Rajasthan · Act 21 of 1954

Section 16 — Power to make rules.

The Drugs and Magic Remedies (Objectionable Advertisement) Act, 1954

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STATUTORY TEXT
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16. Power to make rules.—(1) The Central Government may, by notification in the Official Gazette, 

make rules for carrying out the purposes of this Act. 

(2) In particular and without prejudice to the generality of the foregoing power; such rules may— 

(a) specify any 
4
[disease, disorder or condition] to which the provisions of section 3 shall apply; 

                                                           
1. Ins. by Act 42 of 1963, s. 7 (w.e.f. 7-12-1963). 

2. Subs. by s. 8, ibid., for section 14 (w.e.f. 7-12-1963). 

3. Ins. by s. 9, ibid. (w.e.f. 17-12-1963). 

5. Subs. by s. 10, ibid., for “disease or condition” (w.e.f. 7-12-1963). 



6 
 

(b) prescribe the manner in which advertisements of articles or things referred to in clause (c) of 
1
* * * section 14 may be sent confidentially. 

2
[(3) Every rule made under this Act shall be laid as soon as may be after it is made, before each 

House of Parliament while it is in session for a total period of thirty days which may be comprised in one 

session or in two or more successive sessions, and if before the expiry of the session in which it is so laid 

or the successive sessions aforesaid, both Houses agree in making any modification in the rule or both 

Houses agree that the rule should not be made, the rule shall thereafter have effect only in such modified 

form or be of no effect, as the case may be; so, however, that any such modification or annulment shall be 

without prejudice to the validity of anything previously done under that rule.] 

 

3
[THE SCHEDULE 

[See sections 3(d) and 14] 

 

S. No. Name of the disease, disorder or condition 

 1. Appendicitis. 

 2. Arteriosclerosis. 

 3. Blindness 

 4. Blood poisoning. 

 5. Bright‟s disease. 

 6. Cancer 

 7. Cataract. 

 8. Deafness. 

 9. Diabetes. 

10. Diseases and disorders of the brain. 

11. Diseases and disorders of the optical system 

12. Diseases and disorders of the uterus 

13. Disorders of menstrual flow. 

14. Disorders of the nervous system. 

15. Disorders of the prostatic gland. 

16. Dropsy. 

                                                           
1. The words, brackets and figure “sub-section (1) of” omitted by Act 42 of 1963, s. 10 (w.e.f. 7-12-1963). 

2. Ins. by s. 10, ibid. (w.e.f. 7-12-1963). 

3. Added by s. 11, ibid. (w.e.f. 7-12-1963). 



7 
 

S. No. Name of the disease, disorder or condition 

17. Epilepsy. 

18. Female diseases (in general) 

19. Fevers (in general). 

 20. Fits. 

21. Forms and structure of the female bust. 

22. Gall stones, kidney stones and bladder stones. 

23. Gangrene 

24. Glaucoma. 

25. Goitre. 

26. Heart diseases. 

27. High or low blood pressure. 

28. Hydrocele. 

29. Hysteria. 

30. Infantile paralysis. 

31. Insanity. 

32. Leprosy. 

33. Leucoderma. 

34. Lockjaw. 

35. Locomotor ataxia. 

36. Lupus. 

37. Nervous debility. 

38. Obsesity. 

39. Paralysis. 

40. Plague. 

41. Pleurisy. 

42. Pneumonia. 



8 
 

S. No. Name of the disease, disorder or condition 

43. Rheumatism. 

44. Ruptures. 

45. Sexual impotence. 

46. Smallpox. 

47. Stature of persons. 

48. Sterility in women. 

49. Trachoma. 

50. Tuberculosis. 

51. Tumours. 

52. Typhoid fever. 

53. Ulcers of gastrointestinal tracts. 

                 

54.     

 

Venereal diseases, including syphilis, gonorrhea, soft chancre, venereal granuloma and 

lympho granuloma.] 

