Central · Act 31 of 2016

The Insolvency and Bankruptcy Code, 2016.

An Act to consolidate and amend the laws relating to reorganisation and insolvency resolution of corporate persons, partnership firms and individuals in a time bound manner for maximisation of value of assets of such persons, to promote entrepreneurship, availability of credit and balance the interests of all the stakeholders including alteration in the order of priority of payment of Government dues and to establish an Insolvency and Bankruptcy Board of India, and for matters connected therewith or incidental thereto.

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दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता, 2016 

(2016 का अहधहनयम सखं याकं 31) 

 [28 मई, 2016]  

हनगहमत व् यह‍ तयों, भागीिारी फमों और व् यह‍ ियों के पनुगगठन और दिवाला समाधान स ेसबंहंधत हवहधयों का  

समयबद्ध रीहत में ऐस ेव् यह‍ तयों की आह‍ तयों के मलू् य के अहधकतमीकरण के हलए समेकन तथा  

सशंोधन करने, उद्यमता, उधार की उपलब् धता और सभी पणधाररयों के हितों के संतलुन का 

सवंधगन करने, हिसके अन् तगगत सरकारी शोध् यों के संिाय की परू्वगकता के  

क्रम में पररवतगन भी ि ैतथा भारतीय दिवाला और शोधन अक्षमता  

बोर्ग की ‍ थापना करन ेऔर उसस ेसबंहंधत या उससे  

आनषुहंगक हवषयों का उपबंध  

करन ेके हलए  

अहधहनयम   

 भारत गणराज् य के सड़सठवें वषग में संसि ्द्वारा हनम् नहलहित रूप में यि अहधहनयहमत िो :—  

भाग 1 

प्रारंहभक  

 1. सहंक्षप् त नाम, हव‍ तार और प्रारंभ—(1) इस संहिता का संहक्षप् त नाम दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता, 2016 ि ै।  

 (2) इसका हव‍ तार संपूणग भारत पर ि ै:   

 परन् त ुइस संहिता के भाग 3 का हव‍ तार िम् मू-कश् मीर राज् य पर निीं िोगा ।  

 (3) यि उस तारीि को प्रवृत्त िोगा िो केन् रीय सरकार, रािपत्र में अहधसूचना द्वारा हनयत करे :  

 परन् त ुइस संहिता के हवहभन् न उपबंधों के हलए हभन् न-हभन् न तारीिें हनयत की िा सकें गी और ऐसे दकसी उपबंध में इस संहिता के 

प्रारंभ के प्रहतहनिशे का यि  अथग लगाया िाएगा दक यि उ‍ त उपबंध के प्रारंभ के प्रहतहनिशे ि ै।  

 2. लाग ूिोना—इस संहिता के उपबंध—  

  (क) कंपनी अहधहनयम, 2013 (2013 का 18) या दकसी पूवग कंपनी हवहध के अधीन हनगहमत दकसी कंपनी को;  

 (ि) तत् समय प्रवृत्त दकसी हवशेष अहधहनयम द्वारा शाहसत कोई अन् य कंपनी हसवाय ििां तक उ‍ त उपबंध ऐसे हवशेष 

अहधहनयम के उपबंधों के असंगत न िो;  

 (ग) सीहमत िाहयत् व भागीिारी अहधहनयम, 2008 (2009 का 6) के अधीन हनगहमत दकसी सीहमत िाहयत् व भागीिारी 

को;  

 (घ) तत् समय प्रवृत्त दकसी हवहध के अधीन हनगहमत ऐसे अन् य हनगहमत हनकाय को हिसे केन् रीय सरकार इस हनहमत्त 

अहधसूचना द्वारा हवहनर्िग‍ ि करे; 1***  

 2[(ङ) हनगहमत ऋहणयों के व् यह‍ तगत प्रत् याभूहतिाता;  

 (च) भागीिारी फमग और ‍ वत् वधारी फमग; और  

 (छ) िंर् (ङ) में हनर्िग‍ ि व् यह‍ तयों से हभन् न व् यह‍ ि;]  

यथाह‍ थहत, उनके दिवाहलयापन, पररसमापन, ‍ वैह‍ छक पररसमापन या शोधन अक्षमता के संबंध में लागू िोंगे ।  

3. पररभाषाएं—इस अहधहनयम में िब तक दक संिभग से अन् यथा अपेहक्षत न िो,—  

(1) “बोर्ग” से धारा 188 की उपधारा (1) के अधीन ‍ थाहपत भारतीय दिवाला और शोधन अक्षमता बोर्ग अहभप्रेत ि;ै   

  (2) “पीठ” से न् यायहनणागयक प्राहधकारी की कोई पीठ अहभप्रेत िै;   

  (3) “उपहवहध” से धारा 205 के अधीन दिवाला वृहत्तक अहभकरण द्वारा बनाई गई उपहवहधयां अहभप्रेत िैं;   

(4) “प्रभार” से, यथाह‍ थहत, दकसी व् यह‍ त या उसके दकसी उपक्रम या िोनों की संपहत्त या आह‍ तयों पर प्रहतभूहत के रूप 

में सृहित कोई हित या धारणाहधकार अहभप्रेत ि ैऔर हिसके अंतगगत बंधक भी िै;   

(5) “अध् यक्ष” से बोर्ग का अध् यक्ष अहभप्रेत ि ै;   

                                                 
1 2018 के अहधहनयम सं० 8 की धारा 2 द्वारा लोप दकया गया ।   
2 2018 के अहधहनयम सं० 8 की धारा 2 द्वारा प्रहत‍ थाहपत । 



 2 

(6) “िावा” से—   

(क) संिाय का कोई अहधकार, चाि े ऐसा अहधकार दकसी हनणगय में लेिबद्ध, हनयत, हववादित, 

अहववादित, हवहधक, साम् यापूणग, प्रहतभूत या अप्रहतभूत ि ैया निीं हिसके अंतगगत उधार या अहिम भी िै; या  

(ि) तत् समय प्रवृत्त दकसी हवहध के अधीन संहविा के भंग के हलए उपचार, यदि ऐसे भंग से संिाय का 

कोई अहधकार उत् पन् न िोता ि ैचाि ेऐसा अहधकार हनणगय में लेिबद्ध, हनयत, पररप‍ व, अपररप‍ व, हववादित, 

अहववादित, प्रहतभूत या अप्रहतभूत ि ैया निीं,  

 अहभप्रेत ि;ै  

(7) “हनगहमत व् यह‍ त” से कंपनी अहधहनयम, 2013 (2013 का 18) की धारा 2 के िंर् (20) में यथा पररभाहषत 

कोई कंपनी, सीहमत िाहयत् व भागीिारी अहधहनयम, 2008 (2009 का 6) की धारा 2 की उपधारा (1) के िंर् (ढ) में यथा 

पररभाहषत कोई सीहमत िाहयत् व भागीिारी या तत् समय प्रवृत्त दकसी अन् य हवहध के अधीन सीहमत िाहयत् व के साथ हनगहमत 

कोई अन् य व् यह‍ त ि,ै ककंतु इसके अतंगगत कोई हवत्तीय सेवा प्रिाता निीं िै;   

(8) “हनगहमत ऋणी” से कोई ऐसा हनगहमत व् यह‍ त अहभप्रेत ि ैिो दकसी व् यह‍ त का ऋणी ि;ै  

(9) “कोर सेवाओं” से हनम् नहलहित के हलए दकसी सूचना उपयोहगता द्वारा िी िाने वाली सेवाएं अहभप्रेत िैं—   

(क) ऐसे प्ररूप और रीहत में िो हवहित की िाए, हवत्तीय िानकारी को इलै‍ राहनक रूप में भेिने को 

‍ वीकार करना;   

(ि) हवत्तीय िानकारी का सुरहक्षत और शुद्ध अहभलेिन;   

(ग) दकसी व् यह‍ त द्वारा भेिी गई हवत्तीय िानकारी का अहधप्रमाणन और सत् यापन;   

(घ) व् यह‍ तयों को सूचना उपयोहगता के पास भंर्ाररत ऐसी िानकारी तक पहंच उपलब् ध कराना िो 

हवहनर्िग‍ ि की िाए;   

(10) “लेनिार” से कोई ऐसा व् यह‍ त अहभप्रेत ि ै हिसको कोई ऋण शोध् य ि ैऔर इसके अंतगगत कोई हवत्तीय 

लेनिार, कोई प्रचालन लेनिार, कोई प्रहतभूत लेनिार, कोई अप्रहतभूत लेनिार और कोई हर्क्री धारक भी िै;   

(11) “ऋण” से दकसी िावे के संबंध में कोई िाहयत् व या बाध् यता अहभप्रेत ि ैिो दकसी व् यह‍ त से शोध् य ि ैऔर 

इसके अंतगगत कोई हवत्तीय ऋण और प्रचालन ऋण भी िै;  

(12) “व् यहतक्रम” से दकसी ऋण का तब असंिाय अहभप्रेत िै, िब ऋण की संपूणग रकम या कोई भाग या दक‍ त िये 

और संिये िो िाती ि ैतथा 1[उसे, यथाह‍ थहत, ऋणी या हनगहमत ऋणी द्वारा संिाय] निीं दकया िाता ि;ै   

(13) दकसी व् यह‍ त के संबंध में “हवत्तीय िानकारी” से िानकारी के हनम् नहलहित एक या अहधक प्रवगग अहभप्रेत िैं, 

अथागत् :— 

(क) व् यह‍ त के ऋण के अहभलेि;   

(ि) िाहयत् व के अहभलेि िब व् यह‍ त ऋण शोधक्षम ि;ै   

(ग) व् यह‍ त की आह‍ तयों के अहभलेि हिन पर प्रहतभूहत हित सृहित दकया गया ि;ै   

(घ) दकसी ऋण के हवरुद्ध व् यह‍ त द्वारा व् यहतक्रम की घिना के अहभलेि, यदि कोई िों;   

(ङ) व् यह‍ त के तुलनपत्र और नकिी प्रवाि हववरणों के अहभलेि;  

(च) ऐसी अन् य सूचना, िो हवहनर्िग‍ ि की िाएं;   

(14) “हवत्तीय सं‍ था” से हनम् नहलहित अहभप्रेत िैं—  

(क) कोई अनुसूहचत बैंक;   

(ि) भारतीय ररिवग बैंक अहधहनयम, 1934 (1934 का 2) की धारा 45झ में यथापररभाहषत हवत्तीय 

सं‍ था;   

(ग) कंपनी अहधहनयम, 2013 (2013 का 18) की धारा 2 के िंर् (72) में यथापररभाहषत कोई लोक 

हवत्तीय सं‍ था; और   

                                                 
1 2018 के अहधहनयम सं० 26 की धारा 2 द्वारा प्रहत‍ थाहपत ।   



 3 

(घ) कोई अन् य सं‍ था हिसे कें रीय सरकार अहधसूचना द्वारा, दकसी हवत्तीय सं‍ था के रूप में हवहनर्िग‍ ि 

करे;   

(15) “हवत्तीय उत् पाि” से प्रहतभूहत, बीमा की संहविाएं, िमा, प्रत् यय ठिराव, हिसके अंतगगत बैंक और हवत्तीय 

सं‍ था के द्वारा दिए गए ऋण और उधार भी िैं, सेवाहनवृहत्त फायिा योिनाएं, लघु बचत हलितें, एक मुरा से िसूरी मुरा में 

हवहनमय (चाि ेवि भारतीय िो या निीं) की सहंविा हिसका तत् काल हनपिान िोना िै, से हभन् न हविशेी मुरा संहविाएं या 

कोई अन् य हलित िो हवहित की िाए, अहभप्रेत ि;ै   

(16) “हवत्तीय सेवा” के अंतगगत हनम् नहलहित में से कोई सेवा ि,ै अथागत् :—  

(क) िमा को ‍ वीकार करना;  

(ि) दकसी अन् य व् यह‍ त की आह‍ तयों को, िो हवत्तीय उत् पािों से हमलकर बनी िै, सुरहक्षत रिना और 

उनका प्रशासन करना या ऐसा करने के हलए सिमत िोना;   

(ग) बीमा की संहविाओं को प्रभावी करना;   

(घ) दकसी अन् य व् यह‍ त की आह‍ तयों को, िो हवत्तीय उत् पािों से हमलकर बनी िैं, प्र‍ थाहपत करना, 

उनका प्रबंध करना या उनके प्रबंध के हलए सिमत िोना;   

(ङ) हनम् नहलहित प्रयोिनों के हलए प्रहतफल के हलए सलाि िनेा या िनेे के हलए सिमत िोना या उसके 

हलए याचना करना,—   

(i) दकसी हवत्तीय उत् पाि का क्रय, हवक्रय या प्रहतश्रुहत;   

(ii) दकसी हवत्तीय सेवा का उपभोग करना;   

(iii) दकसी हवत्तीय उत् पाि या हवत्तीय सेवा से सिबद्ध दकसी अहधकार का प्रयोग करना;   

(च) दकसी हवहनधान ‍ कीम को ‍ थाहपत करना या प्रचाहलत करना;   

(छ) दकसी हवत्तीय उत् पाि के ‍ वाहमत् व के अहभलेिों का अनुरक्षण या अंतरण करना;  

(ि) दकसी हवत्तीय उत् पाि के िारी दकए िाने या प्रहतश्रुहत की िामीिारी करना; या   

(झ) भंर्ाररत मूल् य या संिाय हलितों का हवक्रय, उपलब् ध कराना या िारी करना या संिाय सेवाएं 

उपलब् ध कराना;   

(17) “हवत्तीय सेवा प्रिाता” से दकसी हवत्तीय से‍ िर हवहनयामक द्वारा िारी प्राहधकार या प्रित्त रहि‍ रीकरण के 

हनबंधनों के अनुसार दकसी हवत्तीय सेवा को प्रिान करने के कारबार में लगा हआ व् यह‍ त अहभप्रेत ि;ै   

(18) “हवत्तीय सेवा हवहनयामक” से हवत्तीय क्षेत्र की सेवाओं या संव् यविारों को हवहनयहमत करने के हलए तत् समय 

प्रवृत्त दकसी हवहध के अधीन कोई गरठत प्राहधकरण या कोई हनकाय अहभप्रेत ि ैऔर इसके अंतगगत भारतीय ररिवग बैंक, 

भारतीय प्रहतभूहत और हवहनमय बोर्ग, भारतीय बीमा हवहनयामक और हवकास प्राहधकरण, पेंशन हनहध हवहनयामक 

प्राहधकरण और ऐसे अन् य कोई हवहनयामक प्राहधकारी अहभप्रेत िैं, िो कें रीय सरकार द्वारा अहधसूहचत दकए िाएं;   

(19) “दिवाला संबंधी वृहत्तक” से सि‍ य के रूप में दकसी दिवाला संबंधी वृहत्तक अहभकरण से धारा 207 के अधीन 

नामादंकत और बोर्ग से दिवाला संबंधी वृहत्तक के रूप में रहि‍ रीकृत कोई व् यह‍ त अहभप्रेत ि;ै   

(20) “दिवाला संबंधी वृहत्तक अहभकरण” से धारा 201 के अधीन बोर्ग से दिवाला संबंधी वृहत्तक अहभकरण के रूप 

में रहि‍ रीकृत कोई व् यह‍ त अहभप्रेत ि;ै   

(21) “सूचना उपयोहगता” से कोई ऐसा व् यह‍ त अहभप्रेत ि ैिो धारा 210 के अधीन दकसी सूचना उपयोहगता के 

रूप में बोर्ग से रहि‍ रीकृत िै; 

(22) “अहधसूचना” से रािपत्र में प्रकाहशत अहधसूचना अहभप्रेत ि ैऔर “अहधसूहचत” और “अहधसूहचत करना” 

पिों का तद्नुसार अथग लगाया िाएगा;   

(23) “व् यह‍ त” के अंतगगत हनम् नहलहित आते िैं—   

(क) व् यह‍ ि;   

(ि) अहवभ‍ त हििं ूकुिंुब;   

(ग) कंपनी;   

(घ) न् यास;   



 4 

(ङ) भागीिारी;  

(च) सीहमत िाहयत् व भागीिारी;  

(छ) दकसी कानून के अधीन ‍ थाहपत कोई अन् य अह‍ तत् व,   

और हिसके अंतगगत भारत से बािर हनवासी कोई व् यह‍ त भी ि;ै  

(24) “भारत में हनवासी व् यह‍ त” का विी अथग िोगा िो हविशेी मुरा प्रबंध अहधहनयम, 1999 (1999 का 42) की 

धारा 2 के िंर् (फ) में ऐसे पि का ि;ै  

(25) “भारत से बािर हनवासी व् यह‍ त” से ऐसा व् यह‍ त अहभप्रेत ि ैिो भारत में हनवासी व् यह‍ त से हभन् न ि;ै  

  (26) “हवहित” से केन् रीय सरकार द्वारा बनाए गए हनयमों द्वारा हवहित अहभप्रेत ि;ै  

 (27) “संपहत्त” के अंतगगत धन, माल, अनुयोज् य िावे, भारत या भारत से बािर ह‍ थत भूहम और संपहत्त के प्रत् येक 

हववरण तथा संपहत्त से उद्भूत िोने वाले या आनुषंहगक हित का प्रत् येक हववरण आता ि,ै हिसके अंतगगत, वतगमान में या 

भहव‍ य में या हनहित या आकह‍ मक हित भी िैं;    

  (28) “हवहनयम” से इस संहिता के अधीन बोर्ग द्वारा बनाए गए हवहनयम अहभप्रेत िैं;   

(29) “अनुसूची” से इस संहिता से उपाबद्ध अनुसूची अहभप्रेत िै;   

(30) “प्रहतभूत लेनिार” से कोई लेनिार अहभप्रेत ि ैहिसके पक्ष में प्रहतभूहत हित सृहित दकया गया ि;ै   

(31) “प्रहतभूहत हित” से दकसी संव् यविार द्वारा दकसी प्रहतभूत लेनिार के पक्ष में सृहित या उसके हलए उपलब् ध 

सम् पहत्त में का अहधकार, िक या हित या कोई िावा अहभप्रेत ि ैिो दकसी बाध् यता के संिाय या पालन को प्रहतभूत करता िै 

और इसके अंतगगत दकसी व् यह‍ त की दकसी बाध् यता के संिाय या पालन को प्रहतभूत करने वाला बंधक, प्रभार, आर्मान, 

समनुिशेन और हवल् लंगम या कोई अन् य करार या ठिराव भी ि ै:  

परन् तु प्रहतभूहत हित के अंतगगत कोई पालन प्रत् याभूहत निीं िोगी;   

(32) “हवहनर्िग‍ ि” से इस संहिता के अधीन बोर्ग द्वारा बनाए गए हवहनयमों द्वारा हवहनर्िग‍ ि अहभप्रेत ि ैऔर 

“हवहनर्िग‍ ि करना” पि का तद्नुसार अथग लगाया िाएगा;   

(33) “संव् यविार” के अंतगगत हनगहमत लेनिार से या उसको आह‍ तयों या हनहधयों, माल या सेवाओं के अंतरण के 

हलए हलहित में कोई करार या ठिराव भी िै;   

(34) “अंतरण” के अंतगगत हवक्रय, क्रय, हवहनमय, बंधक, हगरवी, िान, ऋण या अहधकार, िक, कब् िा या 

धारणाहधकार के अंतरण का कोई अन् य रूप भी ि;ै   

(35) “संपहत्तयों का अंतरण” से दकसी संपहत्त का अंतरण अहभप्रेत ि ैऔर इसके अन् तगगत संपहत्त में दकसी हित का 

अंतरण और ऐसी संपहत्त पर दकसी प्रभार का सृिन भी िै;   

(36) “कमगकार” का विी अथग ि ैिो औद्योहगक हववाि अहधहनयम, 1947 (1947 का 14) की धारा 2 के िंर् (ध)           

में ि;ै   

(37) उन शब् िों और पिों के, िो इस संहिता में प्रयु‍ त िैं, ककंतु पररभाहषत निीं िैं, ककंतु भारतीय संहविा 

अहधहनयम, 1872 (1872 का 9), भारतीय भागीिारी अहधहनयम, 1932 (1932 का 9), प्रहतभूहत संहविा (हवहनयमन) 

अहधहनयम, 1956 (1956 का 42), भारतीय प्रहतभूहत हवहनमय बोर्ग अहधहनयम, 1992 (1992 का 15), बैंकों और हवत्तीय 

सं‍ थाओं को शोध् य ऋण वसूली अहधहनयम, 1993 (1993 का 51), सीहमत िाहयत् व भागीिारी अहधहनयम, 2008 (2008 का 

6) और कंपनी अहधहनयम, 2013 (2013 का 19) में पररभाहषत िैं, विी अथग िोंगे िो क्रमश: उन अहधहनयमों में िैं ।  

भाग 2 

हनगहमत व् यह‍ तयों के हलए दिवाला समाधान और पररसमापन 

अध् याय 1 

प्रारंहभक  

 4. इस भाग का लाग ूिोना—यि भाग हनगहमत ऋहणयों के दिवाला और पररसमापन से संबंहधत हवषयों को विां लागू िोगा, 

ििां व् यहतक्रम की न् यूनतम रकम एक लाि रुपए िै :  

 परन् तु केन् रीय सरकार अहधसूचना द्वारा उ‍ चतर मूल् य के व् यहतक्रम की न् यूनतम रकम हवहनर्िग‍ ि कर सकेगी, िो एक करोड़ 

रुपए से अहधक निीं िोगी ।  



 5 

 5. पररभाषाएं—इस भाग में, िब तक दक संिभग से अन् यथा अपेहक्षत न िो,—  

(1) “न् यायहनणागयक प्राहधकरण” से इस भाग के प्रयोिनों के हलए कंपनी अहधहनयम, 2013 (2013 का 18) की 

धारा 408 के अधीन गरठत रा‍ रीय कंपनी हवहध अहधकरण अहभप्रेत ि;ै  

(2) “लेिापरीक्षक” से चािगर्ग अकाउिेंि अहधहनयम, 1949 (1949 का 38) की धारा 6 के अधीन भारतीय चािगर्ग 

अकाउंिेंि सं‍ थान द्वारा ऐसे रूप में व् यवसाय के हलए प्रमाहणत कोई चािगर्ग अकाउंिेंि अहभप्रेत िै;   

(3) “अध् याय” से इस भाग के अधीन कोई अध् याय अहभप्रेत ि;ै  

(4) दकसी हनगहमत व् यह‍ त के संबंध में “संवैधाहनक ि‍ तावेि” के अंतगगत दकसी कंपनी के संगम-अनु‍ छेि, संगम 

ज्ञापन और दकसी सीहमत िाहयत् व भागीिारी का हनगमन ि‍ तावेि भी ि;ै  

(5) “हनगहमत आवेिक” से हनम् नहलहित अहभप्रेत ि—ै  

 (क) हनगहमत ऋणी; या  

 (ि) हनगहमत ऋणी का कोई सि‍ य या भागीिार, िो हनगहमत ऋणी के संवैधाहनक ि‍ तावेिों के अधीन 

हनगहमत दिवाला संकल् प प्रदक्रया के हलए कोई आवेिन करने के हलए प्राहधकृत ि;ै या  

 (ग) कोई व् यह‍ ि, िो हनगहमत ऋणी के प्रचालनों और संसाधनों के प्रबंध का भारसाधक िै; या  

 (घ) कोई व् यह‍ त िो हनगहमत ऋणी के हवत्तीय मामलों का हनयंत्रण और पयगवेक्षण करता िै;  

1[(5क) “हनगहमत प्रत् याभूहतिाता” से ऐसा कोई हनगहमत व् यह‍ त अहभप्रेत ि,ै िो दकसी हनगहमत ऋणी का दकसी 

गारंिी संहविा में प्रहतभू िै;] 

(6) “हववाि” से हनम् नहलहित के संबंध में कोई वाि या माध् य‍ थम् कायगवाहियां अहभप्रेत िैं,—  

 (क) ऋण की रकम की हवद्यमानता;  

 (ि) माल या सेवाओं की ‍ वाहलिी; या  

 (ग) दकसी अभ् यावेिन या वारंिी का भंग;  

(7) “हवत्तीय लेनिार” से कोई ऐसा व् यह‍ त अहभप्रेत ि ैहिसको कोई हवत्तीय ऋण िये िै, और इसके अंतगगत ऐसा 

व् यह‍ त भी िै हिसको ऐसा ऋण हवहधक रूप से समनुिहेशत या अंतररत दकया गया िै;  

(8) “हवत्तीय ऋण” से ब् याि, यदि कोई िो, के साथ कोई ऋण अहभप्रेत ि ैिो धन के समय मूल् य के हलए प्रहतफल के 

हवरुद्ध संहवतररत दकया गया ि ैऔर इसके अंतगगत िै— 

   (क) ब् याि के संिाय के हलए उधार हलया गया धन;  

(ि) दकसी ‍ वीकृहत प्रत् यय सुहवधा के अधीन ‍ वीकृहत द्वारा िुिाई गई कोई रकम या उसको अदक्रयाहन् वत 

समतुल् य;  

(ग) दकसी नोि क्रय सुहवधा के अनुसरण में िुिाई गई कोई रकम या बंधपत्र, नोि, हर्बेंचर, ऋण ‍ िाक 

या दकसी वैसी िी हलित का हनगगमन;  

(घ) दकसी पटे्ट या अवक्रय संहविा के संबंध में दकसी िाहयत् व की रकम िो भारतीय लेिा मानक या ऐसे 

अन् य लेिा मानकों के, िो हवहित दकए िाएं, अधीन दकसी हवत्त या पूंिी पटे्ट के रूप में समझी गई ि;ै  

(ङ) गैर-अवलंब आधार पर हवक्रीत दकन् िीं प्राप् यों से हभन् न हवक्रीत या हमहतकािा प्राप् य;  

(च) दकसी अन् य संव् यविार के अधीन िुिाई गई कोई रकम, हिसके अंतगगत उधार लेने का वाहणहज् यक 

प्रभाव वाला कोई अहिम हवक्रय या क्रय करार भी िै;  

1[‍ प‍ िीकरण—इस उपिंर् के प्रयोिनों के हलए,—  

(i) दकसी भू-संपिा पररयोिना के अधीन दकसी आबंरिती से ली गई दकसी रकम को ऐसी रकम 

के रूप में माना िाएगा, हिसका आधार के रूप में वाहणहज् यक प्रभाव ि;ै और  

(ii) “आबंरिती” और “भू-संपिा पररयोिना” पिों का क्रमश: विी अथग िोगा, िो उनका भू-

संपिा (हवहनयमन और हवकास) अहधहनयम, 2016 (2016 का 16) की धारा 2 के िंर् (घ) और िंर् (यढ) 

में ि;ै] 

                                                 
1 2018 के अहधहनयम सं० 26 की धारा 3 द्वारा अंत:‍ थाहपत ।   



 6 

(छ) दकसी िर या कीमत में उतार-चढाव के हवरुद्ध या उससे लाभ के संरक्षण के संबंध में दकया गया कोई 

व् युत् पन् न संव् यविार और दकसी भी संव् यविार के मूल् य की संगणना करने के हलए केवल ऐसे संव् यविार के बािार 

मूल् य को हिसाब में हलया िाएगा;  

(ि) दकसी प्रत् याभूहत, क्षहतपूर्तग, बंधपत्र, प्रत् यय का ि‍ तावेिी पत्र या दकसी बैंक या हवत्तीय सं‍ था द्वारा 

िारी दकसी अन् य हलित के संबंध में कोई प्रहत क्षहतपूर्तग बाध् यता;  

(झ) इस िंर् के उपिंर् (क) से (ि) में हनर्िग‍ ि दकसी मि के हलए दकसी प्रत् याभूहत या क्षहतपरू्तग के संबधं 

में दकसी िाहयत् व की रकम; 

(9) दकसी व् यह‍ त के संबंध में “हवत्तीय ह‍ थहत” स ेदकसी कहतपय तारीि पर दकसी व् यह‍ त की हवत्तीय िानकारी 

अहभप्रेत ि;ै  

(10) “सूचना ज्ञापन” से धारा 29 की उपधारा (1) के अधीन समाधान वृहत्तक द्वारा तैयार दकया गया कोई ज्ञापन 

अहभप्रेत ि;ै    

(11) “आरम् भ की तारीि” से वि तारीि अहभप्रेत ि ैहिसको, यथाह‍ थहत, कोई हवत्तीय लेनिार, हवत्तीय ऋणी या 

प्रचालन लेनिार हनगहमत दिवाला संकल् प प्रदक्रया आरंभ करने के हलए न् यायहनणागयक प्राहधकारी को कोई आवेिन करता ि;ै  

1*  *  *  *  *  * * 

2[परंतु ििां धारा 7, धारा 9 या धारा 10 के अधीन आवेिन को ‍ वीकार करने वाले आिशे में दकसी अंतररम 

समाधान वृहत्तक की हनयुह‍ त निीं की िाती िै, विां दिवाला प्रारंभ िोने की तारीि वि िोगी, हिसको न् यायहनणागयक 

प्राहधकारी द्वारा ऐसे अंतररम समाधान वृहत्तक की हनयुह‍ त की िाती ि ै।] 

(13) “दिवाला समाधान प्रदक्रया लागत” से हनम् नहलहित अहभप्रेत ि—ै  

 (क) दकसी अंतररम हवत्त की रकम और ऐसे हवत्त को िुिाने में उपगत िचग;  

 (ि) दकसी समाधान वृहत्तक के रूप में कायग करने वाले दकसी व् यह‍ त को संिये फीस;  

 (ग) दकसी चालू समुत् थान के रूप में हनगहमत ऋणी के कारबार को चलाने में समाधान वृहत्तक द्वारा 

उपगत कोई िचग;  

(घ) दिवाला समाधान प्रदक्रया को सुकर बनाने के हलए सरकार की िाहन करके उपगत कोई िचग; और  

(ङ) ऐसा अन् य िचग िो बोर्ग द्वारा हवहनर्िग‍ ि दकया िाए;     

(14) “दिवाला समाधान प्रदक्रया अवहध” से दिवाला आरंभ िोने की तारीि से प्रारंभ िोने वाली और उससे एक सौ 

अ‍ सीवें दिन को समाप् त िोने वाली एक सौ अ‍ सी दिन की अवहध अहभप्रेत ि;ै   

(15) “अंतररम हवत्त” से दिवाला समाधान प्रदक्रया अवहध के िौरान समाधान वृहत्तक द्वारा हलया गया कोई हवत्तीय 

ऋण 3[और ऐसा अन्य ऋण, िो अहधसूहचत दकया िाए] अहभप्रेत ि;ै  

(16) “पररसमापन लागत” से पररसमापन की अवहध के िौरान पररसमापक द्वारा, ऐसे हवहनयमों के अध् यधीन िो 

बोर्ग द्वारा हवहनर्िग‍ ि दकए िाएं, उपगत कोई लागत अहभप्रेत ि;ै  

(17) “पररसमापन प्रारंभ की तारीि” से वि तारीि अहभप्रेत ि ै हिसको, यथाह‍ थहत, धारा 33 या धारा 59 के 

अनुसार पररसमापन की कायगवाहियां प्रारंभ िोती िैं;  

(18) “पररसमापक” से इस भाग के, यथाह‍ थहत, अध् याय 3 या अध् याय 5 के उपबंधों के अनुसार पररसमापक के रूप 

में हनयु‍ त कोई दिवाला संबंधी वृहत्तक अहभप्रेत िैं;  

(19) इस भाग के अध् याय 7 के प्रयोिनों के हलए “अहधकारी” से, यथाह‍ थहत, कंपनी अहधहनयम, 2013               

(2013 का 18) की धारा 2 के िरं् (60) में यथा पररभाहषत ऐसा अहधकारी हिसने व् यहतक्रम दकया ि ैया सीहमत िाहयत् व 

भागीिारी अहधहनयम, 2008 (2009 का 6) की धारा 2 के िंर् (ञ) में यथा पररभाहषत कोई अहभहित भागीिार अहभप्रेत िै;  

(20) “प्रचालन लेनिार” से कोई व् यह‍ त अहभप्रेत ि,ै हिसको कोई प्रचालन ऋण िये ि ैऔर इसके अंतगगत कोई 

व् यह‍ त भी िै हिसको ऐसा ऋण हवहधक रूप से समनुिहेशत या अंतररत दकया गया ि;ै  

                                                 
1 2020 के अहधहनयम सं० 1 की धारा 2 द्वारा लोप दकया गया ।   
2 2018 के अहधहनयम सं० 26 की धारा 3 द्वारा अंत:‍ थाहपत । 
3 2020 के अहधहनयम सं० 1 की धारा 2 द्वारा अंत:‍ थाहपत ।  



 7 

(21) “प्रचालन ऋण” से माल या सेवाओं के उपबंध के संबंध में कोई िावा हिसके अंतगगत हनयोिन भी िै या 

तत् समय प्रवृत्त दकसी हवहध के अधीन प्रोद्भूत और केन् रीय सरकार, दकसी राज् य सरकार या दकसी ‍ थानीय प्राहधकारी को 

संिये दकसी शोध् य के 1[संिाय] के संबंध में कोई ऋण अहभप्रेत ि;ै  

(22) “वैयह‍ तक प्रत् याभूहत िाता” से कोई ऐसा व् यह‍ ि अहभप्रेत िै िो दकसी हनगहमत ऋणी की दकसी गारंिी 

संहविा में प्रहतभू ि;ै  

(23) “कार्मगक” के अन् तगगत हनगहमत ऋणी के हनिशेक, प्रबंधक, मुख य प्रबंधकीय कार्मगक, अहभहित भागीिार और 

कमगचारी, यदि कोई िों, आते िैं;   

(24) दकसी हनगहमत ऋणी के संबंध में “संबंहधत पक्षकार” से हनम् नहलहित अहभप्रेत िैं—  

(क) हनगहमत ऋणी का हनिशेक या भागीिार या हनगहमम ऋणी के हनिशेक या भागीिार का कोई 

नातेिार;   

(ि) हनगहमत ऋणी का प्रमुि प्रबंधकीय कार्मगक या हनगहमत ऋणी के प्रमुि प्रबंधकीय कार्मगक का 

नातेिार;   

(ग) कोई सीहमत िाहयत् व भागीिारी या भागीिारी फमग, हिसमें हनगहमत ऋणी का कोई हनिशेक, 

भागीिार या प्रबंधक या उसका नातेिार भागीिार िै;   

(घ) कोई प्राइवेि कंपनी, हिसमें हनगहमत ऋणी का कोई हनिशेक, भागीिार या प्रबंधक हनिशेक ि ैऔर 

अपने नातेिारों के साथ उसकी समाित्त शेयर पूंिी का िो प्रहतशत से अहधक धारण करता िै;       

(ङ) कोई पहब् लक कंपनी, हिसमें हनगहमत ऋणी का कोई हनिशेक, भागीिार या प्रबंधक हनिशेक िै और 

अपने नातेिारों के साथ उसकी समाित्त शेयर पूंिी का िो प्रहतशत से अहधक धारण करता िै;  

(च) कोई हनगहमत हनकाय, हिसका हनिशेक बोर्ग, प्रबंध हनिशेक या प्रबंधक कारबार के मामूली अनुक्रम 

में हनगहमत ऋणी के दकसी हनिशेक, भागीिार या प्रबंधक की सलाि, हनिशेों या अनुिशेों के अनुसार कायग              

करते िैं;   

(छ) कोई सीहमत िाहयत् व भागीिारी या भागीिारी फमग, हिसके भागीिार या कमगचारी, कारबार के 

मामूली अनुक्रम में हनगहमत ऋणी के दकसी हनिशेक, भागीिार या प्रबंधक की सलाि, हनिशेों या अनुिशेों के 

अनुसार कायग करते िैं;   

(ि) कोई व् यह‍ त, हिसकी सलाि, हनिशेों या अनुिशेों पर हनगहमत ऋणी का हनिशेक, भागीिार या 

प्रबंधक कायग करने के अभ् य‍ त िैं;       

(झ) कोई हनगहमत हनकाय, िो हनगहमत ऋणी की हनयंत्री या अनषंुगी या कोई सियु‍ त कंपनी ि ैया 

दकसी हनयंत्री कंपनी की अनुषंगी िै, हिसका हनगहमत ऋणी अनुषंगी िै;   

(ञ) कोई व् यह‍ त िो ‍ वाहमत् व या दकसी मतिान करार के मद्दे हनगहमत ऋणी के मतिान अहधकार का 

बीस प्रहतशत से अहधक हनयंत्रण रिता िै;   

(ि) कोई व् यह‍ त हिसमें हनगहमत ऋणी, ‍ वाहमत् व या दकसी मतिान करार के मद्दे मतिान अहधकार के 

बीस प्रहतशत से अहधक हनयंत्रण रिता ि;ै   

(ठ) कोई व् यह‍ त िो हनगहमत ऋणी के हनिशेक बोर्ग या तत् ‍ थानी शासी हनकाय की संरचना पर हनयंत्रण 

कर सकता ि;ै       

 (र्) कोई व् यह‍ त िो हनम् नहलहित के मद्दे हनगहमत ऋणी से सियु‍ त ि—ै  

(i) हनगहमत ऋणी की नीहत हनमागण प्रदक्रयाओं में भागीिारी; या   

(ii) हनगहमत ऋणी और ऐसे व् यह‍ त के मध् य िो से अहधक साझा हनिेशक रिना; या   

(iii) हनगहमत ऋणी और ऐसे व् यह‍ त के मध् य प्रबंधकीय कार्मगकों का अंत: पररवतगन; या  

(iv) हनगहमत ऋणी को, या उससे आवश् यक तकनीकी िानकारी का उपबंध करना;  

  2[(24क) दकसी व् यह‍ ि के संबंध में, संबंहधत पक्षकार, से हनम् नहलहित अहभप्रेत ि,ै—  

                                                 
1 2018 के अहधहनयम सं० 26 की धारा 3 द्वारा प्रहत‍ थाहपत । 
2 2018 के अहधहनयम सं० 26 की धारा 3 द्वारा अंत:‍ थाहपत । 



 8 

(क) ऐसा कोई व् यह‍ त, िो व् यह‍ ि का नातेिार या व् यह‍ ि के पहत/पत् नी का नातेिार ि;ै   

(ि) दकसी सीहमत िाहयत् व भागीिारी या कोई सहमहत िाहयत् व भागीिारी या दकसी ऐसी भागीिारी फमग 

का भागीिार, हिसमें व् यह‍ ि एक भागीिार ि;ै  

(ग) ऐसा कोई व् यह‍ त, िो दकसी ऐसे न् यास का न् यासी ि,ै हिसके फायििािी में व् यह‍ ि सहम् महलत ि ैया 

न् यास के हनबंधन न् यासी को ऐसी शह‍ त प्रिान करते िैं, हिसका प्रयोग व् यह‍ ि के फायि े के हलए दकया िा                

सकता ि ै;  

(घ) ऐसा कोई प्राइवेि कंपनी, हिसमें व् यह‍ ि एक हनिशेक ि ैऔर अपने नातेिारों के साथ उसकी शयेर 

पूंिी का िो प्रहतशत से अहधक धारण करता िै;  

(ङ) ऐसी कोई लोक कंपनी, हिसमें व् यह‍ ि एक हनिशेक ि ैऔर अपने नातेिारों के साथ उसकी समाित्त 

शेयर पूंिी का िो प्रहतशत से अहधक धारण करता िै;  

(च) ऐसा हनगहमत हनकाय, हिसका हनिशेक बोर्ग, प्रबंध हनिशेक या प्रबंधक, कारबार के सामान् य 

अनुक्रम में व् यह‍ ि की सलाि, हनिेशों या अनुिशेों के अनुसार कायग करता िै;  

(छ) कोई सीहमत िाहयत् व भागीिारी या भागीिारी फमग, हिसके भागीिार या कमगचारी कारबार के 

सामन् य अनुक्रम में व् यह‍ ि की सलाि, हनिशेों या अनुिशेों के अनुसार कायग करते ि;ै  

(ि) ऐसा कोई व् यह‍ त, हिसकी सलाि, हनिशेों या अनुिशेों के अनुसार व् यह‍ ि कारगवाई करने का          

अभ् य‍ त ि;ै  

(झ) ऐसा कोई कंपनी, ििां व् यह‍ ि या अपने संबद्ध पक्षकार सहित व् यह‍ ि, कंपनी की शेयर पूंिी के पचास 

प्रहतशत से अहधक का ‍ वामी ि ैया कंपनी के हनिशेक बोर्ग की हनयु‍ त् ह  को हनयंहत्रत करता ि ै।  

  ‍ प‍ िीकरण—इस िंर् के प्रयोिनों के हलए,—    

   (क) दकसी व् यह‍ त के प्रहतहनिशे से, “नातेिार” से ऐसा कोई व् यह‍ त अहभप्रेत ि,ै िो हनम् नहलहित रीहत से 

  दकसी अन् य व् यह‍ त से नातेिारी रिता ि,ै अथागत् :—   

    (i) हिन् ि ूअहवभ‍ त कुिुबं के सि‍ यों,  

    (ii) पहत,  

(iii) पत् नी,  

(iv) हपता,  

(v) माता,  

(vi) पुत्र, 

(vii) पुत्री,  

(viii) पुत्र की पुत्री और पुत्र,  

(ix) पुत्री की पुत्री और पुत्र,  

(x) पौत्र की पुत्री और पुत्र, 

  (xi) पौत्री की पुत्री और पुत्र, 

(xii) भाई,  

(xiii)  बिन,  

(xiv) भाई का पुत्र और पुत्री, 

(xv) बिन का पुत्र और पुत्री, 

(xvi) हपता के हपता और माता,  

(xvii) माता के हपता और माता,  

(xviii) हपता के भाई और बिन,  

(xix) माता के भाई और बिन; और  



 9 

(ि) ििां किीं नातेिारी पुत्र, पुत्री, बिन या भाई की िै, विां उनके पहत/पत् नी को भी सहम् महलत दकया 

िाएगा ।  

1[(25) “समाधान आवेिक” से ऐसा व् यह‍ त अहभप्रेत ि,ै िो व् यह‍ िक रूप से या दकसी अन् य व् यह‍ त के साथ संयु‍ त 

रूप से, समाधान वृहत्तक को धारा 25 की उपधारा (2) के िंर् (ि) के अधीन दकए गए आमंत्रण के अनुसरण में कोई समाधान 

योिना प्र‍ तुत करता ि;ै]   

 (26) “समाधान योिना” से भाग 2 के अनुसार दकसी चालू समुत् थान के रूप में हनगहमत ऋणी के दिवाला 

समाधान के हलए 1[समाधान आविेक] द्वारा प्र‍ ताहवत योिना अहभप्रेत िै;  

2[‍पष्टीकरण—शंकाओं को िरू करने के हलए, यि ‍पष्ट दकया िाता ि ैदक दकसी समाधान योिना में हनगहमत ऋणी 

की पुन: संरचना करने के हलए उपबंध सहम्महलत िो सकें गे, हिनके अंतगगत हवलयन, समामेलन और हनर्वगलयन के माध्यम स े

समाधान भी ि ै;] 

3[(25) ‍पष्टीकरण—शंकाओं को िरू करने के हलए, यि ‍पष्ट दकया िाता ि ैदक दकसी समाधान योिना में हनगहमत 

ऋणी की पुन: संरचना करने के हलए उपबंध सहम्महलत िो सकें गे, हिनके अंतगगत हवलयन, समामेलन और हनर्वगलयन के 

माध्यम से समाधान भी ि ै;] 

(27) इस भाग के प्रयोिन के हलए “समाधान वृहत्तक” से हनगहमत दिवाला समाधान प्रदक्रया संचाहलत करने के 

हलए हनयु‍ त कोई दिवाला संबंधी वृहत्तक अहभप्रेत िै और हिसके अंतगगत अंतररम समाधान वृहत्तक भी िै; और  

(28) “मतिान भाग” से लेनिारों की सहमहत में दकसी एकल हवत्तीय लेनिार के मतिान अहधकार का भाग अहभप्रेत 

ि,ै िो हनगहमत ऋणी द्वारा हलए िाने वाले हवत्तीय ऋण के संबंध में ऐसे हवत्तीय लेनिार को िये हवत्तीय ऋण के अनुपात पर 

आधाररत ि ै।  

अध् याय 2 

हनगहमत दिवाला समाधान प्रदक्रया 

6. व् यह‍ त िो हनगहमत दिवाला समाधान प्रदक्रया प्रारंभ कर सकें गे—ििां कोई हवत्तीय ऋणी कोई व् यहतक्रम करता ि,ै विां 

कोई हवत्तीय लेनिार, कोई प्रचालन लेनिार या हनगहमत ऋणी ‍ वयं इस अध् याय के अधीन यथा उपबंहधत रीहत में ऐसे हनगहमत ऋणी 

के संबंध में हनगहमत दिवाला समाधान प्रदक्रया प्रारंभ कर सकेगा ।  

7. हवत्तीय लनेिार द्वारा हनगहमत दिवाला समाधान प्रदक्रया का प्रारंभ—(1) िब कोई व् यहतक्रम िोता ि ैतो हवत्तीय लेनिार 

‍ वयं या 4[दकन् िीं अन् य हवत्तीय लेनिारों या हवत्तीय लेनिार की ओर से दकसी अन् य व् यह‍ त, हिसे कें रीय सरकार द्वारा अहधसूहचत दकया 

िाए,] के साथ संयु‍ त रूप से न् यायहनणागयक प्राहधकारी के समक्ष दकसी हनगहमत ऋणी के हवरुद्ध, हनगहमत दिवाला समाधान प्रदक्रया 

प्रारंभ करने के हलए आवेिन फाइल कर सकेगा :   

5[परंतु धारा 21 की उपधारा (6क) के िंर् (क) और िंर् (ि) में हनर्िगष्ट हवत्तीय लेनिारों के हलए हनगहमत ऋणी के हवरूद्ध, 

हनगहमत दिवाला समाधान प्रदक्रया को आरंभ करने के हलए कोई आवेिन उसी वगग के ऐसे कम से कम एक सौ लेनिारों या उसी वगग के 

ऐसे लेनिारों की कुल संखया के कम से कम िस प्रहतशत, इनमें से िो भी कम िो, द्वारा संयुक्तत: फाइल दकया िाएगा :  

परंतु यि और दक ऐसे हवत्तीय लेनिारों के हलए, िो दकसी भू-संपिा पररयोिना के अधीन आबंरिती िैं हनगहमत ऋणी के 

हवरूद्ध, हनगहमत दिवाला समाधान प्रदक्रया आरंभ करने के हलए कोई आवेिन उसी भू-संपिा पररयोिना के अधीन ऐसे कम से कम एक 

सौ आबंरिहतयों या उसी भू-संपिा पररयोिना के अधीन ऐसे कुल आबंरिहतयों की संखया के कम से कम िस प्रहतशत, इनमें से िो भी कम 

िो, द्वारा संयुक्तत: फाइल दकया िाएगा : 

परंतु यि भी दक ििां दकसी हनगहमत ऋणी के हवरुद्ध हनगहमत दिवाला समाधान प्रदक्रया आरंभ करने के हलए कोई आवेिन 

पिले और िसूरे परंतुक में हनर्िगष्ट हवत्तीय लेनिार द्वारा फाइल दकया गया ि ैऔर उसे दिवाला और शोधन अक्षमता सहंिता (संशोधन) 

अहधहनयम, 2020 के प्रारंभ से पूवग न्यायहनणागयक प्राहधकारी द्वारा ‍वीकार निीं दकया गया िै, विां ऐसा आवेिन उक्त अहधहनयम के 

प्रारंभ के तीस दिन के भीतर, पिले या िसूरे परंतुक की अपेक्षाओं का अनुपालन करने के हलए उपांतररत दकया िाएगा, हिसके न िो 

सकने पर ऐसा आवेिन उसके ‍वीकार दकए िाने से पूवग वापस हलया गया समझा िाएगा ।] 

‍ प‍ िीकरण—इस उपधारा के प्रयोिनों के हलए, दकसी व् यहतक्रम के अंतगगत न केवल आवेिक हवत्तीय लेनिार को िये दकसी 

हवत्तीय ऋण के संबंध में कोई व् यहतक्रम आता ि ैबहल् क हनगहमत ऋणी के दकसी अन् य हवत्तीय लेनिार को िये हवत्तीय ऋण के संबंध में 

व् यहतक्रम भी आता ि ै।  

                                                 
1 2018 के अहधहनयम सं० 8 की धारा 3 द्वारा प्रहत‍ थाहपत ।   
2 2019 के अहधहनयम सं० 26 की धारा 2 द्वारा अंत:‍ थाहपत ।  
3 2019 के अहधहनयम सं० 26 की धारा 2 द्वारा अंत:‍ थाहपत ।   
4 2018 के अहधहनयम सं० 26 की धारा 4 द्वारा “दकन् िीं अन् य हवत्तीय लेनिारों”  शब् िों के ‍ थान पर प्रहत‍ थाहपत ।   
5 2020 के अहधहनयम सं० 1 की धारा 3 द्वारा अंत:‍ थाहपत ।   



 10 

(2) हवत्तीय लेनिार उपधारा (1) के अधीन ऐसे प्ररूप और रीहत में और ऐसी फीस के साथ, िो हवहित दकए िाएं, आवेिन 

करेगा ।  

(3) हवत्तीय लेनिार आवेिन के साथ हनम् नहलहित िगेा—  

(क) सूचना उपयोहगता के पास अहभहलहित व् यहतक्रम का अहभलेि या व् यहतक्रम के ऐसे अन् य अहभलेि या साक्ष् य 

िो हवहनर्िग‍ ि दकए िाएं;  

(ि) दकसी अंतररम समाधान वृहत्तक के रूप में कायग करने के हलए प्र‍ ताहवत समाधान वृहत्तक का नाम; और  

(ग) ऐसी अन् य िानकारी िो बोर्ग द्वारा हवहनर्िग‍ ि की िाए ।  

 (4) न् यायहनणागयक प्राहधकारी उपधारा (2) के अधीन आवेिन की प्राहप् त के चौिि दिन के भीतर या सूचना उपयोहगता के 

अहभलेिों से या उपधारा (3) के अधीन हवत्तीय लेनिार के द्वारा दिए गए अन् य साक्ष् य के आधार पर दकसी व् यहतक्रम की हवद्यमानता को 

अहभहनहश् चत करेगा :   

 1[परंतु यदि न्यायहनणगयन प्राहधकरण ने व्यहतक्रम की हवद्यमानता को अहभहनहित निीं दकया ि ैऔर ऐसे समय के भीतर 

धारा 5 के अधीन कोई आिशे पाररत कर दिया िै, तो वि ऐसा करने के हलए अपने कारणो को लेिबद्ध करेगा ।] 

 (5) ििां न् यायहनणागयक प्राहधकारी का यि समाधान िो िाता ि ैदक—  

(क) कोई व् यहतक्रम हआ ि ैऔर उपधारा (2) के अधीन आवेिन पूणग ि ैऔर प्र‍ ताहवत समाधान वृहत्तक के हवरुद्ध 

कोई अनुशासहनक कायगवाहियां लंहबत निीं िैं, तो वि आिशे द्वारा ऐसे आवेिन को ‍ वीकार कर सकेगा;  

(ि) व् यहतक्रम निीं हआ ि ैऔर उपधारा (2) के अधीन आवेिन अपणूग ि ैया प्र‍ ताहवत समाधान वृहत्तक के हवरुद्ध 

कोई अनुशासहनक कायगवािी लंहबत िै, तो वि आिशे द्वारा ऐसे आवेिन को अ‍ वीकार कर सकेगा :  

 परन् तु न् यायहनणागयक प्राहधकारी, उपधारा (5) के िंर् (ि) के अधीन आवेिन को नामंिूर करने से पूवग इस संबंध में आवेिक 

को, सूचना न् यायहनणागयक प्राहधकारी से ऐसी सूचना की प्राहप् त के सात दिन के भीतर अपने आवेिन में त्रुरि का सुधार करने के हलए 

िगेा ।  

 (6) हनगहमत दिवाला समाधान प्रदकया, उपधारा (5) के अधीन आवेिन के ‍ वीकार करने की तारीि से प्रारंभ िोगी ।  

 (7) न् यायहनणागयक प्राहधकारी, यथाह‍ थहत, ऐसे आवेिन के ‍ वीकार करने या उसे नामंिूर करने के सात दिन के भीतर—  

  (क) हनगहमत लेनिार और हनगहमत ऋणी को उपधारा (5) के िंर् (क) के अधीन आिशे की;  

  (ि) हवत्तीय लेनिार को उपधारा (5) के िंर् (ि) के अधीन आिशे की,  

संसूचना िगेा ।  

 8. प्रचालन लनेिार द्वारा दिवाला समाधान—(1) कोई प्रचालन लेनिार दकसी व् यहतक्रम के िोने पर अंसित्त प्रचालन ऋण 

की कोई मांग सूचना या हनगहमत ऋणी को व् यहतक्रम में अंतवगहलत रकम के संिाय की मांग के हलए दकसी बीिक की प्रहत ऐसे प्ररूप 

और रीहत में, िो हवहित की िाए, भेिेगा ।  

 (2) हनगहमत ऋणी, उपधारा (1) में वर्णगत मांग सूचना या बीिक की प्रहत की प्राहप् त के िस दिन के भीतर हनम् नहलहित को 

प्रचालन लेनिार के ध् यान में लाएगा—  

(क) दकसी हववाि, यदि कोई िो, 2[की हवद्यमानता या ऐसे हववाि] के संबंध में ऐसी सूचना या ऐसे बीिक की 

प्राहप् त से पूवग फाइल दकए गए दकसी वाि या माध् य‍ थम् कायगवाहियों के लंहबत िोने का अहभलेि;   

(ि) असंित्त प्रचालन ऋण का 3[संिाय]—  

(i) हनगहमत ऋणी के बैंक िाते से असंित्त रकम के इलै‍ रोहनक अंतरण के अहभलेि की अनुप्रमाहणत 

प्रहत भेिे िाने के द्वारा; या    

(ii) अहभलेि की अनुप्रमाहणत प्रहत िो दक प्रचालन लेनिार ने हनगहमत ऋणी द्वारा िारी दकसी चेक को 

भुना हलया ि,ै भेिने के द्वारा ।  

 ‍ प‍ िीकरण—इस धारा के प्रयोिन के हलए, “मांग सूचना” से दकसी प्रचालन लेनिार द्वारा हनगहमत ऋणी को प्रचालन ऋण 

के प्रहत संिाय की मांग हिसकी बाबत व् यहतक्रम हआ ि,ै तामील की गई कोई सूचना अहभप्रेत ि ै।  

                                                 
1 2019 के अहधहनयम सं० 26 की धारा 3 द्वारा अंत:‍ थाहपत ।   
2 2019 के अहधहनयम सं० 26 की धारा 5 द्वारा “की हवद्यमानता या ऐसे हववाि” शब् िों के ‍ थान पर प्रहत‍ थाहपत ।  
3 2019 के अहधहनयम सं० 26 की धारा 5 द्वारा “पुनसंिाय” शब् ि के ‍ थान पर प्रहत‍ थाहपत । 



 11 

 9. प्रचालन लनेिार द्वारा हनगहमत दिवाला समाधान प्रदक्रया आरंभ करने के हलए आविेन—(1) धारा 8 की उपधारा (1) के 

अधीन मांग संिाय सूचना या बीिक के पररिान की तारीि से िस दिन की अवहध की समाहप् त के पश् चात्, यदि प्रचालन लेनिार 

हनगहमत ऋणी से संिाय प्राप् त निीं करता ि ैया धारा 8 की उपधारा (2) के अधीन हववाि की सूचना प्राप् त निीं करता िै तो प्रचालन 

लेनिार दकसी हनगहमत दिवाला समाधान प्रदक्रया आरंभ करने के हलए न् यायहनणागयक प्राहधकारी के समक्ष कोई आवेिन फाइल कर 

सकेगा ।  

(2) उपधारा (1) के अधीन आवेिन ऐसे प्ररूप और ऐसी रीहत में फाइल दकया िाएगा और उसके साथ ऐसी फीस िोगी िो 

हवहित की िाए ।  

(3) प्रचालन लेनिार आवेिन के साथ हनम् नहलहित िगेा—  

 (क) हनगहमत ऋणी को प्रचालन लेनिार द्वारा पररित्त मांग संिाय की बीिक या सूचना की प्रहत;  

 (ि) इस प्रभाव का शपथपत्र दक असितं्त प्रचालन ऋण के दकसी हववाि से संबंहधत हनगहमत ऋणी द्वारा कोई 

सूचना निीं िी गई िै;  

 (ग) प्रचालन लेनिार के लेिों का अनुरक्षण करने वाली हवत्तीय सं‍ था से प्रमाणपत्र की प्रहत इस बात की पुह‍ ि 

करने के हलए दक 1[हनगहमत ऋणी, यदि उपलब् ध िो, द्वारा] असंित्त प्रचालन ऋण का संिाय निीं दकया गया िै; और  

 2[(घ) सूचना उपयोहगता के दकसी अहभलेि की कोई प्रहत, िो वि पुह‍ ि करती िो दक हनगहमत ऋणी, यदि 

उपलब् ध िो, द्वारा दकसी असंित्त प्रचालन ऋण का कोई संिाय निीं दकया गया िै; और  

(ङ) यि पुह‍ ि करने वाला कोई अन् य सबूत दक हनगहमत ऋणी द्वारा दकसी असंित्त प्रचालन ऋण का कोई संिाय 

निीं दकया गया ि ैया ऐसी कोई अन् य िानकारी, िो हवहित की िाए ।]  

(4) इस धारा के अधीन हनगहमत दिवाला समाधान प्रदक्रया आरंभ करने वाला कोई प्रचालन लेनिार दकसी समाधान वृहत्तक 

को अंतररम समाधान वृहत्तक के रूप में कायग करने के हलए प्र‍ ताव कर सकेगा ।      

(5) न् यायहनणागयक प्राहधकारी उपधारा (2) के अधीन आवेिन की प्राहप् त के चौिि दिन के भीतर आिशे द्वारा—  

(i) आवेिन को ‍ वीकार करेगा और इस हवहनश् चय से प्रचालन लेनिार तथा हनगहमत ऋणी को संसूहचत करेगा, 

यदि—  

 (क) उपधारा (2) के अधीन दकया गया आवेिन पूणग िै;  

 (ि) असंित्त प्रचालन ऋण का कोई  2[संिाय] निीं दकया गया ि;ै  

 (ग) हनगहमत ऋणी को संिाय के हलए बीिक या सूचना प्रचालन लेनिार द्वारा पररित्त कर िी गई ि;ै  

 (घ) हववाि की कोई सूचना प्रचालन लेनिार द्वारा प्राप् त निीं हई ि ैऔर सूचना उपयोहगता में हववाि का 

कोई अहभलेि निीं ि;ै और   

 (ङ) उपधारा (4) के अधीन प्र‍ ताहवत दकसी समाधान वृहत्तक के हवरुद्ध अनुशासहनक कायगवािी, यदि 

कोई िो, लंहबत निीं ि;ै  

(ii) आवेिन को अ‍ वीकार करेगा और ऐसे हवहनश् चय से प्रचालन लेनिार तथा हनगहमत ऋणी को संसहूचत करेगा, 

यदि—  

 (क) उपधारा (2) के अधीन दकया गया आवेिन अपूणग िै;  

 (ि) असंित्त प्रचालन ऋण का 2[संिाय] दकया गया ि;ै  

 (ग) लेनिार ने हनगहमत ऋणी को संिाय के हलए बीिक या सूचना का पररिान निीं दकया िै;  

 (घ) प्रचालन लेनिार ने हववाि की सूचना प्राप् त की िै या सूचना उपयोहगता में हववाि का कोई अहभलेि 

ि;ै या  

 (ङ) दकसी प्र‍ ताहवत समाधान वृहत्तक के हवरुद्ध अनुशासहनक कायगवािी लंहबत िै : 

परन् तु न् यायहनणागयक प्राहधकारी, िंर् (ii) के उपिंर् (क) के अधीन आवेिन को अ‍ वीकार करने से पूवग, 

न् यायहनणागयक प्राहधकारी से ऐसी सूचना प्राप् त करने के सात दिन के भीतर आवेिक को उसके आवेिन में इस त्रुरि को सुधारन े

के हलए सूचना िेगा ।  

                                                 
1 2019 के अहधहनयम सं० 26 की धारा 6 द्वारा “हनगहमत ऋणी द्वारा” शब् िों के ‍ थान पर प्रहत‍ थाहपत । 
2 2019 के अहधहनयम सं० 26 की धारा 6 द्वारा प्रहत‍ थाहपत ।  



 12 

 (6) हनगहमत दिवाला समाधान प्रदक्रया इस धारा की उपधारा (5) के अधीन आवेिन के ‍ वीकार िोने की तारीि से प्रारंभ 

िोगी ।  

 10. हनगहमत आविेक द्वारा हनगहमत दिवाला समाधान प्रदक्रया का आरंभ—(1) ििां हनगहमत ऋणी कोई व् यहतक्रम करता ि,ै 

विां उसका हनगहमत आवेिक न् यायहनणागयक प्राहधकारी के पास हनगहमत दिवाला समाधान प्रदक्रया आरंभ करने के हलए आवेिन फाइल 

कर सकेगा ।  

 (2) उपधारा (1) के अधीन आवेिन ऐसे प्ररूप में फाइल िोगा हिसमें ऐसी हवहशह‍ ियां िोंगी और ऐसी रीहत में तथा उसके 

साथ ऐसी फीस िोगी िो हवहित की िाए ।  

 1[(3) हनगहमत आवेिक, आवेिन के साथ हनहम् नहलहित प्र‍ तुत करेगा,—  

(क) ऐसी अवहध के हलए उसकी लेिा बहियों और ऐसे अन् य ि‍ तावेिों, िो हवहनर्िग‍ ि दकए िाएं, से संबंहधत 

िानकारी;  

(ि) दकसी अंतररम समाधान वृहत्तक के रूप में हनयु‍ त दकए िाने के हलए प्र‍ ताहवत समाधान वृहत्तक से संबंहधत 

िानकारी; और  

(ग) यथाह‍ थहत, हनगहमत ऋणी के शेयर धारकों द्वारा द्वारा पाररत हवशेष संकल् प या हनगहमत ऋणी के भागीिारों 

की कुल संख या के न् यूनतम तीन चौथाई द्वारा पाररत ऐसे संकल् प, हिसके द्वारा आवेिन के फाइल दकए िाने का अनुमोिन 

दकया गया िो ।]    

 (4) न् यायहनणागयक प्राहधकारी आवेिन प्राहप् त से चौिि दिन की अवहध के भीतर आिशे द्वारा हनम् नहलहित करेगा,—  

(क) आवेिन को ‍ वीकार, यदि वि पूणग ि ै2[और प्र‍ ताहवत समाधान वृहत्तक के हवरुद्ध कोई अनुशासहनक कायगवािी 

लंहबत निीं ि]ै;  

(ि) आवेिन को अ‍ वीकार, यदि वि अपूणग ि ै 1[या प्र‍ ताहवत समाधान वृहत्तक के हवरुद्ध कोई अनुशासहनक 

कायगवािी लंहबत ि]ै; 

 परन् तु न् यायहनणागयक प्राहधकारी, दकसी आवेिन को नामंिूर करने से पूवग, आवेिक को, न् यायहनणागयक प्राहधकारी से सूचना की 

प्राहप् त की तारीि से सात दिन के भीतर उसके आवेिन में त्रुरियों को सुधारने के हलए सूचना िगेा ।  

 (5) हनगहमत दिवाला समाधान प्रदक्रया उपधारा (4) के अधीन आवेिन के ‍ वीकार िोने की तारीि से प्रारंभ िोगी ।   

3[10क. हनगहमत दिवाला समाधान प्रदक्रया के आरंभ दकए िान ेका हनलंबन––धारा 7, धारा 9 और धारा 10 में अतंर्वग‍ ि 

दकसी बात के िोते हए भी, 28 माचग, 2020 को या उसके पिात् उद्भूत दकसी व् यहतक्रम ितेु, छि मास के हलए या ऐसी तारीि से एक 

वषग से अनहधक की ऐसी अहतरर‍ त अवहध, िो इस संबंध में अहधसूहचत की िाए, के हलए हनगहमत ऋणी के हवषय में हनगहमत दिवाला 

समाधान प्रदक्रया प्रारंभ करने के हलए कोई आवेिन फाइल निीं दकया िाएगा : 

परंतु उ‍ त अवहध के िौरान उद्भूत उ‍ त व् यहतक्रम के हलए हनगहमत ऋणी के हवषय में हनगहमत दिवाला समाधान प्रदक्रया 

प्रारंभ करने के हलए कोई आवेिन कभी भी फाइल निीं दकया िाएगा । 

‍ प‍ िीकरण––शंकाओं के हनवारण के हलए, यि ‍ प‍ ि दकया िाता ि ै दक इस धारा के उपबंध 25 माचग, 2020 से पूवग उ‍ त 

धाराओं के अधीन दकए गए दकसी व् यहतक्रम को लागू निीं िोंगे ।] 

 11. व् यह‍ त िो आवेिन करन ेके हलए िकिार निीं—हनम् नहलहित व् यह‍ त इस अध् याय के अधीन हनगहमत दिवाला समाधान 

प्रदक्रया आरंभ करने के हलए कोई आवेिन करने के हलए िकिार निीं िोंगे, अथागत् :—  

  (क) कोई हनगहमत ऋणी िो दकसी हनगहमत दिवाला समाधान प्रदक्रया को भुगत रिा िै; या  

 (ि) कोई हनगहमत ऋणी हिसने आवेिन करने की तारीि से बािर मास पूवग हनगहमत दिवाला समाधान प्रदक्रया 

पूणग की ि;ै या  

 (ग) कोई हनगहमत ऋणी या कोई हवत्तीय लेनिार, हिसने ऐसी समाधान योिना, िो इस अध् याय के अधीन दकसी 

आवेिन के दकए िाने की तारीि से बारि मिीने पूवग अनुमोदित की गई थी, के दकन् िीं हनबंधनों का उल् लंघन दकया ि;ै या  

 (घ) कोई हनगहमत ऋणी, हिसके संबंध में कोई पररसमापन आिशे दकया गया ि ै।  

                                                 
1 2019 के अहधहनयम सं० 26 की धारा 7 द्वारा प्रहत‍ थाहपत । 
2 2019 के अहधहनयम सं० 26 की धारा 7 द्वारा  अंत:‍ थाहपत । 
3 2020 के अहधहनयम सं० 17 की धारा 2 द्वारा अंत:‍ थाहपत ।   



 13 

‍ प‍ िीकरण 1[(1)]—इस धारा के प्रयोिनों के हलए दकसी हनगहमत ऋणी के अंतगगत ऐसे हनगहमत ऋणी के संबंध में कोई 

हनगहमत आवेिक भी ि ै।   

2[‍पष्टीकरण 2—इस धारा के प्रयोिनों के हलए, यि ‍पष्ट दकया िाता ि ैदक इस धारा में की कोई बात िंर् (क) से िंर् (घ) 

में हनर्िगष्ट दकसी हनगहमत ऋणी को दकसी अन्य हनगहमत ऋणी के हवरुद्ध हनगहमत दिवाला समाधान प्रदक्रया आरंभ करने से हनवाररत 

निीं करेगी ।]  

12. दिवाला समाधान प्रदक्रया के पणूग दकए िान े के हलए समय सीमा—(1) उपधारा (2) के अधीन रिते हए, हनगहमत 

दिवाला समाधान प्रदक्रया ऐसी प्रदक्रया प्रारंभ करने के हलए आवेिन के ‍ वीकार करने की तारीि से एक सौ अ‍ सी दिन की अवहध के 

भीतर पूणग की िाएगी ।  

(2) समाधान वहृत्तक एक सौ अ‍ सी दिन की अवहध से परे न् यायहनणागयक प्राहधकारी को हनगहमत दिवाला समाधान की 

अवहध का हव‍ तार करने के हलए आवेिन फाइल करेगा, यदि मतिान शेयर के पचित्तर प्रहतशत मत द्वारा, लेनिारों की सहमहत की 

दकसी बैठक में पाररत संकल् प द्वारा, ऐसा करने का अनुिशे दिया िाता ि ै।   

(3) उपधारा (2) के अधीन दकसी आवेिन की प्राहप् त पर यदि न् यायहनणागयक प्राहधकारी का यि समाधान िो िाता ि ै दक 

मामले की हवषयव‍ तु ऐसी ि ैदक कोई हनगहमत दिवाला समाधान प्रदक्रया एक सौ अ‍ सी दिन के भीतर पूरी निीं की िा सकती ि ैतो 

वि आिशे द्वारा ऐसी प्रदक्रया की अवहध को एक सौ अ‍ सी दिन से परे ऐसी और अवहध के हलए हव‍ ताररत कर सकेगा िो नब् बे दिन से 

अहधक निीं िोगी :  

परन् तु इस धारा के अधीन हनगहमत दिवाला समाधान प्रदक्रया का कोई हव‍ तार एक बारे से अहधक प्रिान निीं दकया िाएगा ।   

3[परंतु यि और दक हनगम दिवाला समाधान प्रदक्रया को दिवाला प्रारंभ िोने की तारीि से तीन सौ तीस दिन की अवहध के 

भीतर आज्ञापक रूप से पूरा दकया िाएगा, हिसके अंतगगत इस धारा के अधीन हनगम दिवाला समाधान प्रदक्रया के हलए मंिूर दकया 

गया अवहध का कोई हव‍तार और हनगहमत ऋणी की ऐसी समाधान प्रदक्रया के संबंध में दकन्िीं हवहधक कायगवाहियों में हलया गया समय 

भी  ि ै:  

परंतु यि भी दक ििां दकसी हनगहमत ऋणी की दिवाला समाधान प्रदक्रया लंहबत ि ैऔर उसे िसूरे परंतुक में हनर्िगष्ट अवहध के 

भीतर पूरा निीं दकया गया िै, विां ऐसी समाधान प्रदक्रया को दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (संशोधन) अहधहनयम, 2019 के 

प्रारंभ की तारीि से नब्बे दिन की अवहध के भीतर पूरा दकया िाएगा ।]  

4[12क. धारा 7, धारा 9 या धारा 10 के अधीन ििण दकए गए आविेन को वापस लनेा—न् यायहनणागक प्राहधकारी, लेनिारों 

की सहमहत के मतिान शेयर के नब् बे प्रहतशत के अनुमोिन के साथ आवेिक द्वारा दकए गए आवेिन पर धारा 7, धारा 9 या धारा 10 के 

अधीन ििण दकए गए आवेिन को ऐसी रीहत में, िो हवहनर्िग‍ ि की िाए, वापस लेना अनुज्ञात कर सकेगा ।] 

13. ज्ञापन की घोषणा और सावगिहनक आख यापन—(1) न् यायहनणागयक प्राहधकारी, धारा 7, धारा 9 या धारा 10 के अधीन 

आवेिन को ‍ वीकार करने के पश् चात,् आिशे द्वारा—   

(क) धारा 14 में हनर्िग‍ ि प्रयोिन के हलए दकसी अहध‍ थगन की घोषणा करेगा;  

(ि) धारा 15 के अधीन हनगहमत दिवाला समाधान प्रदक्रया को प्रारंभ करने के हलए कोई लोक आख यापन करेगा 

और िावों को प्र‍ तुत करने की मांग करेगा; और   

(ग) धारा 16 में अहधकहथत रीहत में दकसी अंतररम समाधान वृहत्तक की हनयुह‍ त करेगा ।  

(2) उपधारा (1) के िंर् (ि) में हनर्िग‍ ि लोक आख यापन अंतररम समाधान वृहत्तक की हनयुह‍ त के ठीक पश् चात् दकया              

िाएगा ।   

14. अहध‍ थगन—(1) उपधारा (2) औश्र उपधारा (3) के उपबंधों के अधीन रिते हए, दिवाला प्रारंभ की तारीि को, 

न् यायहनणागयक प्राहधकारी आिशे द्वारा हनम् नहलहित सभी को प्रहतहषद्ध करने के हलए अहध‍ थगन की घोषणा करेगा, अथागत् :—  

(क) हनगहमत ऋणी के हवरुद्ध वाि को संह‍ थत करने या लहम् बत वािों और कायगवाहियों को िारी रिने, हिसके 

अंतगगत दकसी न् यायालय, अहधकरण, माध् य‍ थम्, पैनल या अन् य प्राहधकारी के दकसी हनणगय, हर्क्री या आिशे का हन‍ पािन     

भी ि;ै   

(ि) हनगहमत ऋणी द्वारा उसकी दकसी आह‍ त या दकसी हवहधक अहधकार या उसमें दकसी फायिािािी हित का 

अंतरण, हवल् लंगम, अन् य संक्रामण या व् ययन करना;   

                                                 
1 2020 के अहधहनयम सं० 1 की धारा 4 द्वारा  पुन:संख यांदकत । 
2 2020 के अहधहनयम सं० 1 की धारा 4 द्वारा  अंत:‍ थाहपत । 
3 2019 के अहधहनयम सं० 26 की धारा 4 द्वारा अंत:‍ थाहपत ।   
4 2019 के अहधहनयम सं० 26 की धारा 9 द्वारा अंत:‍ थाहपत ।   



 14 

(ग) अपनी संपहत्त के संबंधमें हनगहमत ऋणी द्वारा सृहित दकसी प्रहतभूहत हित के पुरोबंध, वसूली या प्रवृत्त करने 

की कोई कारगवाई हिसके अंतगगत हवत्तीय आह‍ तयों का प्रहतभूहतकरण और पुनगगठन तथा प्रहतभूहत हित का प्रवतगन अहधहनयम, 

2000 (2002 का 54) के अधीन कोई कारगवाई भी िै;  

(घ) दकसी ‍ वामी या पट्टाकताग द्वारा दकसी संपहत्त की वसूली ििां ऐसी संपहत्त हनगहमत ऋणी के अहधभोग में ि ैया 

उसके कब् िे में ि ै।   

1[‍पष्टीकरण—इस उपधारा के प्रयोिनों के हलए, यि ‍पष्ट दकया िाता ि ैदक तत्समय प्रवृत्त दकसी अन्य हवहध में 

अंतर्वगष्ट दकसी बात के िोते हए भी, कें रीय सरकार, राज्य सरकार, ‍थानीय प्राहधकारी या तत्समय प्रवृत्त दकसी अन्य हवहध के 

अधीन गरठत से‍िरीय हवहनयामक या दकसी अन्य प्राहधकारी द्वारा अनुज्ञहि, अनुज्ञापत्र, रहि‍रीकरण, कोिा, ररयायत, 

समाशोधन या वैसा िी अनुिान या अहधकार का प्रिान दकया िाना, दिवाला के आधारों पर इस शतग के अधीन रिते हए 

हनलंहबत या पयगवहसत निीं दकया िाएगा दक अहध‍थगन अवहध के िौरान अनुज्ञहि, अनुज्ञापत्र, रहि‍रीकरण, कोिा, 

ररयायत, समाशोधन या वैसे िी अनुिान या अहधकार के उपयोग या उसके बने रिने के कारण उद्भूत िोने वाले चालू शोध्यों 

के संिाय में कोई व्यहतक्रम निीं दकया गया ि ै;] 

(2) हनगहमत ऋणी को आवश् यक व‍ तुओं या सेवाओं की आपूर्तग, िैसा हवहनर्िग‍ ि दकया िाए, को अहध‍ थगन कालावहध के 

िौरान समाप् त या हनलंहबत या बाहधत निीं दकया िाएगा ।    

2[(2क) ििां यथाह‍थहत, अंतररम समाधान वृहत्तक या समाधान वृहत्तक, हनगहमत ऋणी के मूल्य को संरहक्षत और परररहक्षत 

करने के हलए माल या सेवाओं के प्रिाय को तथा  ऐसे हनगहमत ऋणी की संदक्रयाओं का चालू समुत्थान के रूप में प्रबंध करने को 

संकिपूणग समझता ि ैतो ऐसे माल या सेवाओं का प्रिाय अहध‍थगन की अवहध के िौरान पयगवहसत, हनलंहबत या हवह‍छन्न निीं दकया 

िाएगा, हसवाय इसके ििां ऐसे हनगहमत ऋणी ने अहध‍थगन अवहध के िौरान या ऐसी पररह‍थहतयों में, िो हवहनर्िगष्ट की िाए, ऐस े

प्रिाय से उद्भूत िोने वाले शोध्यों का संिाय निीं दकया ि ै।] 

3[(3) उपधारा (1) के उपबंध हनम् नहलहित को लागू निीं िोंगे,—  

1[(क) ऐसे संव्यविार, करार, अन्य ठिराव, िो कें रीय सरकार द्वारा, दकसी हवत्तीय से‍िर हवहनयामक या दकसी 

अन्य प्राहधकारी के परामशग से अहधसूहचत दकए िाएं ;] 

(ि) दकसी हनगहमत ऋणी को गारंिी की संहविा में प्रहतभू ।] 

 (4) अहध‍ थगन का आिशे, ऐसे आिशे की तारीि से हनगहमत दिवाला समाधान प्रदक्रया के पूरा िोने तक प्रभावी रिगेा :   

परन् तु ििां हनगहमत दिवाला समाधान प्रदक्रया अवहध के िौरान दकसी समय, यदि न् यायहनणागयक प्राहधकारी धारा 31 की 

उपधारा (2) के अधीन सम् यक् रूप से िमा समाधान योिना का अनुमोिन कर ितेा ि ै या धारा 33 के अधीन हनगहमत ऋणी के 

पररसमापन का आिशे पाररत कर ितेा िै, तो अहध‍ थगन, यथाह‍ थहत, ऐसे अनमुोिन या पररसमापन आिशे की तारीि से प्रभाव में 

निीं रिगेा ।   

15. हनगहमत दिवाला समाधान प्रदक्रया का लोक आख यापन—(1) धारा 13 में हनर्िग‍ ि आिशे के अधीन हनगहमत दिवाला 

समाधान प्रदक्रया के लोक आख यापन में हनम् नहलहित िानकारी अंतर्वग‍ ि िोगी, अथागत् :—  

(क) हनगहमत दिवाला समाधान प्रदक्रया के अधीन हनगहमत ऋणी का नाम और पता;  

(ि) प्राहधकारी का नाम हिससे हनगहमत ऋणी हनगहमत या रहि‍ रीकृत ि;ै   

(ग) िावों को भेिने के हलए  4[ऐसी अंहतम तारीि;]   

(घ) अंतररम समाधान वृहत्तक के ब् यौरे हिसमें हनगहमत ऋणी का, प्रबंध हनहित िोगा और िो िावों को प्राप् त करने 

के हलए उत्तरिायी िोगा;   

(ङ) हमथ् या और भ्रामक िावों के हलए शाह‍ त; और  

(च) वि तारीि हिसको हनगहमत दिवाला समाधान प्रदक्रया समाप् त िोगी िो, यथाह‍ थहत, धारा 7, धारा 9, या 

धारा 10 के अधीन आवेिन ‍ वीकार करने की तारीि से एक सौ अ‍ सी दिन िोगी ।  

 (2) इस धारा के अधीन लोक आख यापन ऐसी रीहत में दकया िाएगा िो हवहित दकया िाए ।  

 16. अतंररम समाधान वहृत्तक की हनयहु‍ त और पिावहध—(1) न् यायहनणागयक प्राहधकारी, 1[दिवाला प्रारंभ की तारीि को] 

कोई अंतररम समाधान वृहत्तक हनयु‍ त करेगा ।     

                                                 
1 2020 के अहधहनयम सं० 1 की धारा 5 द्वारा अंत:‍ थाहपत  ।   
2 2020 के अहधहनयम सं० 1 की धारा 5 द्वारा अंत:‍ थाहपत ।   
3 2018 के अहधहनयम सं० 26 की धारा 10 द्वारा प्रहत‍ थाहपत । 
4 2018 के अहधहनयम सं० 26 की धारा 11 द्वारा “अंहतम तारीि” शब् िों के ‍ थान पर प्रहत‍ थाहपत । 



 15 

 (2) ििां हनगहमत दिवाला समाधान प्रदक्रया के हलए आवेिन, यथाह‍ थहत, कोई हवत्तीय लेनिार या हनगहमत ऋणी द्वारा 

दकया िाता ि,ै क्रमश: धारा 7 या धारा 10 के अधीन आवेिन में यथा प्र‍ ताहवत समाधान वृहत्तक को अंतररम समाधान वृहत्तक के रूप में 

हनयु‍ त दकया िाएगा, यदि उसके हवरुद्ध कोई अनुशासहनक कायगवाहियां लंहबत निीं िैं ।  

 (3) ििां हनगहमत दिवाला समाधान प्रदक्रया के हलए आवेिन दकसी प्रचालन लेनिार द्वारा  दकया गया िै, और—  

