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SARFAESI नोटिस: जवाब तैयार करने से पहले कार्यवाही का चरण पहचानें

Reviewed by hemant kumar · 2026-10-28 UTC · Revision 2

Original explanatory commentary, not official statutory text or an official Hindi translation. This guide does not assess your individual case.

दस्तावेज़ से शुरुआत करें

बैंक का साधारण पत्र, मांग नोटिस, कब्ज़ा नोटिस और नीलामी नोटिस अलग घटनाएँ हो सकती हैं। सबको केवल “ऋण वसूली” कहने से असली मुद्दा छूट सकता है। हर पृष्ठ और लिफ़ाफ़ा रखें। नोटिस किस माध्यम से और कब मिला, यह लिखें। नोटिस पर छपी तारीख और मिलने की तारीख को अलग दर्ज करें। उसमें लिखी धारा भी देखें।

धारा 13 और 17 को साथ पढ़ें

धारा 13(2), अधिनियम की शर्तों और अपवादों के अधीन, नोटिस की तारीख से साठ दिन में देनदारी चुकाने की लिखित मांग का प्रावधान करती है। धारा 13(3) मांग की रकम और प्रवर्तन के लिए चिन्हित प्रतिभूत परिसंपत्ति के विवरण से जुड़ी है। इसलिए खाते, रकम और संपत्ति के विवरण को अपने मूल रिकॉर्ड से मिलाना उपयोगी पहला कदम है।

धारा 13(3A) अभ्यावेदन या आपत्ति तथा लेनदार के जवाब से संबंधित है। भेजे गए पत्र की तारीख वाली प्रति, संलग्नक और वितरण प्रमाण सुरक्षित रखें। केवल आपत्ति भेज देने से कार्यवाही पर स्वतः रोक लग गई, ऐसा न मानें। धारा 13(4) में प्रवर्तन के उपाय हैं। मांग नोटिस और उस उपधारा के अंतर्गत वास्तव में किया गया उपाय एक ही बात नहीं हैं।

धारा 17 में धारा 13(4) के उपाय से व्यथित व्यक्ति के लिए ऋण वसूली अधिकरण में आवेदन का मार्ग है। सही उपाय, तारीख और अधिकार क्षेत्र वास्तविक घटनाओं पर निर्भर करते हैं। धारा 17(1) का स्पष्टीकरण आपत्ति अस्वीकार करने की सूचना और आवेदन का आधार बनने वाले उपाय में अंतर करता है। इसलिए हर मामले में समय “बैंक के पहले पत्र” से गिनना भ्रामक हो सकता है।

दस्तावेज़ और मुद्दे जोड़ें

खाता और रकम: ऋण अनुबंध, भुगतान अनुसूची, खाता विवरण और रसीदें जुटाएँ। विवादित प्रविष्टि के सामने विवरण का पृष्ठ और अपना प्रमाण लिखें।

प्रतिभूति और संपत्ति: प्रतिभूति दस्तावेज़ों को नोटिस में लिखे संपत्ति विवरण से मिलाएँ। मालिकाना या दूसरे हित स्पष्ट लिखें; हर प्रभावित व्यक्ति को उधारकर्ता न मानें।

कार्यवाही का चरण: मांग नोटिस, आपत्ति, जवाब और बाद के नोटिस क्रम में रखें। तामील के प्रमाण तथा न्यायालय या अधिकरण के आदेश अलग रखें। देखें कि बाद की कार्यवाही से तत्काल प्रश्न बदला है या नहीं।

उदाहरण से अंतर समझें

मान लें पहले मांग नोटिस आया और बाद में कब्ज़ा नोटिस। “बैंक ने रकम गलत जोड़ी” एक प्रश्न है; बाद के उपाय और उसके विरुद्ध उचित उपचार की पहचान दूसरा प्रश्न है। उपयोगी फ़ाइल में विवादित रकम को खाता विवरण के पृष्ठ और बाद की कार्यवाही को उसके नोटिस से जोड़ेंगे। इससे किसी कार्यवाही की वैधता अपने आप सिद्ध नहीं होती।

इस मार्गदर्शिका की सीमा

हर ऋण या संपत्ति पर SARFAESI लागू नहीं होता। धारा 31 के अपवाद तथा अन्य धाराएँ, नियम, अधिसूचनाएँ और न्यायिक निर्णय महत्वपूर्ण हो सकते हैं। यह सूची सही मंच नहीं चुनती, अंतिम तारीख नहीं निकालती और स्थगन की गारंटी नहीं देती। सक्रिय नोटिस मिलने पर पूरा रिकॉर्ड लेकर शीघ्र योग्य अधिवक्ता से सलाह लें।