 

________ 



ओषधि और चमत् काररक उपचार (आक्षेपणीय धिज्ञापन) 

अधिधनयम, 1954 

)1954 का अधिधनयम सखं याकं 21(1 

[30 अप्रैल, 1954] 

कुछ दशाओं में ओषधियों के धिज्ञापन का धनयतं्रण करन ेके धलए, 

 ऐस ेउपचारों के, धिनके बारे में यह अधिकधित ह ैकक  

उनमें चमत् काररक गणु हैं, कुछ प्रयोिनों के धलए  

धिज्ञापन का प्रधतषिे करन ेके धलए, और  

उसस ेसम् बध‍ ित धिषयों का  

उपबिं करन ेके धलए  

अधिधनयम 

1. सधंक्षप् त नाम, धिस् तार और प्रारंि—(1) इस अधिधनयम का संधक्षप् त नाम ओषधि और चमत् काररक उपचार (आक्षेपणीय 

धिज्ञापन) अधिधनयम, 1954 ह ै। 

(2) इसका धिस् तार, 2*** सम् पूणण िारत पर ह ैऔर यह ऐसे राज् यक्षेत्रों के, धिन पर इस अधिधनयम का धिस् तार ह,ै अधििासी 

उन व् यध‍ तयों को िी लागू होता है, िो उ‍ त राज् यक्षेत्रों के बाहर हैं । 

(3) यह ऐसी तारीख3 को प्रिृत्त होगा, धिसे के‍ रीय सरकार, रािपत्र में अधिसूचना द्वारा धनयत करे ।   

2. पररिाषाएं—इस अधिधनयम में, िब तक कक संदिण से अ‍ यिा अपेधक्षत न हो,— 

(क) “धिज्ञापन” के अ‍ तगणत कोई सूचना, पररपत्र, लेबल, लपेटन, या अ‍ य दस् तािेि, और मौधखक रूप से या 

प्रकाश, ध् िधन या िुआं उत् प‍ न या पारेधषत करके, की गई घोषणा िी ह;ै 

(ख) “ओषधि” के अ‍ तगणत धनम् नधलधखत ह,ै—   

 (i) मनषु् यों या पशुओं के आ‍ तररक या बाह्य उपयोग के धलए कोई औषि;  

(ii) ऐसा कोई पदािण, िो मनुष् यों या पशुओं में रोग के धनदान, रोगमुध‍ त, रोग का शमन, रोग की 

धचककत् सा या धनिारण के धलए, या उसमें, उपयोग के धलए आशधयत ह;ै 

(iii) खाद्य से धि‍ न कोई िस् तु, िो मनुष् यों अििा पशुओं के शरीर की संरचना या ककसी आंधगक किया 

को ककसी िी प्रकार से प्रिाधित करने, या उस पर असर डालने के धलए आशधयत है; 

(iv) कोई िस् तु, िो उपखण् ड (i), (ii), और (iii) में धनर्दणष् ट ककसी औषि, पदािण या िस् तु के घटक के रूप 

में प्रयोग के धलए आशधयत है;  

(ग) “चमत् काररक उपचार” के अंतगणत ह—ैऐसा तधलस् मा, म‍ त्र, किच और ककसी िी प्रकार का अ‍ य िाद-ूटोना, 

धिसमें मनुष् यों अििा पशुओं के रोग के धनदान, रोगमुध‍ त, रोग में कमी करने या रोग की धचककत् सा या धनिारण के धलए, या 

में, या मनुष् यों अििा पशुओं के शरीर की संरचना या ककसी आंधगक किया को ककसी िी प्रकार से प्रिाधित करने या उस पर 

असर डालने के धलए अद्िूत शध‍ तयां होना अधिकधित ह;ै  

4[(गग) “रधिस् रीकृत धचककत् सा व् यिसायी” से ऐसा व् यध‍ त अधिप्रेत ह,ै— 

(i) धिसके पास िारतीय धचककत् सा उपाधि अधिधनयम, 1916 (1916 का 7) की िारा 3 में धिधनर्दणष् ट, या 

उसके अिीन अधिसूधचत, या िारतीय आयुर्िणज्ञान पररषद ्अधिधनयम, 1956 (1956 का 102) की अनुसूधचयों में 

धिधनर्दणष् ट, ककसी प्राधिकारी द्वारा अनुदत्त कोई अहणता हो; अििा  

(ii) िो ककसी राज् य में, धिस पर इस अधिधनयम का धिस् तार ह,ै धचककत् सा व् यिसाधययों के रधिस् रीकरण 

