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the_rajasthan_veterinary_council_rules,_1988.pdf.txt
राजस्थान सरकार पशुपालन विभाग अधिसूचना जयपुर, दिनांक 14 अप्रैल, 1988 जी. एस. आर. 2:- भारतीय पशु-चिकित्सा परिषद् अधिनियम, 1984 ( 1984 का 52 ) की धारा 36, 38, 30, 41, 42, 44, 45, 46, 47, 48, 50, 51, 52, और 54 के साथ पठित धारा 65 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए राजस्थान सरकार इसके द्वारा निम्न- लिखित नियम बनाती है, अर्थात्:- राजस्थान पशु-चिकित्सा परिषद् नियम, 1988 भाग-1 प्रारम्भिक 1. (1) इन नियमों का नाम राजस्थान राज्य पशु-चिकित्सा परिषद् नियम, 1988 है | (2) इनका प्रसार राजस्थान राज्य के क्षेत्र पर होगा | (3) ये राजस्थान राज-पत्र में इनके प्रकाशन की तारीख को प्रवृत्त होंगे । 2. (1) इन नियमों में; जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,- @) “अधिनियम” से भारतीय पशु चिकित्सा परिषद् अधिनियम, 1984 (1984 का (52) अभिप्रेत है; (@) “निर्वाचन या पुनर्निर्वाचन” से राज्य पशु चिकित्सा परिषद् के लिए निर्वाचन या पुनर्निर्वाचन अभिप्रेत है; (ग) “प्ररूप” से इन नियमों से संलग्र प्ररूप अभिप्रेत है: (घ) “नामनिर्देशन या पुनःनामनिर्देशन” से राज्य पशु चिकित्सा परिषद् के लिए नाम निर्देशन या पुनः नामनिर्देशन अभिप्रेत है; (ड) “रजिस्ट्रार” से राज्य परिषद् का रजिस्ट्रार अभिप्रेत है ;: (@) “राज्य परिषद्” से अधिनियम की धारा 32 के अधीन स्थापित राजस्थान राज्य पशु-चिकित्सा परिषद् अभिप्रेत है; @) “धारा” से अधिनियम की धारा अभिप्रेत है; (ज) “अधिकरण” से अधिनियम की धारा 45 के अधीन रजिस्ट्रीकरण के लिए स्थापित रजिस्ट्रीकरण अधिकरण अभिप्रेत है ;. (2) उन शब्दों औरअभिव्यक्तियों के, जो इन नियमों में प्रयुक्त हुई हैं और जिन्हें ऊपर अलग से परिभाषित नहीं किया गया है, वही अर्थ होंगे जो अधिनियम में दिए गये हैं 1 भाग-2 राज्य परिषद् के लिए निर्वाचन 3. (1) निर्वाचन के लिए अधिसूचना:- धारा 32 की उप-धारा (1) के खण्ड (क) के अधीन राज्य परिषद् के सदस्यों को निर्वाचित करने के प्रयोजनों के लिए राजस्थान की राज्य सरकार अधिनियम के अध्याय-7 के अधीन रखे गये राजस्थान राज्य पशु-चिकित्सा रजिस्टर (या संक्षेप में रजिस्टर) में प्रविष्ट व्यक्तियों से राज-पत्र में प्रकाशित अधिसूचना के द्वारा यह अपेक्षा करेगी कि वे इन नियमों के उपबन्धों के अनुसार उक्त सदस्यों को निर्वाचित करें | (2) नामावली की तैयारी: () नियम 3 (1) के अधीन अधिसूचना जारी करने के पश्चात् यथाशीघ्र, रजिस्ट्रार नामावली तैयार करेगा जिसमें प्रत्येक ऐसे व्यक्ति का नाम होगा जिसका नाम रजिस्टर में प्रविष्ट है | (Il) मतदाताओं के नाम उसी प्रकार क्रमांकित किये जायेंगे जिस प्रकार वे रजिस्टर में प्रविष्ट हैं । (3) प्रारूप में नामावली का प्रकाशन:- रजिस्ट्रार नियम 3 (2) के अधीन प्रारूप में तैयार की गयी नामावली को उसकी एक प्रति निरीक्षण के लिए उपलब्ध कराके और राज्य परिषद् के कार्यालय में प्रदर्शित करके, प्रकाशित करेगा | (4) दावे और आपत्तियां दाखिल करने के लिये अवधि:- नामावली में किसी नाम के सम्मिलित किये जाने के लिए प्रत्येक दावा और उसमें की किसी प्रविष्टि के प्रति प्रत्येक आपत्ति नियम 3 (3) के अधीन प्रारूप में नामावली के प्रकाशन की तारीख से तीस दिन की अवधि के भीतर क्रमशः प्ररूप 1 और 2 में दाखिल की जायेगी | (5) दावे और आपत्ति का प्ररूप तथा उनके निपटान की रोतिः- () प्ररूप-1 में के प्रत्येक दावे पर उस व्यक्ति द्वारा हस्ताक्षर किये जायेंगे जो अपने नाम को नामावली में सम्मिलित किये जाने की अपेक्षा करता है | (॥) नामावली में नाम के सम्मिलित किये जाने के प्रति प्ररूप 2 में की प्रत्येक आपत्ति उस व्यक्ति द्वारा की जायेगी जिसका नाम नामावली में पहले से ही सम्मिलित है और उस पर किसी ऐसे अन्य व्यक्ति द्वारा प्रतिहस्ताक्षर किये जायेंगे जिसका नाम भी ऐसी नामावली में सम्मिलित है। (1) प्रत्येक ऐसे दावे या, यथास्थिति, आपत्ति की परीक्षा रजिस्ट्रार द्वारा की जायेगी जो उस पर अपनी टिप्पणियां अभिलिखित करेगा जिसके बाद वह दावे या आपत्ति को या तो मंजूर कर सकेगा या ना मंजूर कर सकेगा: परन्तु किसी दावे या आपत्ति को तब तक नामंजूर नहीं किया जायेगा जब तक उसे करने बाले व्यक्ति को ऐसे नामंजूर किये जाने के विरुद्ध अभ्यावेदन करने का अवसर न दिया गया हो | (४) किसी दावे या आपत्ति को मंजूर करने या नामंजूर करने संबंधित रजिस्ट्रार का विनिश्चय अंतिम होगा (6) नामावली