(क) दकसी अंतररम समाधान वृहत्तक के हलए प्र‍ ताव निीं दकया गया ि,ै विां न् यायहनणागयक प्राहधकारी दकसी 

दिवाला वृहत्तक की हसफाररश के हलए बोर्ग को हनिशे करेगा िो दकसी अंतररम समाधान वृहत्तक के रूप में कायग कर सकेगा;  

(ि) धारा 9 की उपधारा (4) के अधीन दकसी अंतररम समाधान वहृत्तक के हलए प्र‍ ताव दकया गया ि,ै विां यथा 

प्र‍ ताहवत समाधान वृहत्तक की अंतररम समाधान वृहत्तक के रूप में हनयुह‍ त की िाएगी, यदि उसके हवरुद्ध कोई अनुशासहनक 

कायगवाहियां लंहबत निीं ि ै।  

 (4) बोर्ग, उपधारा (3) के अधीन न् यायहनणागयक प्राहधकारी से दकसी हनिशे की प्राहप् त की तारीि से िस दिन के भीतर 

न् यायहनणागयक प्राहधकारी को दकसी ऐसे दिवाला वृहत्तक के नाम की हसफाररश करेगा, हिसके हवरुद्ध कोई अनुशासहनक कायगवाहियां 

लंहबत निीं िैं ।  

 (5) अंतररम समाधान वृहत्तक की पिावहध, 2[धारा 22 के अधीन समाधान वृहत्तक की हनयुह‍ त की तारीि तक िारी रिगेी]।     

 17. अतंररम समाधान वहृत्तक द्वारा हनगहमत ऋणी के मामलों का प्रबधं—(1) अंतररम समाधान वहृत्तक की हनयुह‍ त की 

तारीि से,—  

  (क) हनगहमत ऋणी के मामलों का प्रबंध अंतररम समाधान वृहत्तक में हनहित िोगा;  

 (ि) यथाह‍ थहत, हनिशेक बोर्ग, या हनगहमत ऋणी के, भागीिारों की शह‍ तयां हनलंहबत िो िाएंगी और अंतररम 

समाधान वृहत्तक द्वारा प्रयोग की िाएंगी;  

 (ग) हनगहमत ऋणी के अहधकारी और प्रबंधक अंतररम समाधान वृहत्तक को ररपोिग करेंगे और हनगहमत ऋणी के ऐसे 

ि‍ तावेि और अहभलेिों तक पहचं उपलब् ध कराएंगे हिनकी अपेक्षा अंतररम समाधान वृहत्तकअ द्वारा की िाए;  

 (घ) हनगहमत ऋणी के लेिाओं को रिने वाला हवत्तीय सं‍ थान ऐसे लेिाओं के संबंध में अंतररम समाधान वृहत्तक के 

अनुिशेों पर कायग करेगा तथा अंतररम समाधान वृहत्तक को उनके पास हनगहमत ऋण से संबंहधत उपलब् ध सभी िानकारी 

िगेा ।  

(2) हनगहमत ऋणी का प्रबंध हनहित दकए िाने वाला अंतररम समाधान वृहत्तक में हनहित िोगा—  

 (क) हनगहमत ऋणी के नाम से या उसकी ओर से कायग करेगा और सभी हवलेि, प्राहप् तयां और अन् य ि‍ तावेि, यदि 

कोई िों, हन‍ पादित करेगा;  

(ि) ऐसी कारगवाइयां, ऐसी रीहत में और ऐसे हनबंधनों के अधीन रिते हए करेगा िो बोर्ग द्वारा हवहनर्िगष्ट दकए 

िाएं,  

(ग) हनगहमत ऋणी की हवत्तीय िानकारी रिने वाले सूचना उपयोहगता से हनगहमत ऋणी के इले‍राहनक 

अहभलेि तक पहचं का प्राहधकार रिेगा;  

(घ) सरकारी प्राहधकाररयों, कानूनी लेिा परीक्षकों, लेिापालों और ऐसे अन्य व्यहक्तयों, िो हवहनर्िगष्ट दकए िाएं, के 

पास उपलब्ध हनगहमत ऋणी की लेिा बहियों, अहभलेिों और अन्य संबंहधत ि‍तावेिों तक पहचं का 3[प्राहधकार रिेगा; 

और] ।  

4[ङ हनगहमत ऋणी की ओर से, तत् समय प्रवृत्त दकसी हवहध के अधीन अपेक्षाओं का अनुपालन करने के हलए 

उत्तरिायी िोगा ।] 

18. अतंररम समाधान वहृत्तक के कतगव्य—अंतररम समाधान वृहत्तक के हनम्नहलहित कतगव्य िोंगे, अथागत् :— 

(क) हनगहमत ऋणी की हवत्तीय ह‍थहत का अवधारण करने के हलए हनगहमत ऋणी की आह‍तयों, हवत्त और 

प्रचालन से संबंहधत सभी िानकाररयां एकत्र करना हिसके अंतगगत हनम्नहलहित िानकारी भी िैं :— 

 (i) पूवगवती िो वषों के हलए कारबार प्रचालन;  

 (ii) पूवगवती िो वषों के हलए हवत्तीय और प्रचालन संिाय; 

                                                                                                                                                                
1 2020 के अहधहनयम सं० 1 की धारा 6 द्वारा प्रहत‍ थाहपत । 
2 2018 के अहधहनयम सं० 26 की धारा 12 द्वारा  “उसकी हनयुह‍ त की तारीि से तीस दिन से अहधक निीं िोगी” शब् िों के ‍ थान पर प्रहत‍ थाहपत । 
3 2018 के अहधहनयम सं० 26 की धारा 13 द्वारा  “प्राहधकार रिेगा” शब् िों के ‍ थान पर प्रहत‍ थाहपत । 
4 2018 के अहधहनयम सं० 26 की धारा 13 द्वारा  अंत:‍ थाहपत ।  



 16 

 (iii) आरंभ की तारीि को आह‍तयों की सूची और िाहयत्वों की सूची; और 

 (iv) ऐसा कोई अन्य हवषय, िो हवहनर्िगष्ट दकया िाए; 

(ि) धारा 13 और धारा 15 के अधीन लोक आखयापन के अनुसरण में उसके पास लेनिारों द्वारा प्र‍तुत सभी िावों 

को प्राि करना और हमलाना; 

  (ग) लेनिारों की सहमहत गरठत करना; 

(घ) हनगहमत ऋणी  की आह‍तयों को मानीिर करना और लेनिारों की सहमहत द्वारा दकसी समाधान वृहत्तक की 

हनयुहक्त दकए िाने तक उसके प्रचालन का प्रबंध करना;  

(ङ) सूचना उपयोहगता से एकत्र िानकारी को फाइल करना भी, आवश् यक िो; और  

(च) दकसी आह‍त का हनयंत्रण और अहभरक्षा में लेना, हिस पर हनगहमत ऋणी का, हनगहमत ऋणी या सूचना 

उपयोहगता या प्रहतभूहतयों का हनक्षेपागार या कोई अन्य रहि‍री, िो आह‍तयों के ‍वाहमत्व को अहभहलहित करता ि,ै के 

तुलनपत्र में यथा अहभहलहित ‍वाहमत्व अहधकार िै, हिसके अंतगगत हनम्नहलहित भी िैं— 

 (i) आह‍तयां हिन पर हनगहमत ऋणी का ‍वाहमत्व अहधकार ि ैिो हविशे में अवह‍थत िो सकेगी; 

 (ii) आह‍त िो हनगहमत ऋणी के कब्िे में िो या निीं िो;  

 (iii) मूतग आह‍तयां चाि ेिंगम या ‍थावर िो; 

(iv) अमूतग आह‍तयां हिसके अंतगगत बौहद्धक संपिा भी िै; 

(v) प्रहतभूहतयां हिनके अंतगगत हनगहमत ऋणी की दकसी समनुषंगी में धाररत शेयर, हवत्तीय हलित, 

बीमा पाहलसी भी िैं; 

(vi) दकसी न्यायालय या प्राहधकारी द्वारा ‍वाहमत्व के अवधारण के अधीन रिते हए आह‍तयां; 

  (छ) ऐसे अन्य कतगव्यों का पालन करेगा, िो बोर्ग द्वारा हवहनर्िगष्ट दकए िाएं । 

 ‍पष्टीकरण—इस 1[धारा] के उपयोिन के हलए “आह‍तयां” पि में हनम्नहलहित सहम्महलत निीं िैं, अथागत् :— 

(क) न्यास या संहविात्मक ठिरावों के अधीन हनगहमत ऋणी के कब्िे में दकसी तृतीय पक्षकार के ‍वाहमत्व की 

आह‍तयां हिसके अंतगगत उपहनधान भी िैं; 

(ि) हनगहमत ऋणी की दकसी भारतीय या हविशेी समनुषंगी की आह‍तयां; और 

(ग) ऐसी अन्य आह‍तयां, िो दकसी हवत्तीय से‍िर हवहनयामक के परामशग से केन्रीय सरकार द्वारा अहधसूहचत की   

िाए । 

 19. अतंररम समाधान वहृत्तक को कार्मगकों के द्वारा सियोग दकया िाना—(1) हनगहमत ऋणी के कार्मगक संप्रवतगक या 

हनगहमत ऋणी के प्रबंधतंत्र से कोई अन्य सिबद्ध व्यहक्त अंतररम समाधान वृहत्तक को, ििां तक उसके द्वारा अपेहक्षत िो, हनगहमत ऋणी 

के मामलों के प्रबंधन में सम‍त सिायता और सियोग िेंगे । 

 (2) ििां हनगहमत ऋणी के कार्मगक संप्रवतगक या अंतररम समाधान वृहत्तक की सिायता या सियोग के हलए अपेहक्षत कोई 

अन्य व्यहक्त हनगहमत ऋणी के मामलों के प्रबंध में सिायता या उसे सियोग निीं करते िैं, तो अंतररम समाधान वृहत्तक आवश्यक हनिशेों 

के हलए न्यायहनणागयक प्राहधकारी को आवेिन कर सकेगा । 

 (3) न्यायहनणागयक प्राहधकारी उपधारा (2) के अधीन आवेिन प्राि करने पर दकसी आिशे द्वारा, ऐसे कार्मगक या अन्य व्यहक्त 

को समाधान वृहत्तक के अनुिशेों का अनुपालन करने का और सूचना एकहत्रत करने में और हनगहमत ऋणी के प्रबंध में सियोग करने का 

हनिशे िगेा । 

 20. चाल ूसमतु्थान के रूप में हनगहमत ऋणी के प्रचालन का प्रबधं—(1) अंतररम समाधान वृहत्तक हनगहमत ऋणी की संपहत्त 

के मूल्य के संरक्षण और परररक्षण का प्रत्येक प्रयास करेगा और चालू समुत्थान के रूप में हनगहमत ऋणी के प्रचालन का प्रबंध करेगा । 

 (2) उपधारा (1) के प्रयोिन के हलए अंतररम समाधान वृहत्तक को हनम्नहलहित प्राहधकार िोंगे— 

  (क) लेिाकारों, हवहधक या अन्य वृहत्तक, िो आवश्यक िों, को हनयुक्त करना; 

(ि) हनगहमत ऋणी की ओर से ऐसी संहविाएं करना या संहविाओं या संव्यविारों को संशोहधत या उपांतररत 

करना हिन्िें हनगहमत दिवाला समाधान प्रदक्रया के प्रारंभ िोने से पूवग दकया गया था; 

                                                 
1 2018 के अहधहनयम सं० 26 की धारा 14 द्वारा  “उपधारा” शब् ि के ‍ थान पर प्रहत‍ थाहपत । 



 17 

(ग) अंतररम हवत्त िुिाना बशते लेनिार की पूवग सिमहत के हबना हनगहमत ऋणी की दकसी हवल्लंगहमत संपहत्तयों 

पर कोई प्रहतभूहत हित सृहित निीं दकया िाएगा, हिसका ऋण ऐसी हवल्लंगहमत संपहत्त पर प्रहतभूत ि ै: 

परन्तु ििां ऐसी संपहत्त का मूल्य ऋण की रकम के िगुने के समतुल्य रकम से कम निीं िै, विां लेनिार की पूवग 

सिमहत अपेहक्षत निीं िोगी; 

(घ) हनगहमत ऋणी के कार्मगकों को ऐसे अनुिशे िारी करना, िो दकसी हनगहमत ऋणी को चालू समुत्थान के रूप में 

रिने के हलए आवश्यक ि;ै और 

(ङ) ऐसी सभी कारगवाइयां करना िो हनगहमत ऋणी को दकसी चालू समुत्थान के रूप में रिने के हलए                 

आवश्यक िैं । 

21. लनेिारों की सहमहत—(1) अतंररम समाधान वृहत्तक हनगहमत ऋणी के हवरुद्ध प्राि सभी िावों का संिि और हनगहमत 

ऋणी की हवत्तीय प्राह‍थहत का अवधारण करने के पिात् लेनिारों की सहमहत गरठत करेगा । 

(2) लेनिारों की सहमहत हनगहमत ऋणी के सभी हवत्तीय लेनिारों से हमलकर बनेगी : 

परन्तु 1[दकसी हवत्तीय लेनिार या धारा 24 की उपधारा (5) या उपधारा (6) या उपधारा (6क) में हनर्िग‍ ि हवत्तीय लेनिार के 

दकसी प्राहधकृत प्रहतहनहध, यदि वि हनगहमत ऋणी का संबंहधत पक्षकार िै,] को लेनिारों की सहमहत में प्रहतहनहधत्व करने का, भाग लेने 

का या मतिान करने का अहधकार निीं िोगा ।  

2[परंतु यि और दक पिला परंतुक दकसी ऐसे हवत्तीय लेनिार, िो दकसी हवत्तीय क्षेत्र के हवहनयामक द्वारा हवहनयहमत िै, को 

लागू निीं िोगा, यदि वि दिवाला प्रारंभ िोने की तारीि से पूवग, मात्र ऋण के इह‍ विी शेयरों या इह‍ विी शेयरों में संपररवतगनीय 

हलितों के संपररवतगन 3[या ऐसे संव् यविार, िो हवहित दकए िाएं, के पूरे िो िाने पर] या प्रहत‍ थापन के मद्दे हनगहमत ऋणी का 

संबंहधत पक्षकार िै;] 

(3) 4[उपधारा (6) और उपधारा (6क) के अधीन रिते हए, ििां] हनगहमत ऋणी द्वारा दकसी कंसोर्िगयम या करार के भाग के 

रूप में िो या अहधक हवत्तीय लेनिारों के प्रहत ऋण िये िै विां ऐसा प्रत्येक हवत्तीय लेनिार लेनिारों की सहमहत का भाग िोगा और 

उसके मतिान अंश का अवधारण उसके प्रहत िये हवत्तीय ऋणों के आधार पर दकया िाएगा । 

(4) ििां कोई व्यहक्त हवत्तीय लेनिार के साथ-साथ कोई प्रचालन लेनिार िै, विां,— 

(क) ऐसे व्यहक्त को उस सीमा तक हवत्तीय लेनिार माना िाएगा ििां तक हनगहमत ऋणी द्वारा हवत्तीय ऋण िये िै 

और ऐसे लेनिार के प्रहत िये हवत्तीय ऋणों की सीमा तक आनुपाहतक मतिान अंश के साथ लेनिारों की सहमहत में सहम्महलत 

दकया िाएगा;  

(ि) ऐसे व्यहक्त को हनगहमत ऋणी द्वारा ऐसे लेनिार को िये प्रचाहलत ऋण की सीमा तक प्रचालक लेनिार माना 

िाएगा । 

 (5) ििां दकसी प्रचालक लेनिार ने दकसी हवत्तीय लेनिार को कोई प्रचालन ऋण समनुिहेशत दकया ि ैया हवहधपूवगक अंतररत 

दकया ि ैविां ऐसे समनुिशेन या हवहधक अंतरण की सीमा तक समनिुहेशती या अंतररती को प्रचालन लेनिार माना िाएगा । 

 (6) 1[ििां, हवत्तीय ऋण के कंसोर्िगयम, ठिराव या संबद्ध प्रसुहवधा के भाग के रूप में हव‍ ताररत हनबंधन दकसी एकल न् यासी 

या अहभकताग द्वारा सभी हवत्तीय लेनिारों के हलए कायग करने ितेु उपबंध करते िैं] विां प्रत्येक हवत्तीय लेनिार— 

(क) न्यासी या अहभकताग को लेनिारों की सहमहत में उसके मतिान अंश की सीमा तक उसकी ओर से कायग करने के 

हलए प्राहधकृत कर सकेगा; 

(ि) उसके मतिान अंश की सीमा तक लेनिारों की सहमहत में अपना प्रहतहनहधत्व कर सकेगा;  

(ग) उसका लेनिारों की सहमहत में उसके मतिान अंश की सीमा तक उसका प्रहतहनहधत्व करने के हलए ‍वयं की 

लागत पर दकसी दिवाला वृहत्तक (समाधान वृहत्तक से हभन्न) की हनयुहक्त कर सकेगा; या 

(घ) उसके मतिान अंश की सीमा तक एक या अहधक हवत्तीय लेनिारों के साथ संयुक्त रूप से या पृथक् रूप से 

हमलकर मतिान करने के अपने अहधकार का प्रयोग कर सकेगा ।  

 5[(6क) ििां कोई हवत्तीय ऋण— 

                                                 
1 2018 के अहधहनयम सं० 26 की धारा 15 द्वारा  प्रहत‍ थाहपत । 
2 2018 के अहधहनयम सं० 26 की धारा 15 द्वारा  अंत:‍ थाहपत । 
3 2020 के अहधहनयम सं० 1 की धारा 7 द्वारा अंत:‍ थाहपत ।   
4 2018 के अहधहनयम सं० 26 की धारा 15 द्वारा “ििां” शब् ि के ‍ थान पर प्रहत‍ थाहपत  । 
5 2018 के अहधहनयम सं० 26 की धारा 15 द्वारा अंत:‍ थाहपत ।   



 18 

(क) प्रहतभूहतयों या िमा के रूप में ि ैऔर हवत्तीय ऋण के हनबधंन सभी हवत्तीय लेनिारों के हलए प्राहधकृत 

प्रहतनहध के रूप में कायग के हलए दकसी न् यासी या अहभकताग की हनयुह‍ त का उपबंध करते िैं, विां ऐसा न् यासी या अहभकताग 

ऐसे हवत्तीय लेनिारों की ओर से कायग करेगा :  

(ि) उपधारा (6) के िंर् (क) के अधीन आने वाले लेनिारों से हभन् न यथा हवहनर्िग‍ ि संख या से अहधक लेनिारों के 

वगग के प्रहत ऋणी ि,ै विां अंतररम समाधान वृहत्तक सभी हवत्तीय लेनिारों की सूची, हिसमें अंतररम समाधान वृहत्तक से हभन् न 

दकसी दिवाला वृहत्तक का नाम अंतर्वग‍ ि िोगा, के साथ न् यायहनणगयक प्राहधकारी को प्राहधकृत प्रहतहनहध के रूप में कायग करने 

के हलए आवेिन करेगा, हिसकी न् यायहनणागयक प्राहधकारी द्वारा लेनिारों की सहमहत की पिली बैठक से पूवग हनयुह‍ त की 

िाएगी ;  

(ग) का प्रहतहनहधत् व दकसी संरक्षक, हन‍ पािक या प्रशासक द्वारा दकया िाता िै, विां ऐसा व् यह‍ त ऐसे हवत्तीय 

लेनिारों की ओर से प्राहधकृत प्रहतहनहधकेरूप में कायग करेगा,  

और ऐसा प्राहधकृत िंर् (क) या िंर् (ि) या िंर् (ग) के अधीन लेनिारों की सहमहत की बैठकों में भाग लेगा और अपने 

मतिान शेयर की सीमा तक प्रत् येक हवत्तीय लेनिार की ओर से मत िेगा ।  

(6ि) प्राहधकृत प्रहतहनहध को संिये पाररश्रहमक— 

 (i) यदि कोई िो, उपधारा (6क) के िंर् (क) और िंर् (ग) के अधीन हवत्तीय ऋण या सुसंगत ि‍ तावेिों के हनबंधनों 

के अनुसार िोगा; और  

 (ii) उपधारा (6क) के िंर् (ि) के अधीन हवहनर्िग‍ ि दकए गए अनुसार िोगा, िो दिवाला समाधान प्रदक्रया संबंधी 

लागतों का भाग बनेगा ।]      

1[(7) बोर्ग उपधारा (6) और उपधारा (6क) के अधीन आने वाले हवत्तीय ऋणों के संबंध में मत िनेे और मतिान शेयरों का 

अवधारण करने की रीहत हवहनर्िग‍ ि कर सकेगा;  

(8) इस संहिता में अन् यथा उपबंहधत के हसवाय, लेनिारों की सहमहत के सभी हवहनश् चय हवत्तीय िनेिारों के मतिान शेयर के 

इ‍ वायन प्रहतशत से अन् यून मत द्वारा हलए िाएंगे : 

परंतु ििां दकसी हनगहमत ऋणी का कोई हवत्तीय लेनिार निीं ि,ै विां लेनिारों की सहमहत का गठन दकया िाएगा और वि 

ऐसे कृत् यों का हनवगिन करने के हलए ऐसे व् यह‍ तयों से ऐसी रीहत में हमलकर बनेगी, िो हवहनर्िग‍ ि की िाए ।] 

(9) लेनिारों की सहमहत को हनगहमत दिवाला समाधान प्रदक्रया के िौरान दकसी भी समय हनगहमत ऋणी के संबंध में कोई 

हवत्तीय सूचना प्र‍तुत करने के हलए समाधान वृहत्तक से अपेक्षा करने का अहधकार िोगा । 

(10) समाधान वृहत्तक, लेनिारों की सहमहत द्वारा उपधारा (9) के अधीन इस प्रकार अपेहक्षत दकसी हवत्तीय सूचना को ऐसी 

अध्यपेक्षा दकए िाने के सात दिन की कालावहध के भीतर उपलब्ध कराएगा । 

22. समाधान वहृत्तक की हनयहुक्त—(1) लेनिारों की सहमहत की पिली बैठक लेनिारों की सहमहत का गठन िोने के सात दिन 

के भीतर आयोहित की िाएगी । 

(2) लेनिारों की सहमहत अपनी पिली बैठक में हवत्तीय लेनिारों के मतिान अंश के 2[हछयासठ] प्रहतशत से अन्यून के बहमत 

द्वारा या तो समाधान वृहत्तक के रूप में अंतररम समाधान वृहत्तक को हनयुक्त करने का या अंतररम समाधान वृहत्तक के ‍थान पर िसूरे 

समाधान वृहत्तक को प्रहत‍थाहपत करने का संकल्प करेगी । 

(3) उपधारा (2) के अधीन ििां लेनिारों की सहमहत का संकल्प— 

(क) 3[प्र‍ ताहवत समाधान वृहत्तक से हवहनर्िग‍ ि प्ररूप में हलहित सिमहत के अधीन रिते हए] समाधान वृहत्तक के 

रूप में अंतररत समाधान वृहत्तक को िारी रिने का िै विां वि अंतररम समाधान वृहत्तक, हनगहमत ऋणी और न्यायहनणागयक 

प्राहधकारी को उसके इस हवहनिय को संसूहचत करेगी; या     

(ि) अंतररम समाधान वृहत्तक को प्रहत‍थाहपत करने का ि ैविां वि प्र‍ताहवत समाधान वृहत्तक की हनयुहक्त के हलए 

न्यायहनणागयक प्राहधकारी के समक्ष 4[प्र‍ ताहवत समाधान वृहत्तक से हवहनर्िग‍ ि प्ररूप में हलहित सिमहत के साथ] आवेिन को 

फाइल करेगी । 

 (4) न्यायहनणागयक प्राहधकारी उपधारा (3) के िण्र् (ि) के अधीन प्र‍ताहवत समाधान वृहत्तक के नाम को बोर्ग को इसकी 

पुहष्ट के हलए भेिेगा और बोर्ग से पुहष्ट के पिात् ऐसी हनयुहक्त करेगा । 

                                                 
1 2018 के अहधहनयम सं० 26 की धारा 15 द्वारा प्रहत‍ थाहपत ।   
2 2018 के अहधहनयम सं० 26 की धारा 16 द्वारा “पचित्तर” शब् िों के ‍ थान पर प्रहत‍ थाहपत ।   
3 2018 के अहधहनयम सं० 26 की धारा 16 द्वारा अंत:‍ थाहपत ।   
4 2018 के अहधहनयम सं० 26 की धारा 16 द्वारा अंत:‍ थाहपत ।   



 19 

 (5) ििां बोर्ग, प्र‍ताहवत समाधान वृहत्तक के नाम की प्राहि की तारीि के िस दिन के भीतर प्र‍ताहवत समाधान वृहत्तक के 

नाम की पुहष्ट निीं करता िै, विां न्यायहनणागयक प्राहधकारी, आिशे द्वारा अन्तररम समाधान वृहत्तक को, हनयुहक्त की बोर्ग से पुहष्ट िोन े

तक समाधान वृहत्तक के रूप में कायग करते रिने का हनिशे िगेा । 

 23. समाधान वहृत्तक द्वारा हनगहमत दिवाला समाधान प्रदक्रया सचंाहलत करना—(1) धारा 27 के अधीन रिते हए समाधान 

वृहत्तक संपूणग हनगहमत दिवाला समाधान प्रदक्रया संचाहलत करेगा और हनगहमत दिवाला समाधान प्रदक्रया की अवहध के िौरान 

हनगहमत ऋणी के प्रचालन का प्रबंध करेगा :   
 1[परंतु समाधान वृहत्तक, हनगहमत दिवाला समाधान प्रदक्रया अवहध की समाहि के पिात्, हनगहमत ऋणी की संदक्रयाओं का 

प्रबंध तब तक करता रिगेा, िब तक धारा 31 की उपधारा (1) के अधीन समाधान योिना का अनुमोिन करने वाला या धारा 34 के 

अधीन समापक की हनयुहक्त करने वाला कोई आिशे न्यायहनणागयक प्राहधकारी द्वारा पाररत निीं कर दिया िाता ि ै।] 

(2) समाधान वृहत्तक ऐसी शहक्तयों का प्रयोग और ऐसे कतगव्यों का हनवगिन करेगा िो इस अध्याय के अधीन अंतररम समाधान 

वृहत्तक में हनहित या उसको प्रित्त ि ै। 

(3) धारा 22 की उपधारा (4) के अधीन दकसी समाधान वृहत्तक की दकसी हनयुहक्त की िशा में अंतररम समाधान वृहत्तक उसके 

कब्िे और िानकारी में हनगहमत ऋणी से संबंहधत सभी िानकारी, ि‍तावेि और अहभलेि समाधान वृहत्तक को उपलब्ध कराएगा । 

24. लनेिारों की सहमहत की बठैक—(1) लेनिारों की सहमहत के सभी सि‍य वैयहक्तक रूप से या ऐसे इलै‍राहनक माध्यम स े

बैठक कर सकें गे, िो हवहनर्िगष्ट की िाए । 

(2) लेनिारों की सहमहत की सभी बैठकें  समाधान वृहत्तक द्वारा आयोहित की िाएंगी । 

(3) समाधान वृहत्तक लेनिारों की सहमहत की प्रत्येक बैठक की सूचना हनम्नहलहित को िगेा— 

(क) 2[धारा 21 की उपधारा (6) और उपधारा (6क) तथा उपधारा (5) में हनर्िग‍ ि प्राहधकृत प्रहतहनहधयों सहित 

वृहत्तक लेनिारों की सहमहत] के सि‍यों को; 

(ि) यथाह‍थहत, हनिशेक बोर्ग के हनलंहबत सि‍यों या हनगहमत व्यहक्तयों के भागीिारों को;  

  (ग) प्रचालन लेनिारों या उनके प्रहतहनहधयों को, यदि उनके कुल शोध्यों की रकम ऋण के िस प्रहतशत से कम           

 निीं ि ै। 

 (4) प्रचालन लेनिारों का उपधारा (3) में यथाहनर्िगष्ट, हनिशेक, भागीिार तथा एक प्रहतहनहध लेनिारों की सहमहत की बैठकों 

में उपह‍थत िो सकेगा ककंतु उसे ऐसी बैठकों में मत िनेे का अहधकार निीं िोगा : 

 परंतु, प्रचालन लेनिारों के, यथाह‍थहत, ऐसे हनिशेक, भागीिार या प्रहतहनहध की अनुपह‍थहत से ऐसी बैठक की कायगवाहियां 

अहवहधमान्य निीं िोंगी । 

 (5) 3[धारा 21 की उपधारा (6) उपधारा (6क) और उपधारा (6ि) के अधीन रिते हए कोई लेनिार] िो लेनिारों की सहमहत 

का एक सि‍य ि ै समाधान वृहत्तक से हभन्न दकसी दिवाला वृहत्तक को लेनिारों की सहमहत की दकसी बैठक में ऐसे लेनिार का 

प्रहतहनहधत्व करने के हलए हनयुक्त कर सकेगा :  

 परन् तु दकसी व् यह‍ तगत लेनिार का प्रहतहनहधत् व करने वाले ऐसे समाधान वृहत्तक को संिेय ऐसी फीस ऐसे लेनिार द्वारा विन 

की िाएगी ।  

 (6) प्रत्येक लेनिार का मत ऐसे लेनिार को शोध्य हवत्तीय ऋण के आधार पर उसे समनुिहेशत मतांश के अनुसार िोगा । 

 (7) समाधान वृहत्तक, बोर्ग द्वारा हवहनर्िगष्ट रीहत में प्रत्येक लेनिार को समनुिहेशत मतांश अवधाररत करेगा । 

 (8) लेनिारों की सहमहत की बैठकों का संचालन ऐसी रीहत में दकया िाएगा िो हवहनर्िगष्ट की िाए । 

 25. समाधान वहृत्तक के कतगव्य—(1) समाधान वृहत्तक का यि कतगव्य िोगा दक वि हनगहमत ऋणी की आह‍तयों को परररहक्षत 

और संरहक्षत करे हिसके अंतगगत हनगहमत ऋणी के चालू कारबार का प्रचालन भी िै । 

 (2) उपधारा (1) के प्रयोिन के हलए समाधान वृहत्तक हनम्नहलहित कारगवाई करेगा, अथागत् :— 

(क) हनगहमत ऋणी की सभी आह‍तयां, हिसके अंतगगत हनगहमत ऋणी के कारबार के अहभलेि भी िैं, तत्काल 

अपनी अहभरक्षा और हनयंत्रण में लेना; 

(ि) तृतीय पक्षकारों के साथ हनगहमत ऋणी का प्रहतहनहधत्व और उसकी ओर से कायग करना, न्याहयक, 

न् याहयककल् य या माध्य‍थम् प्रदक्रयाओं में अहधकारों का प्रयोग हनगहमत ऋणी के फायि ेके हलए करना; 

                                                 
1 2020 के अहधहनयम सं० 1 की धारा 8 द्वारा प्रहत‍ थाहपत । 
2 2018 के अहधहनयम सं० 26 की धारा 18 द्वारा प्रहत‍ थाहपत । 



 20 

(ग) धारा 28 के अधीन लेनिारों की सहमहत के अनुमोिन के अध्यधीन अंतररम हवत्त की व्यव‍था करना;  

(घ) बोर्ग द्वारा यथाहवहनर्िगष्ट रीहत में लेिाकारों, हवहधक या अन्य वृहत्तकों की हनयुहक्त करना; 

(ङ) िावों की अद्यतन सूची का अनरुक्षण करना; 

(च) लेनिारों की सहमहत की सभी बैठकें  आहूत करना और उनमें भाग लेना; 

(छ) धारा 29 के अनुसरण में िानकारी ज्ञापन को तैयार करना;  

1[(ि) ऐसे संभाहवत समाधान आवेिकों को आमंहत्रत करना, िो ऐसे मानिरं्ों को, िो लेनिारों की सहमहत के 

अनुमोिन से हनगहमत ऋणी के कारबार के प्रचालन की िरिलताओं और पैमाने को ध् यान में रिते हए उसके द्वारा अहधकहथत 

दकए िाएं, और ऐसी अन् य शतों को, िो समाधान योिना या योिनाएं प्र‍ तुत करने के हलए बोर्ग द्वारा हवहनर्िग‍ ि की िाएं, 

पूरा करते ि ै।]   

(झ) लेनिारों की सहमहत की बैठक में सभी समाधान योिनाओं को प्र‍तुत करना; 

(ञ) अध्याय 3 के अनुसरण में संव्यविारों के, यदि कोई िों, पररविगन के हलए कोई आवेिन फाइल करना; और 

  (ि) ऐसी अन्य कारगवाइयां करना िो बोर्ग द्वारा हवहनर्िगष्ट की िाएं ।  

 2[25क. हवत्तीय लनेिारों के प्राहधकृत प्रहतहनहध के अहधकार और कत्तगव् य—(1) प्राहधकृत प्रहतहनहध के पास धारा 21 की 

उपधारा (6क) या धारा 24 की उपधारा (5) के अधीन लेनिारों की सहमहत की बैठकों में, ऐसे हवत्तीयलेनिार, हिसका वि प्रहतहनहधत् व 

करता ि,ै की ओर से ऐसे लेनिारों से मतिान के संबंध में भौहतक या इलै‍ रोहनक साधनों के माध् यम से अहभप्राप् त दकए गए पूवग अनुिशेों 

के अनुसार भाग लेने और मतिान करने का अहधकार िोगा ।  

(2) प्राहधकृत प्रहतहनहध का यि कतगव् य िोगा दक वि लेनिारों की सहमहत की बैठक के कायगवृत्त और कायगसूची को, ऐसे हवत्तीय 

लेनिार, हिसका वि प्रहतहनहधत् व करता ि,ै को पररचाहलत करे ।  

(3) प्राहधकृत प्रहतहनहध, ऐसे हवत्तीय लेनिार, हिसका वि प्रहतहनहधत् व करता ि,ै के हित के हवरुद्ध कोई कायग निीं करेगा और 

वि सिैव उनके पूवग अनुिशेों के अनुसार कायग करेगा :  

परंतु यदि प्राहधकृत प्रहतहनहध अनके हवत्तीय लेनिारों का प्रहतहनहधत् व करता िै तो वि ऐसे प्रत् येक हवत्तीय लेनिार से प्राप् त 

अनुिशेों के अनुसार ऐसे प्रत् येक हवत्तीय लेनिार के संबंध में, उसके मतिान शेयर की सीमा तक अपना मतिान करेगा; :  

परंतु यि और दक यदि कोई हवत्तीय लेनिार भौहतक या इलै‍ रोहनक साधनों के माध् यम से पूवग अनुिशे निीं ितेा ि ै तो 

प्राहधकृत प्रहतहनहध, ऐसे लेनिार की ओर से मतिान करने से प्रहवरत िोगा ।  

3[(3क) उपधारा (3) में अंतर्वगष्ट दकसी प्रहतकूल बात के िोते हए भी, धारा 21 की उपधारा (6क) के अधीन प्राहधकृत 

प्रहतहनहध ऐसे सभी हवत्तीय लेनिारों, हिनका वि प्रहतहनहधत्व करता िै, की ओर से, ऐसे हवत्तीय लेनिारों के, हिनका वि प्रहतहनहधत्व 

करता ि,ै हिन्िोंने अपना मत र्ाला िै, मतिान शेयर के पचास प्रहतशत से अहधक के मत द्वारा दकए गए हवहनिय के अनुसार अपना मत 

र्ालेगा :  

परंतु धारा 12क के अधीन दकसी आवेिन के संबंध में र्ाले िाने वाले मत के हलए प्राहधकृत प्रहतहनहध उपधारा (3) के उपबंधों 

के अनुसार अपना मत र्ालेगा ।] 

(4) प्राहधकृत प्रहतहनहध, ऐसे हवत्तीय लेनिार से, हिसका वि प्रहतहनहधत् व करता ि,ै भौहतक या इलै‍ रोहनक साधनों के रूप में 

प्राप् त दकए गए दकन् िीं अनुिशेों को उनके अनुसार मतिान दकए िाने के हलए लेनिारों की सहमहत के समक्ष फाइल करेगा, हिससे यि 

सुहनहश् चत दकया िा सके दक ऐसे हवत्तीय लेनिार के, हिसका वि प्रहतहनहधत् व करता ि,ै समहुचत मतिान संबंधी अनुिशेों को, 

यथाह‍ थहत, अंतररम समाधान वृहत्तक या समाधान वृहत्तक द्वारा सिी-सिी लेिबद्ध दकया िाता ि ै।  

‍ प‍ िीकरण— इस धारा के प्रयोिनों के हलए “इलै‍ रोहनक साधन” वे िोंगे िो हवहनर्िग‍ ि दकए िाएं ।] 

 26. संव्यविारों के पररविगन के हलए आवेिन का कायगवाहियों को प्रभाहवत न करना—समाधान वृहत्तक द्वारा धारा 25 की 

उपधारा (2) के िंर् (ञ) के अधीन पररविगन आवेिन फाइल दकए िाने से, हनगहमत दिवाला समाधान प्रदक्रया की कायगवाहियां प्रभाहवत 

निीं िोंगी ।  

 27. लनेिारों की सहमहत द्वारा समाधान वहृत्तक का प्रहत‍थापन—(1) ििां हनगहमत दिवाला समाधान प्रदक्रया के िौरान 

लेनिारों की सहमहत की यि राय ि ैदक धारा 22 के अधीन हनयुक्त समाधान वृहत्तक को प्रहत‍थाहपत करने की आवश्यकता िै, विां वि 

उसके ‍थान पर दकसी अन्य समाधान वृहत्तक को इस धारा के अधीन उपबंहधत रीहत में प्रहत‍थाहपत कर सकेगी । 

                                                 
1 2018 के अहधहनयम सं० 8 की धारा 4 द्वारा प्रहत‍ थाहपत ।  
2 2018 के अहधहनयम सं० 8 की धारा 19 द्वारा अंत:‍ थाहपत  ।  
3 2019 के अहधहनयम सं० 26 की धारा 5 द्वारा अंत:‍ थाहपत ।   



 21 

 1[(2) लेनिारों की सहमहत, अपनी दकसी बैठक में, मतिान शेयरों के हछयासठ प्रहतशत शेयरों के साथ, प्र‍ ताहवत समाधान 

वृहत्तक से हवहनर्िग‍ ि प्ररूप में हलहित सिमहत के अधीन रिते हए यि संकल् प कर सकेगी दक धारा 22 के अधीन हनयु‍ त समाधान 

वृहत्तक को दकसी अन् य समाधान वृहत्तक से प्रहत‍ थाहपत दकया िाए ।] 

 (3) लेनिारों की सहमहत, उसके द्वारा प्र‍ताहवत दिवाला वृहत्तक का नाम न्यायहनणागयक प्राहधकारी को भेिेगी । 

 (4) न्यायहनणागयक प्राहधकारी, प्र‍ताहवत समाधान वृहत्तक के नाम को बोर्ग को उसकी पुहष्ट के हलए भेिेगा और कोई समाधान 

वृहत्तक धारा 16 में अहधकहथत रीहत में हनयुक्त दकया िाएगा ।  

(5) ििां प्र‍ताहवत समाधान वृहत्तक के हवरुद्ध उपधारा (3) के अधीन कोई अनुशासहनक कारगवाइयां लंहबत िैं विां धारा 22 

के अधीन हनयुक्त समाधान वृहत्तक इस धारा के अधीन अन्य समाधान वृहत्तक की हनयुहक्त तक बना रिगेा । 

28. कहतपय कारगवाइयों के हलए लेनिारों की सहमहत का अनमुोिन—(1) तत्समय प्रवृत्त दकसी अन्य हवहध में दकसी बात के 

िोते हए भी समाधान वृहत्तक, हनगहमत दिवाला समाधान प्रदक्रया के िौरान लेनिारों की सहमहत के पूवग अनुमोिन के हबना हनम्नहलहित 

कारगवाई निीं करेगा, अथागत् :— 

(क) दकसी ऐसी रकम से अहधक कोई अंतररम हवत्त िुिाना िो लेनिारों की सहमहत द्वारा बैठक में हवहनहित दकया 

िाए; 

(ि) हनगहमत ऋणी की आह‍तयों पर कोई प्रहतभूहत हित सृहित करना;  

(ग) हनगहमत ऋणी की पूंिी संरचना में पररवतगन हिसके अंतगगत अहतररक्त प्रहतभूहतयों को िारी करने के माध्यम 

द्वारा, प्रहतभूहतयों के नए वगग का सृिन करना या हनगहमत ऋणी कोई कंपनी िोने की िशा में पुन: क्रय या मोचन िारी 

करना; 

(घ) हनगहमत ऋणी के ‍वाहमत्व हित में कोई पररवतगन अहभहलहित करना; 

(ङ) हनगहमत ऋणी के िातों को बनाए रिने वाली हवत्तीय सं‍थाओं को दकसी ऐसे नामे र्ालने वाले संव्यविार, 

िो ऐसे दकसी िाते में से ऐसी दकसी रकम, हिसका लेनिारों की सहमहत द्वारा उसकी बैठक में हवहनिय दकया िाए, के 

आहध‍य में दकया गया ि,ै अनुिशे िनेा; 

(च) कोई संबंहधत पक्षकार संव्यविार करना; 

(छ) हनगहमत ऋणी के गठन ि‍तावेि में संशोधन करना; 

(ि) दकसी अन्य व्यहक्त को अपने प्राहधकार का प्रत्यायोिन करना; 

(झ) हनगहमत ऋणी के दकसी शेयरधारक या उसके नामहनिहेशती के शेयरों का तृतीय पक्षकार को व्ययन करना या 

व्ययन को अनुज्ञात करना;  

(ञ) हनगहमत ऋणी या उसकी समनुषंगी के प्रबंध में कोई पररवतगन करना;  

(ि) कारबार के सामान्य अनुक्रम से हभन्न दकसी ताहववक संहविा के अधीन अहधकारों या हवत्तीय ऋणों या प्रचालन 

ऋणों का अंतरण करना;  

(ठ) लेनिारों की सहमहत द्वारा यथा हवहनर्िगष्ट ऐसे कार्मगक की हनयुहक्त या संहविा के हनबंधनों में पररवतगन करना; 

या   

(र्) हनगहमत ऋणी के दकसी कानूनी लेिा परीक्षक या आंतररक लेिा परीक्षकों की हनयुहक्त या संहविा के हनबंधनों 

में पररवतगन करना । 

 (2) समाधान वृहत्तक, लेनिारों की सहमहत की बैठक संयोहित करेगा और उपधारा (1) के अधीन कोई कारगवाई करने से पूवग 

लेनिारों का मत प्राि करेगा । 

 (3) उपधारा (1) के अधीन कोई कारगवाई लेनिारों की सहमहत के मतिान अंश के 2[हछयासठ] प्रहतशत दकसी मत द्वारा 

अनुमोिन के हबना निीं िोगी । 

 (4) ििां समाधान वहृत्तक द्वारा उपधारा (1) के अधीन कोई कारगवाई इस धारा में यथा अपेहक्षत दकसी रीहत में लेनिारों की 

सहमहत का अनमुोिन प्राि दकए हबना की िाती ि ैविां ऐसी कारगवाई शून्य िोगी । 

 (5) लेनिारों की सहमहत इस संहिता के अधीन उसके हवरुद्ध आवश्यक कारगवाई करने के हलए बोर्ग को उपधारा (4) के अधीन 

समाधान वृहत्तक की कारगवाइयों की ररपोिग कर सकेगी । 

                                                 
1 2018 के अहधहनयम सं० 26 की धारा 20 द्वारा प्रहत‍ थाहपत ।   
2 2018 के अहधहनयम सं० 26 की धारा 21 द्वारा “पचित्तर” शब् ि के ‍ थान पर प्रहत‍ थाहपत ।   



 22 

 29. िानकारी ज्ञापन की तयैारी—(1) समाधान वृहत्तक, दकसी समाधान योिना को बनाने के हलए ऐसी सुसंगत िानकारी 

वाले ऐसे प्ररूप और ऐसी रीहत में िो बोर्ग द्वारा हवहनर्िगष्ट दकए िाएं, िानकारी ज्ञापन तैयार करेगा । 

 (2)  समाधान वृहत्तक, समाधान आवेिक को सभी सुसंगत िानकारी तक पहचं को भौहतक और इलै‍राहनक प्ररूप में उपलब्ध 

कराएगा बशते ऐसा समाधान आवेिक हनम्नहलहित का हिम्मा लेता िै— 

  (क) गोपनीयता और आंतररक व्यापार से संबंहधत तत्समय प्रवृत्त दकसी हवहध के उपबंधों का अनुपालन करना; 

(ि) हनगहमत ऋणी के दकसी बौहद्धक संपिा की संरक्षा करना िो उसकी पहचं में िो; और  

(ग) िब तक इस उपधारा के िंर् (क) और िंर् (ि) का अनुपालन न िो िाता तब तक दकसी तृतीय पक्षकार के 

साथ सुसंगत िानकारी साझा निीं करना ।  

‍ प‍ िीकरण—इस धारा के प्रयोिनों के हलए “सुसंगत िानकारी” से हनगहमत ऋणी के हलए समाधान योिना बनाने के हलए 

समाधान आवेिक द्वारा अपेहक्षत िानकारी अहभप्रेत ि ैहिसके अंतगगत हनगहमत ऋणी की हवत्तीय ह‍ थहत हनगहमत ऋणी के द्वारा या 

उसके हवरुद्ध हववािों से संबंहधत सभी िानकारी तथा हनगहमत ऋणी से संबंहधत कोई अन् य हवषय िो हवहनर्िग‍ ि दकया िाए ।  

1[29क. व ेव् यह‍ त, िो समाधान आवेिक िोन ेके पात्र निीं िैं—कोई व् यह‍ त, कोई समाधान योिना प्र‍ तुत करने का तब पात्र 

निीं िोगा यदि ऐसा व् यह‍ त या ऐसे व् यह‍ त के साथ संयु‍ त रूप से या हमलकर कायग करने वाला कोई अन् य व् यह‍ त—  

 (क) कोई अनुन् मोहचत दिवाहलया ि;ै  

 (ि) बैंककारी हवहनयमन अहधहनयम, 1949 (1949 का 10) के अधीन िारी दकए गए भारतीय ररिवग बैंक के 

मागगिशगक हसद्धान् तों के अनुसार िानबूझकर व् यहतक्रमी ि;ै  

 (ग) कोई ऐसा िाता या ऐसे व् यह‍ त के या उस व् यह‍ त के, हिसका ऐसा व् यह‍ त संप्रवतगक ि,ै प्रबंधतंत्र या हनयंत्रण 

के अधीन कोई हनगहमत 2[ऋणी, समाधान योिना प्र‍ तुत दकए िाने के समय कोई ऐसा िाता रिता िै] हिसे बैंककारी 

हवहनयमन अहधहनयम, 1949 (1949 का 10) के अधीन िारी दकए गए भारतीय ररिवग बैंक के मागगिशगक हसद्धांतों 3[या 

तत् समय प्रवृत्त दकसी अन् य हवहध के अधीन दकसी हवत्तीय क्षेत्र के हवहनयामक द्वारा िारी दिशाहनिशेों] के अनुसार                     

गैर-हन‍ पािक आह‍ त के रूप में वगीकृत दकया गया ि ैऔर ऐसे वगीकरण की तारीि से हनगहमत ऋणी की हनगहमत दिवाला 

समाधान प्रदक्रया प्रारंभ िोने की तारीि तक कम से कम एक वषग की अवहध व् यपगत िो गई ि ै:  

 परन् तु कोई व् यह‍ त कोई समाधान योिना प्र‍ तुत करने का तब पात्र िोगा यदि ऐसा व् यह‍ त सामाधान योिना 

प्र‍ तुत करने से पूवग गैर-हन‍ पािक आह‍ त से संबंहधत सभी अहतशोध् य रकमों का उन पर ब् याि औश्र प्रभारों सहित संिाय कर 

ितेा ि ै: 

 [परंतु यि और दक इस िंर् की कोई बात दकसी समाधान आवेिक को विां लागू निीं िोगी, ििां ऐसा आवेिक कोई 

हवत्तीय अह‍ तत् व ि ैऔर वि हनगहमत ऋणी से संबंहधत पक्षकार निीं ि ै।  

‍ प‍ िीकरण  1—इस परंतु के प्रयोिनों के हलए “संबंहधत पक्षकार” पि में ऐसा कोई हवत्तीय अह‍ तत् व सहम् महलत 

निीं िोगा, िो दकसी हवत्तीय क्षेत्र हवहनयामक द्वारा हवहनयहमत िै, यदि वि हनगहमत ऋणी का हवत्तीय लेनिार ि ैऔर वि 

दिवाला प्रारंभ िोने की तारीि से पूवग, एकमात्र रूप से ऋण को इह‍ विी शेयरों में संपररवर्तगत या प्रहत‍ थाहपत करने या 

इह‍ विी शेयरों में संपररवतगनीय हलितों 4[या ऐसे संव्यविारों, िो हवहित दकए िाएं, के पूरे िो िाने पर] के मुद्दे हनगहमत 

ऋणी का संबंहधत पक्षकार ि ै।  

‍ प‍ िीकरण  2—इस िंर् के प्रयोिनों के हलए, ििां समाधान आवेिक का ऐसा कोई िाता िै, या ऐसे दकसी 

व् यह‍ त के प्रबंध या हनयंत्रण के अधीन हनगहमत ऋणी का कोई िाता िै या ऐसे व् यह‍ त का ऐसा कोई िाता िै, हिसका ऐसा 

व् यह‍ त संप्रवतगक ि,ै हिसे गैर-हन‍ पािनकारी आह‍ त के रूप में वगीकृत दकया गया ि ैऔर ऐसे िाते को इस संहिता के अधीन 

दकसी अनुमोदित पूवग समाधान योिना के अनुसरण में अर्िगत दकया गया था, तब इस िंर् के उपबंध, ऐसे समाधान आवेिक 

को, न् यायहनणगयक प्राहधकारी द्वारा इस संहिता के अधीन ऐसी समाधान योिना के अनुमोिन की तारीि से तीन वषग की 

अवहध के हलए लागू निीं िोगे ;] 

 5[(घ) हिसे हनम् नहलहित अवहध के कारावास से िरं्नीय दकसी अपराध के हलए हसद्धिोष ठिराया गया िै,—  

(i) बारिवीं अनुसूची के अधीन हवहनर्िग‍ ि दकसी अहधहनयम के अधीन िो वषग या अहधक के; या  

(ii) तत् समय प्रवृत्त दकसी अन् य हवहध के अधीन सात वषग या अहधक के; या  

                                                 
1 2018 के अहधहनयम सं० 8 की धारा 5 द्वारा अंत:‍ थाहपत ।   
2 2018 के अहधहनयम सं० 26 की धारा 22 द्वारा “ऋणी, कोई ऐसा िाता रिता ि”ै शब् िों के ‍ थान पर प्रहत‍ थाहपत ।   
3 2018 के अहधहनयम सं० 26 की धारा 22 द्वारा “ररिवग बैंक के मागगिशगक हसद्धान् तों” शब् िों का अंत:‍ थाहपत । 
4 2020 के अहधहनयम सं० 1 की धारा 9 द्वारा अंत:‍ थाहपत ।  
5 2018 के अहधहनयम सं० 26 की धारा 22 द्वारा प्रहत‍ थाहपत ।   



 23 

परंतु यि िंर् दकसी व् यह‍ त को, कारावास से उसकी हनमुग‍ त की तारीि से िो वषों की अवहध के अवसान के 

पश् चात् लागू निीं िोगा :  

परंतु यि और दक यि िंर् ‍ प‍ िीकरण 1— के िंर् (iii) में हनर्िग‍ ि संबद्ध व् यह‍ त के संबंध में लागू निीं िोगा;]  

 (ङ) कंपनी अहधहनयम, 2013 (2013 का 18)  के अधीन हनिशेक के रूप में कायग करने के हलए हनरर्िगत ि;ै  

 1[परंतु यि िंर् ‍ प‍ िीकरण 1— के िंर् (iii) में हनर्िग‍ ि संबद्ध व् यह‍ त के संबंध में लागू निीं िोगा;] 

 (च) भारतीय प्रहतभूहत और हवहनयम बोर्ग द्वारा प्रहतभूहतयों में व् यापार करने या प्रहतभूहत बािारों में पहचं रिने 

से प्रहतहषद्ध ि;ै  

 (छ) दकसी ऐसे हनगहमत ऋणी का, हिसमें कोई अहधमानी संव् यविार, कम-मूल् यांदकत संव् यविार, उद्दाहपत प्रत् यय 

संव् यविार या कपिपूणग संव् यविार हआ ि ैऔर हिसकी बाबत इस संहिता के अधीन न् यायहनणागयक प्राहधकारी द्वारा कोई 

आिशे दकया गया ि,ै संप्रवतगक या उसके प्रबंधतंत्र या हनयंत्रण में रिा ि;ै   

 2[परंतु यि िंर् उस समय लागू निीं िोगा, यदि इस संहिता के अधीन अनुमोदित समाधान योिना के अनुसरण में 

या दकसी हवत्तीय क्षेत्र हवहनयामक या दकसी न् यायालय द्वारा अनमुोदित दकसी ‍ कीम या योिना के अनुसरण में समाधान 

आवेिक द्वारा हनगहमत ऋणी के अिगन से पूवग कोई अहधमानी संव् यविार, अवमूल् यांदकत संव् यविार, अहतशय प्रत् यय 

संव् यविार या कपिपूणग संव् यविार हआ ि ैऔर ऐसे समाधान आवेिक ने ऐसे दकसी अहधमानी संव् यविार, अवमूल् यांदकत 

संव् यविार, अहतशय प्रत् यय संव् यविार या कपिपूणग संव् यविार में अन् यथा कोई सियोग निीं दकया िै;] 

 (ि) दकसी ऐसे हनगहमत ऋणी की बाबत दकसी लेनिार के पक्ष में 1[कोई प्रत् याभूहत] हन‍ पादित कर चुका ि,ै हिसके 

हवरुद्ध ऐसे लेनिार द्वारा दिवाला समाधान के हलए दकया गया कोई आवेिन इस संहिता के अधीन ििण कर हलया गया िै  
2[और ऐसी प्रत् याभूहत का लेनिार द्वारा अवलंब हलया गया ि ैऔर ऋण पूणगत: या भागत: असंित्त रिता िै];  

 (झ) भारत के बािर दकसी अहधकार क्षेत्र में दकसी हवहध के अधीन िंर् (क) से िंर् (ि) के तिनुरूप दकसी 

असमथगता के 2[अध् यधीन ि]ै; या  

 (ञ) कोई ऐसा संसक्त व् यह‍ त रिता ि ैिो िंर् (क) से िंर् (झ) के अधीन पात्र निीं ि ै।  

‍ प‍ िीकरण—3[(1)] इस िंर् के प्रयोिनों के हलए, “संस‍ त व् यह‍ त” पि से अहभप्रेत ि—ै  

 (i) ऐसा कोई व् यह‍ त, िो समाधान आवेिक का संप्रवतगक ि ैया उसके प्रबंधतंत्र या हनयंत्रण में िै; या  

 (ii) ऐसा कोई व् यह‍ त, िो समाधान योिना के दक्रयान् वयन के िौरान हनगहमत ऋणी के कारबार का संप्रवतगक या 

उसके प्रबंधतंत्र या हनयंत्रण में िोगा; या  

 (iii) िंर् (i) और िंर् (ii) में हनर्िग‍ ि दकसी व् यह‍ त की हनयंत्री कंपनी, समनुषंगी कंपनी, सियु‍ त कंपनी या उसका 

संबद्ध पक्षकार ि ै:  

1[परंतु ‍ प‍ िीकरण 1 के िंर् (iii) की कोई बात ऐसे दकसी समाधान आवेिक को विां लागू निीं िोगी, ििां ऐसा आवेिक 

कोई हवत्तीय अह‍ तत् व ि ैऔर हनगहमत ऋणी का कोई संबंहधत पक्षकार निीं ि ै:  

परंतु यि और दक “संबंहधत पक्षकार” पि में ऐसा कोई हवत्तीय अह‍ तत् व सहम् महलत निीं िोगा, िो दकसी हवत्तीय क्षेत्र 

हवहनयामक द्वारा हवहनयहमत िै, यदि वि हनगहमत ऋणी का हवत्तीय लेनिार ि ैऔर वि दिवाला प्रारंभ िोने की तारीि से पूवग, 

एकमात्र रूप से ऋण को इह‍ विी शेयरों में संपररवर्तगत या प्रहत‍ थाहपत करने या इह‍ विी शेयरों में संपररवतगनीय हलितों 4[या ऐसे 

संव्यविार, िो हवहित दकए िाएं, के पूरे िो िाने पर] के मद्दे हनगहमत ऋणी का संबंहधत पक्षकार ि ै; ]  

 (अ) कोई अनुसूहचत बैंक; या  

 (आ) हवत्तीय आह‍ तयों का प्रहतभूहतकरण और पुनगगठन तथा प्रहतभूहत हित का प्रवतगन अहधहनयम, 2002              

(2002 का 54) की धारा 3 के अधीन भारतीय ररिवग बैंक के पास रहि‍ रीकृत कोई आह‍ त पुनगगठन कंपनी; या  

 (इ) भारतीय प्रहतभूहत और हवहनयम बोर्ग के पास रहि‍ रीकृत कोई अनुकल् पी हवहनधान हनहध ।  

5[‍ प‍ िीकरण 2—इस धारा के प्रयोिनों के हलए, “हवत्तीय अह‍ तत् व” पि से ऐसे हनम् नहलहित अह‍ तत् व अहभप्रेत िोंगे, िो ऐसे 

मानिरं्ों या शतों को पूरा करते िैं, हिन् िें कें रीय सरकार, हवहत्तय क्षेत्र हवहनयामक के परामशग से इस हनहमत्त अहधसूहचत करे, अथागत् :--  

                                                 
1 2018 के अहधहनयम सं० 26 की धारा 22 द्वारा अंत:‍ थाहपत ।  
2 2018 के अहधहनयम सं० 26 की धारा 22 द्वारा अंत:‍ थाहपत । 
3 2018 के अहधहनयम सं० 26 की धारा 22 द्वारा संख यांदकत।   
4 2020 के अहधहनयम सं० 1 की धारा 9 द्वारा अंत:‍ थाहपत ।  
52018 के अहधहनयम सं० 26 की धारा 22 द्वारा अंत:‍ थाहपत ।  



 24 

 (क)  कोई अनुसूहचत बैंक;  

 (ि) भारत से बािर की अहधकाररता के हविशेी बैंक या प्रहतभूहत बैंक बािार हवहनयामक या अन् य हवत्तीय से‍ िर 

हवहनयामक द्वारा हवहनयहमत कोई अह‍ तत् व हिसकी अहधकाररता हवत्तीय कारगवाई कायग बल मानकों की अनुवती िै, और 

अन् तररा‍ रीय प्रहतभूहत आयोग, बहपक्षीय ज्ञापन समझौता का ि‍ ताक्षरकताग ि;ै  

  (ग) कोई हवहनधान माध् यम, रहि‍ रीकृत हविशेी सं‍ थागत हवहनधानकताग, रहि‍ रीकृत हविशेी पोिगफोहलयो 

हवहनधानकताग या कोई हविशेी उद्यम पूंिी हवहनधानकताग, ििां हनबंधनों का विी अथग िै, िो हविशेी मुरा प्रबंध अहधहनयम, 

1999 (1999 का 42) के अधीन बनाए गए हविशेी मुरा प्रबंध (भारत से बािर हनवासी दकसी व् यह‍ त द्वारा प्रहतभूहत का 

अंतरण का अंतरण या हनगगम) हवहनयम, 2017 के हवहनयम 2 में उसका ि;ै  

(घ) हवत्तीय आह‍ तयों का प्रहतभूहतकरण और पुनगगठन तथा प्रहतभूहत हित का प्रवतगन अहधहनयम, 2002 (2002  का 

54) की धारा 3 के अधीन भारतीय ररिवग बैंक के पास रहि‍ रीकृत कोई आह‍ त पुनगगठन कंपनी;  

(ङ) भारतीय प्रहतभूहत और हवहनययम बोर्ग के पास रहि‍ रीकृत कोई वैकहल् पक हवहनधान हनहध;  

(च) व् यह‍ तयों के ऐसे प्रवगग, हिन् िें कें रीय सरकार द्वारा अहधसूहचत दकया िाए ।] 

  30. समाधान योिना को प्र‍ तुत करना—(1) कोई समाधान आवेिक, सूचना ज्ञापन के आधार पर तैयार की गई समाधान 

योिना 1[यि कथन करने वाले एक शपथ-पत्र के साथ दक वि धारा 29क के अधीन पात्र ि]ै समाधान वृहत्तक को प्र‍ तुत कर सकेगा । 

 (2) समाधान वृहत्तक उसको प्राप् त प्रत् येक समाधान योिना की परीक्षा यि पुह‍ ि करने के हलए करेगा दक प्रत् येक समाधान 

योिना— 

(क) दिवाहलया समाधान प्रदक्रया लागतों का संिाय बोर्ग द्वारा हवहनर्िग‍ ि रीहत में हनगहमत ऋणी के अन् य ऋणों के 
2[संिाय] पर पूर्वगकता से दकए िाने का उपबंध करती िै; 

3[(ि) प्रचालन लेनिारों के ऋणों के संिाय के हलए ऐसी रीहत में उपबंध करती िै, िो बोर्ग द्वारा हवहनर्िगष्ट की िाए 

और िो,—  

(i) धारा 53 के अधीन हनगहमत ऋणी के पररसमापन की िशा में ऐसे लेनिारों को संित्त की िाने वाली 

रकम से ; या  

(ii) ऐसी रकम से, िो ऐसे लेनिारों को उस समय संित्त की गई िोती, यदि समाधान योिना के अधीन 

हवतररत की िाने वाली रकम को धारा 53 की उपधारा (1) में पूर्वगकता के क्रमानुसार हवतररत दकया गया िोता,  

इनमें से िो भी अहधक िो, कम निीं िोगी और ऐसे हवत्तीय लेनिारों के,  िो समाधान योिना के पक्ष में मतिान निीं 

करते िैं, ऋणों के संिाय के हलए, ऐसी रीहत में उपबंध करती िै, िो बोर्ग द्वारा हवहनर्िगष्ट की िाए, िो हनगहमत ऋणी के 

पररसमापन की िशा में धारा 53 की उपधारा (1) के अनुसार ऐसे लेनिारों को संित्त की िाने वाली रकम से कम                

निीं िोगी । 

‍पष्टीकरण 1—शंकाओं को िरू करने के हलए यि ‍पष्ट दकया िाता ि ैदक इस िंर् के उपबंधों के अनुसार दकया गया 

कोई हवतरण ऐसे लेनिारों के हलए उहचत और साम्यापूणग िोगा ।  

‍पष्टीकरण 2—इस िंर् के प्रयोिनों के हलए यि घोहषत दकया िाता ि ैदक दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता 

(संशोधन) अहधहनयम, 2019 के प्रारंभ की तारीि से िी इस िंर् के उपबंध दकसी हनगहमत ऋणी की हनगम दिवाला 

समाधान प्रदक्रया को भी विां लागू िोंगे,—  

(i) ििां दकसी समाधान योिना को न्यायहनणगयन प्राहधकरण द्वारा अनुमोदित निीं दकया गया ि ैया उसे 

नामंिूर कर दिया गया ि ै; 

(ii) ििां धारा 61 या धारा 62 के अधीन कोई अपील की गई िै या ऐसी कोई अपील तत्समय प्रवतृ्त 

हवहध के दकसी उपबंध के अधीन समय वर्िगत निीं ि ै; या  

(iii) ििां दकसी समाधान योिना के संबंध में न्यायहनणगयन प्राहधकरण के हवहनहिय के हवरुद्ध दकसी 

न्यायालय में कोई हवहधक कायगवािी आरंभ की गई ि]ै   

  (ग) समाधान योिना के अनुमोिन के पश् चात् हनगहमत ऋणी के कायों के प्रबंध के हलए उपबंध करती िै; 

  (घ) समाधान योिना का कायागन् वयन और पयगवेक्षण का उपबन् ध करती ि;ै 

                                                 
1 2018 के अहधहनयम सं० 26 की धारा 23 द्वारा अंत:‍ थाहपत । 
2 2018 के अहधहनयम सं० 26 की धारा 23 द्वारा “प्रहतसंिाय” शब् ि के ‍ थान पर प्रहत‍ थाहपत ।  
3 2019 के अहधहनयम सं० 26 की धारा 6 द्वारा प्रहत‍ थाहपत ।   



 25 

  (ङ) तत् समय प्रवृत्त हवहध के दकसी भी उपबंध का उललंघन निीं करती िै; 

  (च) ऐसी अन् य अपेक्षाओं के अनुरूप ि,ै िो बोर्ग द्वारा हवहनर्िग‍ ि की िाएं ।  

1[‍ प‍ िीकरण—िंर् (ङ) के प्रयोिनों के हलए, यदि कंपनी अहधहनयम, 2013 (2013 का 18) या समाधान योिना 

के अधीन कारगवाई के कायागन् वयन ितेु तत् समय प्रवृत्त दकसी अन् य हवहध के अधीन शेयर धारकों का कोई अनुमोिन अपेहक्षत ि,ै 

तो ऐसे अनुमोिन को दिया गया समझा िाएगा और वि उस अहधहनयम या हवहध के उल् लंघन में निीं िोगा ।] 

 (3) समाधान वृहत्तक, ऐसी समाधान योिना अनमुोिन के हलए लेनिारों की सहमहत को प्र‍ तुत करेगा, िो उपधारा (2) में 

हनर्िग‍ ि शतों की पुह‍ ि करती ि ै।  

 2[(4) लेनिारों की सहमहत, दकसी समाधान योिना का, 3[उसकी साध्यता और व्यविायगता, प्र‍ताहवत हवतरण की रीहत, 

हिसका हनधागरण करते हए धारा 53 की उपधारा (1) में यथा अहधकहथत रूप से लेनिारों के बीच पूर्वगकता, हिसके अंतगगत दकसी 

प्रहतभूत लेनिार के प्रहतभूहत हित की पूर्वगकता और मूल्य भी िै, के क्रम को ध्यान में रि सकेगा तथा] ऐसी अन् य अन् य अपेक्षाओं पर, िो 

बोर्ग द्वारा हवहनर्िग‍ ि की िाएं, हवचार करने के पश् चात् हवत्तीय लेनिारों के मत के भाग के कम से कम हछयासठ प्रहतशत मत द्वारा 

अनुमोिन कर सकेगी :  

 परन् तु लेनिारों की सहमहत, दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (संशोधन) अध् यािशे, 2017 (2017 का अध् यािशे सं० 7) के 

प्रारंभ से पिले प्र‍ तुत की गई दकसी समाधान योिना का विां अनुमोिन निीं करेगी, ििां समाधान आवेिक धारा 29क के अधीन 

अपात्र ि ैऔर ििां उसके पास कोई अन् य समाधान योिना उपलब् ध निीं ि,ै विां समाधान वृहत्तक से, नए हसरे से, समाधान योिना 

आमंहत्रत करने की अपेक्षा कर सकेगी :  

 परन् तु यि और दक ििां पिले परन् तुक में हनर्िग‍ ि समाधान आवेिक धारा 29क के िंर् (ग) के अधीन अपात्र ि ैविां लेनिारों 

की सहमहत द्वारा, समाधान आवेिक को धारा 29क के िंर् (ग) के परन् तुक के अनुसार अहतशोध् य रकमों का संिाय करने के हलए ऐसी 

अवहध अनुज्ञात की िाएगी िो तीस दिन से अहधक की निीं िोगी :  

 परन् तु यि भी दक िसूरे परन् तुक की दकसी बात का अथग धारा 12 की उपधारा (3) के परन् तुक के प्रयोिनों के हलए हव‍ ताररत 

अवहध के रूप में निीं लगाया िाएगा और हनगहमत दिवाला समाधान प्रदक्रया उस उपधारा में हवहनर्िग‍ ि अवहध के भीतर की िाएगी ।   

 1[परंतु यि भी दक दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (संशोधन) अध् यािशे, 2018 ( 2018 का अध् यािशे सं० 6) द्वारा यथा 

संशोहधत धारा 29क में पात्राता मानिरं् ऐसे समाधान आवेिक को लागू िोंगे, हिसने दिवाला और शोधन अक्षमता सहंिता (संशोधन) 

अध् यािशे, 2018 के प्रारंभ की तारीि को समाधान योिना प्र‍ तुत निीं की ि ै। ] 

 (5) समाधान आवेिक, लेनिारों की सहमहत की ऐसी बैठक में, हिसमें आवेिक की समाधान योिना पर हवचार दकया िाना िै, 

िाहिर रि सकेगा: 

 परन् तु समाधान आवेिक को लेनिारों की बैठक में मत िनेे का तक तक अहधकार निीं िोगा िब तक दक एक ऐसा समाधान 

आवेिक भी हवत्तीय लेनिार न िो । 

 (6) समाधान वृहत्तक लेनिारों की सहमहत द्वारा तथा अनुमोदित समाधान योिना को न् यायहनणागयक प्राहधकारी को प्र‍ तुत 

करेगा । 

 31. समाधान योिना का अनमुोिन—(1) यदि न् यायहनणागयक प्राहधकारी का यि समाधान िो िाता ि ै दक धारा 30 की 

उपधारा (4) के अधीन लेनिारों की सहमहत द्वारा यथा अनुमोदित समाधान योिना धारा 30 की उपधारा (2) में यथाहनर्िग‍ ि अपेक्षाओं 

को पूरा करती ि ैतो वि आिशे द्वारा समाधान योिना को अनमुोदित कर िगेा िो हनगहमत ऋणी और उसके कमगचाररयों , सि‍ यों, 

लेनिारों, 4[प्रहतभूहतिाताओं और समाधान योिना में सहम्महलत अन्य पणधाररयों पर, हिनके अंतगगत कें रीय सरकार, कोई राज्य 

सरकार या ऐसा कोई ‍थानीय प्राहधकारी भी िै, हिसे तत्समय प्रवृत्त दकसी हवहध के अधीन उद्भूत िोन ेवाले शोध्यों के संिाय के संबंध 

में ऐसे प्राहधकारी के रूप में कोई ऋण िये िैं, हिनको कानूनी शोध्य िये िोते िैं] प्रहतभूहतिाताओं और समाधान योिना में सहम् महलत 

अन् य पणधाररयों पर बाध् यकारी िोगी :  

 5[परंतु न् यायहनणागयक प्राहधकारी, इस उपधारा के अधीन समाधान योिना के अनुमोिन का आिशे पाररत दकए िाने से पूवग 

यि समाधान करेगा दक समाधान योिना में उसके प्रभावी दक्रयान् वयन के हलए उपबंध सहम् महलत िैं ।] 

 (2) ििां न् यायहनणागयक प्राहधकारी का यि समाधान िो िाता ि ैदक समाधान योिना उपधारा (1) में हनर्िग‍ ि अपेक्षाओं की 

पुह‍ ि के अनुरूप निीं ि,ै तो वि आिशे द्वारा समाधान योिना को नामंिूर कर सकेगा ।  

                                                 
1 2018 के अहधहनयम सं० 26 की धारा 23 द्वारा अंत:‍ थाहपत । 
2 2018 के अहधहनयम सं० 8 की धारा 6 द्वारा प्रहत‍ थाहपत । 
3 2019 के अहधहनयम सं० 26 की धारा 6 द्वारा “उसकी साध् यता और व् यविायगता तथा” शब् िों के ‍ थान पर प्रहत‍ थाहपत ।  
4 2019 के अहधहनयम सं० 26 की धारा 7 द्वारा अंत:‍ थाहपत ।  
5 2018 के अहधहनयम सं० 26 की धारा 24 द्वारा अंत:‍ थाहपत । 



 26 

 (3) उपधारा (1) के अधीन अनुमोिन आिशे के पश् चात,्— 

  (क) न् यायहनणागयक प्राहधकारी द्वारा धारा 14 के अधीन पाररत अहध‍ थगन आिशे प्रभाव में निीं रिेगा, और 

  (ि) समाधान वृहत्तक, हनगहमत दिवाला समाधान प्रदक्रया संचाहलत करने से संबंहधत सभी अहभलेि और समाधान 

 अपने र्ािा बेस में अहभहलहित करने के हलए बोर्ग को भेिेगा ।  

 2[(4) समाधान आवेिक, उपधारा (1) के अधीन अनुमोदित समाधान योिना के अनुसरण में, न् यायहनणागयक प्राहधकारी द्वारा 

उपधारा (1) के अधीन समाधान योिना के अनुमोिन की तारीि से एक वषग की अवहध के भीतर या तत् समय प्रवृत्त दकसी अन् य हवहध में 

यथा उपबंहधत ऐसी अवहध के भीतर, इनमें से िो भी पश् चात्वती िो, उ‍ त हवहध के अधीन अपेहक्षत आवश् यक अनुमोिन अहभप्राप् त 

करेगा :  

परंतु ििां समाधान योिना में, प्रहत‍ पधाग अहधहनयम, 2002 ( 2003 का 12) की धारा 5 में यथाहनर्िग‍ ि संयोिन के हलए 

कोई उपबंध अन् तर्वग‍ ि ि ैविां समाधान आवेिक, लेनिारों की सहमहत द्वारा ऐसी समाधान योिना के अनुमोिन से पूवग उस अहधहनयम 

के अधीन भारतीय प्रहत‍ पधाग आयोग का अनुमोिन अहभप्राप् त करेगा ।]  

 32. अपील—समाधान योिना को अनुमोदित करने वाले दकसी आिशे से कोई अपील धारा 61 की उपधारा (3) में अहधकहथत 

रीहत और आधारों पर की िाएगी । 

 1[32क. पवूग में दकए गए अपराधों के हलए िाहयत्व, आदि—(1) इस संहिता या तत्समय प्रवृत्त दकसी अन्य हवहध में अंतर्वगष्ट 

दकसी प्रहतकूल बात के िोते हए भी, हनगहमत दिवाला समाधान प्रदक्रया के प्रारंभ िोने से पूवग दकए गए दकसी अपराध के हलए हनगहमत 

ऋणी का िाहयत्व समाि िो िाएगा और हनगहमत ऋणी धारा 31 के अधीन न्यायहनणागयक प्राहधकारी द्वारा समाधान योिना के 

अनुमोदित दकए िाने की तारीि से ऐसे अपराध के हलए अहभयोहित निीं दकया िाएगा, यदि समाधान योिना दकसी ऐसे व्यहक्त के 

हलए हनगहमत ऋणी के प्रबंधन या हनयंत्रण में पररवतगन का पररणाम िोती िै,—  

(क) िो संप्रवतगक निीं था या हनगहमत ऋणी के प्रबंधन या हनयंत्रण में निीं था या ऐसे व्यहक्त का संबंहधत पक्षकार 

निीं था ; या  

(ि) िो ऐसा व्यहक्त निीं था हिसके संबंध में सुसंगत अन्वेषण प्राहधकारी के पास उसके कब्िे में सामिी के आधार 

पर, यि हवश्वास करने का कारण ि ैदक उसने अपराध को करने के हलए ि‍ुप्रेरण दकया था या षड्यंत्र रचा था और सुसंगत 

कानूनी प्राहधकारी या न्यायालय को ररपोिग प्र‍तुत कर िी िै या उसके पास हशकायत फाइल कर िी िै : 

परंतु यदि कोई अहभयोिन ऐसे हनगहमत ऋणी के हवरुद्ध हनगहमत दिवाला समाधान प्रदक्रया के िौरान संह‍थत 

दकया गया था तो वि इस उपधारा की अपेक्षाओं के पूरा दकए िाने के अध्यधीन समाधान योिना के अनुमोिन की तारीि से 

उन्मोहचत िो िाएगा : 

परंतु यि और दक ऐसा प्रत्येक व्यहक्त, िो सीहमत िाहयत्व भागीिारी अहधहनयम, 2008 (2009 का 6) की धारा 2 के 

िंर् (ञ) में यथा पररभाहषत “अहभहित भागीिार” था, या कंपनी अहधहनयम, 2013 (2013 का 18) की धारा 2 के िंर् (60) 

में यथा पररभाहषत “अहधकारी, िो व्यहतक्रमी ि”ै या अपने कारबार के संचालन के हलए दकसी भी रीहत में हनगहमत ऋणी का 

भारसाधक था या उसके प्रहत उत्तरिायी था, या दकसी भी रीहत में हनगहमत ऋणी के साथ सियुक्त था और िो अन्वेषण 

प्राहधकारी द्वारा प्र‍तुत ररपोिग या फाइल की गई हशकायत के अनुसार ऐसे अपराध के दकए िाने में प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः 

संहलि था, इस बात के िोते हए भी दक हनगहमत ऋणी का िाहयत्व इस उपधारा के अधीन समाि िो गया िै, हनगहमत ऋणी 

द्वारा दकए ऐसे अपराध के हलए अहभयोहित दकए िाने और िहंर्त दकए िाने के हलए िायी बना रिगेा ।  

(2) हनगहमत ऋणी की हनगहमत दिवाला समाधान प्रदक्रया के प्रारंभ से पूवग दकए गए ऐसे अपराध के संबंध में हनगहमत ऋणी 

की संपहत्त के हवरुद्ध विां कोई कारगवाई निीं की िाएगी, ििां ऐसी संपहत्त धारा 31 के अधीन न्यायहनणागयक प्राहधकारी द्वारा 

अनुमोदित समाधान योिना के अधीन निीं आती िै, हिसका पररणाम दकसी ऐसे व्यहक्त के हलए हनगहमत ऋणी के हनयंत्रण में या ऐसे 

व्यहक्त के हलए इस संहिता के भाग 2 के अध्याय 3 के उपबंधों के अधीन समापन आह‍तयों के हवक्रय में पररवतगन ि ैिो,—    

(i) संप्रवतगक निीं था या हनगहमत ऋणी के प्रबंधन या हनयंत्रण में निीं था या ऐसे व्यहक्त का संबद्ध पक्षकार निीं        

था ; या 

(ii) ऐसा व्यहक्त निीं था हिसके संबंध में सुसंगत अन्वेषण प्राहधकारी के पास उसके कब्िे में सामिी के आधार पर 

यि हवश्वास करने का कारण ि ैदक उसने अपराध को करने के हलए ि‍ुप्रेरण दकया था या षड्यंत्र दकया था और सुसंगत कानूनी 

प्राहधकारी या न्यायालय को ररपोिग प्र‍तुत कर िी ि ैया उसके पास हशकायत फाइल कर िी िै । 

‍पष्टीकरण—इस उपधारा के प्रयोिनों के हलए, यि ‍पष्ट दकया िाता ि ैदक,—  

                                                 
1 2020 के अहधहनयम सं० 1 की धारा 10 द्वारा अंत:‍ थाहपत ।   



 27 

(i) ऐसे दकसी अपराध के संबंध में हनगहमत ऋणी की संपहत्त के हवरुद्ध दकसी कारगवाई में ऐसी हवहध के 

अधीन, िो हनगहमत ऋणी को लागू िो, ऐसी संपहत्त की कुकी, अहभििण, प्रहतधारण या िब्ती सहम्महलत िोगी ;  

(ii) इस उपधारा में दकसी बात का यि अथग निीं लगाया िाएगा दक वि हनगहमत ऋणी या दकसी ऐसे 

व्यहक्त से हभन्न दकसी व्यहक्त की संपहत्त के हवरुद्ध दकसी कारगवाई को वर्िगत करने के हलए िै, हिसने इस संहिता के 

अधीन हनगहमत दिवाला समाधान प्रदक्रया या समापन प्रदक्रया के माध्यम से ऐसी संपहत्त का अिगन दकया िै और 

वि इस धारा में हवहनर्िगष्ट अपेक्षाओं को पूरा करता िै, हिसके हवरुद्ध ऐसी कोई कारगवाई ऐसी हवहध के अधीन िो 

लागू िो की िा सकेगी ।  

(2) उपधारा (1) और उपधारा (2) में अंतर्वगष्ट उपबंधों के अधीन रिते हए और इस धारा में प्रित्त उन्मुहक्त के िोते हए भी 

हनगहमत ऋणी और ऐसा कोई व्यहक्त, हिससे ऐसे हनगहमत ऋणी या व्यहक्त को ऐसी हवहध के अधीन िो लागू िो, सिायता प्रिान करने 

की अपेक्षा की िाए, हनगहमत दिवाला समाधान प्रदक्रया के प्रारंभ से पूवग दकए गए दकसी अपराध का अन्वेषण करने वाले दकसी 

प्राहधकारी को सभी सिायता और सियोग िगेा ।] 