के सम् ब‍ ि में प्रिृत्त ककसी धिधि के अिीन, धचककत् सा व् यिसायी के रूप में रधिस् रीकरण होने का हकदार है;]  

  (घ) “ककसी धिज्ञान के प्रकाशन में िाग लेना” के अ‍ तगणत धनम् नधलधखत िी ह,ै— 

                                                 
1 1963 के धिधनयम सं० 7 की िारा 3 और पहली अनुसूची द्वारा (1-10-1963 से) यह अधिधनयम पांधडचेरी पर धिस् ताररत । 
2 2019 के अधिधनयम सं० 34 की िारा 95  और पांचिी अनुसूची द्वारा (31-10-2019 से) “िम्मू-कश्मीर राज्य के धसिाय”  शब् दों का लोप ककया गया । 
3 1 अप्रैल, 1955, देधखए अधिसूचना सं० का०धन०आ० 511, तारीख 26 फरिरी, 1955, िारत का रािपत्र, 1955, िाग 2, अनुिाग 3, पृ० 449 । 
4 1963 के अधिधनयम सं० 42 की िारा 2 द्वारा अंत:स् िाधपत । 



 2 

(i) धिज्ञापन का मुरण;  

(ii) ऐसे राज् यक्षेत्रों के िीतर, धिन पर इस अधिधनयम का धिस् तार ह,ै धनिास करने िाले ककसी व् यध‍ त 

द्वारा या उसकी प्रेरणा से, उन राज् यक्षेत्रों के बाहर ककसी धिज्ञापन का प्रकाशन । 

1*  *  *  *  *  * 

3. कुछ रोगों और धिकारों की धचककत् सा के धलए कुछ ओषधियों के धिज्ञापन का प्रधतषिे—इस अधिधनयम के उपबंिों के 

अिीन रहते हुए, कोई व् यध‍ त, ककसी ऐसे धिज्ञापन के प्रकाशन में िाग नहीं लेगा धिसमें ककसी ओषधि के प्रधत धनदशे ऐसे शब् दों में ककया 

गया ह ैधिनसे यह िारणा बनती ह ैया यह प्रकध‍ पत ह ैकक िह ओषधि धनम् नधलधखत के धलए प्रयोग में लाई िा सकती है,— 

 (क) धस् त्रयों का गिणपात कराना अििा स् ध त्रयों में गिणिारण का धनिारण; अििा 

 (ख) लैंधगक आन‍ द के धलए मनुष् यों की क्षमता बनाए रखना या उसे बढाना; अििा 

 (ग) स् ध त्रयों के ऋतुस् त्राि धिकारों को ठीक करना; अििा 

2[(घ) अनुसूची में धिधनर्दणष् ट ककसी रोग, धिकार या दशा का, अििा ककसी ऐसे अ‍ य रोग, धिकार या दशा          

(उसे चाह ेिो कहा िाए) का, िो इस अधिधनयम के अिीन बनाए गए धनयमों में धिधनर्दणष् ट ककए िाएं, धनदान, रोगमुध‍ त, 

उसमें कमी करना या उसकी धचककत् सा या धनिारण : 

पर‍ तु ऐसा कोई धनयम,— 

(i) ककसी ऐसे रोग, धिकार या दशा के सम् ब‍ ि में ही बनाया िाएगा, धिसके धलए, ककसी रधिस् रीकृत धचककत् सा 

व् यिसायी के परामशण से, समय पर धचककत् सा अपेधक्षत ह ैया धिसके धलए सामा‍ यतया कोई मा‍ य उपचार नहीं हैं, 

(ii) ओषधि और प्रसािन सामग्री अधिधनयम, 1940 (1940 का 23) के अिीन गरठत ओषधि तकनीकी सलाहकार 

बोडण से, और यकद के‍ रीय सरकार आिश् यक समझे तो, आयुिेकदक या यूनानी धचककत् सा पद्धधतयों का धिशेष ज्ञान या 

व् यािहाररक अनुिि रखने िाले ऐसे अ‍ य व् यध‍ तयों से, धि‍ हें सरकार ठीक समझे, परामशण करने के पश् चात् ही           

बनाया िाएगा ।] 

