिे के णलए उत्तरदायी होर्गा और उसके ऐसे अन् य कृत् य भी होंर्ग,े जो अध् यादशेों द्वारा णिणहत क्रकए जाएं ।  

 (4) संकायाध् यि को, यथास् णाथणत, अध् ययि बोर्ों या णिद्यापीठ की सणमणतयों के क्रकसी अणििेशि में उपणस् थत होिे और 

बोलिे का अणिकार होर्गा, क्रकन् तु जब तक िह उसका सदस् य िहीं ह ैतब तक उसे उसमें मत दिेे का अणिकार िहीं होर्गा ।  

 6. कुलसणिि—(1) कुलसणिि की णियुण‍ त, इस प्रयोजि के णलए र्गरठत ियि सणमणत की णसफाररश पर कायय पररषद ्द्वारा 

की जाएर्गी और िह णिश् िणिद्यालय का पूियकाणलक िैतणिक अणिकारी होर्गा ।  

 (2) कुलसणिि की णियुण‍ त पांि िषय की अिणि के णलए की जाएर्गी और िह पुिर्िययुण‍ त का पात्र होर्गा ।  

 (3) कुलसणिि की उपलणब् ियां तथा सेिा के अन् य णिबंिि और शतें िे होंर्गी जो समय-समय पर कायय पररषद ्द्वारा णिणहत की 

जाएं :  

 परन् तु कुलसणिि बासठ िषय की आयु प्राप् त कर लेिे पर सेिाणििृत्त हो जाएर्गा : 

 परन्तु यह और क्रक कुलसणिि बासठ िषय की आयु प्राप् त कर लेिे पर भी पद पर तब तक बिा रहेर्गा जब तक उसका उत्तरिती 

णियु‍ त िहीं क्रकया जाता और िह अपिा पद ग्रहि िहीं कर लेता या एक िषय की अिणि समाप् त िहीं हो जाती, इिमें से जो भी    पहले 

हो । 

 (4) जब कुलसणिि का पद रर‍ त ह ैया जब कुलसणिि रुग् िता, अिुपस् णाथणत के कारि या क्रकसी अन् य कारि से अपिे पद के 

कतयव् यों का पालि करिे में असमथय ह ैतब उस पद के कतयव् यों का पालि उस व् यण‍ त द्वारा क्रकया जाएर्गा णजसे कुलपणत उस प्रयोजि के 

णलए णियु‍ त करे ।  

 (5) (क) कुलसणिि को, अध् यापकों और शैिणिक कमयिाररिृंद को छोडकर ऐसे कमयिाररयों के णिरुद्ध अिुशासणिक कारयिाई 

करिे की शण‍ त होर्गी जो कायय पररषद ्के आदशे में णिणिर्दयष् र् क्रकए जाएं तथा जांि होिे तक उन् हें णिलंणबत करिे, उन् हें िेताििी दिेे या 

उि पर पररनिंदा की या िेतििृणद्ध रोकिे की शाणस् त अणिरोणपत करिे की शण‍ त होर्गी :  

 परन् तु ऐसी कोई शाणस् त तब तक अणिरोणपत िहीं की जाएर्गी जब तक उस व् यण‍ त को उसके संबंि में की जािे के णलए 

प्रस् थाणपत कारयिाई के णिरुद्ध कारि बतािे का उणित अिसर िहीं दे क्रदया जाता है ।  

 (ख) उपखंर् (क) में णिणिर्दयष् र् कोई शाणस् त अणिरोणपत करिे के कुलसणिि के आदशे के णिरुद्ध अपील कुलपणत को होर्गी ।  

 (र्ग) ऐसे मामले में, जहां जांि से यह प्रकर् हो क्रक कुलसणिि की शण‍ त के बाहर का कोई दंर् अपेणित ह ैिहां, कुलसणिि, 

जांि के पूरा होिे पर, कुलपणत को अपिी णसफाररशों सणहत एक ररपोर्य दरे्गा :  

 परन् तु शाणस् त अणिरोणपत करिे के कुलपणत के आदशे के णिरुद्ध अपील कायय पररषद ्को होर्गी ।  

 (6) कुलसणिि, कायय पररषद,् णिद्या पररषद ् और महाणिद्यालय णिकास पररषद ् का पदिे सणिि होर्गा, ककंतु यह इि 

प्राणिकरिों में से क्रकसी भी प्राणिकरि का सदस् य िहीं समझा जाएर्गा और िह सभा का पदेि सदस् य-सणिि होर्गा ।  

 (7) कुलसणिि का यह कतयव् य होर्गा क्रक िह—  

 (क) णिश् िणिद्यालय के अणभलेख, सामान् य मुरा और ऐसी अन् य संपणत्त को, जो कायय पररषद ्उसके भारसािि में 

सौपें, अणभरिा में रखे;  

 (ख) सभा, कायय पररषद,् णिद्या पररषद,् महाणिद्यालय णिकास पररषद ् के और उि प्राणिकाररयों द्वारा णियु‍ त 

क्रकन् हीं सणमणतयों के अणििेशि बुलािे की सभी सूििाएं णिकाले;  

 (र्ग) सभा, कायय पररषद,् णिद्या पररषद ्और महाणिद्यालय णिकास पररषद ् के तथा उि प्राणिकारी द्वारा णियु‍ त 

क्रकन् ही सणमणतयों के सभी अणििेशिों के काययिृत्त रखे;  

 (घ) सभा, कायय पररषद,् णिद्या पररषद ्और महाणिद्यालय णिकास पररषद ्के शासकीय पत्र-व् यिहार का संिालि 

करे;  



 15 

 (ङ) कुलाध् यि को, णिश् िणिद्यालय के प्राणिकारी के अणििेशिों की कायय सूिी की प्रणतयां, जैसे ही िे जारी की जाएं 

और इि अणििेशिों के काययिृत्त द;े  

 (ि) णिश् िणिद्यालय द्वारा या उसके णिरुद्ध िादों या काययिाणहयों में णिश् िणिद्यालय का प्रणतणिणित् ि करे, 

मुख् तारिामों पर हस् तािर करे तथा अणभिििों को सत् याणपत करे या इस प्रयोजि के णलए अपिा प्रणतणिणि प्रणतणियु‍ त करे; 

और  

 (छ) ऐसे अन् य कतयव् यों का पालि करे, जो पररणियमों, अध् यादशेों या णिणियमों में णिणिर्दयष् र् क्रकए जाएं अथिा 

णजिकी कायय पररषद ्या कुलपणत द्वारा समय-समय पर अपेिा की जाए । 

 7. णित्त अणिकारी—(1) णित्त अणिकारी इस प्रयोजि के णलए र्गरठत ियि सणमणत की णसफाररश पर कायय पररषद ् द्वारा 

णियु‍ त क्रकया जाएर्गा और िह णिश् िणिद्यालय का पूियकाणलक िैतणिक अणिकारी होर्गा ।  

 (2) णित्त अणिकारी की णियुण‍ त पांि िषय की अिणि के णलए की जाएर्गी और िह पुिर्िययुण‍ त का पात्र होर्गा ।   

 (3) णित्त अणिकारी की उपलणब् ियां तथा सेिा के अन् य णिबंिि और शतें ऐसी होंर्गी जो समय-समय पर कायय पररषद ्द्वारा 

णिणहत की जाएं :  

 परन् तु णित्त अणिकारी बासठ िषय की आयु प्राप् त कर लेिे पर सेिाणििृत्त हो जाएर्गा :  

 परन्तु यह और क्रक णित्त अणिकारी बासठ िषय की आयु प्राप् त कर लेिे पर भी तब तक पद पर बिा रहरे्गा जब तक उसका 

उत्तरिती णियु‍ त िहीं क्रकया जाता और िह अपिा पद ग्रहि िहीं कर लेता या एक िषय की अिणि समाप् त िहीं हो जाती ह,ै इिमें से जो 

भी पहले हो । 

 (4) जब णित्त अणिकारी का पद रर‍ त ह ैया जब णित्त अणिकारी रुग् िता, अिुपणस् थणत के कारि या क्रकसी अन् य कारि स े

अपिे पद के कतयव् यों का पालि करिे में असमथय ह ैतब उस पद के कतयव् यों का पालि उस व् यण‍ त द्वारा क्रकया जाएर्गा णजसे कुलपणत उस 

प्रयोजि के णलए णियु‍ त करे ।  

 (5) णित्त अणिकारी, णित्त सणमणत का पदिे सणिि होर्गा, ककंतु िह ऐसी सणमणत का सदस् य िहीं समझा जाएर्गा ।  

 (6) णित्त अणिकारी— 

 (क) णिश् िणिद्यालय की णिणि का सािारि पययिेिि करेर्गा और उसकी णित्तीय िीणत के संबंि में उसे सलाह  दरे्गा; 

और  

 (ख) ऐसे अन् य णित्तीय कृत् यों का पालि करेर्गा, जो उसे कायय पररषद ् द्वारा सौंपे जाएं या जो पररणियमों या 

अध् यादशेों द्वारा णिणहत क्रकए जाएं ।  

(7) कायय पररषद ्के णियंत्रि के अिीि रहते हुए, णित्त अणिकारी— 

 (क) णिश् िणिद्यालय की संपणत्त और णिणििािों को, णजिके अंतर्गयत न् यास और णिन् यास की संपणत्त ह,ै िारि करेर्गा 

और उिका प्रबंि करेर्गा;  

 (ख) यह सुणिणश् ित करेर्गा क्रक कायय पररषद ्द्वारा एक िषय के णलए णियत आिती और अिािती व् यय की सीमाओं स े

अणिक व् यय ि क्रकया जाए और सभी िि का व् यय उसी प्रयोजि के णलए क्रकया जाए, णजसके णलए िह मंजूर या आबंरर्त 

क्रकया र्गया ह;ै  

 (र्ग) णिश् िणिद्यालय के िार्षयक लेखा और बजर् तैयार क्रकए जािे के णलए और उिको कायय पररषद,् को प्रस् तुत करिे 

के णलए उत्तरदायी होर्गा;  

 (घ) िकद और बैंक अणतशेषों तथा णिणििािों की णस् थणत पर बराबर िजर रखेर्गा;  