अध् याय 3 

पररसमापन प्रदक्रया 

 33. पररसमापन का आरंभ—(1) ििां न् यायहनणागयक प्राहधकारी,— 

  (क) न् यायहनणागयक प्राहधकारी, यथाह‍ थहत, दिवाला समाधान प्रदक्रया अवहध या धारा 12 के अधीन हनगहमत 

 दिवाला समाधान प्रदक्रया के पूणग िोने के हलए अनुज्ञात अहधकतम अवहध या धारा 56 के अधीन त् वररत हनगहमत दिवाला 

 समाधान प्रदक्रया के समाप् त िोने से पूवग धारा 30 के उपधारा (6) के अधीन कोई समाधान योिना प्राप् त निीं करता ि;ै या  

  (ि) धारा 31 की उपधारा (2) के अधीन समाधान योिना को उसमें हवहनर्िग‍ ि अपेक्षाओं के अननुपालन के हलए 

 अ‍ वीकार कर ितेा ि,ै विां वि, — 

 (i) हनगहमत ऋणी के इस अध् याय में अहधकहथत रीहत में पररसमापन दकए िाने की अपेक्षा करते हए 

आिशे पाररत करेगा; 

   (ii) लोक घोषणा यि कथन करते हए िारी करेगा दक हनगहमत ऋणी पररसमापन में ि;ै और  

   (iii) ऐसे आिशे को ऐसे प्राहधकारी को भेिने की अपेक्षा करेगा हिसके पास हनगहमत ऋणी                 

  रहि‍ रीकृत ि ै। 

 (2) ििां समाधान वृहत्तक, हनगहमत दिवाला समाधान प्रदक्रया के िौरान ककंतु समाधान योिना की पुह‍ ि से पूवग दकसी समय 

हनगहमत ऋणी के पररसमापन के हलए 1[लेनेिारों की सहमहत के ऐसे हवहनश् चय को, हिसे मतिान शेयर के कम से कम हछयासठ प्रहतशत 

द्वारा अनुमोदित दकया गया िै, न् यायहनणागयक] प्राहधकारी को सूहचत करता िै, न् यायहनणागयक प्राहधकारी उपधारा (1) के िंर् (ि) के 

(i), उपिंर् (ii) और उपिंर् (iii) में यथाहनर्िग‍ ि पररसमापन आिशे पाररत करेगा ।  

 2[‍पष्टीकरण—इस उपधारा के प्रयोिनों के हलए, यि घोषणा की िाती ि ैदक लेनिारों की सहमहत, धारा 21 की उपधारा (1) 

के अधीन उसके गठन के पिात् और समाधान योिना के पुहष्टकरण से पूवग दकसी भी समय, हिसके अंतगगत सूचना ज्ञापन तैयार करने से 

पूवग का कोई समय भी ि,ै हनगहमत ऋणी का पररसमापन करने का हवहनिय कर सकेगी ।] 

 (3) ििां संबंहधत हनगहमत ऋणी द्वारा न् यायहनणागयक प्राहधकारी द्वारा अनुमोदित समाधान योिना का उल् लंघन दकया िाता 

ि,ै विां हनगहमत ऋणी से हभन् न कोई ऐसा व् यह‍ त हिसके हितों पर ऐसे उल् लंघन द्वारा प्रहतकूल प्रभाव पड़ता िै, उपधारा (1) के िंर् 

(ि) के उपिंर् (i), उपिंर् (ii) और िण् र् (iii) में यथाहनर्िग‍ ि दकसी पररसमापन आिशे के हलए न् यायहनणागयक प्राहधकारी को आवेिन 

कर सकेगा । 

 (4) उपधारा (3) के अधीन दकसी आवेिन की प्राहप् त पर यदि न् यायहनणागयक प्राहधकारी यि अवधाररत करता ि ैदक हनगहमत 

ऋणी ने समाधान योिना के उपबंधों का उल् लंघन दकया िै तो वि उपधारा (1) के िंर् (ि) के उपिंर् (i), उपिंर् (ii) और उपिंर् (iii) 

में यथाहनर्िग‍ ि पररसमापन आिशे पाररत करेगा । 

 (5) धारा 52 के अधीन रिते हए िब कोई पररसमापन आिशे पाररत दकया गया ि,ै हनगहमत ऋणी द्वारा या उसके हवरुद्ध 

कोई वाि या कोई अन् य हवहधक कायगवािी संह‍ थत निीं की िाएगी: 

 परंतु न् यायहनणागयक प्राहधकारी के पूवग अनुमोिन से हनगहमत ऋणी की ओर से समापक द्वारा कोई वाि या अन् य हवहधक 

कायगवािी संह‍ थत की िा सकेगी । 

                                                 
1 2018 के अहधहनयम सं० 26 की धारा 25 द्वारा  “लेनिारों की सहमहत के हवहनश् चय को न् यायहनणागयक” शब् िों के ‍ थान पर प्रहत‍ थाहपत ।  
2 2019 के अहधहनयम सं० 26 की धारा 8 द्वारा अंत:‍ थाहपत ।  



 28 

 (6) उपधारा (4) के उपबंध ऐसे संव् यविारों के, िो केन् रीय सरकार द्वारा दकसी हवत्तीय क्षेत्र के हवहनयामक के परामशग से 

अहधसूहचत दकए िाएं, संबंध में हवहधक कायगवाहियों को लागू निीं िोंगे । 

 (7) तब के हसवाय, िब समापक द्वारा हनगहमत ऋणी का कारबार समापन की प्रदक्रया के िौरान िारी रिा िाता िै, इस 

धारा के अधीन पररसमापन आिशे को हनगहमत ऋणी के अहधकाररयों, कमगचाररयों और कमगकारों के प्रहत कायगमुह‍ त सूचना समझा 

िाएगा । 

 34. समापक की हनयहु‍ त और उसे सिंत्त की िान े वाली फीस—(1) ििां न् यायहनणागयक प्राहधकारी, धारा 33 के अधीन 

हनगहमत ऋणी के समापन का कोई आिशे पाररत करता िै, 1[विां समाधान वृहत्तक द्वारा न् यायहनणागयक प्राहधकारी को हनर्िग‍ ि प्ररूप में 

हलहित सिमहत प्र‍ तुत करने के अधीन रिते हए अध् याय 2 के अधीन] हनगहमत दिवाला समाधान प्रदक्रया के हलए हनयु‍ त समाधान 

वृहत्तक, िब तक उपधारा (4) के अधीन न् यायहनणागयक प्राहधकारी द्वारा बिला न िाए, समापन के प्रयोिनों के हलए समापक के रूप में 

कायग करेगा । 

 (2) इस धारा के अधीन समापक की हनयहु‍ त िो िाने पर, यथाह‍ थहत, हनिशेक बोर्ग, प्रमुि प्रबंधकीय कार्मगकों और हनगहमत 

ऋणी के भागीिारों की सभी शह‍ तयां प्रभाविीन िो िाएंगी और वे समापक में हनहित िो िाएंगी । 

 (3) हनगहमत ऋणी के कार्मगक, समापक की, िैसी भी हनगहमत ऋणी के कायगकलापों के प्रबंधन में उसके द्वारा अपेक्षा की 

िाए, सभी प्रकार से सिायता और सियोग करेंगे और धारा 19 के उपबंध ‍ वैह‍ छक पररसमापन प्रदक्रया के संबंध में ऐसे लागू िोंगे िैसे 

वे अंतररम समाधान वृहत्तक के प्रहतहनिशे के ‍ थान पर समापक के प्रहतहनिशे के साथ पररसमापन प्रदक्रया के संबंध में लागू िोते िैं । 

 (4) न् यायहनणागयक प्राहधकारी, आिशे द्वारा समाधान वृहत्तक को बिल िेगा, यदि,— 

  (क) धारा 30 के अधीन समाधान वृहत्तक द्वारा प्र‍ तुत समाधान योिना को धारा 30 की उपधारा (2) में वर्णगत 

 अपेक्षाओं को पूरा करने में असफल िोने के कारण नामंिूर कर दिया गया िो, या   

  (ि) बोर्ग ने, लेिबद्ध दकए िाने वाले कारणों से न् यायहनणागयक प्राहधकारी से समाधान वृहत्तक को बिले िाने की 

 2[हसफाररश की ि;ै या] ।  

  3[(ग) समाधान वृहत्तक उपधारा (1) के अधीन हलहित सिमहत प्र‍ तुत करने में असफल रिता ि ै।] 

 (5) उपधारा (4) के 4[िंर् (क) और िंर् (ग)] के प्रयोिनों के हलए, न् यायहनणागयक प्राहधकारी, बोर्ग को समापक के रूप में 

हनयु‍ त दकए िाने वाले अन् य दिवाला वृहत्तक के नाम का प्र‍ ताव करने का हनिशे ि ेसकेगा । 

 (6) बोर्ग, उपधारा (5) के अधीन न् यायहनणागयक प्राहधकारी द्वारा िारी हनिशे के 5[िस दिन के भीतर समाधान वृहत्तक द्वारा 

हनर्िग‍ ि प्ररूप में हलहित सिमहत प्र‍ तुत करने के अधीन रिते हए अन् य] दिवाला वृहत्तक के नाम का प्र‍ ताव करेगा । 

 (7) न् यायहनणागयक प्राहधकारी, समापक के रूप में दकसी दिवाला वृहत्तक की हनयुह‍ त के हलए बोर्ग का प्र‍ ताव प्राप् त िोने पर, 

आिशे द्वारा, ऐसे दिवाला वृहत्तक की समापक के रूप में हनयुह‍ त करेगा । 

 (8) समापक के रूप में हनयु‍ त दकए िाने वाला प्र‍ ताहवत दिवाला वृहत्तक, पररसमापन कायगवाहियां करने के हलए ऐसी फीस 

और पररसमापन संपिा आह‍ तयों के मूल् य के ऐसे अनुपात में प्रभाररत करेगा, िो बोर्ग द्वारा हवहनर्िग‍ ि दकया िाए । 

 (9) समापक को, उपधारा (8) के अधीन समापन कायगवाहियां करने के हलए फीस, धारा 53 के अधीन समापन सम् पिा के 

आगमों से संित्त की िाएगी । 

 35. समापक की शह‍ तया ं और कतगव् य—(1) न् यायहनणागयक प्राहधकारी के हनिशेों के अधीन रिते हए, समापक की 

हनम् नहलहित शह‍ तयां और कतगव् य िोंग,े अथागत् :— 

  (क) सभी लेनिारों के िावों का सत् यापन करना; 

  (ि) हनगहमत ऋणी की सभी आह‍ तयों, संपहत्तयों, चीिब‍ तों और अनुयोज् य िावों को अपनी अहभरक्षा या हनयंत्रण 

 में रिना; 

  (ग) हनगहमत ऋणी की आह‍ तयों और सम् पहत्त का ऐसी रीहत से, िो बोर्ग द्वारा हवहनर्िग‍ ि की िाए, मूल् यांकन 

 करना और उसकी ररपोिग तैयार करना; 

  (घ) हनगहमत ऋणी की आह‍ तयों और संपहत्तयों के संरक्षण और परररक्षण के हलए ऐसे उपाय करना, िो वि 

 आवश् यक समझ;े 

                                                 
1 2018 के अहधहनयम सं० 26 की धारा 26 द्वारा  “विां अध् याय 2 के अधीन” शब् िों के ‍ थान पर प्रहत‍ थाहपत ।  
2 2018 के अहधहनयम सं० 26 की धारा 26 द्वारा  “हसफाररश की िै” शब् िों के ‍ थान पर प्रहत‍ थाहपत । 
3 2018 के अहधहनयम सं० 26 की धारा 26 द्वारा  अंत:‍ थाहपत ।  
4 2018 के अहधहनयम सं० 26 की धारा 26 द्वारा  “िंर् (क)” शब् िों के ‍ थान पर प्रहत‍ थाहपत । 
5 2018 के अहधहनयम सं० 26 की धारा 26 द्वारा  “िस दिन के भीतर अन् य” शब् िों के ‍ थान पर प्रहत‍ थाहपत ।  



 29 

  (ङ) हनगहमत ऋणी के कारबार को उसके ऐसे फायिाप्रि पररसमापन के हलए, िो वि आवश् यक समझ,े चलाना; 

  (च) धारा 52 के अधीन रिते हए हनगहमत ऋणी की समापन संबंधी ‍ थावर और िंगम संपहत्त तथा अनयुोज् य िावों 

 का लोक नीलामी या प्राइवेि संहविा द्वारा, दकसी व् यह‍ त या हनगहमत हनकाय को ऐसी संपहत्त का अंतरण करने या उसका 

 ऐसी रीहत से, िो हवहनर्िग‍ ि की िाए, भारत: हवक्रय करने की शह‍ त के साथ, हवक्रय करना :  

1[परंतु समापक, हनगहमत ऋणी की समापनधीन ‍ थावर और िंगम संपहत्त या अनुयोज् य िावों का दकसी ऐसे 

व् यह‍ त को हवक्रय निीं करेगा, िो समाधान आवेिक बनने का पात्र निी िैं ।] 

  (छ) हनगहमत ऋणी के नाम से तथा उसकी ओर से दकसी परक्राम् य हलित को, हिसके अंतगगत हवहनयम पत्र, हरं्ी 

 या वचनपत्र भी ि,ै िाहयत् व की बाबत उसी प्रभाव से हलिना, प्रहतगृिीत करना, दिया िाना या पृ‍ ठांदकत करना, मानो ऐसी 

 हलित हनगहमत ऋणी द्वारा या उसकी ओर से, उसके कारबार के मामूली अनुक्रम में हलिी गई थी, प्रहतगृिीत की गई थी, िी 

 गई या पृ‍ ठांदकत की गइ थी; 

  (ि) दकसी मृत अहभिायी के हलए प्रशासन-पत्र अपने पिीय नाम से लेना और अहभिायी या उसकी संपिा से शोध् य 

 और उसे संिये दकसी धनराहश का संिाय अहभप्राप् त करने के हलए आवश् यक कोई ऐसा कायग अपने पिीय नाम से करना, िो 

 हनगहमत ऋणी के नाम स े मामलूी तौर से निीं दकया िा सकता था और ऐसी सभी िशाओं में शोध् य और संिये राहश             

 प्रशासन-पत्र लेने या ऐसी धनराहश वसूल करने के हलए समापक को समथग बनाने के प्रयोिनों के हलए ‍ वयं समापक को शोध् य 

 समझी िाएगी;  

  (झ) अपने कतगव् यों, बाध् यताओं और उत्तरिाहयत् वों के हनवगिन में दकसी व् यह‍ त से वृहत्तक सिायता प्राप् त करना या 

 वृहत्तक सिायता प्राप् त करने के हलए दकसी वृहत्तक की हनयुह‍ त करना; 

  (ञ) इस संहिता के उपबंधों के अनुसार लेनिारों और िावेिारों को आमंहत्रत करना और उनके िावों को तय करना 

 तथा आगमों का हवतरण करना; 

  (ि) हनगहमत ऋणी के नाम से या उसकी ओर से कोई वाि, अहभयोिन या अन् य हसहवल या िांहर्क हवहधक 

 कायगवाहियां संह‍ थत करना या उसमें प्रहतरक्षा करना; 

  (ठ) न् यून मूल् यांदकत या अहधमानी संव् यविार अवधाररत करने के हलए हनगहमत ऋणी के हवत्तीय कायों का 

 अन् वषेण करना; 

  (र्) ऐसी सभी कारगवाइयां, उपाय करना या दकसी ऐसे कागि-पत्र, हवलेि, प्राहप् त ि‍ तावेि, आवेिन, याहचका, 

 शपथपत्र, बंधपत्र या हलित को ि‍ ताक्षररत, हन‍ पादित और सत् याहपत करना और सामान् य मुरा, यदि कोई िो, का उ‍ त 

 प्रयोिन के हलए प्रयोग करना, िो समापन, आह‍ तयों के हवतरण के हलए और समापक के रूप में अपने कतगव् यों और 

 बाध् यताओं तथा कृत् यों के हनवगिन में आवश् यक िों;  
 (ढ) न् यायहनणागयक प्राहधकारी को ऐसे आिशेों या हनिेशों के हलए आवेिन करना, िो हनगहमत ऋणी के समापन के 

हलए आवश् यक िों और ऐसी रीहत से, िो बोर्ग द्वारा हवहनर्िग‍ ि की िाए, समापन प्रदक्रया की प्रगहत की ररपोिग िनेा; और 

  (ण) ऐसे अन् य कृत् य करना, िो बोर्ग द्वारा हवहनर्िग‍ ि दकए िाएं । 

 (2) समापक को ऐसे पणधाररयों में से दकसी पणधारी से, िो धारा 53 के अधीन आगमों के हवतरण का िकिार िै, परामशग 

करने की शह‍ त िोगी: 

 परंतु ऐसा कोई परामशग समापक पर बाध् यकारी निीं िोगा: 

 परंतु यि और दक दकसी ऐसे परामशग के अहभलेि, ऐसे अन् य सभी पणधाररयों के हलए, हिनसे इस प्रकार परामशग निीं दकया 

गया ि,ै बोर्ग द्वारा हवहनर्िग‍ ि रीहत से उपलब् ध िोंगे । 

 36. समापन सम् पिा—(1) समापन के प्रयोिनों के हलए, समापक, उपधारा (3) में वर्णगत आह‍ तयों की एक सम् पिा गरठत 

करेगा, हिसे हनगहमत ऋणी के संबंध में समापन सम् पिा किा िाएगा । 

 (2) समापक सभी लेनिारों के फायि ेके हलए वैश् वाहसक रूप में समापन करेगा । 

 (3) उपधारा (4) के अधीन रिते हए, समापन सम् पिा में सभी समापन सम् पिा आह‍ तयां समाहव‍ ि िोंगी, हिसमें 

हनम् नहलहित सहम् महलत सहम् महलत िोंगी: — 

  (क) कोई ऐसी आह‍ तयां, हिन पर हनगहमत ऋणी का ‍ वाहमत् व अहधकार ि,ै हिसके अंतगगत उसमें के ऐसे सभी 

 अहधकार और हित भी िैं, िो हनगहमत ऋणी के तुलनपत्र या दकसी या दकसी सूचना उपयोहगता या रहि‍ री के अहभलेिों या

                                                 
1 2018 के अहधहनयम सं० 8 की धारा 7 द्वारा अंत:‍ थाहपत ।   



 30 

  हनगहमत ऋणी की दकसी हनक्षेपागार अहभलेिन प्रहतभूहतयों में या ऐसे दकन् िीं अन् य साधनों द्वारा साहक्ष् यत िैं, िो बोर्ग 

 द्वारा हवहनर्िग‍ ि दकए िाएं, हिसके अंतगगत हनगहमत ऋणी के दकसी समनुषंगी में धाररत शेयर भी िैं; 

  (ि) ऐसी आह‍ तयां, िो हनगहमत ऋणी के कब् िे में िों या कब् िे में निीं िों, हिसके अंतगगत हवल् लंगहमत आह‍ तया ं

 भी िैं, ककंतु इन तक िी सीहमत निीं िैं; 

  (ग) मूतग आह‍ तयां, चाि ेिंगम िो या ‍ थावर; 

  (घ) अमूतग आह‍ तयां, हिसके अंतगगत बौहद्धक संपिा, प्रहतभूहतयां (हिसमें हनगहमत ऋणी के दकसी समनुषंगी में 

 धाररत शेयर भी सहम् महलत िैं) और हवत्तीय हलितें, बीमा पाहलहसयां, संहविात् मक अहधकार भी िैं, ककंतु इन तक िी सीहमत 

 निीं ि;ै 

  (ङ) ऐसी आह‍ तयां, िो न् यायालय या प्राहधकरण द्वारा ‍ वाहमत् व के अवधारण के अध् यधीन िैं; 

 (च) कोई आह‍ तयां या इस अध् याय के अनुसार संव् यविारों के पररविगन की कायगवाहियों के माध् यम स ेवसूल दकया 

उनका मूल् य; 

  (छ) हनगहमत ऋणी की कोई ऐसी आह‍ त, हिसके संबंध में दकसी प्रहतभूत लेनिार ने प्रहतभूहत हित त् याग दिया ि;ै 

  (ि) कोई अन् य संपहत्त, िो दिवाला प्रारंभ िोने की तारीि को हनगहमत ऋणी की ि ैया उसमें हनहित िै; और  

  (झ) समापन के सभी आगम िब कभी भी वे वसूल दकए िाएं । 

 (4) समापन सम् पिा आह‍ तयों में हनम् नहलहित को सहम् महलत निीं दकया िाएगा और समापन में की वसूली के हलए उनका 

उपयोग निीं दकया िाएगा, अथागत्:—  

  (क) दकसी अन् य पक्षकार के ‍ वाहमत् वाधीन ऐसी आह‍ तया,ं िो हनगहमत ऋणी के कब् िे में िैं, हिसके अंतगगत 

 हनम् नहलहित भी िैं,— 

   (i) दकसी अन् य पक्षकार के हलए न् यास में धृत आह‍ तयां; 

   (ii) उपहनधान संहविाएं; 

 (iii) दकसी कमगकार या कमगचारी को भहव‍ य हनहध, पेंशन हनहध और उपिान हनहध स े शोध् य सभी 

राहशयां; 

 (iv) अन् य संहविात् मक ठिराव, हिसमें िक के अंतरण का अनुबंध निीं िै, बहल् क केवल आह‍ तयों के 

उपयोग का अनुबंध ि;ै   

 (v) ऐसी अन् य आह‍ तयां, िो कें रीय सरकार द्वारा दकसी हवत्तीय से‍ िर हवहनयामक के परामशग से 

अहधसूहचत की िाएं;  

  (ि) हवत्तीय सेवा प्रिाताओं द्वारा धाररत सांपार्शगव प्रहतभूहतयों में की ऐसी आह‍ तयां, िो बहपक्षीय व् यापाररक 

 या समाशोधन संव् यविारों के नेटिंग और मुिराई के अध् यधीन िैं; 

  (ग) दकसी हनगहमत ऋणी के, यथाह‍ थहत, दकसी शेयरधारक या भागीिार की हनिी आह‍ तयां, बशते ऐसी आह‍ तया ं

 ऐसे पररविगन संव् यविारों के कारण, हिनका इस अध् याय के अधीन पररविगन दकया िा सके, धाररत निीं ि;ै 

  (घ) हनगहमत ऋणी के दकसी भारतीय या हविशेी समनुषंगी की आह‍ तयां; या 

  (ङ) कोई अन् य आह‍ तयां, िो बोर्ग द्वारा हवहनर्िग‍ ि की िाएं, हिनके अन् तगगत ऐसी आह‍ तयां भी ि,ै िो हनगहमत 

ऋणी और दकसी लेनिार के बीच पार‍ पररक व् यविार के कारण मुिरा करने के अध् यधीन िो सकें गी । 

 37. समापक की सूचना तक पहंच बनान ेकी शह‍ तयां—(1) तत् समय प्रवतृ्त दकसी हवहध में अंतर्वग‍ ि दकसी बात के िोते हए 

भी, समापक को, हनगहमत ऋणी से संबंहधत समापन संपिा आह‍ तयों को ििण करने तथा उनके िावों के सबूत और पिचान करने के 

प्रयोिन के हलए हनम् नहलहित स्रोतों से दकसी सूचना प्रणाली तक पहचं बनाने की शह‍ त िोगी, अथागत्:—   

  (क) दकसी सूचना उपयोहगता; 

  (ि) तत् समय प्रवृत्त हवहध के अधीन हवहनयहमत प्रत् यय हवषयक सूचना प्रणाली; 

  (ग) कें रीय सरकार, राज् य सरकार या ‍ थानीय सरकार का कोई अहभकरण, हिसके अंतगगत कोई रहि‍ रीकरण 

 प्राहधकारी भी ि;ै  

  (घ) तत् समय प्रवृत्त दकसी हवहध के अधीन हवहनयहमत हवत्तीय और गैर-हवत्तीय िाहयत् वों के हलए सूचना प्रणाली, 



 31 

  (ङ) तत् समय प्रवृत्त दकसी हवहध के अधीन हवहनयहमत प्रहतभूहत हित के रूप में घोहषत प्रहतभूहतयों और आह‍ तयों के 

 हलए सूचना प्रणाली; 

  (च) बोर्ग द्वारा अनुरहक्षत कोई र्ािा बेस; और 

  (छ) कोई अन् य स्रोत, िो बोर्ग द्वारा हवहनर्िग‍ ि दकया िाए । 

 (2) लेनिार, समापक से, ऐसी रीहत से, िो हवहनर्िग‍ ि की िाए, हनगहमत ऋणी से संबंहधत कोई हवत्तीय सूचना उन् िें िनेे की 

अपेक्षा कर सकें गे । 

 (3) समापक, उपधारा (2) में हनर्िग‍ ि सूचना ऐसे लेनिारों को, हिन् िोंने ऐसी सूचना का अनुरोध दकया िै, ऐसे अनुरोध की 

तारीि से सात दिन की अवहध के भीतर, उपलब् ध कराएगा या उसके उपलब् ध न करवाने के कारण बताएगा । 

 38. िावों का समकेन—(1) समापक, समापन प्रदक्रया के प्रारंभ की तारीि से तीस दिन की अवहध के भीतर लेनिारों के िावों 

को प्राप् त या संगिृीत करेगा । 

 (2) कोई हवत्तीय लेनिार, समापक को दकसी सूचना उपयोहगता में के ऐसे िावे का अहभलेि उपलब् ध कराते हए िावा प्र‍ तुत 

कर सकेगा: 

 परंतु ििां िावे के संबंध में सूचना, सूचना उपयोहगता में अहभहलहित निीं िै, विां हवत्तीय लेनिार उसी रीहत से िावा प्र‍ तुत 

कर सकेगा, िो उपधारा (3) के अधीन प्रचालन लेनिार के हलए िावे प्र‍ तुत करने के हलए यथा उपबंहधत ि ै। 

 (3) कोई प्रचालन लेनिार, समापक को ऐसे प्ररूप में और ऐसी रीहत से तथा िावे को साहबत करने के हलए अपेहक्षत ऐसे 

समथगनकारी ि‍ तावेिों के साथ िावा प्र‍ तुत कर सकेगा, िो बोर्ग द्वारा हवहनर्िग‍ ि दकए िाएं । 

 (4) कोई ऐसा लेनिार, िो भागत: हवत्तीय लेनिार और भागत: प्रचालन लेनिार ि,ै समापक को अपने हवत्तीय ऋण के 

हव‍ तार तक, ऐसी रीहत से, िैसी उपधारा (2) में उपबंहधत ि ैऔर प्रचालन ऋण के हव‍ तार तक उपधारा (3) के अधीन उपबंहधत रीहत 

से, िावे प्र‍ तुत करेगा । 

 (5) इस धारा के अधीन कोई लेनिार, अपने िावे को, उसके प्र‍ तुत दकए िाने के चौिि दिन के भीतर वापस ले सकेगा या 

उसमें फेरफार कर सकेगा । 

 39. िावों का सत् यापन—(1) समापक, ऐसे समय के भीतर, िो बोर्ग द्वारा हवहनर्िग‍ ि दकया िाए, धारा 38 के अधीन प्र‍ तुत 

िावों का सत् यापन करेगा । 

 (2) समापक, दकसी लेनिार या हनगहमत ऋणी या दकसी अन् य व् यह‍ त से कोई ऐसा अन् य ि‍ तावेि या साक्ष् य प्र‍ तुत करने की 

अपेक्षा कर सकेगा, िो वि सम् पूणग िावे या उसके दकसी भाग का सत् यापन करने के प्रयोिन के हलए आवश् यक समझे । 

 40. िावों का ििण दकया िाना या उनका नामिंरू दकया िाना—(1) समापक, धारा 39 के अधीन िावों का सत् यापन करने के 

पश् चात्, यथाह‍ थहत, संपूणग िावे को या उसके दकसी भाग को या तो ििण कर सकेगा या उसे नामंिूर कर सकेगा: 

 परंतु ििां समापक दकसी िावे को नामंिूर कर ितेा िै, विां वि ऐसे नामंिूर करने के कारणों को अहभहलहित करेगा । 

  (2) समापक, लेनिारों और हनगहमत ऋणी के िावों को ऐसे ििण दकए िाने या उन् िें नामंिूर दकए िाने के सात दिन के 

भीतर िावों को ििण करने या उन् िें नामंिूर करने के बारे में संसूहचत करेगा । 

 41. िावों के मलू् याकंन का अवधारण—समापक, ऐसी रीहत से, िो बोर्ग द्वारा हवहनर्िग‍ ि की िाए, धारा 40 के अधीन ििण 

दकए गए िावों के मूल् य का अवधारण करेगा । 

 42. समापक के हवहनश् चय के हवरुद्ध अपील—कोई लेनिार ऐसे हवहनश् चय की प्राहप् त के चौिि दिन के भीतर 1[िावों को 

नामंिूर या ‍ वीकार करने] वाले पररसमापक के हवहनश् चय के हवरुद्ध न् यायहनणागयक प्राहधकारी को अपील कर सकेगा । 

 43. अहधमानी सवं् यविार और ससुगंत समय—(1) ििां, यथाह‍ थहत, समापक या समाधान वृहत्तक की यि राय ि ै दक 

हनगहमत ऋणी ने दकसी सुसंगत समय पर ऐसे संव् यविारों में और उपधारा (2) में यथा अहधकहथत रीहत से उपधारा (4) में यथाहनर्िग‍ ि 

दकसी व् यह‍ त को अहधमान दिया िै, विां वि न् यायहनणागयक प्राहधकारी को अहधमानी संव् यविारों के पररविगन के हलए और धारा 44    

में हनर्िग‍ ि एक या अहधक आिशेों के हलए आवेिन करेगा । 

 (2) दकसी हनगहमत ऋणी द्वारा अहधमान दिया गया समझा िाएगा, यदि,—    

  (क) उसमें हनगहमत ऋणी द्वारा हलए गए दकसी पूवगवती हवत्तीय ऋण या प्रचालन ऋण या अन् य िाहयत् वों के हलए 

 या उसके मद्दे दकसी लेनिार या दकसी प्रहतभू या दकसी प्रत् याभूहत िाता के फायि े के हलए, हनगहमत ऋणी की संपहत्त या 

 उसके हित का अंतरण हआ िै; और  

                                                 
1 2018 के अहधहनयम सं० 26 की धारा 27 द्वारा  “िावों को नामंिूर करने ” श्  ाब् िों के ‍ थान पर प्रहत‍ थाहपत ।  



 32 

  (ि) िंर् (क) के अधीन ऐसे अंतरण का प्रभाव ऐसे लेनिार या प्रहतभू या दकसी प्रत् याभूहतिाता को उस ह‍ थहत स े

 फायिाप्रि ह‍ थहत में लाने के हलए ि ैिो उसकी धारा 53 के अनुसार दकए गए हवतरण की िशा िोती । 
 (3) उपधारा (2) के प्रयोिनों के हलए, अहधमान में हनम् नहलहित अतंरण सहम् महलत निीं िोंगे,— 

  (क) हनगहमत ऋणी या अंतररती के कारबार या हवत्तीय कायगकलापों के मामूली अनुक्रम में दकया गया अंतरण; 

  (ि) ऐसा अंतरण, हिसमें हनगहमत ऋणी द्वारा अर्िगत संपहत्त में हनम् नहलहित सीमा तक दकसी प्रहतभूहत हित का 

 सृिन िोता ि,ै— 

 (i) हिससे ऐसे प्रहतभूहत हित का ऐसा नया मूल् य सुहनहश् चत िो और िो ऐसे दकसी प्रहतभूहत करार पर 

ि‍ ताक्षर करने पर या उसके पश् चात् दिया गया था हिसमें प्रहतभूहत हित के रूप में ऐसी संपहत्त का हववरण 

अंतर्वग‍ ि ि ैऔर हिसका हनगहमत ऋणी द्वारा ऐसी संपहत्त को अर्िगत करने के हलए उपयोग दकया गया था; और 

   (ii) ऐसा अंतरण हनगहमत ऋणी द्वारा ऐसी संपहत्त का कब् िा प्राप् त करने के पश् चात् तीस दिन िोन ेपर 

  या उसके पिले सूचना उपयोहगता में रहि‍ रीकृत कर दिया था: 

 परंतु दकसी न् यायालय के आिशे के अनुसरण में दकया गया कोई अंतरण, ऐसे अंतरण को हनगहमत ऋणी द्वारा दिए गए 

अहधमान के रूप में समझे िाने से हनवाररत निीं करेगा । 

 ‍ प‍ िीकरण—उपधारा (3) के प्रयोिन के हलए, “नए मूल् य” से कोई धन या माल, सेवाओं में उसका मूल् य या नए प्रत् यय या 

दकसी संव् यविार में अन् तररती को पूवग में अन् तररत सम् पहत के ऐसे अंतररती द्वारा उस संपहत्त का उन् मोचन अहभप्रेत ि,ै िो इस संहिता के 

अधीन ऐसे दकसी समापक या समाधान वृहत्तक द्वारा न तो शून् य ि ैऔर न िी शून् यकरणीय ि,ै हिसके अंतगगत ऐसी संपहत्त के आगम भी 

िैं, ककंतु इसके अंतगगत कोई ऐसा हवत्तीय ऋण या प्रचालन ऋण निीं आता, िो हवद्यमान हवत्तीय ऋण या प्रचालन ऋण के ‍ थान पर 

प्रहत‍ थाहपत दकया गया ि ै। 

 (4) कोई अहधमान दकसी सुसंगत समय पर दिया गया समझा िाएगा, यदि, — 

  (क) वि दिवाला प्रारंभ िोने की तारीि से पूवग िो वषग की अवहध के िौरान संबंहधत पक्षकार (केवल कोई 

 कमगचारी िोने के कारण से हभन् न) को दिया िाता ि;ै या  

  (ि) कोई अहधमान, दिवाला प्रारंभ की तारीि से पूवग एक वषग की अवहध के िौरान दकसी संबंहधत पक्षकार से 

 हभन् न दकसी व् यह‍ त को दिया िाता ि ै। 

 44. अहधमानी सवं् यविारों की िशा में आिशे—न् यायहनणागयक प्राहधकारी, धारा 43 की उपधारा (1) के अधीन समाधान 

वृहत्तक द्वारा दकए गए आवेिन पर, — 

  (क) अहधमान दिए िाने के संबंध में अंतररत कोई संपहत्त हनगहमत ऋणी में हनहित की िाने की अपेक्षा कर सकेगा; 

  (ि) दकसी संपहत्त को इस प्रकार हनहित की िाने की अपेक्षा कर सकेगा, यदि उसमें वि इस प्रकार अंतररत संपहत्त 

 के हवक्रय आगमों का या इस प्रकार अंतररत धन का उपयोिन िर्शगत िोता िो;  

  (ग) हनगहमत ऋणी द्वारा सृहित दकसी प्रहतभूहत हित का (संपूणगत: या भागत:) हनमोचन या उन् मोचन कर सकेगा; 

  (घ) दकसी व् यह‍ त से, उसके द्वारा हनगहमत ऋणी से प्राप् त फायिों के संबंध में, समापक या समाधान वृहत्तक को 

 ऐसी धनराहश का संिाय करने की अपेक्षा कर सकेगा, िो न् यायहनणागयक प्राहधकारी हनिशे िे; 

  (ङ) दकसी ऐसे प्रत् याभूहतिाता को यि हनिशे ि े सकेगा, हिसके दकसी व् यह‍ त को दिए गए हवत्तीय ऋणों या 

 प्रचालन ऋणों का, ऐसे नए या प्रवर्तगत हवत्तीय ऋणों के अधीन अहधमान ितेे हए, उस व् यह‍ त को, हिसे न् यायहनणागयक 

 प्राहधकारी समुहचत समझे, (संपूणगत: या भागत:) हनमोचन या उन् मोचन कर दिया गया ि;ै 

  (च) आिशेाधीन उद्भूत दकसी हवत्तीय ऋण या प्रचालन ऋण के उन् मोचन के हलए, दकसी संपहत्त पर प्रहतभूहत या 

 भार का और वैसी िी पूर्वगकता वाली प्रहतभूहत या प्रभार िैसी प्रहतभूहत या भार, अहधमान ितेे हए पूणगत: या भागत: 

 हनमोहचत या उन् मोहचत की गई थी, के हलए प्रहतभूहत का उपबंध करने का हनिशे ि ेसकेगा; 

  (छ) ऐसी सीमा का उपबंध करने का हनिशे ि ेसकेगा, हिस तक कोई व् यह‍ त, हिसकी संपहत्त हनगहमत ऋणी में इस 

 प्रकार हनहित ि ै या हिस पर आिशे द्वारा अहधरोहपत ऐसे हवत्तीय ऋणों या प्रचालन ऋणों को, ऐसे हवत्तीय ऋणों या 

 प्रचालन ऋणों के हलए, िो अहधमान से उद्भूत हए िैं या हिन् िें अहधमान ितेे हए पूणगत: या भागत: हनमोहचत या उन् मोहचत 

 कर दिया गया था, समापन या हनगहमत दिवाला समाधान प्रदक्रया में साहबत दकया िाना िै: 

 परंतु इस धारा के अधीन कोई आिेश,— 

  (क) दकसी ऐसी संपहत्त, िो हनगहमत ऋणी से हभन् न दकसी व् यह‍ त से अर्िगत की गई थी, में के दकसी हित को या 

 ऐसे हित या से व् युत् पन् न दकसी हित को, िो सद्भावपूवगक और मूल् याथग अर्िगत दकया गया था, प्रभाहवत निीं करेगा; 



 33 

  (ि) दकसी ऐसे व् यह‍ त से समापक या समाधान वृहत्तक की दकसी धनराहश का संिाय करने की अपेक्षा निीं की 

 िाएगी हिसने सद्भावपूवगक और मूल् याथग अहधमानी संव् यविार से कोई फायिा प्राप् त दकया ि ै। 

 ‍ प‍ िीकरण 1—इस धारा के प्रयोिनों के हलए यि ‍ प‍ ि दकया िाता ि ैदक दकसी ऐसे व् यह‍ त को, हिसने हनगहमत ऋणी से 

हभन् न दकसी अन् य व् यह‍ त से संपहत्त में कोई हित अर्िगत दकया ि ैया हिसने दकसी अहधमान से कोई फायिा प्राप् त दकया ि ैया कोई ऐसा 

अन् य व् यह‍ त, हिसे हनगहमत ऋणी ने अहधमान दिया िै,—   

  (i) हनगहमत ऋणी द्वारा दिवाला समाधान प्रदक्रया आरंभ या प्रारंभ की पयागप् त सूचना थी; या 
 (ii)  वि संबंहधत पक्षकार ि,ै      

यि उपधारणा की िाएगी दक िब तक तत् प्रहतकूल दिर्शगत निीं दकया िाए, हित या फायिा सद्भाव से अन् यथा अर्िगत दकया गया था या 

प्राप् त दकया गया था ।  

 ‍ प‍ िीकरण 2—दकसी व् यह‍ त के बारे में यि समझा िाएगा दक उसे पयागप् त सूचना थी या उसे ऐसी सूचना प्राप् त करने का 

पयागप् त अवसर था, यदि  हनगहमत दिवाला समाधान प्रदक्रया के संबंध में धारा 13 के अधीन कोई सावगिहनक घोषणा की गई ि ै।   

 45. न् यनू मलू् यादंकत सवं् यविारों का पररविगन—(1) यदि, यथाह‍ थहत, समापक या समाधान वृहत्तक, 1*** उपधारा (2) में 

हनर्िग‍ ि हनगहमत ऋणी के संव् यविारों की परीक्षा करने पर यि अवधाररत करता ि ैदक धारा 46 के अधीन सुसंगत अवहध के िौरान 

दकए गए कहतपय संव् यविार न् यून मूल् यांदकत थे, तो वि न् यायहनणागयक प्राहधकारी को, ऐसे संव् यविारों को शून् य घोहषत करने और इस 

अध् याय के अनुसार ऐसे संव् यविार के प्रभाव को उलिने के हलए आवेिन करेगा । 

 (2) दकसी संव् यविार को न् यून मूल् यांदकत माना िाएगा, यदि, — 

  (क) हनगहमत ऋणी ने दकसी व् यह‍ त को कोई िान दिया ि;ै या 

 (ि) दकसी ऐसे व् यह‍ त के साथ, हिसमें हनगहमत ऋणी द्वारा, ऐसे प्रहतफलाथग मूल् य के हलए, िो हनगहमत ऋणी 

द्वारा दिए गए प्रहतफल के मूल् य से बहत कम ि,ै एक या अहधक आह‍ तयां अंतरण में अंतवगहलत िैं, कोई संव् यविार दकया गया 

ि,ै और ऐसा संव् यविार हनगहमत ऋणी के कारबार के मामूली अनुक्रम में निीं दकया गया ि ै।  

 46. पररविगनीय संव् यविारों के हलए ससुगंत अवहध—(1) न् यून मूल् य पर दकसी संव् यविार के पररविगन के हलए दकसी आवेिन 

में, यथाह‍ थहत, समापक या समाधान वृहत्तक यि संप्रिर्शगत करेगा दक,— 

  (i) ऐसा संव् यविार, दिवाला प्रारंभ िोने की तारीि से पूवग एक वषग की अवहध के भीतर दकसी व् यह‍ त के 

 साथ दकया गया था; 

  (ii) ऐसा संव् यविार, दकसी ऐसे व् यह‍ त के साथ, िो एक संबंहधत पक्षकार िै, दिवाला प्रारंभ िोने की तारीि से पूवग 

 िो वषग की अवहध के भीतर दकया गया था । 

 (2) न् यायहनणागयक प्राहधकारी, इस धारा में वर्णगत संव् यविारों के मूल् य के संबंध में साक्ष् य के हनधागरण के हलए दकसी ‍ वतंत्र 

हवशेषज्ञ की अपेक्षा कर सकेगा ।  

 47. न् यनू मलू् यादंकत सवं् यविारों के मामलों में लनेिार द्वारा आविेन—(1) ििां कोई न् यून मूल् यांदकत संव् यविार  दकया गया 

था और, यथाह‍ थहत, समापक या समाधान वृहत्तक ने न् यायहनणागयक प्राहधकारी को इसकी ररपोिग निीं की थी, विां, यथाह‍ थहत, 

हनगहमत ऋणी का लेनिार, सि‍ य या भागीिार न् यायहनणागयक प्राहधकारी को ऐसे संव् यविारों को शून् य घोहषत करने तथा इस अध् याय 

के अनुसार उसके प्रभाव को उलिने के हलए आवेिन कर सकेगा । 

 (2) ििां न् यायहनणागयक प्राहधकारी का, उपधारा (1) के अधीन दकए गए आवेिन की परीक्षा करने के पश् चात् यि  समाधान िो 

िाता ि ैदक,—  

  (क) न् यून मूल् यांदकत संव् यविार दकए गए थे; और 

  (ि) यथाह‍ थहत, समापक या समाधान वृहत्तक ने ऐसे संव् यविारों की पयागप् त सूचना िोने या ऐसे संव् यविारों की 

 सूचना का उपयोग करने का पयागप् त अवसर िोने के पश् चात् भी न् यायहनणागयक प्राहधकारी को ऐसे संव् यविार की ररपोिग निीं 

 की थी,  

तो वि,— 

  (क) वैसी िी ह‍ थहत, िो ऐसे संव् यविारों से पूवग हवद्यमान थी, पुन:‍ थाहपत करते हए और धारा 45 तथा धारा 48 

 में यथा अहधकहथत रीहत से उनके प्रभाव को उलिते हए,   

                                                 
1 2018 के अहधहनयम सं० 26 की धारा 28 द्वारा  “धारा 43 की” श्  ाब् िों का लोप दकया गया । 



 34 

  (ि) बोर्ग से, यथाह‍ थहत, समापक या समाधान वृहत्तक के हवरुद्ध अनुशासनात् मक कायगवाहियां प्रारंभ करने की 

 अपेक्षा करते हए,  

आिशे पाररत करेगा ।  

 48. न् यनू मलू् यादंकत सवं् यविारों के मामलों में आिशे—धारा 45 की उपधारा (1) के अधीन न् यायहनणागयक प्राहधकारी के 

आिशे में हनम् नहलहित के हलए उपबंध दकया िा सकेगा,—  

  (क) संव् यविार के भागरूप अंतररत दकसी संपहत्त का हनगहमत ऋणी में हनहित िोने की अपेक्षा;  

  (ि)  हनगहमत ऋणी द्वारा दिए गए दकसी प्रहतभूहत हित का (पूणगत: या भागत:) हनमोचन या उन् मोचन; 

  (ग) दकसी व् यह‍ त से, यथाह‍ थहत, समापक या समाधान वृहत्तक को, ऐसे व् यह‍ त द्वारा प्राप् त फायिों के संबंध में 

 ऐसी धनराहश का, िैसा न् यायहनणागयक प्राहधकारी हनिशे िे, संिाय करने की अपेक्षा; या    

  (घ) ऐसे संव् यविार के हलए, ऐसे प्रहतफल का संिाय करने की अपेक्षा, िो दकसी ‍ वतंत्र हवशेषज्ञ द्वारा दिए गए 

 साक्ष् य में अवधाररत दकया गए । 

 49. लनेिारों को कपिवहंचत करन ेसंबधंी संव् यविार—ििां दकसी हनगहमत ऋणी ने धारा 45 की उपधारा (2) में यथा 

हनर्िग‍ ि कोई न् यून मलू् यादंकत संव् यविार दकया ि ैऔर न् यायहनणागयक प्राहधकारी का यि समाधान िो गया ि ैदक ऐसे हनगहमत ऋणी 

द्वारा ऐसा संव् यविार िानबूझकर,—  

  (क) हनगहमत ऋणी की आह‍ तयों को दकसी ऐस े व् यह‍ त की, िो हनगहमत ऋणी के हवरुद्ध िावा करने का 

 िकिार ि,ै पहचं से िरू रिने के हलए;  

  (ि) िावे के संबंध में दकसी ऐसे व् यह‍ त के हितों पर प्रहतकूल प्रभाव र्ालने के हलए,  

दकया गया था, विां  हनणागयक प्राहधकारी,— 

  (i) वैसी िी ह‍ थहत बिाल करने का, िैसी वि ऐसे संव् यविार से पूवग तब हवद्यमान िोती यदि वि संव् यविार निीं 

 दकया गया िोता; और 

  (ii) ऐसे व् यह‍ तयों के हितों का, िो ऐसे संव् यविारों से पीहड़त िैं, संरक्षण करने का,  

आिशे करेगा:  

परंतु इस धारा के अधीन,— 

  (क) ऐसे आिशे से ऐसी संपहत्त में के दकसी हित पर कोई प्रभाव निीं पडे़गा, िो हनगहमत ऋणी से हभन् न दकसी 

 व् यह‍ त से अर्िगत की गई थी और िो सद्भावपूवगक मूल् याथग और सुसंगत पररह‍ थहतयों की सूचना के हबना अर्िगत की गई थी या 

 िो ऐसे दकसी हित से व् युत् पन् न दकसी हित पर कोई प्रभाव निीं पडे़गा; और  

  (ि) िब तक वि संव् यविार का पक्षकार न िो तब तक ऐसे आिशे में, दकसी ऐसे व् यह‍ त से, हिसने सद्भावपूवगक 

 मूल् याथग और दकसी धनराहश का संिाय करने के हलए सुसंगत पररह‍ थहतयों की सूचना के हबना संव् यविार से फायिा 

 प्राप् त दकया था, कोई अपेक्षा निीं की िाएगी । 

 50. उद्दापक प्रत् यय संव् यविार—(1) ििां कोई हनगहमत ऋणी दकसी ऐसी उद्दापनात् मक प्रत् यय संव् यविार का पक्षकार ि,ै 

हिसमें दिवाला प्रारंभ िोने की तारीि से पूवग िो वषग के भीतर हवत्तीय या प्रचालन ऋण की प्राहप् त अंतवगहलत ि,ै विां, यथाह‍ थहत, 

समापक या समाधान वृहत्तक, न् यायहनणागयक प्राहधकारी को, यदि ऐसे संव् यविार में हनगहमत ऋणी द्वारा अत् यहधक संिाय दकया िाना 

अपेहक्षत ि,ै ऐसे संव् यविार के पररविगन के हलए आवेिन कर सकेगा । 

 (2) बोर्ग ऐसी पररह‍ थहतयां हवहनर्िग‍ ि कर सकेगा, हिसमें कोई संव् यविार उपधारा (1) के अधीन आएगा । 

 ‍ प‍ िीकरण—इस धारा के प्रयोिनों के हलए यि ‍ प‍ ि दकया िाता ि ैदक ऐसी हवत्तीय सेवाओं को, िो ऐसे ऋण के संबंध में 

तत् समय प्रवृत्त दकसी हवहध के अनपुालन में िैं, उपबंध करने वाले दकसी व् यह‍ त द्वारा हलए गए दकसी ऋण को दकसी भी िशा में उद्दापक 

प्रत् यय संव् यविार के रूप में निीं माना िाएगा । 

 51. उद्दापक प्रत् यय संव् यविारों के सबंंध में न् यायहनणागयक प्राहधकारी का आिशे—ििां धारा 50 की उपधारा (1) के अधीन 

दकए गए आवेिन की परीक्षा करने के पश् चात्, न् यायहनणागयक प्राहधकारी का यि समाधान िो िाता ि ैदक प्रत् यय संव् यविार के हनबंधनों 

में नणीत ऋणी द्वारा अत् यहधक संिाय दकया िाना अपेहक्षत िै, िो वि आिशे द्वारा, — 

  (क) ऐसे संव् यविार से पूवग की ह‍ थहत पुन: ‍ थाहपत करेगा; 

  (ि) उद्दापक प्रत् यय संव् यविार के मद्दे िमा दकए गए संपूणग ऋण या उसके भाग को अपा‍ त करेगा, 

  (ग) संव् यविार के हनबंधनों को उपांतररत करेगा; 



 35 

  (घ) दकसी ऐसे व् यह‍ त से, िो संव् यविार का पक्षकार ि ैया था, ऐसे व् यह‍ त द्वारा प्राप् त दकसी रकम के प्रहतिाय 

 करने के हलए अपेक्षा करेगा; या  

  (ङ) दकसी ऐसे प्रहतभूहत हित का, िो उद्दापक प्रत् यय संव् यविार के भागरूप में सृहित हआ था, यथाह‍ थहत, 

 समापक  या समाधान वृहत्तक के पक्ष में त् यागने की अपेक्षा करेगा । 

 52. समापन कायगवाहियों में के प्रहतभतू लनेिार—(1) समापन कायगवाहियों में का कोई प्रहतभूत लेनिार,—  

  (क) समापन संपिा के प्रहत अपने प्रहतभूहत हित को त् याग सकेगा और धारा 53 में हवहनर्िग‍ ि रीहत से समापक द्वारा 

 आह‍ तयों के हवक्रय से आगम प्राप् त कर सकेगा; या  

  (ि) इस धारा में हवहनर्िग‍ ि रीहत से अपने प्रहतभूहत हित का आपन कर सकेगा । 

 (2) ििां कोई प्रहतभूत लेनिार, उपधारा (1) के िंर् (ि) के अधीन प्रहतभूहत हित को वसूल करता िै, विां वि ऐसे प्रहतभूहत 

हित के समापक को सूहचत करेगा तथा ऐसी आह‍ त की पिचान करेगा, हिसके अधीन रिते हए ऐसे प्रहतभूहत हित का आपन दकया 

िाना ि ै। 

 (3) प्रहतभूत लेनिार द्वारा इस धारा के अधीन दकसी प्रहतभूहत हित का आपन दकए िाने के पूवग समापक ऐसे प्रहतभूहत हित 

का सत् यापन करेगा और प्रहतभूत लेनिार केवल ऐसे प्रहतभूहत हित का आपन करने की अनुज्ञा िगेा, हिसके अह‍ तव को या तो,—    

   (क) सूचना उपयोहगता द्वारा अनुरहक्षत ऐसे प्रहतभूहत हित के अहभलेिों द्वारा साहबत दकया िा सके; या  

  (ि) ऐसे अन् य साधन द्वारा साहबत दकया िा सके, िो बोर्ग द्वारा हवहनर्िग‍ ि दकया िाए । 

 (4) कोई प्रहतभूत लेनिार, प्रहतभूत आह‍ तयों को, दकसी ऐसी हवहध के अनुसार, िो प्रहतभूत हित का आगम दकए िाने के 

संबंध में और प्रहतभूत लेनिार को लागू िोती ि ैतथा उससे शोध् य ऋणों को वसूल दकए िाने के हलए आगमों को लागू िो, प्रहतभूत 

आह‍ तयों को प्रवर्तगत कर सकेगा, उनका आपन कर सकेगा, उनका हनपिान कर सकेगा, उनके संबंध में समझौता या कारगवाई कर 

सकेगा। 

 (5) यदि प्रहतभूत आह‍ त का आपन करने के िौरान दकसी प्रहतभूत लेनिार को प्रहतभूहत का कब् िा लेने, उसका हवक्रय या 

अन् यथा हनपिारा करने में हनगहमत ऋणी या उससे संबंहधत दकसी व् यह‍ त के प्रहतरोध का सामना करना पड़ता ि ैतो प्रहतभूत लेनिार, 

न् यायहनणागयक प्राहधकारी को, तत् समय प्रवृत्त हवहध के अनुसार ऐसे प्रहतभूहत हित का आपन करने के हलए प्रहतभूत लेनिार को सुकर 

बनाए िाने ितेु आवेिन कर सकेगा । 

 (6) न् यायहनणागयक प्राहधकारी, उपधारा (5) के अधीन प्रहतभूत लेनिार से कोई आवेिन प्राप् त िोने पर, ऐसा आिशे पाररत कर 

सकेगा, िो प्रहतभूत लेनिार के हलए, तत् समय प्रवृत्त हवहध के अनुसार प्रहतभूहत हित के आपन के हलए अनुज्ञात करने के हलए            

आवश् यक िै। 

 (7) ििां उपधारा (4) के अधीन प्रहतभूहत हित के प्रवतगन में आगमों के रूप में ऐसी रकम िी िानी िै, िो प्रहतभूत लेनिार को 

िये ऋण से अहधक ि ैतो प्रहतभूत लेनिार,— 

  (क) समापक को ऐसे अहधशेष का हिसाब िगेा, और 

  (ि) ऐसी प्रहतभूत आह‍ तयों के प्रवतगन से प्राप् त दकन् िीं अहधशेष हनहधयों को समापक के समक्ष पेश करेगा । 

 (8) ऐसे प्रहतभूत लेनिारों से, हिन् िोंने इस धारा में उपबंहधत रीहत से अपने प्रहतभूत हितों को वसूल दकया िै, शोध् य दिवाला 

समाधान प्रदक्रया लागत की रकम की ऐसे प्रहतभूत लेनिारों द्वारा दकसी वसूली के आगमों से किौती की िाएगी और वे ऐसी रकमों को 

समापन संपिा में सहम् महलत दकए िाने के हलए समापक को अंतररत करेंगे । 

 (9) ििां प्रहतभूत आह‍ तयों की वसूली के आगम, प्रहतभूत लेनिार को दिए गए ऋणों का प्रहतिाय करने के हलए पयागप् त निीं 

ि ैविां, समापक द्वारा ऐसे प्रहतभूत लेनिार के असंित्त ऋणों का संिाय धारा 53 की उपधारा (1) के िंर् (ङ) में हवहनर्िग‍ ि रीहत स े

दकया िाएगा । 

 53. आह‍ तयों का हवतरण—(1) ससंि ्द्वारा या दकसी राज् य हवधान-मंर्ल द्वारा अहधहनयहमत तत् समय प्रवृत्त दकसी हवहध में 

अंतर्वग‍ ि दकसी बात के िोते हए भी, समापन सम् पिा आह‍ तयों के हवक्रय के आगमों का हनम् नहलहित पूर्वगकता क्रम में और ऐसी अवहध 

के भीतर और ऐसी रीहत में, िो हवहनर्िग‍ ि की िाए, हवतरण दकया िाएगा, अथागत्:— 

  (क) पूणगत: संित्त दिवाला समाधान प्रदक्रया लागत और समापन लागत; 

  (ि) हनम् नहलहित ऋणों को, हिन् िें हनम् नहलहित के बीच समान रूप से श्रेणीबद्ध दकया िाएगा:— 

   (i) समापन प्रारंभ िोने की तारीि के पूवग चौबीस मास की अवहध की कमगकारों को िये राहश; और 

   (ii) दकसी प्रहतभतू लेनिार को उधार दिए गए ऋण, उस िशा में िब ऐसे प्रहतभूत लेनिार ने धारा 52 में 

  उपवर्णगत रीहत से प्रहतभूहत का त् याग कर दिया ि;ै 



 36 

  (ग) समापन प्रारंभ िोने की तारीि के पूवग बारि मास की अवहध की कमगकारों से हभन् न कमगचाररयों को िी िाने 

 वाली मििरूी और कोई असंित्त िेय राहश; 

  (घ) अप्रहतभूत लेनिारों को दिए गए हवत्तीय ऋण; और 

  (ङ) हनम् नहलहित शोध् य राहशयों को हनम् नहलहित के बीच समान रूप से श्रेणीकृत दकया िाएगा:— 

 (i) समापन प्रारंभ िोने की तारीि से पूवग पूरे िो वषग की अवहध या उसके दकसी भाग के संबंध में राज् य 

सरकार और कें रीय सरकार को शोध् य कोई धनराहश, हिसके अन् तगगत भारत की संहचत हनहध और दकसी राज् य की 

संहचत हनहध, यदि कोई िो, के लेिे में प्राप् त धनराहश भी ि;ै 

   (ii) प्रहतभूत हित के प्रवतगन के अनुसरण में दकसी असंित्त राहश के हलए दकसी प्रहतभूत लेनिार को दिए 

  गए ऋण;  

  (च) कोई अवहश‍ ि ऋण और शोध् य; 

  (छ) अहधमानी शेयरधारक, यदि कोई िों; और  

  (ि) यथाह‍ थहत, साधारण शेयरधारक या भागीिार । 

 (2) उपधारा (1) के अधीन समतुल् य श्रेणी के प्राप् तकतागओं के मध् य दकसी संहविािात करार को यदि उससे उस उपधारा के 

अधीन पूर्वगकता के क्रम में कोई हवह‍ छन् नता आती ि,ै समापक द्वारा मित् व निीं दिया िाएगा । 

 (3) समापक को संिये फीस की उपधारा (1) के अधीन प्राप् तकतागओं के प्रत् येक वगग को संिये आगमों से अनुपातत: किौती की 

िाएगी और ऐसी किौती के पश् चात् सुसंगत प्राप् तकतागओं को आगमों का हवतरण दकया िाएगा ।  

 ‍ प‍ िीकरण—इस धारा के प्रयोिन के हलए,— 

  (i) यि ‍ प‍ ि दकया िाता ि ै दक समतुल् य श्रेणी के प्राप् तकतागओं के दकसी वगग के संबंध में आगमों के हवतरण का 

 प्रत् येक प्रक्रम पर प्रत् येक ऋण का या तो पूणगतया संिाय दकया िाएगा या यदि आगम संपूणग हवत्तीय ऋणों या प्रचालन ऋणों 

 को पूरा करने के हलए अपयागप् त ि ैतो प्राप् तकतागओं में समान वगग में समान अनुपात में संित्त दकया िाएगा; और 

  (ii) “कमगकारों को शोध् य राहश” का विी अथग िोगा िो कंपनी अहधहनयम, 2013 (2013 का 18) की धारा 326 में 

 उसका ि ै। 

 54. हनगहमत ऋणी का हवघिन—(1) ििां हनगहमत ऋणी की आह‍ तयों का पूणग रूप से पररहनधागरण कर दिया गया िै, विां 

समापक न् यायहनणागयक प्राहधकारी को ऐसे हनगहमत ऋणी के हवघिन के हलए आवेिन करेगा । 

 (2) न् यायहनणागयक प्राहधकारी उपधारा (1) के अधीन समापक द्वारा फाइल दकए गए आवेिन पर यि आिशे िेगा दक उस 

आिशे की तारीि से हनगहमत ऋणी हवघरित िो िाएगा और तिनुसार हनगहमत ऋणी का हवघिन िो िाएगा । 

 (3) उपधारा (2) के अधीन आिशे की प्रहत, ऐसे आिशे की तारीि से सात दिन के भीतर ऐसे प्राहधकारी को भेिी िाएगी, 

हिसके पास हनगहमत ऋणी रहि‍ रीकृत ि ै। 

अध् याय 4 

त् वररत हनगहमत दिवाला समाधान प्रदक्रया 

 55. त् वररत हनगहमत दिवाला समाधान प्रदक्रया—(1) इस अध् याय के अनुसार संपादित दकसी हनगहमत दिवाला समाधान 

प्रदक्रया को त् वररत हनगहमत दिवाला समाधान प्रदक्रया किा िाएगा ।  

 (2) त् वररत हनगहमत दिवाला समाधान प्रदक्रया के हलए कोई आवेिन हनम् नहलहित हनगहमत ऋहणयों के संबंध में दकया िा 

सकेगा, अथागत्:— 

  (क) दकसी ऐसे ‍ तर से, िो कें रीय सरकार द्वारा अहधसूहचत दकया िाए, नीचे की आह‍ तयों और आय वाला 

 हनगहमत ऋणी; या  

  (ि) लेनिारों के ऐसे वगग का या ऐसी रकम के ऋण वाला कोई हनगहमत ऋणी, िैसा कें न् रीय सरकार द्वारा 

 अहधसूहचत दकया िाए; या 

  (ग) हनगहमत व् यह‍ तयों का ऐसा अन् य प्रवगग, िो कें रीय सरकार द्वारा अहधसूहचत दकया िाए । 

 56. त् वररत हनगहमत दिवाला समाधान प्रदक्रया को पूरा करन ेसबंधंी समयावहध—(1) उपधारा (3) के उपबंधों के अधीन रिते 

हए त् वररत हनगहमत दिवाला समाधान प्रदक्रया, दिवाला प्रारंभ िोने की तारीि से नब् बे दिन की अवहध के भीतर पूरी की िाएगी । 



 37 

 (2) समाधान वृहत्तक, न् यायहनणागयक प्राहधकारी को नब् बे दिन से परे त् वररत हनगहमत दिवाला समाधान प्रदक्रया की अवहध को 

बढाने के हलए आवेिन फाइल करेगा, यदि लेनिारों की सहमहत की बैठक में पाररत और मतिान करने वाले शेयरों के पचित्तर प्रहतशत 

मत द्वारा समर्थगत संकल् प द्वारा ऐसा करने के हलए अनुिहेशत दकया िाए । 

 (3) उपधारा (2) के अधीन आवेिन की प्राहप् त पर यदि न् यायहनणागयक प्राहधकारी का यि समाधान िो िाता ि ैदक मामले की 

हवषय-व‍ तु ऐसी ि ैदक मामूली त् वररत हनगहमत दिवाला समाधान प्रदक्रया नब् बे दिन के भीतर पूरी निीं िो सकती िै तो वि, आिशे 

द्वारा, ऐसी प्रदक्रया की अवहध को नब् बे दिन से ऐसी और अवहध तक बढा सकेगा, िो वि ठीक समझता ि,ै ककंतु िो पैंतालीस दिन से 

अहधक निीं िोगी: 

 परंतु इस धारा के अधीन त् वररत हनगहमत दिवाला समाधान प्रदक्रया का कोई हव‍ तार एक से अहधक बार निीं दकया िाएगा । 

 57. त् वररत हनगहमत दिवाला समाधान प्रदक्रया आरंभ करन ेकी रीहत—त् वररत हनगहमत दिवाला समाधान प्रदक्रया के हलए 

कोई आवेिन, यथाह‍ थहत, दकसी लेनिार या हनगहमत ऋणी द्वारा हनम् नहलहित के साथ फाइल दकया िा सकेगा:— 

  (क) व् यहतक्रम की हवद्यमानता का ऐसा सबूत, िो सूचना उपयोहगता या ऐसे अन् य साधनों पर, िो बोर्ग द्वारा 

 हवहनर्िग‍ ि दकए िाएं, उपलब् ध अहभलेि द्वारा साहक्ष् यत ि;ै और  

  (ि) ऐसी अन् य सूचना, िो बोर्ग द्वारा यि ‍ थाहपत करने के हलए हवहनर्िग‍ ि की िाए दक हनगहमत ऋणी त् वररत 

 हनगहमत दिवाला समाधान प्रदक्रया के हलए पात्र ि ै। 

 58. अध् याय 2 का इस अध् याय को लाग ूिोना—अध् याय 2 के अधीन दकसी हनगहमत दिवाला समाधान प्रदक्रया के संचालन की 

प्रदक्रया और अध् याय 6 के अधीन अपराधों और शाह‍ तयों से संबंहधत उपबंध इस अध् याय को लागू िोंगे, िैसे दक संिभग में अपेहक्षत ि ै।  
अध् याय 5 

हनगहमत व् यह‍ तयों का ‍ व‍े छया समापन 

 59. हनगहमत व् यह‍ तयों का ‍ व‍े छया समापन—(1) कोई हनगहमत व् यह‍ त, हिसका ‍ वयं का ‍ वे‍ छया समापन का आशय ि ै

और उसने कोई व् यहतक्रम निीं दकया ि,ै इस अध् याय के उपबंधों के अधीन ‍ वे‍ छया समापन कायगवाहियां आरंभ कर सकेगा । 

 (2) उपधारा (1) के अधीन दकसी हनगहमत व् यह‍ त की ‍ वे‍ छया समापन में ऐसी शतों और प्रदक्रयात् मक अपेक्षाओं को पूरा 

दकया िाएगा, िो बोर्ग द्वारा हवहनर्िग‍ ि की िाएं । 

 (3) उपधारा (2) पर प्रहतकूल प्रभाव र्ाले हबना दकसी कंपनी के रूप में रहि‍ रीकृत दकसी हनगहमत व् यह‍ त की ‍ वे‍ छया 

समापन कायगवाहियों में हनम् नहलहित शतों को पूरा दकया िाएगा, अथागत्:— 

  (क) कंपनी के अहधकांश हनिशेकों द्वारा ऐसे शपथपत्र द्वारा सत् याहपत घोषणा, हिसमें यि कथन िो दक,— 

 (i) उन् िोंने कंपनी के कायगकलापों की पूरी िांच की ि ैऔर उनकी यि राय ि ैदक या तो कंपनी का कोई 

ऋण निीं ि ैया वि ‍ वे‍ छया समापन में हवक्रय की िाने वाली आह‍ तयों के आगमों से अपने संपूणग ऋणों को चुकाने 

में समथग ि;ै और 

   (ii) कंपनी का, दकसी व् यह‍ त को कपिवंचन करने के हलए, समापन निीं दकया िा रिा िै; 

  (ि) उपिंर् (क) के अधीन की गई घोषणा के साथ हनम् नहलहित ि‍ तावेि संलग् न दकए िाएंगे:— 

 (i) पूवगवती िो वषग का या कंपनी के हनगमन की अवहध से लेकर अब तक का, इनमें से िो भी कम िो, 

कंपनी के संपरीहक्षत हवत्तीय हववरण और उसके कारबार प्रचालन के अहभलेि; और   

   (ii) कंपनी की आह‍ तयों के मूल् यांकन की ररपोिग, यदि कोई िो, िो रहि‍ रीकृत मूल् यांकक द्वारा तैयार की 

  गई िो; 

  (ग) उपिंर् (क) के अधीन घोषणा करने के चार सप् ताि के भीतर,—  

 (i) कंपनी के साधारण अहधवेशन में उसके सि‍ यों का ऐसा हवशेष संकल् प िोगा, हिसमें कंपनी के 

‍ व‍े छया समापन दकए िाने और समापन के रूप में कायग करने के हलए एक दिवाला वृहत्तक की हनयुह‍ त करने की 

अपेक्षा िोगी; या 

 (ii) कंपनी के साधारण अहधवेशन में उसके सि‍ यों का एक संकल् प िोगा, हिसमें कंपनी के, यथाह‍ थहत, 

उसके अनु‍ छेिों द्वारा हनयत उसके कायगकाल की अवहध, यदि कोई िो, समाप् त िोने के पररणाम‍ वरूप या कोई 

ऐसी घिना के घरित िोने पर, हिसके संबंध में अनु‍ छेि में यि उपबंहधत ि ै दक कंपनी को समाप् त कर दिया 

िाएगा, ‍ व‍े छया समापन करने की और समापक के रूप में कायग करने के हलए एक दिवाला वृहत्तक की हनयुह‍ त 

करने की अपेक्षा िोगी:  



 38 

परंतु यदि कंपनी दकसी व् यह‍ त के प्रहत दकसी ऋण की िनेिार िै, तो कंपनी के ऋण के िो-हतिाई मूल् य का प्रहतहनहधत् व करने 

वाले लेनिार ऐसे संकल् प के सात दिन के भीतर िंर् (ग) के अधीन पाररत संकल् प का अनुमोिन करेंगे । 

 (4) कंपनी, यथाह‍ थहत, ऐसे संकल् प के सात दिन के भीतर या लेनिारों के पश् चात्वती अनुमोिन पर, कंपनी के समापन के 

हलए उपधारा (3) के अधीन संकल् प के बारे में कंपनी रहि‍ रार और बोर्ग को अहधसूहचत करेगी । 

 (5) उपधारा (3) के अधीन लेनिारों के अनुमोिन के अधीन रिते हए, दकसी कंपनी के संबंध में ‍ वे‍ छया समापन कायगवाहियों 

को उपधारा (3) के उपिंर् (ग) के अधीन संकल् प पाररत दकए िाने की तारीि से आरंभ हआ समझा िाएगा । 

 (6) अध् याय 3 की धारा 35 से धारा 53 और अध् याय 7 के उपबंध, हनगहमत व् यह‍ तयों को ‍ वे‍ छया समापन कायगवाहियों के 

हलए ऐसे उपांतरणों के साथ, िो आवश् यक िों, लागू िोंगे ।   

 (7) ििां हनगहमत व् यह‍ त के कायगकलापों का पूणगतया पररसमापन िो गया ि ैऔर उसकी आह‍ तयों का पूणगतया पररहनधागरण 

िो गया ि,ै विां समापक न् यायहनणागयक प्राहधकारी को ऐसे हनगहमत व् यह‍ त के हवघिन के बारे में एक आवेिन करेगा । 

 (8) न् यायहनणागयक प्राहधकारी, उपधारा (7) के अधीन समापक द्वारा फाइल दकए गए आवेिन पर यि आिशे पाररत करेगा दक 

हनगहमत ऋणी उस आिशे की तारीि से हवघरित िो िाएगा और तद्नुसार हनगहमत ऋणी का हवघिन कर दिया िाएगा । 

 (9) उपधारा (8) के अधीन आिशे की एक प्रहत, ऐसे आिशे की तारीि से चौिि दिन की अवहध के भीतर ऐसे प्राहधकारी को 

भेिी िाएगी, हिसके पास हनगहमत व् यह‍ त रहि‍ रीकृत ि ै। 

अध् याय 6 

हनगहमत व् यह‍ तयों के हलए न् यायहनणागयक प्राहधकारी 

60. हनगहमत व् यह‍ तयों के हलए न् यायहनणागयक प्राहधकारी—(1) न् यायहनणागयक प्राहधकारी, हनगहमत व् यह‍ तयों, हिसके 

अंतगतग हनगहमत ऋणी और उसके हनिी प्रत् याभूहतिाता भी िैं, के दिवाला समाधान और समापन के सम् बन् ध में उस ‍ थान पर, ििां 

हनगहमत व् यह‍ त का रहि‍ रीकृत कायागलय अवह‍ थत ि,ै राज् यक्षेत्रीय अहधकाररता रिने वाला रा‍ रीय कंपनी हवहध अहधकरण िोगा । 

(2) उपधारा (1) पर प्रहतकूल प्रभाव र्ाले हबना और इस संहिता में अंतर्वग‍ ि दकसी प्रहतकूल बात के िोते हए भी, ििां 

रा‍ रीय कंपनी हवहध अहधकरण के समक्ष दकसी हनगहमत ऋणी की कोई हनगहमत दिवाला समाधान प्रदक्रया या समापन कायगवाहिया ं

लंहबत िैं, 1[विां ऐसे हनगहमत ऋणी के, यथाह‍ थहत, हनगहमत प्रत् याभूहतिाता या हनिी प्रत् याभूहतिाता का समापन या कोई दिवाला 

समाधान प्रदक्रया] या शोधन अक्षमता सम् बन् धी कायगवाहियां, ऐसे रा‍ रीय कंपनी हवहध अहधकरण के समक्ष फाइल की िाएगी । 

(3) 2[हनगहमत ऋणी के, यथाह‍ थहत, हनगहमत प्रत् याभूहतिाता या हनिी प्रत् याभूहतिाता की न् यायालय में लंहबत समापन या 

दिवाला समाधन प्रदक्रया] या शोधन अक्षमता प्रदक्रया, ऐसे हनगहमत ऋणी की दिवाला समाधान प्रदक्रया या समापन कायगवाहियों का 

हनपिारा करने वाले न् यायहनणागयक प्राहधकारी को अंतररत िो िाएगी । 

(4) रा‍ रीय कंपनी हवहध अहधकरण में ऋण वसूली अहधकरण की ऐसी सभी शह‍ तयां हनहित िोंगी, िो उपधारा (2) के 

प्रयोिन के हलए इस संहिता के भाग 3 के अधीन अनुध् यात िैं । 

(5) तत् समय प्रवृत्त दकसी अन् य हवहध में अंतर्वग‍ ि दकसी बात के िोते हए भी, रा‍ रीय कंपनी हवहध अहधकरण को,— 

 (क) दकसी हनगहमत ऋणी या हनगहमत व् यह‍ त द्वारा या उसके हवरुद्ध दकसी आवेिन या कायगवािी को;  

(ि) हनगहमत ऋणी या हनगहमत व् यह‍ त द्वारा या उसके हवरुद्ध दकए गए दकसी िावे को, हिसके अंतगगत भारत में 

ह‍ थत उसकी समनुषंहगयों द्वारा या उनके हवरुद्ध दकए गए िावे भी िैं; और 

(ग) पूर्वगकता के दकसी प्रश् न या हवहध या तथ् यों के ऐसे दकसी प्रश् न को, िो इस संहिता के अधीन हनगहमत ऋणी या 

हनगहमत व् यह‍ त की दिवाला समाधान या समापन कायगवाहियों से या उसके सम् बन् ध में उद्धृत हआ ि,ै  

ििण करने या उसके हनपिारा करने की अहधकाररता िोगी । 

 (6) पररसीमा अहधहनयम, 1963 (1963 का 36) और तत् समय प्रवृत्त दकसी अन् य हवहध में अतंर्वग‍ ि दकसी बात के िोते हए भी, 

दकसी ऐसे हनगहमत ऋणी द्वारा या उसके हवरुद्ध, हिसके हलए इस भाग के अधीन अहध‍ थगन का आिशे पाररत दकया गया िै, कोसी 

वाि या आवेिन के हलए हवहनर्िग‍ ि पररसीमा की कालावहध की संगणना में ऐसी अवहध को अपवर्िगत दकया िाएगा, हिसके िौरान 

ऐसा अहध‍ थगन हआ था । 

 61. अपीलें और अपील प्राहधकारी—(1) कंपनी अहधहनयम, 2013 (2013 का 18) के अधीन अंतर्वग‍ ि दकसी प्रहतकूल बात के 

िोते हए भी, इस भाग के अधीन न् यायहनणागयक प्राहधकारी के आिशे से व् यहथत कोई व् यह‍ त, रा‍ रीय कंपनी हवहध अहधकरण को अपील 

कर सकेगा । 

                                                 
1 2018 के अहधहनयम सं० 26 की धारा 29 द्वारा  प्रहत‍ थाहपत । 
2 2018 के अहधहनयम सं० 26 की धारा 29 द्वारा  प्रहत‍ थाहपत । 



 39 

 (2) रा‍ रीय कंपनी हवहध अपील अहधकरण के समक्ष उपधारा (1) के अधीन प्रत् येक अपील तीस दिन के भीतर फाइल की 

िाएगी: 

 परन् तु यदि रा‍ रीय कंपनी हवहध अपील अहधकरण का यि समाधान िो िाता ि ैदक अपील फाइल न करने का पयागप् त कारण 

था, तो वि तीस दिन के पश् चात् अपील फाइल करने की अनुज्ञा ि ेसकेगा, परन् तु ऐसी अवहध पन् रि दिन से अहधक की निीं िोगी । 

 (3) धारा 31 के अधीन दकसी समाधान योिना के अनुमोिन करने सम् बन् धी दकसी आिशे के हवरुद्ध कोई अपील हनम् नहलहित 

आधारों पर िी फाइल की िा सकेगी,— 

  (i) अनुमोदित समाधान योिना में तत् समय प्रवृत्त दकसी हवहध के उपबन् धों का उल् लंघन दकया गया ि;ै 

(ii) हनगहमत दिवाला समाधान अवहध के िौरान समाधान वृहत्तक द्वारा शह‍ तयों के प्रयोग में ताहववक 

अहनयहमतता हई ि;ै 

(iii) हनगहमत ऋणी के प्रचालन लेनिारों को दिए गए ऋणों का, बोर्ग द्वारा हवहनर्िग‍ ि रीहत में समाधान योिना में 

उपबन् ध निीं दकया गया ि;ै 

(iv) दिवाला समाधान प्रदक्रया के िचे का अन् य सभी ऋणों को पूर्वगकता ितेे हए प्रहतसंिाय करने का उपबन् ध निीं 

दकया गया ि;ै या 

(v) समाधान योिना में बोर्ग द्वारा हवहनर्िग‍ ि दकसी अन् य मानिण् र् का अनुपालन निीं दकया गया ि ै। 

 (4) धारा 33 के अधीन पाररत समापन आिशे के हवरुद्ध कोई अपील ऐसे दकसी समापन आिशे के सम् बन् ध में की गई ताहववक 

अहनयहमतता या कपि के आधार पर फाइल की िा सकेगी । 

 62. उ‍ चतम न् यायालय को अपील—(1) रा‍ रीय कंपनी हवहध अहधकरण के आिशे से व् यहथत कोई व् यह‍ त, इस संहिता के 

अधीन ऐसे आिशे से उद्भूत हवहध के दकसी प्रश् न पर, ऐसे आिशे के प्राप् त िोने की तारीि से पैंतालीस दिन के भीतर उ‍ चतम 

न् यायालय को अपील कर सकेगा । 

 (2) उ‍ चतम न् यायालय, यदि उसका यि समाधान िो िाता ि ैदक ऐसे व् यह‍ त को पैंतालीस दिन के भीतर अपील फाइल करने 

से पयागप् त कारण से हनवाररत दकया गया था तो वि उसे पन् रि दिन से अनहधक की अहतरर‍ त अवहध के भीतर अपील फाइल करने के 

हलए अनुज्ञात कर सकेगा । 

 63. हसहवल न् यायालय को अहधकाररता का न िोना—दकसी ऐसे हवषय के सम् बन् ध में, हिस पर इस संहिता के अधीन रा‍ रीय 

कंपनी हवहध अहधकरण या रा‍ रीय कंपनी हवहध अपील अहधकरण को अहधकाररता िै, हसहवल न् यायालय को कोई वाि या कायगवाहियां 

ििण करने की अहधकाररता निीं िोगी । 

 64. आविेनों का शीघ्र हनपिारा—(1) ििां इस सहंिता में हवहनर्िग‍ ि अवहध के भीतर दकसी आवेिन का हनपिारा निीं दकया 

गया ि ैया उस पर कोई आिशे पाररत निीं दकया गया िै, विां, यथाह‍ थहत, रा‍ रीय कंपनी हवहध अहधकरण या रा‍ रीय कंपनी हवहध 

अपील अहधकरण, ऐसी हवहनर्िग‍ ि अवहध के भीतर ऐसा न दकए िाने के हलए कारणों को अहभहलहित करेगा; और, यथाह‍ थहत, 

रा‍ रीय कंपनी हवहध अहधकरण का अध् यक्ष या रा‍ रीय कंपनी हवहध अपील अहधकरण का अध् यक्ष इस प्रकार अहभहलहित कारणों पर 

हवचार करने के पश् चात् अहधहनयम में हवहनर्िग‍ ि अवहध को िस दिन से अनहधक की अवहध के हलए बढा सकेगा । 

 (2) इस संहिता के अधीन रा‍ रीय कंपनी हवहध अहधकरण या रा‍ रीय कंपनी हवहध अपील अहधकरण को प्रित्त दकसी शह‍ त के 

अनुसरण में की गई या की िाने वाली दकसी कारगवाई के सम् बन् ध में दकसी न् यायालय, अहधकरण या प्राहधकरण द्वारा कोई व् यािशे मंिूर 

