हिन्दू विवाह अधिनियम की धारा 24, 25 और 26: तीन अलग प्रश्न
Reviewed by hemant kumar · 2026-10-28 UTC · Revision 2
Original explanatory commentary, not official statutory text or an official Hindi translation. This guide does not assess your individual case.
पहले माँगी गई राहत पहचानें
“भरण-पोषण” शब्द कई अलग मांगों के लिए इस्तेमाल होता है। हिन्दू विवाह अधिनियम की धारा 24, 25 और 26 अलग प्रश्नों से संबंधित हैं। कार्यवाही के दौरान सहायता, स्थायी निर्वाह-भत्ता और अवयस्क बच्चों से जुड़े आदेश अलग विषय हैं। एक पारिवारिक विवाद में एक से अधिक धाराएँ प्रासंगिक हो सकती हैं।
धारा 24: कार्यवाही के दौरान सहायता और खर्च
धारा 24 उस पत्नी या पति से संबंधित है जिसकी स्वतंत्र आय उसके निर्वाह तथा अधिनियम की कार्यवाही के आवश्यक खर्च के लिए पर्याप्त नहीं है। आवेदन पर न्यायालय संबंधित आय को देखकर उचित रकम तय करता है। हर वेतन पर लागू होने वाला एक निश्चित प्रतिशत इसमें नहीं दिया गया है। कुछ आय होना और वैधानिक उद्देश्य के लिए पर्याप्त आय होना अलग तथ्यात्मक प्रश्न हैं।
शोध फ़ाइल में आय के रिकॉर्ड, आवश्यक खर्च और मुकदमे के खर्च तारीख सहित रखें। वास्तविक दस्तावेज़ और अनुमान अलग बताएँ। पहले से हुए सहायता आदेश या भुगतान भी दर्ज करें, ताकि तस्वीर अधूरी न रहे।
धारा 25: स्थायी निर्वाह-भत्ता और भरण-पोषण
धारा 25 डिक्री पारित होने के समय या उसके बाद आवेदन से संबंधित है। इसमें एकमुश्त रकम या मासिक अथवा आवधिक रकम तथा न्यायालय के विचार के लिए परिस्थितियों का उल्लेख है। आगे की उपधाराएँ बदलाव और निर्दिष्ट अन्य स्थितियों से जुड़ी हैं। शीर्षक में “स्थायी” शब्द होने से हर मामले में कभी न बदलने वाला आजीवन भुगतान सुनिश्चित नहीं होता।
तुलना का आधार समय, उद्देश्य और वैधानिक शर्तें हों। केवल अधिक लाभकारी सुनाई देने वाले शीर्षक को न चुनें। वास्तविक आदेश और कार्यवाही के चरण को संबंधित धारा के साथ पढ़ें।
धारा 26: अवयस्क बच्चे
धारा 26 अधिनियम की कार्यवाही में अवयस्क बच्चों की अभिरक्षा, भरण-पोषण और शिक्षा से संबंधित है। जहाँ संभव हो, उनकी इच्छाओं का ध्यान रखने की बात है। बाद के आदेश और बदलाव का भी प्रावधान है। बच्चे की ज़रूरतों को एक पति या पत्नी के व्यक्तिगत मासिक खर्च में बिना बताए न जोड़ें। इससे ऐसा सार्वभौमिक नियम नहीं बनता कि अभिरक्षा हमेशा एक ही अभिभावक को मिलेगी।
तीन हिस्सों वाली उपयोगी फ़ाइल
पहले हिस्से में माँगी गई राहत और शोध की धारा लिखें। दूसरे में उस प्रश्न से जुड़े तथ्य और दस्तावेज़ रखें। तीसरे में जाँच बाकी बातें लिखें: पुराने आदेश, आय में बदलाव या बच्चे की शिक्षा का खर्च। घटनाक्रम में आदेश की तारीख और पृष्ठ भी जोड़ें।
उदाहरण के लिए विद्यालय की शुल्क रसीद बच्चे की शिक्षा या भरण-पोषण के प्रश्न से जुड़ सकती है। अधिवक्ता की फीस की रसीद कार्यवाही के खर्च से जुड़ सकती है। दोनों एक परिवार से संबंधित होने पर भी एक ही मुद्दे का प्रमाण नहीं बन जातीं।
आगे क्या जाँचना है
यह इन धाराओं की तुलना है, पात्रता का निर्णय या भरण-पोषण कैलकुलेटर नहीं। अधिनियम की प्रयोज्यता, दूसरे भरण-पोषण कानून, समानांतर आदेश, प्रकटीकरण की आवश्यकताएँ और वर्तमान न्यायिक व्याख्या महत्वपूर्ण हो सकती हैं। तीनों मूल धाराएँ तथा वास्तविक आदेश पढ़कर सलाह लें। हिन्दी सामग्री सरल मौलिक व्याख्या है, आधिकारिक अनुवाद नहीं।