4. ओषधियों के सम् ब‍ ि में भ्रामक धिज्ञापनों का प्रधतषिे—इस अधिधनयम के उपब‍ िों के अिीन रहते हुए, कोई व् यध‍ त ककसी 

ओषधि के सम् ब‍ ि में ककसी धिज्ञापन के प्रकाशन में िाग नहीं लेगा यकद उस धिज्ञापन में कोई ऐसी बात है,— 

(क) धिससे उस ओषधि की िास् तधिक प्रकृधत के बारे में कोई धमथ् या िारणा प्रत् यक्षत: या अप्रत् यक्षत: बनती         

ह;ै अििा 

(ख) धिसमें उस ओषधि के धलए कोई धमथ् या दािा ककया गया ह;ै अििा 

(ग) िो अ‍ यिा ककसी ताधविक धिधशष् ट में धमथ् या या भ्रामक ह ै। 

5. कुछ रोगों और धिकारों की धचककत् सा के धलए चमत् काररक उपचारों के धिज्ञापन का प्रधतषेि—कोई व् यध‍ त िो चमत् काररक 

उपचार करने की िृधत्त करता ह ैया धिसका ऐसी िृधत्त करना तात् पर्यणत ह,ै ककसी ऐसे चमत् काररक उपचार के, धिसमें प्रत् यक्षत: या 

अप्रत् यक्षत: यह दािा ककया गया है कक िह िारा 3 में धिधनर्दणष् ट प्रयोिनों में से ककसी के धलए प्रिािकारी है, ककसी धिज्ञापन के प्रकाशन 

में िाग नहीं लेगा ।  

6. कुछ धिज्ञापनों के िारत में आयात या िारत स े धनयाणत का प्रधतषेि—कोई व् यध‍ त, ऐसे राज् यक्षेत्रों में, धिनमें इस 

अधिधनयम का धिस् तार ह,ै ककसी ऐसी दस् तािेि का आयात, या उन राज् यक्षेत्रों से धनयाणत नहीं करेगा, धिसमें िारा 3, या िारा 4, या 

िारा 5 में धनर्दणष् ट प्रकार का कोई धिज्ञापन हो और ऐसे धिज्ञापनों िाली दस् तािेि ऐसा माल समझी िाएंगी धिसका आयात या धनयाणत 

सी कस् टम ऐ‍ ट, 1878 (1878 का 8) की िारा 19 के अिीन प्रधतधषद्ध ह ैऔर उस अधिधनयम के सिी उपब‍ ि तदनुसार प्रिािी होंगे, 

धसिाय इसके कक उसकी िारा 183 का प्रिाि इस प्रकार होगा मानो उसके अंग्रेिी पाठ में, “देगा” शब् द के स् िान पर “द ेसकेगा” शब् द 

रखे गए हों ।  

7. शाधस् त—िो कोई इस अधिधनयम 3[या तद ्िीन बनाए गए धनयमों] के उपब‍ िों का उ‍ लंघन करेगा, िह, धसद्धदोष ठहराए        

िाने पर,— 

(क) प्रिम दोषधसधद्ध की दशा में, कारािास से, धिसकी अिधि छह मास तक की हो सकेगी, या िुमाणने से, या          

दोनों से;  

                                                 
1 1963 के अधिधनयम सं० 42 की िारा 2 द्वारा खंड (ङ) का लोप ककया गया ।  
2 1963 के अधिधनयम सं० 42 की िारा 3 द्वारा खंड (घ) प्रधतस् िाधपत ।  
3 1963 के अधिधनयम सं० 42 की िारा 4 द्वारा अंत:स् िाधपत । 



 3 

(ख) ककसी पश् चात् िती दोषधसधद्ध की दशा में, कारािास से, धिसकी अिधि एक िषण तक की हो सकेगी, या िुमाणने 

से, या दोनों से, 

दण् डनीय होगा ।  

1[8. प्रिशे, तलाशी आकद की शध‍ तयां—(1) इस धनधमत्त बनाए गए कक‍ हीं धनयमों के उपब‍ िों के अिीन रहते हुए, राज् य 

सरकार द्वारा प्राधिकृत कोई रािपधत्रत अधिकारी, उस क्षेत्र की स् िानीय सीमाओं के िीतर, धिसके धलए िह इस प्रकार प्राधिकृत है,— 