निीं दकया िाएगा । 

 65. कायगवाहियों का कपिपणूग या हवद्वेषपणूग रूप से शरुू दकया िाना—(1) यदि कोई व् यह‍ त, दिवाला का समाधान करने से 

हभन् न दकसी प्रयोिन से कपिपूणग या हवद्वषेपूणग आशय से, यथाह‍ थहत, दिवाला समाधान प्रदक्रया या समापन प्रदक्रया आरंभ करता िै तो, 

न् यायहनणागयक प्राहधकारी ऐसे व् यह‍ त पर शाह‍ त अहधरोहपत कर सकेगा, िो एक लाि रुपए से कम निीं िोगी, दकन् तु िो एक करोड़ 

रुपए तक की िो सकेगी । 

 (2) यदि कोई व् यह‍ त, दकसी व् यह‍ त को कपिवंहचत करने के आशय से ‍ वे‍ छया समापन कायगवाहियां आरंभ करता ि ैतो 

न् यायहनणागयक प्राहधकारी ऐसे व् यह‍ त पर शाह‍ त अहधरोहपत कर सकेगा, िो एक लाि रुपए से कम निीं िोगी, दकन् तु िो एक करोड़ 

रुपए तक की िो सकेगी । 

 66. कपिपणूग व् यापार या सिोष व् यापार—(1) यदि हनगहमत दिवाला समाधान प्रदक्रया या समापन प्रदक्रया के िौरान यि 

पाया िाता ि ैदक हनगहमत ऋणी का कोई कारबार, हनगहमत ऋणी के लेनिारों को कपिवंहचत करने या कोई कपिपूणग प्रयोिन के हलए 

दकया िा रिा िै तो न् यायहनणागयक प्राहधकारी समाधान वृहत्तक के आवेिन पर एक आिशे पाररत कर सकेगा दक ऐसे व् यह‍ त, िो ऐसी 

रीहत से कारबार चलाने वाले पक्षकारों को िानते थे, हनगहमत ऋणी की आह‍ तयों के हलए ऐसे अहभिाय करने के िायी िोंगे, िो वि 

ठीक समझे । 



 40 

 (2) हनगहमत दिवाला समाधान प्रदक्रया के िौरान समाधान वृहत्तक द्वारा दकए गए आवेिन पर, न् यायहनणागयक प्राहधकारी 

आिशे द्वारा यि हनिशे ि ेसकेगा दक हनगहमत ऋणी का, यथाह‍ थहत, हनिशेक या भागीिार हनगहमत ऋणी की आह‍ तयों के हलए ऐसा 

अहभिाय करने के िायी िोगा, िो वि ठीक समझे, यदि— 

(क) दिवाला प्रारंभ िोने की तारीि के पूवग ऐसे हनिशेक या भागीिार को इस बात का पता था या उसे ऐसी बात 

का पता िोना चाहिए था दक ऐसे हनगहमत ऋणी के सम् बन् ध में हनगहमत दिवाला समाधान प्रदक्रया को प्रारंभ करने से बचने 

की कोई युह‍ तयु‍ त संभावना निीं ि;ै 

(ि) ऐसे हनिशेक या भागीिार ने हनगहमत ऋणी के लेनिारों की संभाव् य िाहन को कम करने के हलए सम् यक् 

तत् परता का प्रयोग निीं दकया था । 

 ‍ प‍ िीकरण—इस धारा के प्रयोिनों के  हलए, यथाह‍ थहत, हनगहमत ऋणी के हनिशेक या भागीिार के बारे में सम् यक् तत् परता 

का प्रयोग दकया गया समझा िाएगा, यदि ऐसी तत् परता, वैसा िी कायग, िो हनगहमत ऋणी के सम् बन् ध में, यथाह‍ थहत, ऐसे हनिशेक या 

भागीिार द्वारा दकए िाते िैं, करने वाले दकसी व् यह‍ त से युह‍ तयु‍ त रूप से प्रत् याहशत िोती ।  

 1[(3) इस धारा में अंतर्वग‍ ि दकसी बात के िोते हए भी, ऐसे व् यहतक्रम हिसके हवरुध धारा 10क के अनुसार हनगहमत दिवाला 

समाधान प्रदक्रया का प्रारंभ दकया िाना हनलंहबत दकया गया िै, के संबंध में उपधारा (2) के अधीन समाधान वृहतक द्वारा कोई आवेिन 

फाइल निीं दकया िाएगा ।] 

 67. धारा 66 के अधीन कायगवाहियां—(1) ििां न् यायहनणागयक प्राहधकारी ने, यथाह‍ थहत, धारा 66 की उपधारा (1) या 

उपधारा (2) के अधीन कोई आिेश पाररत दकया िै, विां वि ऐसे और हनिशे िे सकेगा, िो वि आिशे को प्रभावी बनाने के हलए 

आवश् यक समझ,े और न् यायहनणागयक प्राहधकारी हवहश‍ ितया,— 

(क) आिशे के अधीन दकसी व् यह‍ त के ऐसे िाहयत् व का उपबन् ध कर सकेगा, िो हनगहमत ऋणी से उस ेशोध् य दकसी 

ऋण या बाध् यता पर या दकसी बंधक या भार पर या दकसी बंधक में दकसी हित पर या हनगहमत ऋणी की, उसके द्वारा या 

उसकी ओर से दकसी व् यह‍ त या िायी व् यह‍ त से या उसके माध् यम से समनुिहेशती के रूप में िावा करने वाले दकसी व् यह‍ त या 

उसकी ओर से कायग करने वाले दकसी व् यह‍ त द्वारा धाररत या उसमें हनहित आह‍ तयों पर भार िोगा; और 

(ि) समय-समय पर ऐसे और हनिशे ि े सकेगा, िो इस धारा के अधीन अहधरोहपत भार के प्रवतगन के हलए 

आवश् यक िों । 

 ‍ प‍ िीकरण—इस धारा के प्रयोिनों के हलए, “समनुिहेशती” के अंतगगत ऐसा व् यह‍ त भी ि,ै हिसे या हिसके पक्ष में िंर् (क) 

के अधीन िायी ठिराए गए व् यह‍ त के हनिशेों द्वारा ऋण, बाध् यता, बंधक या भार का सृिन हआ था, िारी या अंतररत दकया गया था 

या हित का सृिन हआ था, दकन् तु इसके अंतगगत सद्भावपूवगक और ऐसे दकन् िीं आधारों की, हिनके आधार पर हनिेश दिए गए िैं सूचना के 

हबना मूल् यवान प्रहतफल के हलए समनुिहेशती सहम् महलत निीं ि ै। 

 (2) ििां न् यायहनणागयक प्राहधकारी ने, यथाह‍ थहत, धारा 66 की उपधारा (1) या उपधारा (2) के अधीन कोई आिशे दकसी 

ऐसे व् यह‍ त के सम् बन् ध में पाररत दकया िै, िो हनगहमत ऋणी का लेनिार ि,ै विां वि आिशे द्वारा यि हनिशे ि ेसकेगा दक हनगहमत 

ऋणी द्वारा उस व् यह‍ त से हलया गया कोई ऋण पूणगतया या उसका कोई भाग और उस पर के दकसी ब् याि को, हनगहमत ऋणी द्वारा 

हलए गए सभी ऋणों और उसके पश् चात् धारा 53 के अधीन संिाय की पूर्वगकता के अनुक्रम में श्रेणीकृत दकया िाएगा । 

 

अध् याय 7 

अपराध और शाह‍ तया ं

 68. सम् पहत्त को हछपाए िान ेके हलए िण् र्—ििां हनगहमत ऋणी के दकसी अहधकारी ने,— 

  (i) दिवाला प्रारम् भ िोने की तारीि से ठीक पूवग बारि मास के भीतर,— 

(क) िानबूझकर हनगहमत ऋणी की कोई सम् पहत्त या ऐसी सम् पहत्त के दकसी भाग को हछपाया या 

हनगहमत ऋणी के प्रहत या उससे शोध् य िस ििार रुपए या उससे अहधक मूल् य के दकसी ऋण को हछपाया; या 

(ि) कपिपूवगक हनगहमत ऋणी की िस ििार रुपए या उससे अहधक मूल् य की सम् पहत्त के दकसी भाग को 

ििाया; या 

(ग) िानबूझकर, हनगहमत ऋणी की सम् पहत्त या उसके कायगकलापों को प्रभाहवत करने वाली या उससे 

संबंहधत दकसी बिी या कागिपत्रों को हछपाया, न‍ ि दकया, हवकृत दकया या उसका हमथ् याकरण दकया, या 

                                                 
1 2020 के अहधहनयम सं० 17 की धारा 3 द्वारा अंत:‍ थाहपत ।   



 41 

(घ) िानबूझकर, हनगहमत ऋणी की सम् पहत्त या उसके कायगकलापों सम् बन् धी दकसी बिी या कागिपत्र में 

कोई हमथ् या प्रहवह‍ ि की; या 

(ङ) कपिपूवगक, हनगहमत ऋणी की सम् पहत्त या उसके कायगकलापों को प्रभाहवत करने वाले या उनस े

सम् बहन् धत दकसी ि‍ तावेि को अलग दकया, उसमें पररवतगन या कोई लोप दकया; या 

(च) िानबूझकर, हनगहमत ऋणी की दकसी ऐसी सम् पहत्त पर कोई प्रहतभूहत हित का सृिन दकया, उसका 

अन् तरण या व् ययन दकया िो उसने उधार पर अहभप्राप् त की ि ैऔर उसके ऐसे सृिन, अंतरण या व् ययन िोने तक 

उसे हनगहमत ऋणी के कारबार के मामूली अनु्क्रम में उसका संिाय निीं दकया गया िै; या 

(छ) िानबूझकर दकसी अन् य के द्वारा िंर् (ग), िंर् (घ) या िंर् (ङ) में उहल् लहित कृत् यों में से दकन् िीं 

कृत् यों को करने की िानकारी हछपाई; या 

(ii) दिवाला प्रारम् भ िोने की तारीि के पश् चात् दकसी समय िंर् (i) के उपिंर् (क) से उपिंर् (च) में वर्णगत कोई 

कृत् य दकया या हिसे दकसी अन् य के द्वारा िंर् (i) के उपिंर् (ग) से उपिंर् (ङ) में से वर्णगत बातों में दकसी बात के करने की 

िानकारी ि;ै या 

(iii) दिवाला प्रारम् भ िोने की तारीि के पश् चात् दकसी समय यि िानते हए दक सम् पहत्त इस प्रकार प्रहतभूत िै, 

उसका अन् तरण या व् ययन िो गया ि,ै उसे पणयम् या हगरवी रिा या अन् यथा प्राप् त दकया, 

विां ऐसा अहधकारी, ऐस ेकारावास से, हिसकी अवहध तीन वषग से कम की निीं िोगी दकन् तु िो पांच वषग तक की िो सकेगी या िुमागन े

से, िो एक लाि रुपए से कम का निीं िोगा, दकन् तु िो एक करोड़ रुपए तक का िो सकेगा, या िोनों से, िण् र्नीय िोगा: 

 परन् तु इस धारा की कोई बात, इस धारा के अधीन दकसी व् यह‍ त को दकसी िण् र् के हलए िायी निीं बनाएगी यदि वि यि 

साहबत कर ितेा ि ैदक उसका हनगहमत ऋणी के कायगकलापों की ह‍ थहत को कपिवंहचत करने या हछपाने का कोई आशय निीं था । 

 69. लनेिारों को कपिवचंन करन े के हलए सवं् यविारों के हलए िण् र्—1[यदि] हनगहमत ऋणी के दकसी अहधकारी ने या 

हनगहमत ऋणी ने,— 

(क) हनगहमत ऋणी की सम् पहत्त का कोई िान या अन् तरण दकया िै या करावास िै या उस पर कोई भार र्ाला िै या 

र्लवाया ि ैया उसके हवरुद्ध दकसी हर्क्री या आिशे का हन‍ पािन करवाया ि ैया उसकी मौनानुमहत िी िै, या 

(ि) हनगहमत ऋणी के हवरुद्ध अहभप्राप् त धन के संिाय के हलए दकसी असंतु‍ ि हनणगय, हर्क्री या आिेश की तारीि 

से पिले िो मास के भीतर हनगहमत ऋणी की सम् पहत्त को या उसके दकसी भाग को हछपाया ि ैया ििाया िै, 

तो, यथाह‍ थहत, हनगहमत ऋणी का अहधकारी या हनगहमत ऋणी ऐसे कारावास से, हिसकी अवहध, एक वषग से कम की निीं िोगी, 

दकन् तु िो पांच वषग तक की िो सकेगी या िुमागने से, िो एक लाि रुपए से कम का निीं िोगा, दकन् तु िो एक करोड़ रुपए तक का िो 

सकेगा, या िोनों से, िण् र्नीय िोगा: 

 परन् तु कोई व् यह‍ त इस धारा के अधीन िण् र्नीय निीं िोगा यदि िंर् (क) में वर्णगत कायग दिवाला प्रारम् भ िोने की तारीि से 

पूवग पांच वषग पिले दकए गए थे; या यदि वि यि साहबत कर ितेा ि ैदक उन कृत् यों को करते समय उसका हनगहमत ऋणी के लेनिारों को 

कपिवंहचत करने का कोई आशय निीं था । 

 70. हनगहमत दिवाला समाधान प्रदक्रया के िौरान अवचार के हलए िण् र्—(1) दिवाला प्रारम् भ िोने की तारीि को या उसके 

पश् चात् ििां हनगहमत ऋणी का कोई अहधकारी,— 

(क) समाधान वृहत्तक को हनगहमत ऋणी की सम् पहत्त के सभी ब् यौरे और उसके संव् यविार के ऐसे ब् यौरे या ऐसी कोई 

अन् य िानकारी, हिसकी समाधान वृहत्तक अपेक्षा करे, प्रकि निीं करता ि;ै या 

(ि) समाधान वृहत्तक को, हनगहमत ऋणी की सभी सम् पहत्तयों या उनके ऐसे भाग का, िो उसके हनयंत्रण या 

अहभरक्षा में ि ैऔर हिसके पररिान की उससे अपेक्षा िै, पररिान निीं करता िै; या 

(ग) समाधान वृहत्तक को, हनगहमत ऋणी की उसके हनयंत्रण या अहभरक्षा में रिी सभी बहियों और कागिपत्रों का 

तथा हिनके पररिान की उससे अपेक्षा की गई िै, पररिान निीं करता िै; या 

(घ) समाधान वृहत्तक को उसकी िानकारी में इस बात की सूचना िनेे में असफल रिता िै दक हनगहमत दिवाला 

समाधान प्रदक्रया के िौरान दकसी व् यह‍ त द्वारा दकसी ऋण को हमथ् या रूप से साहबत दकया गया िै; या 

(ङ) हनगहमत ऋणी की सम् पहत्त या कायगकलापों को प्रभाहवत करने वाली या उनसे सम् बहन् धत दकसी बिी या कागि 

पत्र को प्र‍ तुत करने से रोकता िै; या 

                                                 
1 2018 के अहधहनयम सं० 26 की धारा 30 द्वारा प्रहत‍ थाहपत ।  



 42 

(च) हनगहमत ऋणी की सम् पहत्त के दकसी भाग के सम् बन् ध में काल् पहनक िाहन या व् यय का हिसाब ितेा ि ैया उसने 

दिवाला प्रारम् भ िोने की तारीि स ेठीक पिले बारि मास के भीतर हनगहमत ऋणी के लेनिारों की दकसी बैठक में ऐसा प्रयास 

दकया ि,ै 

विां वि ऐसे कारावास से, हिसकी अवहध तीन वषग से कम की निीं िोगी, दकन् तु िो पांच वषग तक की िो सकेगी या िुमागने से, िो एक 

लाि रुपए से कम का निीं िोगा दकन् तु िो एक करोड़ रुपए तक का िो सकेगा, या िोनों से, िण् र्नीय िोगा:  

 परन् तु इस धारा की कोई बात, इस धारा के अधीन दकसी व् यह‍ त को दकसी िण् र् का भागी निीं बनाएगी यदि वि यि साहबत 

कर ितेा ि ैदक उसका हनगहमत ऋणी के कायगकलापों की ह‍ थहत के सम् बन् ध में कपिवंहचत करने या हछपाने का कोई आशय निीं था । 

 (2) यदि कोई दिवाला वृहत्तक िानबूझकर, इस भाग के उपबन् धों का उल् लंघन करेगा, तो वि ऐसे कारावास से, हिसकी अवहध 

छि मास तक की िो सकेगी या ऐसे िुमागने का भी, िो एक लाि रुपए से कम का निीं िोगा दकन् तु िो पांच लाि रुपए तक का िो 

सकेगा, या िोनों से, िण् र्नीय िोगा । 

 71. हनगहमत ऋणी की बहियों के हमथ् याकरण के हलए िण् र्—दिवाला समाधान प्रारम् भ िोने की तारीि को या उसके पश् चात् 

ििां कोई व् यह‍ त दकसी व् यह‍ त को कपिवंहचत या प्रवंहचत करने के आशय से हनगहमत ऋणी की दकन् िीं बहियों, कागिपत्रों या 

प्रहतभूहतयों को न‍ ि, हवकृत, पररवर्तगत या हमथ् याकरण करेगा या उसके दकसी रहि‍ िर, लेिा पु‍ तकों या ि‍ तावेिों में कोई हमथ् या या 

कपिपूणग प्रहवह‍ ि करेगा या उसे ऐसा दकए िान ेकी िानकारी िै, विां वि ऐसे कारावास से, हिसकी अवहध तीन वषग से कम की निीं 

िोगी, दकन् तु िो पांच वषग तक की िो सकेगी या िुमागने से, िो एक लाि रुपए से कम का निीं िोगा, दकन् तु िो एक करोड़ रुपए तक का 

िो सकेगा, या िोनों से, िण् र्नीय िोगा । 

 72. हनगहमत ऋणी के कायगकलापों स ेसम् बहन् धत हववरणों में िानबझूकर और ताहववक लोप के हलए िण् र्—ििां हनगहमत 

ऋणी का कोई अहधकारी, हनगहमत ऋणी के कायगकलापों से संबंहधत दकसी हववरण में कोई ताहववक और िानबूझकर लोप करेगा, वि 

ऐसे कारावास से, हिसकी अवहध तीन वषग से कम की निीं िोगी, दकन् तु िो पांच वषग तक की िो सकेगी या िुमागने से, िो एक लाि रुपए 

से कम का निीं िोगा, दकन् तु िो एक करोड़ रुपए तक का िो सकेगा या िोनों से िण् र्नीय िोगा । 

 73. लनेिारों को हमथ् या व् यपिशेन के हलए िण् र्—ििां हनगहमत ऋणी का कोई अहधकारी,— 

(क) दिवाला प्रारम् भ िोने की तारीि को या उसके पश् चात् हनगहमत ऋणी के लेनिारों या उनमें से दकसी की, 

हनगहमत दिवाला समाधान प्रदक्रया या समापन प्रदक्रया के िौरान हनगहमत ऋणी के कायगकलापों के संिभग में कोई करार करने 

के हलए सिमहत अहभप्राप् त करने के प्रयोिन के हलए हमथ् या व् यपिशेन करेगा या कोई कपि करेगा, 

(ि) दिवाला प्रारम् भ िोने की तारीि से पिले उस प्रयोिन के हलए कोई हमथ् या व् यपिशेन दकया ि ैया कोई कपि 

दकया ि,ै 

विां वि ऐसे कारावास से, हिसकी अवहध तीन वषग से कम की निीं िोगी, दकन् तु िो पांच वषग तक की िो सकेगी या िुमागने से, िो एक 

लाि रुपए से कम का निीं िोगा दकन् तु िो एक करोड़ रुपए तक का िो सकेगा, या िोनों से, िण् र्नीय िोगा । 

 74. अहध‍ थगन काल या समाधान योिना का उल् लंघन करन े के हलए िण् र्—(1) ििां हनगहमत ऋणी या उसका कोई 

अहधकारी धारा 14 के उपबन् धों का अहतक्रमण करेगा, कोई ऐसा अहधकारी िो यि िानते हए या िानबूझकर ऐसा उल् लंघन करेगा, ऐसे 

उल् लंघन को प्राहधकृत या अनुज्ञात करेगा, विां वि ऐसे कारावास से, हिसकी अवहध तीन वषग से कम की निीं िोगी दकन् तु िो पांच वषग 

तक की िो सकेगी या िुमागने से, िो एक लाि रुपए से कम का निीं िोगा दकन् तु िो तीन लाि रुपए तक का िो सकेगा, या िोनों से, 

िण् र्नीय िोगा । 

 (2) ििां कोई लेनिार धारा 14 के उपबन् धों का उल् लंघन करेगा तब ऐसा कोई व् यह‍ त िो िानते हए और िानबूझकर दकसी 

लेनिार द्वारा ऐसे उल् लंघन को प्राहधकृत या अनुज्ञात करेगा, विां वि ऐसे कारावास से, हिसकी अवहध एक वषग से कम की निीं िोगी, 

दकन् तु िो पांच वषग तक की िो सकेगी या िुमागने से, िो एक लाि रुपए से कम का निीं िोगा, दकन् तु िो एक करोड़ रुपए तक का िो 

सकेगा, या िोनों से, िण् र्नीय िोगा । 

 (3) ििां कोई हनगहमत ऋणी, उसके कोई अहधकारी या कोई लेनिार या कोई ऐसा व् यह‍ त, हिस पर धारा 31 के अधीन 

अनुमोदित समाधान योिना बाध् यकारी ि,ै िानते हए या िानबूझकर ऐसी समाधान योिना के दकसी हनबंधन का अहतक्रमण करता ि ै

या ऐसे अहतक्रमण का ि‍ु प्रेरण करता ि,ै विां ऐसा हनगहमत ऋणी, अहधकारी, लेनिार या व् यह‍ त ऐसे कारावास से, हिसकी अवहध एक 

वषग से कम की निीं िोगी, दकन् तु िो पांच वषग तक की िो सकेगी या िुमागने से, िो एक लाि रुपए से कम का निीं िोगा दकन् तु िो एक 

करोड़ रुपए तक का िो सकेगा, या िोनों से, िण् र्नीय िोगा । 

 75. आवेिन में िी गई हमथ् या सचूना के हलए िण् र्—ििां कोई व् यह‍ त, धारा 7 के अधीन दकए गए आवेिन में ऐसी सूचना 

िगेा, िो ताहववक हवहशह‍ ियों में हमथ् या ि,ै हिसका हमथ् या िोना वि िानता ि ैया कोई ताहववक तथ् य िनेे में िानबूझकर लोप करेगा, 

वि िुमागने से, िो एक लाि रुपए से कम का निीं िोगा, दकन् तु िो एक करोड़ रुपए तक का िो सकेगा, िण् र्नीय िोगा । 



 43 

 76. प्रचालन लनेिार द्वारा हववाि को प्रकि न करन ेया ऋण का 1[संिाय] न करन ेके हलए शाह‍ त—ििा—ं 

(क) कोई प्रचालन लेनिार, िानते हए या िानबूझकर धारा 9 के अधीन आवेिन में इस तथ् य को हछपाएगा दक 

हनगहमत ऋणी ने उसे अंसित्त प्रचालन ऋण से सम् बहन् धत दकसी हववाि की या असंित्त प्रचालन ऋण के पूणग और अंहतम 
1[संिाय] की सूचना िी थी; या 

(ि) कोई व् यह‍ त, िो िानते हए और िानबूझकर िंर् (क) के अधीन ऐसे हछपाव को प्राहधकृत या अनुज्ञात करेगा, 

यथाह‍ थहत, ऐसा प्रचालन लेनिार या व् यह‍ त ऐसे कारावास से, हिसकी अवहध एक वषग से कम की निीं िोगी, दकन् तु िो पांच वषग तक 

की िो सकेगी या िुमागने से, िो एक लाि रुपए से कम का निीं िोगा, दकन् तु िो एक करोड़ रुपए तक का िो सकेगा, या िोनों से, 

िण् र्नीय िोगा । 

 77. हनगहमत ऋणी द्वारा दकए गए आवेिन में हमथ् या सचूना िने ेके हलए िण् र्—ििां— 

(क) कोई हनगहमत ऋणी धारा 10 के अधीन आवेिन में ऐसी सूचना िगेा िो ताहववक हवहशह‍ ियों में हमथ् या ि ै

हिसका हमथ् या िोना वि िानता ि ैया कोई ताहववक तथ् य िनेे में िानबूझकर लोप करेगा; या 

(ि) कोई ऐसा व् यह‍ त िो यि िानते हए और िानबूझकर उपिंर् (क) के अधीन िी गई ऐसी सूचना को प्राहधकृत 

या अनुज्ञात करेगा, 

विां, यथाह‍ थहत, ऐसा हनगहमत ऋणी या व् यह‍ त ऐसे कारावास से, हिसकी अवहध तीन वषग की कम की निीं िोगी दकन् तु िो, पांच वषग 

तक की िो सकेगी या िुमागने से, िो एक लाि रुपए से कम का निीं िोगा दकन् तु िो एक करोड़ रुपए तक का िो सकेगा, या िोनों से, 

िण् र्नीय िोगा । 

 ‍ प‍ िीकरण—इस धारा के और धारा 75 और धारा 76 के प्रयोिन के हलए, हनगहमत ऋणी द्वारा फाइल दकए गए आवेिन के 

बारे में यि समझा िाएगा दक वि ताहववक हवहशह‍ ियों में हमथ् या ि,ै यदि आवेिन में वर्णगत या लोप दकए गए तथ् य, यदि वे, 

यथाह‍ थहत, सिी िोते या उनका आवेिन से लोप न दकया गया िोता तो वे इस सहंिता के अधीन व् यहतक्रम की हवद्यमानता का 

अवधारण करने के हलए पयागप् त िोते । 

भाग 3 

व् यह‍ ियों और भागीिारी फमों के हलए दिवाला समाधान और शोधन अक्षमता 

अध् याय 1 

प्रारहम् भक 

78. लाग ूिोना—यि भाग नए आरम् भ, व् यह‍ िकों और भागीिारी फमों के दिवाले और शोधन अक्षमता से सम् बहन् धत मामलों 

को विां लागू िोगा ििां व् यहतक्रम की रकम एक ििार रुपए से कम निीं ि:ै 

परन् तु कें रीय सरकार अहधसूचना द्वारा, उ‍ चतर मूल् य के व् यहतक्रम की न् यूनतम रकम हवहनर्िग‍ ि कर सकेगी, िो एक लाि 

रुपए से अहधक निीं िोगी । 

79. पररभाषाएं—इस भाग में, िब तक दक संिभग से अन् यथा अपेहक्षत न िो,— 

(1) “न् यायहनणागयक प्राहधकारी” से बैंकों और हवत्तीय सं‍ थाओं को शोध् य ऋण वसूली अहधहनयम, 1993               

(1993 का 51) की धारा 3 की उपधारा (1) के अधीन गरठत ऋण वसूली अहधकरण अहभप्रेत िै; 

(2) ऋणी का “सिचारी” से हनम् नहलहित अहभप्रेत ि,ै— 

(क) कोई ऐसा व् यह‍ त, िो ऋणी के ठीक हनकि का कुिुम् ब का अंग िै; 

(ि) ऐसा व् यह‍ त, िो ऋणी का नातेिार ि ैया ऋणी के पहत या पत् नी का नातेिार ि;ै 

(ग) ऐसा व् यह‍ त, िो ऋणी की भागीिारी में िै; 

(घ) ऐसा व् यह‍ त, िो दकसी ऐसे व् यह‍ त का पहत या पत् नी ि ैया नातिेार ि,ै हिसका ऋणी भागीिारी           

में ि;ै 

(ङ) ऐसा व् यह‍ त, िो ऋणी का हनयोिक ि ैया ऋणी का कमगचारी िै; 

(च) ऐसा व् यह‍ त, िो दकसी ऐसे न् यास का न् यासी ि,ै हिसमें न् यास के हिताहधकाररयों में कोई ऋणी 

सहम् महलत ि ैया न् यास के हनबंधन न् यासी को ऐसे शह‍ त प्रित्त करते िैं, हिसका ऋणी या ऋणी के दकसी सिचारी 

के फायि ेके हलए प्रयोग दकया िा सके; और 

                                                 
1 2018 के अहधहनमय सं० 26 की धारा 31 द्वारा “प्रहतसंिाय” शब् ि के ‍ थान पर प्रहत‍ थाहपत ।   



 44 

(छ) ऐसी कंपनी, ििां ऋणी या ऋणी के साथ उसके सिचारी, कंपनी की पचास प्रहतशत से अहधक 

शेयरपूंिी के ‍ वामी िैं या वे कंपनी के हनिशेक बोर्ग की हनयुह‍ त को हनयंहत्रत करते िैं । 

‍ प‍ िीकरण—इस िंर् के प्रयोिनों के हलए, दकसी व् यह‍ त के संिभग में “नातेिार” से कोई ऐसा व् यह‍ त अहभप्रेत िै 

िो दकसी अन् य व् यह‍ त का नातेिार ि,ै यदि,— 

 (i) वे हििं ूअहवभ‍ त कुिुम् ब के सि‍ य िैं; या 

 (ii) एक व् यह‍ त दकसी अन् य व् यह‍ त से ऐसी रीहत से, िो हवहित की िाए, सम् बहन् धत ि;ै 

(3) “शोधन अक्षम व् यह‍ त (दिवाहलया)” से अहभप्रेत ि,ै— 

(क) ऐसा ऋणी, हिसे धारा 126 के अधीन शोधन अक्षमता आिशे द्वारा शोधन अक्षम के रूप में 

न् यायहनणीत दकया गया ि,ै 

(ि) ििां धारा 126 के अधीन शोधन अक्षमता आिशे दकसी फमग के हवरुद्ध दकया गया िै, विां फमग का 

प्रत् येक भागीिार; या  

(ग) अनुन् मोहचत दिवाहलया के रूप में न् यायहनणीत कोई व् यह‍ त;  

(4) “शोधन अक्षमता” से शोधन अक्षम िोने की िशा अहभप्रेत िै; 

(5) शोधन अक्षम व् यह‍ त के सम् बन् ध में “शोधन अक्षमता ऋण” से हनम् नहलहित अहभप्रेत ि,ै— 

(क) शोधन अक्षमता प्रारम् भ िोने की तारीि को उसके द्वारा हलया गया कोई ऋण; 

(ि) ऐसा कोई ऋण, हिसके हलए वि शोधन अक्षमता प्रारम् भ िोने की तारीि के पश् चात् दकन् तु शोधन 

अक्षमता प्रारम् भ िोने की तारीि के पूवग दकए गए दकसी वंव् यविार के कारण उसके उन् मोहचत िोने के पूवग िायी िो; 

और 

(ग) कोई ऐसा ब् याि, िो धारा 171 के अधीन ऋण का भाग ि;ै 

(6) “शोधन अक्षमता प्रारम् भ िोने की तारीि” से ऐसी तारीि अहभप्रेत ि ै हिसको धारा 126 के अधीन 

न् यायहनणागयक प्राहधकारी द्वारा शोधन अक्षमता सम् बन् धी आिशे पाररत दकया गया िै; 

(7) “शोधन अक्षमता आिशे” से धारा 126 के अधीन न् यायहनणागयक प्राहधकारी द्वारा पाररत कोई आिशे अहभप्रेत 

ि;ै 

(8) “शोधन अक्षमता आिहेशका” से इस भाग के अध् याय 4 और अध् याय 5 के अधीन दकसी ऋणी के हवरुद्ध कोई 

आिहेशका अहभप्रेत ि;ै  

(9) “शोधन अक्षमता न् यासी” से धारा 125 के अधीन शोधन अक्षम की संपिा के हलए न् यासी के रूप में हनयु‍ त 

दिवाला वृहत्तक अहभप्रेत िै; 

(10) “अध् याय” से इस भाग के अधीन कोई अध् याय अहभप्रेत ि;ै 

(11) “लेनिारों की सहमहत” से धारा 134 के अधीन गरठत कोई सहमहत अहभप्रेत िै; 

(12) “ऋणी” के अंतगगत हनणीतऋणी भी िै;  

(13) “उन् मोचन आिशे” से न् यायहनणागयक प्राहधकारी द्वारा दकसी ऋणी को, यथाह‍ थहत, धारा 92, धारा 119 और 

धारा 138 के अधीन उन् मोहचत करने वाला आिशे अहभप्रेत िै;  

(14) इस भाग के प्रयोिनों के हलए “अपवर्िगत आह‍ तयों” में हनम् नहलहित शाहमल िैं— 

(क) अहवल् लंगहमत औिार, बहियां, यान और अन् य उप‍ कर, िो ऋणी या शोधन अक्षम के हलए उसके 

वैयह‍ तक उपयोग के हलए या उसके हनयोिन, कारबार या व् यवसाय के हलए आवश् यक ि;ै 

(ि) अहवल् लंगहमत फनीचर, घरेलू उप‍ कर और सामहियां, िो शोधन अक्षम और उसके अव् यवहित 

कुिुम् ब की मूल घरेलू आवश् यकताओं को पूरा करने के हलए आवश् यक ि;ै  

(ग) ऋणी या उसके अव् यवहित कुिुम् ब के कोई ऐसे मूल् य के, िो हवहित दकया िाए, अहवल् लंगहमत 

वैयह‍ तक आभूषण, हिन् िें उसकी धार्मगक प्रथा के अनुसार अलग निीं दकया िा सकता िै;  

(घ) कोई अहवल् लंगहमत िीवन बीमा पाहलसी या पेंशन योिना, हिसे ऋणी या उसके अव् यवहित कुिुम् ब 

के नाम से हलया गया ि;ै और 



 45 

(ङ) ऋणी के ‍ वाहमत् व में ऐसे मूल् य का, िो हवहित दकया िाए, कोई अहवल् लंगहमत एकल हनवास एकक;  

  (15) “अपवर्िगत ऋण” से हनम् नहलहित अहभप्रेत ि—ै 

(क) दकसी न् यायालय या अहधकरण द्वारा अहधरोहपत िुमागने का संिाय करने का िाहयत् व; 

(ि) उपेक्षा, न् यूसेंस, कानूनी संहविात् मक या अन् य हवहधक बाध् यता के भंग के हलए नुकसानी का संिाय 

करने का िाहयत् व;  

(ग) तत् समय प्रवृत्त दकसी हवहध के अधीन दकसी व् यह‍ त को भरण-पोषण का संिाय करने का िाहयत् व; 

(घ) दकसी छात्र ऋण के सम् बन् ध में िाहयत् व; और 

(ङ) कोई अन् य ऋण, िो हवहित दकया िाए; 

(16) “फमग” से भागीिारी में कारबार करने वाला व् यह‍ िकों का हनकाय अहभप्रेत ि ैचाि ेवि भारतीय भागीिारी 

अहधहनयम, 1932 (1932 का 9) की धारा 59 के अधीन रहि‍ रीकृत िो अथवा निीं;  

(17) ऋणी का “अव् यवहित कुिुम् ब” से उसका पहत या पत् नी, आहश्रत बालक और आहश्रत माता-हपता अहभप्रेत ि;ै 

(18) “भागीिारी ऋण” से कोई ऐसा ऋण अहभप्रेत िै, हिसके हलए दकसी फमग में सभी भागीिार संयु‍ त रूप से 

िायी िैं;  

(19) “अिगक ऋण” से कोई शोध् य रकम अहभप्रेत ि,ै हिसके अंतगगत दकसी पररहनधागररत राहश के हलए ऋणी द्वारा 

या तो तुरंत या कहतपय भावी समय में दकसी संहविा के अधीन ली गई रकमों के सम् बन् ध में ब् याि या कोई अन् य राहश शाहमल 

ि ैऔर इसके अंतगगत हनम् नहलहित शाहमल निीं िैं— 

(क) कोई अपवर्िगत ऋण; 

(ि) प्रहतभूत सीमा तक कोई ऋण; और 

(ग) कोई ऐसा ऋण, िो नए हसरे से आरम् भ की प्रदक्रया के हलए आवेिन की तारीि से तीन मास पूवग 

उपगत दकया गया ि;ै 

(20) “प्रहतसंिाय योिना” से ऋणी द्वारा धारा 105 के अधीन समाधान वृहत्तक के परामशग से तैयार योिना 

अहभप्रेत ि ैहिसमें उसके ऋणों या कायों के पुनगगठन के हलए लेनिारों की सहमहत के हलए प्र‍ ताव अंतर्वग‍ ि ि;ै 

(21) “समाधान वृहत्तक” से दिवाला समाधान वृहत्तक अहभप्रेत िै, हिसे नए हसरे से आरम् भ की प्रदक्रया या दिवाला 

समाधान प्रदक्रया का संचालन करने के हलए समाधान वृहत्तक हनयु‍ त दकया गया ि;ै 

(22) “अनुन् मोहचत शोधन अक्षम” से कोई शोधन अक्षम अहभप्रेत िै, हिसको धारा 138 के अधीन उन् मोचन आिशे 

प्राप् त निीं हआ ि ै। 

 

 

अध् याय 2 

नए हसरे स ेआरम् भ की प्रदक्रया 

80. आविेन करन े के हलए पात्रता—(1) कोई ऋणी, िो अपने ऋणों का संिाय करने में असमथग ि ैऔर उपधारा (2) में 

हवहनर्िग‍ ि शतों को पूरा करता िै, इस अध् याय के अधीन अपने अिगक ऋणों के उन् मोचन के हलए नए हसरे से प्रारम् भ करने के हलए 

आवेिन करने का पात्र िोगा । 

(2) कोई ऋणी या तो वैयह‍ तक रूप से या दकसी समाधान वृहत्तक के माध् यम से इस अध् याय के अधीन न् यायहनणागयक 

प्राहधकारी को अपने अिगक ऋणों के सम् बन् ध में नए हसरे से आरम् भ के हलए आवेिन कर सकेगा, यदि— 

 (क) ऋणी की समि वार्षगक आय साठ ििार रुपए से अहधक निीं िै; 

 (ि) ऋणी की आह‍ तयों का समि मूल् य बीस ििार रुपए से अहधक निीं िै; 

 (ग) अिगक ऋणों का समि मूल् य पैंतीस ििार रुपए से अहधक निीं िै; 

 (घ) वि अनुन् मोहचत शोधन अक्षम निीं ि;ै 

(ङ) इस बात का हवचार दकए हबना दक वि अहवल् लंगहमत ि ैया निीं, उसके ‍ वाहमत् वाधीन कोई हनवास एकक          

निीं ि;ै  



 46 

(च) उसके हवरुद्ध कोई नए हसरे से आरम् भ की प्रदक्रया, दिवाला समाधान प्रदक्रया या शोधन अक्षमता प्रदक्रया 

अह‍ तत् व में निीं ि;ै और 

(छ) उसके सम् बन् ध में नए हसरे से प्रारम् भ के हलए आवेिन की तारीि से पूवगवती बारि मास में इस अध् याय के 

अधीन पूवग में कोई नए हसरे से आरम् भ का आिशे निीं दकया गया ि ै। 

 81. नए हसरे से आरम् भ का आिशे करन ेके हलए आविेन—(1) िब दकसी ऋणी द्वारा धारा 80 के अधीन कोई आवेिन फाइल 

दकया िाता ि ैतो सभी ऋणों के सम् बन् ध में उ‍ त आवेिन फाइल करने की तारीि को एक अंतररम अहध‍ थगन प्रारम् भ िोगा और वि, 

ऐसे आवेिन के, यथाह‍ थहत, ‍ वीकार या अ‍ वीकार करने की तारीि को हन‍ प्रभावी िो िाएगा । 

 (2) अंतररम अहध‍ थगन की अवहध के िौरान,— 

(i) उसके दकसी भी ऋण के सम् बन् ध में दकसी लंहबत हवहधक कारगवाई या हवहधक कायगवािी को रोक दिया गया 

समझा िाएगा; और 

(ii) कोई लेनिार ऐसे ऋण के सम् बन् ध में कोई हवहधक कारगवाई या हवहधक कायगवाहियां आरम् भ निीं करेगा । 

 (3) धारा 80 के अधीन आवेिन ऐसे प्ररूप और रीहत में िोगा तथा उसके साथ ऐसी फीस संलग् न िोगी, िो हवहित की िाए । 

 (4) उपधारा (3) के अधीन आवेिन में शपथपत्र द्वारा समर्थगत कहतपय हनम् नहलहित सूचना िोगी, अथागत्:— 

(क) उ‍ त आवेिन की तारीि को ऋणी के सभी ऋणों की सूची के साथ प्रत् येक ऋण की रकम से सम् बहन् धत ब् यौरे, 

उन पर संिये ब् याि तथा लेनिारों का नाम, हिनके प्रहत प्रत् येक ऋण िये ि;ै 

(ि) ऋणों पर संिये ब् याि तथा उन पर संहविा में अनुबद्ध िर; 

(ग) दकसी भी ऋण के सम् बन् ध में धृत प्रहतभूहत की सूची; 

(घ) ऋणी और उसके अव् यवहित कुिुम् ब की, आवेिन की तारीि से िो वषग पूवग तक की हवत्तीय िानकारी; 

(ङ) ऋणी के वैयह‍ तक ब् यौरों की ऐसी हवहशह‍ ियां िो हवहित की िाएं; 

(च) आवेिन करने के कारण; 

(छ) दकन् िीं हवहधक कायगवाहियों की हवहशह‍ ियां, िो ऋणी की िानकारी में उसके हवरुद्ध आरम् भ की गई िैं; 

(ि) इस बात की पुह‍ ि दक इस अध् याय के अधीन आवेिन की तारीि से पूवगवती बारि मास में ऋणी के अिगक ऋणों 

के सम् बन् ध में कोई पूवगवती नए हसरे से प्रारम् भ का आिशे निीं दकया गया ि ै। 

 82. समाधान वहृत्तक की हनयहु‍ त—(1) ििां धारा 80 के अधीन ऋणी द्वारा समाधान वृहत्तक के माध् यम से कोई आवेिन 

फाइल दकया िाता ि,ै न् यायहनणागयक प्राहधकारी बोर्ग को आवेिन की प्राहप् त की तारीि से सात दिन के भीतर हनिशे िेगा और बोर्ग से 

इस बात की पुह‍ ि की वांछा करेगा दक ऐसे समाधान वृहत्तक, हिसने ऐसा आवेिन प्र‍ तुत दकया ि,ै के हवरुद्ध कोई अनुशासहनक 

कायगवाहियां निीं िैं । 

 (2) बोर्ग, न् यायहनणागयक प्राहधकारी को हलहित में हनम् नहलहित की संसूचना िगेा— 

(क) या तो समाधान वृहत्तक, हिसने उपधारा (1) के अधीन आवेिन फाइल दकया ि,ै की हनयुह‍ त की पुह‍ ि की; या 

(ि) या समाधान वृहत्तक, हिसने उपधारा (1) के अधीन आवेिन फाइल दकया िै, की हनयुह‍ त को अ‍ वीकार करने 

की और नए हसरे से प्रारम् भ की प्रदक्रया के हलए उपयु‍ त समाधान वृहत्तक को नामहनर्िग‍ ि करने की । 

 (3) ििां ऋणी द्वारा धारा 80 के अधीन ‍ वयं कोई आवेिन फाइल दकया गया ि ैऔर न दक दकसी समाधान वृहत्तक के माध् यम 

से, न् यायहनणागयक प्राहधकारी बोर्ग को आवेिन की प्राहप् त की तारीि से सात दिन के भीतर नए हसरे से आरम् भ की प्रदक्रया के हलए 

समाधान वृहत्तक नामहनर्िग‍ ि करने का हनिशे िगेा । 

(4) बोर्ग उपधारा (3) के अधीन न् यायहनणागयक प्राहधकारी द्वारा िारी हनिशे की प्राहप् त से िस दिन के भीतर समाधान वृहत्तक 

नामहनर्िग‍ ि करेगा । 

(5) न् यायहनणागयक प्राहधकारी, यथाह‍ थहत, उपधारा (2) या उपधारा (4) के अधीन बोर्ग द्वारा हसफाररश दकए गए या 

नामहनर्िग‍ ि समाधान वृहत्तक की हनयुह‍ त का आिशे िगेा । 

(6) उपधारा (5) के अधीन न् यायहनणागयक प्राहधकारी द्वारा हनयु‍ त समाधान वृहत्तक को नए हसरे से प्रारम् भ के हलए आवेिन 

की प्रहत उपलब् ध कराई िाएगी । 



 47 

83. समाधान वहृत्तक द्वारा आविेन की परीक्षा—(1) समाधान वृहत्तक धारा, 80 के अधीन दकए गए आवेिन की, उसकी 

हनयुह‍ त के िस दिन के भीतर, परीक्षा करेगा और न् यायहनणागयक प्राहधकारी को या तो आवेिन को ‍ वीकार करने की या अ‍ वीकार 

करने की हसफाररश की ररपोिग प्र‍ तुत करेगा । 

(2) उपधारा (1) में हनर्िग‍ ि ररपोिग में आवेिन में वर्णगत रकमों के ब् यौरे अंतर्वग‍ ि िोंग,े िो समाधान वृहत्तक के मत में— 

 (क) अिगक ऋण िैं; और 

 (ि) धारा 92 की उपधारा (3) के अधीन उन् मोचन के हलए पात्र िाहयत् व िैं । 

(3) समाधान वृहत्तक आवेिन से संबद्ध ऐसी और सूचना या ‍ प‍ िीकरण की मांग कर सकेगा िैसा ऋणी या ऐसे दकसी अन् य 

व् यह‍ त से अपेहक्षत िो, िो समाधान वृहत्तक के मत में ऐसी सूचना उपलब् ध करा सके । 

(4) यथाह‍ थहत, ऋणी या अन् य व् यह‍ त, उपधारा (3) के अधीन अनुरोध की प्राहप् त के सात दिन के भीतर ऐसी सूचना या 

‍ प‍ िीकरण प्र‍ तुत करेगा । 

(5) समाधान वृहत्तक यि उपधारणा करेगा दक ऋणी आवेिन की तारीि को अपने ऋणों का संिाय करने में असमथग ि,ै 

यदि— 

(क) उसके मत में आवेिन में िी गई सूचना यि उपिर्शगत करती ि ैदक ऋणी अपने ऋणों का संिाय करने में असमथग 

ि ैऔर उसके पास यि हवश् वास करने का कोई कारण निीं ि ैदक िी गई सूचना गलत ि ैया अपूणग िै; और  

(ि) उसके पास यि हवश् वास करने का कारण ि ैदक ऋणी की हवत्तीय ह‍ थहतयों में आवेिन की तारीि से ऋणी को 

उसके ऋणों का संिाय करने में समथग बनाने वाला कोई पररवतगन निीं हआ ि ै। 

 (6) समाधान वृहत्तक आवेिन को अ‍ वीकार कर िगेा यदि उसके मत में— 

  (क) ऋणी धारा 80 के अधीन हवहनर्िग‍ ि शतों को पूरा निीं करता िै; या 

  (ि) ऋणी द्वारा आवेिन में प्रकरित ऋण अर्िगत ऋण निीं िैं; या 

(ग) ऋणी ने आवेिन में या प्र‍ तुत ि‍ तावेिों या सूचना के सम् बन् ध में िानबूझकर कोई हमथ् या व् यपिेशन या लोप 

दकया ि ै। 

 (7) समाधान वृहत्तक, उपधारा (1) के अधीन न् यायहनणागयक प्राहधकारी को ररपोिग में आवेिन को ‍ वीकार करने या अ‍ वीकार 

करने के कारणों को अहभहलहित करेगा तथा ररपोिग की एक प्रहत ऋणी को िगेा । 

 84. न् यायहनणागयक प्राहधकारी द्वारा आविेन को ‍ वीकार या अ‍ वीकार करना—(1) न् यायहनणागयक प्राहधकारी, समाधान 

वृहत्तक द्वारा ररपोिग को प्र‍ तुत करने की तारीि से चौिि दिन के भीतर धारा 81 की उपधारा (1) के अधीन दकए गए आवेिन को या तो 

‍ वीकार करने या अ‍ वीकार करने का आिशे पाररत करेगा । 

 (2) आवेिन को उपधारा (1) के अधीन ‍ वीकार करने के आिशे में उन रकमों का कथन दकया िाएगा, हिन् िें समाधान वृहत्तक 

द्वारा अिगक ऋण के रूप में ‍ वीकार दकया गया ि ैऔर अन् य रकम, िो नए हसरे से प्रारंभ के आिशे के प्रयोिनों के हलए धारा 92 के 

अधीन उन् मोचन के हलए पात्र िैं । 

 (3) उपधारा (1) के अधीन न् यायहनणागयक प्राहधकारी द्वारा पाररत आिशे की प्रहत के साथ आवेिन की प्रहत आवेिन में वर्णगत 

लेनिारों को आिशे पाररत करने के सात दिन के भीतर उपलब् ध कराई िाएगी । 

 85. आवेिन को ‍ वीकार करन ेका प्रभाव—(1) आवेिन को ‍ वीकार करने की तारीि को सभी ऋणों के सम् बन् ध में अहध‍ थगन 

कालावहध प्रारम् भ िो िाएगी । 

 (2) अहध‍ थगन कालावहध के िौरान— 

  (क) ऋण के सम् बन् ध में कोई लंहबत हवहधक कारगवाई या हवहधक कायगवािी रोक िी गई समझी िाएगी; और 

(ि) धारा 86 के उपबन् धों के अधीन रिते हए लेनिार दकसी ऋण के सम् बन् ध में कोई हवहधक कारगवाई या कायगवािी 

आरम् भ निीं करेंगे ।  

 (3) अहध‍ थगन कालावहध के िौरान ऋणी— 

(क) दकसी कम् पनी के हनिशेक के रूप में कायग निीं करेगा या दकसी कम् पनी के संप्रवतगन, गठन या प्रबन् धन में 

प्रत् यक्षत: या अप्रत् यक्षत: भाग निीं लेगा; 

(ि) अपनी दकन् िीं आह‍ तयों का व् ययन निीं करेगा या उनका अन् य संक्रामण निीं करेगा; 

(ग) अपने कारबार भागीिारों को सूहचत करेगा दक वि नए हसरे से प्रारम् भ की प्रदक्रया से गुिर रिा ि;ै 



 48 

(घ) उससे व् यह‍ िक या संयु‍ त रूप से केन् रीय सरकार द्वारा यथा अहधसूहचत मूल् य के हवत्तीय या वाहणहज् यक 

संव् यविार करने से पूवग यि सूहचत करने की अपेक्षा की िाएगी दक वि नए हसरे से प्रारम् भ की प्रदक्रया से गुिर रिा िै; 

(ङ) उस नाम का प्रकिन करेगा हिसके अधीन वि कारबार संव् यविार करता ि,ै यदि वि नाम धारा 84 के अधीन 

‍ वीकृत आवेिन से हभन् न ि;ै 

(च) न् यायहनणागयक प्राहधकारी की अनुज्ञा के हसवाय भारत से बािर यात्रा निीं करेगा । 

 (4) ‍ वीकार करने की तारीि से आरम् भ िोने वाले एक सौ अ‍ सी दिन की कालावहध के समाहप् त पर अहध‍ थगन समाप् त िो 

िाएगा, हसवाय तब िब धारा 91 की उपधारा (2) के अधीन आवेिन को ‍ वीकार करने वाले आिशे का प्रहतसंिरण कर हलया गया िो । 

 86. लनेिार द्वारा आक्षपे और समाधान वहृत्तक द्वारा उनकी परीक्षा—(1) धारा 84 के अधीन न् यायहनणागयक प्राहधकारी के 

आिशे में वर्णगत कोई लेनिार, हिसके प्रहत अिगक ऋण िये िै, धारा 84 के अधीन आिशे की प्राहप् त की तारीि से िस दिन की कालावहध 

के भीतर केवल हनम् नहलहित आधारों पर आक्षेप कर सकेगा, अथागत्:— 

  (क) दकसी ऋण को अिगक ऋण के रूप में समाहव‍ ि करना; या 

  (ि) धारा 84 के अधीन आिशे में हवहनर्िग‍ ि अिगक ऋण के ब् यौरों का गलत िोना । 

 (2) कोई लेनिार उपधारा (1) के अधीन समाधान वृहत्तक को आवेिन के माध् यम से आक्षेप फाइल कर सकेगा । 

 (3) उपधारा (2) के अधीन आवेिन ऐसी सूचना और ि‍ तावेिों द्वारा समर्थगत िोगा िैसा हवहित दकया िाए । 

 (4) समाधान वृहत्तक इस धारा के अधीन दकए गए प्रत् येक आक्षेप पर हवचार करेगा । 

 (5) समाधान वृहत्तक उपधारा (2) के अधीन आक्षेपों की परीक्षा करेगा और आवेिन की तारीि से िस दिन के भीतर या तो 

आक्षेपों को ‍ वीकार करेगा या अ‍ वीकार करेगा । 

 (6) समाधान वृहत्तक दकसी भी ऐसे हवषय की परीक्षा कर सकेगा, िो उसे धारा 92 के प्रयोिनों के हलए अिगक ऋणों की 

अंहतम सूची तैयार करने में सुसंगत प्रतीत िो । 

(7) उपधारा (5) या उपधारा (6) के अधीन परीक्षा के आधार पर समाधान वृहत्तक— 

 (क) उन् मोचन आिशे के प्रयोिन के हलए अिगक ऋणों की संशोहधत सूची तैयार करेगा; 

 (ि) धारा 90 के अधीन हनिशेों के हलए न् यायहनणागयक प्राहधकारी को आवेिन करेगा; या 

 (ग) ऐसे अन् य उपाय करेगा, हिन् िें वि ऋणी के सम् बन् ध में आवश् यक समझता ि ै। 

87. समाधान वहृत्तक के हवहनश् चय के हवरुद्ध आवेिन—(1) ऋणी या लेनिार, िो धारा 86 के अधीन समाधान वृहत्तक द्वारा 

की गई कारगवाई से व् यहथत िो, ऐसे हवहनश् चय के िस दिन के भीतर हनम् नहलहित में से दकसी आधार पर ऐसी कारगवाई को चुनौती ितेे 

हए न् यायहनणागयक प्राहधकारी को आवेिन कर सकेगा, अथागत्:— 

 (क) दक समाधान वृहत्तक ने ऋणी या लेनिार को अभ् यावेिन िनेे का अवसर प्रिान निीं दकया िै; या 

 (ि) दक समाधान वृहत्तक ने हवहनश् चय अन् य पक्षकार के साथ िरुहभसंहध से दकया िै; या 

 (ग) दक समाधान वृहत्तक ने धारा 86 की अपेक्षाओं का अनुपालन निीं दकया ि ै। 

 (2) न् यायहनणागयक प्राहधकारी उपधारा (1) में हवहनर्िग‍ ि आवेिन का ऐसा आवेिन प्राप् त िोने के चौिि दिन के भीतर 

हवहनश् चय करेगा और ऐसा आिशे करेगा िैसा वि उहचत समझे । 

 (3) िब उपधारा (1) के अधीन न् यायहनणागयक प्राहधकारी द्वारा आवेिन को अनुज्ञात दकया गया ि,ै तब वि अपने आिशे को 

बोर्ग को अिेहषत करेगा और बोर्ग समाधान वृहत्तक के हवरुद्ध ऐसी कारगवाई करेगा, िो भाग 4 के अध् याय 6 के अधीन अपेहक्षत िो । 

 88. ऋणी के साधारण कतगव् य—ऋणी— 

(क) समाधान वहृत्तक को अपने कायों के सम् बन् ध में सभी सूचना उपलब् ध कराएगा, बैठकों में भाग लेगा और नए 

हसरे से प्रारम् भ की प्रदक्रया के सम् बन् ध में समाधान वृहत्तक के अनुरोधों का अनुपालन करेगा; 

(ि) युह‍ तयु‍ त रूप से यथासंभव शीघ्र हनम् नहलहित से समाधान वृहत्तक को सूहचत करेगा— 

(i) समाधान वृहत्तक को आपूर्तग की कोई सूचना या ि‍ तावेिों के सम् बन् ध में कोई ताहववक त्रुरि या लोप; 

या 

(ii) आवेिन की तारीि के पश् चात् हवत्तीय पररह‍ थहतयों में कोई पररवतगन, ििां ऐसे पररवतगन का नए 

हसरे से प्रारम् भ की प्रदक्रया पर कोई प्रभाव िो । 



 49 

 89. समाधान वहृत्तक का प्रहत‍ थापन—(1) ििां ऋणी या लेनिार की राय यि िै दक धारा 82 के अधीन हनयु‍ त समाधान 

वृहत्तक को प्रहत‍ थाहपत दकया िाना अपेहक्षत िै, विां वि न् यायहनणागयक प्राहधकारी को ऐसे समाधान वृहत्तक के प्रहत‍ थापन के हलए 

आवेिन कर सकेगा । 

 (2) न् यायहनणागयक प्राहधकारी उपधारा (1) के अधीन आवेिन की प्राहप् त के सात दिन के भीतर समाधान वृहत्तक के 

प्रहत‍ थापन के हलए बोर्ग को हनिशे करेगा । 

 (3) बोर्ग, उपधारा (2) के अधीन न् यायहनणागयक प्राहधकारी से प्रहतहनिशे की प्राहप् त से िस दिन के भीतर, न् यायहनणागयक 

प्राहधकारी को दकसी ऐसे दिवाला वृहत्तक के नाम की हसफाररश करेगा, हिसके हवरुद्ध कोई अनुशासहनक कायगवाहियां लंहबत न िों । 

 (4) न् यायहनणागयक प्राहधकारी नए हसरे से प्रारम् भ की प्रदक्रया के प्रयोिनों के हलए बोर्ग की हसफाररशों के आधार पर िसूरे 

समाधान वृहत्तक की हनयुह‍ त करेगा । 

 (5) न् यायहनणागयक प्राहधकारी उपधारा (4) के अधीन प्रहत‍ थाहपत समाधान वृहत्तक को हनम् नहलहित के सम् बन् ध में हनिशे ि े

सकेगा— 

  (क) नए हसरे से प्रारम् भ की प्रदक्रया के सम् बन् ध में नए समाधान वृहत्तक को सभी सूचना साझा करना; और 

  (ि) नए समाधान वृहत्तक के साथ, िो अपेहक्षत िों सियोग करना । 

 90. हनबधंनों आदि का अनपुालन करन े के हलए हनिशे—(1) समाधान वृहत्तक, न् यायहनणागयक प्राहधकारी को हनम् नहलहित 

दकसी हनिशे िनेे के हलए आवेिन कर सकेगा, अथागत्:— 

  (क) ऋणी द्वारा अननुपालन की िशा में धारा 85 की उपधारा (3) में हनर्िग‍ ि दकन् िीं हनबंधनों का अनुपालन; या 

  (ि) ऋणी द्वारा अननुपालन की िशा में धारा 88 में हनर्िग‍ ि ऋणी के कतगव् यों का अनुपालन । 

 (2) समाधान वृहत्तक, न् यायहनणागयक प्राहधकारी को इस अध् याय के अधीन दकसी अन् य हवषय के सम् बन् ध में ऐसे हनिशे िनेे के 

हलए आवेिन कर सकेगा, हिनके हलए कोई हवहनर्िग‍ ि उपबन् ध निीं दकए गए िैं । 

 91. आविेन ‍ वीकार करन ेके आिशे का प्रहतसिंरण—(1) समाधान वृहत्तक हनम् नहलहित आधारों पर धारा 84 के अधीन दकए 

गए अपने आिशे के प्रहतसंिरण की ईप् सा करते हए न् यायहनणागयक प्राहधकारी को आवेिन प्र‍ तुत कर सकेगा, अथागत्:— 

(क) यदि ऋणी की हवत्तीय पररह‍ थहतयों में दकसी पररवतगन के कारण ऋणी नए हसरे से प्रारम् भ की प्रदक्रया के हलए 

अपात्र िो गया ि;ै या 

(ि) ऋणी द्वारा धारा 85 की उपधारा (3) के अधीन अहधरोहपत हनबधंनों का अननुपालन; या 

(ग) यदि ऋणी ने असद्भावपूवगक कायग दकया ि ैऔर िानबूझकर इस अध् याय के उपबन् धों का अनुपालन करने में 

असफल रिा ि ै। 

 (2) न् यायहनणागयक प्राहधकारी, उपधारा (1) के अधीन आवेिन की प्राहप् त के चौिि दिन के भीतर आिशे द्वारा आवेिन को 

‍ वीकार या अ‍ वीकार कर सकेगा । 

 (3) उपधारा (1) में हनर्िग‍ ि आवेिन को ‍ वीकार करने का आिशे पाररत करने पर अहध‍ थगन और नए हसरे से प्रारम् भ की 

प्रदक्रया हन‍ प्रभावी िो िाएगी । 

 (4) न् यायहनणागयक प्राहधकारी द्वारा धारा 196 में हनर्िग‍ ि रहि‍ िर में दकसी प्रहवह‍ ि को अहभहलहित करने के प्रयोिन के 

हलए इस धारा के अधीन पाररत आिशे की प्रहत बोर्ग को उपलब् ध कराई िाएगी । 

 92. उन् मोचन आिशे—(1) समाधान वृहत्तक, अिगक ऋणों की अंहतम सूची तैयार करेगा और ऐसी सूची को उसे अहध‍ थगन 

कालावहध की समाहप् त से कम से कम सात दिन पूवग न् यायहनणागयक प्राहधकारी को प्र‍ तुत करेगा । 

 (2) न् यायहनणागयक प्राहधकारी अहध‍ थगन अवहध की समाहप् त पर उपधारा (1) के अधीन सूची में वर्णगत अिगक ऋणों से ऋणी 

को उन् मोहचत करने के हलए अहध‍ थगन कालावहध के अंत में एक उन् मोचन आिशे पाररत करेगा । 

 (3) न् यायहनणागयक प्राहधकारी, उपधारा (2) के उपबन् धों पर प्रहतकूल प्रभाव र्ाले हबना ऋणी को हनम् नहलहित िाहयत् वों स े

उन् मोहचत करेगा, अथागत्:— 

  (क) आवेिन की तारीि से उन् मोचन आिशे की तारीि तक अिगक ऋणों के सम् बन् ध में शाह‍ तयों से;  

(ि) अिगक ऋणों के सम् बन् ध में आवेिन की तारीि से उन् मोचन आिेश की तारीि तक ब् याि से, हिसके अन् तगगत 

िांहर्क ब् याि भी ि;ै और 

(ग) आवेिन की तारीि से उन् मोचन आिशे की तारीि तक अिगक ऋणों के सम् बन् ध में दकसी संहविा के अधीन िये 

अन् य राहशयां । 



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 (4) उन् मोचन आिशे, दकसी ऋणी को दकसी ऋण से, हिसे उपधारा (2) में शाहमल निीं दकया गया ि ैऔर दकसी िाहयत् व से, 

हिसे उपधारा (3) के अधीन शाहमल निीं दकया गया िै, उन् मोहचत निीं करेगा । 

 (5) उन् मोचन आिशे को, धारा 196 में हनर्िग‍ ि रहि‍ िर में दकसी प्रहवह‍ ि को अहभहलहित करने के प्रयोिन के हलए बोर्ग को 

अिेहषत दकया िाएगा । 

 (6) उपधारा (2) के अधीन उन् मोचन आिशे, अिगक ऋणों के सम् बन् ध में दकसी िाहयत् व से दकसी अन् य व् यह‍ त को उन् मोहचत 

निीं करेगा । 

 93. आचरण का ‍ तर—समाधान वृहत्तक, अपने कृत् यों और कतगव् यों का हन‍ पािन धारा 208 के अधीन उपबंहधत आचार 

संहिता का अनुपालन करते हए करेगा । 

अध् याय 3 

दिवाला समाधान प्रदक्रया 

 94. ऋणी द्वारा दिवाला समाधान प्रदक्रया आरम् भ करन े के हलए आवेिन—(1) कोई ऋणी, िो व् यहतक्रम करता ि,ै या तो 

वैयह‍ तक रूप से या दकसी समाधान वृहत्तक के माध् यम से न् यायहनणागयक प्राहधकारी को दिवाला समाधान प्रदक्रया आरंभ करने के हलए 

आवेिन प्र‍ तुत करके आवेिन कर सकेगा । 

 (2) ििां ऋणी दकसी फमग में भागीिार ि ैतो ऐसा ऋणी इस अध् याय के अधीन न् यायहनणागयक प्राहधकारी को फमग के सम् बन् ध 

में तब तक आवेिन निीं करेगा िब तक दक फमग में सभी भागीिार या भागीिारों का बहमत संयु‍ त रूप से आवेिन न करे ।  

 (3) उपधारा (1) के अधीन कोई आवेिन केवल उन ऋणों के सम् बन् ध में प्र‍ तुत दकया िाएगा, िो अपवर्िगत ऋण निीं िैं । 

 (4) कोई ऋणी उपधारा (1) के अधीन आवेिन करने का िकिार निीं िोगा यदि वि— 

(क) अनुन् मोहचत शोधन अक्षम ि;ै 

  (ि) नए हसरे से आरम् भ की प्रदक्रया से गुिर रिा िै; 

(ग) दिवाला समाधान प्रदक्रया से गुिर रिा िै; 

(घ) शोधन अक्षमता प्रदक्रया से गुिर रिा ि ै। 

 (5) कोई ऋणी उपधारा (1) के अधीन आवेिन करने का पात्र निीं िोगा यदि इस अध् याय के अधीन कोई आवेिन दकसी ऋणी 

के सम् बन् ध में इस धारा के अधीन आवेिन प्र‍ तुत करने की तारीि से पूवगवती बारि मास की कालावहध के िौरान ‍ वीकार दकया गया   

ि ै। 

 (6) उपधारा (1) में हनर्िग‍ ि आवेिन ऐसे प्ररूप और रीहत में िोगा तथा उसके साथ ऐसी फीस िोगी िो हवहित की िाए । 

 95. लनेिार द्वारा दिवाला समाधान प्रदक्रया आरम् भ करन ेके हलए आवेिन—(1) कोई लेनिार या तो ‍ वयं या अन् य लेनिारों 

के साथ संयु‍ त रूप से या दकसी समाधान वृहत्तक के माध् यम से उस न् यायहनणागयक प्राहधकारी को इस धारा के अधीन दिवाला समाधान 

प्रदक्रया आरम् भ करने के हलए आवेिन प्र‍ तुत कर सकेगा । 

 (2) कोई लेनिार उपधारा (1) के अधीन उसे िये ऋण के सम् बन् ध में हनम् नहलहित के हवरुद्ध दिवाला समाधान प्रदक्रया आरम् भ 

करने के हलए आवेिन कर सकेगा— 

  (क) फमग का कोई एक या अहधक भागीिार; या 

  (ि) फमग । 

 (3) ििां दकसी फमग में एक भागीिार के हवरुद्ध कोई आवेिन दकया गया ि ैउसी फमग में दकसी अन् य भागीिार के हवरुद्ध अन् य 

आवेिन को उस न् यायहनणागयक प्राहधकारी को प्र‍ तुत दकया िाएगा या अंतररत दकया िाएगा हिसके पास पिला वर्णगत आवेिन 

न् यायहनणागयक के हलए लंहबत ि ैऔर ऐसा न् यायहनणागयक प्राहधकारी आवेिनों के अधीन कायगवाहियों के समेकन के हलए ऐसे हनिशे ि े

सकेगा िो वि न् यायोहचत समझे । 

 (4) उपधारा (1) के अधीन आवेिन के साथ हनम् नहलहित के सम् बन् ध में ब् यौरे और ि‍ तावेि िोंगे,— 

(क) दिवाला समाधान प्रदक्रया के हलए आवेिन की तारीि को आवेिन प्र‍ तुत कर रि े लेनिार या लेनिारों को 

ऋणी द्वारा िये ऋण; 

(ि) मांग की सूचना की तामील स ेचौिि दिन की कालावहध के भीतर ऋणी द्वारा संिाय करने में असफलता; और 

(ग) ऐसे व् यहतक्रम या ऋण का प्रहतसंिाय न दकए िाने का सुसंगत साक्ष् य । 

 (5) लेनिार उपधारा (1) के अधीन दकए गए आवेिन की प्रहत भी ऋणी को उपलब् ध कराएगा । 



 51 

 (6) उपधारा (1) में हनर्िग‍ ि आवेिन ऐसे प्ररूप और रीहत में िोगा तथा उसके साथ ऐसी फीस िोगी, िो हवहित की िाए । 

 (7) उपधारा (4) के अधीन प्र‍ तुत दकए िाने के हलए अपेहक्षत ब् यौरे और ि‍ तावेि वे िोंगे िो हवहनर्िग‍ ि दकए िाएं । 

 96. अतंररम अहध‍ थगन—(1) िब धारा 94 या धारा 95 के अधीन कोई आवेिन फाइल दकया िाता ि ैतो— 

(क) अंतररम अहध‍ थगन सभी ऋणों के सम् बन् ध में आवेिन की तारीि को प्रारम् भ िोगा और ऐसे आवेिन को 

‍ वीकार करने की तारीि को हन‍ प्रभावी िो िाएगा; और 

(ि) अंतररम अहध‍ थगन कालावहध के िौरान— 

 (i) दकसी ऋण के सम् बन् ध में लंहबत कोई हवहधक कारगवाई या कायगवािी रोक िी गई समझी िाएगी; और 

 (ii) ऋणी के लेनिार, दकसी ऋण के सम् बन् ध में हवहधक कारगवाई या कायगवाहियां संह‍ थत निीं करेंगे । 

 (2) ििां कोई आवेिन दकसी फमग के सम् बन् ध में दकया गया ि ैविां उपधारा (1) के अधीन अंतररम अहध‍ थगन आवेिन की 

तारीि को फमग के सभी भागीिारी के हवरुद्ध प्रवर्तगत िोगा । 

 (3) उपधारा (1) के उपबन् ध ऐसे संव् यविारों को लागू निीं िोंगे, िो कें रीय सरकार द्वारा हवत्तीय क्षेत्र हवहनयामक के परामशग 

से अहधसूहचत दकए िाएं । 

 97. समाधान वहृत्तक की हनयुह‍ त—(1) यदि आवेिन धारा 94 या धारा 95 के अधीन दकसी समाधान वृहत्तक के माध् यम स े

फाइल दकया िाता ि ैतो न् यायहनणागयक प्राहधकारी आवेिन की तारीि से सात दिन के भीतर बोर्ग को यि पुह‍ ि करने का हनिशे िगेा 

दक समाधान वृहत्तक के हवरुद्ध कोई अनुशासहनक कायगवाहियां लंहबत निीं िैं । 

 (2) बोर्ग उपधारा (1) के अधीन हनिशे की प्राहप् त के सात दिन के भीतर न् यायहनणागयक प्राहधकारी को हलहित में संसूहचत 

करेगा दक— 

  (क) या तो उसने समाधान वृहत्तक की हनयुह‍ त की पुह‍ ि कर िी ि;ै या 

(ि) उसने समाधान वृहत्तक की हनयुह‍ त को अ‍ वीकार कर दिया ि ैऔर उसके ‍ थान पर दिवाला समाधान प्रदक्रया 

के हलए अन् य समाधान वृहत्तक को नामहनर्िग‍ ि दकया ि ै। 

 (3) ििां धारा 94 या धारा 95 के अधीन, यथाह‍ थहत, ऋणी द्वारा या लेनिार द्वारा ‍ वयं और न दक दकसी समाधान वृहत्तक के 

माध् यम से कोई आवेिन फाइल दकया गया िै तो न् यायहनणागयक प्राहधकारी बोर्ग को ऐसा आवेिन फाइल करने की तारीि से सात दिन 

के भीतर दिवाला समाधान प्रदक्रया के हलए समाधान वृहत्तक नामहनर्िग‍ ि करने का हनिशे िेगा । 

 (4) बोर्ग उपधारा (3) के अधीन न् यायहनणागयक प्राहधकारी द्वारा िारी हनिशे को प्राप् त करने के िस दिन के भीतर समाधान 

वृहत्तक को नामहनर्िग‍ ि करेगा । 

 (5) न् यायहनणागयक प्राहधकारी उपधारा (2) के अधीन हसफाररश दकए गए या उपधारा (4) के अधीन बोर्ग द्वारा यथा 

नामहनर्िग‍ ि समाधान वृहत्तक की हनयुह‍ त करेगा । 

 (6) न् यायहनणागयक प्राहधकारी द्वारा उपधारा (5) के अधीन हनयु‍ त समाधान वृहत्तक को दिवाला समाधान प्रदक्रया के हलए 

आवेिन की प्रहत उपलब् ध कराई िाएगी । 

 98. समाधान वहृत्तक का प्रहत‍ थापन—(1) ििां ऋणी या लेनिार की यि राय िै दक धारा 97 के अधीन हनयु‍ त समाधान 

वृहत्तक को प्रहत‍ थाहपत करने की आवश् यकता ि ैतो वि ऐसे समाधान वृहत्तक को प्रहत‍ थाहपत करने के हलए न् यायहनणागयक प्राहधकारी 

को आवेिन कर सकेगा । 

 (2) न् यायहनणागयक प्राहधकारी उपधारा (1) के अधीन आवेिन की प्राहप् त के सात दिन के भीतर बोर्ग को समाधान वृहत्तक को 

प्रहत‍ थाहपत करने के  हलए हनिशे करेगा । 

 (3) बोर्ग उपधारा (2) के अधीन न् यायहनणागयक प्राहधकारी से हनिशे की प्राहप् त के िस दिन के भीतर समाधान वृहत्तक हिसके 

हवरुद्ध कोई अनुशासहनक कायगवाहियां लंहबत निीं िैं, के नाम की न् यायहनणागयक प्राहधकारी को हसफाररश करेगा । 

 (4) उपधारा (1) में अतंर्वग‍ ि उपबन् धों पर प्रहतकूल प्रभाव र्ाले हबना लेनिार, ििां लेनिारों की बैठक में समाधान वृहत्तक को 

प्रहत‍ थाहपत करने का हवहनश् चय दकया िाता िै विां लेनिार प्रहतसंिाय योिना के कायागन् वयन के हलए समाधान वृहत्तक को नए 

समाधान वृहत्तक से प्रहत‍ थाहपत करने के हलए न् यायहनणागयक प्राहधकारी को आवेिन कर सकें गे । 

 (5) ििां न् यायहनणागयक प्राहधकारी उपधारा (1) या उपधारा (4) के अधीन दकसी आवेिन को ‍ वीकार करता िै विां वि बोर्ग 

को यि पुह‍ ि करने का हनिशे िेगा दक प्र‍ ताहवत समाधान वृहत्तक के हवरुद्ध कोई अनुशासहनक कायगवाहियां लंहबत निीं िैं । 

 (6) बोर्ग, उपधारा (5) के अधीन हनिशे की प्राहप् त के िस दिन के भीतर हनम् नहलहित की संसूचना िगेा दक वि— 

  (क) या तो नामहनर्िग‍ ि समाधान वृहत्तक की हनयुह‍ त की पुह‍ ि करता ि;ै या 



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(ि) नामहनर्िग‍ ि समाधान वृहत्तक की हनयुह‍ त को अ‍ वीकार करता ि ैऔर नए समाधान वृहत्तक की हसफाररश 

करता ि ै। 

 (7) उपधारा (3) या उपधारा (6) के अधीन बोर्ग की संसूचना के आधार पर न् यायहनणागयक प्राहधकारी नए समाधान वृहत्तक 

की हनयुह‍ त का आिशे पाररत करेगा । 

 (8) न् यायहनणागयक प्राहधकारी उपधारा (7) के अधीन प्रहत‍ थाहपत समाधान वृहत्तक को हनिशे ि ेसकेगा दक वि— 

  (क) दिवाला समाधान प्रदक्रया के सम् बन् ध में नए समाधान वृहत्तक को सभी सूचनाएं साझा करे; 

  (ि) नए समाधान वृहत्तक के साथ ऐसे मामलों में, िो अपेहक्षत िों, सियोग करे । 

 99. समाधान वहृत्तक द्वारा ररपोिग प्र‍ ततु करना—(1) समाधान वृहत्तक, यथाह‍ थहत, धारा 94 या धारा 95 में हनर्िग‍ ि आवेिन 

की अपनी हनयहु‍ त के िस दिन के भीतर परीक्षा करेगा और न् यायहनणागयक प्राहधकारी को या तो आवेिन को ‍ वीकार करने की या 

अ‍ वीकार करने की ररपोिग प्र‍ तुत करेगा । 

 (2) ििां धारा 95 के अधीन आविेन फाइल दकया गया ि ैविां समाधान वृहत्तक ऋणी को लेनिार द्वारा असंित्त के रूप में 

िावा दकए गए दकसी ऋण के प्रहतसंिाय को साहवत करने के हलए ऋणी से हनम् नहलहित को प्र‍ तुत करने की अपेक्षा कर सकेगा— 

  (क) ऋणी के बैंक िाते से असंित्त रकम के इलै‍ रोहनकी अंतरण का साक्ष् य; 

  (ि) ऋणी द्वारा िारी चैक के नकिीकरण का साक्ष् य; या 

  (ग) शोध् यों की प्राहप् त को ‍ वीकार करने की लेनिार द्वारा ि‍ ताक्षररत अहभ‍ वीकृहत । 

 (3) ििां ऋण, हिनके हलए लेनिार द्वारा आवेिन फाइल दकया गया िै, सूचना उपयोहगता के पास रहि‍ रीकृत ि,ै विां ऋणी 

ऐसे ऋण की वैधता का हवरोध करने के हलए पात्र निीं िोगा । 

 (4) दकसी आवेिन की िांच करने के प्रयोिनों के हलए समाधान वृहत्तक आवेिन से संबद्ध ऐसी और सूचना या ‍ प‍ िीकरण की 

वांछा कर सकेगा िैसा ऋणी या लेनिार या दकसी अन् य व् यह‍ त से अपेहक्षत िो, िो समाधान वृहत्तक के मत में ऐसी सूचना को उपलब् ध 

करा सके । 

 (5) व् यह‍ त, हिससे सूचना या ‍ प‍ िीकरण की उपधारा (4) के अधीन वांछा की गई ि,ै ऐसी सूचना या ‍ प‍ िीकरण को 

अनुरोध की प्राहप् त के सात दिन के भीतर प्र‍ तुत करेगा । 

 (6) समाधान वृहत्तक आवेिन की परीक्षा करेगा और यि अहभहनहश् चत करेगा दक— 

  (क) आवेिन धारा 94 या धारा 95 में िी गई अपेक्षाओं को पूरा करता िै; 

(ि) आवेिक ने उपधारा (4) के अधीन समाधान वृहत्तक द्वारा मांगी गई सूचना उपलब् ध कराई ि ैऔर ‍ प‍ िीकरण 

ि ेदिया िैं । 

 (7) उपधारा (6) के अधीन आवेिन की परीक्षा करने के पश् चात् वि अपनी ररपोिग में आवेिन को ‍ वीकार या अ‍ वीकार करने 

की हसफाररश कर सकेगा । 

 (8) ििां समाधान वृहत्तक यि पाता ि ैदक ऋणी अध् याय 2 के अधीन नए हसरे से प्ररम् भ के हलए पात्र ि,ै विां समाधान वृहत्तक 

यि हसफाररश करते हए एक ररपोिग प्र‍ तुत करेगा दक धारा 94 के अधीन ऋणी के आवेिन को न् यायहनणागयक प्राहधकारी द्वारा धारा 81 

के अधीन आवेिन माना िाए । 

 (9) समाधान वृहत्तक उपधारा (7) के अधीन ररपोिग में आवेिन को ‍ वीकार या अ‍ वीकार करने की हसफाररश करने के कारणों 

को अहभहलहित करेगा । 

 (10) समाधान वृहत्तक उपधारा (7) के अधीन ररपोिग की प्रहत, यथाह‍ थहत, ऋणी या लेनिार को िेगा । 

 100. आवेिन को ‍ वीकार करना या अ‍ वीकार करना—(1) न् यायहनणागयक प्राहधकारी धारा 99 के अधीन ररपोिग प्र‍ तुत करने 

की तारीि से चौिि दिन के भीतर उ‍ त ररपोिग के आधार पर धारा 94 या धारा 95 में हनर्िग‍ ि आवेिन को या तो ‍ वीकार करने या 

अ‍ वीकार करने का आिशे पाररत करेगा । 

 (2) ििां न् यायहनणागयक प्राहधकारी उपधारा (1) के अधीन दकसी आवेिन को ‍ वीकार करता ि ैतो वि समाधान वृहत्तक के 

अनुरोध पर ऋणी और लेनिार के बीच बातचीत संचाहलत करने के प्रयोिन के हलए और कोई प्रहतसंिाय योिना बनाने के हलए अनुिशे 

िारी कर सकेगा । 

 (3) न् यायहनणागयक प्राहधकारी उपधारा (1) के अधीन पाररत आिशे की प्रहत समाधान वृहत्तक की ररपोिग के साथ और, 