 (ङ) राजस् ि के संग्रहि की प्रर्गणत पर िजर रखेर्गा और संग्रहि करिे के णलए अपिाए जािे िाले तरीकों के णिषय में 

सलाह देर्गा;  

 (ि) यह सुणिणश् ित करेर्गा क्रक भिि, भूणम, फिीिर और उपस् कर के रणजस् र्र अद्यति रखे जाएं तथा सभी 

कायायलयों, णिभार्गों, णिश् िणिद्यालय संस्थािों, केन् रों और णिशेणषत प्रयोर्गशालाओं के उपस् कर तथा उपयोज् य अन्य सामग्री के 

स् र्ाक की जांि की जाए;  

 (छ) अप्राणिकृत व् यय और अन् य णित्तीय अणियणमतताओं को कुलपणत की जािकारी में लाएर्गा तथा व् यणतक्रमी 

व् यण‍ तयों के णिरुद्ध समुणित कारयिाई का सुझाि देर्गा;  

 (ज) णिश् िणिद्यालय द्वारा िलाए जा रह ेक्रकसी कायायलय, णिभार्ग, केन् र, प्रयोर्गशाला, महाणिद्यालय या संस् था स े

कोई ऐसी जािकारी या णििरणियां मांर्गेर्गा जो िह अपिे कतयव् यों के पालि के णलए आिश् यक समझे ।  



 16 

 (8) णित्त अणिकारी की या कायय पररषद ्द्वारा इस णिणमत्त सम् यक् रूप से प्राणिकृत व् यण‍ त या व् यण‍ तयों की णिश् िणिद्यालय 

को संदये क्रकसी िि के बारे में रसीद, उस िि के संदाय के णलए पयायप् त उन् मोिि होर्गी ।   

 8. परीिा णियतं्रक—(1) परीिा णियंत्रक की णियुण‍ त इस प्रयोजि के णलए र्गरठत ियि सणमणत की णसफाररश पर कायय 

पररषद ्द्वारा की जाएर्गी और िह णिश् िणिद्यालय का पूियकाणलक िैतणिक अणिकारी होर्गा ।  

 (2) परीिा णियंत्रक की णियुण‍ त पांि िषय की अिणि के णलए की जाएर्गी और िह पुिर्िययुण‍ त का पात्र होर्गा ।  

 (3) परीिा णियंत्रक की उपलणब् ियां तथा सेिा के अन् य णिबंिि और शतें िे होंर्गी, जो समय-समय पर कायय पररषद ्द्वारा 

णिणहत की जाएं :  

 परन् तु परीिा णियंत्रक बासठ िषय की आयु प्राप् त कर लेिे पर सेिाणििृत्त हो जाएर्गा : 

 परन्तु यह और क्रक परीिा णियंत्रक बासठ िषय की आयु प्राप् त कर लेिे पर भी तब तक पद पर बिा रहेर्गा जब तक उसका 

उत्तरिती णियु‍ त िहीं क्रकया जाता और िह अपिा पद ग्रहि िहीं कर लेता या एक िषय की अिणि समाप् त िहीं हो जाती ह,ै इिमें से जो 

भी पहले हो । 

 (4) जब परीिा णियंत्रक का पद रर‍ त ह ैया जब परीिा णियंत्रक रुग् िता, अिुपणस् थणत के कारि या क्रकसी अन् य कारि स े

अपिे पर के कतयव् यों का पालि करिे में असमथय ह ैतब उस पद के कतयव् यों का पालि उस व् यण‍ त द्वारा क्रकया जाएर्गा, णजसे कुलपणत उस 

प्रयोजि के णलए णियु‍ त करे ।  

 (5) परीिा णियंत्रक, अध् यादशेों द्वारा णिणहत रीणत में णिश् िणिद्यालय की परीिाएं करिाएर्गा और उिका अिीिि करेर्गा । 

 9. पसु् तकालय अध् यि—(1) पुस् तकालय अध् यि की णियुण‍ त कायय पररषद ्द्वारा   इस प्रयोजि के णलए र्गरठत ियि सणमणत 

की णसफाररश पर की जाएर्गी और िह णिश् िणिद्यालय का पूियकाणलक िैतणिक अणिकारी होर्गा ।  

 (2) पुस् तकालय अध् यि, ऐसी शण‍ तयों का प्रयोर्ग और ऐसे कतयव् यों का पालि करेर्गा, जो उसे कायय पररषद ्द्वारा सौंपे जाएं ।  

 10. सभा के अणििेशि—(1) सभा का िार्षयक अणििेशि, उस दशा के णसिाय, जब क्रकसी िषय के संबंि में सभा द्वारा कोई 

अन् य तारीख णियत की हो, कायय पररषद ्द्वारा णियत तारीख को होर्गा ।  

 (2) सभा के िार्षयक अणििेशि में, पूिय िषय के दौराि णिश् िणिद्यालय के काययकरि की ररपोर्य, प्राणप् तयों और व् यय के णितरि, 

यथा संपरीणित तुलिपत्र और अर्गले िषय के णलए णित्तीय प्रा‍ कलिों सणहत, प्रस् तुत की जाएर्गी ।  

 (3) खंर् (2) में णिर्दयष् र् प्राणप् तयां और व् यय का णििरि, तुलिपत्र और णित्तीय प्रा‍ कलिों की प्रणत सभा के प्रत् येक सदस् य को 

िार्षयक अणििेशि की तारीख से कम से कम सात क्रदि पूिय भेजी जाएर्गी ।  

 (4) सभा के णिशेष अणििेशि, कायय पररषद ्या कुलपणत द्वारा, या यक्रद कोई कुलपणत िहीं ह ैतो प्रणतकुलपणत द्वारा या यक्रद 

कोई प्रणतकुलपणत िहीं ह ैतो कुलसणिि द्वारा बुलाए जा सकें र्गे ।  

 (5) सभा के अणििेशि के णलए र्गिपूर्तय सभा के ग् यारह सदस् यों से होर्गी ।  

 11. कायय पररषद ्के अणििेशि के णलए र्गिपरू्तय—कायय पररषद ्के अणििेशि के णलए र्गिपूर्तय कायय पररषद ्के सात सदस् यों से 

होर्गी ।  

 12. कायय पररषद ्की शण‍ तया ंऔर कृत् य—(1) कायय पररषद ्को णिश् िणिद्यालय के राजस् ि और संपणत्त के प्रबंि और प्रशासि 

की तथा णिश् िणिद्यालय के सभी ऐसे प्रशासणिक काययकलापों के, णजिके णलए अन् यथा उपबंि िहीं क्रकया र्गया ह,ै संिालि की शण‍ त 

होर्गी ।  

 (2) इस अध् यादशे, पररणियमों और अध् यादशेों के उपबंिों के अिीि रहते हुए, कायय पररषद ्को, उसमें णिणहत अन् य सभी 

शण‍ तयों के अणतरर‍ त, णिम् िणलणखत शण‍ तयां प्राप् त होंर्गी, अथायत् :—  

 (i) अध् यापि और शैिणिक पदों का सृजि करिा, ऐसे पदों की संख् या तथा उिकी उपलणब् ियां अििाररत करिा 

और आिायों, उपािायों, प्राध्यापकों तथा अन् य शैिणिक कमयिाररिृंद के कतयव् यों और सेिा की शतों को पररभाणषत करिा :  

 परंतु अध् यापकों और शैिणिक कमयिाररिृंद की संख् या और अहयता के संबंि में कोई कारयिाई कायय पररषद ्द्वारा 

णिद्या पररषद ्की णसफाररश पर णििार क्रकए णबिा िहीं की जाएर्गी;  

 (ii) उतिे आिायों, उपािायों, प्राध्यापकों और अन् य शैिणिक कमयिाररिृंद, णजतिे आिश् यक हों, इस प्रयोजि के 

णलए र्गरठत ियि सणमणत की णसफाररश पर णियु‍ त करिा तथा उिमें अस् थायी रर‍ णातयों को भरिा;  

 (iii) अध्यादशेों द्वारा णिणहत रीणत में णिश् िणिद्यालय के मान्यताप्राप् त णशिक के रूप में व्यण‍ तयों को         

मान्यता दिेा; 



 17 

 (iv) प्रशासणिक, अिुसणििीय और अन् य आिश् यक पदों (णजसके अंतर्गयत पीठ आिायय पद भी हैं) का सृजि करिा 

तथा अध् यादशेों द्वारा णिणहत रीणत से उि पर णियुण‍ तयां करिा; 

 (v) कुलाणिपणत और कुलपणत से णभन् ि णिश् िणिद्यालय के क्रकसी अणिकारी को अिुपणस् थणत छुट्टी दिेा और ऐस े

अणिकारी की अिुपणस् थणत में उसके कृत् यों के णिियहि के णलए आिश् यक व् यिस् था करिा;  

 (vi) पररणियमों और अध् यादशेों के अिुसार कमयिाररयों में अिुशासि का णिणियमि करिा और उसका पालि 

करािा;  

 (vii) णिश् िणिद्यालय के णित्त, लेखाओं, णिणििािों, संपणत्त, कामकाज तथा सभी अन् य प्रशासणिक काययकलापों का 

प्रबंि तथा णिणियमि करिा और उस प्रयोजि के णलए उतिे अणभकताय णियु‍ त करिा, णजतिे िह ठीक समझे;  

  (viii) णित्त सणमणत की णसफाररशों पर िषय भर के कुल आिती और कुल अिािती व् यय की सीमाएं णियत करिा;  

 (ix) णिश् िणिद्यालय के िि को, णजसके अंतर्गयत अिपुयोणजत आय भी ह,ै समय-समय पर ऐसे स् र्ाकों, णिणियों, 

शेयर या प्रणतभूणतयों में णिणििाि करिा, जो िह ठीक समझे या भारत में स्थािर संपणत्त के क्रय में णिणििाि करिा, णजसमें 

ऐसे णिणििाि में समय-समय पर पररितयि करिे की शण‍ त ह;ै  

  (x) णिश् िणिद्यालय की ओर से क्रकसी जंर्गम या स् थािर संपणत्त का अंतरि करिा या अंतरि स् िीकार करिा;  