का अंतिम प्रकाशनः- (i) रजिस्ट्रार, नियम 3 (5) के अधीन के दावों और आपत्तियों को निपटाने के पश्चात् उक्त नियम के अधीन अपने विनिश्चयों को कार्यान्वित करने और नामावली में की किसी लेखन या मुद्रण संबंधी गलती और ऐसी अन्य अशुद्धियों को, जिनका पता बाद में चले या जो उनकी जानकारी में लाई जाये, सुधारने के लिए संशोधनों की सूची तैयार करेगा | (हा) रजिस्ट्रार, संशोधनों की सूची सहित नामावली को, उसकी एक सम्पूर्ण प्रति निरीक्षण के लिए उपलब्ध कराके और राज्य परिषद् के कार्यालय में प्रदर्शित करके, प्रकाशित करेगा | (1) इस प्रकार प्रकाशित किये जाने पर, संशोधनों की सूची सहित नामावली ऐसे व्यक्तियों की निर्वाचक नामावली होगी, जो अधिनियम की धारा 32 की उप-धारा (1) के खण्ड (क) के अधीन राज्य परिषद् के सदस्य निर्वाचिन कर सकेंगे | (iv) उप-नियम (ji) के अधीन प्रकाशित संशोधन की सूची सहित नामावली की एक प्रति, रजिस्ट्रार द्वारा राज्य सरकार को भेजी जायेगी | (7) रिटर्निंग ऑफिसर और सहायक रिटर्निंग ऑफिसर:- (i) राज्य सरकार, नियम 3 (6) के अधीन प्रकाशित निर्वाचक नामावली की प्रति प्राप्त करने के पश्चात् एक रिटर्निंग *ऑफिसर, जो राज्य सरकार का अधिकारी होगा, पदाभिहित या नामनिर्दिष्ट करेगी | (Il) राज्य सरकार, एक या अधिक ऐसे व्यक्तियों को भी, जो राज्य सरकार के अधिकारी ही होंगे, सहायक रिटर्निंग ऑफिसर के रूप में रिटर्निंग ऑफिसर के कृत्यों के पालन में उसकी सहायता करने के लिए नियुक्त कर सकेगी। () प्रत्येक सहायक रिटर्निंग ऑफिसर, रिटर्निंग ऑफिसर के नियंत्रण के अधीन रहते हुए, रिटर्निंग ऑफिसर के सभी कृत्यों या उनमें से किसी कृत्य का पालन करने के लिए सक्षम होगाः परन्तु कोई भी सहायक रिटर्निंग आफिसर रिटर्निंग ऑफिसर के किसी भी ऐसे कृत्य का पालन नहीं करेगा जो मतपत्रों के जारी करने, मतपत्रों की गणना करने और निर्वाचन के परिणामों की घोषणा करने से संबंधित है | (8) नामनिर्देशन आदि के लिए तारीखें नियत करनाः- () रिटर्निंग ऑफिसर, राजस्थान के राजपत्र में अधिसूचना, द्वारा, या किसी ऐसी अन्य रीति से, जो वह ठीक समझे- (@) नामनिर्देशन करने के लिए तारीख नियत करेगा, जो उक्त अधिसूचना के प्रकाशन की तारीख के पश्चात् के सातवें दिन की होगी, या यदि वह दिन सार्वजनिक अवकाश का - दिन है तो ऐसे अगले उत्तरवर्ती दिन की होगी जो सार्वजनिक अवकाश का दिन नहीं है; (@) अभ्यर्थिताएं वापस लेने की अंतिम तारीख नियत करेगा, जो नाम निर्देशनों की संवीक्षा की तारीख के पश्चात् के दूसरे दिन की होगी, या यदि वह दिन सार्वजनिक अवकाश दिन है तो ऐसे अगले उत्तरवर्ती दिन की होगी जो सार्वजनिक अवकाश का दिन नहीं है; (ग) वह तारीख नियत करेगा जिसको, यदि आवश्यक हो तो, मतदान होगा, जो अभ्यर्थिताए वापस लेने की अंतिम तारीख के पश्चात् के तीसवें दिन के पूर्वतर न होने वाली तारीख होगी; और (घ) मतों की गणना के लिए और परिणामों की घोषणा के लिए तारीख, समय और स्थान नियत करेगा, जो मतदान की तारीख से तीसरे दिन के पश्चात् की नहीं होगी | (॥) उप-नियम 3 (8) (i) के अधीन जारी की गयी अधिसूचना द्वारा राज्य परिषद् के निर्वाचन के लिए-भी अभ्यर्थियों का नामनिर्देशन आमंत्रित किया जायेगा और वह स्थान, विनिर्दिष्ट किया जायेगा जहां नामनिर्देशन-पत्र परिदत्त किये जायेंगे | (9) नामनिर्देशन पत्र का प्रस्तुत किया जाना और विधिमान्य नामनिर्देशनों के लिए अपेक्षाएं:- () नियम 3 (8) के उप-नियम (i) के खण्ड (@) के अधीन नियत की गई तारीख को या उसके पहले, प्रत्येक अभ्यर्थी, प्ररूप-3 में नामनिर्देशन-पत्र, रसीदी रजिस्ट्री डाक द्वारा रिटर्निंग ऑफिसर को भेजेगा या उसे स्वयं परिदत्त करेगा | (ii) प्रत्येक” नामनिर्देशन-पत्र पर दो मतदाताओं द्वारा, एक के द्वारा प्रस्थापक के रूप में और दूसरे के द्वारा समर्थक के रूप में, हस्ताक्षर किये जाएगे और वह उनके द्वारा प्रस्तावित तथा समर्पित अभ्यर्थी द्वारा अनुमत होग : परन्तु कोई भी मतदाता, प्रस्थापक या समर्थक के रूप में, भरे जाने वाले स्थानों से अधिक नामनिर्देशन-पत्रों पर हस्ताक्षर नहीं करेगा : परन्तु यह और कि यदि कोई मतदाता, भरे जाने वाले स्थानों से अधिक संख्या में नामनिर्देशन-पत्रॉंपर हस्ताक्षर करता है तो रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा पहले प्राप्त उतने नामनिर्देशन पत्र, जो भरे जाने वाले स्थानों की संख्या के बराबर हैं यदि वे अन्यथा ठीक है तो विधिमान्य माने जाएंगे और यदि भरे जाने वाले स्थानों की संख्या से अधिक उसी मतदाता द्वारा हस्ताक्षरित ऐसे नामनिर्देशन