यथाह‍ थहत, धारा 94 या धारा 95 में हनर्िग‍ ि आवेिन को उ‍ त आिशे की तारीि से सात दिन के भीतर लेनिारों को उपलब् ध कराएगा । 



 53 

 (4) यदि, यथाह‍ थहत, धारा 94 या धारा 95 में  हनर्िग‍ ि आवेिन को न् यायहनणागयक प्राहधकारी द्वारा समाधान वृहत्तक द्वारा 

प्र‍ तुत ऐसी ररपोिग के आधार पर अ‍ वीकार कर दिया िाता ि ैदक आवेिन लेनिारों या समाधान वृहत्तक को कपिवंहचत करने के आशय 

से दकया गया था, तो उपधारा (1) के अधीन आिशे में यि अहभहलहित दकया िाएगा दक लेनिार अध् याय 4 के अधीन शोधन अक्षमता 

के आिशे के हलए फाइल करने के हलए पात्र िैं । 

 101. अहध‍ थगन—(1) िब धारा 100 के अधीन आवेिन को ‍ वीकार दकया िाता ि ै तब सभी ऋणों के सम् बन् ध में एक 

अहध‍ थगन आरंभ िोगा और वि उस आवेिन को ‍ वीकार करने की तारीि से आरम् भ िोने वाली एक सौ अ‍ सी दिन की कालावहध की 

समाहप् त पर या उस तारीि को हिसे न् यायहनणागयक प्राहधकारी धारा 114 के अधीन प्रहतसंिाय योिना के हलए आिशे पाररत करता िै, 

इनमें से िो भी पूवगतर िो हन‍ प्रभावी िो िाएगा । 

 (2) अहध‍ थगन की अवहध के िौरान— 

(क) दकसी ऋण के सम् बन् ध में लंहबत हवहधक कारगवाई या कायगवािी को रोक दिया गया समझा िाएगा; 

(ि) लेनिार दकसी ऋण के सम् बन् ध में कोई हवहधक कारगवाई या कायगवाहियां आरम् भ निीं करेंगे; और 

(ग) ऋणी अपनी आह‍ तयों या अपने हवहधक अहधकारों या उनमें फायिाप्रि हितों का अंतरण, अन् य संक्रामण, 

हवल् लंगम या व् ययन निीं करेगा । 

 (3) ििां दकसी फमग के सम् बन् ध में धारा 96 के अधीन आवेिन को ‍ वीकार करने का कोई आिेश दकया गया ि ै विां      

उपधारा (1) के अधीन अहध‍ थगन फमग के सभी भागीिारों के हवरुद्ध प्रवर्तगत िोगा । 

 (4) इस धारा के उपबन् ध ऐसे संव् यविारों को लागू निीं िोंगे, हिन् िें कें रीय सरकार हवत्तीय क्षेत्र हवहनयामक के साथ परामशग 

से अहधसूहचत करे । 

 102. लोक सचूना और लनेिारों स ेिावे—(1) न् यायहनणागयक प्राहधकारी धारा 100 के अधीन आिशे पाररत करने के सात दिन 

के भीतर एक लोक सूचना िारी करेगा, हिसके द्वारा सभी लेनिारों से इस प्रकार सूचना िारी करने के इ‍ कीस दिन के भीतर िावे 

आमंहत्रत दकए िाएंगे । 

 (2) उपधारा (1) के अधीन सूचना में हनम् नहलहित सहम् महलत िोंगे— 

(क) आवेिन को ‍ वीकार करने के आिशे के ब् यौरे; 

(ि) उस समाधान वृहत्तक की हवहशह‍ ियां, हिसके पास िावे रहि‍ रीकृत दकए िाने िैं; और 

(ग) िावे प्र‍ तुत करने की अंहतम तारीि । 

 (3) सूचना को— 

(क) कम से कम एक अंिेिी और एक ‍ थानीय भाषा में उस राज् य में, ििां ऋणी हनवास करता िै, पररचाहलत 

समाचारपत्र में प्रकाहशत दकया िाएगा; 

(ि) न् यायहनणागयक प्राहधकारी के पररसर में च‍ पा दकया िाएगा; और 

(ग) न् यायहनणागयक प्राहधकारी की वेबसाइि पर रिा िाएगा । 

 103. लनेिारों द्वारा िावों का रहि‍ रीकरण—(1) लेनिार िावों के ब् यौरों को समाधान वहृत्तक के पास इलै‍ रोहनकी संचार या 

कूररयर, ‍ पीर् पो‍ ि या रहि‍ रीकृत पत्र के माध् यम से भेिकर रहि‍ रीकृत करेगा । 

 (2) उपधारा (1) में हनर्िग‍ ि िावों के अहतरर‍ त लेनिार समाधान वृहत्तक को वैयह‍ तक सूचना और ऐसी हवहशह‍ ियां, िो 

हवहित की िाएं, उपलब् ध कराएगा । 

 104. लनेिारों की सचूी तयैार करना—(1) समाधान वृहत्तक हनम् नहलहित के आधार पर लेनिारों की सूची तैयार करेगा— 

  (क) यथाह‍ थहत, धारा 94 या धारा 95 के अधीन ऋणी द्वारा फाइल दकए गए आवेिन में प्रकरित सूचना; 

  (ि) धारा 102 के अधीन समाधान वृहत्तक द्वारा प्राप् त दकए गए िावे ।  

 (2) समाधान वृहत्तक उपधारा (1) में वर्णगत सूची को सूचना की तारीि से तीस दिन के भीतर तौयार करेगा ।  

 105. प्रहतसिंाय योिना—(1) ऋणी समाधान वृहत्तक के परामशग से उसके ऋणों या मामलों के पुनगगठन के हलए लेनिारों को 

एक प्र‍ ताव अंतर्वग‍ ि करते हए एक प्रहतसंिाय योिना तैयार करेगा । 

 (2) प्रहतसंिाय योिना समाधान वहृत्तक को हनम् नहलहित के हलए प्राहधकृत या हनम् नहलहित की उससे अपेक्षा कर सकेगी— 

  (क) ऋणी का कारबार या व् यापार उसकी ओर से या उसके नाम से करना; या 



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  (ि) ऋणी की आह‍ तयों के प्रापण; या 

  (ग) ऋणी की दकन् िीं हनहधयों का प्रशासन या हनपिान । 

 (3) प्रहतसंिाय योिना में हनम् नहलहित शाहमल िोंगे, अथागत्:— 

(क) ऐसी प्रहतसंिाय योिना को तयैार करने का न् यायोहचत् य तथा उस योिना के कारण, हिन पर लेनिार सिमत 

िो सकें गे; 

(ि) समाधान वृहत्तक को फीस का संिाय करने का उपबन् ध; 

(ग) ऐसे अन् य हवषय, िो हवहनर्िग‍ ि दकए िाएं । 

 106. प्रहतसिंाय योिना पर समाधान वहृत्तक की ररपोिग—(1) समाधान वृहत्तक धारा 105 के अधीन प्रहतसंिाय योिना को, 

ऐसी योिना पर अपनी ररपोिग के साथ धारा 102 के अधीन िावा प्र‍ तुत करने की अंहतम तारीि से इ‍ कीस दिन की अवहध के भीतर 

न् यायहनणागयक प्राहधकारी को प्र‍ तुत करेगा । 

 (2) उपधारा (1) में हनर्िग‍ ि ररपोिग में हनम् नहलहित शाहमल िोंगे— 

  (क) प्रहतसंिाय योिना तत् समय प्रवृत्त दकसी हवहध के उपबन् धों के अनुपालन में ि;ै 

  (ि) प्रहतसंिाय योिना को अनमुोदित दकए िाने और कायागहन् वत दकए िाने की युह‍ तयु‍ त संभावना िै; और 

  (ग) प्रहतसंिाय योिना पर हवचार करने के हलए लेनिारों की एक बैठक बुलाए िाने की आवश् यकता ि ै: 

 परन् तु ििां समाधान वृहत्तक यि हसफाररश करता िै दक लेनिारों की बैठक बुलाए िाने की आवश् यकता निीं िै तो उसके 

कारणों को बताया िाएगा । 

 (3) यदि उसका यि मत ि ैदक लेनिारों की बैठक बुलाई िानी चाहिए तो उपधारा (2) में हनर्िग‍ ि ररपोिग, उस तारीि और 

समय तथा ‍ थान को भी हवहनर्िग‍ ि करेगी, िब बैठक आयोहित की िानी चाहिए । 

 (4) उपधारा (3) के प्रयोिनों के हलए— 

(क) वि तारीि, हिसको बैठक आयोहित की िाएगी, उपधारा (1) के अधीन ररपोिग प्र‍ तुत करने की तारीि से 

चौिि दिन से अन् यून और अट्ठाईस दिन से अहधक निीं िोगी; 

(ि) समाधान वृहत्तक लेनिारों की बैठक की तारीि और ‍ थान हनयत करते समय लेनिारों की सुहवधा का भी 

ध् यान रिेगा । 

 107. लनेिारों की बैठक बलुाना—(1) समाधान वृहत्तक लेनिारों की बैठक बुलाने के हलए ऐसी बैठक के हलए हनयत तारीि स े

कम से कम चौिि दिन पूवग सूचना िारी करेगा । 

 (2) समाधान वृहत्तक धारा 104 के अधीन तैयार की गई लेनिारों की सूची को बैठक की सूचना भेिेगा । 

 (3) उपधारा (1) के अधीन भेिी गई सूचना में न् यायहनणागयक प्राहधकारी के पते का कथन िोगा, हिसे प्रहतसंिाय योिना और 

प्रहतसंिाय योिना पर समाधान वहृत्तक की ररपोिग प्र‍ तुत की गई ि ैऔर उसके साथ हनम् नहलहित संलग् न िोंगे— 

  (क) प्रहतसंिाय योिना की प्रहत; 

  (ि) ऋणी के कायों के हववरण की प्रहत; 

  (ग) समाधान वृहत्तक की उ‍ त ररपोिग की प्रहत; और 

  (घ) प्रो‍ सी मतिान के रूप । 

 (4) प्रो‍ सी मतिान, हिसके अंतगगत इलै‍ रोहनकी प्रो‍ सी मतिान भी ि,ै ऐसे ‍ थान पर और ऐसी रीहत तथा रूप में िोगा िैसा 

हवहनर्िग‍ ि दकया िाए । 

 108. लनेिारों की बठैक का सचंालन—(1) लेनिारों की बैठक इस धारा और धारा 109, धारा 110 और धारा 111 के 

उपबन् धों के अनुसार संचाहलत की िाएगी । 

 (2) लेनिारों की बैठक में लेनिार प्रहतसंिाय योिना को अनमुोदित करने, उपांतररत करने या अ‍ वीकार करने का हवहनश् चय 

कर सकें गे । 

 (3) समाधान वृहत्तक यि सुहनहश् चत करेगा दक यदि लेनिारों द्वारा उपांतरणों का सुझाव दिया िाता ि ैतो प्रत् येक उपांतरण के 

हलए ऋणी की सिमहत अहभप्राप् त की िाएगी । 



 55 

 (4) समाधान वृहत्तक पयागप् त कारण से लेनिारों की बैठक को दकसी एक समय सात से अनहधक दिन की कालावहध के हलए 

‍ थहगत कर सकेगा । 

 109. लनेिारों की बैठक में मतिान के अहधकार—(1) कोई लेनिार, उसे समनुिहेशत मतिान शेयर के अनुसार प्रहतसंिाय 

योिना के सम् बन् ध में लेनिारों की प्रत् येक बैठक में मत िनेे का, िकिार िोगा । 

 (2) समाधान वहृत्तक, बोर्ग द्वारा हवहनर्िग‍ ि रीहत में प्रत् येक लेनिार को समनुिहेशत दकए िाने वाले मतिान शेयर का 

अवधारण करेगा । 

 (3) कोई लेनिार दकसी अपररहनधागररत रकम के हलए दकसी ऋण के सम् बन् ध में मत िनेे का िकिार निीं िोगा । 

 (4) कोई लेनिार लेनिारों की बैठक में मत िनेे का िकिार निीं िोगा, यदि वि— 

(क) धारा 104 के अधीन लेनिारों की सूची में वर्णगत लेनिार निीं िै; या 

(ि) ऋणी का सियु‍ त ि ै। 

110. प्रहतसिंाय योिना के सम् बन् ध में प्रहतभतू लनेिारों के अहधकार—(1) प्रहतभूत लेनिार लेनिारों की बैठक में भाग लेने 

और मत िनेे के िकिार िोंगे । 

(2) कोई प्रहतभूत लेनिार, िो प्रहतसंिाय योिना के सम् बन् ध में लेनिारों की बैठक में भाग ले रिा ि ैऔर मत ि े रिा िै, 

प्रहतसंिाय योिना के हनबंधनों के अनुसार प्रहतसंिाय योिना की अवहध के िौरान प्रहतभूहत को प्रवृत्त करने के अपने अहधकार को 

समपहृत कर िगेा । 

(3) ििां कोई प्रहतभूत लेनिार अपने प्रहतभूहत के अहधकार को समपहृत निीं करता ि ै विां वि लेनिारों की बैठक में 

हनम् नहलहित का कथन करते हए समाधान वृहत्तक को एक शपथ-पत्र प्र‍ तुत करेगा— 

 (क) प्रहतभूत लेनिार द्वारा मत िनेे का अहधकार केवल ऋण के अप्रहतभूत भाग के सम् बन् ध में ि;ै और 

 (ि) ऋण के अप्रहतभूत भाग का प्रा‍ कहलत मूल् य । 

 (4) ििां कोई प्रहतभूत लेनिार, प्रहतसंिाय योिना में मतिान करने में उपधारा (3) के अधीन शपथ-पत्र प्र‍ तुत करके भाग 

लेता ि,ै ऋण के प्रहतभूत और अप्रहतभूत भागों को पृथक् ऋणों के रूप में माना िाएगा । 

 (5) प्रहतभूत लेनिार की सिमहत अहभप्राप् त की िाएगी, यदि वि प्रहतसंिाय योिना के हलए मतिान करने में भाग निीं लेता 

ि ैदकन् तु प्रहतसंिाय योिना का कोई उपबन् ध उसके प्रहतभूहत को प्रवर्तगत करने के अहधकार को प्रभाहवत करते िैं । 

 ‍ प‍ िीकरण—इस धारा के प्रयोिनों के हलए “प्रहतसंिाय योिना की अवहध” से धारा 114 के अधीन पाररत आिशे की तारीि 

से उस तारीि तक की कालावहध अहभप्रेत िै, हिसको समाधान वृहत्तक द्वारा, यथाह‍ थहत, धारा 117 के अधीन सूचना िी िाती ि ैया 

समाधान वृहत्तक द्वारा धारा 118 के अधीन ररपोिग प्र‍ तुत की िाती ि ै। 

 111. लनेिारों द्वारा प्रहतसिंाय योिना का अनमुोिन—प्रहतसंिाय योिना या प्रहतसंिाय योिना में दकसी उपांतरण का 

अनुमोिन लेनिारों की बैठक में उपह‍ थत या प्रो‍ सी के माध् यम से उपह‍ थत और दकसी संकल् प पर मत िनेे वाले लेनिारों के मूल् य में 

तीन-चौथाई से अहधक बहमत द्वारा दकया िाएगा । 
 112. प्रहतसिंाय योिना के सम् बन् ध म ेलनेिारों की बैठक की ररपोिग—(1) समाधान वृहत्तक प्रहतसंिाय योिना के सम् बन् ध में 

लेनिारों की बैठक की ररपोिग तैयार करेगा । 

 (2) उपधारा (1) के अधीन ररपोिग में हनम् नहलहित अतंर्वग‍ ि िोगा— 

(क) ‍ या प्रहतसंिाय योिना को अनुमोदित दकया गया था या अ‍ वीकृत दकया गया था और यदि अनमुोदित दकया 

गया था तो उपांतरणों की सूची, यदि कोई िो; 

(ि) समाधान, हिनका बैठक में प्र‍ ताव दकया गया और ऐसे समाधानों पर हवहनश् चय; 

(ग) लेनिारों की सूची, िो बैठक में उपह‍ थत थे या हिनका प्रहतहनहधत् व दकया गया और लेनिारों की सभी बैठकों 

में प्रत् येक लेनिार के मतिान का अहभलेि; और 

(घ) ऐसी सूचना, हिसे समाधान वहृत्तक न् यायहनणागयक प्राहधकारी की िानकारी में  लाने के हलए उपयु‍ त समझे । 

 113. लनेिारों की बठैक में दकए गए हवहनश् चयों की सचूना—समाधान वृहत्तक, धारा 99 के अधीन तैयार की गई लेनिारों की 

बैठक की ररपोिग की प्रहत हनम् नहलहित को उपलब् ध कराएगा— 

  (क) ऋणी; 

  (ि) लेनिार, हिसके अंतगगत वे लेनिार भी िैं िो बैठक में उपह‍ थत निीं थे; और 



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  (ग) न् यायहनणागयक प्राहधकारी । 

 114. प्रहतसिंाय योिना पर न् यायहनणागयक प्राहधकारी का आिशे—(1) न् यायहनणागयक प्राहधकारी धारा 112 के अधीन 

समाधान वृहत्तक द्वारा प्र‍ तुत लेनिारों की बैठक की ररपोिग के आधार पर दकसी आिशे द्वारा प्रहतसंिाय योिना को अनुमोदित या 

नामंिूर करेगा: 

 परन् तु ििां लेनिारों की बैठक निीं बुलाई गई िै, विां न् यायहनणागयक प्राहधकारी समाधान वृहत्तक द्वारा धारा 106 के अधीन 

तैयार की गई ररपोिग के आधार पर आिशे पाररत करेगा । 

 (2) प्रहतसंिाय योिना का अनुमोिन करने वाला न् यायहनणागयक प्राहधकारी का आिशे प्रहतसंिाय योिना को कायागहन् वत करने 

के हलए हनिशे का भी उपबन् ध कर सकेगा । 

 (3) ििां न् यायहनणागयक प्राहधकारी का यि मत ि ैदक प्रहतसंिाय योिना में उपांतरण अपेहक्षत ि ैतो वि समाधान वृहत्तक को 

प्रहतसंिाय योिना पर पुन: हवचार करने के हलए लेनिारों की बैठक पुन: बुलाने का हनिशे ि ेसकेगा । 

 115. प्रहतसिंाय योिना पर न् यायहनणागयक प्राहधकारी के आिशे का प्रभाव—(1) ििां न् यायहनणागयक प्राहधकारी द्वारा 114 के 

अधीन प्रहतसंिाय योिना का अनमुोिन दकया गया ि ैविां ऐसी प्रहतसंिाय योिना— 

  (क) ऐसे प्रभावी िोगी मानो वि बैठक में ऋणी द्वारा प्र‍ ताहवत थी; और 

  (ि) उसमें वर्णगत लेनिारों और ऋणी पर आबद्धकर िोगी । 

 (2) ििां न् यायहनणागयक प्राहधकारी धारा 114 के अधीन प्रहतसंिाय योिना को नामंिूर करता ि ैविां ऋणी और लेनिार 

िोनों अध् याय 4 के अधीन शोधन अक्षमता का आवेिन फाइल करने के िकिार िोंगे । 

 (3) उपधारा (2) के अधीन न् यायहनणागयक प्राहधकारी द्वारा पाररत आिशे की प्रहत बोर्ग को, धारा 196 में हनर्िग‍ ि रहि‍ िर में 

प्रहवह‍ ि अहभहलहित करने के प्रयोिन के हलए उपलब् ध कराई िाएगी । 

 116. प्रहतसिंाय योिना का कायागन् वयन और पयगवके्षण—(1) धारा 97 या धारा 98 के अधीन हनयु‍ त समाधान वृहत्तक, 

प्रहतसंिाय योिना के कायागन् वयन का पयगवेक्षण करेगा । 

 (2) समाधान वृहत्तक न् यायहनणागयक प्राहधकारी को प्रहतसंिाय योिना के अधीन उद्भूत दकसी हवहश‍ ि मामले के सम् बन् ध में 

हनिशेों के हलए, यदि कोई िों, आवेिन कर सकेगा । 

 (3) न् यायहनणागयक प्राहधकारी, उपधारा (2) के अधीन दकसी आवेिन के आधार पर समाधान वृहत्तक को हनिशे िारी कर 

सकेगा । 

 117. प्रहतसिंाय योिना का पूरा िोना—(1) समाधान वृहत्तक, प्रहतसंिाय योिना के पूरा िोने से चौिि दिन के भीतर उन 

व् यह‍ तयों को, िो धारा 115 के अधीन प्रहतसंिाय योिना से आबद्ध िैं तथा न् यायहनणागयक प्राहधकारी को हनम् नहलहित ि‍ तावेि 

अिेहषत करेगा, अथागत्:— 

(क) एक सूचना दक प्रहतसंिाय योिना को पूणगतया कायागहन् वत दकया गया ि;ै और 

(ि) समाधान वृहत्तक द्वारा प्रहतसिंाय योिना के अनुसरण में सभी प्राहप् तयां और दकए गए संिाय और लेनिारों की 

बैठक में अनुमोदित प्रहतसंिाय योिना के साथ तुलना में ऐसी योिना के कायागन् वयन की सीमा का संहक्षप् त हववरण ितेे हए 

ररपोिग की एक प्रहत । 

 (2) समाधान वृहत्तक, न् यायहनणागयक प्राहधकारी को उपधारा (1) में वर्णगत कालावहध का सात दिन से अनहधक की ऐसी और 

कालावहध तक हव‍ तार करने के हलए आवेिन कर सकेगा । 

 118. प्रहतसिंाय योिना का समयपूवग समाप् त िोना—(1) प्रहतसंिाय योिना समयपूवग समाप् त िो गई मानी िाएगी यदि 

उसको प्रहतसंिाय योिना में यथावर्णगत कालावहध के भीतर उससे आबद्ध सभी व् यह‍ तयों के सम् बन् ध में पूणगतया कायागहन् वत निीं दकया 

गया ि ै। 

 (2) ििां इस धारा के अधीन कोई प्रहतसंिाय योिना समयपूवग समाप् त िो िाती ि ै तो समाधान वृहत्तक न् यायहनणागयक 

प्राहधकारी को एक ररपोिग प्र‍ तुत करेगा हिसमें हनम् नहलहित कथन िोगा— 

(क) प्रहतसंिाय योिना के अनुसरण में प्राहप् तयां और दकए गए संिाय; 

(ि) प्रहतसंिाय योिना की समयपवूग सामहप् त के कारण; और 

(ग) उन लेनिारों के ब् यौरे, हिनके िावों को पूणगतया चुकाया निीं गया ि ै। 

 (3) न् यायहनणागयक प्राहधकारी, समाधान वृहत्तक द्वारा उपधारा (2) के अधीन प्र‍ तुत इस ररपोिग के आधार पर दक प्रहतसंिाय 

योिना को पूणगतया कायागहन् वत निीं दकया गया ि,ै एक आिशे पाररत करेगा । 



 57 

 (4) ऋणी या लेनिार, हिसके प्रहतसंिाय योिना के अधीन िावों को पूणगतया चुकाया निीं गया ि,ै अध् याय 4 के अधीन शोधन 

अक्षमता आिशे के हलए आवेिन करने का िकिार िोगा । 

 (5) न् यायहनणागयक प्राहधकारी धारा 115 के अधीन प्रहतसंिाय योिना से आबद्ध व् यह‍ तयों को हनम् नहलहित की प्रहत अिेहषत 

करेगा— 

(क) उपधारा (2) के अधीन न् यायहनणागयक प्राहधकारी को समाधान वृहत्तक द्वारा प्र‍ तुत ररपोिग की प्रहत; और 

(ि) उपधारा (4) के अधीन न् यायहनणागयक प्राहधकारी द्वारा पाररत आिशे । 

 (6) न् यायहनणागयक प्राहधकारी, उपधारा (4) के अधीन पाररत आिशे की प्रहत, बोर्ग को धारा 196 में हनर्िग‍ ि रहि‍ िर में 

प्रहवह‍ ियों को अहभहलहित करने के प्रयोिन के हलए अिेहषत करेगा । 

 119. उन् मोचन आिशे—(1) समाधान वृहत्तक प्रहतसंिाय योिना के आधार पर न् यायहनणागयक प्राहधकारी को प्रहतसंिाय 

योिना में वर्णगत ऋणों के सम् बन् ध में उन् मोचन आिशे के हलए आवेिन करेगा और न् यायहनणागयक प्राहधकारी ऐसा उन् मोचन आिशे 

पाररत कर सकेगा । 

 (2) प्रहतसंिाय योिना में हनम् नहलहित के हलए उपबन् ध िोगा— 

  (क) शीघ्र उन् मोचन; या  

  (ि) प्रहतसंिाय योिना के पूणग कायागन् वयन पर उन् मोचन । 

 (3) उन् मोचन आिशे, बोर्ग को, धारा 196 में हनर्िग‍ ि रहि‍ िर में प्रहवह‍ ियों को अहभहलहित करने के प्रयोिन के हलए अिेहषत 

दकया िाएगा । 

 (4) उपधारा (3) के अधीन उन् मोचन आिशे दकसी अन् य व् यह‍ त को उसके ऋण के सम् बन् ध में दकसी िाहयत् व से उन् मोहचत निीं 

करेगा । 

 120. आचरण का ‍ तर—समाधान वृहत्तक, अपने कृत् यों और कतगव् यों का पालन धारा 208 के अधीन उपबंहधत आचार संहिता 

का अनुपालन करते हए करेगा । 

अध् याय 4 

व् यह‍ िकों और भागीिारी फमों के हलए शोधन अक्षमता आिशे 

 121. शोधन अक्षमता के हलए आवेिन—(1) दकसी ऋणी की शोधन अक्षमता के हलए न् यायहनणागयक प्राहधकारी को आवेिन 

लेनिार द्वारा व् यह‍ िक रूप से या अन् य लेनिारों के साथ संयु‍ त रूप से या ऋणी द्वारा हनम् नहलहित पररह‍ थहतयों में दकया िा सकेगा, 

अथागत्:— 

(क) ििां न् यायहनणागयक प्राहधकारी द्वारा धारा 100 की उपधारा (4) के अधीन कोई आिशे पाररत दकया गया     

ि;ै या 

(ि) ििां न् यायहनणागयक प्राहधकारी द्वारा धारा 115 की उपधारा (2) के अधीन कोई आिशे पाररत दकया गया     

ि;ै या 

(ग) ििां न् यायहनणागयक प्राहधकारी द्वारा धारा 118 की उपधारा (3) के अधीन कोई आिशे पाररत दकया गया ि ै। 

 (2) शोधन अक्षमता के हलए कोई आवेिन न् यायहनणागयक प्राहधकारी द्वारा उपधारा (1) में हनर्िग‍ ि धाराओं के अधीन पाररत 

आिशे की तारीि से तीन मास की कालावहध के भीतर फाइल दकया िाएगा । 

 (3) ििां ऋणी कोई फमग ि ैविां उपधारा (1) के अधीन आवेिन उसके दकसी भी भागीिार द्वारा फाइल दकया िा सकेगा । 

 122. ऋणी द्वारा आवेिन—(1) ऋणी द्वारा शोधन अक्षमता के हलए आवेिन के साथ हनम् नहलहित िोंगे— 

(क) भाग 3 के अध् याय 3 के अधीन की गई दिवाला समाधान प्रदक्रया के अहभलेि; 

(ि) शोधन अक्षमता के हलए आवेिन की तारीि को ऋणी के कायों का उस रूप और रीहत में हववरण िैसा हवहित 

दकया िाए; और 

(ग) न् यायहनणागयक प्राहधकारी द्वारा भाग 3 के अध् याय 3 के अधीन शोधन अक्षमता के हलए ऋणी को आवेिन करने 

के हलए अनुज्ञात करने के हलए पाररत आिशे की प्रहत । 

 (2) ऋणी, शोधन अक्षमता के हलए आवेिन में दकसी दिवाला वृहत्तक का, शोधन अक्षमता न् यासी के रूप में प्र‍ ताव कर   

सकेगा । 

 (3) शोधन अक्षमता के हलए आवेिन ऐसे प्ररूप और ऐसी रीहत में तथा ऐसी फीस के साथ िोगा िो हवहित की िाए । 



 58 

 (4) ऋणी द्वारा शोधन अक्षमता के हलए दकसी आवेिन को न् यायहनणागयक प्राहधकारी की अनुमहत के हबना प्रत् याहृत निीं 

दकया िाएगा । 

 123. लनेिार द्वारा आवेिन—(1) लेनिार द्वारा शोधन अक्षमता के हलए आवेिन के साथ हनम् नहलहित िोंगे— 

(क) अध् याय 3 के अधीन की गई दिवाला समाधान प्रदक्रया के अहभलेि; 

(ि) न् यायहनणागयक प्राहधकारी द्वारा अध् याय 3 के अधीन शोधन अक्षमता के हलए लेनिार को आवेिन करने के हलए 

अनुज्ञात करने के हलए पाररत आिशे की प्रहत; 

(ग) शोधन अक्षमता के हलए आवेिन की तारीि को लेनिार को ऋणी द्वारा िये ऋणों के ब् यौरे; और 

(घ) ऐसी अन् य सूचना, िैसी हवहित की िाए । 

 (2) उपधारा (1) के अधीन दकसी ऐसे ऋण के सम् बन् ध में, िो प्रहतभूत ि,ै आवेिन के साथ हनम् नहलहित िोंगे— 

(क) लेनिार, हिसको प्रहतभूहत को प्रवृत्त करने का अहधकार ि,ै द्वारा एक कथन दक वि शोधन अक्षमता आिशे दकए 

िाने की िशा में शोधन अक्षम के सभी लेनिारों के फायि ेके हलए अपनी प्रहतभूहत का त् याग कर िगेा; या 

(ि) लेनिार द्वारा हनम् नहलहित का कथन करते हए एक कथन— 

 (i) दक शोधन अक्षमता के हलए आवेिन केवल ऋण के अप्रहतभूत भाग के हलए िी िै; और 

 (ii) दक ऋण के अप्रहतभूत भाग का प्रा‍ कहलत मूल् य । 

 (3) यदि कोई प्रहतभूत लेनिार शोधन अक्षमता के हलए आवेिन करता ि ैऔर उपधारा (2) के िंर् (ि) के अधीन एक कथन 

प्र‍ तुत करता ि,ै तो ऋण के प्रहतभूत और अप्रहतभूत भागों को पृथक् ऋण माना िाएगा । 

 (4) लेनिार दकसी दिवाला वृहत्तक का शोधन अक्षमता आवेिन में शोधन अक्षमता न् यासी के रूप में प्र‍ ताव कर सकेगा । 

 (5) मृतक ऋणी की िशा में उपधारा (1) के अधीन शोधन अक्षमता के हलए आवेिन उसके हवहधक प्रहतहनहधयों के हवरुद्ध 

फाइल दकया िा सकेगा । 

 (6) शोधन अक्षमता के हलए आवेिन ऐसे प्ररूप और ऐसी रीहत में तथा ऐसी फीस के साथ िोगा िो हवहित दकए िाएं । 

 (7) लेनिार द्वारा शोधन अक्षमता के हलए दकसी आवेिन को न् यायहनणागयक प्राहधकारी की अनुज्ञा के हबना प्रत् याहृत निीं 

दकया िाएगा । 

 124. आविेन का प्रभाव—(1) िब धारा 122 या धारा 123 के अधीन कोई आवेिन फाइल दकया िाता ि ैतो— 

(क) आवेिन करने की तारीि को ऋणी की सभी सम् पहत्तयों के हवरुद्ध उसके ऋणों के सम् बन् ध में सभी कारगवाइयों 

पर एक अंतररम अहध‍ थगन आरंभ िोगा और ऐसा अहध‍ थगन शोधन अक्षमता प्रारम् भ िोने की तारीि को हन‍ प्रभावी िो 

िाएगा; और 

(ि) अंतररम अहध‍ थगन की अवहध के िौरान— 

(i) ऋणी की दकसी सम् पहत्त के हवरुद्ध उसके ऋणों के सम् बन् ध में कोई लंहबत हवहधक कारगवाई या 

कायगवािी को रोक दिया गया समझा िाएगा; और 

(ii) ऋणी के लेनिार उसकी दकसी सम् पहत्त के हवरुद्ध दकसी ऋण के सम् बन् ध में कोई हवहधक कारगवाई या 

कायगवाहियां आरम् भ करने के िकिार निीं िोंगे । 

 (2) ििां कोई आवेिन दकसी फमग के सम् बन् ध में दकया गया ि ैविां उपधारा (1) के अधीन अंतररम अहध‍ थगन आवेिन करने 

की तारीि को फमग के सभी भागीिारों के हवरुद्ध प्रवर्तगत िोगा । 

 (3) इस धारा के उपबन् ध ऐसे संव् यविारों को लागू निीं िोंगे िो दकसी हवत्तीय से‍ िर हवहनयामक के परामशग से केन् रीय 

सरकार द्वारा अहधसूहचत दकए िाएं । 

 125. शोधन अक्षमता न् यासी के रूप में दिवाला वहृत्तक की हनयहु‍ त—(1) यदि दकसी दिवाला वृहत्तक को धारा 122 या   

धारा 123 के अधीन शोधन अक्षमता आवेिन में शोधन अक्षमता न् यासी के रूप में प्र‍ ताहवत दकया िाता ि ै तो न् यायहनणागयक 

प्राहधकारी, शोधन अक्षमता के हलए आवेिन प्राप् त करने के सात दिन के भीतर बोर्ग को यि पुह‍ ि करने के हलए हनिशे िगेा दक ऐसे 

वृहत्तक के हवरुद्ध कोई अनुशासहनक कायगवाहियां निीं िैं । 

 (2) बोर्ग, उपधारा (1) के अधीन हनिशे की प्राहप् त के िस दिन के भीतर हलहित में या तो — 

(क) प्र‍ ताहवत दिवाला वृहत्तक की शोधन अक्षमता प्रदक्रया के हलए शोधन अक्षमता न् यासी के रूप में हनयुह‍ त की 

पुह‍ ि करेगा; या 



 59 

(ि) प्र‍ ताहवत दिवाला वृहत्तक की शोधन अक्षमता न् यासी के रूप में हनयुह‍ त को अ‍ वीकार कर िगेा और अन् य 

शोधन अक्षमता न् यासी को शोधन अक्षमता प्रदक्रया के हलए नामहनर्िग‍ ि करेगा । 

 (3) ििां धारा 122 या धारा 123 के अधीन ऋणी या लेनिार द्वारा शोधन अक्षमता न् यासी का प्र‍ ताव निीं दकया िाता िै 

विां न् यायहनणागयक प्राहधकारी बोर्ग को आवेिन प्राप् त करने के सात दिन के भीतर शोधन अक्षमता प्रदक्रया के हलए शोधन अक्षमता 

न् यासी नामहनर्िग‍ ि करने का हनिेश िगेा । 

 (4) बोर्ग उपधारा (3) के अधीन न् यायहनणागयक प्राहधकारी से हनिशे प्राप् त करने से िस दिन के भीतर शोधन अक्षमता न् यासी 

को नामहनर्िग‍ ि करेगा । 

 (5) इस धारा के अधीन पु‍ ि या नामहनर्िग‍ ि शोधन अक्षमता न् यासी को न् यायहनणागयक प्राहधकारी द्वारा धारा 126 के अधीन 

अक्षमता आिशे में शोधन अक्षमता न् यासी के रूप में हनयु‍ त दकया िाएगा । 

 126. शोधन अक्षमता आिशे—(1) न् यायहनणागयक प्राहधकारी, धारा 125 के अधीन शोधन अक्षमता का पुह‍ िकरण या 

नामहनिशेन प्राप् त करने के चौिि दिन के भीतर शोधन अक्षमता आिशे पाररत करेगा । 

 (2) न् यायहनणागयक प्राहधकारी, शोधन अक्षम, लेनिारों और शोधन अक्षमता न् यासी को शोधन अक्षमता आिशे पाररत करने के 

सात दिन के भीतर हनम् नहलहित ि‍ तावेि उपलब् ध कराएगा, अथागत्:— 

(क) शोधन अक्षमता के हलए आवेिन की एक प्रहत; और 

(ि) शोधन अक्षमता आिशे की एक प्रहत । 

 127. शोधन अक्षमता आिेश की हवहधमान् यता—न् यायहनणागयक प्राहधकारी द्वारा धारा 126 के अधीन पाररत शोधन अक्षमता 

आिशे का ऋणी के धारा 138 के अधीन उन् मोहचत िोने तक प्रभावी िोना िारी रिगेा । 

 128. शोधन अक्षमता का प्रभाव—(1) धारा 126 के अधीन शोधन अक्षमता आिशे के पाररत िोने पर— 

(क) शोधन अक्षम की संपिा, शोधन अक्षमता न् यासी में हनहित िोगी िैसा दक धारा 154 में उपबहन् धत ि;ै 

(ि) शोधन अक्षम की संपिा को लेनिारों के बीच हवभाहित दकया िाएगा; 

(ग) उपधारा (2) के उपबन् धों के अधीन रिते हए शोधन अक्षम ऋण के रूप में िावा दकए गए दकसी ऋण के 

सम् बन् ध में ऋणि‍ त शोधन अक्षम का कोई लेनिार,— 

(i) ऐसे ऋण के सम् बन् ध में शोधन अक्षम की सम् पहत्त के हवरुद्ध कोई कारगवाई आरम् भ निीं करेगा; या 

(ii) कोई वाि या अन् य हवहधक कायगवाहियां न् यायहनणागयक प्राहधकारी की अनुमहत और ऐसे हनबंधनों पर 

के हसवाय िैसा न् यायहनणागयक प्राहधकारी अहधरोहपत करे, प्रारम् भ निीं करेगा । 

 (2) धारा 123 के उपबंधों के अधीन रिते हए शोधन अक्षमता आिशे दकसी प्रहतभूत लेनिार के उसके प्रहतभूत हित प्रापण या 

उसी रीहत में अन् यथा व् यौिार करने के अहधकार को प्रभाहवत निीं करेगा, हिसका वि िकिार िोता यदि शोधन अक्षमता आिशे पाररत 

निीं दकया गया िोता: 

 परन् तु कोई प्रहतभूत लेनिार अपने ऋण के सम् बन् ध में दकसी ब् याि का शोधन अक्षमता प्रारम् भ िोने की तारीि के पश् चात् 

िकिार निीं िोगा यदि वि उ‍ त तारीि से तीस दिन के भीतर प्रहतभूहत के प्रापण के हलए कोई कारगवाई निीं करता ि ै। 

 (3) ििां धारा 126 के अधीन दकसी फमग के हवरुद्ध कोई शोधन अक्षमता आिशे पाररत दकया गया ि ैविां आिशे ऐसे प्रवर्तगत 

िोगा मानो वि प्रत् येक व् यह‍ ि, िो आिशे की तारीि को फमग का भागीिार िै, के हवरुद्ध दकया गया शोधन अक्षमता आिशे ि ै। 

 (4) उपधारा (1) के उपबन् ध ऐसे संव् यविारों को लागू निीं िोंगे, हिन् िें कें रीय सरकार हवत्तीय क्षेत्र हवहनयामक के परामशग से 

अहधसूहचत करे । 

 129. हवत्तीय ह‍ थहत का हववरण—(1) ििां धारा 123 के अधीन दकसी लेनिार द्वारा शोधन अक्षमता के हलए आवेिन पर 

शोधन अक्षमता आिशे पाररत दकया गया ि ैविां शोधन अक्षम अपनी हवत्तीय ह‍ थहत का हववरण शोधन अक्षमता न् यासी को शोधन 

अक्षमता प्रारम् भ िोने की तारीि से सात दिन के भीतर िगेा । 

 (2) हवत्तीय ह‍ थहत का हववरण ऐस ेप्ररूप और ऐसी रीहत में प्र‍ तुत दकया िाएगा िैसी हवहित की िाए । 

 (3) ििां शोधन अक्षम कोई फमग िै विां शोधन अक्षमता आिशे की तारीि को उसके भागीिार फमग के हवत्तीय ह‍ थहत का एक 

संयु‍ त हववरण प्र‍ तुत करेंगे और फमग का प्रत् येक भागीिार उसके साथ अपनी हवत्तीय ह‍ थहत का हववरण प्र‍ तुत करेगा । 

 (4) शोधन अक्षमता न् यासी, शोधन अक्षम या दकसी अन् य व् यह‍ त से हलहित में हवत्तीय ह‍ थहत के हववरण में अंतर्वग‍ ि सूचना 

को ‍ प‍ ि करने या दकसी हवषय को उपांतररत करने की अपेक्षा कर सकेगा । 

 130. लनेिारों स ेिाव ेआमहंत्रत करने वाली लोक सूचना—(1) न् यायहनणागयक प्राहधकारी— 



 60 

(क) लेनिारों को, शोधन अक्षमता प्रारम् भ की तारीि से िस दिन के भीतर हनम् नहलहित में उहल् लहित सूचनाएं 

भेिेगा— 

(i) धारा 129 के अधीन शोधन अक्षम द्वारा प्र‍ तुत कायगकलापों का हववरण, या 

(ii) धारा 122 के अधीन शोधन अक्षम द्वारा प्र‍ तुत दकया गया शोधन अक्षमता के हलए आवेिन; 

  (ि) लेनिारों से िावे आमंहत्रत करने वाली लोक सूचना िारी करेगा । 

 (2) उपधारा (1) के िंर् (ि) के अधीन लोक सूचना में वि अंहतम तारीि, हिस तक िावे प्र‍ तुत दकए िाएंगे और ऐसे अन् य 

हवषय और ब् यौरे, िो हवहित दकए िाएं, सहम् महलत िोंगे और— 

(क) कम से कम एक अंिेिी और ‍ थानीय भाषा के प्रमुि समाचारपत्र में, िो उस राज् य में पयागप् त संख या में 

पररचाहलत दकया िाता िै, ििां पर शोधन अक्षम हनवास करता िै, प्रकाहशत की िाएगी; 

(ि) न् यायहनणागयक प्राहधकारी के पररसर पर लगाई िाएगी; और 

(ग) न् यायहनणागयक प्राहधकारी की वेबसाइि पर र्ाली िाएगी । 

 (3) उपधारा (1) के िंर् (क) के अधीन हनर्िग‍ ि लेनिारों के हलए सूचना में ऐसे हवषय और ब् यौरे सहम् महलत िोंगे, िो हवहित 

दकए िाएं । 

 131. िावों का रहि‍ रीकरण—(1) लेनिार, लोक सूचना के प्रकाशन के सात दिन के भीतर शोधन अक्षमता न् यासी को िावों के 

ब् यौरे ऐसी रीहत में भेिकर, िो हवहित की िाए, शोधन अक्षमता न् यासी के पास िावे रहि‍ िर करेंगे । 

 (2) लेनिार, अपने िावों के ब् यौरों के अहतरर‍ त, ऐसी अन् य सूचना और ऐसी रीहत में, िो हवहित की िाए, उपलब् ध   

कराएगा । 

 132. लनेिारों की सचूी तयैार करना—शोधन अक्षमता न् यासी, शोधन अक्षमता प्रारम् भ की तारीि से चौिि दिन के भीतर, 

हनम् नहलहित आधार पर शोधन अक्षम के लेनिारों की सूची तैयार करेगा— 

(क) धारा 118 के अधीन शोधन अक्षम द्वारा शोधन अक्षमता के हलए फाइल दकए गए आवेिन में शोधन अक्षम 

द्वारा प्रकरित सूचना और धारा 125 के अधीन फाइल दकए गए गए कायगकलापों का हववरण; और 

(ि) धारा 130 की उपधारा (2) के अधीन शोधन अक्षमता न् यासी द्वारा प्राप् त िावे । 

 133. लनेिारों की बैठक बलुाना—(1) शोधन अक्षमता न् यासी, शोधन अक्षमता प्रारम् भ की तारीि से इ‍ कीस दिन के भीतर 

धारा 132 के अधीन तैयार की गई सूची में यथा उहल् लहित शोधन अक्षम के प्रत् येक लेनिार को, लेनिारों की बैठक बुलाने के हलए सूचना 

िारी करेगा । 

 (2) उपधारा (1) के अधीन िारी की गई सूचनाओं में,— 

(क) लेनिारों की बैठक की तारीि का कथन िोगा िो शोधन अक्षमता प्रारम् भ की तारीि से इ‍ कीस दिन के 

पश् चात् की निीं िोगी;  

(ि) सूचनाओं के साथ प्रो‍ सी मतिान के प्ररूप संलग् न िोंग;े  

(ग) ऐसे प्ररूप और रीहत हवहनर्िग‍ ि करेंगे हिसमें प्रो‍ सी मतिान दकया िा सकेगा । 

 (3) प्रो‍ सी मतिान, हिसके अंतगगत इले‍ रोहनक प्रो‍ सी मतिान भी ि ैऐसी रीहत और प्ररूप में दकया िाएगा, िो हवहनर्िग‍ ि 

दकया िाए । 

 134. लनेिारों की बैठक का सचंालन—(1) धारा 133 के अधीन बलुाई गई लेनिारों की बैठक का संयोिक शोधन अक्षमता 

न् यासी िोगा । 

 (2) शोधन अक्षमता न् यासी लेनिारों की बैठक के हलए गणपूर्तग का हवहनश् चय करेगा और बैठक केवल तभी संचाहलत करेगा 

यदि गणपूर्तग उपह‍ थत ि ै। 

 (3) लेनिारों की बैठक में हनम् नहलहित कारबार दकया िाएगा हिस सम् बन् ध में हनम् नहलहित एक संकल् प पाररत दकया िा 

सकेगा, अथागत्:— 

  (क) लेनिारों की सहमहत की ‍ थापना;  

  (ि) कोई अन् य कारबार हिसे शोधन अक्षमता न् यासी संव् यविार दकए िाने के हलए ठीक समझे । 

(4) शोधन अक्षमता न् यासी लेनिारों की बैठक के कायगवृत्त को अहभहलहित कराएगा, उस पर ि‍ ताक्षर कराएगा और उसे 

शोधन अक्षमता प्रदक्रया के अहभलेिों के भाग के रूप में प्रहतधाररत करेगा । 



 61 

(5) शोधन अक्षमता न् यासी दकसी भी प्रयोिन के हलए लेनिारों की बैठक को एक बार में सात दिन से अहधक के हलए ‍ थहगत 

निीं करेगा । 

135. लनेिारों के मतिान अहधकार—(1) धारा 132 के अधीन सूची में उहल् लहित प्रत् येक लेनिार या उसका प्रो‍ सी, उसे 

समनुिहेशत मतिान शेयर के अनुसार लेनिारों की बैठक में संकल् पों की बाबत मतिान करने के हलए िकिार िोगा । 

(2) समाधान वहृत्तक, बोर्ग द्वारा हवहनर्िग‍ ि रीहत में प्रत् येक लेनिार को समनुिहेशत दकए िाने वाले मतिान शेयर का 

अवधारण करेगा । 

(3) लेनिार दकसी अपररहनधागररत रकम के हलए ऋण की बाबत मतिान करने का िकिार निीं िोगा । 

(4) हनम् नहलहित लेनिार इस धारा के अधीन मतिान करने के हलए िकिार निीं िोंगे, अथागत् :— 

(क) ऐसे लेनिार िो धारा 132 के अधीन लेनिारों की सूची में उहल् लहित निीं िैं और ऐसे लेनिार हिन् िें शोधन 

अक्षमता न् यासी द्वारा सूचना निीं िी गई िै;  

(ि) ऐसे लेनिार िो शोधन अक्षम के सियु‍ त िैं । 

 136. शोधन अक्षम की सपंिा का प्रशासन और हवतरण—शोधन अक्षमता न् यासी अध् याय 5 के उपबन् धों के अनुसार शोधन 

अक्षम की संपिा का प्रशासन करेगा और उसका हवतरण करेगा । 

 137. प्रशासन का पूरा दकया िाना—(1) शोधन अक्षमता न् यासी अध् याय 5 के उपबन् धों के अनुसार शोधन अक्षम की संपिा के 

प्रशासन तथा हवतरण के पूरे दकए िाने पर लेनिारों की सहमहत की बैठक बुलाएगा । 

 (2) शोधन अक्षमता न् यासी उ‍ त सहमहत की बैठक में शोधन अक्षम की संपिा के प्रशासन की ररपोिग लेनिारों की सहमहत को 

उपलब् ध कराएगा । 

 (3) लेनिारों की सहमहत ररपोिग की प्राहप् त के सात दिन के भीतर उपधारा (2) के अधीन शोधन अक्षमता न् यासी द्वारा प्र‍ तुत 

ररपोिग का अनुमोिन करेगा और यि अवधाररत करेगा दक ‍ या धारा 148 के अधीन शोधन अक्षमता न् यासी को हनमुग‍ त दकया िाना 

चाहिए या निीं । 

 (4) शोधन अक्षमता न् यासी, संपिा के प्रशासन के िौरान इस धारा के अधीन अपेहक्षत बैठक आहूत करने और उसके संचालन 

के िचों को पूरा करने के हलए शोधन अक्षम की संपिा से पयागप् त धनराहश प्रहतधाररत करेगा । 

 138. उन् मोचन आिशे—(1) शोधन अक्षमता न् यासी— 

(क) शोधन अक्षमता प्रारम् भ की तारीि से एक वषग के समाप् त िोने पर; या 

(ि) ििां ऐसा अनुमोिन िंर् (क) में उहल् लहित अवहध से पूवग प्राप् त दकया िाता ि,ै विां धारा 137 के अधीन 

शोधन अक्षम की संपिाओं के प्रशासन के पूरे दकए िाने के लेनिारों की सहमहत के अनुमोिन के सात दिन के भीतर, 

उन् मोचन के हलए न् यायहनणागयक प्राहधकारी को आवेिन करेगा । 

 (2) न् यायहनणागयक प्राहधकारी उपधारा (1) के अधीन शोधन अक्षमता न् यासी द्वारा दकए गए आवेिन पर उन् मोचन आिशे 

पाररत करेगा । 

 (3) उन् मोचन आिशे की प्रहत धारा 196 में हनर्िग‍ ि रहि‍ िर में प्रहवह‍ ि अहभहलहित करने के प्रयोिन के हलए बोर्ग को 

उपलब् ध कराई िाएगी । 

 139. उन् मोचन का प्रभाव—धारा 138 की उपधारा (2) के अधीन उन् मोचन आिशे शोधन अक्षम व् यह‍ त को सभी शोधन 

अक्षमता ऋणों से हनमुग‍ त करेगा: 

 परन् तु ऐसा उन् मोचन— 

  (क) शोधन अक्षमता न् यासी के कृत् यों को प्रभाहवत निीं करेगा; या 

  (ि) भाग 3 के अध् याय 4 और अध् याय 5 के उपबन् धों के प्रवतगन पर प्रभाव निीं र्ालेगा; या 

(ग) शोधन अक्षम व् यह‍ त को दकसी ऐसे ऋण से हनमुग‍ त निीं करेगा, िो दकसी ऐस ेकपि या न् यास-भंग के कारण 

उपगत हआ था, हिसका वि पक्षकार था; या 

(घ) शोधन अक्षम व् यह‍ त को दकसी अपवर्िगत ऋण से उन् मोहचत निीं करेगा । 

 140. शोधन अक्षम की हनरिगता—(1) शोधन अक्षम, शोधन अक्षमता प्रारम् भ की तारीि से इस धारा में उहल् लहित हनरिगताओं 

के अध् यधीन िोगा । 

 (2) तत् समय प्रवृत्त दकसी हवहध के अधीन दकसी हनरिगता के अहतरर‍ त शोधन अक्षम— 



 62 

  (क) दकसी न् यास, संपिा या बंिोब‍ त के सम् बन् ध में न् यासी या प्रहतहनहध के रूप में हनयु‍ त िोने से या कायग करने से; 

  (ि) लोक सेवक के रूप में हनयु‍ त िोने या कायग करने से;  

  (ग) ििां ऐसे पि के हलए हनयुह‍ त हनवागचन द्वारा की िाती ि ैविां दकसी लोक पि पर हनवागहचत िोने से; और 

  (घ) दकसी ‍ थानीय प्राहधकरण के सि‍ य के रूप में हनवागहचत िोने या पिासीन िोने या मतिान करने से ।  

हनरर्िगत िोगा । 

 (3) कोई हनरिगता, हिससे शोधन अक्षम इस धारा के अध् यधीन िो सकेगा, प्रभाव में निीं रिेगी, यदि—  

  (क) धारा 142 के अधीन उसके हवरुद्ध शोधन अक्षमता आिशे को उपांतररत दकया या वापस हलया िाता िै; या 

  (ि) उसे धारा 138 के अधीन उन् मोहचत कर दिया िाता ि ै। 

 ‍ प‍ िीकरण—इस धारा के प्रयोिनों के हलए, “लोक सेवक” पि का विी अथग िोगा िो उसका भारतीय िंर् संहिता       

(1860 का 45) की धारा 21 में ि ै। 

 141. शोधन अक्षम पर हनबंधन—(1) कोई शोधन अक्षम, शोधन अक्षमता प्रारम् भ की तारीि से,— 

(क) दकसी कंपनी के हनिशेक के रूप में कायग निीं करेगा या कंपनी के संवधगन या उसके बनाए िाने या प्रबंधन में 

प्रत् यक्ष या अप्रत् यक्ष भाग निीं लेगा या उससे सम् बद्ध निीं िोगा;  

(ि) शोधन अक्षमता न् यासी की पूवग मंिूरी के हबना, अपनी संपिा पर कोई प्रभार या कोई अहतरर‍ त ऋण सृहित 

करने से प्रहतहषद्ध दकया िाएगा;  

(ग) अपने कारबार भागीिारों को यि सूहचत करने की अपेक्षा की िाएगी दक वि शोधन अक्षमता प्रदक्रया से गुिर 

रिा ि;ै  

(घ) ऐसे मूल् य के दकसी हवत्तीय या वाहणहज् यक संव् यविार करने से पूवग, िो हवहित दकया िाए, ऐसे संव् यविार में 

अंतवगहलत सभी पक्षकारों को या तो व् यह‍ िक रूप से या संयु‍ त रूप से यि सूहचत करेगा दक वि शोधन अक्षमता प्रदक्रया स े

गुिर रिा ि;ै  

(ङ) न् यायहनणागयक प्राहधकारी की पूवग मंिूरी के हबना शोधन अक्षमता ऋणों के सम् बन् ध दकसी हवहधक कारगवाई या 

कायगवाहियों को चलाने में अक्षम िोगा; और 

(च) न् यायहनणागयक प्राहधकारी की अनुज्ञा के हबना हविशे यात्रा करने के हलए अनुज्ञात निीं दकया िाएगा । 

 (2) कोई ऐसा हनबंधन हिससे इस धारा के अधीन कोई शोधन अक्षम ि‍ त िो सकेगा प्रभाव में निीं रिगेा, यदि— 

  (क) धारा 142 के अधीन उसके हवरुद्ध शोधन अक्षमता आिशे उपांतररत या वापस ले हलया िाता िै; या 

  (ि) उसे धारा 138 के अधीन उन् मोहचत कर दिया गया ि ै। 

 142. शोधन अक्षमता आिशे का उपातंरण या वापस हलया िाना—(1) न् यायहनणागयक प्राहधकारी दकसी आवेिन पर या 

‍ वप्रेरणा से शोधन अक्षमता आिशे को उपांतररत कर सकेगा या वापस ले सकेगा चाि ेशोधन अक्षम उन् मोहचत दकया गया ि ैया निीं, 

यदि न् यायहनणागयक प्राहधकारी को यि प्रतीत िोता ि ैदक— 

  (क) ऐसे आिशे को ििेने से िी प्रकि त्रुरि हवद्यमान िै; या 

(ि) शोधन अक्षमता ऋण और शोधन अक्षमता के िचग इन िोनों का िी शोधन अक्षमता आिशे दकए िाने के 

पश् चात् या तो न् यायहनणागयक प्राहधकारी के समाधानप्रि रूप में पूणगत: संिाय कर दिया गया ि ैया प्रहतभूत कर दिया गया    

ि ै। 

 (2) ििां न् यायहनणागयक प्राहधकारी इस धारा के अधीन दकसी शोधन अक्षमता आिशे को उपांतररत करता ि ैया वापस लेता 

ि ैविां शोधन अक्षमता न् यासी द्वारा दकए गए सम् पहत्त के दकसी हवक्रय या अन् य व् ययन, संिाय या सम् यक्त: की गई अन् य बातें इसके 

हसवाय हवहधमान् य िोंगी दक शोधन अक्षम की सम् पहत्त ऐसे व् यह‍ त में हनहित िो िाएगी िो न् यायहनणागयक प्राहधकारी हनयु‍ त करे या 

ऐसी दकसी हनयहु‍ त के व् यहतक्रम में ऐसे हनबंधनों पर शोधन अक्षम को प्रहतवर्तगत कर िेगा िैसा न् यायहनणागयक प्राहधकारी हनिशे ि े। 

 (3) उपधारा (1) के अधीन न् यायहनणागयक प्राहधकारी द्वारा पाररत आिशे की प्रहत धारा 191 में हनर्िग‍ ि रहि‍ िर में कोई 

प्रहवह‍ ि अहभहलहित करने के प्रयोिन के हलए बोर्ग को उपलब् ध कराई िाएगी । 

 (4) उपधारा (1) के अधीन न् यायहनणागयक प्राहधकारी द्वारा आिशे का उपांतरण या वापस हलया िाना सभी लेनिारों को विां 

तक आबद्धकर बनाएगा ििां तक उनका सम् बन् ध उनको िये दकसी ऐसे ऋण से ि ैिो शोधन अक्षमता का भागरूप िै । 



 63 

 143. आचरण का ‍ तर—शोधन अक्षमता न् यासी धारा 208 के अधीन उपबंहधत आचार संहिता के अनुपालन में अपने कृत् यों 

और कतगव् यों का पालन करेगा । 

 144. शोधन अक्षमता न् यासी की फीस—(1) शोधन अक्षमता प्रदक्रया संचाहलत करने के हलए हनयु‍ त शोधन अक्षमता न् यासी 

ऐसी फीस प्रभाररत करेगा िो शोधन अक्षम की सम् पहत्त के मूल् य के अनुपात में हवहनर्िग‍ ि की िाए । 

 (2) शोधन अक्षमता प्रदक्रया के संचालन के हलए शोधन अक्षमता न् यासी को फीस धारा 178 में उपबंहधत रीहत में शोधन 

अक्षम की संपिा के हवतरण से संित्त की िाएगी । 

 145. शोधन अक्षमता न् यासी का प्रहत‍ थापन—(1) ििां लेनिारों की सहमहत की यि राय ि ैदक शोधन अक्षमता प्रदक्रया के 

िौरान दकसी भी समय धारा 125 के अधीन हनयु‍ त दकसी शोधन अक्षमता न् यासी को प्रहत‍ थाहपत दकया िाना अपहेक्षत ि ैतो वि उस े

इस धारा के अधीन उपबहन् धत रीहत में दकसी अन् य शोधन अक्षमता न् यासी से प्रहत‍ थाहपत कर सकेगी । 

 (2) लेनिारों की सहमहत, दकसी बठैक में मतिान करने वाले शेयर के पचित्तर प्रहतशत मत द्वारा धारा 125 के अधीन हनयु‍ त 

दकसी शोधन अक्षमता न् यासी को दकसी अन् य शोधन अक्षमता न् यासी से प्रहत‍ थाहपत करने का प्र‍ ताव कर सकेगी । 

 (3) लेनिारों की सहमहत न् यायहनणागयक प्राहधकारी को शोधन अक्षमता न् यासी के प्रहत‍ थापन के हलए आवेिन कर सकेगी । 

 (4) न् यायहनणागयक प्राहधकारी, उपधारा (3) के अधीन आवेिन प्राप् त िोने के सात दिन के भीतर बोर्ग को शोधन अक्षमता 

न् यासी के प्रहत‍ थापन ितेु हसफाररश करने के हलए हनिशे िगेा । 

 (5) बोर्ग उपधारा (4) के अधीन न् यायहनणागयक प्राहधकारी के हनिशे के िस दिन के भीतर ऐसे शोधन अक्षमता न् यासी की, 

हिसके हवरुद्ध कोई अनुशासहनक कायगवाहियां लंहबत निीं िैं, प्रहत‍ थापन के हलए हसफाररश करेगा । 

 (6) न् यायहनणागयक प्राहधकारी ऐसी हसफाररश प्राप् त करने के चौिि दिन के भीतर उपधारा (5) के अधीन बोर्ग द्वारा की गई 

हसफाररश के अनुसार शोधन अक्षमता न् यासी की हनयहु‍ त करेगा । 

 (7) पूवगतर शोधन अक्षमता न् यासी उपधारा (6) के अधीन हनयु‍ त शोधन अक्षमता न् यासी को उसकी हनयुह‍ त की तारीि को 

शोधन अक्षम की संपिा का कब् िा पररित्त करेगा । 

 (8) न् यायहनणागयक प्राहधकारी पूवगतर शोधन अक्षमता न् यासी को यि हनिशे ि ेसकेगा दक वि— 

  (क) शोधन अक्षमता प्रदक्रया के सम् बन् ध में नए शोधन अक्षमता न् यासी के साथ सभी सूचना साझा करे; और 

  (ि) ऐसे मामलों में, िो अपहेक्षत िों, नए शोधन अक्षमता न् यासी के साथ सियोग करे । 

 (9) इस धारा के अधीन प्रहत‍ थाहपत पूवगतर शोधन अक्षमता न् यासी धारा 148 के उपबन् धों के अनुसार हनमुग‍ त दकया           

िाएगा । 

 (10) इस धारा के अधीन हनयु‍ त शोधन अक्षमता न् यासी अपनी हनयुह‍ त के सात दिन के भीतर शोधन अक्षम को अपनी 

हनयुह‍ त की सूचना िगेा । 

 146. शोधन अक्षमता न् यासी द्वारा रहि‍ रीकरण—(1) शोधन अक्षमता न् यासी त् यागपत्र ि ेसकेगा, यदि— 

  (क) वि दिवाला वृहत्तक के रूप में व् यवसाय न करने का आशय रिता िै; या 

(ि) हित का हवरोध ि ैया वैयह‍ तक पररह‍ थहतयों में पररवतगन ि ैिो शोधन अक्षमता न् यासी के रूप में उसे, उसके 

कतगव् यों का अहतरर‍ त हनवगिन करने से प्रवाररत करता ि ै। 

(2) न् यायहनणागयक प्राहधकारी, शोधन अक्षमता न् यासी के त् यागपत्र की ‍ वीकृहत के सात दिन के भीतर उसके प्रहत‍ थापन के 

हलए बोर्ग को हनिशे िगेा । 

(3) बोर्ग, उपधारा (2) के अधीन न् यायहनणागयक प्राहधकारी के हनिशे के िस दिन के भीतर दकसी अन् य शोधन अक्षमता न् यासी 

की प्रहत‍ थापना के रूप में हसफाररश करेगा ।  

 (4) न् यायहनणागयक प्राहधकारी, हसफाररश की प्राहप् त के चौिि दिन के भीतर उपधारा (3) के अधीन बोर्ग द्वारा हसफाररश दकए 

गए शोधन अक्षमता न् यासी की हनयुह‍ त करेगा । 

 (5) प्रहत‍ थाहपत शोधन अक्षमता न् यासी उपधारा (4) के अधीन हनयु‍ त शोधन अक्षमता न् यासी को उसकी हनयुह‍ त की 

तारीि को शोधन अक्षम की सम् पहत्त का कब् िा िगेा । 

 (6) न् यायहनणागयक प्राहधकारी शोधन अक्षमता न् यासी, हिसने त् यागपत्र दिया ि,ै को— 

  (क) वि शोधन अक्षमता प्रदक्रया की बाबत नए शोधन अक्षमता न् यासी के साथ सभी सूचनाएं साझा करने; और 

  (ि) ऐसे मामलों में, िो अपहेक्षत िों, नए शोधन अक्षमता न् यासी के साथ, सियोग करने,  



 64 

के हनिशे ि ेसकेगा । 

 (7) इस धारा के अधीन हनयु‍ त शोधन अक्षमता न् यासी, लेनिारों की सहमहत को और शोधन अक्षम को अपनी हनयुह‍ त के 

सात दिन के भीतर अपनी हनयुह‍ त की सूचना िगेा । 

 (8) इस धारा के अधीन प्रहत‍ थाहपत शोधन अक्षमता न् यासी धारा 148 के उपबन् धों के अनुसार हनमुग‍ त कर दिया िाएगा । 

 147. शोधन अक्षमता न् यासी के पि की ररह‍ त—(1) यदि शोधन अक्षमता न् यासी के पि पर उसके प्रहत‍ थापन या त् यागपत्र से 

हभन् न दकसी कारण से कोई ररह‍ त िोती ि ैतो वि ररह‍ त इस धारा के उपबन् धों के अनुसार भरी िाएगी । 
 (2) उपधारा (1) में हनर्िग‍ ि ररह‍ त के िोने की िशा में, न् यायहनणागयक प्राहधकारी, शोधन अक्षमता न् यासी के प्रहत‍ थापन के 

हलए बोर्ग को हनिशे िगेा । 

 (3) बोर्ग, उपधारा (2) के अधीन न् यायहनणागयक प्राहधकारी के हनिशे के िस दिन के भीतर शोधन अक्षमता न् यासी की 

प्रहत‍ थापन के रूप में हसफाररश करेगा । 

 (4) न् यायहनणागयक प्राहधकारी, हसफाररश प्राप् त करने के चौिि दिन के भीतर उपधारा (3) के अधीन बोर्ग द्वारा हसफाररश 

दकए गए शोधन अक्षमता न् यासी की हनयुह‍ त करेगा । 

 (5) पूवगतर शोधन अक्षमता न् यासी उपधारा (4) के अधीन हनयु‍ त शोधन अक्षमता न् यासी को उसकी हनयुह‍ त की तारीि को 

शोधन अक्षम की संपिा का कब् िा िगेा । 

 (6) न् यायहनणागयक प्राहधकारी ऐसे शोधन अक्षमता न् यासी को, हिसने पि रर‍ त दकया ि,ै ऐसे हनिशे ि ेसकेगा दक वि— 

  (क) शोधन अक्षमता के सम् बन् ध में नए शोधन अक्षमता न् यासी के साथ सभी सूचनाएं साझा करे; और 

  (ि) ऐसे मामलों में, िो अपहेक्षत िों, नए शोधन अक्षमता न् यासी के साथ सियोग करे । 

 (7) उपधारा (4) के अधीन हनयु‍ त शोधन अक्षमता न् यासी अपनी हनयुह‍ त के सात दिन के भीतर लेनिारों की सहमहत और 

शोधन अक्षम को अपनी हनयहु‍ त की सूचना िगेा । 

 (8) इस धारा के अधीन प्रहत‍ थाहपत पूवगतर शोधन अक्षमता न् यासी धारा 148 के उपबन् धों के अनुसार हनमुग‍ त कर दिया 

िाएगा: 

 परन् तु यि धारा तक लागू निीं िोगी यदि ररह‍ त शोधन अक्षमता न् यासी की अ‍ थायी रुग् णता या अ‍ थायी छुट्टी के कारण हई 

िो । 

 148. शोधन अक्षमता न् यासी की हनमुगह‍ त—(1) शोधन अक्षमता न् यासी अपने पि से उस तारीि स ेहनमुग‍ त दकया िाएगा 

हिसको न् यायहनणागयक प्राहधकारी, यथाह‍ थहत, धारा 145, धारा 146 या धारा 147 के अधीन प्रहत‍ थापन, त् यागपत्र या ररह‍ त िोने की 

िशा में नए शोधन अक्षमता न् यासी की हनयुह‍ त करने वाला आिशे पाररत करता ि ै। 

 (2) उपधारा (1) के अधीन हनमुगह‍ त के िोते हए भी, शोधन अक्षमता न् यासी हिसे इस प्रकार हनमुग‍ त दकया गया ि,ै शोधन 

अक्षमता प्रदक्रया के सम् बन् ध में नए शोधन अक्षमता न् यासी के साथ सभी िानकारी साझा करेगा और नए शोधन अक्षमता न् यासी के साथ 

ऐसे मामलों में िो अपेहक्षत िों, सियोग करेगा । 

 (3) शोधन अक्षमता न् यासी, हिसने शोधन अक्षमता प्रदक्रया का प्रशासन पूरा कर हलया िै, उस तारीि से अपने कतगव् यों से 

हनमुग‍ त कर दिया िाएगा, हिसको लेनिारों की सहमहत धारा 137 के अधीन शोधन अक्षमता न् यासी की ररपोिग का अनुमोिन करती ि ै। 

अध् याय 5 
शोधन अक्षम की सपंिा का प्रशासन और उसका हवतरण 

 149. शोधन अक्षमता न् यासी के कृत् य—शोधन अक्षमता न् यासी, इस अध् याय के उपबन् धों के अनुसार हनम् नहलहित कृत् यों का 
पालन करेगा— 

  (क) शोधन अक्षम के कायगकलापों का अन् वषेण करना;  

  (ि) शोधन अक्षम की संपिा का आपन करना; और 

  (ग) शोधन अक्षम की संपिा को हवतररत करना । 

 150. शोधन अक्षमता न् यासी के प्रहत शोधन अक्षम के कतगव् य—(1) शोधन अक्षम, शोधन अक्षमता न् यासी की इस अध् याय के 

अधीन उसके कृत् यों का पालन करने में हनम् नहलहित द्वारा सिायता करेगा,— 

  (क) शोधन अक्षमता न् यासी को उसके कायगकलापों की िानकारी िेकर; 



 65 

  (ि) ऐसे समय, िो अपेहक्षत िों, पर शोधन अक्षमता न् यासी के पास उपह‍ थत रिकर;  

(ग) हनम् नहलहित घिनाओं में दकसी घिना में, िो शोधन अक्षमता प्रारम् भ की तारीि के पश् चात् घरित हई ि,ै 

शोधन अक्षमता न् यासी को सूचना िकेर— 
 (i) शोधन अक्षम द्वारा दकसी सम् पहत्त का अिगन; 

 (ii) शोधन अक्षम पर दकसी सम् पहत्त का न् यागमन; 

 (iii) शोधन अक्षम की आय में वृहद्ध; 

(घ) ऐसी सभी अन् य बातें करके, िो हवहित की िाएं । 

 (2) शोधन अक्षम, ऐसी वृहद्ध, अिगन या न् यागमन के सात दिन के भीतर उपधारा (1) के िंर् (ग) के अधीन आय में वृहद्ध या 

सम् पहत्त के अिगन या न् यागमन की सूचना िगेा । 

 (3) शोधन अक्षम, धारा 138 के अधीन उन् मोचन के पश् चात् भी िंर् (ग) के अधीन कतगव् यों से हभन् न उपधारा (1) के अधीन 

कतगव् यों का हनवगिन करता रिगेा । 

 151. शोधन अक्षमता न् यासी के अहधकार—इस अध् याय के अधीन अपने कृत् यों का पालन करने के प्रयोिन के हलए शोधन 

अक्षमता न् यासी अपने पिीय नाम से— 
(क) प्रत् येक भांहत की सम् पहत्त धारण कर सकेगा; 

(ि) संहविा कर सकेगा; 

(ग) वाि ला सकेगा या उसके हवरुद्ध वाि लाया िा सकेगा; 

(घ) शोधन अक्षम की संपिा के सम् बन् ध में वचनबंध कर सकेगा;  

(ङ) अपनी सिायता करने के हलए व् यह‍ तयों को हनयोहित कर सकेगा;  

(च) कोई मुख तारनामा, हवलेि या अन् य हलित हन‍ पादित कर सकेगा; और 

(छ) कोई ऐसा अन् य कायग कर सकेगा िो उसके अहधकारों के प्रयोग करने के प्रयोिन के हलए या उसके सम् बन् ध में 

आवश् यक या समीचीन िो । 
 152. शोधन अक्षमता न् यासी की साधारण शह‍ तयां—शोधन अक्षमता न् यासी, इस अध् याय के अधीन अपने कृत् यों का हनवगिन 

करते समय,— 

  (क) शोधन अक्षम की संपिा के दकसी भाग का हवक्रय कर सकेगा; 

  (ि) उसके द्वारा प्राप् त दकसी धनराहश के हलए रसीि ि ेसकेगा;   
(ग) शोधन अक्षम को िये ऐसे ऋणों के सम् बन् ध में, िो उसकी संपिा से हमलकर बने िैं, लाभांश को साहबत कर 

सकेगा, उसे समान रूप से क्रमबद्ध कर सकेगा, उसका िावा कर सकेगा और उसका अहिरण कर सकेगा; 

(घ) ििां शोधन अक्षम की संपिा में समाहव‍ ि कोई सम् पहत्त हगरवी या आर्मान के माध् यम से दकसी व् यह‍ त द्वारा 

धाररत की िाती िै, विां ऐसी दकसी सम् पहत्त की बाबत मोचन के अहधकार का प्रयोग उ‍ त व् यह‍ त को सूचना िकेर सुसंगत 

संहविा के अधीन रिते हए कर सकेगा;  

(ङ) ििां शोधन अक्षम की संपिा का कोई भाग दकसी कंपनी की प्रहतभूहतयों से हमलकर बनता िै या दकसी ऐसी 

अन् य सम् पहत्त में िो दकसी व् यह‍ त की बहियों में अंतरणीय ि,ै विां वि उसी हव‍ तार तक सम् पहत्त को अंतरण करने के 

अहधकार का प्रयोग कर सकेगा हिस तक शोधन अक्षम ने इसका प्रयोग दकया िोता यदि वि शोधन अक्षम न हआ िोता; और 

(च) शोधन अक्षम की सम् पहत्त में समाहव‍ ि दकसी ऐसी सम् पहत्त से व् यविार करना हिसके हलए शोधन अक्षम 

फायिाप्रि रूप में उसी रीहत में िकिार ि ैहिसमें उसने इसे व् यवहृत दकया िो । 

 153. कहतपय कायों के हलए लनेिारों का अनमुोिन—इस अध् याय के प्रयोिनों के हलए शोधन अक्षमता न् यासी लेनिारों की 

सहमहत के अनुमोिन को उपाप् त करने के पश् चात,्— 

(क) शोधन अक्षम के दकसी कारबार को विां तक चला सकेगा ििां तक फायिाप्रि रूप में उसका पररसमापन करने 

के हलए आवश् यक िो;  



 66 

(ि) शोधन अक्षम की संपिा में समाहव‍ ि सम् पहत्त से सम् बहन् धत कोई हवहधक कारगवाई या कायगवािी कर सकेगा, 

संह‍ थत कर सकेगा या उसकी प्रहतरक्षा कर सकेगा; 

(ग) प्रहतभूहत िैसे कहतपय अनुबन् धों के अधीन रिते हए भहव‍ य में िये धन की राहश को दकसी सम् पहत्त के हवक्रय के 

हलए प्रहतफल के रूप में ‍ वीकार कर सकेगा; 

(घ) शोधन अक्षम के ऋणों के संिाय के हलए धन िुिाने के प्रयोिन के हलए दकसी सम् पहत्त को बंधक कर सकेगा या 

हगरवी रि सकेगा;  

(ङ) ििां कोई अहधकार, हवकल् प या अन् य शह‍ त शोधन अक्षम की सम् पहत्त का भागरूप िै, विां लेनिारों के फायिे 

के हलए दकसी ऐसी सम् पहत्त को, िो ऐसे अहधकार, हवकल् प या शह‍ त का हवषय ि,ै अहभप्राप् त करने की िहृ‍ ि से संिाय या 

िाहयत् व उपगत कर सकेगा; 

(च) शोधन अक्षम या दकसी ऐसे व् यह‍ त के बीच, हिसने शोधन अक्षम के प्रहत कोई िाहयत् व उपगत दकया िो, 

अह‍ तत् ववान या अह‍ तत् ववान िोन ेके हलए अनुमहत दकसी ऋण को ऐसे हनबंधनों पर, िो करार पाए िाएं, पर माध् य‍ थम् को 

हनर्िग‍ ि कर सकेगा या समझौता कर सकेगा;   

(छ) लेनिारों के साथ कोई समझौता या अन् य ठिराव कर सकेगा, िो समीचीन समझा िाए;  

(ि) शोधन अक्षम की संपिा से उद्भूत िोने वाले या उसके समनुषंगी दकसी िावे की बाबत समझौता या अन् य 

ठिराव कर सकेगा िो वि समीचीन समझे; 

(झ) शोधन अक्षम को— 

 (अ) दिवाहलया की संपिा या उसके दकसी भाग के प्रबंध का पयगवेक्षण करने के हलए; 

 (आ) उसके लेनिारों की फायि ेके हलए उसके कारबार को चलाने के हलए;  

(इ) शोधन अक्षम की संपिा को प्रशाहसत करने के हलए शोधन अक्षमता न् यासी की सिायता करने के 

हलए, 

हनयु‍ त कर सकेगा । 

 154. शोधन अक्षमता न् यासी में शोधन अक्षम की सपंिा का हनहित दकया िाना—(1) शोधन अक्षम की संपिा उसकी हनयुह‍ त 

की तारीि से सीधे िी शोधन अक्षमता न् यासी में हनहित िो िाएगी । 

 (2) उपधारा (1) के अधीन हनहित दकया िाना, दकसी अहभि‍ तांतरण, समनुिशेन या अंतरण के हबना प्रभावी िोगा । 

 155. शोधन अक्षम की सपंिा—(1) शोधन अक्षम की संपिा में,— 

  (क) शोधन अक्षमता प्रारम् भ की तारीि को शोधन अक्षम से सम् बहन् धत या उसमें हनहित सभी सम् पहत्त; 

(ि) ऐसी सम् पहत्त में या उस पर या उसकी बाबत ऐसी सभी शह‍ तयों का, िो शोधन अक्षमता प्रारम् भ की तारीि 

को या धारा 138 के अधीन पाररत उन् मोचन की तारीि से पूवग अपन ेिी फायि ेके हलए शोधन अक्षम द्वारा प्रयोग की गई िों, 

प्रयोग की और कायगवाहियां आरम् भ करने की िहैसयत; और 

(ग) सभी सम् पहत्त, िो इस अध् याय के उपबन् धों में से दकसी उपबन् ध के आधार पर सम् पहत्त में समाहव‍ ि की िाती िैं, 

सहम् महलत िोंगी । 

 (2) शोधन अक्षम की संपिा में हनम् नहलहित सहम् महलत निीं िोगा,— 

  (क) अपवर्िगत आह‍ तयां;  

  (ि) दकसी अन् य व् यह‍ त के हलए न् यास पर शोधन अक्षम द्वारा धृत सम् पहत्त; 

  (ग) दकसी कमगकार या कमगचारी को भहव‍ य हनहध, पेंशन हनहध और उपिान हनहध से शोध् य सभी राहशयां; और 

  (घ) ऐसी आह‍ तयां िो केन् रीय सरकार द्वारा दकसी हवत्तीय से‍ िर हवहनयामक के परामशग से अहधसूहचत की िाएं । 

 156. शोधन अक्षमता न् यासी को सम् पहत्त और ि‍ ताविेों का पररिान—शोधन अक्षम, उसका बैंककार या अहभकताग या कोई 

अन् य व् यह‍ त हिसके कब् िे में कोई सम् पहत्त, बहियां, कागिात या अन् य अहभलेि, हिनकी शोधन अक्षमता न् यासी से शोधन अक्षमता 

प्रदक्रया के प्रयोिनों के हलए कब् िा लेने के अपेक्षा की िाती िै, शोधन अक्षमता न् यासी को उ‍ त सम् पहत्त तथा ि‍ तावेि पररित्त करेगा । 



 67 

 157. शोधन अक्षमता न् यासी द्वारा हनयतं्रण का अिगन—(1) शोधन अक्षमता न् यासी, शोधन अक्षम की संपिा या शोधन अक्षम 

के उन कायगकलापों, हिनका उसस ेसम् बन् ध ि ैया उसके कब् िे में िैं या हनयंत्रण में िैं, से सम् बहन् धत सभी सम् पहत्त, बहियों, कागिातों या 

अन् य अहभलेिों का कब् िा लेगा और उन पर हनयंत्रण रिेगा । 

 (2) ििां शोधन अक्षम की संपिा का कोई भाग अनुयोज् य िावों में चीिों से हमलकर बना िै, विां वे समनुिशेन की दकसी 

सूचना के हबना शोधन अक्षमता न् यासी को समनुिहेशत कर दिया गया समझा िाएगा । 

 158. सम् पहत्त के व् ययन पर हनबधंन—(1) शोधन अक्षमता के हलए आवेिन फाइल करने की तारीि तथा शोधन अक्षमता 