 (xi) णिश् िणिद्यालय के कायय को िलािे के णलए भििों, पररसरों, फिीिर, साणित्रों और अन् य साििों की   

व् यिस् था करिा;   

  (xii) णिश् िणिद्यालय की ओर से संणिदाएं करिा, उिमें पररितयि करिा, उन् हें कायायणन् ित और रद्द करिा;  

 (xiii) णिश् िणिद्यालय के ऐसे कमयिाररयों और छात्रों की, जो क्रकसी कारि से, व् यणथत अिुभि करें, क्रकन् हीं 

णशकायतों को ग्रहि करिा, उिका न् यायणििययि करिा और यक्रद ठीक समझा जाता ह ैतो उि णशकायतों को दरू करिा;   

 (xiv) परीिकों और अिुसीमकों को णियु‍ त करिा और यक्रद आिश् यक हो तो उन् हें हर्ािा तथा उिकी फीसें, 

उपलणब् ियां और यात्रा भते्त तथा अन् य भते्त, णिद्या पररषद ्से परामशय करिे के पश् िात्, णियत करिा;  

 (xv) णिश् िणिद्यालय के णलए सामान् य मुरा का ियि करिा और ऐसी मुरा की अणभरिा और उपयोर्ग की व् यिस् था 

करिा;  

 (xvi) छात्राओं के णििास और उिमें अिुशासि के णलए आिश्यक णिशेष इंतजाम करिा; 

 (xvii) अध् येतािृणत्तयां, छात्रिृणत्तयां, अध् ययििृणत्तयां, पदक और पुरस् कार संणस् थत करिा;  

 (xviii) अभ् यार्गत आिायों, प्रणतणष् ठत आिायों, परामशयदाताओं तथा णिद्वािों की णियुण‍ त का उपबंि करिा और 

ऐसी णियुण‍ तयों के णिबंििों और शतों का अििारि करिा; और 

 (xix) ऐसी अन् य शण‍ तयों का प्रयोर्ग करिा और ऐसे अन् य कृत् यों का पालि करिा जो अध्यादशेों या पररणियमों 

द्वारा उसे प्रदत्त क्रकए जाएं या उस पर अणिरोणपत क्रकए जाएं ।  

 13. णिद्या पररषद ्के अणििशेिों के णलए र्गिपरू्तय—णिद्या पररषद ्के अणििेशिों के णलए र्गिपूर्तय णिद्या पररषद ्के िौ सदस् यों 

से होर्गी ।  

 14. णिद्या पररषद ्की शण‍ तया ंऔर कृत् य—इस अणिणियम, पररणियमों और अध् यादशेों के अिीि रहते हुए, णिद्या पररषद ्

को, उसमें णिणहत अन् य सभी शण‍ तयों के अणतरर‍ त, णिम् िणलणखत शण‍ तयां होंर्गी, अथायत् :— 

 (क) णिश् िणिद्यालय की शैिणिक िीणतयों का सािारि पययिेिि करिा और णशिि के तरीकों, महाणिद्यालयों और 

संस् थाओं में अध् यापि का समन् िय करिे, अिुसंिाि के मूल् यांकि या शैिणिक स् तरों में सुिार के बारे में णिदशे दिेा;  

 (ख) णिद्यापीठों के बीि समन् िय स् थाणपत करिा और बढािा और ऐसी सणमणतयों या बोर्ों की स् थापिा या 

णियुण‍ त करिा, जो इस प्रयोजि के णलए आिश् यक समझी जाएं;   

 (र्ग) सािारि शैिणिक अणभरुणि के णिषयों पर स् िप्रेरिा से या क्रकसी णिद्यापीठ या कायय पररषद ्द्वारा णिदशे क्रकए 

जािे पर णििार करिा और उि पर समुणित कारयिाई करिा; और  

 (घ) पररणियमों और अध्यादशेों से संर्गत ऐसे णिणियम और णियम बिािा जो णिश् िणिद्यालय के शैिणिक 

काययकरि, अिुशासि, णििास, प्रिेश, अध् येतािृणत्तयों और अध्ययििृणत्तयों के क्रदए जािे और छात्रिृणत्तयां, फीस, ररयायतों, 

सामूणहक जीिि और हाणजरी के संबंि में हों ।  

 15. णिद्यापीठ और णिभार्ग—(1) णिश् िणिद्यालय में उतिे णिद्यापीठ होंर्गे णजतिे पररणियमों में णिणिर्दयष् र् क्रकए जाएं ।  



 18 

 (2) प्रत् येक णिद्यापीठ का एक णिद्यापीठ बोर्य होर्गा और प्रथम णिद्यापीठ बोर्य के सदस् य, कायय पररषद ्द्वारा तीि िषय की 

अिणि के णलए िामणिर्दयष् र् क्रकए जाएंर्गे ।  

 (3) णिद्यापीठ बोर्य की संरििा, शण‍ तयां और उसके कृत् य अध् यादशेों द्वारा णिणहत क्रकए जाएंर्गे ।   

 (4) णिद्यापीठ बोर्य के अणििेशि का संिालि और ऐसे अणििेशिों के णलए अपेणित र्गिपूर्तय अध् यादशेों द्वारा णिणहत      की    

जाएर्गी ।  

 (5) (क) प्रत् येक णिद्यापीठ में उतिे णिभार्ग होंर्गे, णजतिे अध् यादशेों द्वारा उिमें रखे जाएं :   

 परंतु कायय पररषद,् णिद्या पररषद ्की णसफाररश पर ऐसे अध् ययि केन् र स् थाणपत कर सकेर्गी णजिमें णिश् िणिद्यालय के उतिे 

णशिक लर्गाए जाएंर्गे, णजतिे कायय पररषद ्आिश् यक समझे ।  

 (ख) प्रत् येक णिभार्ग में णिम् िणलणखत सदस् य होंर्गे, अथायत् :—  

  (i) णिभार्ग के णशिक;  

  (ii) णिभार्ग में अिुसंिाि करिे िाले व् यण‍ त;  

  (iii) णिद्यापीठ का संकायाध् यि;  

  (iv) णिभार्ग से संलग् ि मािद आिायय, यक्रद कोई हों; और   

  (v) ऐसे अन् य व् यण‍ त, जो अध् यादेशों के उपबंिों के अिुसार णिभार्ग के सदस् य हों ।  

 16. अध् ययि बोर्य—(1) प्रत् येक णिभार्ग में एक अध् ययि बोर्य होर्गा ।  

 (2) अध् ययि बोर्य का र्गठि और उसके सदस् यों की पदािणि अध् यादशेों द्वारा णिणहत की जाएर्गी ।  

 (3) णिद्या पररषद ् के पूिय  णियंत्रि और पययिेिि के अिीि रहते हुए अध् ययि बोर्य के कृत् य णिणभन् ि उपाणियों के णलए 

अिुसंिािाथय णिषयों और अिुसंिाि उपाणियों की अन् य अपेिाओं का अिुमोदि करिा तथा संबद्ध णिद्यापीठ बोर्य को ऐसी रीणत से, जो 

अध् यादशेों द्वारा णिणहत की जाएं, णिम् िणलणखत के बारे में णसफाररश करिा होंरे्ग—  

  (क) अध् ययि  पाठ्यक्रम और पाठ्यक्रमों के णलए, णजसमें अिुसंिाि उपाणि िहीं ह,ै परीिकों की णियुण‍ त;  

  (ख) अिुसंिाि पययिेिकों की णियुण‍ त; और 

  (र्ग) अध् यापि और अिुसंिाि के स् तर में सुिार के णलए उपाय :  

 परन् तु अध् ययि बोर्य के उपयुय‍ त कृत् यों का पालि, अणिणियम के प्रारंभ के ठीक पश् िात् तीि िषय की अिणि के दौराि णिभार्ग 

द्वारा क्रकया जाएर्गा ।  

 17. णिश् िणिद्यालय द्वारा िलाया जाि ेिाला महाणिद्यालय—(1) मणिपुर प्रौद्योणर्गकी संस् थाि, इम् फाल, णिश् िणिद्यालय द्वारा 

िलाया जाएर्गा ।  

  (2) खंर् (1) में महाणिद्यालय का र्गठि, उसके िलाए जािे और प्रबंि की शतें अध् यादशेों द्वारा णिणहत की जाएंर्गी । 

 18. णित्त सणमणत—(1) णित्त सणमणत में णिम् िणलणखत सदस् य होंर्गे, अथायत् :— 

 (i) कुलपणत;  

 (ii) प्रणतकुलपणत;  

 (iii) कायय पररषद ्द्वारा िामणिर्दयष् र् तीि व् यण‍ त, णजिमें से कम से कम एक कायय पररषद ्का सदस् य होर्गा; और  

 (iv) कुलाध् यि द्वारा िामणिर्दयष् र् तीि व् यण‍ त । 

(2) णित्त सणमणत के अणििेशि के णलए र्गिपूर्तय णित्त सणमणत के पांि सदस् यों से होर्गी ।  

(3) णित्त सणमणत के पदिे सदस् यों से णभन् ि सभी सदस् य तीि िषय की अिणि तक पद िारि करेंर्गे ।  

 (4) यक्रद णित्त सणमणत का कोई सदस् य उसके क्रकसी णिणिश् िय से सहमत िहीं ह ैतो उसे णिसम् मणत का काययिृत्त अणभणलणखत 

करिे का अणिकार होर्गा ।  

 (5) लेखाओं की परीिा और व् यय की प्रस् थापिाओं की संिीिा करिे के णलए णित्त सणमणत का अणििेशि प्रत् येक िषय कम से 

कम तीि बार होर्गा ।  

 (6) पदों के सृजि से संबंणित सभी प्रस् थापिाओं की और उि मदों की, जो बजर् में सणम् मणलत िहीं की र्गई हैं, कायय पररषद ्

द्वारा उि पर णििार क्रकए जािे से पूिय, णित्त सणमणत द्वारा परीिा की जाएर्गी ।  



 19 

 (7) णित्त अणिकारी द्वारा तैयार क्रकए र्गए णिश् िणिद्यालय के िार्षयक लेखे और णित्तीय प्रा‍ कलि, णित्त सणमणत के समि 