पत्र एक साथ प्राप्त किए जाते हैं तो ऐसे सभी नामनिर्देशन-पत्र अविधिमान्य माने जाएंगे | ही) प्रत्येक नामनिर्देशन-पत्र के प्राप्त होने पर, रिटर्निंग ऑफिसर उस पर प्राप्ति की तारीख और समय पृष्ठांकित करेगा। (10) नामनिर्देशन पत्र का नामंजूर किया जाना:- किसी ऐसे नामनिर्देशन पत्र को नामंजूर कर दिया जाएगा जो रिटर्निंग आफिसर द्वारा उस निमित्त नियत की गई: तारीख को या उससे पहले प्राप्त नहीं होता है | (11) नामनिर्देशन-पत्रों की संवीक्षा:- (i) नामनिर्देशन-पत्रोंकी संवीक्षा के लिए रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा नियत की गई तारीख को और समय पर अभ्यर्थी, और प्रत्येक अभ्यर्थी का प्रस्थापक तथा समर्थक या अभ्यर्थियों द्वारा इस निमित्त सम्यक् रूप से प्राधिकृत अन्य प्रतिनिधि, रिटर्निंग ऑफिसर के कार्यालय में उपस्थित हो सकेंगे, जो उन्हें सभी अभ्यर्थियों के ऐसे नामनिर्देशन-पत्रों, जो यथापूर्वोक्त रूप से उसके द्वारा प्राप्त किए गए हों, की परीक्षा करने के लिए अनुज्ञात करेगा | (ii) रिटर्निंग ऑफिसर इस प्रकार प्राप्त नामनिर्देशन-पत्रों की परीक्षा करेगा और ऐसे सभी प्रश्नों का विनिश्वय करेगा जो किसी नामनिर्देशन की विधिमान्यता के संबंध में उत्पन्न हो, और उस पर उसका विनिश्चय अंतिम होगा | (12) अभ्यर्थिता का वापस लिया जाना:- (i) कोई अभ्यर्थी अपनी अभ्यर्थिता, अपने द्वारा हस्ताक्षरित लिखित सूचना द्वारा, नियम 3 (8) के उप-नियम () के खण्ड (@) के अधीन नियत तारीख के पूर्व रिटर्निंग ऑफिसर को परिदत्त करके; वापस ले सकेगा ।- (ii) किसी ऐसे अभ्यर्थी को, जिसने अपनी अभ्यर्थिता वापस ले लो है, अभ्यर्थिता वापिस - लिए जाने को रद्द करने या उसी निर्वाचन के लिए अभ्यर्थी के रूप में पुनः नामनिर्दिष्ट किये जाने के लिए अनुज्ञात नहीं किया जाएगा | (13) निर्वाचन लड़ने वाले अभ्यर्थियों की सूची का प्रकाशन:- (i) उस अवधि के, जिसके भोतर नियम 3 (12) के अधीन अभ्यर्थिता वापस ली जा सकेगी, समाप्त होने के ठीक पश्चात्, रिटर्निंग ऑफिसर, निर्वाचन लड़ने वाले अभ्यर्थियों की अर्थातु, उन अभ्यर्थियों की, जिन्हें विधिमान्य रूप से नामनिर्दिष्ट किया गया था और जिन्होंने उक्त अवधि के भीतर अपनी अभ्यर्थिता वापस नहीं ली है, सूची तैयार करेगा और उसे प्रकाशित करेगा | (ii) उक्त सूची में नाम वर्णक्रम में होंगे और निर्वाचन लड़ने वाले अभ्यर्थियों & पते नामनिर्देशन-पत्रों में दिए गए अनुसार होंगे | (हो) उक्त सूची राज-पत्र में प्रकाशित की जाएगी और ऐसी रीति से उसका व्यापक प्रचार किया जाएगा जैसा कि रिटर्निंग ऑफिसर ठीक समझे | (14) मतदान:- (i) यदि निर्वाचन के लिए सम्यक् रूप से नामनिर्दिष्ट व्यक्तियों की संख्या; निर्वाचित किए जाने वाले सदस्यों की संख्या से अधिक नहीं है तो रिटर्निंग ऑफिसर ऐसे अभ्यर्थी या अभ्यर्थियों के बारे में तत्काल यह घोषणा करेगा कि वह /वे सम्यक् रूप से निर्वाचित हो गया है/गये हैं । (ii) यदि ऐसे अभ्यर्थियों की संख्या, इस प्रकार निर्वाचित किये जाने वाले सदस्यों की संख्या से अधिक है तो रिटर्निंग आफिसर मतदान के लिए नियत की गई तारीख से तीस दिन पहले, प्ररूप 4 में सूचनापत्र, जिसके साथ प्ररूप-5 में सख्यांकित घोषणा पत्र, वर्णक्रम में अभ्यर्थियों के नामों से युक्त और रिटर्निंग आफिसर के हस्ताक्षर या प्रतिरूप हस्ताक्षर वाले प्ररूप-5 में मतपत्र ऑफिसर के पता सहित मतपत्र वाला लिफाफा और उक्त आफिसर के पते सहित बाह्य लिफाफा भी होगा, विदेश में निवास करने वाले या व्यवसाय करने वाले प्रत्येक मतदाता को हवाई डाक द्वारा और राज्य में या उसके बाहर के किन्तु देश के भीतर के प्रत्येक अन्य मतदाता को डाक द्वारा भेजेगा: परन्तु मतपत्र और अन्य संबन्धित कागज पत्र, किसी भी मतदाता को, उसके द्वारा मतदान के लिए नियत तारीख से पहले उसके लिए रिटर्निंग आफिसर को आवेदन किये जाने पर, उस दशा. में भेजे जा सकेंगे, जब रिटर्निंग आफिसर का यह समाधान हो जाता है कि कागज-पत्र उसे नहीं भेजे गये | (i) किसी मतदाता को भेजे गये ऐसे प्रत्येक सूचना-पत्र की बाबत डाक में डाले जाने का प्रमाण-पत्र अभिप्राप्त किया जायेगा | (iv) कोई ऐसा मतदाता, जिसने डाक द्वारा उसे भेजे गये मतपत्र और अन्य सम्बन्धित कागज पत्र प्राप्त नहीं किये हैं या जिसने उन्हें खो दिया है या जिसके मामले में कागज-पत्र रिटर्निंग आफिसर को लौटाने के पहले अनवधानता से खराब हो गये हैं उस आशय की लिखित घोषणा भेज सकेगा और रिटर्निंग आफिसर से मतदान के लिए नियत तारीख के पंद्रह दिन पहले नये कागज-पत्र उसे भेजने का