प्रारम् भ की तारीि के बीच की अवहध के िौरान ऋणी द्वारा दकए गए सम् पहत्त का कोई व् ययन शून् य िोगा । 

 (2) उपधारा (1) के अधीन सम् पहत्त का कोई व् ययन, दकसी व् यह‍ त के हवरुद्ध ऐसी सम् पहत्त की बाबत दकसी अहधकार को 

उत् पन् न निीं करेगा भले िी उसने ऐसी सम् पहत्त शोधन अक्षमता प्रारम् भ की तारीि से पूवग— 

  (क) सद्भावपूवगक;  

  (ि) मूल् य के हलए; और 

  (ग) शोधन अक्षमता के हलए आवेिन के फाइल की सूचना के हबना,  

‍ यों न प्राप् त कर ली िो । 

 (3) इस धारा के प्रयोिनों के हलए, “सम् पहत्त” पि से ऋणी की ऐसी सभी सम् पहत्त अहभप्रेत ि,ै चाि ेवि शोधन अक्षम की 

संपिा से हमलकर बनी िो या निीं दकन् तु इसके अन् तगगत दकसी अन् य व् यह‍ त के हलए न् यास में ऋणी द्वारा धृत संपहत्त सहम् महलत          

निीं िोगी । 

 159. शोधन अक्षम की पश् च अर्िगत सपंहत्त—(1) शोधन अक्षमता न् यासी, शोधन अक्षम को नोरिस िकेर शोधन अक्षम की 

संपिा, दकसी पश् च अर्िगत सम् पहत्त के हलए िावा करने का िकिार िोगा । 

 (2) उपधारा (1) के अधीन कोई सूचना,— 

  (क) अपवर्िगत आह‍ तयों, या 

(ि) दकसी ऐसी संपहत्त के सम् बन् ध में, हिसे धारा 138 के अधीन उन् मोचन आिशे दकए िाने के पश् चात् शोधन 

अक्षम द्वारा अर्िगत दकया िाता ि ैया इसे उस पर न् यागत दकया िाता ि,ै 

तामील निीं की िाएगी । 

 (3) उपधारा (2) के अधीन सूचना उस दिन से पंरि दिन के भीतर िी िाएगी हिसको पश् च अर्िगत सम् पहत्त का अिगन या 

न् यागमन शोधन अक्षमता न् यासी की िानकारी में आता ि ै। 

 (4) उपधारा (3) के प्रयोिनों के हलए,— 

(क) ऐसी कोई बात िो शोधन अक्षमता न् यासी की िानकारी में आती िै, उसी समय शोधन अक्षमता न् यासी के 

उत्तरवती की िानकारी में आई हई समझी िाएगी; और 

(ि) ऐसी कोई बात िो ऐसे दकसी व् यह‍ त की िानकारी में, उसके शोधन अक्षमता न् यासी के रूप में हनयु‍ त दकए 

िाने के पूवग आती ि ैतो वि शोधन अक्षमता न् यासी के रूप में उसकी हनयुह‍ त की तारीि को उसकी िानकारी में आई हई 

समझी िाएगी । 

 (5) शोधन अक्षमता न् यासी, इस धारा के आधार पर, ऐसे दकसी व् यह‍ त से, हिसने सद्भाहवक रूप से पश् च अर्िगत सम् पहत्त पर 

मूल् य के हलए और शोधन अक्षमता की सूचना के हबना कोई अहधकार अर्िगत दकया िै, िावा करने का िकिार निीं िोगा । 

 (6) कोई सूचना, उपधारा (3) के अधीन अवहध की समाहप् त के पश् चात् न् यायहनणागयक प्राहधकारी के अनुमोिन से िी तामील 

की िा सकेगी । 

 ‍ प‍ िीकरण—इस धारा के प्रयोिनों के हलए, “पश् च अर्िगत सम् पहत्त” पि से ऐसी कोई सम् पहत्त अहभप्रेत ि ै हिसे शोधन 

अक्षमता प्राम् भ की तारीि से पश् चात् शोधन अक्षम द्वारा अर्िगत दकया गया ि ैया उस पर न् यागत दकया गया ि ै। 

 160. शोधन अक्षम की िभुगर सम् पहत्त—(1) शोधन अक्षमता न् यासी, शोधन अक्षम को या िभुगर सम् पहत्त में हितबद्ध दकसी 

व् यह‍ त को सूचना िेकर दकसी ऐसी िभुगर सम् पहत्त का िावा त् याग कर सकेगा, िो शोधन अक्षम की संपिा का भागरूप ि ै। 

 (2) शोधन अक्षमता न् यासी, इस बात के िोते हए भी उपधारा (1) के अधीन सूचना ि ेसकेगा दक उसने िभुगर सम् पहत्त का 

कब् िा ले हलया ि,ै उसे बेचने का प्रयत् न दकया ि ैया उसके सम् बन् ध में ‍ वाहमत् व के अहधकार का प्रयोग दकया ि ै। 

 (3) उपधारा (1) के अधीन िावा त् याग की सूचना,— 



 68 

(क) ऐसी सूचना की तारीि स े िी, अिावाकृत िभुगर सम् पहत्त की बाबत शोधन अक्षम के अहधकारों, हितों और 

िाहयत् वों का अवधारण करेगी;  

(ि) शोधन अक्षमता न् यासी की हनयुह‍ त की तारीि से िी िभुगर सम् पहत्त की बाबत सभी वैयह‍ तक िाहयत् व से 

शोधन अक्षमता न् यासी को उन् मोहचत करेगी । 

 (4) उपधारा (1) के अधीन िावा त् याग की सूचना ऐसी सम् पहत्त की बाबत निीं िी िाएगी हिसका लेनिारों की सहमहत की 

अनुज्ञा के हबना धारा 155 के अधीन शोधन अक्षम की सम् पहत्त के हलए िावा दकया गया ि ै। 

 (5) उपधारा (1) के अधीन िावा त् याग की सूचना दकसी अन् य व् यह‍ त के अहधकारों या िाहयत् वों को प्रभाहवत निीं करेगी और 

ऐसा कोई व् यह‍ त, हिसको इस धारा के अधीन िावा त् याग के प्रवतगन के पररणाम‍ वरूप कोई िाहन या नुकसान हआ िै, उस िाहन या 

नुकसान की सीमा तक शोधन अक्षम के लेनिार के रूप में समझा िाएगा । 

 ‍ प‍ िीकरण—इस धारा के प्रयोिनों के हलए “िभुगर सम् पहत्त” पि से,— 

  (i) कोई अलाभकारी संहविा; और 

(ii) शोधन अक्षम की संपिा में समाहव‍ ि कोई अन् य सम् पहत्त िो अहवक्रीय िै या तुरंत हवक्रीय निीं िै या ऐसी िै दक 

उससे िावा उत् पन् न िो सके,  

अहभप्रेत ि ै। 

 161. िभुगर सपंहत्त के िावा त् याग की सचूना—(1) धारा 160 के अधीन िावा त् याग की कोई सूचना आवश् यक निीं िोगी, 

यदि— 

(क) िभुगर सम् पहत्त में हितबद्ध दकसी व् यह‍ त ने हलहित में शोधन अक्षमता न् यासी को या उसके पूवगवती को उससे 

यि अपेक्षा करते हए दक वि यि हवहनश् चय करे दक ‍ या िभुगर सम् पहत्त का िावा त् याग दकया िाना चाहिए या निीं, हलहित में 

आवेिन दकया ि;ै और 

(ि) िंर् (क) के अधीन कोई हवहनश् चय सूचना की प्राहप् त के सात दिन के भीतर शोधन अक्षमता न् यासी द्वारा निीं 

हलया गया ि ै। 

(2) कोई िभुगर सम् पहत्त, हिसका उपधारा (1) के अधीन िावा त् याग निीं दकया िा सकता िै, शोधन अक्षम की संपिा का भाग 

समझी िाएगी । 

 ‍ प‍ िीकरण—इस धारा के प्रयोिनों के हलए, िभुगर सम् पहत्त को विां िावा त् याग किा िाता ि,ै ििां उस सम् पहत्त के सम् बन् ध में 

सूचना धारा 160 के अधीन अक्षमता न् यासी द्वारा ि ेिी गई ि ै। 

 162. पट्टाधतृों का िावा त् याग—(1) शोधन अक्षमता न् यासी, दकसी पट्टाधृहत हित का िावा त् याग करने के हलए िकिार तब 

तक निीं िोगा िब तक दक िावा त् याग की सूचना प्रत् येक हितबद्ध व् यह‍ त पर तामील न कर िी गई िो, और— 

(क) हितबद्ध व् यह‍ त द्वारा उस तारीि के पंरि दिन के भीतर, हिसको सूचना तामील की गई थी, पट्टाधृहत हित के 

सम् बन् ध में िावा त् याग का आक्षेप करने वाला कोई आवेिन फाइल निीं दकया गया ि;ै और  

(ि) ििां िावा त् याग का आक्षेप दकया िाने वाला आवेिन हितबद्ध व् यह‍ त द्वारा फाइल दकया गया िै, विां 

न् यायहनणागयक प्राहधकारी ने धारा 163 के अधीन यि हनिशे दिया िै दक िावा त् याग प्रभावी िोगा । 

 (2) ििां न् यायहनणागयक प्राहधकारी, उपधारा (1) के िंर् (ि) के अधीन हनिशे ितेा िै, विां वि दकरायेिार द्वारा दफ‍ सचरों, 

सुधारों तथा पटे्ट से उद्भूत िोने वाले अन् य हवषयों के सम् बन् ध में ऐसा आिशे भी दकया िा सकेगा, िो वि ठीक समझे । 

 163. अिावाकृत सम् पहत्त के हवरुद्ध चनुौती—(1) िावा त् याग को चुनौती िनेे वाला आवेिन, न् यायहनणागयक प्राहधकारी को इस 

धारा के अधीन हनम् नहलहित व् यह‍ तयों द्वारा दकया िा सकेगा— 

  (क) ऐसा कोई व् यह‍ त िो अिावाकृत सम् पहत्त में हित का िावा करता िै; या 

  (ि) ऐसा कोई व् यह‍ त िो अिावाकृत सम् पहत्त की बाबत दकसी िाहयत् व के अधीन ि;ै या 

(ग) ििां अिावाकृत सम् पहत्त कोई हनवासगृि ि,ै ऐसा कोई व् यह‍ त िो शोधन अक्षमता के आवेिन की तारीि को 

उस हनवासगृि के अहधभोग में था या उसका अहधभोग करने के हलए िकिार था । 

 (2) न् यायहनणागयक प्राहधकारी, उपधारा (1) के अधीन दकए गए आवेिन पर उपधारा (1) में उहल् लहित व् यह‍ तयों में से दकसी 

व् यह‍ त को अिावाकृत सम् पहत्त को हनहित करने या उसके पररिान के हलए आिशे कर सकेगा । 



 69 

 (3) न् यायहनणागयक प्राहधकारी, ऐसे व् यह‍ त के पक्ष में, हिसन ेउपधारा (1) के िंर् (ि) के अधीन आवेिन दकया िै, हसवाय 

विां के ऐसा आिशे निीं करेगा ििां न् यायहनणागयक प्राहधकारी को यि प्रतीत िोता ि ैदक व् यह‍ त की प्रहतपूर्तग करने के प्रयोिन के हलए 

ऐसा करना न् यायसंगत िोगा । 

 (4) इस धारा के अधीन आिशे के प्रभाव को धारा 160 की उपधारा (5) के अधीन िावा त् याग के पररणाम‍ वरूप दकसी व् यह‍ त 

द्वारा उठाई गई िाहन या नुकसान का हनधागरण करते समय हिसाब में हलया िाएगा । 

 (5) उपधारा (2) के अधीन दकसी व् यह‍ त में सम् पहत्त हनहित करने वाले आिशे को दकसी पररणाम, समनुिशेन या अंतरण द्वारा 

पूरा दकए िाने की आवश् यकता निीं ि ै। 

 164. अवमलू् यकृत संव् यविार—(1) शोधन अक्षमता न् यासी, शोधन अक्षम और दकसी व् यह‍ त के बीच अवमूल् यकृत संव् यविार 

की बाबत इस धारा के अधीन दकसी आिशे के हलए न् यायहनणागयक प्राहधकारी को आवेिन कर सकेगा । 

 (2) उपधारा (1) में हनर्िग‍ ि अवमूल् यकृत संव् यविार को,— 

(क) शोधन अक्षमता के हलए आवेिन के फाइल करने पर समाप् त िोने वाली िो वषग की अवहध के िौरान दकया 

िाना चाहिए था, और 

(ि) शोधन अक्षमता को आगे प्रवर्तगत दकया िाना चाहिए था । 

 (3) शोधन अक्षमता के हलए आवेिन करने की तारीि से पूवगवती िो वषग की अवहध के िौरान शोधन अक्षम और उसके 

सियोहगयों के बीच दकए गए संव् यविार को इस धारा के अधीन अवमूल् यकृत संव् यविार के रूप में समझा िाएगा । 

 (4) उपधारा (1) के अधीन शोधन अक्षमता न् यासी के आवेिन पर, न् यायहनणागयक प्राहधकारी,— 

  (क) अवमूल् यकृत संव् यविार को शून् य घोहषत करने वाला आिशे पाररत कर सकेगा; 

(ि) ऐसा आिशे पाररत कर सकेगा हिसमें अवमूल् यकृत संव् यविार के भाग के रूप में अंतररत दकसी सम् पहत्त की 

शोधन अक्षम की संपिा के रूप में शोधन अक्षमता न् यासी के पास हनहित दकए िाने की अपेक्षा की गई िै; और 

(ग) कोई ऐसा अन् य आिशे पाररत कर सकेगा हिसे वि उस ह‍ थहत में  प्रत् यावर्तगत िोने के हलए ठीक समझे हिसमें 

यि कर दिया गया िोता यदि शोधन अक्षम द्वारा अवमूल् यकृत संव् यविार न दकया गया िोता । 

 (5) उपधारा (4) के िंर् (क) के अधीन आिशे तब पाररत निीं दकया िाएगा यदि शोधन अक्षम द्वारा यि साहबत कर दिया 

िाता ि ैदक संव् यविार शोधन अक्षम के कारबार के साधारण अनुक्रम में दकया गया था: 

 परन् तु इस उपधारा के उपबन् ध इस धारा की उपधारा (3) के उपबन् धों के अधीन शोधन अक्षम और उसके सियोगी के बीच 

दकए गए संव् यविार को लागू निीं िोंगे । 

 (6) इस धारा के प्रयोिनों के हलए, शोधन अक्षम दकसी व् यह‍ त के साथ अवमूल् यकृत संव् यविार करता िै, यदि,— 

  (क) वि उस व् यह‍ त को िान कर िेता ि;ै 

  (ि) उस व् यह‍ त द्वारा शोधन अक्षम से कोई प्रहतफल प्राप् त निीं दकया िाता ि;ै 

  (ग) यि हववाि के प्रहतफल‍ वरूप ि;ै या 

(घ) यि उस प्रहतफल के हलए िै, हिसका मूल् य धन के रूप में या शोधन अक्षम द्वारा दिए गए प्रहतफल के धन के 

रूप में मूल् य या धन के मूल् य से अत् यहधक कम ि ै। 

 165. अहधमान सवं् यविार—(1) शोधन अक्षमता न् यासी, इस धारा के अधीन दकसी आिशे के हलए न् यायहनणागयक प्राहधकारी 

को आवेिन कर सकेगा यदि शोधन अक्षम ने दकसी व् यह‍ त को अहधमान दिया ि ै। 

 (2) उपधारा (1) के अधीन शोधन अक्षम के दकसी सियोगी को अहधमान िनेे वाला संव् यविार शोधन अक्षमता के आवेिन की 

तारीि को समाप् त िोने वाली िो वषग की अवहध के िौरान सियोगी के साथ शोधन अक्षम द्वारा दकया िाना चाहिए । 

 (3) अहधमान िनेे वाला ऐसा कोई संव् यविार, िो उपधारा (2) के अंतगगत निीं आता िै, शोधन अक्षमता के आवेिन की 

तारीि को समाप् त िोने वाली छि मास की अवहध के िौरान शोधन अक्षम द्वारा दकया िाना चाहिए । 

 (4) उपधारा (2) या उपधारा (3) के अधीन अहधमान िनेे वाले संव् यविार द्वारा प्रवर्तगत दकए िाने वाली शोधन अक्षमता 

प्रदक्रया काररत की िानी चाहिए । 

 (5) उपधारा (1) के अधीन शोधन अक्षमता न् यासी के आवेिन पर न् यायहनणागयक प्राहधकारी,— 

  (क) अहधमान िनेे वाले संव् यविार को शून् य घोहषत करने वाला आिशे पाररत कर सकेगा; 



 70 

(ि) शोधन अक्षम की संपिा के भाग के रूप में शेधन अक्षमता न् यासी के पास हनहित दकए िाने वाले अहधमान िने े

वाले संव् यविार के सम् बन् ध में दकसी सम् पहत्त को अंतररत करने की अपेक्षा करने वाला आिशे पाररत कर सकेगा; और 

(ग) कोई ऐसा अन् य आिशे पाररत कर सकेगा हिससे वि उस ह‍ थहत में प्रत् यावर्तगत िोने के हलए ठीक समझे हिसमें 

यि कर दिया गया िोता यदि शोधन अक्षम द्वारा अहधमान िनेे वाला संव् यविार न दकया गया िोता । 

 (6) न् यायहनणागयक प्राहधकारी, उपधारा (5) के अधीन कोई आिशे तब तक पाररत निीं करेगा िब तक दक शोधन अक्षम दकसी 

व् यह‍ त को अहधमान िनेे के उसके हवहनश् चय में उपधारा (8) के िंर् (ि) के अधीन उस व् यह‍ त के सम् बन् ध में अपने हवहनश् चय को 

प्रभावी करने के हलए कोई चीिब‍ त प्र‍ तुत करने की वांछा द्वारा प्रभाहवत निीं दकया गया िो । 

 (7) उपधारा (6) के प्रयोिनों के हलए, यदि कोई व् यह‍ त शोधन अक्षम का उस समय सियोगी (उसके केवल कमगचारी िोने के 

कारण से अन् यथा) ि,ै िब अहधमान दिया गया था, यि उपधारणा की िाएगी दक शोधन अक्षम उस उपधारा के अधीन उसके हवहनश् चय 

में प्रभाहवत दकया गया था । 

 (8) इस धारा के प्रयोिानों के हलए, दकसी शोधन अक्षम के बारे में यि समझा िाएगा दक उसने दकसी व् यह‍ त को अहधमान 

िनेे वाला संव् यविार दकया ि,ै यदि— 

  (क) व् यह‍ त, शोधन अक्षम के दकसी ऋण का लेनिार या प्रहतभू या प्रत् याभूहत िाता ि;ै और 

(ि) शोधन अक्षम कोई ऐसी बात करता िै या ऐसी दकए िाने वाली दकसी बात से ि‍ त ि,ै हिसका प्रभाव उस 

व् यह‍ त को ऐसी ह‍ थहत में पहचंाना ि ैिो ऋणी को शोधन अक्षम बन िाने की िशा में उस ह‍ थहत से बेितर िोती यदि वि 

उसमें हआ िोता, यदि वि बात न की गई िोती । 

 166. आिशे का प्रभाव—(1) उपधारा (2) के उपबन् धों के अधीन रिते हए धारा 164 या धारा 165 के अधीन न् यायहनणागयक 

प्राहधकारी द्वारा पाररत कोई आिेश,— 

(क) सम् पहत्त में हितबद्ध दकसी व् यह‍ त के हवरुद्ध कोई ऐसा अहधकार सृहित निीं करेगा िो अवमूल् यकृत संव् यविार 

या अहधमान िनेे वाले संव् यविार में अर्िगत की गई थी चाि ेवि ऐसा व् यह‍ त ि ैया निीं हिसके साथ शोधन अक्षम ने ऐसा 

संव् यविार दकया ि;ै और 

(ि) दकसी व् यह‍ त से यि अपेक्षा निीं करेगा दक वि अवमूल् यकृत संव् यविार से या अहधमान िनेे वाले संव् यविार से 

फायिा की बाबत शोधन अक्षमता न् यासी को दकसी राहश का संिाय करे चाि ेवि ऐसा व् यह‍ त ि ैया निीं हिसके साथ शोधन 

अक्षम ने ऐसा संव् यविार दकया ि ै। 

 (2) उपधारा (1) का उपबन् ध केवल तभी लागू िोगा यदि हित अर्िगत या फायिा प्राप् त— 

  (क) सद्भावपूवगक;  

  (ि) मूल् य के हलए;  

  (ग) इस सूचना के हबना दक शोधन अक्षम ने अवमूल् य पर या अहधमान िनेे के हलए संव् यविार दकया िै;  

(घ) इस सूचना के हबना दक शोधन अक्षम ने शोधन अक्षमता के हलए आवेिन फाइल दकया ि ैया शोधन अक्षमता 

आिशे पाररत दकया ि;ै और 

(ङ) दकसी ऐसे व् यह‍ त द्वारा हित अर्िगत करने या फायिा प्राप् त करने के समय शोधन अक्षम का सियोगी निीं था,  

दकया गया था । 

 (3) उपधारा (1) के अधीन शोधन अक्षमता न् यासी को संित्त की िाने वाली कोई भी राहश शोधन अक्षम की संपिा में 

सहम् महलत की िाएगी । 

 167. उद्दापन के तौर पर प्रत् यय संव् यविार—(1) उपधारा (6) के अधीन रिते हए शोधन अक्षमता न् यासी द्वारा दकए गए 

आवेिन पर, न् यायहनणागयक प्राहधकारी, उद्दापन के तौर पर उन प्रत् यय संव् यविारों की बाबत इस धारा के अधीन आिशे कर सकेगा 

हिनका शोधन अक्षम पक्षकार ि ैया पक्षकार रिा ि ै। 

 (2) उपधारा (1) के अधीन संव् यविार, शोधन अक्षमता प्रारम् भ की तारीि को समाप् त िोने वाली िो वषग की अवहध के िौरान 

शोधन अक्षम द्वारा दकए िाने चाहिएं । 

 (3) न् यायहनणागयक प्राहधकारी का आिशे,— 

  (क) संव् यविार द्वारा सृहित दकसी संपूणग ऋण या उसके भाग को अपा‍ त कर सकेगा; 

(ि) संव् यविार के हनबंधनों में फेरफार कर सकेगा या उन हनबंधनों में फेरफार कर सकेगा हिन पर संव् यविार के 

प्रयोिन के हलए दकसी प्रहतभूहत को धाररत दकया गया िै; 



 71 

(ग) दकसी ऐसे व् यह‍ त से, हिसे दकसी संव् यविार के अधीन शोधन अक्षम द्वारा संिाय दकया गया िै, शोधन अक्षमता 

न् यासी को राहश का संिाय करने की अपेक्षा कर सकेगा । 

(घ) दकसी व् यह‍ त से संव् यविार के प्रयोिनों के हलए प्रहतभूहत के रूप में धाररत शोधन अक्षम की दकसी सम् पहत्त को 

शोधन अक्षमता न् यासी को अभ् यर्पगत करने की अपेक्षा कर सकेगा । 

 (4) शोधन अक्षमता न् यासी को संित्त कोई राहश या अभ् यर्पगत सम् पहत्त को शोधन अक्षम की संपिा में सहम् महलत दकया  

िाएगा । 

 (5) इस धारा के प्रयोिनों के हलए, उद्दापन के तौर पर प्रत् यय संव् यविार,— 

  (क) दिए गए प्रत् यय की बाबत अहतशय संिाय करने के हलए शोधन अक्षम से अपेक्षा करने वाले हनबंधनों पर; या 

  (ि) िो संहविाओं से सम् बहन् धत हवहध के हसद्धांतों के अधीन हनतातं अनुहचत िै, 

दकसी व् यह‍ त द्वारा शोधन अक्षम को प्रत् यय के उपबन् ध के हलए या उसे अंतवगहलत करने वाला संव् यविार ि ै। 

 (6) ऐसे ऋण के सम् बन् ध में प्रवृत्त हवहध के अनुपालन में हवत्तीय सवेाओं के हलए हवहनयहमत दकसी व् यह‍ त द्वारा दिए गए 

दकसी ऋण को इस धारा के अधीन उद्दापन प्रत् यय संव् यविार के रूप में निीं समझा िाएगा । 

 168. सहंविाओं के अधीन बाध् यताएं—(1) यि धारा विां लागू िोगी ििां संहविा शोधन अक्षमता प्रारम् भ की तारीि से पूवग 

दकसी व् यह‍ त के साथ शोधन अक्षम द्वारा की गई ि ै। 

 (2) उपधारा (1) के अधीन शोधन अक्षम से हभन् न संहविा का कोई पक्षकार न् यायहनणागयक प्राहधकारी को,— 

  (क) संहविा के अधीन आवेिक या शोधन अक्षम की बाध् यताओं को उन् मोहचत करने वाले आिशे के हलए, और 

(ि) संहविा के अपालन के हलए या अन् यथा पक्षकार या शोधन अक्षम द्वारा नुकसाहनयों के संिाय के हलए,  

आवेिन कर सकेगा ।  

 (3) उपधारा (2) के िंर् (ि) के अधीन आिशे के आधार पर शोधन अक्षम द्वारा संिये कोई भी नुकसानी शोधन अक्षमता ऋण 

के रूप में साहबत करने योग् य िोगी । 

 (4) िब कोई शोधन अक्षम, इस धारा के अधीन संहविा करने के हलए दकसी अन् य व् यह‍ त के साथ संयु‍ त रूप से एक पक्षकार 

ि ैतो वि व् यह‍ त, शोधन अक्षम के संयोिन के हबना संहविा की बाबत वाि ला सकेगा या उसके हवरुद्ध वाि लाया िा सकेगा । 

 169. शोधन अक्षम की मतृ् यु पर कायगवाहियों का चाल ू रिना—यदि दकसी शोधन अक्षम की मृत् यु िो िाती ि ैतो शोधन 

अक्षमता कायगवाहियां इस प्रकार चलती रिेंगी मानो वि िीहवत था । 

 170. मतृ शोधन अक्षम की सपंिा का प्रशासन—(1) शोधन अक्षम की संपिा के प्रशासन और हवतरण से सम् बहन् धत अध् याय 5 

के सभी उपबन् ध, ििां तक वे लागू िोते िैं, मृत शोधन अक्षम की संपिा के प्रशासन को लागू िोंगे । 

 (2) दकसी मृत शोधन अक्षम की संपिा का प्रशासन करते समय, शोधन अक्षमता न् यासी उनके द्वारा उपगत उहचत अंत् येह‍ ि 

तथा वसीयती िचों के संिाय के हलए मृत शोधन अक्षम के हवहधक प्रहतहनहध के िावों को ध् यान में रिेगा । 

 (3) उपधारा (2) के अधीन िावे धारा 178 के अधीन िी गई पूर्वगकता में प्रहतभूत लेनिारों को एक िी श्रेणी में रिेगा । 

 (4) यदि मृत शोधन अक्षम की संपिा के प्रशासन पर अहधशेष, मृत शोधन अक्षम से शोध् य सभी ऋणों का पूणग संिाय करने के 

पश् चात् शोधन अक्षमता न् यासी के पास कोई अहधशेष बचता िै, िो धारा 178 के अधीन यथा उपबंहन् धत प्रशासन और ब् याि के िचों के 

साथ ि ैतो ऐसा अहधशेष मृत शोधन अक्षम की संपिा के हवहधक प्रहतहनहधयों को संित्त दकया िाएगा या ऐसी रीहत में व् यवहृत दकया 

िाएगा, िो हवहित की िाए । 

 171. ऋण का सबतू—(1) शोधन अक्षमता न् यासी धारा 132 के अधीन लेनिारों की सूची तैयार करने के चौिि दिन के भीतर 

ऋण के सबूत प्र‍ तुत करने के हलए प्रत् येक लेनिार को सूचना िगेा । 

 (2) ऋण के सबूत— 

(क) में लेनिार से यि अपेक्षा की िाएगी दक वि ऋण की पूणग हवहशह‍ ियां ि ेहिनके अंतगगत वि तारीि हिसको 

ऋण की संहविा की गई थी और वि मूल् य हिस पर वि व् यह‍ त उसका हनधागरण करता ि;ै  

(ि) में लेनिार से यि अपेक्षा की िाएगी दक वि प्रहतभूहत की ऐसी पूणग हवहशह‍ ियां ि ेहिनके अंतगगत वि तारीि 

हिसको प्रहतभूहत िी गई थी और वि मूल् य हिस पर वि व् यह‍ त उसका हनधागरण करता ि;ै  

(ग) ऐसे प्ररूप और रीहत में िोगा िो हवहित की िाए । 

(3) यदि लेनिार शोधन अक्षम के हवरुद्ध हर्क्री धारक ि ैतो हर्क्री की एक प्रहत, ऋण का हवहधमान् य सबूत िोगा । 



 72 

(4) ििां ऋण पर ब् याि लगता ि,ै विां वि ब् याि उसके हसवाय ििां तक ब् याि शोधन अक्षमता प्रारम् भ की तारीि के 

पश् चात् दकसी अवहध की बाबत िेय िै, ऋण के भाग के रूप में साहबत दकए िाने के योग् य िोगा । 

(5) शोधन अक्षमता न् यासी दकसी ऐसे शोधन अक्षमता ऋण के मूल् य का प्रा‍ कलन करेगा हिसका कोई हवहनर्िग‍ ि मूल् य            

निीं  ि ै।  

(6) धारा 5 के अधीन शोधन अक्षमता न् यासी द्वारा समनुिहेशत मूल् य सम् बद्ध लेनिार द्वारा साहबत करने योग् य रकम िोगी । 

(7) कोई लेनिार दकसी ऋण को विां साहबत कर सकेगा ििां संिाय, शोधन अक्षमता के प्रारम् भ की तारीि से पश् चात्वती 

तारीि को इस प्रकार शोध् य िो गया िोता मानो वि वतगमान में िये िोता और ऐसी रीहत में लाभांश प्राप् त कर सके, िो हवहित दकया 

िाए । 

(8) ििां शोधन अक्षमता न् यासी उपधारा (1) के अधीन सूचना तामील करता ि ैऔर वि व् यह‍ त हिस पर सूचना तामील की 

िाती ि,ै सूचना की ऐसी तामील की तारीि के पश् चात् तीस दिन के भीतर प्रहतभूहत का सबूत फाइल निीं करता ि ैतो शोधन अक्षमता 

न् यासी, न् यायहनणागयक प्राहधकारी की अनुमहत से ऐसी दकसी सम् पहत्त का हवक्रय कर सकेगा या उसका व् ययन कर सकेगा िो उस 

प्रहतभूहत से मु‍ त प्रहतभूहत के अध् यधीन थी । 

172. प्रहतभतू लनेिारों द्वारा ऋण का सबतू—(1) ििां प्रहतभूत लेनिार अपनी प्रहतभूहत को आप् त करता ि,ै विां वि उसको 

शोध् य अहतशेष का सबूत प्र‍ तुत कर सकेगा । 

(2) ििां प्रहतभूत लेनिार अपनी प्रहतभूहत को लेनिारों के साधारण फायि ेके शोधन अक्षमता न् यासी को अभ् यर्पगत कर ितेा 

ि,ै विां वि अपने सम् पूणग िावे का सबूत प्र‍ तुत करेगा । 

173. पार‍ पररक प्रत् यय और मिुरा—(1) ििां शोधन अक्षमता के प्रारम् भ की तारीि से पूवग शोधन अक्षम और दकसी लेनिार 

के बीच पार‍ पररक व् यौिार हए िैं, विां शोधन अक्षमता न् यासी— 

(क) उसको हिसाब में लेगा िो पार‍ पररक व् यौिारों की बाबत प्रत् येक पक्षकार से िसूरे पक्षकार को शोध् य िैं और 

एक पक्षकार से शोध् य राहश का िसूरे पक्षकार से शोध् य राहश के प्रहत मुिरा दकया िाएगा; और 

(ि) केवल अहतशेष, शोधन अक्षमता ऋण के रूप में या शोधन अक्षम की संपिा के भाग के रूप में शोधन अक्षमता 

न् यासी को संिये रकम के रूप में साहबत करने योग् य िोगा । 

 (2) दकसी अन् य पक्षकार को शोधन अक्षम से शोध् य राहश को उपधारा (1) के अधीन शोधन अक्षमता न् यासी द्वारा हिसाब में 

िी गई राहश में सहम् महलत निीं दकया िाएगा, यदि उस अन् य पक्षकार के पास उस समय यि सूचना थी िब वे शोध् य िो गए थे दक 

शोधन अक्षम से सम् बहन् धत शोधन अक्षमता के हलए आवेिन लंहबत था । 

 174. अतंररम लाभाशं का हवतरण—(1) िब कभी शोधन अक्षमता न् यासी के पास पयागप् त हनहधयां िैं तो वि उन शोधन 

अक्षमता ऋणों की बाबत, हिनको उन् िोंने क्रमश: साहबत कर दिया िै, लेनिारों के बीच घोषणा कर सकेगा और अंतररम लाभांश का 

हवतरण कर सकेगा । 

 (2) ििां शोधन अक्षमता न् यासी ने दकसी अंतररम लाभांश की घोषणा कर िी िै, विां वि ऐसे लाभांश और ऐसी रीहत की 

सूचना िगेा हिसमें उसे हवतररत करने का कैसे प्र‍ ताव दकया गया ि ै। 

 (3) अंतररम लाभांश की संगणना और हवतरण में शोधन अक्षमता न् यासी— 

(क) दकसी ऐसे शोधन अक्षमता ऋण के हलए उपबंध करेगा, िो उसको उन व् यह‍ तयों से, शोध् य िोने वाले प्रतीत 

िों, हिनको अपने हनवास ‍ थान की िरूी के कारण हनहवित्त करने के हलए पयागप् त समय न हमला िो और अपने ऋण हसद्ध न 

कर सके िों; और 

(ि) दकन् िीं ऐसे शोधन अक्षमता ऋणों के हलए उपबन् ध करेगा िो उन िावों के हवषय में िैं हिन् िें अभी तक 

अवधाररत निीं दकया गया िै; 

(ग) हववािा‍ पि सबूतों और िावों के हलए उपबन् ध करेगा; और 

(घ) शोधन अक्षम की संपिा के प्रशासन के हलए आवश् यक िचों के हलए उपबन् ध करेगा । 

 175. सम् पहत्त का हवतरण—(1) शोधन अक्षमता न् यासी, लेनिारों की सहमहत के अनमुोिन स े दकसी सम् पहत्त को उसके 

हवद्यमान रूप में उसके प्रा‍ कहलत मूल् य के अनुसार, लेनिारों में हवभाहित कर सकेगा हिसे उसकी हवहश‍ ि प्रकृहत या अन् य हवशेष 

पररह‍ थहतयों के कारण तुरन् त या फायिाप्रि रूप में हवक्रीत निीं दकया िा सकता । 

 (2) प्रत् येक संव् यविार के हलए, शोधन अक्षमता न् यासी और सद्भावपूवगक शोधन अक्षमता न् यासी के साथ व् यौिार करने वाले 

व् यह‍ त द्वारा उपधारा (1) के अधीन अनुमोिन की ईप् सा की िाएगी और उस मूल् य के हलए िांच करने की यि अपेक्षा निीं की िाएगी 

दक ‍ या उपधारा (1) के अधीन कोई अपेहक्षत अनुमोिन ि ेदिया गया ि ैया निीं । 



 73 

 (3) ििां शोधन अक्षमता न् यासी न ेलेनिारों की सहमहत के अनुमोिन के हबना कोई बात की िै, विां सहमहत, शोधन अक्षम की 

संपिा में से अपने िचों को चुकाने के हलए शोधन अक्षमता न् यासी के कायग का अनुसमथगन कर सकेगी । 

 (4) लेनिारों की सहमहत उपधारा (3) के अधीन शोधन अक्षमता न् यासी के कायग को तब तक अनुसमर्थगत निीं करेगी िब तक 

दक उसका यि समाधान निीं िो िाता ि ैदक शोधन अक्षमता न् यासी ने अत् यावश् यकता की िशा में कायग दकया ि ैऔर अनुहचत हवलम् ब के 

हबना अपने अनुसमथगन की ईप् सा की ि ै। 

 176. अहंतम लाभाशं—(1) ििां शोधन अक्षमता न् यासी ने शोधन अक्षम की सम् पूणग संपिा को या उसके उतने भाग को िो 

शोधन अक्षमता न् यासी की राय में आप् त दकया िा सकता था, आप् त कर हलया ि,ै विां वि— 

  (क) अंहतम लाभांश घोहषत करने के अपने आशय की सूचना िगेा; या 

  (ि) यि सूचना िगेा दक दकसी लाभांश या अहतरर‍ त लाभांश की घोषणा निीं की िाएगी । 

 (2) उपधारा (1) के अधीन, सूचना में ऐसी हवहशह‍ ियां अतंर्वग‍ ि िोंगी िो हवहित की िाएं और सूचना में हवहनर्िग‍ ि अंहतम 

तारीि तक शोधन अक्षम की संपिा के हवरुद्ध सभी िावों को हसद्ध दकए िाने की अपेक्षा की िाएगी । 

 (3) न् यायहनणागयक प्राहधकारी, शोधन अक्षम की संपिा के प्रशासन में हितबद्ध दकसी व् यह‍ त के आवेिन पर उपधारा (2) में 

हनर्िग‍ ि अंहतम तारीि को, ‍ थहगत कर सकेगा । 

 (4) उपधारा (2) में हनर्िग‍ ि अंहतम तारीि के पश् चात्, शोधन अक्षमता न् यासी— 

  (क) शोधन अक्षम की संपिा में शोधन अक्षमता के दकन् िीं बकाया िचों को चुकाएगा; और 

(ि) यदि वि अंहतम लाभांश घोहषत करने का आशय रिता िै तो वि, उस लाभांश को घोहषत करेगा तथा उसे ऐसे 

लेनिारों में, हिन् िोंने दकन् िीं अन् य व् यह‍ तयों के िावों पर ध् यान दिए हबना अपने ऋण साहबत कर दिए िैं, हवतररत करेगा । 

 (5) यदि शोधन अक्षम के सभी लेनिारों को ब् याि सहित पूणग संिाय करने और शोधन अक्षमता के िचों के संिाय करने के 

पश् चात् कोई अहधशेष बचता ि ैतो शोधन अक्षम उस अहधशेष के हलए िकिार िोगा । 

 (6) ििां शोधन अक्षमता आिशे दकसी फमग में एक भागीिार के सम् बन् ध में पाररत दकया गया ि ैविां कोई लेनिार, हिसको 

शोधन अक्षम, फमग में अन् य भागीिारों के साथ संयु‍ त रूप से ऋणी ि ैया उनमें से कोई भी शोधन अक्षम की पृथक् सम् पहत्त में से कोई 

लाभांश तब तक प्राप् त निीं करेगा िब तक दक सभी पृथक् लेनिारों ने अपने-अपने ऋणों की पूरी रकम प्राप् त निीं कर ली िो । 

 177. लनेिारों के िावे—(1) कोई लेनिार, हिसने दकसी लाभांश की घोषणा से पूवग अपना ऋण साहबत निीं दकया ि ैइस 

कारण दक उसने इसमें भाग निीं हलया िै, उस लाभांश या उसके ऋण को साहबत करने से पिले घोहषत दकसी अन् य लाभांश के हवतरण 

में बाधा र्ालने का िकिार निीं िै, दकन् तु— 

(क) िब उसने ऋण साहबत कर दिया ि ैतो वि दकसी ऐसे लाभांश या लाभांशषों का संिाय दकए िाने का िकिार 

िोगा हिन् िें वि दकसी अहतरर‍ त लाभांश के संिाय के हलए तत् समय उपलब् ध दकसी धनराहश में से प्राप् त करने में असफल हआ 

ि;ै और 

(ि) कोई लाभांश या उसको संिये कोई लाभांश, दकसी ऐसे अहतरर‍ त लाभांश के संिाय के हलए उस धनराहश को 

उपयोहित दकए िाने से पूवग संित्त दकया िाएगा । 

 (2) दकसी लाभांश के हलए शोधन अक्षमता न् यासी के हवरुद्ध कोई कारगवाई की िाएगी दकन् तु यदि शोधन अक्षमता न् यासी 

उपधारा (1) के अधीन संिये लाभांश का संिाय करने से इंकार करता ि ैतो न् यायहनणागयक प्राहधकारी उसे यि आिशे िे सकेगा दक 

वि— 

  (क) लाभांश का संिाय करे; और 

  (ि) अपनी िी धनराहश में से— 

(i) लाभांश पर ब् याि का; और 

(ii) उन कायगवाहियों के, हिनमें संिाय करने का आिशे पाररत दकया गया िै, िचों का, संिाय करे । 

 178. ऋणों के सिंाय की परू्वगकता—(1) तत् समय प्रवृत्त संसि ्या राज् य हवधान-मंर्ल द्वारा अहधहनयहमत दकसी हवहध में 

अंतर्वग‍ ि दकसी तत् प्रहतकूल बात के िोते हए भी, अंहतम लाभांश के हवतरण में हनम् नहलहित ऋण सभी अन् य ऋणों से पूर्वगकता के क्रम में 

संित्त दकए िाएंगे— 

  (क) पिला, शोधन अक्षमता प्रदक्रया के हलए शोधन अक्षमता न् यासी द्वारा पूणगत: उपगत लागतें तथा िचे;  

  (ि) िसूरा— 



 74 

(i) शोधन अक्षमता प्रारम् भ की तारीि से पूवगवती चौबीस मास की अवहध के हलए शोधन अक्षम के 

कमगकारों को शोध् य; और 

(ii) प्रहतभूत लेनिारों को िये ऋण;  

(ग) तीसरा, शोधन अक्षमता प्रारम् भ की तारीि से पवूग बारि मास की अवहध या उसके दकसी भाग के हलए शोधन 

अक्षम के कमगकारों से हभन् न कमगचाररयों को िये मििरूी और कोई भी असंित्त शोध् य;  

(घ) चौथा, शोधन अक्षमता प्रारम् भ की तारीि से पूवग िो वषग की पूरी अवहध या उसके दकसी भाग की बाबत 

केन् रीय सरकार और राज् य सरकार को िये रकम, हिसके अन् तगगत भारत की संहचत हनहध और दकसी राज् य की संहचत हनहध, 

यदि कोई िो, के लेिे में प्राप् त रकम भी ि;ै  

(ङ) अंत में, अप्रहतभूत ऋणों सहित शोधन अक्षम द्वारा िये सभी अन् य ऋण । 

(2) उपधारा (1) में हवहनर्िग‍ ि प्रत् येक वगग में ऋण, उस उपधारा में वर्णगत क्रम के रैंक में िोगा दकन् तु उसी वगग में ऋणों को 

उनके बीच समान रैंक दिया िाएगा और उनका पूणगतया संिाय तब तक निीं दकया िाएगा िब तब दक शोधन अक्षम की संपिा उनको 

चुकाने के हलए पयागप् त न िो, उस िशा में उनके बीच बराबर अनुपात में उसे कम दकया िाएगा । 

(3) ििां दकसी लेनिार ने कोई क्षहतपूर्तग िी ि ैया धनराहशयों का कोई संिाय दकया ि ैहिसके आधार पर शोधन अक्षम की 

दकसी आह‍ त का आपन दकया गया िै, संरहक्षत दकया गया ि ैया परररहक्षत दकया गया ि ैविां न् यायहनणागयक प्राहधकारी, ऐसा आिशे 

कर सकेगा िैसा वि ऐसी आह‍ त के हवतरण के सम् बन् ध में उस लेनिार को, अन् य लेनिारों के मुकाबले में ऐसा करने में उसके द्वारा उठाए 

गए िोहिमों के प्रहतफल‍ वरूप लाभ िनेे की िहृ‍ ि से न् यायोहचत समझे । 

(4) अप्रहतभूत लेनिार पर‍ पर तब तक बराबर रैंक के िोंगे िब तक दक वि संहविात् मक रूप से ऐसे लेनिारों द्वारा तत् प्रहतकूल 

करार न दकया गया िो । 

(5) उपधारा (1) के अधीन ऋणों का संिाय करने के पश् चात् बचे हए दकसी अहधशेष का उपयोिन उन अवहधयों की बाबत 

उन ऋणों पर ब् याि का संिाय करने के हलए दकया िाएगा हिनके िौरान वि शोधन अक्षमता प्रारम् भ िोने की तारीि से बकाया ि ै। 

(6) उपधारा (5) के अधीन ब् याि संिाय, ऋण की प्रकृहत को ध् यान में रिे हबना समान रैंक के िोंगे । 

(7) भागीिारों की िशा में, भागीिारी सम् पहत्त, भागीिारी ऋणों के संिाय में सवगप्रथम उपयोहित िोगी और प्रत् येक भागीिार 

की पृथक् सम् पहत्त सवगप्रथम उसके पृथक् ऋणों के संिाय में उपयोहित िोगी । 

 (8) ििां भागीिारों की पृथक् सम् पहत्त का अहधशेष ि ैविां उससे भागीिारी सम् पहत्त के रूप मे व् यविार दकया िाएगा; और 

ििां भागीिारी सम् पहत्त का अहधशेष ि,ै विां उस भागीिारी सम् पहत्त में प्रत् येक भागीिार के अहधकारों और हितों के अनुपात में    

अपनी-अपनी पृथक् सम् पहत्त के भाग के रूप में व् यौिार दकया िाएगा । 

अध् याय 6 

व् यह‍ िकों और भागीिारी फमों के हलए न् यायहनणागयक प्राहधकारी 

 179. व् यह‍ िकों और भागीिारी फमों के हलए न् यायहनणागयक प्राहधकारी—(1) न् यायहनणागयक प्रहधकारी धारा 60 के उपबंधों के 

अधीन रिते हए, व् यह‍ िकों और फमों के दिवाला हवषयों के सम् बन् ध में, ऋण वसूली अहधकरण िोगा हिसकी राज् यक्षेत्रीय अहधकाररता 

उस ‍ थान पर िोगी ििां व् यह‍ िक ऋणी वा‍ तहवक रूप से और ‍ वे‍ छया हनवास करता ि ैया अपना कारबार चलाता ि ैया अहभलाभ 

के हलए ‍ वयं काम करता ि ैऔर वि ऐसे व् यह‍ त के सम् बन् ध में इस अहधहनयम के अधीन आवेिन ‍ वीकार कर सकता ि ै। 

 (2) ऋण वसूली अहधकरण को तत् समय प्रवृत्त दकसी अन् य हवहध में अंतर्वग‍ ि दकसी बात के िोते हए भी, हनम् नहलहित को 

ििण करने या उसका हनपिान करने की अहधकाररता िोगी— 

  (क) व् यह‍ िक ऋणी द्वारा या उसके हवरुद्ध कोई वाि या कायगवािी;  

  (ि) व् यह‍ िक ऋणी द्वारा या उसके हवरुद्ध दकया गया कोई िावा;  

(ग) इस संहिता के अधीन व् यह‍ िक ऋणी या फमग के दिवाहलयापन और शोधन अक्षमता के कारण या उसके सम् बन् ध 

में उद्भूत अिताओं का कोई प्रश् न या कोई अन् य प्रश् न चाि ेवि हवहध का िो या तथ् यों का । 

 (3) पररसीमा अहधहनयम, 1963 (1963 का 14) या तत् समय प्रवृत्त दकसी अन् य हवहध में अंतर्वग‍ ि दकसी बात के िोत ेहए भी 

दकसी ऋणी के नाम से या उसकी ओर से दकसी वाि या आवेिन के हलए हवहनर्िग‍ ि पररसीमा की अवहध की संगणना करने में, हिसके 

हलए इस भाग के अधीन अहध‍ थगन का आिशे दकया गया ि,ै वि कालावहध, हिसके िौरान ऐसा अहध‍ थगन प्रवृत्त ि,ै अपवर्िगत कर िी 

िाएगी । 



 75 

 180. हसहवल न् यायालय को अहधकाररता न िोना—(1) दकसी हसहवल न् यायालय या प्राहधकारी को दकसी ऐसे हवषय के 

सम् बन् ध में वाि या कायगवाहियों को ‍ वीकार करने की अहधकाररता निीं िोगी हिन पर ऋण वसूली अहधकरण या ऋण वसूली अपील 

अहधकरण को इस संहिता के अधीन अहधकाररता ि ै। 

 (2) दकसी न् यायालय, अहधकरण या प्राहधकारी द्वारा ऋण वसूली अहधकरण या ऋण वसूली अपील अहधकरण को इस संहिता 

के द्वारा या इसके अधीन प्रित्त शह‍ तयों के अनुसरण में की गई या की िाने वाली दकसी कारगवाई के हलए कोई व् यािशे अनुित्त निीं 

दकया िाएगा । 

 181. ऋण वसूली अपील अहधकरण को अपील—(1) इस सहंिता के अधीन ऋण वसूली अहधकरण के दकसी आिशे पर कोई 

अपील ऋण वसूली अपील अहधकरण के समक्ष तीस दिन के भीतर फाइल की िाएगी । 

 (2) ऋण वसूली अपील अहधकरण, यदि उसका यि समाधान िो िाता ि ैदक दकसी व् यह‍ त को तीस दिन के भीतर अपील 

फाइल करने से पयागप् त कारणों से हनवाररत दकया गया था तो वि पन् रि दिन से अनहधक की और अवहध के भीतर अपील फाइल करना 

अनुज्ञात कर सकेगा । 

 182. उ‍ चतम न् यायालय को अपील—(1) ऋण वसूली अपील अहधकरण के दकसी आिशे से इस संहिता के अधीन हवहध के 

प्रश् न पर कोई अपील उ‍ चतम न् यायालय के समक्ष पैंतालीस दिन की अवहध के भीतर फाइल की िाएगी । 

 (2) उ‍ चतम न् यायालय, यदि उसका यि समाधान िो िाता ि ैदक दकसी व् यह‍ त को पैंतालीस दिन के भीतर अपील फाइल 

करने से पयागप् त कारणों से हनवाररत दकया गया था तो वि पन् रि दिन से अनहधक की और अवहध के भीतर अपील फाइल करना 

अनुज्ञात कर सकेगा । 

 183. आविेनों का शीघ्र हनपिान—िब इस संहिता में हवहनर्िग‍ ि अवहध के भीतर दकसी आवेिन का हनपिान निीं दकया 

िाता ि ैया कोई आिशे पाररत निीं दकया िाता ि ैतो, यथाह‍ थहत, ऋण वसूली अहधकरण या ऋण वसूली अपील अहधकरण ऐसी 

हवहनर्िग‍ ि अवहध के भीतर ऐसा न करने के कारणों को अहभहलहित करेगा; और ऋण वसूली अपील अहधकरण का अध् यक्ष इस प्रकार 

अहभहलहित कारणों से ध् यान में रिते हए संहिता में हवहनर्िग‍ ि अवहध का हव‍ तार कर सकेगा, दकन् तु िो िस दिन से अहधक निीं   

िोगी । 

अध् याय 7 

अपराध और शाह‍ तया ं

 184. लनेिार द्वारा दिवाला समाधान प्रदक्रया में हमथ् या सचूना, आदि के हलए िंर्—(1) यदि कोई ऋणी या लेनिार ऐसी 

सूचना प्रिान करता ि ैिो समाधान वृहत्तक के पास दकन् िीं ताहववक हवहशह‍ ियों में हमथ् या ि ैतो वि कारावास से, िो एक वषग तक का 

िो सकेगा या िुमागने से िो पांच लाि रुपए तक का िो सकेगा, या िोनों से, िरं्नीय िोगा । 

 (2) यदि कोई लेनिार, दकसी ऋणी से कोई धन, सम् पहत्त या प्रहतभूहत ‍ वीकार करके बेईमानी से दकसी प्रहतसंिाय योिना के 

पक्ष में मत िनेे का वचन ितेा िै, तो वि कारावास से, िो िो वषग तक का िो सकेगा या, यथाह‍ थहत, िुमागने से, िो ऐसी रकम का तीन 

गुना या लेनिार द्वारा ‍ वीकृत धन, सम् पहत्त या प्रहतभूहत के समतुल् य तक िो सकेगा या िोनों से िरं्नीय िोगा: 

 परन् तु ििां ऐसी रकम पररमाण निीं ि ैविां िुमागने की कुल रकम पांच लाि रुपए से अहधक निीं िोगी । 

 185. उपबन् धों के उल् लंघन के हलए िरं्—यदि कोई दिवाला वृहत्तक िानबूझकर इस भाग के उपबन् धों का उल् लंघन करता िै 

तो वि कारावास से, िो छि मास तक का िो सकेगा या िुमागने से, िो एक लाि रुपए से कम निीं िोगा दकन् तु िो पांच लाि रुपए तक 

का िो सकेगा या िोनों से िंर्नीय िोगा । 

 186. शोधन अक्षम द्वारा हमथ् या सचूना, हछपाव, आदि के हलए िंर्—यदि शोधन अक्षम— 

(क) धारा 122 के अधीन शोधन अक्षमता के हलए आवेिन करते हए या शोधन अक्षमता कायगवािी के िौरान कोई 

सूचना प्रिान करते हए, िानबूझकर हमथ् या व् यपिशेन करता िै या िानबूझकर दकसी ताहववक सूचना का लोप करता ि ैया 

उसे हछपाता ि ैतो वि कारावास से, िो छि मास तक का िो सकेगा या िुमागने स,े िो पांच लाि रुपए तक िो सकेगा या, 

िोनों से, िरं्नीय िोगा ।  

‍ प‍ िीकरण—िंर् (क) के प्रयोिनों के हलए, हमथ् या व् यपिशेन या लोप में दकसी सम् पहत्त के व् ययन के ब् यौरों का 

अप्रकिन शाहमल ि ैिो व् ययन के कारण शोधन अक्षम द्वारा चलाए िा रि ेकारबार के साधारण प्रक्रम में दकए गए व् यय से 

हभन् न शोधन अक्षम  की संपिा में शाहमल िोती: 

(ि) कपिपूवगक अपनी न‍ ि की गई, हमथ् याकृत या पररवर्तगत लेिाबहियों, हवत्तीय सूचना और उसकी अहभरक्षा या 

हनयंत्रण में अन् य अहभलेिों को उपलब् ध कराने से असफल रिता िै तो िानबूझकर उन् िें प्र‍ तुत करने से रोकता िै, तो वि 

कारावास से, िो एक वषग तक िो सकेगा या िुमागने से, िो पांच लाि रुपए तक िो सकेगा, या िोनों से, िरं्नीय िोगा; 



 76 

(ग) उसने धारा 140 के अधीन हनबंधनों का या धारा 141 के उपबन् धों का उल् लंघन दकया िै तो वि कारावास से, 

िो छि मास तक का िो सकेगा या िुमागने से, िो पांच लाि रुपए तक िो सकेगा, या िोनों से, िरं्नीय िोगा; 

(घ) वि उसके कब् िे या हनयंत्रणाधीन शोधन अक्षम की संपिा में शाहमल दकसी सम् पहत्त के कब् िे को पररित्त करने 

में असफल रिा ि ैहिसे उसके द्वारा धारा 156 के अधीन पररित्त करने की अपेक्षा की िाती िै, वि कारावास से, िो छि मास 

तक िो सकेगा या िुमागने से, िो पाचं लाि रुपए तक िो सकेगा या िोनों से, िरं्नीय िोगा; 

(ङ) वि दकसी युह‍ तयु‍ त कारण के या दकसी संतोषिनक ‍ प‍ िीकरण के हबना शोधन अक्षम की संपिा में शाहमल 

उसकी सम् पहत्त के दकसी सारवान् भाग की उपगत दकसी िाहन के हलए उस तारीि से िो शोधन अक्षमता आवेिन फाइल 

करने के बारि मास पूवग िै, हिसाब िनेे में असफल रिा िै, वि कारावास से िो िो वषग तक का िो सकेगा या िुमागने से, िो 

िाहन के मूल् य से तीन गुणा तक िो सकेगा, या िोनों से, िरं्नीय िोगा:  

परन् तु ििां ऐसी रकम पररमाणात् मक निीं ि ैविां िुमागने की कुल रकम पांच लाि रुपए से अहधक निीं िोगी;  

(च) शोधन अक्षमता प्रारम् भ िोने की तारीि से फरार िोने का प्रयास करता िै, वि कारावास से िो एक वषग तक 

का िो सकेगा या िुमागने से िो पांच लाि रुपए तक िो सकेगा या िोनों से िरं्नीय िोगा । 

‍ प‍ िीकरण—इस िंर् के प्रयोिनों के हलए, दकसी शोधन अक्षम को फरार हआ माना िाएगा यदि वि दकसी 

सम् पहत्त का कब् िा पररित्त दकए हबना, हिसका उससे शोधन अक्षमता न् यासी को धारा 156 के अधीन पररिान करना अपेहक्षत 

ि,ै िशे छोड़ता ि ैया िशे छोड़ने का प्रयास करता ि ै। 

187. कहतपय कारगवाइयों के हलए िंर्—(1) यदि शोधन अक्षमता न् यासी,— 

(क) दकसी धन या सम् पहत्त का िो शोधन अक्षम की संपिा में शाहमल ि,ै कपिपूवगक िरु्वगहनयोिन दकया िै, 

प्रहतधाररत दकया ि ैया उसके हलए िनेिार बन गया ि;ै या 

(ि) िानबूझकर ऐसी रीहत में कायग करता ि ैहिसे शोधन अक्षम की संपिा को शोधन अक्षमता न् यासी द्वारा धारा 

149 के अधीन उसके कृत् यों को करने में दकसी कतगव् य भंग के पररणाम‍ वरूप कोई नुकसान हआ िै,  

तो वि कारावास से िो तीन वषग तक का िो सकेगा या िुमागने से िो संबद्ध व् यह‍ तयों को ऐसे उल् लंघन के कारण िोने वाले दकसी काररत 

नुकसान या संभाहवत नुकसान की रकम से तीन गुणा से कम निीं िोगा, या िोनों से, िरं्नीय िोगा: 

 परन् तु ििां ऐसा नुकसान या हवहधहवरुद्ध अहभलाभ की मात्रा को तय निीं दकया िा सकता, विां अहधरोहपत िुमागने की कुल 

रकम पांच लाि रुपए से अहधक निीं िोगी: 

 परन् तु यि और दक शोधन अक्षमता न् यासी इस धारा के अधीन िायी निीं िोगा यदि वि दकसी ऐसी सम् पहत्त का अहभििण 

कर लेता ि ैया उसका व् ययन कर ितेा ि ैिो शोधन अक्षम की संपिा में शाहमल निीं ि ैऔर उस समय उसके पास यि हवश् वास करने के 

युह‍ तयु‍ त आधार थे दक वि उस सम् पहत्त का अहभििण करने या व् ययन करने का िकिार ि ै। 

भाग 4 

दिवाला वहृत्तकों, अहभकरणों और सचूना उपयोहगताओं का हवहनयमन 

अध् याय 1 

भारतीय दिवाला और शोधन अक्षमता बोर्ग 

 188. बोर्ग की ‍ थापना और हनगमन—(1) उस तारीि से, हिसे कें रीय सरकार अहधसूचना द्वारा हनयत करे, इस अहधहनयम 

के प्रयोिनों के हलए एक बोर्ग की ‍ थापना की िाएगी, िो भारतीय दिवाला और शोधन अक्षमता बोर्ग के नाम से ज्ञात िोगा । 

 (2) बोर्ग उपयुग‍ त नाम से एक हनगहमत हनकाय िोगा हिसका शाश् वत उत्तराहधकार और एक सामान् य मुरा िोगी और उसके 

पास, इस अहधहनयम के उपबन् धों के अधीन रिते हए िंगम और ‍ थावर, िोनों प्रकार की सम् पहत्त को अर्िगत करने, धाररत करने और 

व् ययहनत करने तथा संहविा करने की शह‍ त िोगी तथा वि उ‍ त नाम से वाि लाएगा या उस पर वाि लाया िा सकेगा । 

 (3) बोर्ग का प्रधान कायागलय रा‍ रीय रािधानी क्षेत्र में ऐसे ‍ थान पर िोगा, िो कें रीय सरकार द्वारा अहधसूचना द्वारा 

हवहनर्िग‍ ि दकया िाए । 

 ‍ प‍ िीकरण—इस धारा के प्रयोिनों के हलए “रा‍ रीय रािधानी क्षेत्र” पि का विी अथग िोगा, िो उसका रा‍ रीय रािधानी 

क्षेत्र योिना बोर्ग अहधहनयम, 1985 (1985 का 2) की धारा 2 के िंर् (च) में ि ै। 

 (4) बोर्ग भारत में अन् य ‍ थानों पर अपने कायागलयों की ‍ थापना कर सकेगा । 

 189. बोर्ग का गठन—(1) बोर्ग हनम् नहलहित सि‍ यों से हमलकर बनेगा, हिन् िें कें रीय सरकार द्वारा हनयु‍ त दकया िाएगा, 

अथागत्:— 



 77 

  (क) अध् यक्ष; 

(ि) कें रीय सरकार के अहधकाररयों में से तीन सि‍ य, िो संयु‍ त सहचव या समतुल् य रैंक से नीचे के निीं िोंगे, हवत्त 

मंत्रालय, कारपोरेि कायग मंत्रालय और हवहध मंत्रालय में से प्रत् येक का प्रहतहनहधत् व करने के हलए एक-एक सि‍ य, पिने; 

(ग) भारतीय ररिवग बैंक द्वारा नामहनर्िग‍ ि दकया िाने वाला एक सि‍ य, पिने;  

(घ) कें रीय सरकार द्वारा नामहनर्िग‍ ि दकए िाने वाले पांच अन् य सि‍ य, हिनमें से कम से कम तीन सि‍ य 

पूणगकाहलक सि‍ य िोंगे । 

 (2) अध् यक्ष और अन् य सि‍ य योग् यता, सत् यहन‍ ठा और प्रहत‍ ठा वाले व् यह‍ त िोंगे, हिन् िोंने दिवाला या शोधन अक्षमता स े

सम् बहन् धत सम‍ याओं से हनपिने में क्षमता का प्रिशगन दकया िै और हिनके पास हवहध, हवत्त, अथगशा‍ त्र, लेिांकन या प्रशासन के क्षेत्र में 

हवशेष ज्ञान और अनुभव ि ै। 

(3) इस धारा के अधीन अध् यक्ष और दकसी पिने सि‍ य की हनयुह‍ त से हभन् न बोर्ग के सि‍ यों की हनयुह‍ त चयन सहमहत की 

सफाररश अहभप्राप् त करने के पश् चात् की िाएगी, िो हनम् नहलहित से हमलकर बनेगी— 

(क) मंहत्रमंर्ल सहचव—अध् यक्ष; 

(ि) कें रीय सरकार द्वारा नामहनर्िग‍ ि दकया िाने वाला भारत सरकार का सहचव—सि‍ य; 

(ग) भारतीय दिवाला और शोधन अक्षमता बोर्ग का अध् यक्ष (बोर्ग के सि‍ यों के चयन की िशा में)—सि‍ य;  

(घ) कें रीय सरकार द्वारा नामहनर्िग‍ ि दकए िाने वाले हवत्त, हवहध, प्रबंध, दिवाला और संबद्ध हवषयों के क्षेत्र से 

ख याहत प्राप् त तीन हवशेषज्ञ—सि‍ य ।  

 (4) अध् यक्ष और सि‍ यों (पिने सि‍ यों से हभन् न) का कायगकाल पांच वषग का या पैंसठ वषग की आयु प्राप् त कर लेने तक, इनमें स े

िो भी पूवगतर िो, िोगा और वे पुन: हनयुह‍ त के हलए पात्र िोंगे । 

 (5) अध् यक्ष और सि‍ यों (पिने सि‍ यों से हभन् न) को संिये वेतन और भते्त तथा उनकी सेवा के अन् य हनबंधन और शतें वे िोंगी, 

िो हवहित की िाएं । 

 190. सि‍ य का पि स ेििाया िाना—कें रीय सरकार दकसी सि‍ य को उसके पि से ििा सकेगी, यदि वि— 

  (क) भाग 3 के अधीन यथा पररभाहषत कोई अनुन् मोहचत दिवाहलया िै;  

  (ि) शारीररक या मानहसक रूप से सि‍ य के रूप में कायग करने के हलए अक्षम िो गया िै;  

(ग) उसे दकसी ऐसे अपराध के हलए हसद्धिोष ठिराया गया ि ैहिसमें नैहतक अधमता अंतवगहलत ि;ै 

(घ) हिसने अपनी ह‍ थहत का इस प्रकार िरुुपयोग दकया ि ै दक उसका पि पर बने रिना लोकहित के हलए            

िाहनकर ि:ै  

 परन् तु दकसी भी सि‍ य को िंर् (घ) के अधीन तब तक निीं ििाया िाएगा िब तक दक उसे मामले में सनुवाई का युह‍ तयु‍ त 

अवसर प्रिान न कर दिया गया िो । 

 191. अध् यक्ष की शह‍ तयां—हवहनयमों द्वारा अन् यथा अवधाररत दकए िाने के हसवाय, अध् यक्ष के पास बोर्ग के कायों के 

साधारण अधीक्षण और हनिशेन की शह‍ तयां िोंगी और वि ऐसी अन् य शह‍ तयों का भी प्रयोग कर सकेगा िो बोर्ग द्वारा उसे 

प्रत् यायोहित की िाएं । 

 192. बोर्ग की बैठकें—(1) बोर्ग ऐसे समयों और ‍ थानों पर बैठकें  करेगा और अपनी बैठकों में कारबार के संव् यविार (हिसके 

अन् तगगत ऐसी बैठकों में गणपूर्तग भी ि)ै के सम् बन् ध में प्रदक्रया के ऐसे हनयमों का पालन करेगा, िो हवहनयमों द्वारा अधाररत दकए िाएं । 

 (2) अध् यक्ष, या यदि दकसी कारणवश अध् यक्ष बोर्ग की दकसी बैठक में उपह‍ थत िोने में असमथग िै तो बैठक में उपह‍ थत 

सि‍ यों द्वारा चुना गया कोई अन् य सि‍ य बैठक की अध् यक्षता करेगा । 

 (3) बोर्ग की दकसी बैठक के समक्ष आने वाले सभी प्रश् नों का हवहनश् चय, उपह‍ थत और मतिान करने वाले सि‍ यों के बहमत 

से दकया िाएगा और मतों के बराबर िोने की िशा में अध् यक्ष या उसकी अनुपह‍ थहत में अध् यक्षता करने वाले व् यह‍ त के पास हद्वतीय या 

हनणागयक मत िोगा । 

 193. कहतपय मामलों में सि‍ यों द्वारा बठैकों में भाग न लनेा—कोई सि‍ य, िो दकसी कंपनी का हनिशेक ि ैया हिसका ऐसे 

हनिशेक के रूप में बोर्ग की बैठक में हवचाराथग आने वाले दकसी मामले में कोई प्रत् यक्ष या अप्रत् यक्ष धनीय हित िै, सुसंगत पररह‍ थहतयों 

के उसकी िानकारी में आने के पश् चात् यथासंभव शीघ्र ऐसी बैठक में अपने हित की प्रकृहत का प्रकिन करेगा और ऐसे प्रकिन को बोर्ग 

की कायगवाहियों में लेिबद्ध दकया िाएगा, और वि सि‍ य उस मामले के सम् बन् ध में बोर्ग के हवचार-हवमशग या हवहनश् चय में भाग निीं 

लेगा । 



 78 

 194. ररह‍ तयों, आदि से बोर्ग की कायगवाहियों का अहवहधमान् य न िोना, बोर्ग के अहधकारी और कमगचारी—(1) बोर्ग का कोई 

भी कायग या कायगवािी केवल इस कारण से अहवहधमान् य निीं िोगी दक— 

  (क) बोर्ग में कोई ररह‍ त ि ैया उसके गठन में कोई त्रुरि िै; या 

(ि) बोर्ग के सि‍ य के रूप में कायग करने वाले दकसी व् यह‍ त की हनयुह‍ त में कोई त्रुरि िै; या 

(ग) बोर्ग की कायगवािी में ऐसी कोई अहनयहमतता ि,ै िो मामले के गुणागुण को प्रभाहवत निीं करती ि ै। 

 (2) बोर्ग ऐसी रीहत में, िो हवहनर्िग‍ ि की िाए, ऐसे अन् य अहधकाररयों और कमगचाररयों को हनयु‍ त कर सकेगा, हिन् िें वि 

अपने कृत् यों के िक्ष हनवगिन के हलए आवश् यक समझता ि ै। 

 (3) उपधारा (2) के अधीन हनयु‍ त बोर्ग के अहधकाररयों और कमगचाररयों को संिये वेतन और भते्त तथा उनकी सेवा के अन् य 

हनबंधन और शतें वे िोंगी, िो हवहनयमों द्वारा हवहनर्िग‍ ि की िाएं । 

 195. हवत्तीय क्षेत्र के हवहनयामकों को पिाहभहित करने की शह‍ त—बोर्ग की ‍ थापना दकए िाने तक, केन् रीय सरकार 

अहधसूचना द्वारा हवत्तीय क्षेत्र के दकसी हवहनयामक को, इस सहंिता के अधीन बोर्ग की शह‍ तयों का प्रयोग और कृत् यों का हनवगिन करने 

के हलए पिाहभहित कर सकेगी । 

अध् याय 2 

बोर्ग की शह‍ तया ंऔर कृत् य 

 196. बोर्ग की शह‍ तया ंऔर कृत् य—(1) बोर्ग, केन् रीय सरकार के साधारण हनिेशों के अध् यधीन हनम् नहलहित सभी या दकन् िीं 

कृत् यों का पालन करेगा, अथागत्:— 

(क) दिवाला वृहत्तक अहभकरणों, दिवाला वृहत्तकों और सूचना उपयोहगताओं को रहि‍ िर करेगा और उनके 

रहि‍ रीकरण को नवीकृत, प्रत् याहृत, हनलंहबत या रद्द करेगा;  

1[(कक) इस संहिता के प्रयोिनों को अिसर करने में दिवाला वृहत्तकों, दिवाला वृहत्तक अहभकरणों और सूचना 

उपयोहगताओं तथा अन् य संसथाओं के कायगकरण और व् यविारों के हवकास का संवधगन करेगा तथा उनका हवहनयमन करेगा;  

(ि) दिवाला वृहत्तक अहभकरणों, दिवाला वृहत्तकों और सूचना उपयोहगताओं के रहि‍ रीकरण के हलए न् यूनतम 

पात्रता अपेक्षाएं हवहनर्िग‍ ि करेगा;  

2[(ग) इस संहिता के प्रयोिनों के कायागहन् वत करने के हलए दिवाला वृहत्तक अहभकरणों, दिवाला वृहत्तकों और सूचना 

उपयोहगताओं स ेफीस और अन् य प्रभारों का उद्ग्रिण करेगा, हिनके अंतगगत रहि‍ रीकरण और उसके नवीकरण ितेु फीस             

भी ि ै।] 

(घ) दिवाला वृहत्तक अहभकरणों, दिवाला वृहत्तकों और सूचना उपयोहगताओं के कायगकरण के हलए हवहनयमों द्वारा 

मानक हवहनर्िग‍ ि करेगा; 

(ङ) दिवाला वृहत्तकों के, दिवाला वृहत्तक अहभकरणों के सि‍ यों के रूप में नामांकन के हलए परीक्षा िेतु हवहनयमों 

द्वारा न् यूनतम पाठ्यचयाग अहधकहथत करेगा;  

(च) दिवाला वृहत्तक अहभकरणों, दिवाला वृहत्तकों और सूचना उपयोहगताओं के सम् बन् ध में हनरीक्षण और अन् वेषण 

करेगा तथा ऐसे आिशे पाररत करेगा, िो इस संहिता और ति ्धीन िारी दकए गए हवहनयमों के उपबन् धों के अनुपालन के हलए 

अपेहक्षत िों;  

(छ) दिवाला वृहत्तक अहभकरणों, दिवाला वृहत्तकों और सूचना उपयोहगताओं के कायगपालन की मानीिरी करेगा और 

ऐसे हनिशे पाररत करेगा, िो इस संहिता और ति ्धीन बनाए गए हवहनयमों के उपबन् धों के अनुपालन के हलए अपेहक्षत िों;  

(ि) दिवाला वृहत्तक अहभकरणों, दिवाला वृहत्तकों और सूचना उपयोहगताओं से दकसी सूचना और अहभलेिों की 

मांग करेगा; 

(झ) ऐसी सूचना, र्ािा, अनुसंधान अध् ययनों और ऐसी अन् य सूचनाओं का प्रकाशन करेगा, हिन् िें हवहनयमों द्वारा 

हवहनर्िग‍ ि दकया िाए; 

(ञ) सूचना उपयोहगताओं द्वारा र्ािा का संििण और भंर्ारण करने की रीहत और ऐसे र्ािा तक पहचं प्रिान करने 

की रीहत  को हवहनयमों द्वारा हवहनर्िग‍ ि करेगा;  

                                                 
1 2018 के अहधहनयम सं० 26 की धारा 32 द्वारा अंत:‍ थाहपत ।   
2 2018 के अहधहनयम सं० 26 की धारा 32 द्वारा प्रहत‍ थाहपत ।   



 79 

(ि) दिवाला और शोधन अक्षमता के मामलों से सम् बहन् धत अहभलेिों का संििण करेगा तथा उन् िें बनाए रिेगा और 

ऐसे मामलों से सम् बहन् धत सूचना का प्रसार करेगा;  

(ठ) ऐसी सहमहतयों का गठन करेगा, िो अपेहक्षत िों और इनके अन् तगगत हवहश‍ ि रूप से धारा 197 में अहधकहथत 

सहमहतयां भी िैं;  

(र्) अपने अहभशासन में पारिर्शगता और सवोत्तम पद्धहतयों का संवधगन करेगा; 

(ढ) वेबसाइिों और इले‍ राहनक सूचना के सावगभौहमक रूप से पहचं रिने वाले ऐसे संििों को बनाए रिेगा, िो 

आवश् यक िों; 

(ण) दकन् िीं अन् य कानूनी प्राहधकरणों के साथ पर‍ पर सिमहत-पत्रों पर ि‍ ताक्षर करेगा; 

(त) दिवाला वृहत्तक अहभकरणों, दिवाला वृहत्तकों और सूचना उपयोहगताओं को आवश् यक दिशा-हनिशे िारी 

करेगा; 

(थ) दिवाला वृहत्तक अहभकरणों, दिवाला वृहत्तकों और सूचना उपयोहगताओं के हवरुद्ध हशकायतों के समाधान के 

हलए तंत्र हवहनर्िग‍ ि करेगा और इस संहिता तथा ति ्धीन बनाए गए हवहनयमों के उपबन् धों के अनुपालन के हलए पूवो‍ त के 

हवरुद्ध फाइल की गई हशकायतों से सम् बहन् धत आिशे पाररत करेगा; 

(ि) ऐसे अंतरालों पर, िो बोर्ग द्वारा हवहनर्िग‍ ि दकए िाएं, दिवाला वृहत्तक अहभकरणों, दिवाला वृहत्तकों और 

सूचना उपयोहगताओं के कृत् यों और कायगपालन के सम् बन् ध में आवहधक अध् ययन, अनुसंधान और उनकी लेिापरीक्षा करेगा; 

(ध) दकन् िीं हवहनयमों की अहधसूचना से पूवग, हवहनयम िारी करने के हलए तंत्र हवहनर्िग‍ ि करेगा, हिसके अन् तगगत 

लोक परामशग प्रदक्रयाओं का संचालन भी िै; 

(न) इस सहंिता के अधीन यथा अपेहक्षत दिवाला और शोधन अक्षमता स ेसम् बहन् धत मामलों पर हवहनयमों और 

मागगिशगक हसद्धांत बनाएगा, हिसके अन् तगगत, यथाह‍ थहत, हनगहमत ऋणी या ऋणी की आह‍ तयों के समयबद्ध व् ययन के हलए 

तंत्र भी ि;ै और 

(प) ऐसे अन् य कृत् यों का पालन करेगा, िो हवहित दकए िाएं । 

 (2) बोर्ग, दिवाला वृहत्तक अहभकरणों द्वारा अपनाई िान ेवाली आिशग उपहवहधयां बनाएगा, हिसके अन् तगगत हनम् नहलहित के 

हलए उपबन् ध िो सकें गे— 

  (क) दिवाला वृहत्तक अहभकरणों के सि‍ यों की वृहत्तक सक्षमता के न् यूनतम मानक;  

  (ि) दिवाला वृहत्तक अहभकरणों के सि‍ यों के वृहत्तक और नैहतक आचार के हलए मानक; 

(ग) दिवाला वृहत्तक अहभकरणों के सि‍ यों के रूप में व् यह‍ तयों के नामांकन के हलए अपेक्षाएं, िो अहवभेिकारी 

िोंगी । 

‍ प‍ िीकरण—इस िंर् के प्रयोिनों के हलए, “अहवभेिकारी” पि से धमग, िाहत, हलंग या िन् म ‍ थान और ऐसे अन् य 

आधारों पर, िो हवहनर्िग‍ ि दकए िाएं, भेिभाव का न िोना अहभप्रेत िै; 

(घ) सि‍ यता प्रिान करने की रीहत;  

(ङ) बोर्ग द्वारा हवहनर्िग‍ ि हवहनयमों के अनुसार दिवाला वृहत्तक अहभकरण के आंतररक अहभशासन और प्रबंध के 

हलए शासी बोर्ग की ‍ थापना;  

(च) सि‍ यों द्वारा प्र‍ तुत दकए िाने के हलए अपेहक्षत सूचना, हिसके अन् तगगत ऐसी सूचना को प्र‍ तुत करने का प्ररूप 

और समय भी ि;ै 

(छ) व् यह‍ तयों के ऐसे हवहनर्िग‍ ि वगग, हिन् िें सि‍ यों द्वारा ररयायती िरों पर या हबना दकसी पाररश्रहमक के, सेवाएं 

उपलब् ध कराई िाएंगी; 

(ि) ऐसे आधार, हिन पर दिवाला वृहत्तक अहभकरणों के सि‍ यों पर शाह‍ तयां उद्गृिीत की िा सकें गी और उनकी 

रीहत; 

(झ) दिवाला वृहत्तक अहभकरणों के सि‍ यों के हवरुद्ध हशकायतों के समाधान के हलए एक हन‍ पक्ष और पारिशी तंत्र; 

(ञ) वे आधार, हिनके अधीन दिवाला वृहत्तकों को दिवाला वृहत्तक अहभकरण की सि‍ यता से हन‍ काहसत दकया िा 

सकेगा;  

(ि) सि‍ यों के रूप में व् यह‍ तयों को प्रवेश िनेे के हलए फीस की मात्रा और फीस का संििण करने की रीहत; 



 80 

(ठ) दिवाला वृहत्तक अहभकरण के सि‍ यों के रूप में व् यह‍ तयों के नामांकन के हलए प्रदक्रया; 

(र्) दिवाला वृहत्तकों के नामांकन के हलए परीक्षा का संचालन करने की रीहत; 

(ढ) ऐसे दिवाला वृहत्तकों के, िो सि‍ य िैं, कायगकरण की मानीिरी और पुनर्वगलोकन करने की रीहत; 

(ण) सि‍ यों द्वारा हन‍ पादित दकए िाने वाले कतगव् य और अन् य दक्रयाकलाप;  

(त) अपने सि‍ यों के हवरुद्ध अनुशासहनक कायगवाहियां संचहलत करने और शाह‍ तयां अहधरोहपत करने की रीहत; 

(थ) दकसी दिवाला वृहत्तक के हवरुद्ध अहधरोहपत शाह‍ त के रूप में प्राप् त दकसी रकम को उपयोग करने की रीहत । 

 (3) तत् समय प्रवृत्त दकसी अन् य हवहध में अंतर्वग‍ ि दकसी बात के िोते हए भी, हनम् नहलहित हवषयों के सम् बन् ध में कायगवािी 

करते समय इस संहिता के अधीन शह‍ तयों का प्रयोग करते समय, बोर्ग के पास विी शह‍ तयां िोंगी, िो हसहवल प्रदक्रया संहिता, 1908 

(1908 का 5) के अधीन दकसी वाि का हवचारण करते समय दकसी हसहवल न् यायालय में हनहित िोती िैं, अथागत्:— 

(i) ऐसे ‍ थान और ऐसे समय पर, िो बोर्ग द्वारा हवहनर्िग‍ ि दकया िाए, लेिा बहियों और अन् य ि‍ तावेिों का 

प्रकिीकरण और उन् िें पेश दकया िाना; 

(ii) व् यह‍ तयों को समन करना तथा उनको िाहिर कराना तथा शपथ पर उनकी परीक्षा करना; 