णििार तथा र्ीका-रर्प् पिी के णलए रखे जाएंर्गे और तत् पश् िात् कायय पररषद ्के अिुमोदि के णलए प्रस् तुत क्रकए जाएंर्गे ।  

 (8) णित्त सणमणत िषय के णलए कुल आिती व् यय और कुल अिािती व् यय के णलए सीमाओं की णसफाररश करेर्गी जो 

णिश् िणिद्यालय की आय और उसके साििों पर आिाररत होर्गी (णजिके अंतर्गयत उत् पादक कायों की दशा में, उिारों के आर्गम भी हो 

सकें र्ग)े ।  

 19. ियि सणमणतया—ं(1) आिायय, उपािायय, प्राध्यापक, कुलसणिि, णित्त अणिकारी, पुस् तकालय अध् यि तथा 

णिश् िणिद्यालय द्वारा िलाए जािे िाले महाणिद्यालयों और संस् थाओं के प्रािायों के पदों पर णियुण‍ त के णलए कायय पररषद ्को णसफाररश 

करिे के णलए ियि सणमणतयां होंर्गी ।  

 (2) िीिे की सारिी के स् तंभ 1 में णिणिर्दयष् र् पदों पर णियुण‍ त के णलए ियि सणमणत में कुलपणत, कुलाध् यि का एक 

िामणिदणेशती और उ‍ त सारिी के स् तंभ 2 की तत् संबंिी प्रणिणष् र् में णिणिर्दयष् र् व् यण‍ त होंर्गे ।   

सारिी 

 

1  2 

आिायय        (i) णिद्यापीठ का संकायाध् यि ।  

      (ii) णिभार्ग का अध् यि ।    

        (iii) तीि व् यण‍ त, जो णिश् िणिद्यालय की सेिा में ि हों, कायय पररषद ्द्वारा उि िामों के 

पैिल में से िामणिर्दयष् र् क्रकए जाएंर्गे, णजिकी णसफाररश णिद्या पररषद ्द्वारा उस णिषय में, 

णजससे आिायय का संबंि होर्गा, उिके णिशेष ज्ञाि या रुणि के कारि की र्गई हो ।
 

उपािायय/प्राध्यापक        (i) णिभार्ग का अध् यि ।  

       (ii) कुलपणत द्वारा िामणिर्दयष् र् एक आिायय ।  

       (iii) दो व् यण‍ त, जो णिश् िणिद्यालय की सेिा में ि हों, कायय पररषद ्द्वारा उि िामों के 

पैिल में से िामणिर्दयष् र् क्रकए जाएंर्गे, णजिकी णसफाररश णिद्या पररषद ्द्वारा उस णिषय में, 

णजससे उपािायय या प्राध्यापक का संबंि होर्गा, उिके णिशेष ज्ञाि या रुणि के कारि की र्गई 

हो ।  

कुलसणिि/णित्त अणिकारी        (i) कायय पररषद ्द्वारा िामणिर्दयष् र् उसके दो सदस् य ।  

         (ii) कायय पररषद ्द्वारा िामणिर्दयष् र् ऐसा एक व् यण‍ त जो णिश् िणिद्यालय की सेिा में ि 

हो ।  

पुस् तकालय अध् यि         (i) दो व् यण‍ त, जो णिश् िणिद्यालय की सेिा में ि हों, णजन् हें पुस् तकालय 

णिज्ञाि/पुस् तकालय प्रशासि के णिषय का णिशेष ज्ञाि हो, कायय पररषद ्द्वारा िामणिर्दयष् र् 

क्रकए जाएंर्गे । 

        (ii) एक व् यण‍ त, जो णिश् िणिद्यालय की सेिा में ि हो, पररषद ्द्वारा िामणिर्दयष् र् क्रकया 

जाएर्गा । 

णिश् िणिद्यालय द्वारा 

िलाए जािे िाले 

महाणिद्यालय या संस् था का 

प्रािायय  

       तीि व् यण‍ त, जो णिश् िणिद्यालय की सेिा में ि हों, णजिमें से दो कायय पररषद ्द्वारा और 

एक णिद्या पररषद ् द्वारा उिके ऐसे क्रकसी णिषय में णिशेष ज्ञाि या रुणि के कारि 

िामणिर्दयष् र् क्रकए जाएंर्गे णजसमें उस महाणिद्यालय या संस् था द्वारा णशिा दी जा रही हो ।  

 स् पष् र्ीकरि 1— जब णियुण‍ त अतंर-अिुशासणिक पररयोजिा के णलए की जा रही हो तब पररयोजिा का प्रिाि संबंणित 

णिभार्ग का अध् यि समझा जाएर्गा ।  

 स् पष् र्ीकरि 2— कुलपणत द्वारा िामणिर्दयष् र् क्रकया जािे िाला आिायय उस णिणशष् र् णिषय से संबद्ध आिायय होर्गा णजसके णलए 

ियि क्रकया जा रहा ह ैऔर कुलपणत, क्रकसी आिायय को िामणिर्दयष् र् करिे से पूिय णिभार्गाध् यि और णिद्यापीठ के संकायाध् यि से परामशय 

करेर्गा । 

 (3) कुलपणत, या उसकी अिुपणस् थणत में, प्रणतकुलपणत, ियि सणमणत के अणििेशिों की अध् यिता करेर्गा :  

 पंरतु ियि सणमणत का अणििेशि कुलाध् यि के िामणिदणेशती और कायय पररषद ्द्वारा िामणिर्दयष् र् णिशेषज्ञों के पूिय परामशय के 

पश् िात् और उिकी सुणििा के अिुसार णियत क्रकया जाएर्गा :  



 20 

 परंतु यह और क्रक ियि सणमणत की काययिाणहयां तब तक णिणिमान् य िहीं होंर्गी, जब तक—  

 (क) जहां कुलाध् यि के िामणिदणेशती और कायय पररषद ्द्वारा िामणिर्दयष् र् व् यण‍ तयों की कुल संख् या िार ह,ै िहां 

उिमें से कम से कम तीि अणििेशि में भार्ग ि लें; और  

 (ख) जहां कुलाध् यि के िामणिदणेशती और कायय पररषद ्द्वारा िामणिर्दयष् र् व् यण‍ तयों की कुल संख् या तीि ह,ै िहां 

उिमें से कम से कम दो अणििेशि में भार्ग ि लें ।   

(4) ियि सणमणत द्वारा अिुसरि की जािे िाली प्रक्रकया अध् यादशेों में अणिकणथत की जाएर्गी ।  

 (5) यक्रद कायय पररषद ्ियि सणमणत द्वारा की र्गई णसफाररशें स् िीकार करिे में असमथय हो तो िह अपिे कारि अणभणलणखत 

करेर्गी और मामले को अंणतम आदशे के णलए कुलाध् यि को भेजेर्गी ।  

 (6) अस् थायी पदों पर णियुण‍ तयां िीिे उपदर्शयत रीणत से की जाएंर्गी—  

 (i) यक्रद अस् थायी ररण‍ त एक शैिणिक सत्र से अणिक की अिणि के णलए हो तो िह पूियर्गामी खंर्ों में उपदर्शयत 

प्रक्रक्रया के अिुसार ियि सणमणत की सलाह से भरी जाएर्गी :  

 परंतु यक्रद कुलपणत का यह समािाि हो जाता ह ैक्रक कायय के णहत में ररण‍ त का भरा जािा आिश् यक ह ैतो णियुण‍ त 

उपखंर् (ii) में णिर्दयष् र् स् थािीय ियि सणमणत की सलाह से केिल अस् थायी आिार पर छह मास से अिणिक अिणि के णलए 

की जा सकेर्गी ।  

 (ii) यक्रद अस् थायी ररण‍ त एक िषय से कम की अिणि के णलए ह ैतो ऐसी ररण‍ त पर णियुण‍ त स् थािीय ियि सणमणत 

की णसफाररश पर की जाएर्गी, णजसमें संबद्ध णिद्यापीठ का संकायाध् यि, णिभार्गाध् यि और कुलपणत का एक िामणिदेणशती 

होर्गा :  

 परंतु यक्रद एक ही व् यण‍ त संकायाध् यि और णिभार्गाध् यि का पद िारि करता ह ैतो ियि सणमणत में कुलपणत के दो 

िामणिदणेशती हो सकें र्गे :  

 परंतु यह और क्रक मृत् यु के कारि या अन् य क्रकसी कारि से अध् यापि पदों में हुई अिािक आकणस् मक ररण‍ त की दशा 

में, संकायाध् यि संबंणित णिभार्गाध् यि के परामशय से एक मास के णलए अस् थायी णियुण‍ त कर सकेर्गा और ऐसी णियुण‍ त की 

ररपोर्य कुलपणत और कुलसणिि को दरे्गा ।  

 (iii) यक्रद पररणियमों के अिीि अस् थायी तौर पर णियणु‍ त के णलए क्रकसी णशिक की णसफाररश णियणमत ियि 

सणमणत द्वारा िहीं की जाती ह ैतो िह अस् थायी णियोजि पर सेिा में िहीं बिा रहरे्गा जब तक क्रक, यथाणस् थणत, अस् थायी या 

स् थायी णियुण‍ त के णलए स् थािीय ियि सणमणत या णियणमत ियि सणमणत द्वारा बाद में उसका ियि िहीं कर णलया जाता ।   

 20. णियणु‍ त का णिशषे ढंर्ग—(1) पररणियम 19 में क्रकसी बात के होते हुए भी, कायय पररषद ् णिद्या संबंिी उच् ि णिशेष 

उपाणि और िृणत्तक योग् यता िाले व् यण‍ त को ऐसे णिबंििों और शतों पर, जो िह ठीक समझे, णिश् िणिद्यालय में, यथाणस् थणत, आिायय 

का पद अथिा कोई अन् य शैिणिक पद स् िीकार करिे के णलए आमंणत्रत कर सकेर्गी और उस व् यण‍ त के ऐसा करिे के णलए सहमत होिे 