अनुरोध कर सकेगा और यदि कागज-पत्र खराब हो गये हैं तो खराब हुए कागज-पत्र रिटर्निंग ऑफिसर को लौटा दिये जायेंगे जो उन्हें प्राप्त होने पर रद्द कर देगा। (v) ऐसे प्रत्येक मामले में जिसमें ऐसे नये कागज-पत्र जारी किये जाते हैं, निर्वाचक नामावली में मतदाता के नाम से सम्बन्धित संख्यांक के सामने एक चिह्न यह द्योतन करने के लिए लगा दिया जायेगा कि नये कागज पत्र जारी किये गये हैं । (५) कोई भी निर्वाचन किसी भी मतदाता द्वारा अपने मतपत्र ओर अन्य सम्बन्धित कागज पत्र प्राप्त न किये जाने के कारण अविधिमान्य नहीं होगा | (vii) प्रत्येक मतदाता को उतने अभ्यर्थियों को मत देने का अधिकार होगा जितने भरे जाने वाले स्थान हैं और मत अन्तरणीय होगा | (viii) अपना मत अभिलिखित करने की इच्छा रखने वाला प्रत्येक मतदाता सूचना- पत्र (प्ररूप-4) में दिये गये निर्देशों के अनुसार घोषणा पत्र (प्ररूप-5) और मतपत्र (प्ररूप-6) भरने के पश्चात, मतपत्र को मतपत्र वाले लिफाफे में डालकर उसे चिपका देगा और घोषणा-पत्र सहित उक्त लिफाफे को रिटर्निंग आफिसर के पते वाले बाह्मा लिफाफे में बंद कर देगा और उस बाहा लिफाफे को अपने खर्च पर रिटर्निंग आफिसर को डाक द्वारा या दस्ती भेजेगा जिससे कि वह उसके पास मतदान के लिए नियुक्त तारीख को मतदान के बंद होने के लिए नियत समय के पहले पहुँच जाये | (ix) रिटर्निंग आफिसर, घोषणापत्र वाले लिफाफे और मतपत्र वाले बंद लिफाफे को डाक द्वारा या दस्ती प्राप्त करने पर बाहम लिफाफे पर उसकी प्राप्ति की तारीख और समय पृष्ठांकित करेगा | (x) उक्त तारीख और समय के पश्चात् प्राप्त हुए समस्त लिफाफे को नामंजूर कर दिया जायेगा | (15) बाहा लिफाफे का खोला जाना: - () रिटर्निंग आफिसर मतदान के लिए नियत तारीख को मतदान की समाप्ति के लिए नियत समय के ठीक पश्चात् बाह्य लिफाफों को उस स्थान पर खोलेगा जिस पर लिफाफे उसे संबोधित किये गये हैं | (if) बाहम लिफाफे खोले जाने के समय कोई भी अभ्यर्थी स्वयं उपस्थित रह सकेगा या वह अपने द्वारा लिखित में सम्यक रूप से प्राधिकृत कोई प्रतिनिधि उपस्थित रहने के लिए भेज सकेगा | (16) मतपत्र लिफाफों को नामंजूर करनाः-- (1) रिटर्निंग आफिसर किसी मतपत्र को नामंजूर करेगा यदिः:- (क) बाह्य लिफाफे में मतपत्र वाले लिफाफे के बाहर कोई घोषणा पत्र न हो, या (ख) घोषणा-पत्र वह नहीं हो जो रिटर्निंग आफिसर द्वारा भेजा गया था, या (ग) घोषणा-पत्र पर मतदाता द्वारा हस्ताक्षर नहीं किये गये हैं, या (घ) मतपत्र को मतपत्र वाले लिफाफे के बाहर रखा गया है, या (ड) एक से अधिक - घोषणा-पत्र या मतपत्र वाले लिफाफे एक ही बाह्म लिफाफे में बंद किये गये हैं । (ii) नामंजूर किए जाने के प्रत्येक मामले में, मतपत्र वाले लिफाफे और घोषणा-पत्र पर शब्द “नामंजूर” पृष्ठांकित किया जायेगा। नामंजूर किए जाने के कारण भी मतपत्र वाले लिफाफे पर संक्षेप में अभिलिखित किए जायेंगे। (ifi) अपना यह समाधान हो जाने के पश्चात् कि मतदाताओं ने घोषणा पत्रों पर अपने हस्ताक्षर पर दिए हैं, रिटर्निंग ऑफिसर सभी घोषणा. पत्रों को, नियम 3 (19) के अधीन निपटान होने तक सुरक्षित अभिरक्षा में रखेगा। (17) मतों की संवीक्षा और गणना: -- (i) गणना के लिए नियत तारीख को, नियम 3 (16) के अधीन नामंजूर कर दिए गए लिफाफों से निम्न मतपत्र वाले लिफाफे खोले जायेंगे और मतपत्रों को निकाल लिया जायेगा और उन्हें एक साथ मिला दिया जायेगा | (ii) उसके पश्चात् मतपत्रों की संवीक्षा की जायेगी और विविमान्य मतों की गणना की जायेगी। (हा) गणना की प्रक्रिया की निगरानी के लिए कोई अभ्यर्थी स्वयं उपस्थित हो सकेगा या वह अपने द्वारा लिखित में सम्यक् रूप से प्राधिकृत कोई प्रतिनिधि भेज सकेगा (iv) कोई मतपत्र उस दशा में अविधिमान्य हो जायेगा, यदि - (@) उस पर रिटर्निंग आफिसर के आदक्षर या प्रतिरूप हस्ताक्षर नहीं हैं; या (ख) कोई मतदाता मतपत्र पर अपना नाम हस्ताक्षरित करता है या उस पर कोई ऐसा शब्द लिखता है या उस पर कोई ऐसा चिह्न बनाता है जिनके द्वारा वह उसके मतपत्र के रूप पहचानने योग्य हो जाये; या (ग) उस पर कोई मत अभिलिखित नहीं किया जाता है; या (घ) वह प्रयोग किए गए मत की अनिश्चितता के कारण शून्य हो जाता है; या (ड) उस पर अभिलिखित मतों की संख्या निर्वाचित होने वाली संख्या से अधिक जाती है; या (च) मत का अभिलेखन उस प्रयोजन के लिए उपबंधित स्थान से भिन्न किसी स्थान पर किया गया है (v) रिटर्निंग ऑफिसर, यदि ऐसा अनुरोध किया जाये तो, मतपत्रों को, मतों की संवीक्षा और गणना के समय, अभ्यर्थियों को या उनके प्राधिकृत प्रतिनिधियों