(iii) दकसी भी ‍ थान पर दकसी व् यह‍ त की बहियों, रहि‍ िरों और अन् य ि‍ तावेिों का हनरीक्षण करना;  

(iv) साहक्षयों या ि‍ तावेिों की परीक्षा के हलए कमीशन िारी करना । 

 197. सलािकार सहमहत, कायगपालक सहमहत या अन् य सहमहत का गठन—बोर्ग, अपने कृत् यों के िक्ष हनवगिन के हलए ऐसी 

सलािकार और कायगपालक सहमहतयों या अन् य ऐसी सहमहतयों का गठन कर सकेगा, हिन् िें वि उहचत समझे, िो अध् यक्ष और ऐसे अन् य 

सि‍ यों से हमलकर बनेंगी, िो हवहनयमों द्वारा हवहनर्िग‍ ि दकए िाएं । 

 198. हवलम् ब की माफी—इस संहिता में अन् तर्वग‍ ि दकसी बात के िोते हए भी, ििां बोर्ग इस संहिता में हवहनर्िग‍ ि अवहध के 

भीतर कोई कायग निीं करता ि,ै विां सुसंगत न् यायहनणागयक प्राहधकारी, लेिबद्ध कारणों से हवलम् ब को माफ कर सकेगा । 

अध् याय 3 

दिवाला वहृत्तक अहभकरण 

199. दकसी व् यह‍ त द्वारा दकसी हवहधमान् य रहि‍ रीकरण प्रमाणपत्र के हबना दिवाला वहृत्तक अहभकरण के रूप में कायग न 

करना—इस सहंिता में अन् यथा उपबंहधत के हसवाय, कोई भी व् यह‍ त, बोर्ग द्वारा इस हनहमत्त िारी दकए िाने वाले रहि‍ रीकरण 

प्रमाणपत्र के अधीन और उसके अनुसार कायग करने के हसवाय इस संहिता के अधीन दिवाला वृहत्तक अहभकरण के रूप में कायग निीं 

करेगा और अपने सि‍ यों के रूप में दिवाला वृहत्तकों को नामांदकत निीं करेगा । 

 200. दिवाला वहृत्तक अहभकरण के रहि‍ रीकरण को शाहसत करन ेवाले हसद्धातं—बोर्ग, इस संहिता के अधीन दिवाला वृहत्तक 

अहभकरणों का रहि‍ रीकरण करते समय हनम् नहलहित हसद्धांतों को ध् यान में रिेगा, अथागत्:— 

(क) दिवाला वृहत्तकों के वृहत्तक हवकास का संवधगन और उनका हवहनयमन करना; 

(ि) ऋणी व् यह‍ तयों, लेनिारों और ऐसे अन् य व् यह‍ तयों की, हिन् िें हवहनर्िग‍ ि दकया िाए, आवश् यकताओं को पूरा 

करने के हलए सक्षम दिवाला वृहत्तकों की सेवाओं का संवधगन करना;  

(ग) दिवाला वृहत्तकों के बीच उत्तम वृहत्तक और नैहतक आचार का संवधगन करना;  

(घ) ऋणी व् यह‍ तयों, लेनिारों और ऐसे अन् य व् यह‍ तयों के, हिन् िें हवहनर्िग‍ ि दकया िाए, हितों की संरक्षा करना;  

(ङ) इस संहिता के अधीन दिवाला और शोधन अक्षमता कायगवाहियों के प्रभावी समाधान के हलए दिवाला वृहत्तक 

अहभकरणों के हवकास का संवधगन करना ।  

 201. दिवाला वहृत्तक अहभकरण का रहि‍ रीकरण—(1) रहि‍ रीकरण के हलए प्रत् येक आविने बोर्ग को ऐसे प्ररूप और रीहत में 

दकया िाएगा और उसमें ऐसी हवहशह‍ ियां अन् तर्वग‍ ि िोंगी तथा उसके साथ ऐसी फीस लगी िोगी, िो हवहनयमों द्वारा हवहनर्िग‍ ि की 

िाए :  

 परन् तु बोर्ग उसके द्वारा प्राप् त प्रत् येक आवेिन की अहभ‍ वीकृहत, उसकी प्राहप् त के सात दिन के भीतर प्रिान करेगा । 

 (2) उपधारा (1) के अधीन दकसी आवेिन की प्राहप् त पर, बोर्ग यि समाधान िो िाने पर दक आवेिन उपधारा (1) में 

हवहनर्िग‍ ि सभी अपेक्षाओं को पूरा करता िै, आवेिक को रहि‍ रीकरण प्रमाणपत्र मंिूर कर सकेगा या ऐसे आवेिन को अन् यथा आिशे 

द्वारा नामंिूर कर सकेगा: 

 परन् तु आवेिन को नामंिूर करने वाला कोई भी आिशे आवेिक को सुनवाई का अवसर प्रिान दकए हबना निीं दकया िाएगा: 



 81 

 परन् तु यि और दक इस प्रकार दकए गए दकसी भी आिशे को पन् रि दिन की अवहध के भीतर आवेिक को संसूहचत दकया 

िाएगा ।   

 (3) बोर्ग आवेिक को ऐसे प्ररूप और रीहत में तथा ऐस े हनबंधनों और शतों के, िो हवहनर्िग‍ ि दकए िाएं, अधीन रिते हए 

रहि‍ रीकरण प्रमाणपत्र िारी कर सकेगा ।  

 (4) बोर्ग समय-समय पर और ऐसी रीहत में तथा ऐसी फीस के संिाय पर, िो हवहनर्िग‍ ि दकए िाएं, रहि‍ रीकरण प्रमाणपत्र 

का नवीकरण कर सकेगा । 

 (5) बोर्ग, दकसी दिवाला वृहत्तक अहभकरण को मंिूर दकए गए रहि‍ रीकरण प्रमाणपत्र को आिशे द्वारा हनम् नहलहित आधारों 

में से दकसी पर हनलंहबत या रद्द कर सकेगा, अथागत्:— 

(क) दक उसने दकसी हमथ् या कथन या िवु् यगपिशेन के आधार पर या दकसी अन् य हवहधहवरुद्ध साधन से रहि‍ रीकरण  

अहभप्राप् त दकया ि;ै  

(ि) दक वि बोर्ग द्वारा बनाए गए हवहनयमों या दिवाला वृहत्तक अहभकरण द्वारा बनाई गई उपहवहधयों की 

अपेक्षाओं का पालन करने में असफल रिा िै; 

(ग) दक उसने संहिता या ति ्धीन बनाए गए हनयमों या हवहनयमों के दकन् िीं उपबन् धों का उल् लंघन दकया ि;ै 

(घ) दकसी अन् य ऐसे आधार पर, िो हवहनयमों द्वारा हवहनर्िग‍ ि दकया िाए: 

 परन् तु इस उपधारा के अधीन कोई आिशे तब तक निीं दकया िाएगा िब तक दक संबद्ध दिवाला वृहत्तक अहभकरण को 

सुनवाई का कोई युह‍ तयु‍ त अवसर प्रिान न कर दिया गया िो: 

 परन् तु यि और दक ऐसा कोई आिेश बोर्ग के दकसी पूणगकाहलक सि‍ य के हसवाय दकसी अन् य सि‍ य द्वारा पाररत निीं दकया 

िाएगा । 

 202. रा‍ रीय कम् पनी हवहध अपील अहधकरण को अपील—ऐसा कोई दिवाला वृहत्तक अहभकरण, िो बोर्ग द्वारा धारा 201 के 

अधीन दकए गए आिशे से व् यहथत ि,ै ऐसे प्ररूप में, ऐसी अवहध के भीतर और ऐसी रीहत में, िो हवहनयमों द्वारा हवहनर्िग‍ ि की िाए, 

रा‍ रीय कम् पनी हवहध अपील अहधकरण को अपील कर सकेगा । 

 203. दिवाला वहृत्तक अहभकरण का शासी बोर्ग—बोर्ग, यि सुहनहश् चत करने के प्रयोिनों के हलए दक प्रत् येक दिवाला वृहत्तक 

अहभकरण इस संहिता के अधीन पूरा दकए िाने के हलए ईहप् सत उद्देश् यों को ध् यान में रिते हए, हनम् नहलहित को हवहनर्िग‍ ि करने के 

हलए हवहनयम बना सकेगा:— 

(क) दकसी दिवाला वृहत्तक अहभकरण के शासी बोर्ग की ‍ थापना;  

(ि) दिवाला वृहत्तक अहभकरण के शासी बोर्ग में ‍ वतंत्र सि‍ यों की न् यूनतम संख या; और 

(ग) ऐसे दिवाला वृहत्तकों की संख या, िो उसके सि‍ य िैं और िो दिवाला वृहत्तक अहभकरण के शासी बोर्ग में रिेंगे । 

 204. दिवाला वहृत्तक अहभकरणों के कृत् य—कोई दिवाला वृहत्तक अहभकरण हनम् नहलहित कृत् यों का पालन करेगा, अथागत्:— 

(क) ऐसे व् यह‍ तयों को, िो उसकी उपहवहधयों में उपवर्णगत सभी अपेक्षाओं को पूरा करते िैं, सि‍ यता फीस के 

संिाय पर सि‍ यता मंिूर करना;  

(ि) अपने सि‍ यों के हलए वृहत्तक आचार के मानक अहधकहथत करना;  

(ग) अपने सि‍ यों के कायगपालन की मानीिरी करना; 

(घ) ऐसे दिवाला वृहत्तकों के, िो उसके सि‍ य िैं, अहधकारों, हवशेषाहधकारों और हितों के हलए सुरक्षोपाय करना;  

(ङ) ऐसे दिवाला वृत्तकों की, िो उसके सि‍ य िैं, सि‍ यता को उसकी उपहवहधयों में उपवर्णगत आधारों पर 

हनलंहबत या रद्द करना;  

(च) ऐसे दिवाला वृहत्तकों के, िो उसके सि‍ य िैं, हवरुद्ध उपभो‍ ताओं की हशकायतों का हनवारण करना; और 

(छ) अपने कृत् यों, अपने सि‍ यों की सूची, अपने सि‍ यों के कायगपालन के बारे में सूचना और ऐसी अन् य सूचना का 

प्रकाशन करना, िो हवहनयमों द्वारा हवहनर्िग‍ ि की िाए । 

 205. दिवाला वहृत्तका अहभकरणों द्वारा उपहवहधयों का बनाया िाना—इस संहिता और ति ्धीन बनाए गए दकन् िीं हनयमों या 

हवहनयमों के उपबंधों के अधीन रिते हए प्रत् येक दिवाला वृहत्तक अहभकरण, बोर्ग का अनुमोिन प्राप् त करने के पश् चात्, बोर्ग द्वारा धारा 

196 की उपधारा (2) के अधीन हवहनर्िग‍ ि आिशग उपहवहधयों से संगत उपहवहधयां बनाएगा । 

अध् याय 4 



 82 

दिवाला वहृत्तक 

  206. नामादंकत और रहि‍ रीकृत व् यह‍ तयों का दिवाला वहृत्तकों के रूप में कायग करना—कोई भी व् यह‍ त दकसी दिवाला 

वृहत्तक अहभकरण के सि‍ य के रूप में नामांकन कराए हबना और बोर्ग के पास रहि‍ रीकृत हए हबना इस संहिता के अधीन दिवाला 

वृहत्तक के रूप में अपनी सेवाएं प्रिान निीं करेगा । 

 207. दिवाला वहृत्तकों का रहि‍ रीकरण—(1) प्रत् येक दिवाला वृहत्तक, दकसी भी दिवाला वृहत्तक अहभकरण की सि‍ यता 

अहभप्राप् त करने के पश् चात,् ऐसे समय के भीतर, ऐसी रीहत में और ऐसी फीस के संिाय पर, िो हवहनयमों द्वारा हवहनर्िग‍ ि दकए िाएं, 

‍ वयं को बोर्ग के पास रहि‍ िर करेगा । 

 (2) बोर्ग, हवत्त, हवहध, प्रबंध, दिवाला के क्षेत्र में या ऐसे अन् य क्षेत्र में, िो वि उहचत समझे, ऐसी अिगताएं और अनुभव रिने 

वाले वृहत्तकों या व् यह‍ तयों के प्रवगग हवहनर्िग‍ ि कर सकेगा । 

 208. दिवाला वहृत्तकों के कृत् य और बाध् यताएं—(1) ििां कोई दिवाला समाधान, नए हसरे से आरम् भ, समापन या शोधन 

अक्षमता प्रदक्रया आरम् भ की गई ि,ै विां दकसी दिवाला वृहत्तक का कृत् य यि िोगा दक वि हनम् नहलहित हवषयों में ऐसी कारगवाई करे, िो 

आवश् यक िो, अथागत्:— 

  (क) भाग 3 के अध् याय 2 के अधीन एक नए हसरे से आरम् भ की आिशे प्रदक्रया; 

(ि) भाग 3 के अध् याय 3 के अधीन व् यह‍ िक दिवाला समाधान प्रदक्रया;  

(ग) भाग 2 के अध् याय 2 के अधीन हनगहमत दिवाला समाधान प्रदक्रया; 

(घ) भाग 3 के अध् याय 4 के अधीन व् यह‍ िक शोधन अक्षमता प्रदक्रया; और 

(ङ) भाग 2 के अध् याय 3 के अधीन दकसी हनगहमत ऋणी फमग का पररसमापन । 

 (2) प्रत् येक दिवाला वृहत्तक हनम् नहलहित आचार संहिता से आबद्ध िोगा:— 

  (क) कतगव् यों का हन‍ पािन करते समय युह‍ तयु‍ त सतकग ता और तत् परता बरतेगा; 

(ि) उस दिवाला वृहत्तक अहभकरण की, हिसका वि सि‍ य ि,ै उपहवहधयों में हवहनर्िग‍ ि सभी अपेक्षाओं और 

हनबंधनों तथा शतों का अनुपालन करेगा;  

(ग) दिवाला वृहत्तक अहभकरण को अपने अहभलेिों का हनरीक्षण करने की अनुज्ञा िगेा;  

(घ) बोर्ग और साथ िी उस दिवाला वृहत्तक अहभकरण को, हिसका वि सि‍ य ि,ै न् यायहनणागयक प्राहधकारी के 

समक्ष प्रत् येक कायगवािी के अहभलेिों की एक प्रहत प्र‍ तुत करेगा; और 

(ङ) अपने कृत् यों का पालन ऐसी रीहत और ऐसी शतों के अधीन रिते हए करेगा िो हवहनर्िग‍ ि की िाएं । 

अध् याय 5 

सचूना उपयोहगताए ं

 209. दकसी व् यह‍ त द्वारा रहि‍ रीकरण प्रमाणपत्र के हबना सचूना उपयोहगता के रूप में कायग न करना—इस सहंिता में 

अन् यथा उपबंहधत के हसवाय, कोई व् यह‍ त इस संहिता के अधीन इस हनहमत्त बोर्ग द्वारा िारी दकए गए रहि‍ रीकरण प्रमाणपत्र के 

हसवाय सूचना उपयोहगता के रूप में अपना कारबार निीं चलाएगा । 

 210. सूचना उपयोहगता का रहि‍ रीकरण—(1) रहि‍ रीकरण के हलए प्रत् येक आवेिन बोर्ग को ऐसे प्ररूप और रीहत में दकया 

िाएगा और उसमें ऐसी हवहशह‍ ियां अंतर्वग‍ ि िोंगी तथा उसके साथ ऐसी फीस लगी िोगी, िो हवहनयमों द्वारा हवहनर्िग‍ ि की िाएं: 

 परन् तु बोर्ग उसके द्वारा प्राप् त प्रत् येक आविेन की अहभ‍ वीकृहत, उसकी प्राहप् त के सात दिन के भीतर प्रिान करेगा । 

 (2) उपधारा (1) के अधीन दकसी आवेिन की प्राहप् त पर, बोर्ग यि समाधान िो िाने पर दक आवेिन उपधारा (1) में 

हवहनर्िग‍ ि सभी अपेक्षाओं को पूरा करता िै, आवेिक को रहि‍ रीकरण प्रमाणपत्र मंिूर कर सकेगा या ऐसे आवेिन को अन् यथा आिशे 

द्वारा नामंिूर कर सकेगा । 

 (3) बोर्ग आवेिक को ऐसे प्ररूप और रीहत में तथा ऐस े हनबंधनों और शतों के, िो हवहनर्िग‍ ि दकए िाएं, अधीन रिते हए 

रहि‍ रीकरण प्रमाणपत्र िारी कर सकेगा । 

 (4) बोर्ग समय-समय पर और ऐसी रीहत में तथा ऐसी फीस के संिाय पर, िो हवहनयमों द्वारा हवहनर्िग‍ ि दकए िाएं, 

रहि‍ रीकरण प्रमाणपत्र का नवीकरण कर सकेगा । 

 (5) बोर्ग, दकसी सूचना उपयोहगता को मंिूर दकए गए रहि‍ रीकरण प्रमाणपत्र को आिशे द्वारा हनम् नहलहित आधारों में स े

दकसी पर हनलंहबत या रद्द कर सकेगा, अथागत्:— 



 83 

(क) दक उसने दकसी हमथ् या कथन या िवु् यगपिशेन के आधार पर या दकसी अन् य हवहधहवरुद्ध साधन से रहि‍ रीकरण 

अहभप्राप् त दकया ि;ै  

(ि) दक वि बोर्ग द्वारा बनाए गए हवहनयमों की अपेक्षाओं का पालन करने में असफल रिा िै;  

(ग) दक उसने संहिता या ति ्धीन बनाए गए हनयमों या हवहनयमों के दकन् िीं उपबन् धों का उल् लंघन दकया ि;ै 

(घ) दकसी ऐसे अन् य आधार पर, िो हवहनयमों द्वारा हवहनर्िग‍ ि दकया िाए :  

 परन् तु इस उपधारा के अधीन कोई आिशे तब तक निीं दकया िाएगा िब तक दक संबद्ध सूचना उपयोहगता को सुनवाई का 

कोई युह‍ तयु‍ त अवसर प्रिान न कर दिया गया िो: 

 परन् तु यि और दक ऐसा कोई आिेश बोर्ग के दकसी पूणगकाहलक सि‍ य के हसवाय दकसी अन् य सि‍ य द्वारा पाररत निीं दकया 

िाएगा । 

 211. रा‍ रीय कम् पनी हवहध अपील अहधकरण को अपील—ऐसी कोई सूचना उपयोहगता, िो बोर्ग द्वारा धारा 210 के अधीन 

दकए गए आिशे से व् यहथत ि,ै ऐसे प्ररूप में, ऐसी अवहध के भीतर और ऐसी रीहत में, िो हवहनयमों द्वारा हवहनर्िग‍ ि की िाएं, रा‍ रीय 

कम् पनी हवहध अपील अहधकरण को अपील कर सकेगी । 

 212. सचूना उपयोहगता का शासी बोर्ग—बोर्ग, यि सुहनहश् चत करने के हलए दक प्रत् येक सूचना उपयोहगता इस संहिता के 

अधीन पूरा दकए िान ेके हलए ईहप् सत उद्देश् यों को ध् यान में रिती ि,ै प्रत् येक सूचना उपयोहगता से यि अपेक्षा कर सकेगा दक वि एक 

शासी बोर्ग की ‍ थापना करे, हिसमें उतनी संख या में ‍ वतंत्र सि‍ य िोंगे, िो हवहनयामों द्वारा हवहनर्िग‍ ि दकए िाएं । 

 213. सचूना उपयोहगता की कोर सवेाएं आदि—कोई सूचना उपयोहगता दकसी व् यह‍ त को ऐसी सेवाएं उपलब् ध कराएगी, िो 

हवहनर्िग‍ ि की िाएं, और इसके अन् तगगत दकसी व् यह‍ त को उपलब् ध कराई िाने वाली कोर सेवाएं भी िैं, यदि ऐसा व् यह‍ त हवहनयमों 

द्वारा हवहनर्िग‍ ि दकए िाने वाले हनबंधनों और शतों का पालन करता ि ै।  

 214. सूचना उपयोहगता की बाध् यताएं—प्रत् येक सूचना उपयोहगता, दकसी व् यह‍ त को कोर सेवाएं उपलब् ध कराने के प्रयोिनों 

के हलए:— 

  (क) हवत्तीय सूचना का सृिन और भंर्ारण सावगभौहमक रूप से पहंच वाले रूप हवधान में करेगी; 

(ि) ऐसे व् यह‍ तयों से, िो धारा 215 की उपधारा (1) के अधीन हवत्तीय सूचना प्र‍ तुत करने की बाध् यता के अधीन 

िैं, ऐसे प्ररूप और रीहत में, िो हवहनयमों द्वारा हवहनर्िग‍ ि दकए िाएं, हवत्तीय सूचना को इले‍ राहनक रूप में ‍ वीकार करेगी;  

(ग) ऐसे व् यह‍ तयों से, िो इस प्रकार की सूचना प्र‍ तुत करने का आशय रिते िैं, हवहनर्िग‍ ि प्ररूप और रीहत में 

हवत्तीय सूचना का इले‍ राहनक रूप में प्र‍ तुतीकरण ‍ वीकार करेगी; 

(घ) ऐसे न् यूनतम सेवा ‍ वाहलिी मानकों को पूरा करेगी, िो हवहनयमों द्वारा हवहित दकए िाएं ; 

(ङ) हवहभन् न व् यह‍ तयों से प्राप् त सूचना को, ऐसी सूचना का भंर्ारण करने से पूवग सभी संबद्ध पक्षकारों स े

अहधप्रमाणन कराएगी ;  

(च) उसके द्वारा भंर्ाररत हवत्तीय सूचना तक, ऐसी रीहत में, िो हवहनयमों द्वारा हवहनर्िग‍ ि की िाए, ऐसे दकसी 

व् यह‍ त को पहचं उपलब् ध कराएगी, िो ऐसी सूचना तक पहचं बनाने का आशय रिता िै;  

(छ) ऐसी सांहख यकीय सूचना का प्रकाशन करेगी, िो हवहनयमों द्वारा हवहनर्िग‍ ि की िाए । 

(ि) अन् य सूचना उपयोहगताओं के बीच अन् त:प्रचालनीयता रिेगी । 

 215. हवत्तीय सचूना को प्र‍ तुत करन ेआदि के हलए प्रदक्रया—(1) ऐसा कोई व् यह‍ त, िो सूचना उपयोहगता को कोई हवत्तीय 

सूचना प्र‍ तुत करने का आशय रिता िै या सूचना उपयोहगता की दकसी सूचना तक पहचं बनाना चािता िै, ऐसी फीस का संिाय करेगा 

और ऐसे प्ररूप तथा रीहत में सूचना प्र‍ तुत करेगा, िो हवहनयमों द्वारा हवहनर्िग‍ ि दकए िाएं । 

 (2) कोई हवत्तीय लेनिार हवत्तीय सूचना और ऐसी आह‍ तयों, हिनके सम् बन् ध में दकसी प्रहतभूहत हित का सृिन दकया गया िै, 

से सम् बहन् धत सूचना ऐसे प्ररूप और रीहत में प्र‍ तुत करेगा, िो हवहनयमों द्वारा हवहनर्िग‍ ि दकए िाएं । 

 (3) कोई प्रचालन लेनिार हवत्तीय सूचना को सूचना उपयोहगता को ऐसे प्ररूप और ऐसी रीहत में प्र‍ तुत कर सकेगा िो 

हवहनर्िग‍ ि दकए िाएं । 

 216. हवत्तीय सूचना प्र‍ तुत करन ेवाल े व् यह‍ तयों के अहधकार और बाध् यताएं—(1) कोई व् यह‍ त िो धारा 215 के अधीन 

प्र‍ तुत हवत्तीय सूचना को अद्यतन करने या उपांतररत करने या उसमें त्रुरियों को ठीक करने का आशय रिता ि ै तो वि सूचना 

उपयोहगता को ऐसे प्रयोिन के हलए कारणों का कथन करते हए ऐसी रीहत में और ऐसे समय के भीतर िो हवहनर्िग‍ ि दकए िाएं, 

आवेिन कर सकेगा । 



 84 

 (2) ऐसा कोई व् यह‍ त, िो दकसी सूचना उपयोहगता को कोई हवत्तीय सूचना प्र‍ तुत करता ि,ै ऐसी सूचना को दकसी अन् य 

व् यह‍ त को उपलब् ध निीं कराएगा, हसवाय उस सीमा तक, ऐसी पररह‍ थहतयों के अधीन रिते हए और ऐसी रीहत में, िो हवहनर्िग‍ ि दकए 

िाएं । 

 

 

अध् याय 6 

हनरीक्षण और अन् वषेण 

 217. दिवाला वहृत्तक अहभकरण या उसके सि‍ यों या सचूना उपयोहगता के हवरुद्ध हशकायतें—दकसी दिवाला वृ्हत्तक 

अहभकरण या दकसी दिवाला वृहत्तक या दकसी सूचना उपयोहगता के कायगकरण से व् यहथत कोई व् यह‍ त, ऐसे प्ररूप में और ऐसे समय के 

भीतर ऐसी रीहत में, िो हवहनर्िग‍ ि दकए िाएं, बोर्ग को कोई हशकायत फाइल कर सकेगा । 

 218. दिवाला वहृत्तक अहभकरण या उसके सि‍ यों या सचूना उपयोहगता का अन् वेषण—(1) ििां बोर्ग के पास, धारा 217 के 

अधीन दकसी हशकायत की प्राहप् त पर या यि हवश् वास करने के युह‍ तयु‍ त आधार िैं दक दिवाला वृहत्तक अहभकरण या दिवाला वृहत्तक 

या सूचना उपयोहगता ने इस संहिता या ति ्धीन बनाए गए हनयमों या हवहनयमों के उपबन् धों का या बोर्ग द्वारा उसके अधीन िारी 

हनिशेों का उल् लंघन दकया िै तो वि दकसी भी समय हलहित में आिशे द्वारा, दकसी व् यह‍ त या व् यह‍ तयों को, दकसी दिवाला वृहत्तक 

अहभकरण या दकसी दिवाला वृहत्तक या सूचना उपयोहगता का हनरीक्षण या अन् वेषण करने के हलए अन् वेषक प्राहधकारी के रूप में कायग 

करने का हनिशे ि ेसकेगा । 

 (2) उपधारा (1) के अधीन दकए िाने वाले हनरीक्षण या अन् वेषण का संचालन ऐसे समय के भीतर और ऐसी रीहत में दकया 

िाएगा, िो हवहनयमों द्वारा हवहनर्िग‍ ि दकए िाएं । 

 (3) अन् वषेक प्राहधकारी, ऐसे हनरीक्षण या अन् वेषण के अनुक्रम में, दकसी ऐसे अन् य व् यह‍ त से, हिसके पास प्र‍ तुत दकए िाने के 

हलए कोई सुसंगत ि‍ तावेि, अहभलेि या दकसी सूचना के िोने की संभावना िै, उसे प्र‍ तुत करने की अपेक्षा कर सकेगा और ऐसा 

व् यह‍ त ऐसे ि‍ तावेि, अहभलेि या सूचना को प्र‍ तुत करने के हलए आबद्ध िोगा: 

 परन् तु अन् वेषक प्राहधकारी, ऐसे व् यह‍ त से ऐसे ि‍ तावेि, अहभलेि या सूचना की अपेक्षा करने से पूवग उसे ब् यौरेवार कारण 

उपलब् ध कराएगा । 

 (4) अन् वषेक प्राहधकारी, अपने हनरीक्षण या अन् वेषण के अनुक्रम में, दकसी भवन या ऐसे ‍ थान में प्रवेश कर सकेगा, ििां उसके 

पास यि हवश् वास करने का कारण ि ैदक िांच की हवषय-व‍ तु से सम् बहन् धत ऐसा कोई ि‍ तावेि, अहभलेि या सूचना पाई िा सकती िै 

और वि िंर् प्रदक्रया संहिता, 1973 (1974 का 2) की धारा 100 के उपबन् धों के, ििां तक वे लागू िों, अधीन रिते हए, ऐसे दकसी 

ि‍ तावेि, अहभलेि या सूचना का अहभििण कर सकेगा या उससे उद्धिरण प्राप् त सकेगा या उसकी प्रहतयां ले सकेगा । 

 (5) अन् वषेक प्राहधकारी, इस धारा के अधीन अहभििण की गई बहियों, रहि‍ िरों, अन् य ि‍ तावेिों और अहभलेिों को ऐसी 

अवहध के हलए अपनी अहभरक्षा में रिेगा, हिसे वि आवश् यक समझता ि,ै दकन् तु यि अवहध अन् वेषण के पूरा िोने के अपश् चात् िोगी 

और उसके पश् चात् वि उन् िें ऐसे संबद्ध व् यह‍ त को लौिा िगेा, हिसकी अहभरक्षा या शह‍ त के अधीन उनका अहभििण दकया गया था:  

 परन् तु अन् वेषक प्राहधकारी, पूवो‍ तानुसार ऐसी बहियों, रहि‍ िरों, अन् य ि‍ तावेिों और अहभलेिों को लौिाने से पिले उन पर 

या उनके दकसी भाग पर पिचान हचह्न हचहह्नत करेगा ।  

 (6) अन् वषेक प्राहधकारी बोर्ग को हनरीक्षण या अन् वेषण की एक ब् यौरेवार ररपोिग प्र‍ तुत करेगा । 

 219. दिवाला वहृत्तक अहभकरण या उसके सि‍ यों या सूचना उपयोहगता को कारण बताओ सचूना िारी करना—बोर्ग, धारा 

218 के अधीन हनरीक्षण या अन् वेषण के समाप् त िोने पर, ऐस ेदिवाला वृहत्तक अहभकरण या दिवाला वृहत्तक या सूचना उपयोहगता को 

कारण बताओ सूचना िारी कर सकेगा और ऐसी रीहत में तथा उत्तर िनेे के हलए ऐसा समय प्रिान करते हए, िो हवहनयमों द्वारा 

हवहनर्िग‍ ि दकया िाए, ऐसे दिवाला वृहत्तक अहभकरण या दिवाला वृहत्तक या सूचना उपयोहगता का हनरीक्षण कर सकेगा । 

 220. अनशुासन सहमहत की हनयहु‍ त—(1) बोर्ग, धारा 218 की उपधारा (6) के अधीन प्र‍ तुत अन् वेषक प्राहधकारी की ररपोिों 

पर हवचार करने के हलए अनुशासन सहमहत का गठन करेगा: 

 परन् तु अनुशासन सहमहत में केवल बोर्ग के पूणगकाहलक सि‍ य िी सि‍ य के रूप में सहम् महलत िोंगे । 

 (2) अन् वषेक प्राहधकारी की ररपोिग की परीक्षा के पश् चात्, यदि अनुशासन सहमहत का यि समाधान िो िाता ि ैदक पयागप् त 

कारण हवद्यमान िैं तो वि यथाह‍ थहत, उपधारा (3) में हवहनर्िग‍ ि दकए गए अनुसार धनीय शाह‍ त अहधरोहपत कर सकेगी या दिवाला 

वृहत्तक के रहि‍ रीकरण को हनलंहबत या रद्द कर सकेगी या दिवाला वृहत्तक अहभकरण या सूचना उपयोहगता के रहि‍ रीकरण को  

हनलंहबत या रद्द कर सकेगी । 



 85 

 (3) ििां दकसी दिवाला वृहत्तक अहभकरण या दिवाला वृहत्तक या दकसी सूचना उपयोहगता ने इस संहिता या ति ्धीन बनाए 

गए हनयमों या हवहनयमों के दकसी उपबन् ध का उल् लंघन दकया ि ैविां अनुशासन सहमहत ऐसी शाह‍ त अहधरोहपत कर सकेगी, िो— 

(i) ऐसे उल् लंघन के कारण संबद्ध व् यह‍ तयों को हई िाहन या ऐसी िाहन की, हिसके काररत िोने की संभावना थी, 

की रकम का तीन गुणा; या 

(ii) ऐसे उल् लंघन के कारण प्राप् त दकए गए हवहधहवरुद्ध अहभलाभ की रकम का तीन गुणा, 

इनमें से िो भी उ‍ चतर िो, िोगी: 

 परन् तु ििां ऐसी िाहन या हवहधहवरुद्ध अहभलाभ की मात्रा को तय निीं दकया िा सकता, विां अहधरोहपत की िाने वाली 

शाह‍ त की कुल रकम एक करोड़ से अहधक निीं िोगी । 

 (4) उपधारा (3) में अंतर्वग‍ ि दकसी बात के िोते हए भी, बोर्ग दकसी ऐसे व् यह‍ त को, हिसने इस संहिता या ति ्धीन बनाए 

गए हनयमों या हवहनयमों के उल् लंघन में कोई दक्रयाकलाप करके कोई हवहधहवरुद्ध अहभलाभ प्राप् त दकया ि ैया वि दकसी िाहन से बचा 

ि ैतो वि ऐसे हवहधहवरुद्ध लाभ या हनवाररत िाहन के समतुल् यक की रकम को वापस करेगा । 

 (5) बोर्ग, ऐसे व् यह‍ त को, हिसन ेइस प्रकार वापस की गई दकसी रकम से दकसी उल् लंघन के कारण कोई िाहन उठाई िै, 

प्रत् या‍ थापन उपलब् ध कराने के हलए यथापेहक्षत कारगवाई कर सकेगा, यदि ऐसे व् यह‍ त की, हिसने ऐसी िाहन उठाई ि ैपिचान की िा 

सकती ि ैऔर इस प्रकार उठाई गई िाहन प्रत् यक्ष रूप से ऐसे व् यह‍ त के कारण हई ि ै। 

 (6) बोर्ग हनम् नहलहित को हवहनर्िग‍ ि करने के हलए हवहनयम बना सकेगा— 

  (क) उपधारा (5) के अधीन प्रत् या‍ थापन का िावा करने के हलए प्रदक्रया; 

  (ि) ऐसी अवहध, हिसके भीतर ऐसे प्रत् या‍ थापन का िावा दकया िा सकेगा; और 

  (ग) वि रीहत हिसमें रकम का प्रत् या‍ थापन दकया िा सकेगा । 

अध् याय 7 

हवत्त, लिेा और लिेापरीक्षा 

221. केन् रीय सरकार द्वारा अनिुान—केन् रीय सरकार, संसि ्द्वारा इस हनहमत्त हवहध द्वारा दकए िाने वाले सम् यक् हवहनयोग 

के पश् चात्, बोर्ग को ऐसी धनराहशयों का अनुिान कर सकेगी, हिन् िें सरकार इस संहिता के प्रयोिनों के हलए उपयोग करने ितेु उहचत 

समझती ि ै। 

222. बोर्ग की हनहध—(1) दिवाला और शोधन अक्षमता बोर्ग की हनहध के नाम से ज्ञात एक हनहध का गठन दकया िाएगा और 

उसमें हनम् नहलहित को िमा दकया िाएगा— 

 (क) इस संहिता के अधीन बोर्ग द्वारा प्राप् त दकए गए सभी अनुिान, फीस और प्रभार; 

(ि) बोर्ग द्वारा ऐसे अन् य स्रोतों से, हिनके सम् बन् ध में कें रीय सरकार द्वारा हवहनश् चय दकया िाए, प्राप् त सभी 

राहशयां;  

(ग) ऐसी अन् य हनहधयां, िो बोर्ग द्वारा हवहनर्िग‍ ि या कें रीय सरकार द्वारा हवहित की िाएं । 

 (2) हनहध का उपयोग हनम् नहलहित व् ययों की पूर्तग के हलए दकया िाएगा— 

  (क) बोर्ग के सि‍ यों, अहधकाररयों और अन् य कमगचाररयों के वेतन, भते्त और अन् य पाररश्रहमक; 

(ि) धारा 196 के अधीन बोर्ग के कृत् यों के हनवगिन में उसके व् यय; 

(ग) इस संहिता द्वारा प्राहधकृत उद्देश् यों और प्रयोिनों पर व् यय; 

(घ) ऐसे अन् य प्रयोिन, िो हवहित दकए िाएं । 

 223. लिेा और लिेापरीक्षा—(1) बोर्ग समुहचत लेिा और अन् य सुसंगत अहभलेि रिेगा और ऐसे प्ररूप में, िो कें रीय 

सरकार द्वारा भारत के हनयंत्रक-मिालेिापरीक्षक के परामशग से हवहित दकया िाए, लेिाओं का एक वार्षगक हववरण तैयार करेगा । 

 (2) बोर्ग के लेिाओं की लेिापरीक्षा भारत के हनयंत्रक-मिालेिापरीक्षक द्वारा ऐसे अंतरालों पर की िाएगी, िो उसके द्वारा 

हवहनर्िग‍ ि दकए िाएं और ऐसी लेिापरीक्षा के सम् बन् ध में उपगत कोई व् यय बोर्ग द्वारा भारत के हनयंत्रक मिालेिापरीक्षक को                

संिये िोगा । 

 (3) भारत के हनयंत्रक-मिालेिापरीक्षक और बोर्ग के लेिाओं की लेिापरीक्षा के सम् बन् ध में उसके द्वारा हनयु‍ त दकसी अन् य 

व् यह‍ त को विी अहधकार और हवशेषाहधकार तथा प्राहधकार िोंगे, िो हनयंत्रक-मिालेिापरीक्षक के पास शासकीय लेिाओं की 



 86 

लेिापरीक्षा के सम् बन् ध में साधारण रूप से िोते िैं और उसके पास हवशेष रूप से, बहियों, लेिाओं, संबद्ध वाऊचरों और अन् य ि‍ तावेिों 

और कागि पत्रों की मांग करने और बोर्ग के दकसी भी कायागलय का हनरीक्षण करने का प्राहधकार िोगा । 

 (4) भारत के हनयंत्रक-मिालेिापरीक्षक या उसके द्वारा इस हनहमत्त हनयु‍ त दकसी अन् य व् यह‍ त द्वारा यथा प्रमाहणत बोर्ग के 

लेिाओं को उनसे सम् बहन् धत लेिापरीक्षा ररपोिग के साथ वार्षगक रूप से केन् रीय सरकार को अिेहषत दकया िाएगा और वि सरकार उसे 

संसि ्के प्रत् येक सिन के समक्ष रिवाएगी । 

भाग 5 

प्रकीणग 

 224. दिवाला और शोधन अक्षमता हनहध—(1) इस संहिता के अधीन व् यह‍ तयों के दिवाला समाधान, समापन और शोधन 

अक्षमता के प्रयोिनों के हलए दिवाला और शोधन अक्षमता हनहध (हिसे इस धारा में इसके पश् चात् “हनहध” किा गया ि)ै नाम से ज्ञात 

एक हनहध का गठन दकया िाएगा । 

 (2) इस हनहध में हनम् नहलहित रकमों को िमा दकया िाएगा, अथागत्:— 

  (क) केन् रीय सरकार द्वारा हनहध के प्रयोिनों के हलए दकए गए अनुिान; 

  (ि) व् यह‍ तयों द्वारा हनहध को अहभिाय के रूप में उसमें िमा की गई रकम; 

  (ग) दकसी अन् य स्रोत से हनहध में प्राप् त की गई रकम; और 

  (घ) हनहध में से दकए गए हवहनधान से प्राप् त ब् याि या अन् य आय । 

 (3) ऐसा कोई व् यह‍ त, हिसने हनहध में दकसी रकम का अहभिाय दकया ि,ै इस संहिता के अधीन दकसी न् यायहनणागयक 

प्राहधकारी के समक्ष उस व् यह‍ त के सम् बन् ध में दकन् िीं कायगवाहियों के प्रारम् भ दकए िाने की िशा में, ऐसे न् यायहनणागयक प्राहधकारी को 

हनहध से, कार्मगकों को संिाय करने के हलए, ऐसे व् यह‍ तयों की आह‍ तयों के संरक्षण के हलए, कायगवाहियों के िौरान आनुषंहगक लागतों 

को चुकाने के हलए या ऐसे अन् य प्रयोिनों के हलए, िो हवहित दकए िाएं, उसके द्वारा अहभिाय की गई रकम से अनहधक रकम हनकालने 

के हलए आवेिन कर सकेगा । 

 (4) केन् रीय सरकार, हनहध का प्रशासन करने के हलए, ऐसी रीहत में, िो हवहित की िाए, अहधसूचना द्वारा एक प्रशासक की 

हनयुह‍ त करेगी । 

 225. केन् रीय सरकार की हनिशे िने ेकी शह‍ त—(1) इस अहधहनयम के पूवगगामी उपबन् धों पर प्रहतकूल प्रभाव र्ाले हबना, 

बोर्ग, इस संहिता के अधीन अपनी शह‍ तयों के प्रयोग या कृत् यों के हनवगिन में नीहत के प्रश् नों के सम् बन् ध में ऐसे हनिशेों द्वारा आबद्ध 

िोगा, िो केन् रीय सरकार समय-समय पर उसे हलहित में ि:े 

 परन् तु बोर्ग को इस उपधारा के अधीन उसे कोई हनिशे दिए िाने से पूवग यथासाध् य अपने हवचार अहभव् य‍ त करने का अवसर 

प्रिान दकया िाएगा । 

 (2) इस सम् बन् ध में दक ‍ या कोई प्रश् न नीहत का प्रश् न ि ैअथवा निीं, केन् रीय सरकार का हवहनश् चय अंहतम िोगा । 

 226. केन् रीय सरकार की बोर्ग को अहधक्रान् त करन ेकी शह‍ त—(1) यदि दकसी भी समय केन् रीय सरकार की यि राय ि ैदक— 

(क) दकसी अत् यावश् यकता के कारण, बोर्ग, उस पर इस संहिता के उपबन् धों के द्वारा या उसके अधीन अहधरोहपत 

कृत् यों और कतगव् यों का हनवगिन करने में, असमथग ि;ै या 

(ि) बोर्ग ने इस संहिता के अधीन केन् रीय सरकार द्वारा िारी दकसी हनिशे का हनरंतर रूप से पालन निीं दकया िै 

या उसने इस संहिता के उपबन् धों द्वारा या उसके अधीन उस पर अहधरोहपत दकन् िीं कृत् यों और कतगव् यों का हनवगिन निीं दकया 

ि ैऔर ऐसे अननुपालन के पररणाम‍ वरूप बोर्ग की हवत्तीय ह‍ थहत या बोर्ग के प्रशासन का ह्रास हआ िै; या 

(ग) ऐसी पररह‍ थहतयां हवद्यमान िैं िो लोकहित में ऐसा करना आवश् यक बनाती िैं,  

तो केन् रीय सरकार, अहधसूचना द्वारा बोर्ग को छि मास से अनहधक की ऐसी अवहध के हलए, िो अहधसूचना में हवहनर्िग‍ ि की िाएगी, 

अहधक्रान् त कर सकेगी । 

 (2) उपधारा (1) के अधीन बोर्ग को अहधक्रान् त करने वाली अहधसूचना के प्रकाशन पर—(क) सभी सि‍ य, अहधक्रमण की 

तारीि से, अपने-अपने पि रर‍ त कर िगेें; (ि) ऐसी सभी शह‍ तयों, कृत् यों और कतगव् यों का, िो इस संहिता के उपबन् धों के द्वारा या 

उनके अधीन बोर्ग के द्वारा या उसकी ओर से प्रयोग या हनवगिन दकया िा  रिा था, प्रयोग या हनवगिन उपधारा (3) के अधीन बोर्ग के 

पुनगगठन तक ऐसे व् यह‍ त या व् यह‍ तयों द्वारा दकया िाएगा, हिन् िें कें रीय सरकार ऐसा करने का हनिशे िे, और (ग) बोर्ग के ‍ वाहमत् व 

वाली या उसके द्वारा हनयंहत्रत सभी संपहत्तयां, उपधारा (3) के अधीन बोर्ग के पुनगगठन तक, कें न् रीय सरकार में हनहित िो िाएंगी । 



 87 

 (3) कें न् रीय सरकार, उपधारा (1) के अधीन िारी अहधसूचना में हवहनर्िग‍ ि अहधक्रमण की अवहध के अवसान पर, नई 

हनयुह‍ त द्वारा बोर्ग का पुनगगठन कर सकेगी और उस िशा में ऐसे दकसी व् यह‍ त या व् यह‍ तयों को, हिन् िोंने उपधारा (2) के िंर् (क) के 

अधीन अपने पिों को रर‍ त दकया था, हनयुह‍ त के हलए हनरर्िगत निीं माना िाएगा : 

 परंतु कें रीय सरकार, अहधक्रमण की अवहध के अवसान से पूवग दकसी भी समय इस उपाधारा के अधीन कारगवाई कर सकेगी । 

 (4) कें न् रीय सरकार उपधारा (1) के अधीन एक नई अहधसूचना िारी करवाएगी और इस धारा के अधीन की गई दकसी 

कारगवाई की पूणग ररपोिग और ऐसी कारगवाई हिन पररह‍ थहतयों में की गई थी उनके बारे में िानकारी शीघ्राहतशीघ्र संसि ्के प्रत् येक सिन 

के समक्ष रिवाएगी । 

 227. केन् रीय सरकार की हवत्तीय सवेा प्रिाताओं आदि को अहधसहूचत करन ेकी शह‍ त—1[इस संहिता या तत् समय प्रवृत्त 

दकसी अन् य हवहध में अतंर्वग‍ ि दकसी] प्रहतकूल बात के िोते हए भी, केन् रीय सरकार, यदि वि आवश् यक समझती ि,ै तो हवत्तीय क्षेत्र के 

उपयु‍ त हवहनयामकों के परामशग से हवत्तीय सेवा प्रिाताओं या हवत्तीय सेवा प्रिाताओं के प्रवगग को, उनकी दिवाला और समापन 

कायगवाहियों के प्रयोिनों के हलए िो इस संहिता के अधीन की िा सकें , ऐसी रीहत में, िो हवहित की िाए, अहधसहूचत कर सकेगी ।    

 1[‍पष्टीकरण—शंकाओं को िरू करने के हलए, यि ‍पष्ट दकया िाता ि ैदक हवत्तीय सेवा प्रिाताओं या हवत्तीय सेवा प्रिाताओं के 

प्रवगों के हलए दिवाला और समापन कायगवाहियां, ऐसे उपातंरणों सहित और ऐसी रीहत में, िो हवहित की िाएं, संचाहलत की           

िाएंगी ।] 

 228. बिि—बोर्ग, प्रत् येक हवत्तीय वषग में ऐसे प्ररूप में और ऐसे समय पर, िो हवहित दकए िाएं, आगामी हवत्तीय वषग के हलए 

अपना बिि तैयार करेगा, हिसमें बोर्ग की प्रा‍ कहलत प्राहप् तयों और व् यय को िर्शगत दकया िाएगा और उसे कें रीय सरकार को अिेहषत 

दकया िाएगा । 

 229. वार्षगक ररपोिग—(1) बोर्ग प्रत् येक हवत्तीय वषग में ऐसे प्ररूप में और ऐसे समय पर, िो हवहित दकए िाएं, अपनी वार्षगक 

ररपोिग तैयार करेगा, हिसमें पूवगवती हवत्तीय वषग के िौरान उसके दक्रयाकलापों का पूणग लेिा-िोिा दिया िाएगा और उसकी एक प्रहत 

कें रीय सरकार को प्र‍ तुत करेगा । 

 (2) उपधारा (1) के अधीन प्राप् त ररपोिग की एक प्रहत को, उसके प्राप् त िोने के पश् चात् यथासंभव शीघ्र संसि ्के प्रत् येक सिन के 

समक्ष रिा िाएगा । 

 230. प्रत् यायोिन—बोर्ग, हलहित में दकसी साधारण या हवशेष आिेश द्वारा, ऐसी शतों के, यदि कोई िों और हिन् िें आिशे में 

हवहनर्िग‍ ि दकया िाए, अधीन रिते हए बोर्ग के दकसी सि‍ य या अहधकारी को इस संहिता के अधीन ऐसी शह‍ तयों और कृत् यों (धारा 

240 के अधीन की शह‍ तयों को छोर्कर) का प्रत् यायोिन कर सकेगा, हिन् िें वि आवश् यक समझे । 

 231. अहधकाररता का विगन—दकसी भी हसहवल न् यायालय को, ऐस ेदकसी मामले के संबंध में अहधकाररता निीं िोगी हिसके 

संबंध में 2[न् यायहनणागयक प्राहधकारी या बोर्ग] इस संहिता द्वारा या उसके अधीन कोई आिशे पाररत करने के हलए सश‍ त ि ैऔर ऐसे 
1[न् यायहनणागयक प्राहधकारी या बोर्ग] द्वारा इस संहिता के द्वारा या उसके अधीन पाररत दकसी आिशे के अनुसरण में की गई या दकए 

िाने वाली दकसी कारगवाई के संबंध में दकसी न् यायालय या अन् य प्राहधकरण द्वारा कोई व् यािशे मंिूर निीं दकया िाएगा । 

 232. बोर्ग के सि‍ यों, अहधकाररयों और कमगचाररयों का लोक सेवक िोना—बोर्ग के अध् यक्ष, सि‍ यों, अहधकाररयों और अन् य 

कमगचाररयों को, िब वे इस संहिता के उपबंधों में से दकसी के अनुसरण में कायग कर रिे िैं या तात् पर्यगत रूप से कायग कर रिे िों तो उन् िें 

भारतीय िरं् संहिता (1860 का 45) की धारा 21 के अथागन् तगगत लोक सेवक समझा िाएगा । 

 233. सद्भावपूवगक की गई कारगवाई का संरक्षण—सरकार या सरकार के दकसी अहधकारी या बोर्ग के अध् यक्ष, सि‍ य, 

अहधकारी या अन् य कमगचारी के हवरुद्ध इस संहिता या ति ्धीन बनाए गए हनयमों या हवहनयमों के अधीन सद्भावपूवगक की गई या दकए 

िाने के हलए आशहयत दकसी बात के हलए कोई वाि, अहभयोिन या अन् य हवहधक कायगवािी निीं िोगी । 

 234. हविशेों के साथ करार—(1) केन् रीय सरकार इस संहिता के उपबंधों को प्रवृत्त करने के हलए भारत से बािर दकसी िशे 

की सरकार के साथ करार कर सकेगी । 

 (2) केन् रीय सरकार रािपत्र में अहधसूचना द्वारा यि हनिशे ि ेसकेगी दक, यथाह‍ थहत, दकसी हनगहमत ऋणी या ऋणी की 

आह‍ तयों या संपहत्तयों के संबंध में हिसके अन् तगगत हनगहमत ऋणी का वैयह‍ तक प्रहतभूहतिाता भी िै िो भारत से बािर दकसी िशे में 

अवह‍ थत ि ैहिसके साथ पार‍ पररक करार दकया गया ि ैके संबंध में इस संहिता के उपबंधों का लागू िोना ऐसी शतों के अध् यधीन िोगा, 

िो हवहित की िाएं । 

 235. कहतपय मामलों में भारत स ेबािर दकसी िशे को अनरुोध पत्र—(1) इस संहिता या तत् समय प्रवृत्त दकसी अन् य हवहध में 

अन् तर्वग‍ ि दकसी बात के िोते हए भी, यथाह‍ थहत, दिवाला समाधान प्रदक्रया या समापन या शोधन अक्षमता कायगवाहियों के प्रक्रम में 

इस संहिता के अधीन, यथाह‍ थहत, समाधान वहृत्तक या समापक या शोधन अक्षमता न् यासी का यदि यि मत ि ैदक हनगहमत ऋणी या 

                                                 
1 2020 के अहधहनयम सं० 1 की धारा 11 द्वारा प्रहत‍ थाहपत ।   
2 2018 के अहधहनयम सं० 26 की धारा 33 द्वारा “न् यायहनणागयक प्राहधकारी” शब् िों के ‍ थान पर प्रहत‍ थाहपत ।   



 88 

ऋणी हिसके अन् तगगत हनगहमत ऋणी का व् यह‍ तक प्रहतभूहत िाता भी िै, की अह‍ तयां भारत से बािर ऐसे िशे में ह‍ थत िैं हिसके साथ 

धारा 234 के अधीन पार‍ पररक करार दकए गए िैं, वि न् यायहनणागयक प्राहधकारी को इस बात का आवेिन कर सकेगा दक ऐसी प्रदक्रया 

या कायगवािी से संबंहधत आह‍ तयों के संबंध में साक्ष् य या कारगवाई अपेहक्षत ि ै। 

 (2) उपधारा (1) के अधीन आवेिन की प्राहप् त पर और यि समाधान िो िाने पर दक उपधारा (1) के अधीन दिवाला समाधान 

प्रदक्रया या समापन या शोधन अक्षमता कायगवाहियों के संबंध में साक्ष् य या कारगवाई अपेहक्षत ि,ै न् यायहनणागयक प्राहधकारी, ऐसे िशे के 

न् यायालय या प्राहधकारी को, िो ऐसे अनुरोध का हनपिान करने में सक्षम ि ैअनुरोध पत्र िारी कर सकेगा ।  

 1[235क. ििा ंकोई हवहनर्िग‍ ि शाह‍ त या िरं् उपबहंधत निीं ि ैविा ंिरं्—यदि कोई व् यह‍ त इस संहिता या उसके अधीन 

बनाए गए हनयमों या हवहनयमों के उपबंधों में से दकन् िीं ऐस ेउपबंधों का उल् लंघन करता ि,ै हिसके हलए इस संहिता में दकसी शाह‍ त या 

िरं् का उपबंध निीं ि,ै तो ऐसा व् यह‍ त िुमागने से, िो एक लाि रूपए से कम निीं िोगा दकन् तु िो िो करोड़ रुपए तक का िो सकेगा, 

िरं्नीय िोगा । 

 236. हवशेष न् यायालय द्वारा अपराधों का हवचारण—(1) िरं् प्रदक्रया संहिता, 1973 (1974 का 2) में अन् तर्वग‍ ि दकसी बात के 

िोते हए भी इस संहिता के अधीन अपराधों का हवचारण कंपनी अहधहनयम, 2013 (2013 का 18) के अध् याय 28 के अधीन ‍ थाहपत 

हवशेष न् यायालय द्वारा दकया िाएगा ।  

 (2) कोई न् यायालय इस अहधहनयम के अधीन िरं्नीय दकसी अपराध का संज्ञान बोर्ग या केन् रीय सरकार या केन् रीय सरकार 

द्वारा इस हनहमत्त प्राहधकृत व् यह‍ त द्वारा की गई हशकायत के हसवाय निीं लेगा । 

 (3) िरं् प्रदक्रया सहंिता, 1973 (1974 का 2) के उपबंध हवशेष न् यायालय के समक्ष कायगवाहियों को लागू िोंगे और उ‍ त 

उपबंधों के प्रयोिन के हलए हवशेष न् यायालय को, सेशन न् यायालय समझा िाएगा और हवशेष न् यायालय के समक्ष अहभयोिन का 

संचालन करने वाले व् यह‍ त को लोक अहभयोिन समझा िाएगा । 

 (4) िरं् प्रदक्रया संहिता, 1973 (1974 का 2) में अन् तर्वग‍ ि दकसी बात के िोते हए भी उपधारा (2) के अधीन दकसी पररवाि 

की िशा में केन् रीय सरकार या बोर्ग द्वारा प्राहधकृत दकसी व् यह‍ त की हवचारण करने वाले न् यायालय के समक्ष उपह‍ थहत तब तक 

आवश् यक निीं िोगी िब तक न् यायालय हवचारण में उसकी वैयह‍ तक उपह‍ थहत की अपेक्षा न करे । 

 237. अपील और पनुरीक्षण—उ‍ च न् यायालय, ििां तक लागू िो, िरं् प्रदक्रया संहिता, 1973 (1974 का 2) के अध् याय 29 

और अध् याय 30 द्वारा उ‍ च न् यायालय को प्रित्त सभी शह‍ तयों का प्रयोग इस प्रकार कर सकेगा मानों वि उ‍ च न् यायालय की ‍ थानीय 

अहधकाररता के भीतर कोई हवशेष न् यायालय उ‍ च न् यायालय की ‍ थानीय सीमाओं के भीतर मामलों का हवचारण करने वाला कोई 

सेशन न् यायालय िो । 

 238. इस सहंिता के उपबधंों का अन् य हवहधयों पर अध् यारोिी िोना—इस संहिता के उपबंध, तत् समय प्रवृत्त दकसी अन् य हवहध 

में या दकसी ऐसी हलित में, िो ऐसी दकसी हवहध के कारण प्रभावी िैं, अन् तर्वग‍ ि उससे असंगत दकसी बात के िोते हए भी प्रभावी िोंगे।  

 2[238क. पररसीमा—पररसीमा अहधहनयम, 1963 (1963 का 36) के उपबंध, यथाश‍ य न् यायहनणागक प्राहधकारी, रा‍ रीय 

कंपनी हवहध अपील अहधकरण, यथाह‍ थहत, ऋण वसूली अहधकरण या ऋण वसूली अपील अहधकरण के समक्ष कायगवाहियों या अपीलों 

को लागू िोंगे ।   

 239. हनयम बनान ेकी शह‍ त—(1) कें रीय सरकार, अहधसूचना द्वारा इस संहिता के उपबंधों के कायागन् वयन के हलए हनयम 

बना सकेगी । 

 (2) उपधारा (1) के उपबंधों की व् यापकता पर प्रहतकूल प्रभाव र्ाले हबना, कें रीय सरकार हनम् नहलहित दकन् िीं हवषयों के हलए 

हनयम बना सकेगी, अथागत्:—    

  (क) कोई अन् य हलित, िो धारा 3 के िंर् (15) के अधीन कोई हवत्तीय उत् पाि िोगा; 

  (ि) अन् य लेिांकन मानक, िो धारा 5 की उपधारा (8) के िंर् (घ) के अधीन हवत्तीय ऋण िोंगे; 

  (ग) धारा 7 की उपधारा (2) के अधीन हवत्तीय लेनिार द्वारा हनगहमत दिवाला समाधान प्रदक्रया आरम् भ करने के 

 हलए न् यायहनणागयक प्राहधकारी के समक्ष आवेिन करने का प्ररूप, रीहत और फीस; 

  (घ) धारा 8 की उपधारा (1) के अधीन हनगहमत ऋणी को की िा सकने वाली मांग की सूचना का प्ररूप और रीहत 

 और उसे पररित्त करने की रीहत; 

  (ङ) धारा 9 की उपधारा (2) के अधीन प्रचालन लेनिार द्वारा हनगहमत दिवाला समाधान प्रदक्रया आरम् भ करने के 

 हलए न् यायहनणागयक प्राहधकारी के समक्ष आवेिन करने का प्ररूप, रीहत और फीस;  

                                                 
1 2018 के अहधहनयम सं० 8 की धारा 8 द्वारा अंत:‍ थाहपत ।   
2 2018 के अहधहनयम सं० 26 की धारा 34 द्वारा अंत:‍ थाहपत ।   



 89 

1[(ङक) इस बात की पुह‍ ि करने वाला न् य सबूत दक हनगहमत ऋणी द्वारा असंित्त प्रचालन ऋण का कोई संिाय 

निीं दकया गया ि ैया धारा 9 की उपधारा (3) के िंर् (ङ) के अधीन ऐसी कोई अन् य सूचना;  

  (च) धारा 10 की उपधारा (2) के अधीन हनगहमत आवेिक द्वारा हनगहमत दिवाला समाधान प्रदक्रया आरम् भ करने 

 के हलए न् यायाहनणागयक प्राहधकारी के समक्ष आवेिन करने का प्ररूप, रीहत और फीस;  

 2[(चक) धारा 21 की उपधारा (2) के िसूरे परंतुक के अधीन संव्यविार ;  

(चि) धारा 29क के िंर् (ग) के ‍पष्टीकरण 1 के अधीन संव्यविार ;  

(चग) धारा 29क के िंर् (ञ) के िसूरे परंतुक के अधीन संव्यविार ;] 

  (छ) धारा 79 की उपधारा (1) के ‍ प‍ िीकरण के िंर् (ii) के अधीन वे व् यह‍ त, िो नातेिार िोंगे; 

  (ि) धारा 79 की उपधारा (13) के िंर् (ङ) के अधीन ऋणी के ‍ वाहमत् व के अधीन अहवल् लंगहमत एकल हनवास 

 एकक का मूल् य; 

  (झ) धारा 79 की उपधारा (14) के िंर् (ग) के अधीन मूल् य और िंर् (च) के अधीन कोई अन् य ऋण; 

  (ञ) धारा 81 की उपधारा (3) के अधीन नए हसरे से आरंभ के आिशे के हलए आवेिन करने का प्ररूप, रीहत और 

 फीस; 

  (ि) धारा 81 की उपधारा (3) के िंर् (ङ) के अधीन ऋणी के वैयह‍ तक ब् यौरों की हवहश‍ ियां;  

  (ठ) धारा 86 की उपधारा (3) के अधीन अवेिन के समथगन में सूचना और ि‍ तावेि; 

  (र्) धारा 94 की उपधारा (6) के अधीन ऋणी द्वारा दिवाला समाधान प्रदक्रया आरम् भ करने के हलए आवेिन करने 

 का प्ररूप, रीहत और फीस; 

  (ढ) धारा 95 की उपधारा (6) के अधीन लेनिार द्वारा दिवाला समाधान प्रदक्रया आरम् भ करने के हलए आवेिन 

 करने का प्ररूप, रीहत और फीस; 

  (ण) धारा 103 की उपधारा (2) के अधीन समाधान वृहत्तक को लेनिार द्वारा उपलब् ध कराई िाने वाली 

 हवहशह‍ ियां; 

  (त) धारा 122 की उपधारा (1) के िंर् (ि) के अधीन ऋणी द्वारा शोधन अक्षमता के हलए आवेिन करने का प्ररूप 

 और रीहत; 

  (थ) धारा 122 की उपधारा (3) के अधीन ऋणी के कायों के हववरण का प्ररूप और रीहत; 

  (ि) धारा 123 की उपधारा (1) के िंर् (घ) के अधीन अन् य सूचना; 

  (ध) धारा 123 की उपधारा (6) के अधीन शोधन अक्षमता के हलए आवेिन करने का प्ररूप, रीहत और फीस; 

  (न) धारा 129 की उपधारा (2) के अधीन वि प्ररूप और रीहत, हिसमें हवत्तीय प्राह‍ थहत का हववरण प्र‍ तुत दकया 

 िाएगा; 

  (प) धारा 130 की उपधारा (2) के अधीन वे हवषय और ब् यौरे, हिन् िें लोक सूचना में सहम् महलत दकया िाएगा; 

  (फ) धारा 130 की उपधारा (3) के अधीन वे हवषय और ब् यौरे, हिन् िें लेनिारों की सूचना में सहम् महलत दकया 

 िाएगा; 

  (ब) धारा 131 की उपधारा (1) और उपधारा (2) के अधीन शोधन अक्षमता न् यासी को िावों के ब् यौरे और अन् य 

 सूचना भेिने की रीहत; 

  (भ) धारा 141 की उपधारा (1) के िंर् (घ) के अधीन हवत्तीय या वाहणहज् यक संव् यविार का मूल् य; 

  (म) धारा 150 की उपधारा (1) के िंर् (घ) के अधीन शोधन अक्षम द्वारा शोधन अक्षमता न् यासी को उसके कृत् यों 

 को करने में सिायता के हलए की िाने वाली अन् य बातें;  

  (य) धारा 170 की उपधारा (4) के अधीन अहधशेष से व् यौिार करने की रीहत; 

  (यक) धारा 171 की उपधारा (2) के िंर् (ग) के अधीन ऋण के सबूत का प्ररूप और रीहत; 

  (यि) धारा 171 की उपधारा (7) के अधीन लाभांश प्राप् त करने की रीहत; 

                                                 
1 2018 के अहधहनयम सं० 26 की धारा 35 द्वारा अंत:‍ थाहपत । 
2 2020 के अहधहनयम सं० 1 की धारा 12 द्वारा प्रहत‍ थाहपत ।   



 90 

  (यग) धारा 176 की उपधारा (2) के अधीन वे हवहशह‍ ियां, िो सूचना में अंतर्वग‍ ि िोंगी; 

  (यघ) धारा 189 की उपधारा (5) के अधीन बोर्ग के अध् यक्ष और सि‍ यों को संिये वेतन और भते्त तथा सेवा के अन् य 

 हनबंधन और शतें; 

  (यङ) धारा 196 की उपधारा (1) के िंर् (प) के अधीन बोर्ग के अन् य कृत् य; 

  (यच) धारा 222 की उपधारा (1) के िंर् (ग) के अधीन अन् य हनहधयां; 

  (यछ) धारा 222 की उपधारा (2) के िंर् (घ) के अधीन अन् य प्रयोिन, हिनके हलए हनहधयों का उपयोिन दकया 

 िाएगा; 

  (यि) धारा 223 की उपधारा (1) के अधीन वि प्ररूप, हिसमें लेिाओं का वार्षगक हववरण तैयार दकया िाएगा; 

  (यझ) धारा 224 की उपधारा (3) के अधीन वि प्रयोिन, हिनके हलए हनहधयों का आिरण करने के हलए आवेिन 

 दकया िा सकेगा; 

  (यञ) धारा 224 की उपधारा (4) के अधीन हनहध को प्रशाहसत करने की रीहत; 

  (यि) धारा 227 के अधीन दिवाला और समापन कायगवाहियां संचाहलत करने की रीहत; 

  (यठ) धारा 228 के अधीन बोर्ग द्वारा बिि तैयार करने का प्ररूप और समय; 

  (यर्) धारा 229 की उपधारा (1) के अधीन वार्षगक ररपोिग तैयार करने का प्ररूप और समय; 

  (यढ) धारा 243 की उपधारा (2) के िंर् (vi) के अधीन वि समय हिस तक दकसी पि पर हनयु‍ त कोई व् यह‍ त 

 अपना पि धारण करता रिगेा । 

 240. हवहनयम बनान ेकी शह‍ त—(1) बोर्ग, अहधसूचना द्वारा इस संहिता के प्रयोिनों के कायागन् वयन के हलए ऐसे हवहनयम 

बना सकेगा, िो इस संहिता और ति ्धीन बनाए गए हनयमों से संगत िों । 

 (2) हवहश‍ ितया और पूवगगामी शह‍ त की व् यापकता पर प्रहतकूल प्रभाव र्ाले हबना, ऐसे हवहनयमों में हनम् नहलहित हवषयों में 

से सभी या दकन् िीं के संबंध में उपबंध िो सकें गे, अथागत्:— 

  (क) धारा 3 िंर् (9) के उपिंर् (क) के अधीन हवत्तीय सूचना के इले‍ राहनकी रूप में प्र‍ तुत करने को ‍ वीकार 

 करने का प्ररूप और रीहत; 

  (ि) धारा 3 के िंर् (9) के उपिंर् (घ) के अधीन वे व् यह‍ त, हिन् िें सूचना उपयोहगता के पास भंर्ाररत सूचना तक 

 पहचं का उपबंध दकया िा सकेगा; 

  (ग) धारा 3 के िंर् (13) के उपिंर् (च) के अधीन कोई अन् य सूचना; 

  (घ) धारा 5 के िंर् (13) के उपिंर् (ङ) के अधीन अन् य लागतें; 

  (ङ) समापक द्वारा समापन कालावहध के िौरान उपगत लागत, िो धारा 5 के िण् र् (16) के अधीन समापन 

 लागत िोगी; 

  (च) िंर् (क) के अधीन व् यहतक्रम के अन् य अहभलेि या साक्ष् य और धारा 7 की उपधारा (3) के िंर् (ग) के अधीन 

 कोई अन् य सूचना; 

  1*  *  *  *  *  * 

  (ि) धारा 10 की उपधारा (3) के िंर् (क) के अधीन कालावहध; 

  (झ) धारा 14 की उपधारा (2) के अधीन हनगहमत ऋणी को अहनवायग व‍ तुओं या सेवाओं की पूर्तग;  

 2[(झक) वे पररह‍थहतयां, हिनमें मित्वपूणग माल या सेवाओं का प्रिाय, धारा 14 की उपधारा (2क) के अधीन 

अहध‍थगन की अवहध के िौरान पयगवहसत, हनलंहबत या हवह‍छन्न दकया िा सकेगा ;] 

  (ञ) धारा 15 की उपधारा (2) के अधीन लोक घोषणा करने की रीहत;  

  3[(ञक) धारा 15 की उपधारा (1) के ख  ा ंर् (ग) के अधीन िावों को प्र‍ तुत करने की अंहतम तारीि;] 

  (ि) धारा 17 की उपधारा (2) के िंर् (ि) के अधीन कारगवाई करने की रीहत और उन पर हनबंधन; 

                                                 
12018 के अहधहनयम सं० 26 की धारा 35 द्वारा लोप दकया गया । 
2 2020 के अहधहनयम सं० 1 की धारा 13 द्वारा अंत:‍ थाहपत ।   
3 2018 के अहधहनयम सं० 26 की धारा 36 द्वारा अंत:‍ थाहपत । 



 91 

  (ठ) धारा 17 की उपधारा (2) के िंर् (घ) के अधीन अन् य व् यह‍ त; 

  (र्) धारा 17 की उपधारा (2) के िंर् (घ) के अधीन अन् य हवषय; 

  (ढ) िंर् (क) के उपिंर् (iv) के अधीन अन् य हवषय और धारा 18 के िंर् (छ) के अधीन अंतररम समाधान वृहत्तक 

 द्वारा पालन दकए िाने वाले अन् य कतगव् य;  

  1[(ढक) धारा 21 की उपधारा (6क) के ख  ा ंर् (ि) के अधीन लेनिारों के वगग के भीतर लेनिारों की संख या;  

(ढि) धारा 21 की उपधारा (6ि) के परंतु के ख  ा ंर् (ii) के अधीन प्राहधकृत प्रहतहनहध को संिये पाररश्रहमक;  

(ढग) धारा 21 की उपधारा (7) के अधीन हवत्तीय ऋणों के संबंध में मतिान और मतिान शेयर का अवधारण करने 

की रीहत;] 

  (ण) धारा 21 की उपधारा (8) के परंतुक के अधीन व् यह‍ त, िो लेनिारों की सहमहत में िोंगे, ऐसी सहमहतयों द्वारा 

 हनवगिन दकए िाने वाले कृत् य तथा रीहत, हिसमें ऐसे कृत् यों का हनवगिन दकया िाएगा; 

  (त) धारा 24 की उपधारा (1) के अधीन अन् य इले‍ राहनकी माध् यम, हिनके द्वारा लेनिारों की सहमहत के सि‍ य 

 बैठक करेंगे; 

  (थ) धारा 24 की उपधारा (7) के अधीन प्रत् येक लेनिार को मतिान अंश समनुिहेशत करने की रीहत; 

  (ि) धारा 24 की उपधारा (8) के अधीन लेनिारों की सहमहत की बैठकें  संचाहलत करने की रीहत; 

  (ध) धारा 25 की उपधारा (2) के िंर् (घ) के अधीन लेिाकारों, वकीलों और अन् य सलािकारों को हनयु‍ त करने की 

 रीहत;  

  1[(धक) धारा 25 की उपधारा (2) के िंर् (ि) के अधीन अन् य शतें;] 

  (न) धारा 25 की धारा (2) के िंर् (ि) के अधीन अन् य कारगचाइयां; 

  (प) वि प्ररूप और रीहत, हिसमें धारा 29 की उपधारा (1) के अधीन समाधान वृहत्तक द्वारा सूचना ज्ञापन तैयार 

 दकया िाएगा; 

  (फ) धारा 29 की उपधारा (2) के ‍ प‍ िीकरण के अधीन हनगहमत ऋणी से संबंहधत अन् य हवषय; 

  (ब) धारा 30 की उपधारा (2) के िंर् (क) के अधीन दिवाला समाधान प्रदक्रया लागतों का संिाय करने की रीहत, 

 िंर् (ि) के अधीन 2[ऋणों का संिाय करने की रीहत] और अन् य अपेक्षाएं हिनके अनुरूप समाधान योिना िंर् (घ) के अधीन 

िोगी;  

  1[(बक) धारा 30 की उपधारा (4) के अधीन अन् य अपेक्षाएं ;] 

  (भ) धारा 34 की उपधारा (8) के अधीन समापन कायगवाहियों के संचालन की फीस तथा समापन संपिा आह‍ तयों 

 के मूल् य का अनुपात; 

  (म) धारा 35 की उपधारा (1) के िंर् (ग) के अधीन हनगहमत ऋणी की आह‍ तयों और संपहत्त का मूल् यांकन करने 

 की रीहत, िंर् (च) के अधीन पासगलों में संपहत्त हवक्रय करने की रीहत, िंर् (ढ) के अधीन समापन प्रदक्रया की प्रगहत की ररपोिग 

 करने की रीहत और िंर् (ण) के अधीन हन‍ पादित दकए िाने चाले अन् य कृत् य; 

  (य) धारा 35 की उपधारा (2) के अधीन अन् य पणधाररयों को अहभलेि उपलब् ध कराने की रीहत; 

  (यक) धारा 36 की उपधारा (3) के िंर् (क) के अधीन अन् य साधन; 

  (यि) धारा 36 की उपधारा (4) के िंर् (ङ) के अधीन अन् य आह‍ तयां; 

  (यग) धारा 37 की उपधारा (1) के िंर् (छ) के अधीन अन् य स्रोत;  

  (यघ) धारा 37 की उपधारा (2) के अधीन हनगहमत ऋणी से संबंहधत हवत्तीय सूचना प्रिान करने की रीहत; 

  (यङ) धारा 38 की उपधारा (3) के अधीन िावा साहबत करने के हलए प्रचालन लेनिार द्वारा प्र‍ तुत दकए िाने वाले 

 समथगनकारी ि‍ तावेिों का प्ररूप और रीहत; 

  (यच) धारा 39 की उपधारा (1) के अधीन वि समय, हिसमें समापक िावों का सत् यापन करेगा; 

  (यछ) धारा 41 के अधीन िावों के मूल् य को अवधाररत करने की रीहत;  

                                                 
1 2018 के अहधहनयम सं० 8 की धारा 9 द्वारा अंत:‍ थाहपत ।   
2 2019 के अहधहनयम सं० 26 की धारा 9 द्वारा “प्रचालन लेनिारों के ऋणों का प्रहतसंिाय करन ेकी रीहत” शब्िों के ‍थान पर प्रहत‍ थाहपत ।  



 92 

(यि) धारा 52 की उपधारा (1) के िंर् (क) के अधीन समापन संपिा के प्रहतभूहत हित का त् यिन तथा  समापक 

द्वारा आह‍ तयों की हबक्री से आगमों को प्राप् त करने की रीहत और िंर् (ि) के अधीन प्रहतभूहत हितों को आप् त करने की रीहत; 

  (यझ) धारा 52 की उपधारा (3) के िंर् (ि) के अधीन अन् य साधन; 

  (यञ)  धारा 52 उपधारा (9) के अधीन समापक द्वारा प्रहतभूत लेनिार को संिाय करने की रीहत; 

  (यि) धारा 53 की उपधारा (1) के अधीन कालावहध और हवक्रय के आगमों के हवतरण की रीहत; 

  (यठ) धारा 57 के िण् र् (क) के अधीन अन् य साधन और िंर् (ि) के अधीन अन् य सूचना;  

  (यर्) धारा 59 की उपधारा (2) के अधीन शतें और प्रदक्रयात् मक अपेक्षाएं; 

  (यढ) धारा 95 की उपधारा (7) के अधीन प्र‍ तुत दकए िाने के हलए अपेहक्षत ब् यौरे और ि‍ तावेि; 

  (यण) धारा 105 की उपधारा (3) के िंर् (ग) के अधीन अन् य हवषय; 

  (यत) धारा 107 की उपधारा (4) के अधीन प्रा‍ सी मतिान की रीहत और प्ररूप; 

  (यथ) धारा 109 की उपधारा (2) के अधीन लेनिार को मतिान शेयर समनुिहेशत करने की रीहत; 

  (यि) धारा 133 की उपधारा (3) के अधीन प्रा‍ सी मतिान की रीहत और प्ररूप; 

  (यध) धारा 144 की उपधारा (1) के अधीन प्रभाररत की िाने वाली फीस; 

  (यन) धारा 194 की उपधारा (2) के अधीन अन् य अहधकाररयों और कमगचाररयों की हनयुह‍ त और उपधारा (3) के 

 अधीन बोर्ग के ऐसे अहधकाररयों और कमगचाररयों का वेतन और संिेय भते्त तथा सेवा के अन् य हनबंधन और शतें; 

  (यप) धारा 196 की उपधारा (1) के िंर् (झ) के अधीन अन् य सूचना; 

  (यफ) धारा 196 की उपधारा (1) के िंर् (ि) के अधीन अंतराल, हिसमें आवहधक अध् ययन, कायगकरण का 

 अनुसंधान और संपरीक्षा तथा दिवाला वृहत्तक अहभकरणों, दिवाला वृहत्तकों और सूचना उपयोहगताओं का कायग हन‍ पािन और 

 िण् र् (न) के अधीन आह‍ तयों के व् ययन के हलए तन् त्र; 

  (यब) धारा 196 की उपधारा (3) के िंर् (i) के अधीन लेिा बहियों और अन् य ि‍ तावेिों को प्रकि और प्र‍ तुत करने 

 का ‍ थान तथा समय; 

  (यभ) धारा 197 के अधीन बोर्ग द्वारा गरठत की िाने वाली अन् य सहमहतयां तथा ऐसी सहमहतयों के अन् य सि‍ य; 

  (यम) धारा 200 के िंर् (ि) और िंर् (घ) के अधीन अन् य व् यह‍ त; 

  (यय) धारा 201 की उपधारा (1) के अधीन रहि‍ रीकरण के हलए आवेिन का प्ररूप और रीहत, उसमें अंतर्वग‍ ि 

 हवहशह‍ ियां तथा उसके साथ संलग् न फीस; 

(ययक) धारा 201 की उपधारा (3) के अधीन रहि‍ रीकरण प्रमाणपत्र िारी करने का प्ररूप और रीहत  तथा उसके 

हनबंधन और शतें;  

(ययि) धारा 201 की उपधारा (4) के अधीन रहि‍ रीकरण प्रमाणपत्र के नवीकरण की रीहत तथा उसके हलए फीस; 

  (ययग) धारा 201 की उपधारा (5) के िंर् (घ) के अधीन अन् य आधार; 

(ययघ) धारा 202 के अधीन रा‍ रीय कंपनी हवहध अपील अहधकरण को अपील का प्ररूप तथा वि अवहध, हिसके 

भीतर ऐसी अपील फाइल की िाएगी; 

  (ययङ) धारा 204 के िंर् (छ) के अधीन अन् य सूचना; 

  (ययच) धारा 196 के ‍ प‍ िीकरण के अधीन अन् य आधार; 

(ययछ) धारा 196 के िंर् (ङ) के अधीन उसके आंतररक प्रशासन और प्रबंधन के हलए शासी बोर्ग की ‍ थापना; िंर् 

(ठ) के अधीन पाठयचयाग, िंर् (र्) के अधीन परीक्षा संचाहलत करने की रीहत; 

(ययि) धारा 207 की उपधारा (1) के अधीन दिवाला वृहत्तक के रहि‍ रीकरण के हलए फीस तथा वि समय, हिसके 

भीतर और वि रीहत हिसमें ऐसा रहि‍ रीकरण दकया िाएगा; 

(ययझ) धारा 207 की उपधारा (2) के अधीन वृहत्तकों या व् यह‍ तयों के प्रवगग, उनकी अिगताएं और अनुभव तथा वे 

क्षेत्र;  



 93 

(ययञ) धारा 208 की उपधारा (2) के िंर् (च) के अधीन वि रीहत और शतें, हिनके अधीन दिवाला वृहत्तक अपने 

कृत् य का हन‍ पािन करेगा; 

(ययि) धारा 210 की उपधारा (1) के अधीन सूचना उपयोहगता के रहि‍ रीकरण का प्ररूप और रीहत तथा फीस; 

(ययठ) धारा 210 की उपधारा (3) के अधीन रहि‍ रीकरण प्रमाणपत्र िारी करने का प्ररूप और रीहत तथा उसके 

हनबंधन और शतें 

(ययर्) धारा 210 की उपधारा (4) के अधीन रहि‍ रीकरण प्रमाणपत्र के नवीकरण की रीहत और उसके हलए फीस; 

  (ययढ) धारा 210 की उपधारा (5) के िंर् (घ) के अधीन अन् य आधार; 

(ययण) धारा 211 के अधीन रा‍ रीय कंपनी हवहध अपील अहधकरण को अपील फाइल करने का प्ररूप, अवहध तथा 

रीहत; 

  (ययत) धारा 212 के अधीन ‍ वतंत्र सि‍ यों की संख या; 

(ययथ) धारा 213 के अधीन सूचना उपयोहगता द्वारा उपलब् ध कराई िाने वाली सेवाएं तथा उनके हनबंधन और 