पर िह उसे उस पद पर णियु‍ त कर सकेर्गी ।   

 (2) कायय पररषद,् अध् यादशेों में अणिकणथत रीणत के अिुसार क्रकसी संयु‍ त पररयोजिा का णजम् मा लेिे के णलए क्रकसी अन् य 

णिश् िणिद्यालय या संर्गठि में कायय करिे िाले क्रकसी णशिक या अन् य शैिणिक कमयिारी को णियु‍ त कर सकेर्गी ।   

 21. णियत अिणि के णलए णियुण‍ त—कायय पररषद ्पररणियम 19 में अणिकणथत प्रक्रक्रया के अिुसार ियि क्रकए र्गए क्रकसी 

व् यण‍ त को एक णियत अिणि के णलए ऐसे णिबंििों और शतों पर, जो िह ठीक समझे, णियु‍ त कर सकेर्गी ।  

 22. मान्यताप्राप् त णशिक—(1) मान्यताप्राप् त णशिकों की अहयताएं िे होंर्गी, जो अध्यादशेों द्वारा णिणहत की जाएं । 

 (2) णशिकों की मान्यता के णलए सभी आिेदि ऐसी रीणत से क्रकए जाएंर्गे, जो अध्यादशेों द्वारा अणिकणथत की जाए । 

 (3) अध्यादशेों में इस प्रयोजि के णलए अणिकणथत रीणत से र्गरठत ियि सणमणत की णसफाररश के णबिा कोई णशिक 

मान्यताप्राप् त णशिक िहीं होर्गा । 

 (4) क्रकसी णशिक की मान् यता की अिणि इस णिणमत्त बिाए र्गए अध्यादशेों द्वारा अििाररत की जाएर्गी । 

 (5) णिद्या पररषद,् उपणस्थत और मतदाि करिे िाले सदस्यों के कम से कम दो-णतहाई बहुमत द्वारा पाररत एक णिशेष संकल्प 

द्वारा णशिक से मान्यता िापस ले सकेर्गी : 

 परंतु जब तक इस आशय की णलणखत सूििा क्रक ऐसा संकल्प ‍ यों ि पाररत कर क्रदया जाए, उस संबद्ध व्यण‍ त को, उससे 

सूििा में णिणिर्दयष् र् समय के भीतर कारि बतािे की अपेिा करते हुए ि द ेदी जाए और जब तक णिद्या पररषद ्द्वारा उसके आिेपों 

पर, यक्रद कोई हों और क्रकसी साक्ष्य पर, जो िह उिके समथयि में प्रस्तुत करें, णििार िहीं कर णलया जाता तब तक ऐसा संकल् प पाररत 

िहीं क्रकया जाएर्गा । 



 21 

 23. सणमणतयां—(1) णिश् िणिद्यालय का कोई प्राणिकारी, उतिी स् थायी या णिशेष सणमणतयां णियु‍ त कर सकेर्गा, णजतिी िह 

ठीक समझे और ऐसी सणमणतयों में उि व् यण‍ तयों को णियु‍ त कर सकेर्गा, जो उस प्राणिकरि के सदस् य िहीं ह ै।  

 (2) खंर् (1) के अिीि णियु‍ त सणमणत क्रकसी ऐसे णिषय में काययिाही कर सकेर्गी जो उसे प्रत् यायोणजत क्रकया जाए, ककंतु िह 

णियु‍ त करिे िाले प्राणिकारी द्वारा बाद में पुणष् र् के अिीि होर्गी ।  

 24. णशिकों, आक्रद की सिेा के णिबिंि और शतें तथा आिार सणंहता—(1) णिश् िणिद्यालय के सभी णशिक और अन् य 

शैिणिक कमयिाररिृंद तत् प्रणतकूल क्रकसी करार के अभाि में, पररणियमों, अध् यादशेों और णिणियमों में णिणिर्दयष् र् सेिा के णिबंििों और 

शतों तथा आिार संणहता द्वारा शाणसत होंर्गे ।  

 (2) शैिणिक कमयिाररिृंद के सदस् यों की उपलणब्ियां िे होंर्गी, जो अध् यादशेों द्वारा णिणहत की जाएं ।  

 (3) णिश् िणिद्यालय का प्रत् येक णशिक और शैिणिक कमयिाररिृंद का सदस् य णलणखत संणिदा के आिार पर णियु‍ त क्रकया 

जाएर्गा, णजसका प्रारूप अध् यादशेों द्वारा णिणहत क्रकया जाएर्गा ।  

 (4) खंर् (3) में णिर्दयष् र् प्रत् येक संणिदा की एक प्रणत कुलसणिि के पास रखी जाएर्गी ।  

 25. अन् य कमयिाररयों की सिेा के णिबिंि और शतें तथा आिार सणंहता—(1) णशिकों तथा अन् य शिैणिक कमयिाररिृंद से 

णभन् ि णिश् िणिद्यालय के सभी कमयिारी, तत् प्रणतकूल क्रकसी संणिदा के अभाि में, पररणियमों, अध् यादशेों और णिणियमों में णिणिर्दयष् र् 

सेिा के णिबंििों और शतों तथा आिार संणहता द्वारा शणसत होंर्गे ।  

 (2) णशिकों तथा अन् य शैिणिक कमयिाररिृंद से णभन् ि कमयिाररयों की णियणु‍ त की रीणत और उपलणब् ियां ि े होंर्गी जो 

अध् यादशेों द्वारा णिणहत की जाएं ।  

 26. ज् यषे् ठता सिूी—(1) जब कभी इि पररणियमों के अिुसार क्रकसी व् यण‍ त को ज् येष् ठता के अिुसार िक्रािुक्रम से 

णिश् िणिद्यालय का कोई पद िारि करिा ह ैया उसके क्रकसी प्राणिकरि का सदस् य होिा ह,ै तो उस ज् येष् ठता का अििारि उस व् यण‍ त 

के, उसके ग्रर् में लर्गातार सेिाकाल और ऐसे अन् य णसद्धांतों के अिुसार होर्गा, जो कायय पररषद ्समय-समय पर, णिणहत करे ।  

 (2) कुलसणिि का यह कतयव् य होर्गा क्रक णजि व् यण‍ तयों को इि पररणियमों के उपबंि लार्गू होते हैं उिके प्रत् येक िर्गय की बाबत 

एक पूरी और अद्यति ज् येष् ठता सूिी खंर् (1) के उपबंिों के अिुसार तैयार करे और बिाए रखे ।  

 (3) यक्रद दो या अणिक व् यण‍ तयों का क्रकसी णिणशष् र् ग्रेर् में लर्गातार सेिाकाल बराबर हो अथिा क्रकसी व् यण‍ त या क्रकन् हीं 

व् यण‍ तयों की सापेि ज् येष् ठता के णिषय में अन् यथा संदेह हो तो कुलसणिि स् िप्रेरिा से िह मामला कायय पररषद ्को प्रस्तुत कर सकेर्गा 

और यक्रद िह व् यण‍ त ऐसा अिुरोि करता ह ैतो िह मामला कायय पररषद ्को प्रस् तुत करेर्गा णजसका उस पर णिणिश् िय अंणतम होर्गा ।  

 27. णिश् िणिद्यालय के कमयिाररयों का हर्ाया जािा—(1) जहां णिश् िणिद्यालय के क्रकसी णशिक, शैिणिक कमयिाररिृंद के 

क्रकसी सदस् य या क्रकसी अन् य कमयिारी के णिरुद्ध क्रकसी अििार का अणभकथि हो, िहां णशिक या शैिणिक कमयिाररिृंद के सदस् य के 

मामले में कुलपणत और अन् य कमयिारी के मामले में णियुण‍ त करिे के णलए सिम प्राणिकारी (णजस े इसमें इसके पश् िात् णियणु‍ त 

प्राणिकारी कहा र्गया ह)ै णलणखत आदशे द्वारा, यथास् णाथणत, ऐसे णशिक, शैिणिक कमयिाररिृंद के सदस् य या अन् य कमयिारी को 

णिलंणबत कर सकेर्गा और कायय पररषद ्को उि पररणस् थणतयों की तुरंत ररपोर्य दरे्गा णजिमें िह आदशे क्रकया र्गया था :  

 परन् तु यक्रद कायय पररषद ्की यह राय ह ै क्रक मामले की पररणस् थणतयां ऐसी िहीं हैं क्रक णशिक या शैिणिक कमयिाररिृंद के 

सदस् य का णिलंबि होिा िाणहए तो िह उस आदशे को प्रणतसंहृत कर सकेर्गी ।  

 (2) कमयिाररयों की णियुण‍ त की संणिदा के णिबंििों में या सेिा के अन् य णिबंििों और शतों में क्रकसी बात के होते हुए भी, 

णशिकों और अन् य शैिणिक कमयिाररिृंद के संबंि में कायय पररषद ् और अन् य कमयिाररयों के संबंि में णियुण‍ त प्राणिकारी को, 

यथाणस् थणत, णशिक या शैिणिक कमयिाररिृंद के सदस् य अथिा अन् य कमयिारी को अििार के आिार पर हर्ािे की शण‍ त होर्गी ।  

 (3) यथापूिो‍ त के णसिाय, यथाणस् थणत, कायय पररषद ्या णियुण‍ त प्राणिकारी क्रकसी णशिक, शैिणिक कमयिाररिृंद के सदस् य 

या अन् य कमयिारी को हर्ािे के णलए तभी हकदार होर्गा जब उसके णलए उणित कारि हो, और उसे तीि मास की सूििा द ेदी र्गई हो 

या सूििा के बदले में तीि मास के िेति का संदाय क्रकया र्गया हो । 

 (4) क्रकसी णशिक, शैिणिक कमयिाररिृंद के सदस् य या अन् य कमयिारी को खंर् (2) या खंर् (3) के अिीि तब तक िहीं  हर्ाया 

जाएर्गा जब तक उसे उसके बारे में की जािे के णलए प्रस् ताणित कारयिाई के णिरुद्ध हतेुक दर्शयत करिे का युण‍ तयु‍ त अिसर ि दे क्रदया 

र्गया हो ।  

 (5) क्रकसी णशिक, शैिणिक कमयिाररिृंद के सदस् य या अन् य कमयिारी का हर्ाया जािा उस तारीख से प्रभािी होर्गा, णजसको 