को दिखायेगा। (५) यदि कोई अभ्यर्थी या उसका प्रतिनिधि, रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा किसी मतपत्र के स्वीकार किए जाने पर या किसी मतपत्र के नामंजूर किए जाने पर, इस आधार पर आपति करता है कि वह विनिर्दिष्ट अपेक्षा ओं का अनुपालन नहीं करता तो उसका रिटर्निंग आफिसर द्वारा तुरन्त विनिश्चय किया जायेगा और उस पर उसका विनिश्चय अन्तिम होगा | (vii) रिटर्निंग ऑफिसर, ऐसे निदेशों के अनुसार जो राजस्थान सरकार द्वारा इस निमित जारी किये जायें, उतने संवीक्षक नाम निर्दिष्ट करेगा, जितने वह ठीक समझे | (18) परिणामों की घोषणा:- () जब मतों की गणना पूरी हो जाये तब रिटर्निंग आफिसर अभ्यर्थियों की एक सूची, प्रत्येक द्वारा प्राप्त अधिकतम मतों के क्रम में बनायेगा और भरे जाने वाले स्थानों की संख्या के अनुसार उस क्रम में सफल अभ्यर्थियों का परिणाम घोषित करेगा | (i) यदि इस प्रकार निर्वाचित घोषित कोई अभ्यर्थी निर्वाचन को स्वीकार करने से इन्कार करता है तो उस अभ्यर्थी के स्थान पर शेष अभ्याधियों में से एक को, जिसे उसके बाद अधिकतम मत दिए गए हैं, निर्वाचित हो गया समझा जायेगा, और उसी प्रक्रिया का, इस प्रकार जितनी भी बार रिक्त हो, अनुसरण किया जायेगा | (iii) जब किन्हीं दो या अधिक अभ्यर्थियों के बीच मत बराबर हों तो ऐसे व्यक्ति या व्यक्तियों के अवधारण, जिसके या जिनके बारे में यह समझा जायेगा कि वह या वे निर्वाचित हो. गया है/गये हैं, रिटर्निंग आफिसर द्वारा या उसके द्वारा प्राधिकृत किसी अन्य अधिकारी द्वारा, ऐसी रीति से जो वह अवंधारित करे, निकोले जाने वाले लाट द्वारा किया जायेगा | (५४) जैसे ही परिणाम घोषित हो जाये, रिटर्निंग ऑफिसर प्रत्येक सफल अभ्यर्थी को परिषद् के लिए उसके निर्वाचित होने की सूचना | (19) मत-पत्र रखे जायेंगे:- गणना के पूर्ण हो जाने पर और परिणाम घोषित हो जाने पश्चात् रिटर्निंग आफिसर मतपत्रों और निर्वाचन से सम्बन्धित सभी अन्य दस्तावेजों को सील “बन्द करेगा और उन्हें छह मास की अवधि तक रखेगा तथा अभिलेखों को छह मास राजस्थान सरकार की पूर्व सहमति के बिना नष्ट नहीं करेगा या करवायेगा | (20) निर्वाचन के परिणामों की सूचनाः- रिटर्निंग प्रा फिसर राजस्थान सरकार को निर्वाचित अभ्यर्थियों के नामों के बारे में अधिनियम की धारा 32 की उप-धारा (2) के अधीन राजस्थान राजपत्र में उनके नाम प्रकाशित कराने के लिए उसकी कानूनी बाध्यता पूरी करने के लिए सूचित करेगा | (i) निर्वाचन के बारे में किसी ऐसे विवाद के मामले में जो उस निर्वाचन के परिणामों की घोषणा & पन्द्रह दिन के भीतर रिटर्निंग आफिसर को दर्ज कराया जाये राजस्थान सरकार को - अधिनियम की धारा 37 के अधीन उसके विनिश्चय के लिए निर्देशित किया जायेगा तथा उसका विनिश्रय अंतिम होगा भाग-3 राज्य पशु चिकित्सा परिषद् के अध्यक्ष का निर्वाचन 4. (1) राज्य परिषद् के सदस्यों का रजिस्टर: -- राज्य परिषद् का कार्यालय प्ररूप-7 में एक रजिस्टर रखेगा जिसमें उसके लिए समय-समय पर निर्वाचित या नाम निर्दिष्ट सदस्यों के नाम और अन्य ब्योरे होंगे। (2) राज्य परिषद् के अध्यक्ष के निर्वाचन & लिए प्रक्रिया- (i) परिषद् के सदस्यों द्वारा उन्हीं में से राज्य परिषद् के अध्यक्ष का निर्वाचन उसके गठन या यथास्थिति, पुनर्गठन के पश्चात् उक्त परिषद् की प्रथम बैठक में किया जायेगा | (ii) रजिस्ट्रार उस बैठक में उपस्थित सदस्यों को उक्त अध्यक्ष के पद के लिए नामनिर्देशन करने के लिए आमस्त्लित॑ करेगा प्रत्येक नाम निर्देशन का समर्थन बैठक में उपस्थित किसी अन्य सदस्य द्वारा समर्थक के रूप में किया जायेगा | परन्तु कोई भी सदस्य अध्यक्ष पद के लिए एक से अधिक सदस्य का नामनिर्देशन या समर्थन नहीं करेगा | (iii) यदि इस प्रकार केवल एक व्यक्ति को नाम निर्दिष्ट किया गया हो तो उसे राज्य परिषद् अध्यक्ष के रूप में सम्यक् रूप से निर्वाचित किया गया घोषित किया जायेगा | (iv) तथापि, यदि अध्यक्ष पद के लिए एक से अधिक सदस्यों को सम्यक् रूप से नाम निर्दिष्ट और समर्थित किया गया है. तो रजिस्ट्रार निम्नलिखित रीति से मत लेने की कार्यवाही करेगा, आर्थातिः:- (क) प्रत्येक उपस्थित सदस्य को कागज की एक पर्ची दी जायेगी जिस पर वह निर्वाचन लड़ने वाले व्यक्तियों में से किसी ऐसे एक का नाम उस पर लिखेगा जिसके पक्ष में सदस्य अपना मत देना चाहता है | तत्पश्चात् वह पर्ची को मोड़कर रजिस्ट्रार को सुपुर्द कर गा | (ख) समस्त पर्चियां प्राप्त होने पर रजिस्ट्रार निर्वाचन लड़ने वाले प्रत्येक व्यक्ति द्वारा प्राप्त किये गये मतों की गणना