(क) ककसी ऐसे स् िान में, धिसमें उसके पास यह धिश् िास करने का कारण ह ैकक इस अधिधनयम के अिीन िहां कोई 

अपराि ककया गया ह ैया ककया िा रहा है, ऐसे सहायकों के साि, यकद कोई हों, धि‍ हें िह आिश् यक समझे, ककसी िी उधचत 

समय पर, प्रिेश कर सकेगा और उसकी तलाशी ले सकेगा; 

(ख) ऐसा कोई धिज्ञापन अधिगृहीत कर सकेगा, धिसके बारे में उसके पास यह धिश् िास करने का कारण है कक िह 

इस अधिधनयम के कक‍ हीं उपब‍ िों का उ‍ लंघन करता ह ै: 

पर‍ तु इस खण् ड के अिीन अधिग्रहण की शध‍ त का प्रयोग, ककसी ऐसी दस् तािेि, िस् तु या चीि के धलए, धिसमें 

ऐसा कोई धिज्ञापन अ‍ तर्िणष् ट ह,ै उस दस् तािेि, िस् तु, या चीि की अ‍ तिणस् तु सधहत, यकद कोई हो, ककया िा सकेगा, यकद िह 

धिज्ञापन इस कारण कक िह उत् कीर्णणत ह ैया अ‍ यिा, उस दस् तािेि, िस् तु, या चीि से उसकी समग्रता, उपयोधगता या धििय 

मू‍ य पर प्रिाि डाले धबना, अलग न ककया िा सकता ह;ै  

(ग) खण् ड (क) में उध‍ लधखत ककसी स् िान में पाए गए ककसी अधिलेख, रधिस् टर, दस् तािेि या अ‍ य ककसी िौधतक 

पदािण की परीक्षा कर सकेगा, और, यकद उसके पास यह धिश् िास करने का कारण ह ै कक उससे इस अधिधनयम के अिीन 

दण् डनीय ककसी अपराि के ककए िाने का साक्ष् य प्राप् त हो सकता ह ैतो, उसे अधिगृहीत कर सकेगा । 

(2) दडं प्रकिया संधहता, 1898 (1898 का 5) के उपब‍ ि इस अधिधनयम के अिीन ककसी तलाशी या अधिग्रहण को, यिाश‍ य, 

िैसे ही लागू होंगे िैसे िे उ‍ त संधहता की िारा 98 के अिीन िारी ककए गए िारण् ट के प्राधिकारी के अिीन ली गई ककसी तलाशी या 

ककए गए ककसी अधिग्रहण को लागू होते हैं । 

(3) िहां कोई व् यध‍ त उपिारा (1) के खण् ड (ख) या खण् ड (ग) के अिीन ककसी िस् तु का अधिग्रहण करता ह ै िहां िह, 

यिाश‍ य शीघ्र, ककसी मधिस् रेट को उसकी इधत्तला दगेा और उस िस् तु की अधिरक्षा के सम् ब‍ ि में उससे आदशे प्राप् त करेगा ।] 

9. कम् पधनयों द्वारा अपराि—(1) यकद इस अधिधनयम के कक‍ हीं उपब‍ िों का उ‍ लंघन करने िाला कोई व् यध‍ त कम् पनी ह ैतो, 

प्रत् येक व् यध‍ त, िो उस अपराि के ककए िाने के समय उस कम् पनी के कारबार के संचालन के धलए उस कम् पनी का िारसािक और 

उसके प्रधत उत्तरदायी िा, और साि ही िह कम् पनी िी, ऐसे उ‍ लंघन के दोषी समझे िाएंगे और तदनुसार अपने धिरुद्ध कायणिाही ककए 

िाने और दधंडत ककए िाने के िागी होंगे : 

पर‍ तु इस उपिारा की कोई बात ककसी ऐसे व् यध‍ त को इस अधिधनयम में उपबंधित ककसी दण् ड का िागी नहीं बनाएगी यकद 

िह यह साधबत कर द ेकक अपराि उसकी िानकारी के धबना ककया गया िा अििा उसने ऐस ेअपराि का धनिारण करने के धलए सब 