हर्ाए जािे का आदशे क्रकया जाता ह ै:  

 परन् तु जहां कोई णशिक, शैिणिक कमयिाररिृंद का सदस् य या अन् य कमयिारी हर्ाए जािे के समय णिलंणबत है, िहां उसका 

हर्ाया जािा उस तारीख से प्रभािी होर्गा, णजसको िह णिलंणबत क्रकया र्गया था ।  



 22 

 (6) इस पररणियम के पूियर्गामी उपबंिों में क्रकसी बात के होते हुए भी, कोई णशिक, शैिणिक कमयिाररिृंद का सदस् य या अन् य 

कमयिारी,—  

 (क) यक्रद िह स् थायी कमयिारी ह ैतो, यथाणस् थणत, कायय पररषद ्या  णियुण‍ त प्राणिकारी को तीि मास की णलणखत 

सूििा दिेे या उसके बदले में तीि मास का िेति दिेे के पश् िात् ही पद त् यार्ग सकेर्गा;  

 (ख) यक्रद िह स् थायी कमयिारी िहीं ह ै तो, यथाणस् थणत, कायय पररषद ् या णियुण‍ त प्राणिकारी को एक मास की 

णलणखत सूििा दिेे या उसके बदले में एक मास का िेति दिेे के पश् िात् ही पद त् यार्ग सकेर्गा :  

 परन् तु ऐसा त् यार्गपत्र केिल उस तारीख से प्रभािी होर्गा णजसको, यथाणस् थणत, कायय पररषद ्या णियुण‍ त प्राणिकारी द्वारा िह 

त् यार्गपत्र स् िीकार क्रकया जाता ह ै।   

 28. सम् माणिक उपाणियां—(1) कायय पररषद,् णिद्या पररषद ्की णसफाररश पर और उपणस् थत तथा मतदाि करिे िाले सदस् यों 

के कम से कम दो-णतहाई बहुमत से पाररत संकल् प द्वारा कुलाध् यि से सम् माणिक उपाणियां प्रदाि करिे की प्रस् थापिा कर सकेर्गी :  

 परन् तु आपात णस् थणत की दशा में, कायय पररषद ्स् िप्रेरिा से ऐसी प्रस् थापिा कर सकेर्गी ।  

 (2) कायय पररषद,् उपणस् थत तथा मतदाि करिे िाले सदस् यों के कम से कम दो-णतहाई बहुमत से पाररत संकल् प द्वारा, 

कुलाध् यि की पूिय मंजूरी से, णिश् िणिद्यालय द्वारा प्रदत्त क्रकसी सम्माणिक उपाणि को िापस ले सकेर्गी ।  

 29. उपाणियों आक्रद का िापस णलया जािा—कायय पररषद,् उपणस् थत और मतदाि करिे िाले सदस् यों के दो-णतहाई से अन्यूि 

बहुमत से पाररत णिशेष संकल् प द्वारा क्रकसी व् यण‍ त को णिश् िणिद्यालय द्वारा प्रदत्त कोई उपाणि या णिद्या संबंिी णिशेष उपाणि या क्रदए 

र्गए क्रकसी प्रमािपत्र या णर्प् लोमा को उणित और पयायप् त कारि से िापस ले सकेर्गी :  

 परन् तु इस आशय का कोई संकल् प तब तक पाररत िहीं क्रकया जाएर्गा जब तक उस व् यण‍ त को, ऐसे समय के भीतर जो उस 

सूििा में णिणिर्दयष् र् क्रकया जाए, यह हतेुक दर्शयत करिे की णलणखत सूििा ि द ेदी जाए क्रक ऐसा संकल् प ‍ यों ि पाररत कर क्रदया जाए 

और जब तक कायय पररषद ्द्वारा उसके आिेपों पर, यक्रद कोई हों, और क्रकसी ऐसे साक्ष् य पर, जो िह उिके समथयि में प्रस् तुत करे, णििार 

िहीं  कर णलया जाता ह ै।  

 30. णिश् िणिद्यालय के छात्रों में अिशुासि बिाए रखिा—(1) णिश् िणिद्यालय के छात्रों के संबंि में अिुशासि और 

अिुशासणिक कारयिाई संबंिी सभी शण‍ तयां कुलपणत में णिणहत होंर्गी ।  

 (2) खंर् (1) में णिर्दयष् र् शण‍ तयों का प्रयोर्ग करिे में कुलपणत की सहायता करिे के णलए णिश् िणिद्यालय का एक कुलािुशासक 

होर्गा णजसकी अध् यादशेों द्वारा णिणहत रीणत से आिायों और उपािायों में से कायय पररषद ्द्वारा णियुण‍ त की जाएर्गी ।  

 (3) कुलपणत खंर् (1) में णिर्दयष् र् सभी शण‍ तयां या उिमें से कोई, जो िह ठीक समझे, कुलािुशासक और ऐसे अन्य 

अणिकाररयों को, णजन्हें िह इस णिणमत्त णिणिर्दयष् र् करे, प्रत्यायोणजत कर सकेर्गा ।  

 (4) कुलपणत, अिुशासि बिाए रखिे की तथा ऐसी कारयिाई करिे की, जो उसे अिुशासि बिाए रखिे के णलए समुणित प्रतीत 

हो, अपिी शण‍ तयों की व् यापकता पर प्रणतकूल प्रभाि र्ाले णबिा, ऐसी शण‍ तयों के प्रयोर्ग में, आदशे द्वारा, णिदशे दे सकेर्गा क्रक क्रकसी 

छात्र या क्रकन् हीं छात्रों को क्रकसी णिणिर्दयष् र् अिणि के णलए णिकाला या णिष् काणसत क्रकया जाए अथिा णिश् िणिद्यालय के क्रकसी 

महाणिद्यालय, संस् था, णिभार्ग या णिद्यापीठ में क्रकसी पाठ्यक्रम या पाठ्यक्रमों में कणथत अिणि के णलए प्रिेश ि क्रदया जाए अथिा उसे 

उतिे जुमायिे का दरं् क्रदया जाए, जो आदशे में णिणिर्दयष् र् ह ैअथिा उसे णिश् िणिद्यालय या महाणिद्यालय, संस् था या णिभार्ग या क्रकसी 

णिद्यापीठ द्वारा संिाणलत परीिा या परीिाओं में सणम् मणलत होिे स ेएक या अणिक िषों के णलए णििर्जयत क्रकया जाए अथिा संबंणित 

छात्र या छात्रों का, क्रकसी परीिा या क्रकन् हीं परीिाओं का, णजसमें िह या िे सणम् मणलत हुआ है या हुए हैं, परीिाफल रद्द कर       क्रदया 

जाए ।   

 (5) महाणिद्यालयों, संस् थाओं के प्रािायों, णिद्यापीठों के संकायाध् यिों तथा णिश् िणिद्यालय के अध् यापि णिभार्गों के अध् यिों 

को यह प्राणिकार होर्गा क्रक िे अपिे-अपिे महाणिद्यालयों, संस् थाओं, णिद्यापीठों और णिश् िणिद्यालय के अध् यापि णिभार्गों में छात्रों पर 

ऐसी सभी अिुशासणिक शण‍ तयों का प्रयोर्ग करें जो उि महाणिद्यालयों, संस् थाओं, णिद्यापीठों और अध् यापि के उणित संिालि के णलए 

आिश् यक हों ।  

 (6) कुलपणत तथा प्रािायों और खंर् (5) में णिणिर्दयष् र् अन् य व् यण‍ तयों की शण‍ तयों पर प्रणतकूल प्रभाि र्ाले णबिा, अिुशासि 

और उणित आिरि संबंिी णिस् तृत णियम णिश् िणिद्यालय द्वारा बिाए जाएंर्गे । महाणिद्यालयों, संस् थाओं के प्रािायय, णिद्यापीठों के 

संकायाध् यि और णिश् िणिद्यालय के अध् यापि णिभार्गों के अध् यि ऐसे अिुपूरक णियम बिा सकें र्गे, जो िे इसमें कणथत प्रयोजिों के णलए 

आिश् यक समझें ।   

 (7) प्रिेश के समय, प्रत् येक छात्र से यह अपेिा की जाएर्गी क्रक िह इस आशय की घोषिा पर हस् तािर करे क्रक िह अपिे को 

कुलपणत की तथा णिश् िणिद्यालय के अन् य प्राणिकाररयों की अिुशासणिक अणिकाररता के अिीि अर्पयत करता ह ै।  



 23 

 31. महाणिद्यालयों, आक्रद के छात्रों में अिशुासि बिाए रखिा—ऐसे महाणिद्यालय या संस्था के बारे में, जो णिश् िणिद्यालय 

द्वारा िहीं िलाई जाती है, अिुशासि तथा अिुशासणिक कारयिाई संबंिी सभी शण‍ तयां, अध्यादशेों द्वारा णिणहत प्रक्रक्रया के अिुसार, 

यथाणस्थणत, महाणिद्यालय या संस्था के प्रािायय में णिणहत होंर्गी । 

 32. महाणिद्यालय आक्रद को णिश् िणिद्यालय के णिशषेाणिकार दिेा—(1) णिश् िणिद्यालय की अणिकाररता में णस्थत 

महाणिद्यालयों और अन्य संस्थाओं को णिश् िणिद्यालय के ऐसे णिशेषाणिकार क्रदए जा सकें र्गे जो कायय पररषद ्और महाणिद्यालय णिकास 

पररषद ्णिम् िणलणखत शतों पर णिणिणश् ित करे, अथायत् :— 

 (क) प्रत्येक ऐसे महाणिद्यालय या संस्था का णियणमत रूप से र्गरठत एक शासी णिकाय होर्गा, णजसमें कायय पररषद ्

द्वारा अिुमोक्रदत पन्रह से अिणिक व्यण‍ त होंर्गे तथा णजिमें, अन्य व्यण‍ तयों सणहत कायय पररषद ् द्वारा िामणिर्दयष् र् 

णिश् िणिद्यालय के दो णशिक और अध्यापि कमयिाररिृंद के तीि प्रणतणिणि होंर्गे, णजिमें से एक महाणिद्यालय या संस्था का 