करेगा और अधिकतम मत प्राप्त करने वाले सदस्य को राज्य परिषद् का सयम्क् रूप से निर्वाचित अध्यक्ष घोषित करेगा | (ग) यदि निर्वाचन लड़ने वाले दो या दो से अधिक व्यक्तियों द्वारा प्राप्त मत इस प्रकार बराबर हों जिससे यह (ALY करना कठिन हो कि किसने अधिकतम मत प्राप्त किये हैं तो रजिस्ट्रार तत्पश्चात् मामले का विनिश्वचय ऐसी रीति से, जैसी वह ठीक समझे, लाट निकाल कर कर सकेगा और लाट निकालकर अविज्ञात व्यक्ति को राज्य परिषद् का सम्यक् रूप से निर्वाचित सदस्य घोषित करेगा | भाग-4 राज्य परिषद के कार्य संचालन की प्रक्रिया 5. कार्य का समय और स्थान - (i) राज्य परिषद् की कार्य बैठकें साधारणतया प्रत्येक तिमाही में एक बार ऐसे समय और स्थान पर होंगी जैसा कि उसके अध्यक्ष द्वारा विनिश्चिय किया जाये; परन्तु चुना गया स्थान राजस्थान राज्य के भीतर होगा | (2) राज्य परिषद् का अध्यक्ष उक्त परिषद् की कार्य बैठक के अनुक्रम में इसकी आगामी बैठक की तारीख विनिश्चित कर सकेगा | (3) यदि आवश्यक समझा जाये तो उक्त अध्यक्ष सात दिन का नोटिस देकर किसी भी समय राज्य परिषद् की विशेष बैठक बुलायेगा (4) किसी कित्तीय वर्ष में राज्य परिषद् की प्रथम बैठक उस परिषद् की उस वर्ष की वार्षिक बैठक होगी | (5) नियम 5 (3) के अधीन बुलायी गयी विशेष बैठक के सिवाय प्रत्पेक बैठक का कार्यवृत्त रजिस्ट्रार द्वारा उक्त बैठक के पश्चात् के तीस दिन से पूर्व राज्य परिषद् के प्रत्येक सदस्य को दस्ती या रजिस्ट्रीकृत डाक से प्रेषित किया जायेगा | (6) राज्य परिषद् की साधारण तिमाही बैठक की प्रारम्भिक कार्यसूची के कार्य की मदें रजिस्ट्रार द्वारा बैठक के काफी पहले और किसी भी स्थिति में बैठक के लिए नियत तारीख से कम से कम तीस दिन पूर्व लिखित में सदस्यों को सूचित की जायेगी | (7) तथापि - विशेष बैठक की स्थिति में रजिस्ट्रार बैठक के लिए नियत तारीख से कम से कम सात दिन पूर्व उक्त बैठक के नोटिस के साथ उस बैठक के लिए प्रस्तावित कार्यसूची के कार्य की मदें जारी करेगा | (8) ऐसा सदस्य, जो साधारण बैठक की कार्यसूची में सम्मिलित नहीं किया गया कोई प्रस्ताव प्रस्तुत करना चाहता है या कार्यसूची में इस प्रकार सम्मिलित किसी भी मद में संशोधन प्रस्तुत करना चाहता है, बैठक के लिए नियत तारीख से कम से कम पन्द्रह दिन पूर्व लिखित में इसका नोटिस रजिस्ट्रार को देगा। तत्पश्चात् रजिस्ट्रार राज्य परिषद् के अध्यक्ष से परामर्श करके बैठक की अंतिम कार्यसूची में ऐसे अनुरोध को सम्मिलित करेगा। (9) राज्य परिषद् की प्रत्येक बैठक की अध्यक्षता उसके अध्यक्ष द्वारा, यदि वह उपस्थित हो; और उसकी अनुपस्थिति में उस बैठक की अध्यक्षता करने के लिए उपस्थित सदस्यों द्वारा उन्हीं में से चुने गये किसी अन्य सदस्य द्वारा की जायेगी | (10) (i) राज्य परिषद् की बैठक के कार्य संचालन के लिए आवश्यक गणपूर्ति परिषद् की सदस्य संख्या की कम से कम एक तिहाई से होगी | (i) यदि बैठक के लिए नियत समय पर गणपूर्ति न हो तो बैठक तब तक प्रारम्भ नहीं होगी जब तक गणपूर्ति न हो, और यदि नियत समय के एक घंटे पश्चात् भी बैठक की गणपूर्ति न हो तो बैठक उसी तिमाही की आगामी ऐसी तारीख और समय के लिए स्थगित हो जायेगी जो राज्य परिषद् का अध्यक्ष नियत करे | (11) राज्य परिषद् की किसी बैठक के समक्ष आने वाले समस्त प्रश्नों को उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के बहुमत से विनिश्चित किया जायेगा | (12) मतों के बराबर-बराबर रहने के मामले में अध्यक्षता करने वाला व्यक्ति निर्णायक मत देगा। (13) राज्य परिषद् की प्रत्येक बैठक, चाहे वह साधारण हो या विशेष के कार्यवृत्त की प्रतिलिपि बैठक होने के दो दिन के भीतर उसके अध्यक्ष को प्रस्तुत की जायेगी और उसके द्वारा अनुप्रमाणित कर दिये जाने पर नियम 5 (5) में जैसा उपबंधित है उसके अनुसार प्रत्येक सदस्य को भेजी जायेगी। भाग-5 कार्यकारिणी और अन्य समितियां 6. (1) राज्य परिषद्, अधिनियम की धारा 40 के अधीन, इस प्रभाव का प्रस्ताव पारित करके ऐसे प्रयोजनों के लिए जो आवश्यक समझे जायें, अपने सदस्यों में से एक कार्यकारिणी समिति और अन्य समितियां नियुक्त कर सकेगी और उक्त प्रस्ताव में ही ऐसी समिति के प्रयोजन और कृत्य परिभाषित कर सकेगी। (2) राज्य परिषद् इस प्रभाव का प्रस्ताव पारित करके कार्यकारिणी समिति से भिन्न किसी समिति में सलाह देने के लिए विशेष रूप से अहित किसी व्यक्ति या किन्हीं व्यक्तियों को सहयुक्त भी कर सकेगी | (3) कार्यकारिणी समिति या अन्य समिति की बैठक के लिए गणपूर्ति संबंधित समिति (यों) की