सम् यक् तत् परता बरती िी ।    

(2) उपिारा (1) में ककसी बात के होते हुए िी, िहां इस अधिधनयम के अिीन कोई अपराि ककसी कम् पनी द्वारा ककया गया ह ै

तिा यह साधबत होता ह ैकक अपराि कम् पनी के ककसी धनदशेक, प्रबंिक, सधचि या अ‍ य अधिकारी की सहमधत या मौनानुकूलता स े

ककया गया ह,ै या उस अपराि का ककया िाना उसकी ककसी उपेक्षा के कारण माना िा सकता है, िहां ऐसा धनदशेक, प्रबंिक, सधचि या 

अ‍ य अधिकारी िी उस अपराि का दोषी समझा िाएगा । और तदनुसार अपने धिरुद्ध कायणिाही ककए िाने और दधण् डत ककए िाने का 

िागी होगा । 

स् पष् टीकरण—इस िारा के प्रयोिन के धलए,—  

(क) “कम् पनी” से कोई धनगधमत धनकाय अधिप्रेत ह ैऔर इसके अ‍ तगणत फमण या व् यधष् टयों का अ‍ य संगम िी ह;ै 

तिा 

(ख) फमण के सम् ब‍ ि में “धनदशेक” से उस फमण का िागीदार अधिप्रेत ह ै। 

2[9क. अपरािों का सजं्ञये होना—दडं प्रकिया संधहता, 1898 (1898 का 5) में ककसी बात के होते हुए िी, इस अधिधनयम के 

अिीन दडंनीय कोई िी अपराि संज्ञेय होगा ।] 

10. अपरािों का धिचारण करन ेकी अधिकाररता—प्रधेसडे‍ सी मधिस् रेट या प्रिम िगण मधिस् रेट से अिर कोई िी ‍ यायालय 

इस अधिधनयम के अिीन दडंनीय ककसी िी अपराि का धिचारण नहीं करेगा । 

 

                                                 
1 1963 के अधिधनयम सं० 42 की िारा 5 द्वारा िारा 8 के स् िान पर प्रधतस् िाधपत । 
2 1963 के अधिधनयम सं० 42 की िारा 6 द्वारा अंत:स् िाधपत । 



 4 

1[10क. समपहरण—िहां कोई व् यध‍ त इस अधिधनयम या तद ्िीन बनाए गए ककसी धनयम का उ‍ लंघन करने के धलए ककसी 

‍ यायालय द्वारा धसद्धदोष ठहराया गया ह ैिहां िह ‍ यायालय यह धनदशे द ेसकेगा कक कोई िी दस् तािेि (कोई समस् त प्रधतयों सधहत) 

िस् तु या चीि, धिसकी बाबत उ‍ लंघन ककया गया ह,ै उसकी अ‍ तिणस् तु सधहत, िहां ऐसी अ‍ तिणस् तु िारा 8 की उपिारा (1) के खण् ड 

(ख) के अिीन अधिगृहीत की िाती ह ैिहां, सरकार को समपहृत हो िाएगी ।] 

11. अधिकाररयों का लोक सिेक समझा िाना—िारा 8 के अिीन प्राधिकृत प्रत् येक व् यध‍ त िारतीय दण् ड संधहता (1860 का 

45) की िारा 21 के अिण में लोक सेिक समझा िाएगा । 

12. संरक्षण—कोई िाद, अधियोिन या अ‍ य धिधिक कायणिाही ककसी िी ऐसी बात के बारे में, िो इस अधिधनयम के अिीन 

सद ्िािपूिणक की गई ह ैया की िाने के धलए आशधयत है, ककसी िी व् यध‍ त के धिरुद्ध न होगी ।  

13. अ‍ य धिषयों का प्रिाधित न होना—इस अधिधनयम के उपब‍ ि तत् समय प्रिृत्त ककसी अ‍ य धिधि के उपब‍ िों के 

अधतरर‍ त हैं न कक उनके अ‍ पीकरण में । 

2[14. व् यािधृत्त—इस अधिधनयम की कोई िी बात धनम् नधलधखत को लागू नहीं होगी,— 

(क) ककसी रधिस् रीकृत धचककत् सा व् यिसायी द्वारा अपने पररसरों में प्रदर्शणत कोई सूचना-पट या सूचना, धिसमें िह 