प्रािायय होर्गा । शासी णिकाय के सदस्यों की णियुण‍ त और महाणिद्यालय या संस्था के प्रबंि पर प्रभाि र्ालिे िाले अन्य 

मामलों के णलए प्रक्रक्रया अध्यादशेों द्वारा णिणहत की जाएर्गी : 

 परंतु सरकार द्वारा िलाए जािे िाले महाणिद्यालयों और संस्थाओं की दशा में उ‍ त शतय लार्गू िहीं होर्गी, तथाणप, 

उिकी एक सलाहकार सणमणत होर्गी, णजसमें पन्रह से अिणिक व्यण‍ त होंर्गे तथा णजिमें अन्य व्यण‍ तयों सणहत तीि णशिक 

होंर्गे णजिमें से एक महाणिद्यालय या संस्था का प्रािायय और कायय पररषद ्द्वारा िामणिर्दयष् र् णिश् िणिद्यालय के दो णशिक 

होंर्ग;े 

 (ख) प्रत्येक ऐसा महाणिद्यालय या ऐसी संस्था णिम् िणलणखत मामलों में कायय पररषद ्और महाणिद्यालय णिकास 

पररषद ्का समािाि करेर्गी, अथायत् :— 

(i) उसकी िास-सुणििा की तथा अध्यापि के णलए उपस्कर की उपयु‍ तता और पयायप् तता; 

(ii) अध्यापि कमयिाररिृंद की अहयताएं तथा उिकी पयायप् तता और उिकी सेिा की शतें; 

(iii) छात्रों के णििास, कल्याि, अिुशासि और पययिेिि के णलए प्रबंि; 

(iv) महाणिद्यालय या संस्था को णिरंतर िलािे के णलए की र्गई णित्तीय व्यिस्था की पयायप् तता; और 

(v) ऐसे अन्य मामले, जो णिश् िणिद्यालय णशिा का स्तर बिाए रखिे के णलए आिश्यक हों; 

 (र्ग) णिद्या पररषद ्की णसफाररश के णबिा क्रकसी भी महाणिद्यालय या संस्था को णिश् िणिद्यालय के णिशेषाणिकार 

िहीं क्रदए जाएंर्गे, जो णिद्या पररषद ्द्वारा इस प्रयोजिाथय णियु‍ त की र्गई णिरीिि सणमणत की ररपोर्य पर णििार करिे के 

पश् िात् ही की जाएर्गी; 

 (घ) णिश् िणिद्यालय का णिशेषाणिकार प्राप् त करिे के इच्छुक महाणिद्यालयों और संस्थाओं से यह अपेिा की जाएर्गी 

क्रक िे ऐसा करिे के अपिे आशय की णलणखत सूििा कुलसणिि को इस प्रकार दें ताक्रक िह उस िषय से, णजससे आिेक्रदत अिुज्ञा 

प्रभािी होिी ह,ै पूियिती पन् रह अर्गस्त तक उिके पास पहुिं जाए; 

 (ङ) महाणिद्यालय या संस्था, कायय पररषद ्और महाणिद्यालय णिकास पररषद ्और णिद्या पररषद ्की पूिय अिुज्ञा के 

णबिा ऐसे क्रकसी णिषय पाठ्यक्रम में णशिि दिेा स् थणर्गत िहीं करेर्गी, णजसका अध्यापि करिे के णलए िह प्राणिकृत है और 

णजसका िह अध्यापि करती ह ै। 

(2) णिश् िणिद्यालय के णिशेषाणिकार प्राप् त महाणिद्यालयों या संस्थाओं में अध्यापि कमयिाररिृंद और प्रािायों की णियणु‍ त 

अध्यादशेों द्वारा णिणहत रीणत से की जाएर्गी : 

परंतु इस खंर् की कोई बात सरकार द्वारा िलाए जािे िाले महाणिद्यालयों और संस्थाओं को लार्गू िहीं होर्गी । 

(3) खंर् (2) में णिर्दयष् र् प्रत्येक महाणिद्यालय या संस्था के प्रशासणिक तथा अन्य अशैिणिक कमयिाररिृंद की सेिा की शतें िे 

होंर्गी, जो अध्यादशेों में अणिकणथत की जाएं : 

परंतु इस खंर् की कोई बात सरकार द्वारा िलाए जािे िाले महाणिद्यालयों और संस्थाओं को लार्गू िहीं होर्गी । 

(4) णिश् िणिद्यालय के णिशेषाणिकार प्राप् त प्रत्येक महाणिद्यालय या संस्था का णिरीिि णिद्या पररषद ्द्वारा स्थाणपत सणमणत 

प्रत् येक दो शैिणिक िषों में कम से कम एक बार करेर्गी और इस सणमणत की ररपोर्य णिद्या पररषद ्को प्रस्तुत की जाएर्गी, जो उसे अपिी 

ऐसी णसफाररशों के साथ, णजन्हें िह उणित समझे, महाणिद्यालय णिकास पररषद ्और कायय पररषद ्को भेजेर्गी । 

(5) ररपोर्य तथा णिद्या पररषद ्की णसफाररशों, यक्रद कोई हों, पर णििार करिे के पश् िात् महाणिद्यालय णिकास पररषद ्और 

कायय पररषद ्अपिी रर्प्पणियों सणहत, यक्रद कोई हों, णजन्हें िह उणित समझे, ररपोर्य की एक प्रणत महाणिद्यालय या संस्था के शासी 

णिकाय को यथोणित कारयिाई के णलए भेजेर्गी । 



 24 

(6) महाणिद्यालय णिकास पररषद ्और काययकारी पररषद,् णिद्या पररषद ्से परामशय करिे के पश् िात ्क्रकसी महाणिद्यालय या 

संस्था को क्रदए र्गए क्रकन्हीं णिशेषाणिकारों को िापस ले सकेर्गी यक्रद क्रकसी भी समय उसका यह णििार ह ैक्रक महाणिद्यालय या संस्था 

उि शतों में से क्रकन्हीं को पूरा िहीं कर रही है णजिके आिार पर महाणिद्यालय या संस्था को ऐसे णिशेषाणिकार क्रदए र्गए थे : 

परंतु क्रकन्हीं णिशेषाणिकारों को इस प्रकार िापस लेिे के पहले संबंणित महाणिद्यालय या संस्था के शासी णिकाय को कायय 

पररषद ्के समि यह अभ्यािेदि करिे का अिसर प्रदाि क्रकया जाएर्गा क्रक ऐसी कारयिाई ‍यों िहीं की जािी िाणहए । 

(7) खंर् (1) में दी र्गई शतों के अिीि रहते हुए, अध्यादशेों द्वारा,— 

 (i) ऐसी अन्य शतें, जो आिश्यक समझी जाएं; 

 (ii) णिश् िणिद्यालय के णिशेषाणिकारों को महाणिद्यालयों तथा संस्थाओं को दिेे और इि णिशेषाणिकारों को िापस 

लेिे से संबंणित प्रक्रक्रया, 

णिणहत की जा सकें र्गी । 

 33. दीिातं समारोह—उपाणियां प्रदाि करिे या अन् य प्रयोजिों के णलए णिश् िणिद्यालय के दीिांत समारोह उस रीणत से क्रकए 

जाएंर्ग ेजो अध् यादशेों द्वारा णिणहत क्रकए जाएं ।  

 34. अणििशेिों का काययकारी अध् यि—जहां णिश् िणिद्यालय के क्रकसी प्राणिकारी या ऐसे प्राणिकारी की क्रकसी सणमणत के 

अणििेशि की अध् यिता करिे के णलए क्रकसी अध् यि या सभापणत का उपबंि िहीं क्रकया र्गया ह ैअथिा णजस अध् यि या सभापणत के 

णलए इस प्रकार का उपबंि क्रकया र्गया है िह अिुपणस् थत ह ैतो उपणस् थत सदस् य ऐसे अणििेशि की अध् यिता करिे के णलए अपिे में से 

एक सदस् य को णििायणित करेंर्गे ।  

 35. त् यार्गपत्र—सभा, कायय पररषद,् णिद्या पररषद ्या णिश् िणिद्यालय के क्रकसी अन् य प्राणिकारी या ऐस ेप्राणिकारी की क्रकसी 

सणमणत के पदिे सदस् य से णभन् ि कोई सदस् य कुलसणिि को संबोणित पत्र द्वारा पद त् यार्ग कर सकेर्गा और ऐसा पत्र कुलसणिि को प्राप् त 

होते ही त् यार्गपत्र प्रभािी हो जाएर्गा ।  

 36. णिरहयता—(1) कोई भी व् यण‍ त णिश् िणिद्यालय के प्राणिकाररयों में स े क्रकसी का सदस् य िुिे जािे और होिे के णलए 

णिरर्हयत होर्गा यक्रद—  

  (i) िह णिकृतणित्त ह;ै  

  (ii) िह अिुन् मोणित क्रदिाणलया ह;ै  

 (iii) िह क्रकसी ऐसे अपराि के णलए, णजसमें िैणतक अिमता अंतियणलत है, क्रकसी न्यायालय द्वारा दोषणसद्ध क्रकया 

र्गया ह ैऔर उसकी बाबत छह मास से अन् यूि कारािास से दरं्ाक्रदष् र् क्रकया र्गया ह ै।   

 (2) यक्रद यह प्रश् ि उठता ह ैक्रक ‍ या कोई व् यण‍ त खंर् (1) में िर्ियत णिरहयताओं में से क्रकसी एक के अिीि ह ैया रहा ह ैतो िह 

प्रश् ि कुलाध् यि को णिणिश् िय के णलए णिदणेशत क्रकया जाएर्गा और उसका णिणिश् िय अंणतम होर्गा और ऐसे णिणिश् िय के णिरुद्ध क्रकसी 

णसणिल न् यायालय में कोई िाद या अन् य काययिाही िहीं होर्गी ।  

 37. सदस् यता और पद के णलए णििास की शतय—पररणियमों में क्रकसी बात के होते हुए भी, ऐसा कोई व् यण‍ त, जो भारत में 