नियुक्ति के समय विनिर्दिष्ट की जायेगी और वह इसके संबंध में नियुक्त किये गये सदस्यों के साधारण बहुमत से कम नहीं होगी | (4) इस प्रकार नियुक्त की गयी कार्यकारिणी समिति और अन्य समितियां उक्त समिति (यो) को नियुक्त करने के प्रस्ताव में निर्दिष्ट किये गये मामलों पर रिपोर्ट उक्त प्रस्ताव में इस प्रयोजन के लिए विनिर्दिष्ट समय सीमा के भीतर राज्य परिषद् के रजिस्ट्रार को करेगी | (5) असधारण परिस्थितियों के सिवाय अधिनियम की धारा 40 के साथ पठित नियम 6 (1) के अधीन राज्य परिषद् द्वारा नियुक्त की गयी किसी समिति को कोई समय विस्तार नहीं दिया जायेगा | (6) रजिस्ट्रार समिति की उक्त रिपोर्ट को राज्य परिषद् की ग्रागामी बैठक के समक्ष रखेगा भाग-6 राज्य परिषद् के अध्यक्ष और अन्य सदस्यों तथा ( राज्य परिषद् सदस्यों से भिन्न) समितियों के सदस्यों की फीस और भत्ते 7 (1) अध्यक्ष और राज्य परिषद् के राज्य सरकार के पदधारियों और पदेन सदस्यों से भिन्न सदस्यों को अधिनियम की धारा 41 के अधीन, उक्त परिषद् और समिति (यों) की बैठकों में उपस्थित होने & लिए वही यात्रा भत्ता संदत्त किया जायेगा जो राजस्थान सरकार के प्रथम श्रेणी के अधिकारियों को लागू है | (2) राज्य परिषद् के सदस्यों से भिन्न समितियों के सदस्यों को भी समितियों की बैठकों में उपस्थित होने के लिए उसी प्रकार के यात्रा भत्ते संदत' किये जायेंगे | (3) तथापि, राजस्थान सरकार द्वारा नामनिर्दिष्ट राज्य सरकार के पदथारी और पदेन सदस्य सरकार/संस्था के नियमों के अनुसार अपने-अपने कार्यालय / संगठनों से यात्रा और अन्य भत्ते प्राप्त करने के हकदार होंगे | (4) जहां तक अशासकीय सदस्यों के लिए दैनिक भत्ते का सम्बन्ध है उन्हें राजस्थान सरकार के प्रथम श्रेणी के पदधारियों को अनुज्ञेय रकम के बराबर रकम संदत्त की जायेगी। (5) राज्य परिषद् के अध्यक्ष और सरकारी पदधारियों से भिन्न सदस्यों को राज्य परिषद् की कार्यकारिणी समिति या अन्य समिति की बैठक में उपस्थित होने के लिए 50/- रु. की फीस संदत्त की जायेगी | (6) राज्य परिषद् के अध्यक्ष को यदि वह राज्य सरकार का पदधारी नहीं है तो, राज्य परिषद् की प्रत्पेक बैठक के लिए 100 /- रुपये और अन्य बैठकों के लिए 50/- रुपये की रकम संदत्त की जायेगी | (7) जहां राज्य परिषद् का कोई अध्यक्ष से भिन्न सदस्य नियम 5 (9) के अधीन परिषद् की बैठक की अध्यक्षता करता है वहां उसे 100/- रु. की फीस संदत्त की जायेगी | भाग-7 रजिस्ट्रार और अन्य अधिकारियों तथा कर्मचारियों की सेवा के निबंधन और शर्तें 8. रजिस्ट्रार और राज्य परिषद् द्वारा नियुक्त किये गये अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों की सेवा के निबंधन और शर्ते वही होंगी जो राजस्थान पशुपालन राज्य सेवा के नियमों के अधीन राज्य सरकार तत्समान पदधारियों को लागू हैं | भाग-8 9. राज्य पशु चिकित्सा रजिस्टर:- राज्य सरकार/राज्य परिषद्, यथास्थित, अधिनियम को धारा 44 के अधीन यथा उप-बंधितानुसार मान्यता प्राप्त पशु-चिकित्सा आअहताएं रखने वाले और अधिनिमय के अधीन राज्य परिषद् में रजिस्ट्रीकृत व्यक्तियों के नाम और अन्य सुसंगत विशिष्टियां रजिस्ट्रीकरण के प्ररूप-8 में के राज्य पशु चिकित्सा रजिस्टर रखेगी | भाग-9 10. रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन और रजिस्ट्रीकरण फीसः- (1) प्रत्येक व्यक्ति जो मान्यताप्राप्त पशु-चिकित्सा अरहता धारित करता है और राजस्थान राज्य में निवास करता है तथा जो अपना नाम राज्य परिषद् में रजिस्ट्रीकृत कराने का इच्छुक है, रजिस्ट्रीकरण अधिकरण/रजिस्ट्रार,यथास्थिति, को प्ररूप-9 में उसे सम्यक् रूप से भर कर और अपने हस्ताक्षर करके आवेदन करेगा (2) ऐसे प्रत्येक आवेदन के साथ 25/- रू. की रजिस्ट्रीकरण फीस भेजी जायेगी | (2) रजिस्ट्रार, राज्य पशु-चिकित्सा रजिस्टर में व्यक्ति का नाम प्रविष्टि करके उसे प्ररूप-10 में रजिस्ट्रीकरण प्रमाण-पत्र जारी करेगा | 11. रजिस्ट्रीकरण के लिए नवीकरण फोसः- (1) कोई व्यक्ति जो पशु-चिकित्सा रजिस्टर में अपना नाम दर्ज रखना चाहता है, अपने रजिस्ट्रीकरण का नवीकरण कराने के वर्ष के 1 अप्रैल से पूर्व प्रत्येक पांच वर्षों के लिए 15 / रु. की नवीकरण फीस राज्य परिषद् को संदत्त करेगा | (2) जहां उक्त नवीकरण फीस उप-नियम ( 1) में उल्लिखित बालावधि के भीतर संदत्त नहीं कराई गई है वहाँ व्यतिक्रमी का नाम उक्त रजिस्टर से हटा दिया जायेगा और उक्त नवीकरण फीस के साथ-उसके व्यतिक्रम के प्रत्येक एक मास या उसके भाग के लिए 15/ रु. जुर्मानि का संदाय करने पर ही उसका नाम