उपदर्शणत हो कक िारा 3, अनुसूची या इस अधिधनयम के अिीन बनाए गए धनयमों में धिधनर्दणष् ट कोई रोग, धिकार या दशा 

की धचककत् सा उन पररसरों में की िाती है; अििा 

(ख) िारा 3 में धिधनर्दणष् ट ककसी धिषय पर सद ्िािपूिणक िैज्ञाधनक अििा सामाधिक दधृष् टकोण से धलखी गई कृधत 

या पुस् तक; अििा 

(ग) ककसी ओषधि के सम् ब‍ ि में ऐसा कोई धिज्ञापन, िो केिल ककसी रधिस् रीकृत धचककत् सा ियिसायी को, िारा 

16 के अिीन धिधहत रीधत से, गुप् त रूप से िेिा गया हो; अििा 

(घ) ककसी ओषधि के सम् ब‍ ि में सरकार द्वारा मुकरत या प्रकाधशत कोई धिज्ञापन; अििा 

(ङ) ककसी ओषधि के सम् ब‍ ि में ओषधि और चमत् काररक उपचार (आक्षेपणीय धिज्ञापन) संशोिन अधिधनयम, 

1963 (1963 का 42) के प्रारम् ि से पूिण, दी गई सरकार की पूिण मंिूरी से, ककसी व् यध‍ त द्वारा मुकरत या प्रकाधशत धिज्ञापन :  

 पर‍ तु सरकार ऐसे कारणों से, िो लेखबद्ध ककए िाएंगे, उस मंिूरी को उस व् यध‍ त को कारण बताने का अिसर दनेे के पश् चात् 

िापस ले सकेगी ।] 

 15. अधिधनयम को लाग ूहोन ेस ेछूट दने ेकी शध‍ त—यकद के‍ रीय सरकार की राय में लोकधहत इस बात की अपेक्षा करता है 

कक ककसी धिधनर्दणष् ट ओषधि या ओषधि-िगण के धिज्ञापन का 3[या ओषधि सम् ब‍ िी धिज्ञापनों के ककसी धिधनर्दणष् ट िगण को,] अनुज्ञात 

ककया िाना चाधहए तो िह, रािपत्र में अधिसूचना द्वारा, यह धनदशे द ेसकेगी कक िारा 3, 4, 5 और 6 के उपबंि, अििा इनमें से कोई 

उपब‍ ि, ऐसी ककसी ओषधि या ओषधि-िगण के धिज्ञापन 3[या ओषधि सम् ब‍ िी धिज्ञापनों के ऐसे ककसी िगण को,] या उसके सम् ब‍ ि में, 

नहीं लागू होंगे या ऐसी शतों के अिीन रहते हुए लागू होंगे िो अधिसूचना में धिधनर्दणष् ट की िाएं । 

16. धनयम बनान ेकी शध‍ त—(1) के‍ रीय सरकार, इस अधिधनयम के प्रयोिनों को कायाणध‍ ित करने के धलए धनयम, रािपत्र 

में अधिसूचना द्वारा, बना सकेगी ।  

(2) धिधशष् टतया और पूिणगामी शध‍ त की व् यापकता पर प्रधतकूल प्रिाि डाले धबना, इन धनयमों में,— 

 (क) ऐसे ककसी 4[रोग, धिकार या दशा] को धिधनर्दणष् ट ककया िा सकता ह ैधिसे िारा 3 के उपब‍ ि लागू होंगे;  

(ख) ऐसी रीधत धिधहत की िा सकती है, धिससे िारा 14, 5[***] के खण् ड (ग) में धनर्दणष् ट िस् तुओं या चीिों के 

धिज्ञापन गुप् त रूप से िेिे िा सकते हैं ।  

6[(3) इस अधिधनयम के अिीन बनाया गया प्रत् येक धनयम, बनाए िाने के पश् चात् यिाशीघ्र, संसद ्के प्रत् येक सदन के समक्ष, 

िब िह सत्र में हो, कुल तीस कदन की अिधि के धलए रखा िाएगा । यह अिधि एक सत्र में अििा दो या अधिक आनुिधमक सत्रों में पूरी 