मामूली तौर पर णििासी िहीं ह,ै णिश् िणिद्यालय का कोई अणिकारी या णिश् िणिद्यालय के क्रकसी प्राणिकारी का सदस् य बििे के णलए 

पात्र िहीं होर्गा ।  

 38. अन् य णिकायों की सदस् यता के आिार पर प्राणिकाररयों की सदस् यता—पररणियमों में क्रकसी बात के होते हुए भी, िह 

व् यण‍ त जो क्रकसी णिणशष् र् प्राणिकारी या णिकाय का सदस् य होिे के िाते या क्रकसी णिणशष् र् णियुण‍ त पर होिे के िाते णिश् िणिद्यालय में 

कोई पद िारि करता ह ैया णिश् िणिद्यालय के क्रकसी प्राणिकारी या णिकाय का सदस् य ह,ै केिल तब तक ऐसा पद या सदस् यता िारि 

करेर्गा जब तक िह, यथाणस् थणत, उस णिणशष् र् प्राणिकारी या णिकाय का सदस् य या उस णिणशष् र् णियुण‍ त पर बिा रहता है ।

 39. पिूय छात्र संर्गम—(1) णिश् िणिद्यालय के णलए एक पूिय छात्र संर्गम होर्गा ।  

 (2) पूिय छात्र संर्गम की सदस् यता के णलए अणभदाय अध् यादशेों द्वारा णिणहत क्रकया जाएर्गा ।  

 (3) पूिय छात्र संर्गम का कोई सदस् य मतदाि करिे या णििायिि के णलए खडे होिे का तभी हकदार होर्गा जब िह णििायिि की 

तारीख के पहले कम से कम एक िषय तक संर्गम का सदस् य रहा ह ैऔर णिश् िणिद्यालय का कम से कम पांि िषय की अिणस्थणत का स् िातक 

ह ै:  

 परंतु एक िषय की सदस् यता पूरी करिे संबंिी शतय प्रथम णििायिि की दशा में लार्ग ूिहीं होर्गी ।  

 40. छात्र पररषद—्(1) णिश् िणिद्यालय में प्रत् येक शैिणिक िषय के णलए एक छात्र पररषद ् र्गरठत की जाएर्गी, णजसमें 

णिम् िणलणखत होंर्ग—े  

  (क) छात्र कल् याि संकायाध् यि, जो क्रक छात्र पररषद ्के अध् यि भी होंर्ग;े  



 25 

 (ख) िे सभी छात्र, णजन् होंिे पूियिती शैिणिक िषय में अध् ययि, लणलत कला, क्रीडा और णिस् तार कायय में पुरस् कार 

जीते हैं ;  

  (र्ग) बीस छात्र, जो अध् ययि, क्रीडा क्रक्रयाकलापों और व् यण‍ तत् ि के सिोतोन् मुखी णिकास में प्रणतभा के आिार पर 

णिद्या पररषद ्द्वारा िामणिर्दयष् र् क्रकए जाएं : 

 परंतु णिश् िणिद्यालय के क्रकसी छात्र को णिश् िणिद्यालय से संबंणित क्रकसी णिषय को छात्र पररषद ्के समि लािे का अणिकार 

होर्गा, यक्रद अध् यि ऐसा अिुज्ञात करे, और उसे क्रकसी भी अणििेशि में ििाय में भार्ग लेिे का उस समय अणिकार होर्गा, जब उस णिषय 

के बारे में णििार क्रकया जाए ।  

 (2) अध् ययि, छात्र कल् याि काययक्रमों और णिश् िणिद्यालय के सािारि काययकरि से संबंणित महत्ि के अन्य णिषयों के बारे में 

णिश् िणिद्यालय के समुणित प्राणिकारी को सुझाि दिेा छात्र पररषद ्के कृत्य होंर्गे और ऐसे सुझाि सियसम्मणत से क्रदए जाएंर्गे ।  

 (3) छात्र पररषद ्शैिणिक िषय में कम से कम एक बार, अणिमाितः उस िषय के प्रारम्भ में अपिा अणििेशि करेर्गी ।  

 41. अध् यादशे कैस ेबिाए जाएंर्गे—(1) िारा 31 की उपिारा (2) के अिीि बिाए र्गए प्रथम अध् यादशे, कायय पररषद ्द्वारा 

णिम् िणलणखत उपिाराओं में णिणिर्दयष् र् रीणत से क्रकसी भी समय, संशोणित, णिरणसत या पररिर्ियत क्रकए जा सकें र्गे ।  

 (2) िारा 31 की उपिारा (1) में प्रर्गणित मामलों के संबंि के कायय पररषद ्द्वारा कोई अध् यादशे तब तक िहीं बिाया जाएर्गा 

जब तक क्रक ऐसे अध् यादशे का प्रारूप णिद्या पररषद ्द्वारा प्रस् थाणपत िहीं क्रकया र्गया हो ।  

 (3) कायय पररषद ्को इस बात की शण‍ त िहीं होर्गी क्रक िह णिद्या पररषद ्द्वारा खंर् (2) के अिीि प्रस् थाणपत क्रकसी अध् यादशे 

में प्रारूप का संशोिि करे ककंतु िह प्रस् थापिा को िामंजूर कर सकेर्गी या णिद्या पररषद ्के पुिर्ियिार के णलए उस संपूिय प्रारूप को या 

उसके क्रकसी भार्ग को उि क्रकन् हीं संशोििों सणहत णजिका सुझाि कायय पररषद ्द,े िापस भेज सकेर्गी ।  

 (4) जहां कायय पररषद ्िे णिद्या पररषद ्द्वारा प्रस् थाणपत क्रकसी अध् यादशे के प्रारूप को िामंजूर कर क्रदया ह ैया उसे िापस कर 

क्रदया ह,ै िहां णिद्या पररषद ्उस प्रश् ि पर िए णसरे स ेणििार कर सकेर्गी और उस दशा में जब मूल प्रारूप उपणस् थत तथा मतदाि करिे 

िाले सदस् यों के कम से कम दो-णतहाई और णिद्या पररषद ्के सदस् यों की कुल संख् या के आिे से अणिक बहुमत से पुि: अणभपुष् र् कर क्रदया 

जाता ह ैतब प्रारूप कायय पररषद ्को िापस भेजा जा सकेर्गा जो या तो उसे माि लेर्गी या उसे कुलाध् यि को णिदणेशत कर दरे्गी, णजसका 

णिणिश् िय अंणतम होर्गा ।  

 (5) कायय पररषद ्द्वारा बिाया र्गया प्रत् येक अध् यादशे तुरंत प्रभािी होर्गा ।  

 (6) कायय पररषद ्द्वारा बिाया र्गया प्रत् येक अध् यादशे, उसके अंर्गीकार क्रकए जािे की तारीख से दो सप् ताह के भीतर कुलाध् यि 

को प्रस् तुत क्रकया जाएर्गा ।  

 (7) कुलाध् यि को, णिश् िणिद्यालय को यह णिदशे दिेे की शण‍ त होर्गी क्रक िह क्रकसी अध् यादशे के प्रितयि को निंलणबत कर द े।  

 (8) कुलाध् यि, कायय पररषद ्को खंर् (7) में णिर्दयष् र् अध् यादशे पर अपिे आिेप के बारे में सूणित करेर्गा और णिश् िणिद्यालय से 

रर्प् पिी प्राप् त कर लेिे के पश् िात् िह या तो अध् यादशे का णिलंबि करिे िाले आदेश को िापस ले सकेर्गा या अध् यादशे को िामंजूर कर 

दरे्गा और उसका णिणिश् िय अंणतम होर्गा ।  

 42. णिणियम—(1) णिश् िणिद्यालय के प्राणिकारी णिम् िणलणखत णिषयों के बारे में इस अध्यादशे, पररणियमों और अध् यादशेों से 

संर्गत णिणियम बिा सकें र्गे, अथायत् :—  

 (i) अपिे अणििेशिों में अिुसरि की जािे िाली प्रक्रक्रया और र्गिपूर्तय के णलए अपेणित सदस् यों की संख् या 

अणिकणथत करिा;   

 (ii) उि सभी णिषयों के णलए उपबंि करिा णजिका अध् यादशे, पररणियमों या णिणियमों द्वारा णिणहत क्रकए जािे 

िाले अध् यादशेों द्वारा क्रकया जािा अपेणित ह;ै  

 (iii) ऐसे सभी अन् य णिषयों के णलए उपबंि करिा, जो केिल ऐसे प्राणिकाररयों या उिके द्वारा णियु‍ त सणमणतयों 

से संबंणित हों और णजिके णलए पररणियमों या अध् यादशेों द्वारा उपबंि ि क्रकया र्गया हो ।  

 (2) णिश् िणिद्यालय का प्रत् येक प्राणिकारी ऐसे प्राणिकारी के सदस् यों को अणििेशिों की तारीखों की और उि अणििेशिों में 

णििाराथय कायय की सूििा दिेे और अणििेशिों की काययिाही का अणभलेख रखिे के णलए णिणियम बिाएर्गा ।  

 (3) कायय पररषद ्इि पररणियमों के अिीि बिाए र्गए क्रकसी णिणियम का ऐसी रीणत से, जो िह णिणिर्दयष् र् करे, संशोिि या 

क्रकसी ऐसे णिणियम के णिष् प्रभाि क्रकए जािे का णिदशे द ेसकेर्गी ।  

  



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43. शण‍ तयों का प्रत् यायोजि—इस अणिणियम और पररणियमों के उपबंिों के अिीि रहते हुए, णिश् िणिद्यालय का कोई 

अणिकारी या प्राणिकारी अपिी शण‍ तयां, अपिे णियंत्रि में के क्रकसी अन् य अणिकारी या प्राणिकारी या व् यण‍ त को इस शतय के अिीि 

रहते हुए प्रत् यायोणजत कर सकेर्गा क्रक इस प्रकार प्रत् यायोणजत शण‍ तयों के प्रयोर्ग का संपूिय उत्तरदाणयत् ि ऐसी शण‍ तयों का प्रत् यायोजि 

करिे िाले अणिकारी या प्राणिकारी में णिणहत बिा रहरे्गा ।   

 

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