शतें; 

(ययि) धारा 214 के िंर् (ि) और िंर् (ग) के अधीन हवत्तीय सूचना के इलै‍ राहनक प्र‍ तुतीकरण को ‍ वीकार करने 

का प्ररूप और रीहत; 

  (ययध) धारा 214 के िंर् (घ) के अधीन न् यूनतम सेवा ‍ वाहलिी मानक; 

(ययन) धारा 214 के िंर् (च) के अधीन पहचं की िाने वाली सूचना तथा ऐसी सूचना तक पहचं करने की रीहत; 

  (ययप) धारा 214 के िंर् (छ) के अधीन प्रकाहशत की िाने वाली सांररव् यकीय सूचना; 

(ययफ) धारा 215 की उपधारा (1) के अधीन सूचना प्र‍ तुत करने या उस तक पहंच का प्ररूप, फीस और रीहत; 

(ययब) धारा 215 की उपधारा (2) के अधीन हवत्तीय सूचना प्र‍ तुत करने और आह‍ तयों से संबंहधत सचूना प्र‍ तुत 

करने का प्ररूप और रीहत; 

(ययभ) धारा 216 के अधीन वि रीहत और समय, हिसके भीतर हवत्तीय सूचना को अद्यतन दकया िा सकेगा या 

उपांररत दकया िा सकेगा या उसकी त्रुरियों को ठीक दकया िा सकेगा;  

  (ययम) धारा 217 के अधीन हशकायत फाइल करने का प्ररूप, रीहत और समय;  

  (ययय) धारा 218 की उपधारा (2) के अधीन हनरीक्षण या अन् वेषण करने का समय और रीहत; 

(यययक) धारा 219 के अधीन दिवाला वृहत्तक अहभकरण या दिवाला वृहववक या सूचना उपयोहगता का हनरीक्षण 

करने की रीहत और उत्तर िनेे के हलए समय; 

(यययि) धारा 220 की उपधारा (6) के अधीन वापस करने का िावा करने की प्रदक्रया, वि अवहध हिसमें ऐसी 

वापसी का िावा दकया िा सकेगा और वि रीहत हिसमें उपधारा (7) के अधीन रकम वापस की िा सकेगी; 

  (यययग) धारा 222 की उपधारा (1) के िंर् (ग) के अधीन अन् य हनहधयां ।  

 1[240क. इस सहंिता का सकू्ष् म, लघु और मध् यम उद्यमों को लागू िोना—(1) इस संहिता में अंतर्वग‍ ि दकसी प्रहतकूल बात के 

िोते हए भी, धारा 29क के िंर् (ग) और िंर् (ि) के उपबंध दकसी सूक्ष् म, लघु और माध् यम उद्यमों की हनगम दिवाला समाधान प्रदक्रया 

से संबंहधत समाधान आवेिक को लागू निीं िोंगे ।  

(2) उपधारा (1) के अधीन रिते हए, कें रीय सरकार लोक हित में अहधसूचना द्वारा यि हनिशे ि ेसकेगी दक इस संहिता का 

कोई उपबंध,—  

(क) सूक्ष् म, लघु और मध् यम उद्यमों को लागू निीं िोगा; या  

(ि) ऐसे उपांतरणों सहित सूक्ष् म, लघु और माध् यम उद्यमों को लागू िोगा िो अहधसूचना में हवहनर्िग‍ ि दकए िाएं । 

 (3) उपधारा (2) के अधीन िारी दकए िाने के हलए प्र‍ ताहवत प्रत् येक अहधसूचना के प्रारूप को संसि ्के प्रत् येक सिन के समक्ष, 

िब वि सत्र में िो, कुल तीस दिन की अवहध के हलए रिा िाएगा िो एक सत्र में या िो अथवा अहधक आनुक्रहमक सत्रों में पूरी िो 

सकेगी ।  

                                                 
1 2018 के अहधहनयम सं० 26 की धारा 37 द्वारा अंत:‍ थाहपत ।   



 94 

 (4) यदि िोनों सिन अहधसूचना के िारी दकए िाने को नामंिूर दकए िाने पर सिमत िो िाते िैं या िोनों सिन अहधसूचना 

में कोई उपांतरण करने पर सिमत िोते िैं तो यथाह‍ थहत अहधसूचना िारी निीं की िाएगी या केवल ऐसे उपांतररत रूप में िी, हिस 

पर िोनों सिन सिमत िो िाएं, िारी की िाएगी ।  

 (5) उपधारा (3) में हनर्िग‍ ि तीस दिन की अवहध में ऐसी कोई अवहध सहम् महलत निीं की िाएगी, हिसके िौरान उपधारा (4) 

में हनर्िग‍ ि सिन का चार से अहधक लगातार दिवसों के हलए सत्रावसान या उसे ‍ थहगत दकया िाता ि ै।  

 (6) इस धारा के अधीन प्रत् येक अहधसूचना को, उसके िारी दकए िाने के पश् चात् यथाश‍ य शीघ्र ससंि ्के प्रत् येक सिन के 

समक्ष रिा िाएगा ।  

 ‍ प‍ िीकरण—इस धारा के प्रयोिनों के हलए “सूक्ष् म, लघु और मध् यम उद्यमों” से सूक्ष् म, लघु और मध् यम उद्यम हवकास 

अहधहनयम, 2006 (2000 का 27) की धारा 7 की उपधारा (1) के अधीन उस रूप में वगीकृत उद्यमों का कोई एक वगग या वगग             

अहभप्रेत ि ै।]   

 241. हनयमों और हवहनयमों का ससंि ् के समक्ष रिा िाना—इस संहिता के अधीन बनाए गए प्रत् येक हनयम और प्रत् येक 

हवहनयम को बनाए िाने के पश् चात् यथाशीघ्र संसि ्के प्रत् येक सिन के समक्ष, िब वि सत्र में िो, कुल तीस दिन की अवहध के हलए रिा 

िाएगा, यि अवहध एक सत्र अथवा िो या अहधक आनुक्रहमक सत्रों में पूरी िो सकेगी और यदि पूवो‍ त सत्र या आनुक्रहमक सत्रों के ठीक 

बाि के सत्र के अवसान के पूवग िोनों सिन हनयम या हवहनयम में कोई उपांतरण करने पर सिमत िो िाते िैं या िोनों  सिन इस बात के 

हलए सिमत िो िाते िैं दक ऐसे हनयम या हवहनयम को निीं बनाया िाना चाहिए तो ऐसा हनयम या हवहनयम उसके पश् चात्, 

यथाह‍ थहत, केवल ऐसे उपांतररत रूप में िी प्रभावी िोगा या प्रभावी निीं रिेगा तथाहप ऐसा कोई उपांतरण या रद्दकरण, उस हनयम या 

हवहनयम के अधीन पूवग में की गई दकसी बात की हवहधमान् यता पर प्रहतकूल प्रभाव निीं र्ालेगा । 

 242. करठनाइया ंिरू करन ेकी शह‍ त—(1) यदि इस संहिता के उपबंधों को प्रभावी करने में कोई करठनाई उत् पन् न िोती ि ैतो 

कें रीय सरकार, रािपत्र में प्रकाहशत आिशे द्वारा ऐसे उपबंध कर सकेगी, िो इस संहिता के उपबंधों से असंगत निीं िों और िो करठनाई 

को िरू करने के हलए आवश् यक प्रतीत िों: 

 परंतु इस धारा के अधीन कोई भी आिशे इस संहिता के प्रारंभ से पांच वषग की समाहप् त के पश् चात् निीं दकया िाएगा । 

(2) इस धारा के अधीन दकए गए प्रत् येक आिशे को, उसे दकए िाने के पश् चात्, यथाशीघ्र संसि ्के प्रत् येक सिन के  समक्ष रिा 

िाएगा । 

 243. कहतपय अहधहनयहमहतयों का हनरसन और व् यावहृत्त—(1) प्रहेसर्ेंसी नगर दिवाला अहधहनयम, 1909 (1909 का 3) और 

प्रांतीय दिवाला अहधहनयम, 1920 (1920 का 5) को हनरहसत दकया िाता ि ै। 

 (2) उपधारा (1) के अधीन हनरसन के िोते हए भी— 

  (i) इस संहिता के प्रारंभ के ठीक पूवग प्रहसर्ेंसी नगर दिवाला अहधहनयम, 1909 (1909 का 3) और प्रांतीय 

 दिवाला अहधहनयम, 1920 (1920 का 5) के अधीन और उनसे संबंहधत लंहबत सभी कायगवाहियां पूवग उहल् लहित अहधहनयमों 

 के अधीन शाहसत िोती रिेंगी और उनकी सुनवाई तथा हनपिारा संबद्ध न् यायालयों या अहधकरणों द्वारा इस प्रकार दकया 

 िाएगा मानो पूवग उहल् लहित अहधहनयमों को हनरहसत न दकया िो; 

  (ii) दकसी हनरहसत अहधहनयहमहत के अधीन या उसके अनुसण में दकया गया कोई आिशे, हनयम, अहधसूचना, 

 हवहनयम, हनयुह‍ त, ि‍ तांतरण, बधंक, हवलेि, ि‍ तावेि या दकया गया करार, हनिहेशत फीस, पाररत संकल् प, दिया गया 

 हनिशे, की गई कायगवािी, हन‍ पादित या िारी हलित या की गई कोई बात, िो इस संहिता के आरंभ के समय प्रवृत्त िै, प्रवृत्त 

 बनी रिगेी और इस प्रकार प्रभावी िोगी मानो पूवग उहल् लहित अहधहनयमों को हनरहसत न दकया गया िो; 

  (iii) हनरहसत अहधहनयहमहतयों के अधीन की गई कोई बात या की गई या तात् पर्यगत रूप से दकए िाने की कोई 

 कारगवाई, हिसके अंतगगत कोई हनयम, अहधसूचना, हनरीक्षण, आिशे या िी गई या िारी की गई कोई सूचना या कोई हनयुह‍ त 

 या की गई कोई घोषणा या प्रारंभ दकया गया कोई प्रचालन या दिया गया कोई हनिशे या की गई कोई कायगवािी या 

 अहधरोहपत कोई शाह‍ त, िरं्, समपिरण या िुमागना भी ि,ै हवहधमान् य समझी िाएगी; 

  (iv) दकसी हसद्धांत या हवहध के हनयम या ‍ थाहपत अहधकाररता, अहभवचन का प्ररूप या क्रम, व् यविार या प्रदक्रया 

 या हवद्यमान प्रथा, रूदढ, हवशेषाहधकार, हनबंधन या छूि पर इस बात के िोते हए भी कोई प्रभाव निीं परे्े़गा दक उसे क्रमश: 

 दकसी रीहत में हनरहसत अहधहनयहमहतयों द्वारा उनमें पु‍ ि दकया गया ि ैया मान् यता प्रिान की गई या व् युत् पन् न दकया गया ि;ै 

  (v) हनरहसत अहधहनयहमहतयों के अधीन संह‍ थत ऐसे दकसी अहभयोिन की, िो इस संहिता के प्रारंभ से ठीक पूवग 

 दकसी न् यायालय या अहधकरण के समक्ष लंहबत िै, इस संहिता के उपबंधों के अधीन रिते हए, संबद्ध न् यायालय या अहधकरण 

 द्वारा सुनवाई िारी रिी िाएगी और उसका हनपिारा दकया िाएगा; 

  (vi) दकसी हनरहसत अहधहनयहमहत के अधीन या उसके आधार पर दकसी पि पर हनयु‍ त कोई व् यह‍ त ऐसे समय 

 तक पि धारण करता रिेगा िो हवहित दकया िाए; और   



 95 

  (vii) दकसी अहधकाररता, रूदढ, िाहयत् व, अहधकार, िक, हवशेषाहधकार, हनबंधन, छूि, प्रथा, व् यविार, प्रदक्रया या 

 अन् य हवषय अथवा बात को, िो अह‍ तत् व में अथवा प्रवृत्त निीं ि,ै पुनरीहक्षत या प्रत् यावर्तगत निीं दकया िाएगा । 

 (3) उपधारा (2) में हवहश‍ ि मामलों के उल् लेि के बारे में यि अहभहनधागररत दकया िाएगा दक वे हनरहसत अहधहनयहमहतयों 

के हनरसन के प्रभाव या अनुसूची में उहल् लहित अहधहनयहमहतयों के उपबंधों के हनरसन के प्रभाव के संबंध में साधारण िंर् अहधहनयम, 

1897 (1897 का 10) की धारा 6 के साधारण रूप से लागू िोने पर प्रहतकूल प्रभाव निीं र्ालेंगे । 

244. सकं्रमणकालीन उपबंध—(1) धारा 195 के अधीन, यथाह‍ थहत, बोर्ग का गठन या हवत्तीय क्षेत्र के हवहनयामक को 

पिाहभहित दकए िाने तक, बोर्ग या ऐसे हवत्तीय क्षेत्र के हवहनयामक की शह‍ तयों और कृत् यों का, हिसके अंतगगत उसकी हवहनयम बनान े

की शह‍ त भी ि,ै प्रयोग कें रीय सरकार द्वारा दकया िाएगा । 

 (2) उपधारा (1) के अधीन शह‍ त की व् यापकता पर प्रहतकूल प्रभाव र्ाले हबना कें रीय सरकार हवहनयमों द्वारा हनम् नहलहित 

हवषयों के हलए उपबंध कर सकेगी,— 

  (क) व् यह‍ तयों, वृहत्तकों के प्रवगों और हवत्त, हवहध, प्रबंध या दिवाला के क्षेत्र में ऐसी अिगताएं और अनभुव, िो वि 

 आवश् यक समझे, रिने वाले व् यह‍ तयों को, हिन् िें इस संहिता के अधीन दिवाला वृहत्तकों और दिवाला वृहत्तक अहभकरणों के 

 रूप में मान् यता;  

  (ि) प्रौद्योहगकीय, सांहख यकीय और र्ािा संरक्षण में ऐसी सामथ् यग, िो वि आवश् यक समझे, रिने वाले व् यह‍ तयों 

 को इस संहिता के अधीन सूचना उपयोहगता के रूप में मान् यता; और  

  (ग) इस संहिता के अधीन हनगहमत दिवाला समाधान प्रदक्रया, दिवाला समाधान प्रदक्रया, समापन प्रदक्रया, नए 
 हसरे से आरंभ की प्रदक्रया और शोधन अक्षमता प्रदक्रया का संचालन । 

 245. 1932 के अहधहनयम 9 का सशंोधन—भारतीय भागीिारी अहधहनयम, 1932 को, पिली अनुसूची में हवहनर्िग‍ ि रीहत में 

संशोहधत दकया िाएगा । 

 246. 1944 के अहधहनयम 1 का सशंोधन—केन् रीय उत् पाि-शुल् क अहधहनयम, 1944 को, िसूरी अनुसूची में हवहनर्िग‍ ि रीहत में 

संशोहधत दकया िाएगा । 

 247. 1961 के अहधहनयम 43 का सशंोधन—आय-कर अहधहनयम, 1961 को, तीसरी अनुसूची में हवहनर्िग‍ ि रीहत में संशोहधत 

दकया िाएगा ।  

 248. 1962 के अहधहनयम 52 का सशंोधन—सीमाशुल् क अहधहनयम, 1962 को, चौथी अनुसूची में हवहनदि‍ ि रीहत में 

संशोहधत दकया िाएगा । 

 249. 1993 के अहधहनयम 51 का सशंोधन—बैंकों और हवत्तीय सं‍ थाओं को शोध् य ऋण वसूली अहधहनयम, 1993 को, पांचवीं 

अनुसूची में हवहनर्िग‍ ि रीहत में संशांहधत दकया िाएगा । 

 250. 1994 के अहधहनयम 32 का सशंोधन—हवत्त अहधहनयम, 1994 को, छठी अनुसूची में हवहनर्िग‍ ि रीहत में संशोहधत दकया 

िाएगा । 

 251. 2002 के अहधहनयम 54 का सशंोधन—हवत्तीय आह‍ तयों का प्रहतभूहतकरण और पुनगगठन तथा प्रहतभूहत हित का प्रवतगन 

अहधहनयम, 2002 को, सातवीं अनसुूची में हवहनर्िग‍ ि रीहत में संशोहधत दकया िाएगा ।    

 252. 2004 के अहधहनयम 1 का सशंोधन—रुग् ण औद्योहगक कंपनी (हवशेष उपबंध) हनरसन अहधहनयम, 2003 को, आठवीं 

अनुसूची में हवहनर्िग‍ ि रीहत में संशोहधत दकया िाएगा । 

 253. 2007 के अहधहनयम 51 का सशंोधन—संिाय और हनपिान प्रणाली अहधहनयम, 2007 को, नवीं अनुसूची में हवहनर्िग‍ ि 

रीहत में संशोहधत दकया िाएगा । 

 254. 2009 के अहधहनयम 6 का सशंोधन—सीहमत िाहयत् व भागीिारी अहधहनयम, 2008 को, िसवीं अनुसूची में हवहनर्िग‍ ि 

रीहत में संशोहधत दकया िाएगा । 

 255. 2013 के अहधहनयम 18 का सशंोधन—कंपनी अहधहनयम, 2013 को, ग् यारिवीं अनुसूची में हवहनर्िग‍ ि रीहत में संशोहधत 

दकया िाएगा । 

पिली अनुसूची  

(धारा 245 िहेिए) 

भारतीय भागीिारी अहधहनयम, 1932 का सशंोधन 

(1932 का 9) 



 96 

1 धारा 41 के िंर् (क) का लोप दकया िाएगा । 

िसूरी अनुसचूी 

      (धारा 246 िहेिए) 

केन् रीय उत् पाि-शलु् क अहधहनयम, 1944 का सशंोधन 

(1994 का 1) 

 1. धारा 11ङ में, “और हवत्तीय आह‍ तयों का प्रहतभूहतकरण और पुनगगठन तथा प्रहतभूहत हित का प्रवतगन अहधहनयम, 2002 

(2002 का 54)” शब् िों, अंकों और को‍ ठकों के ‍ थान पर “हवत्तीय आह‍ तयों का प्रहतभूहतकरण और पुनगगठन तथा प्रहतभूहत हित का 

प्रवतगन अहधहनयम, 2002 (2002 का 54) और दिवाला और शोधन अक्षमता सहंिता, 2016” शब् ि, अंक और को‍ ठक रिे िाएंगे । 



 97 

तीसरी अनुसूची  

(धारा 247 िहेिए) 

आय-कर अहधहनयम, 1961 का सशंोधन 

(1961 का 43) 

धारा 178 की उपधारा (6) में, “तत् समय प्रवृत्त” शब् िों  के ‍ थान पर “दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता, 2016 के उपबंधों 

के हसवाय तत् समय प्रवृत्त” शब् ि और अंक रिे िाएंगे । 

चौथी अनुसचूी 

(धारा 248 िहेिए) 

सीमाशलु् क अहधहनयम, 1962 का सशंोधन 

(1962 का 52) 

 धारा 142क में, “और हवत्तीय आह‍ तयों का प्रहतभूहतकरण और पुनगगठन तथा प्रहतभूहत हित का प्रवतगन अहधहनयम, 2002 

(2002 का 54)” शब् िों, अंकों और को‍ ठकों के ‍ थान पर “हवत्तीय आह‍ तयों का प्रहतभूहतकरण और पुनगगठन तथा प्रहतभूहत हित का 

प्रवतगन अहधहनयम, 2002 (2002 का 54) और दिवाला और शोधन अक्षमता सहंिता, 2016” शब् ि, अंक और को‍ ठक रिे िाएंगे । 

पांचवीं अनुसूची  

(धारा 248 िहेिए) 

बैंकों और हवत्तीय स‍ं थाओं को शोध् य ऋण वसलूी अहधहनयम, 1993 का सशंोधन 

(1993 का 51) 

 1. िीघग शीषग में “बैकों और हवत्तीय सं‍ थाओं को शोध् य ऋणों” शब् िों के पश् चात्, “दिवाला समाधान और व् यह‍ िकों तथा 

भागीिारी फमों की शोधन अक्षमता” शब् ि अंत:‍ थाहपत दकए िाएंगे । 

 2. धारा 1 में,— 

  (क) उपधारा (1) में, बैंकों और हवत्तीय सं‍ थाओं को शोध् य ऋण वसूली” शब् िों के ‍ थान पर “और शोधन अक्षमता” 

 शब् ि रिे िाएंगे;  

  (ि) उपधारा (4) में, “इस संहिता के उपबंध” शब् िों के ‍ थान पर, “िैसा अन् यथा उपबंहधत ि ैउसके हसवाय, इस 

 संहिता के उपबंध” शब् ि रिे िाएंगे । 

 3. धारा 3 की उपधारा (1) के पश् चात् हनम् नहलहित उपधारा अंत:‍ थाहपत की िाएगी, अथागत्:— 

  “(1क) केन् रीय सरकार, अहधसूचना द्वारा दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता, 2016 द्वारा या उसके अधीन ऐसे 

 अहधकरण को हनर्िग‍ ि न् यायहनणागयक प्राहधकारी की अहधकाररता, शह‍ तयां और प्राहधकार प्रयोग करने के हलए ऐसी संख या 

 में ऋण वसूली अहधकरण और उसकी शािाएं ‍ थाहपत कर सकेगी िो वि आवश् यक समझे ।” । 

 4. धारा 8 की उपधारा (1) के पश् चात् हनम् नहलहित उपधारा अंत:‍ थाहपत की िाएगी, अथागत्:— 

  “(1क) केन् रीय सरकार, अहधसूचना द्वारा ऐसी संख या में ऋण वसूली अपील अहधकरण ‍ थाहपत करेगी, िो दिवाला 

 और शोधन अक्षमता संहिता, 2016 के भाग 3 के अधीन अहधकाररता, शह‍ तयों और प्राहधकार का प्रयोग करते हए 

 न् यायहनणागयक प्राहधकारी द्वारा दकए गए आिशेों के हवरुद्ध अपील ििण करेंगे ।” । 

 5. धारा 17 में,— 

  (I) उपधारा (1) के पश् चात् हनम् नहलहित उपधारा अंत:‍ थाहपत की िाएगी, अथागत्:— 

   “(1क) उपधारा (1) पर प्रहतकूल प्रभाव र्ाले हबना, — 

  (क) अहधकरण, ऐसी तारीि से िी, िो केन् रीय सरकार द्वारा हनयत की िाए, दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता, 

 2016 के भाग 3 के अधीन आवेिन ििण करने और हवहनहश् चत करने की अहधकाररता, शह‍ तयों और प्राहधकार का प्रयोग 

 करेगा; 

  (ि) अहधकरण सभी हिला मुख यालयों में सर्कग ि बैठक करेंगे ।” । 



 98 

  (II) उपधारा (2) के पश् चात्, हनम् नहलहित उपधारा अंत:‍ थाहपत की िाएगी, अथागत्: — 

   “(2क) उपधारा (2) पर प्रहतकूल प्रभाव र्ाले हबना, अपील अहधकरण, ऐसी तारीि से िी िो केन् रीय 

 सरकार द्वारा हनयत की िाए, दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता, 2016 के भाग 3 के अधीन न् यायहनणागयक 

 प्राहधकारी द्वारा दकए गए आिशे के हवरुद्ध अपील ििण करने की अहधकाररता, शह‍ तयों और प्राहधकार का प्रयोग 

 करेगा ।” । 

 6. धारा 19 के पश् चात् हनम् नहलहित धारा अंत:‍ थाहपत की िाएगी, अथागत्:— 

  “19क. दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता, 2016 के अधीन न् यायहनणागयक प्राहधकारी की शह‍ तयों का प्रयोग 

 करने वाले अहधकरण को दकए गए आवेिनों को उ‍ त संहिता के अधीन यथा उपबंहधत रीहत में हनपिाया िाएगा ।” । 

 7. धारा 20 की उपधारा (4) में, “उपधारा (1)” शब् ि, को‍ ठकों और अंक के पश् चात् “या दिवाला और शोधन अक्षमता 

संहिता, 2016 की धारा 181 की उपधारा (1)” शब् ि अंक, और को‍ ठक अंत:‍ थाहपत दकए िाएंगे । 

छठी अनुसूची 

(धारा 250 िहेिए) 

हवत्त अहधहनयम, 1994 का सशंोधन 

(1994 का 32) 

 धारा 88 में, “और हवत्तीय आह‍ तयों का प्रहतभूहतकरण और पुनगगठन तथा प्रहतभूहत हित का प्रवतगन अहधहनयम, 2002 (2002 

का 54)” शब् िों, अंकों और को‍ ठकों के ‍ थान पर “हवत्तीय आह‍ तयों का प्रहतभूहतकरण और पुनगगठन तथा प्रहतभूहत हित का प्रवतगन 

अहधहनयम, 2002 (2002 का 54) और दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता, 2016” शब् ि, अंक और को‍ ठक रिे िाएंगे । 

      सातवीं अनुसचूी 

(धारा 251 िहेिए) 

हवत्तीय आह‍ तयों का प्रहतभहूतकरण और पनुगगठन तथा प्रहतभहूत हित का  

प्रवतगन अहधहनयम, 2002 का सशंोधन 

(2002 का 54) 

   धारा 13 की उपधारा (9) में “एक से अहधक प्रहतभूत लेनिारों द्वारा दकसी आह‍ त के हवत्त पोषण या प्रहतभूत लेनिारों द्वारा 

दकसी आह‍ त के संयु‍ त हवत्त पोषण की िशा में” शब् िों के ‍ थान पर “दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता, 2016 के उपबंधों के अधीन 

रिते हए एक से अहधक प्रहतभूत लेनिारों द्वारा दकसी आह‍ त के  हवत्त पोषण या प्रहतभूत लेनिारों द्वारा दकसी आह‍ त के संयु‍ त हवत्त 

पोषण की िशा में” शब् ि और अंक रिे िाएंगे । 

आठवीं अनुसूची 

(धारा 252 िहेिए) 

रुग् ण औद्योहगक कंपनी (हवशषे उपबधं) हनरसन अहधहनयम, 2003 का सशंोधन 

(2004 का 1) 

धारा 4 के उपिंर् (ि) के ‍ थान पर हनम् नहलहित उपिंर् रिा िाएगा, अथागत्:—  

“(ि) इस हनहमत्त केन् रीय सरकार द्वारा ऐसी तारीि से, िो अहधसहूचत की िाए, रुग् ण औद्योहगक कंपनी (हवशेष 

उपबंध) अहधहनयम, 1985 (1986 का 1) के अधीन अपील अहधकरण को की गई कोई अपील या बोर्ग को या उसके समक्ष कोई 

हनिशे या लंहबत कोई िांच या अपील अहधकरण या बोर्ग के समक्ष कोई कायगवािी चािे वि दकसी भी प्रकृहत की िो, 

उपशहमत िो िाएगी: 

 परंतु कोई कंपनी हिसके संबंध में ऐसी अपील या हनिेश या िांच का इस िंर् के अधीन उपशमन िो गया िै, दिवाला और 

शोधन अक्षमता सहंिता, 2016 के अधीन रा‍ रीय कंपनी हवहध अहधकरण को दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता, 2016 के उपबंधों के 

अनुसरण में दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता, 2016 के प्रारंभ की तारीि से एक सौ अ‍ सी दिन के भीतर हनिशे कर सकेगी: 

 परंतु यि और दक ऐसी कंपनी द्वारा, हिसकी अपील या हनिशे या िांच का इस िंर् के अधीन उपशमन िो गया िै, दिवाला 

और शोधन अक्षमता संहिता, 2016 के अधीन ऐसा हनिशे करने के हलए कोई फीस संिये निीं िोगी ।”। 

 



 99 

नवीं अनुसूची 

(धारा 253 िहेिए) 

सिंाय और हनपिान प्रणाली अहधहनयम, 2007 का सशंोधन 

(2007 का 51) 

 1. धारा 23 की उपधारा (4), उपधारा (5) और उपधारा (6) में, “बैककारी हवहनयमन अहधहनयम, 1949 (1949 का 10)” 

“कंपनी अहधहनयम, 2013 (2013 का 18)” शब् िों, अंकों और को‍ ठकों के पश् चात् “या दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता, 2016” 

शब् ि और अंक अंत:‍ थाहपत दकए िाएंगे । 

 2. धारा 23क की उपधारा (3) में, “कंपनी अहधहनयम, 2013” शब् िों और अंकों के पश् चात् “या दिवाला और शोधन अक्षमता 

संहिता, 2016” शब् ि और अंक अंत:‍ थाहपत दकए िाएंगे । 

िसवीं अनुसूची 

(धारा 254 िहेिए) 

सीहमत िाहयत् व भागीिारी अहधहनयम, 2008 का सशंोधन 

(2009 का 6) 

 धारा 64 के िंर् (ग) का लोप दकया िाएगा । 

ग् यारिवीं अनुसूची 

(धारा 255 िहेिए) 

कंपनी अहधहनयम, 2013 का सशंोधन 

(2013 का 18) 

 1. धारा 2 में,— 

  (क) िंर् (23) के ‍ थान पर हनम् नहलहित िंर् रिा िाएगा, अथागत्:—  

 “(23) “कंपनी समापक” से ऐसा कोई व् यह‍ त अहभप्रेत ि ैहिसे अहधकरण द्वारा धारा 275 के उपबंधों के 

अनुसार इस अहधहनयम के अधीन दकसी कंपनी के पररसमापन के हलए कंपनी समापक के रूप में हनयु‍ त दकया 

गया ि।ै;” 

  (ि) िण् र् (94) के पश् चात् हनम् नहलहित िंर् अंत:‍ थाहपत दकया िाएगा, अथागत्:—  

   “(94क) “पररसमापन” से इस अहधहनयम के अधीन पररसमापन या दिवाला और शोधन अक्षमता  

  संहिता, 2016, िो भी लागू िो, के अधीन समापन अहभप्रेत ि ै।” । 

 2. धारा 8 की उपधारा (9) में “धारा 269 के अधीन बनाई गई पुनवागस और दिवाला हनहध” शब् िों और अंकों के ‍ थान पर, 

“दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता, 2016 की धारा 224 के अधीन बनाई गई दिवाला और शोधन अक्षमता हनहध” शब् ि और अंक 

रिे िाएंगे । 

 3. धारा 66 की उपधारा (8) में “धारा 271 की उपधारा (2) के अथागन् तगगत अपने ऋण या िावे की रकम का संिाय करने में 

असमथग ि”ै शब् िों, अंकों और को‍ ठकों के ‍ थान पर “उसके ऋण या िावे की रकम के संबंध में दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता, 

2016 की धारा 6 के अथागन् तगगत कोई व् यहतक्रम करता ि”ै शब् ि और अंक रिे िाएंगे । 

 4. धारा 77 की उपधारा (3) में “समापक” शब् ि से पूवग, “,यथाह‍ थहत, इस अहधहनयम या दिवाला और शोधन अक्षमता 

संहिता, 2016 के अधीन हनयु‍ त” शब् ि और अंक अंत:‍ थाहपत दकए िाएंगे । 

 5. धारा 117 की उपधारा (3) के िंर् (च) में “धारा 304” शब् ि और अंकों के ‍ थान पर “दिवाला और शोधन अक्षमता 

संहिता, 2016 की धारा 59” शब् ि और अंक रिे िाएंगे । 

 6. धारा 224 की उपधारा (2) में “इस अहधहनयम के अधीन समापन” शब् िों के पश् चात् “या दिवाला और शोधन अक्षमता 

संहिता, 2016 की अधीन समापन” शब् ि और अंक अंत:‍ थाहपत दकए िाएंगे । 

 7. धारा 230 में,— 



 100 

  (क) उपधारा (1) में “समापक” शब् ि के पश् चात् “यथाह‍ थहत, इस अहधहनयम या दिवाला और शोधन अक्षमता 

 संहिता, 2016 के अधीन हनयु‍ त” शब् ि अंत:‍ थाहपत दकए िाएंगे; 

  (ि) उपधारा (6) में “पररसमापक पर” शब् िों के पश् चात् “यथाह‍ थहत, इस अहधहनयम या दिवाला और शोधन 

 अक्षमता सहंिता, 2016 के अधीन हनयु‍ त” शब् ि  और अंक अंत:‍ थाहपत दकए िाएंगे । 

 8. धारा 249 में, उपधारा (1) के िरं् (ङ) के ‍ थान पर हनम् नहलहित िंर् रिा िाएगा, अथागत्:— 

  “(ङ) इस अहधहनयम के अध् याय 20 के अधीन या दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता, 2016 के अधीन उसका 

 पररसमापन दकया िा रिा ि ै।” । 

 9. धारा 253 से धारा 269 का लोप दकया िाएगा । 

 10. धारा 270 के ‍ थान पर हनम् नहलहित धारा रिी िाएगी, अथागत्:— 

  “270. अहधकरण द्वारा पररसमापन—भाग 1 के उपबंध इस अहधहनयम के अधीन अहधकरण द्वारा दकसी कंपनी के 

 पररसमापन को लागू िोंगे ।” । 

 11. धारा 271 के ‍ थान पर हनम् नहलहित धारा रिी िाएगी, अथागत्:—  

   “271. व ेपररह‍ थहतया ंहिनमें अहधकरण द्वारा दकसी कंपनी का पररसमापन दकया िा सकेगा—दकसी कंपनी का 

 धारा 272 के अधीन याहचका पर अहधकरण द्वारा पररसमापन दकया िा सकेगा,— 

 (क) यदि कंपनी ने एक हवशेष संकल् प द्वारा यि संकल् प हलया ि ै दक कंपनी का अहधकरण द्वारा 

पररसमापन दकया िाए; 

  (ि) यदि कंपनी ने भारत की प्रभुता और अिंर्ता, राज् य की सुरक्षा, हविशेी राज् यों से मैत्रीपूणग संबंधों, 

लोक व् यव‍ था, हश‍ िाचार या नैहतकता के हितों के हवरुद्ध कायग दकया िै; 

   (ग) यदि रहि‍ रार द्वारा या कें रीय सरकार द्वारा इस अहधहनयम के अधीन अहधसूचना द्वारा प्राहधकृत 

दकसी अन् य व् यह‍ त द्वारा दकए गए दकसी आवेिन पर, अहधकरण की यि राय ि ै दक कंपनी के कायगकलापों का 

संचालन कपिपूणग रीहत में दकया गया ि ैया कंपनी का हनमागण कपिपूणग और हवहधहवरुद्ध प्रयोिन के हलए दकया 

गया था या उसके हनमागण या उसके कायगकलापों के प्रबंध से संबद्ध व् यह‍ त उसके संबंध में कपि, अपकरण या 

किाचार के िोषी रिे ि ैऔर यि उहचत िैं दक कंपनी का पररसमापन दकया िाए; 

  (घ) यदि कंपनी ने ठीक पूवगवती पांच क्रमवती हवत्तीय वषों के हलए हवत्तीय हववरणों या हवत्तीय 

हववरहणयों को रहि‍ रार के पास फाइल करने में व् यहतक्रम दकया ि;ै या 

  (ङ) यदि अहधकरण की यि राय ि ैदक यि न् यायसंगत तथा साम् यापूणग िोगा दक कंपनी का पररसमापन 

कर दिया िाना चाहिए ।”। 

  12. धारा 272 के ‍ थान पर हनम् नहलहित धारा रिी िाएगी, अथागत्:— 

  “272. पररसमापन के हलए याहचका—(1) इस धारा के उपबंधों के अधीन रिते हए, दकसी कंपनी के पररसमापन के 

 हलए अहधकरण को कोई याहचका हनम् नहलहित द्वारा प्र‍ तुत की िाएगी,—  

  (क) कंपनी द्वारा; 

  (ि) दकसी अहभिाता या अहभिाताओं द्वारा; 

  (ग) िंर् (क) और िंर् (ि) में हवहनर्िग‍ ि सभी या दकसी व् यह‍ त द्वारा; 

  (घ) रहि‍ रार द्वारा; 

  (ङ) कें रीय सरकार द्वारा इस हनहमत्त प्राहधकृत दकसी व् यह‍ त द्वारा; या 

  (च) धारा 271 के िंर् (ि) के अंतगगत आने वाले दकसी मामले में, कें रीय सरकार या दकसी राज् य सरकार द्वारा । 

 (2) कोई अहभिाता दकसी कंपनी के पररसमापन के हलए इस बात के िोते हए भी याहचका प्र‍ तुत करने का िकिार िोगा दक 

वि पूणग समाित्त शेयरों का धारक िो सकता ि ैया कंपनी के पास अंतत: कोई आह‍ तयां न िों या उसके पास, उसके िाहयत् वों और ऐसे 

शेयरों का, हिसके संबंध में वि अहभिाता िै, का समाधान करने के पश् चात् शेयर धारकों के बीच हवतरण के हलए कोई अहधशेष 

आह‍ तयां निीं बची िों या पररसमापन के प्रारंभ से ठीक पूवग अठारि मास के िौरान कम से कम छि मास के हलए उनमें से कुछ मूल रूप 

से उसे अबंरित की गई थी या उसके द्वारा धाररत और उसके नाम पर रहि‍ रीकृत की गई िै या दकसी पूवगधारक की मृत् यु के कारण 

उसको न् यागत हई ि ै। 



 101 

 (3) रहि‍ रार धारा 271 के अधीन पररसमापन के हलए कोई, हसवाय उसके िंर् (क) या िंर् (ङ) में हवहनर्िग‍ ि दकन् िीं आधारों 

के, याहचका प्र‍ तुत करने के हलए िकिार िोगा: 

 परंतु रहि‍ रार याहचका प्र‍ तुत करने के हलए कें रीय सरकार से पूवग अनुमहत प्राप् त करेगा: 

 परंतु यि भी दक कें रीय सरकार तब तक अपनी मंिूरी निीं िगेी िब तक दक कंपनी को अभ् यावेिन करने का युह‍ तयु‍ त 

अवसर न ि ेदिया गया िो ।    

 (4) अहधकरण के समक्ष पररसमापन के हलए कंपनी द्वारा प्र‍ तुत की गई याहचका केवल तभी ििण की िाएगी यदि उसके 

साथ ऐसे प्ररूप और रीहत में, िो हवहित दकए िाएं, कायगकलापों का हववरण िोगा । 

 (5) इस धारा के अधीन की गई याहचका की एक प्रहत रहि‍ रार के पास भी फाइल की िाएगी और रहि‍ रार अन् य उपबंधों 

पर प्रहतकूल प्रभाव र्ाले हबना, ऐसी याहचका की प्राहप् त से साठ दिन के भीतर अहधकरण को अपने हवचार प्र‍ तुत करेगा । 

 13. धारा 275 में,— 

  (क) उपधारा (2) के ‍ थान पर हनम् नहलहित उपधारा रिी िाएगी, अथागत्:— 

  “(2) अहधकरण द्वारा, यथाह‍ थहत, अनंहतम समापक या कंपनी समापक की हनयुह‍ त, दिवाला और 

शोधन अक्ष मता सहंिता, 2016 के अधीन रहि‍ रीकृत दिवाला वृहत्तकों में से की िाएगी;” 

  (ि) उपधारा (4) का लोप दकया िाएगा । 

 14. धारा 280 के ‍ थान पर हनम् नहलहित धारा रिी िाएगी, अथागत्:— 

  “280. अहधकरण की अहधकाररता—अहधकरण को, तत् समय प्रवृत्त दकसी अन् य हवहध में अंतर्वग‍ ि दकसी बात के 

 िोते हए भी, हनम् नहलहित को  ििण करने या हनपिाने की अहधकाररता िोगी,— 

   (क) कंपनी द्वारा या उसके हवरुद्ध कोई वाि या कायगवािी; 

 (ि) कंपनी द्वारा या उसके हवरुद्ध दकया गया कोई िावा, हिसके अंतगगत भारत में उसकी दकसी शािा 

द्वारा या उसके हवरुद्ध दकए गए िावे भी िैं; 

 (ग) धारा 233 के अधीन दकया गया कोई आवेिन; 

 (घ) पूर्वगकताओं का कोई प्रश् न या दकसी भी प्रकार का अन् य कोई प्रश् न, चाि ेहवहध का िो या तथ् य का, 

हिसके अंतगगत आह‍ तयां, कारबार, कारगवाइयां, अहधकार, िकिाररयां, हवशेषाहधकार, फायि,े कतगव् य, 

उत्तरिाहयत् व, बाध् यताएं भी िैं, या ऐसे मामले भी िैं, िो कंपनी के पररसमापन से संबंहधत या उसके अनुक्रम में 

उद्भूत मामले भी िैं, 

 चाि ेऐसे वाि या कायगवािी को संह‍ थत दकया गया िै या वि संह‍ थत ि ैया ऐसा िावा या प्रश् न उद्भूत हआ ि ैया उद्भूत 

 िोता ि ैया ऐसा आवेिन दकया गया ि ैया दकया िाता िै या ऐसी ‍ कीम को प्र‍ तुत दकया गया िै या प्र‍ तुत दकया िाता िै 

 और ऐसा कंपनी के पररसमापन का आिशे दकए िाने से पूवग या पश् चात् दकया िाता ि ै।”। 

 15. धारा 289 का लोप दकया िाएगा । 

 16. शीषग “भाग-2—‍ वैह‍ छक पररसमापन” का लोप दकया िाएगा । 

 17. धारा 304 से धारा 323 का लोप दकया िाएगा । 

 18. धारा 325 का लोप दकया िाएगा । 

 19. धारा 326 के ‍ थान पर हनम् नहलहित धारा रिी िाएगी, अथागत्:— 

  “326. अध् यारोिी अहधमानी सिंाय—(1) इस अहधहनयम के अधीन दकसी कंपनी के पररसमापन में हनम् नहलहित 

 ऋणों को अन् य सभी ऋणों से पूर्वगकता प्रिान करते हए संित्त दकया िाएगा:— 

   (क) कमगकारों का बकाया; और  

 (ि) ििां दकसी प्रहतभूत लेनिार ने दकसी प्रहतभूत आह‍ त को आप् त कर हलया िै विां ऐसे प्रहतभूत 

लेनिार को िये ऋणों में से उतने को, हितने को उसके द्वारा आप् त निीं दकया िा सका या उसकी प्रहतभूहत (यदि 

हवहध के अधीन संिये िै) में कमगकारों के भाग की रकम, इनमें से िो भी कम िो, कमगकारों के बकायों की मात्रा के 

अनुसार: 

 परंतु दकसी कंपनी के पररसमापन की िशा में, ‍ प‍ िीकरण के िंर् (ि) के उपिंर् (i) और उपिंर् (ii) में हनर्िग‍ ि राहशयों को, 

िो पररसमापन आिशे से पूवगवती िो वषों की अवहध के हलए या ऐसी अन् य अवहध के हलए, िो हवहित भी िाए, संिये िैं, आह‍ तयों के 



 102 

हवक्रय से  तीस दिन की अवहध के भीतर, अन् य सभी ऋणों (हिसके अंतगगत प्रहतभूत लेनिारों के बकाया ऋण भी िैं) की पूर्वगकता में 

संित्त की िाएंगी और वे प्रहतभूत लेनिार  की प्रहतभूहत पर ऐसे प्रभार के अध् यधीन िोंगी, िो हवहित की िाएं । 

 (2) उपधारा (1) के परंतुक के अधीन संिये ऋणों का, प्रहतभूत लेनिारों को कोई संिाय दकए िाने से पूवग पूणगतया संिाय दकया 

िाएगा और तत् पश् चात् उस उपधारा के अधीन संिये ऋणों का, िब तक दक उनको पूरा करने के हलए आह‍ तयां अपयागप् त न िों, हिस 

िशा में उन् िें समान अनुपात में कम दकया िाएगा, पूणगतया संिाय दकया िाएगा । 

 ‍ प‍ िीकरण—इस धारा और धारा 327 के प्रयोिनों के हलए,—    

  (क) दकसी कंपनी के संबंध में “कमगकार” से कंपनी के ऐसे कमगचारी अहभप्रेत िैं, िो औद्योहगक हववाि अहधहनयम, 

 1947 (1947 का 4) की धारा 2 के िंर् (ध) के अथागन् तगगत कमगकार िैं; 

  (ि) दकसी कंपनी के संबंध में “कमगकार के बकाया” से कंपनी द्वारा उसके कमगकारों को बकाया हनम् नहलहित 

 राहशयों का कुल योग अहभप्रेत ि,ै अथागत्:— 

 (i) सभी मििरूरयां या वेतन, हिसके अंतगगत कंपनी को प्रिान की गई सेवाओं के संबंध में दकसी कमगकार 

द्वारा दकसी समय या दकसी कायग के हलए संिये मििरूी भी ि ैऔर कमीशन के रूप में पूणग रूप से या आंहशक रूप से 

अर्िगत वेतन और दकसी कमगकार को औद्योहगक हववाि अहधहनयम, 1947 (1947 का 4) के दकन् िीं उपबंधों के 

अधीन संिये कोई प्रहतकर; 

 (ii) पररसमापन आिशे या समाधान के पूवग या उसके प्रभाव के कारण दकसी कमगकार के हनयोिन की 

समाहप् त पर उसके अहधकार में दकसी कमगकार को या उसकी मृत् यु की िशा में दकसी अन् य व् यह‍ त को संिये िोने 

वाला सम‍ त प्रोद्भूत अवकाश पाररश्रहमक ; 

 (iii) िब तक दक कंपनी का पररसमापन ‍ वैह‍ छक रूप से केवल पुनगगठन या दकसी अन् य कंपनी के साथ 

समामेलन के प्रयोिनों के हलए न दकया िा रिा िो या िब तक दक कंपनी के पास,  पररसमापन के प्रारंभ पर दकसी 

बीमाकताग के साथ ऐसी दकसी संहविा के अधीन,  िो दक कमगकार प्रहतकर अहधहनयम, 1923 (1923 का 19) की 

धारा 14 में यथा उहल् लहित ि,ै कमगकार को अंतररत और उसमें हनहित करने के सामथ् यग का अहधकार न िो तब तक 

उ‍ त अहधहनयम के अधीन कंपनी के दकसी कमगकार की मृत् यु या हन:श‍ तता के संबंध में प्रहतकर या प्रहतकर के हलए 

िाहयत् व के संबंध में सभी बकाया राहशशयां; 

 (iv) दकसी कमगकार को भहव‍ य हनहध, पेंशन हनहध, उपिान हनहध या कमगकार के कल् याण के हलए कंपनी 

द्वारा बनाए रिी गई दकसी अन् य हनहध से शोध् य सभी राहशयां; 

  (ग) दकसी कंपनी के प्रहतभूत लेनिार की दकसी प्रहतभूहत के संबंध में “कमगकार के भाग” से ऐसी रकम अहभप्रेत ि,ै 

 िो प्रहतभूहत के मूल् य में विी अनुपात धारण करती िै, िो अनुपात दकसी कमगकार को बकाया दकसी रकम का कमगकारों को  

 बकाया रकमों और प्रहतभूत लेनिारों के बकाया ऋणों की रकमों के कुल योग में िै । 

ि‍ृ िान् त 

दकसी कंपनी के प्रहतभूत लेनिार की प्रहतभूहत का मलू् य एक लाि रुपए ि ै। कमगकारों को कुल शोध् य रकम भी एक लाि रुपए 

ि ै । कंपनी द्वारा उसके प्रहतभूत लेनिारों को बकाया ऋण की रकम तीन लाि रुपए ि ै । कमगकारों को बकाया रकम और प्रहतभूत 

लेनिारों को बकाया ऋण की रकम का कुल योग चार लाि रुपए िै । अत: कमगकारों का प्रहतभूहत में भाग प्रहतभूहत के कुल मूल् य का एक 

चौथाई अथागत् प‍ चीस ििार रुपए ि ै।” । 

 20. धारा 327 में,— 

  (क) उपधारा (6) के पश् चात् हनम् नहलहित उपधारा अन् त:‍ थाहपत, अथागत्:—  

   “(7) धारा 326 और धारा 327, दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता, 2016 के अधीन समापन की िशा 

  में लागू निीं िोंगी ।” ; 

  (ि) ‍ प‍ िीकरण में िंर् (ग) के ‍ थान पर हनम् नहलहित िंर् रिा िाएगा, अथागत्:—  

‘(ग) “सुसंगत तारीि” पि से ऐसी दकसी कंपनी की िशा में, हिसका पररसमापन अहधकरण द्वारा दकया 

िा रिा ि,ै दकसी अनंहतम समापक की हनयुह‍ त या प्रथम हनयहु‍ त की तारीि अहभप्रेत ि ै या यदि ऐसी कोई 

हनयुह‍ त निीं की गई थी तो पररसमापन आिशे की तारीि अहभप्रेत ि,ै िब तक दक, दकसी भी िशा में, कंपनी ने 

दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता, 2016 के अधीन उस तारीि से पूवग ‍ वैह‍ छक रूप से पररसमापन न कर दिया 

था ।’ । 

   21. धारा 329 के ‍ थान पर हनम् नहलहित धारा रिी िाएगी, अथागत्:— 



 103 

“329. असद्भावपवूगक अन् तरणों का शनू् य िोना—कंपनी द्वारा दकया गया िंगम या ‍ थावर संपहत्त का ऐसा कोई 

अंतरण या माल का ऐसा कोई पररिान, िो उसके कारबार के सामान् य अनुक्रम में अथवा सद्भावपूणग तथा मूल् यवान प्रहतफल 

के हलए दकसी के्रता या हवल् लंगमिार के पक्ष में दकया गया कोई अंतरण या पररिान निीं िै, कंपनी समापक के हवरुद्ध उस 

िशा में शून् य िोगा यदि वि अहधकरण द्वारा इस अहधहनयम के अधीन पररसमापन के हलए दकसी याहचका के प्र‍ तुत दकए 

िाने से पूवग एक वषग की अवहध के भीतर दकया िाता ि ै।” ।  

 22. धारा 334 के ‍ थान पर हनम् नहलहित धारा रिी िाएगी, अथागत्:— 

  “334 पररसमापन के आरम् भ िोन ेके पश् चात ्अतंरण, आदि का शनू् य िोना—अहधकरण द्वारा पररसमापन की िशा 

 में, दकसी संपहत्त का कोई व् ययन, हिसके अंतगगत कंपनी के अनुयोज् य िावे भी िैं और कंपनी में शेयरों का कोई अंतरण या 

 उसके सि‍ यों की प्राह‍ थहत में कोई पररवतगन, हिसे पररसमापन के प्रारंभ के पश् चात् दकया गया िै, िब तक दक अहधकरण 

 अन् यथा आिशे न करे, शून् य िोगा ।” । 

 23. धारा 336 की उपधारा (1) में आरंहभक पैरा में “चाि ेअहधकरण के द्वारा या ‍ वे‍ छया पररसमापन दकया िा रिा ि ैया 

तत् पश् चात् उसका अहधकरण द्वारा पररसमापन दकए िान ेका आिशे दकया िाता ि ैया िो बाि में यि संकल् प पाररत करती ि ैदक उसका 

‍ व‍े छया पररसमापन दकया िाए” शब् िों के ‍ थान पर अहधकरण” द्वारा पररसमापन दकया िा रिा ि ैया तत् पश् चात् इस अहधहनयम के 

अधीन उसका अहधकरण द्वारा पररसमापन दकए िाने का आिशे दकया िाता िै” शब् ि रिे िाएंगे । 

 24. धारा 337 में, “हिसका बाि में पररसमापन दकए िाने का अहधकरण द्वारा आिशे दकया गया िै या हिसने ‍ वे‍ छया 

पररसमापन के हलए कोई संकल् प पाररत दकया िै” शब् िों के ‍ थान पर “हिसका बाि में इस अहधहनयम के अधीन पररसमापन दकए िाने 

का अहधकरण द्वारा आिशे दकया गया िै” शब् ि रिे िाएंगे । 

 25. धारा 342 की उपधारा (2), उपधारा (3) और उपधारा (4) का लोप दकया िाएगा । 

 26. धारा 343 की उपधारा (1) के ‍ थान पर हनम् नहलहित उपधारा रिी िाएगी, अथागत्:—  

   “(1) िब कंपनी का पररसमापन अहधकरण द्वारा दकया िा रिा ि ैतो कंपनी समापक अहधकरण की मंिूरी से,— 

   (i) दकसी प्रवगग के लेनिारों को पूरा संिाय कर सकेगा; 

(ii) लेनिारों से अथवा ऐसे व् यह‍ तयों से िो लेनिार िोने का िावा करते िैं, या कंपनी के हवरुद्ध अपना 

कोई वतगमान या भावी कोई हनहश् चत या आकह‍ मक िावा करते िैं या हिसके द्वारा कंपनी िायी ठिराई िा सकती 

ि,ै कोई समझौता या ठिराव कर सकेगा; या   

 (iii) दकसी मांग या मांग से संबंहधत िाहयत् व का, ऋण का और ऐस ेिाहयत् व का, हिसके पररणाम‍ वरूप 

कोई ऋण िो सकता ि ैतथा वतगमान या भावी, हनहश् चत या आकह‍ मक या केवल नुकसानी के रूप में हनहश् चत या 

आकह‍ मक दकसी िावे का, िो कंपनी के और अहभिायी या अहभकहथत अहभिायी या अन् य ऋण या कंपनी के प्रहत 

िाहयत् वाधीन िोन ेकी आशंका रिने वाले व् यह‍ त के बीच हवद्यमान ि ैऔर कंपनी की आह‍ तयों या िाहयत् वों के 

पररसमापन से दकसी रूप में संबंहधत या उस पर प्रभाव र्ालने वाले सभी प्रश् नों के हवषय में, ऐस ेहनबधंनों पर, िो 

सिमत दकए  िाएं, समझौता कर सकेगा और दकसी ऐसी मांग, ऋण, िाहयत् व या िावे के उन् मोचन के हलए कोई 

प्रहतभूहत ले सकेगा तथा उसकी बाबत पूणग उन् मुह‍ त ि ेसकेगा ।” । 

 27. धारा 347 की उपधारा (1) के ‍ थान पर हनम् नहलहित उपधारा रिी िाएगी, अथागत्:— 

  “(1) िब दकसी कंपनी के कायगकलापों का पूणगतया पररसमापन िो गया ि ैऔर उसका हवघिन िोने वाला ि ैतब 

 ऐसी कंपनी और कंपनी समापक की बहियों और कागि-पत्रों का उस रीहत में व् ययन दकया िाएगा िैसा दक अहधकरण हनिशे 

 ि े।” । 

 28. धारा 348 की उपधारा (1) के ‍ थान पर हनम् नहलहित उपधारा रिी िाएगी, अथागत्:— 

  “(1) यदि दकसी कंपनी का पररसमापन, उसके प्रारंभ के पश् चात् एक वषग के भीतर समाप् त निीं िोता ि ैतो कंपनी 

 समापक, िब तक दक उस वषग की समाहप् त के िो मास की अवहध के भीतर कें रीय सरकार द्वारा या तो पूणगतया या भागत: 

 ऐसा करने की छूि न ि ेिी गई िो और तत् पश् चात् पररसमापन पूरा िोने तक एक  वषग से अहधक के या ऐसे अल् पतर अंतरालों 

 पर, यदि कोई िों, िो हवहित दकए िाएं, अहधकरण को ऐसे प्रारूप में और समापन की कायगवाहियों और उसकी ह‍ थहत के 

 संबंध में ऐसी हवहशह‍ ियों को, िो हवहित की िाएं अंतर्वग‍ ि करते हए एक हववरण फाइल करेगा, िो दक कंपनी के 

 लेिापरीक्षक के रूप में कायग करने के हलए अर्िगत व् यह‍ त द्वारा सम् यक् रूप से लेिापरीहक्षत िोगा: 

  परंतु इस उपधारा में यथाहनर्िग‍ ि ऐसी लेिापरीक्षा उस समय आवश् यक निीं िोगी, िब धारा 294 के उपबंध लागू 

 िों ।” । 

 29. धारा 357 के ‍ थान पर हनम् नहलहित धारा रिी िाएगी, अथागत्:— 



 104 

  “357. अहधकरण द्वारा पररसमापन का प्रारंभ—इस अहधहनयम के अधीन अहधकरण द्वारा कंपनी का पररसमापन 

 उस समय से प्रारंभ हआ समझा िाएगा, हिस समय पररसमापन के हलए याहचका प्र‍ तुत की िाती ि ै।” । 

 30. धारा 370 के परंतुक में, “कंपनी के पररसमापन के हलए आिशे अहभप्राप् त दकया िा सकेगा” शब् िों से पिले “इस 

अहधहनयम के या दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता, 2016 के उपबंधों के अनुसार” शब् ि अंत:‍ थाहपत दकए िाएंगे । 

 31. धारा 372 में, “इस अहधहनयम के उपबंध,” शब् िों के ‍ थान पर “,यथाह‍ थहत, इस अहधहनयम के या दिवाला और शोधन 

अक्षमता सहंिता, 2016 के उपबंध” शब् ि और अंक रिे िाएंगे । 

 32. धारा 419 की उपधारा (4) के ‍ थान पर हनम् नहलहित उपधारा रिी िाएगी, अथागत्:— 

  “(4) कें रीय सरकार, अहधसूचना द्वारा अहधकरणों की पीठों की उतनी संख या में ‍ थापना कर सकेगी, हितनी वि 

 दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता, 2016 के भाग 2 के द्वारा या उसके अधीन ऐसे अहधकरण को प्रित्त न् यायहनणागयक 

 प्राहधकारी की अहधकाररता, शह‍ तयों और प्राहधकार का प्रयोग करने के हलए आवश् यक समझती ि ै।” । 

 33. धारा 424 में,— 

  (i) उपधारा (1) में “और इस अहधहनयम के अन् य” शब् िों के ‍ थान पर “और इस अहधहनयम के या दिवाला और 

 शोधन अक्षमता सहंिता, 2016 के अन् य” शब् ि और अंक रिे िाएंगे; 

  (ii) उपधारा (2) में “इस अहधहनयम के अधीन” शब् िों के ‍ थान पर “इस अहधहनयम के अधीन या दिवाला और 

 शोधन अक्षमता सहंिता, 2016 के अधीन” शब् ि और अंक को रिा िाएगा । 

 34. धारा 429 में, उपधारा (1) के ‍ थान पर हनम् नहलहित उपधारा रिी िाएगी, अथागत्:— 

   “(1) अहधकरण, इस अहधहनयम के अधीन दकसी कंपनी पररसमापन ितेु दकन् िीं कायगवाहियों या दिवाला और 

 शोधन अक्षमता संहिता, 2016 के अधीन दकन् िीं कायगवाहियों में, सभी संपहत्त, लेिा बहियों या अन् य ि‍ तावेिों को अपनी 

 अहभरक्षा में लेने या अपने हनयंत्रणाधीन करने, उन् िें अपने कब् िे में लेने के हलए हलहित में ऐसे मुख य मेरोपोहलिन महि‍ रेि, 

 मुख य न् याहयक महि‍ रेि या हिला कले‍ िर को अनुरोध कर सकेगा, हिसकी अहधकाररता के अधीन इस अहधहनयम के अधीन 

 ऐसी कंपनी की या उ‍ त संहिता के अधीन दकन् िीं हनगहमत व् यह‍ तयों की ऐसी कोई संपहत्त, लेिा बहियां या अन् य ि‍ तावेि 

 अवह‍ थत िैं या पाए िाते िैं, और, यथाह‍ थहत, मुख य मेरोपोहलिन महि‍ रेि, मुख य न् याहयक महि‍ रेि या हिला कले‍ िर, उसे 

 ऐसा अनुरोध दकए िाने पर,—  

   (क) ऐसी संपहत्त, लेिा बहियों या अन् य ि‍ तावेिों को कब् िे में लेगा; और  

   (ि) उन् िें अहधकरण या उसके द्वारा प्राहधकृत अन् य व् यह‍ तयों को सौंपा िाना काररत करेगा ।” । 

 35. धारा 434 के ‍ थान पर हनम् नहलहित धारा रिी िाएगी, अथात्:— 

  “434. कहतपय लहंबत कायगवाहियों का अतंरण—(1) ऐसी तारीि को, िो कें रीय सरकार द्वारा इस हनहमत्त 

 अहधसूहचत की िाए,— 

  (क) कंपनी अहधहनयम, 1956 (1956 का 1) की धारा 10ङ की उपधारा (1) के अधीन गरठत कंपनी हवहध प्रशासन 

 बोर्ग (हिसे इस धारा में इसके पश् चात् कंपनी हवहध बोर्ग किा गया िै) के समक्ष लंहबत सभी हवषय, कायगवाहियां या मामले, 

 ऐसी तारीि से ठीक पूवग अहधकरण को अंतररत िो िाएंगे और अहधकरण ऐसे हवषयों, कायगवाहियों या मामलों का इस 

 अहधहनयम के उपबंधों के अनुसार हनपिारा करेगा; 

  (ि) ऐसी तारीि से पिले कंपनी हवहध बोर्ग के दकसी हवहनश् चय या आिशे से व् यहथत कोई व् यह‍ त, कंपनी हवहध 

 बोर्ग के हवहनश् चय या आिशे की उसे संसूचना की तारीि से साठ दिन के भीतर, उस आिशे से उद्भूत िोने वाले हवहध के 

 दकसी प्रश् न पर उ‍ च न् यायालय को अपील कर सकेगा:   

  परंतु यदि उ‍ च न् यायालय का यि समाधान िो िाता ि ै दक अपीलाथी उ‍ त अवहध के भीतर पयागप् त कारणों से 

 अपील फाइल करने से हनवाररत दकया गया था तो वि उसे साठ दिन से अनहधक की और अवहध के भीतर अपील फाइल 

 करने की अनुज्ञा प्रिान कर सकेगा; और  

  (ग) कंपनी अहधहनयम, 1956 (1956 का 1) के अधीन सभी कायगवाहियां, हिनके अंतगगत माध् य‍ थम्, समझौता, 

 ठिराव और पुनगगठन और कंपनी के पररसमापन से संबंहधत कायगवाहियां भी िैं, िो उस तारीि से ठीक पूवग दकसी हिला 

 न् यायालय या उ‍ च न् यायालय के समक्ष लंहबत िैं, अहधकरण को अंतररत िो िाएंगी और अहधकरण उन कायगवाहियों पर 

 उनके अंतरण से पिले के प्रक्रम से कायगवािी कर सकेगा :  

परन् तु कंपहनयों के पररसमापन से संबंहधत केवल ऐसी कायगवाहियां िी अहधकरण को अन् तररत की िाएंगी, िो ऐसे 

प्रक्रम पर िैं, िो केन् रीय सरकार द्वारा हवहित दकया िाए ।  



 105 

(2) कें रीय सरकार, कंपनी हवहध बोर्ग या न् यायालयों के समक्ष लंहबत सभी हवषयों, कायगवाहियों या मामलों का इस 

धारा के अधीन अहधकरण को समय पर अंतरण सुहनहश् चत करने के हलए इस अहधहनयम के उपबंधों से संगत हनयम बना 

सकेगी ।” । 

 36. धारा 468 की उपधारा (2) के ‍ थान पर हनम् नहलहित उपधारा रिी िाएगी, अथागत्:— 

  “(2) हवहश‍ ितया और पूवगगामी शह‍ तयों की व् यापकता पर प्रहतकूल प्रभाव र्ाले हबना, ऐस े हनयमों में 

 हनम् नहलहित हवषयों में से दकसी या सभी हवषयों के हलए उपबंध दकया िा सकेगा, अथागत्:— 

   (i) इस अहधहनयम के अधीन अहधकरण द्वारा दकसी कंपनी का पररसमापन करने के हलए की िाने वाली 

  कायगवाहियों की रीहत; 

   (ii) धारा 230 के अधीन कायगवाहियों के संबंध में लेनिारों और सि‍ यों की बैठकों का आयोिन करने के 

  हलए; 

   (iii) पूंिी को कम करने के हलए इस अहधहनयम के उपबंधों को प्रभावी करने के हलए; 

   (iv) साधारणतया इस अहधहनयम के उपबंधों के अधीन अहधकरण को दकए िाने वाले सभी आवेिनों के 

  हलए;   

(v) लेनिारों और अहभिाताओं की आकांक्षाओं का अहभहनश् चय करने के हलए बैठकों का आयोिन और 

उनका संचालन;  

 (vi) अहभिाताओं की सूची तय करना और सि‍ यों के रहि‍ िर में, ििां किीं अपेहक्षत िो, सुधार करना 

और आह‍ तयों का संििण तथा उपयोिन करना; 

 (vii) समापक को संिाय, पररिान, अहभि‍ तांतरण, अभ् यपगण या धन, संपहत्त, बहियों या कागि-पत्रों का 

अंतरण; 

 (viii) कॉल करना;  

 (ix) वि समय हनयत करना हिसके भीतर ऋणों और िावों को साहबत दकया िाएगा ।” । 

 37. अनसुूची 5 के भाग 2 के िंर् 3 में उपिंर् (ि) के ‍ थान पर हनम् नहलहित उपिंर् रिा िाएगा, अथागत्:— 

  “(ि) ििां कंपनी,—    

   (i) हनगमन की तारीि से सात वषग की अवहध के हलए एक नई हनगहमत कंपनी िै, या 

  (ii) कोई रुग् ण कंपनी ि,ै हिसके हलए औद्योहगक और हवत्तीय पुनगगठन बोर्ग द्वारा पुनरुज् िीवन की ‍ कीम 

की मंिूरी की तारीि से पांच वषग की अवहध के हलए या दकसी पुनरुज् िीवन या पुनवागस ‍ कीम का आिशे दकया 

गया ि,ै या 

  (iii)  ऐसी कोई कंपनी ि,ै हिसके संबंध में रा‍ रीय कंपनी हनहध अहधकरण द्वारा दिवाला और शोधन 

अक्षमता संहिता, 2016 के अधीन कोई समाधान योिना अनुमोदित की गई ि ैऔर ऐसी योिना, ऐसे अनुमोिन की 

तारीि से पांच वषग के हलए िोगी, 

विां वि िंर् 2 के अधीन अनुज्ञेय रकम के िोगुना तक पाररश्रहमक का संिाय का सकेगी ।” ।  

1[बारिवीं अनसुचूी] 

[धारा 29क िंर् (घ) को ििेें] 

(1) हविशेी व् यापार (हवकास और हवहनयमन) अहधहनयम, 1922 (1922 का 22);  

(2) भारतीय ररिवग बैंक अहधहनयम, 1934 (1934 का 2);  

(3) कें रीय उत् पाि-शलु् क अहधहनयम, 1944 (1944 का 1);  

(4) िाद्य अपहमश्रण हनवारण अहधहनयम, 1954 (1954 का 37);  

(5) आवश् यक व‍ तु अहधहनयम, 1955 (1955 का 10);  

(6) प्रहतभूहत सहंविा (हवहनयमन) अहधहनयम, 1956 (1956 का 42) ;  

                                                 
1 2018 के अहधहनयम 26 की धारा 38 द्वारा अंत:‍ थाहपत ।   



 106 

(7) आय-कर अहधहनयम, 1961 (1961 का 43) ;  

(8) सीमाशुल् क अहधहनयम, 1962 (1962 का 52)  

(9) िल (प्रिषूण हनवारण तथा हनयंत्रण) अहधहनयम, 1974 (1974 का 6);  

(10) हविशेी मुरा संरक्षण और त‍ करी हनवारण अहधहनयम, 1974 (1974 का 52);         

(11) वायु (प्रिषूण हनवारण तथा हनयंत्रण) अहधहनयम, 1981 (1981 का 14);                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                          

(12) रुग् ण औद्योहगक कंपनी (हवशेष उपबंध) अहधहनयम, 1985 (1985 का 1);  

(13) पयागवरण (संरक्षण) अहधहनयम, 1986 (1986 का 29);  

(14) बेनामी संपहत्त संव् यविार प्रहतषेध अहधहनयम, 1988 (1988 का 45);  

(15) भ्र‍ िाचार हनवारण अहधहनयम, 1988 (1988 का 49);  

(16) भारतीय प्रहतभूहत और हवहनयम बोर्ग अहधहनयम, 1992 (1992 का 15) ;  

(17) हविशेी मुरा प्रबंध अहधहनयम, 1999 (1999 का 42) ;  

(18) प्रहत‍ पधाग अहधहनयम, 2002 (2002 का 12)  

(19) धन-शोधन हनवारण अहधहनयम, 2002 (2003 का 15);  

(20) सीहमत िाहयत् व भागीिारी अहधहनयम, 2008 (2009 का 6);  

(21) हविशेी अहभिाय (हवहनयमन) अहधहनयम, 2010 (2010 का 42);  

(22) कंपनी अहधहनयम, 2013 (2013 का 18) या कोई पूवगवती कंपनी हवहध;  

(23) कालाधन (अप्रकरित हविशेी आय और आह‍ तयां) और कर अहधरोपण अहधहनयम, 2015 (2015 का 22);  

(24) दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता, 2016 (2016 का 31);  

(25) कें रीय माल और सेवा-कर अहधहनयम, 2017 (2017 का 12)  और राज् य माल और सेवा-कर को अहधरोहपत करने वाले 

संबंहधत राज् य अहधहनयम ;  

(26)  ऐसा कोई अन् य अहधहनयम, िो कें रीय सरकार द्वारा अहधसूहचत दकया िाए ।  

इस अनुसूची के अधीन िारी प्रत् येक अहधसूचना को, उसे िारी दकए िाने के पश् चात् यथाश‍ य शीघ्र संसि ्के प्रत् येक सिन के 

समक्ष रिा िाएगा ।  

 

 

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About this act

Jurisdiction
Central
Enactment date
2016-05-28
Sections available
282

Read the sections

1Short title, extent and commencement.→2Application.→3Definitions.→4Application of this Part.→5Definitions.→6Persons who may initiate corporate insolvency resolution process.→7Initiation of corporate insolvency resolution process by financial creditor.→8Insolvency resolution by operational creditor.→9Application for initiation of corporate insolvency resolution process by operational creditor.→10Initiation of corporate insolvency resolution process by corporate applicant.→10ASuspension of initiation of corporate insolvency resolution process.→11Persons not entitled to make application.→11ADisposal of applications under section 54C and under section 7 or section 9 or section 10.→12Time-limit for completion of insolvency resolution process.→12AWithdrawal of application admitted under section 7, 9 or 10.→13Declaration of moratorium and public announcement.→14Moratorium.→15Public announcement of corporate insolvency resolution process.→16Appointment and tenure of interim resolution professional.→17Management of affairs of corporate debtor by interim resolution professional.→18Duties of interim resolution professional.→19Personnel to extend co-operation to interim resolution professional.→20Management of operations of corporate debtor as going concern.→21Committee of creditors.→22Appointment of resolution professional.→23Resolution professional to conduct corporate insolvency resolution process.→24Meeting of committee of creditors.→25Duties of resolution professional.→25ARights and duties of authorised representative of financial creditors.→26Application for avoidance of transactions not to affect proceedings.→27Replacement of resolution professional by committee of creditors.→28Approval of committee of creditors for certain actions.→29Preparation of information memorandum.→29APerson not eligible to be resolution applicant.→30Submission of resolution plan.→31Approval of resolution plan.→32Appeal.→32ALiability for prior offences, etc.→33Initiation of liquidation.→34Appointment of liquidator and fee to be paid.→35Powers and duties of liquidator.→36Liquidation estate.→37Powers of liquidator to access information.→38Consolidation of claims.→39Verification of claims.→40Admission or rejection of claims.→41Determination of valuation of claims.→42Appeal against the decision of liquidator.→43Preferential transactions and relevant time.→44Orders in case of preferential transactions.→45Avoidance of undervalued transactions.→46Relevant period for avoidable transactions.→47Application by creditor in cases of undervalued transactions.→48Order in cases of undervalued transactions.→49Transactions defrauding creditors.→50Extortionate credit transactions.→51Orders of Adjudicating Authority in respect of extortionate credit transactions.→52Secured creditor in liquidation proceedings.→53Distribution of assets.→54Dissolution of corporate debtor.→54ACorporate debtors eligible for pre-packaged insolvency resolution process.→54BDuties of insolvency professional before initiation of pre-packaged insolvency resolution process.→54CApplication to initiate pre-packaged insolvency resolution process.→54DTime-limit for completion of pre-packaged insolvency resolution process→54EDeclaration of moratorium and public announcement during pre-packaged insolvency resolution process.→54FDuties and powers of resolution professional during pre-packaged insolvency resolution process→54GList of claims and preliminary information memorandum.→54HManagement of affairs of corporate debtor.→54-ICommittee of creditors.→54JVesting management of corporate debtor with resolution professional.→54KConsideration and approval of resolution plan.→54LApproval of resolution plan.→54MAppeal against order under section 54L.→54NTermination of pre-packaged insolvency resolution process.→54-OInitiation of corporate insolvency resolution process.→54PApplication of provisions of Chapters II, III, VI and VII to this Chapter.→55Fast track corporate insolvency resolution process.→56Time period for completion of fast track corporate insolvency resolution process.→57Manner of initiating fast track corporate insolvency resolution process.→58Applicability of Chapter II to this Chapter.→59Voluntary liquidation of corporate persons.→60Adjudicating Authority for corporate persons.→61Appeals and Appellate Authority.→62Appeal to Supreme Court.→63Civil court not to have jurisdiction.→64Expeditious disposal of applications.→65Fraudulent or malicious initiation of proceedings.→66Fraudulent trading or wrongful trading.→67Proceedings under section 66.→67AFraudulent management of corporate debtor during pre-packaged insolvency resolution process→68Punishment for concealment of property.→69Punishment for transactions defrauding creditors.→70Punishment for misconduct in course of corporate insolvency resolution process.→71Punishment for falsification of books of corporate debtor.→72Punishment for wilful and material omissions from statements relating to affairs of corporate debtor.→73Punishment for false representations to creditors.→74Punishment for contravention of moratorium or the resolution plan.→75Punishment for false information furnished in application.→76Punishment for non-disclosure of dispute or payment of debt by operational creditor.→77Punishment for providing false information in application made by corporate debtor.→77APunishment for offences related to pre-packaged insolvency resolution process.→78Application.→79Definitions.→80Eligibility for making an application.→81Application for fresh start order.→82Appointment of resolution professional.→83Examination of application by resolution professional.→84Admission or rejection of application by Adjudicating Authority.→85Effect of admission of application.→86Objections by creditor and their examination by resolution professional.→87Application against decision of resolution professional.→88General duties of debtor.→89Replacement of resolution professional.→90Directions for compliances of restrictions, etc.→91Revocation of order admitting application.→92Discharge order.→93Standard of conduct.→94Application by debtor to initiate insolvency resolution process.→95Application by creditor to initiate insolvency resolution process.→96Interim moratorium.→97Appointment of resolution professional.→98Replacement of resolution professional.→99Submission of report by resolution professional.→100Admission or rejection of application.→101Moratorium.→102Public notice and claims from creditors.→103Registering of claims by creditors.→104Preparation of list of creditors.→105Repayment plan.→106Report of resolution professional on repayment plan.→107Summoning of meeting of creditors.→108Conduct of meeting of creditors.→109Voting rights in meeting of creditors.→110Rights of secured creditors in relation to repayment plan.→111Approval of repayment plan by creditors.→112Report of meeting of creditors on repayment plan.→113Notice of decisions taken at meeting of creditors.→114Order of Adjudicating Authority on repayment plan.→115Effect of order of Adjudicating Authority on repayment plan.→116Implementation and supervision of repayment plan.→117Completion of repayment plan.→118Repayment plan coming to end prematurely.→119Discharge order.→120Standard of conduct.→121Application for bankruptcy.→122Application by debtor.→123Application by creditor.→124Effect of application.→125Appointment of insolvency professional as bankruptcy trustee.→126Bankruptcy order.→127Validity of bankruptcy order.→128Effect of bankruptcy order.→129Statement of financial position.→130Public notice inviting claims from creditors.→131Registration of claims.→132Preparation of list of creditors.→133Summoning of meeting of creditors.→134Conduct of meeting of creditors.→135Voting rights of creditors.→136Administration and distribution of estate of bankruptcy.→137Completion of administration.→138Discharge order.→139Effect of discharge.→140Disqualification of bankrupt.→141Restrictions on bankrupt.→142Modification or recall of bankruptcy order.→143Standard of conduct.→144Fees of bankruptcy trustee.→145Replacement of bankruptcy trustee.→146Resignation by bankruptcy trustee.→147Vacancy in office of bankruptcy trustee.→148Release of bankruptcy trustee.→149Functions of bankruptcy trustee.→150Duties of bankrupt towards bankruptcy trustee.→151Rights of bankruptcy trustee.→152General powers of bankruptcy trustee.→153Approval of creditors for certain acts.→154Vesting of estate of bankrupt in bankruptcy trustee.→155Estate of bankrupt.→156Delivery of property and documents to bankruptcy trustee.→157Acquisition of control by bankruptcy trustee.→158Restrictions on disposition of property.→159After-acquired property of bankrupt.→160Onerous property of bankrupt.→161Notice to disclaim onerous property.→162Disclaimer of leaseholds.→163Challenge against disclaimed property.→164Undervalued transactions.→165Preference transactions.→166Effect of order.→167Extortionate credit transactions.→168Obligations under contracts.→169Continuance of proceedings on death of bankrupt.→170Administration of estate of deceased bankrupt.→171Proof of debt.→172Proof of debt by secured creditors.→173Mutual credit and set-off.→174Distribution of interim dividend.→175Distribution of property.→176Final dividend.→177Claims of creditors.→178Priority of payment of debts.→179Adjudicating authority for individuals and partnership firms.→180Civil court not to have jurisdiction.→181Appeal to Debt Recovery Appellate Tribunal.→182Appeal to Supreme Court.→183Expeditious disposal of applications.→184Punishment for false information, etc., by creditor in insolvency resolution process.→185Punishment for contravention of provisions.→186Punishment for false information, concealment, etc., by bankrupt.→187Punishment for certain actions.→188Establishment and incorporation of Board.→189Constitution of Board.→190Removal of member from office.→191Powers of Chairperson.→192Meetings of Board.→193Member not to participate in meetings in certain cases.→194Vacancies, etc., not to invalidate proceedings of Board, Officers and employees of Board.→195Power to designate financial sector regulator.→196Powers and functions of Board.→197Constitution of advisory committee, executive committee or other committee.→198Condonation of delay.→199No person to function as insolvency professional agency without valid certificate of registration.→200Principles governing registration of insolvency professional agency.→201Registration of insolvency professional agency.→202Appeal to National Company Law Appellate Tribunal.→203Governing Board of insolvency professional agency.→204Functions of insolvency professional agencies.→205Insolvency professional agencies to make bye-laws.→206Enrolled and registered persons to act as insolvency professionals.→207Registration of insolvency professionals.→208Functions and obligations of insolvency professionals.→209No person to function as information utility without certificate of registration.→210Registration of information utility.→211Appeal to National Company Law Appellate Tribunal.→212Governing Board of information utility.→213Core services, etc., of information utilities.→214Obligations of information utility.→215Procedure for submission, etc., of financial information.→216Rights and obligations of persons submitting financial information.→217Complaints against insolvency professional agency or its member or information utility.→218Investigation of insolvency professional agency or its member or information utility.→219Show cause notice to insolvency professional agency or its member or information utility.→220Appointment of disciplinary committee.→221Grants by Central Government.→222Board’s Fund.→223Accounts and audit.→224Insolvency and Bankruptcy Fund.→225Power of Central Government to issue directions.→226Power of Central Government to supersede Board.→227Power of Central Government to notify financial service providers, etc.→228Budget.→229Annual report.→230Delegation.→231Bar of jurisdiction.→232Members, officers and employees of Board to the public servants.→233Protection of action taken in good faith.→234Agreements with foreign countries.→235Letter of request to a country outside India in certain cases.→235APunishment where no specific penalty or punishment is provided.→236Trial of offences by Special Court.→237Appeal and revision.→238Provisions of this Code to override other laws.→238ALimitation.→239Power to make rules.→240Power to make regulations.→240AApplication of this Code to micro, small and medium enterprises.→241Rules and regulations to be laid before Parliament.→242Power to remove difficulties.→243Repeal of certain enactments and savings.→244Transitional provisions.→245Amendments of Act 9 of 1932.→246Amendments of Act 1 of 1944.→247Amendments of Act 43 of 1961.→248Amendments of Act 52 of 1962.→249Amendments of Act 51 of 1993.→250Amendments of Act 32 of 1994.→251Amendments of Act 54 of 2002.→252Amendments of Act 1 of 2004.→253Amendments of Act 51 of 2007.→254Amendments of Act 6 of 2009.→255Amendments of Act 18 of 2013.→

Schedules

Source and version

India Code, Government of India. Text fetched 10 Oct 2026. Source metadata reports last modification: 2024-07-25. Check the linked official text and subsequent notifications when applying a provision.

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The Insolvency and Bankruptcy Code, 2016. — Hindi | NYAYA SIGNAL

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