हो सकेगी । यकद उस सत्र के, धिसमें िह इस प्रकार रखा गया है, या पूिो‍ त आनुिधमक सत्रों के, अिसान के पूिण दोनों सदन उस धनयम 

में कोई पररितणन करने के धलए सहमत हो िाएं तो तत् पश् चात् िह ऐसे पररिर्तणत रूप में ही प्रिािी होगा । यकद उ‍ त अिसान के पूिण 

दोनों सदन सहमत हो िाएं कक िह धनयम नहीं बनाया िाना चाधहए तो तत् पश् चात् िह धनष् प्रिाि हो िाएगा । कक‍ तु धनयम के ऐस े

पररिर्तणत या धनष् प्रिाि होने से उसके अिीन पहले की गई ककसी बात की धिधिमा‍ यता पर प्रधतकूल प्रिाि नहीं पडेगा ।] 

                                                 
1 1963 के अधिधनयम सं० 42 की िारा 7 द्वारा अंत:स् िाधपत ।  
2 1963 के अधिधनयम सं० 42 की िारा 8 द्वारा िारा 14 के स् िान पर प्रधतस् िाधपत । 
3 1963 के अधिधनयम सं० 42 की िारा 9 द्वारा अंत:स् िाधपत । 
4 1963 के अधिधनयम सं० 42 की िारा 10 द्वारा “रोग या दशा” के स् िान पर प्रधतस् िाधपत । 
5 1963 के अधिधनयम सं० 42 की िारा 10 द्वारा “उपिारा (1) की” शब् दों का लोप ककया गया । 
6 1963 के अधिधनयम सं० 42 की िारा 10 द्वारा अंत:स् िाधपत । 



 5 

1[अनुसूची 

िारा 3(घ) और िारा 14 दधेखए] 

िम सं० रोग, धिकार या दशा का नाम 

 

1  2 

1. एपेध‍ डसाइरटस 

2. िमनी-कारठ‍ य 

3. अंिापन 

4. र‍ त धिषा‍ तता 

5. ब्राइट रोग 

6. कै‍ सर 

7. मोधतयाधब‍ द 

8. बधिरता 

9. मिुमेह 

10. मधस् तष् क के रोग और धिकार 

11. दधृष् ट तंत्र के रोग और धिकार 

12. गिाणशय के रोग और धिकार 

13. ऋतुस् त्राि के धिकार 

14. तंधत्रका तंत्र के धिकार 

15. पुर:स् ि ग्रंिीय धिकार 

16. ड्राप् सी 

17. अपस् मार 

18. स् त्री रोग (सामा‍ य) 

19. ज् िर (सामा‍ य) 

20. दौरे 

21. स् त्री िक्ष का रूप और उसकी संरचना 

22. धपत्ताश् मरी, िृ‍ क अश् मरी और मूत्राशय अश् मरी 

23. कोढ 

24. सबलबाय 

25. घेंघा 

26. हृदय रोग 

27. ऊंचा या नीचा र‍ तचाप 

28. हाइड्रोसील 

29. धहस् टीररया 

30. धशशु लकिा 

 

                                                 
1 1963 के अधिधनयम सं० 42 की िारा 11 द्वारा अंत:स् िाधपत ।  



 6 

 

1  2 

31. उ‍ मत्तता 

32. कुष् ठ 

33. ‍ यूकोडमाण 

34. हनुस् तम् ि 

35. चलन अन‍ िय (लोकोमोटर) अटैध‍ सया 

36. ‍ यूपस 

37. तंधत्रकीय दौबण‍ य 

38. स् िूलता 

39. लकिा  

40. प् लेग 

41. प् लूररसी 

42. ‍ युमोधनया 

43. आमिात 

44. धिदार 

45. यौन नपुंसकता 

46. चेचक 

47. व् यध‍ तयों का कद 

48. धस् त्रयों में बांझपन 

49. रोहे 

50. यक्ष् मा 

51. अबुणद 

52. आयफाइड ज् िर 

53. गैस् रो इंटेस् टाइनल रै‍ ट के व्रण 

54. रधति रोग, धिसके अ‍ तगणत धसफधलस, सूिाक, मृद ुशेंकर, रधति काणीकागु‍ म और लसीका काणीकागु‍ म ह ै।] 

 

 

______

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