प्रत्यावर्तित किया जायेगा | 12. नाम के प्रत्यावर्तन के लिए फीस:- अधिनियम की धारा 40 के अधीन राज्य पशु-चिकित्सा रजिस्टर से हटाये गये नाम को प्रत्यावर्तित करने की फीस 25/- रु. होगी | 13. राज्य पशु चिकित्सा रजिस्टर की प्रतिलिपि:- राज्य पशु चिकित्सा रजिस्टर की प्रतिलिपि के लिए आवेदन करने वाले व्यक्तियों से 10/- रु. के प्रभार उदग्रहणीय होंगे | 14. रजिस्टरीकरण का अन्तरण:- (1) जहां एक राज्य का रजिस्ट्रीकृत पशु- चिकित्सा व्यवसायी किसी अन्य राज्य में पशु चिकित्सा औषधि का व्यवसाय कर रहा है तो वह प्रथम राज्य जहां वह रजिस्ट्रीकृत है, के रजिस्टर से द्वितीय राज्य जहां वह व्यवसाय कर रहा है, के रजिस्टर में अपना नाम अन्तरित कराने के लिए प्रारूप-11 में आवेदन करेगा (2) ऐसे आवेदन के साथ अधिनियम की धारा 48 के अधीन संबंधित द्वितीय राज्य की राज्य परिषद् द्वारा रजिस्ट्रीकरण के नवीकरण के लिए विहित फीस से अनधिक की फीस भेजी जायेगी। 15. प्रमाण-पत्र की दरसरी प्रति जारी करना:- (1) रजिस्ट्रीकरण या नवीकरण प्रमाण-पत्र यथास्थिति की दूसरी प्रति अधिनियम की धारा 54 के अधीन 10/- रु. फीस का संदाय किये जाने पर राज्य परिषद के रजिस्ट्रार द्वारा जारी की जायेगी | (2) प्रमाण-पत्र की उक्त दूसरी प्रति प्ररूप- 12 में होगी | भाग- 10 निधियां 16. (1) राज्य परिषद् की समस्त प्राप्तियां / निधियां राजस्थान राज्य पशु चिकित्सा परिषद् के पक्ष में निक्षिप्त करायी जायेंगी (2) निधियां रजिस्ट्रार, राजस्थान राज्य चिकित्सा परिषद् द्वारा नियंत्रित की जायेंगी। प्ररूप- 1 (नियम 3 (4) और 3 (5) देखिये ) प्रेषित, रजिस्ट्रार, राजस्थान राज्य पशु-चिकित्सा परिषद्, जयपुर-302015 महोदय, मैं भारतीय पशु-चिकित्सा परिषद् अधिनियम, 1984 (1984 का 52) की धारा 32 की उप-धारा (1) के खण्ड (क) के अधीन राजस्थान राज्य पशु चिकित्सा परिषद् के आगामी निर्वाचन के लिए निर्वाचक नामावली में अपना नाम सम्मिलित किए जाने के लिए उक्त अधिनियम के अधीन बनाये गये राजस्थान राज्य पशु-चिकित्सा परिषद् नियमों के नियम 3 (4) और 3 (5) के अधीन इसके द्वारा अपना दावा दाखिल करता हूं | सुसंगत ब्यौरे नीचे दिये गये हैं:- IR T Ak ) N T e———————————————— शैक्षिक 1 L पद नाम और कार्यालय पता . यदि कोई हो दावे के आधार (यदि कोई सबूत हो तो उसके सहित)... .....................८.८८८८८८८८८८८८८८८८यपपपययय या मैं घोषित करता हूं कि मैं भारत का नागरिक हूं, राजस्थान राज्य में निवास कर रहा हूं, और पशु चिकित्सा आयुविज्ञान का व्यवसाय कर रहा हूं / राजस्थान राज्य में नियोजित हूं । स्थान:- . तारीख:- (दावेदार के हस्ताक्षर) रजिस्ट्रीकरण सं. प्ररूप-2 (नियम 3 (4 ) और 3 (5) देखिये) प्रेषिति, रजिस्ट्रार राजस्थान राज्य पशु-चिकित्सा परिषद्, जयपुर। महोदय, मैं भारतीय पशु चिकित्सा परिषद् अधिनियम, 1984 ( 1984 का 52 ) की धारा 32. की उप-धारा (1) के खण्ड (क) के अधीन राजस्थान राज्य पशु चिकित्सा परिषद् के आगामी निर्वाचन के सम्बन्ध में आपके द्वारा तैयार की गयी प्रारूप निर्वाचक नामावली में निम्नलिखित प्रविष्टि के लिए उक्त अधिनियम के अधीन बनाये गये राजस्थान राज्य पशु चिकित्सा परिषद् नियमों के नियम 3 (4) और 3 (5) के अधीन इसके द्वारा अपनी आपत्ति दाखिल करता हूँ:- 1. उस व्यक्ति का नाम (मोटे अक्षरों में) निर्वाचक नामावली में जिसके नाम की प्रविष्टि पर आपति की गयी है 2. उस प्रविष्टि को विशिष्टियां जिस पर आपत्ति की गयी है 3. प्रविष्टि पर की आपत्ति के आधार तारीख: ......................................... (आपत्तिकर्ता के हस्ताक्षर) आपत्तिकर्ता की क्रम सं. और नाम जैसा कि प्रारूप निर्वाचक नामावली में प्रविष्ट है आपत्तिकर्ता का नाम तारीख: प्रतिहस्ताक्षर करने वाले व्यक्ति की क्रम सं. और नाम जैसा कि प्रारूप निर्वाचक नामावली में प्रविष्टि है प्रतिहस्ताक्षर करने वाले व्यक्ति का पता .. प्ररूप- 3 (नियम 3 (9) (देखिए) नाम निर्देशन- पत्र भारतीय पशु चिकित्सा परिषद् अधिनियम, 1984 ( 1984 का 52) की धारा 32 की उप- धारा (1) के खण्ड (@) के अधीन राजस्थान राज्य पशु चिकित्सा परिषद् का निर्वाचन। 1. अभ्यर्थी का नाम 2. पिता का नाम और जन्म तारीख . की प्रकृति... 5. (राज्य पशु चिकित्सा रजिस्टर में) रणिस्टीकृत त IR 2 वर्ष हुए) राज्य पशु चिकित्सा रजिस्टर या उसकी अनुपूर्ति में वह पृष्ठ सं.जिस पर नाम है हि 7. नामावली में क्रम सं. 8. पता/गृह संख्यांक ब्लाक / मार्ग संख्यांक ग्राम / शहर डाक घर पिन कोड 9, प्रस्थापक का नाम 10. प्रस्थापक के हस्ताक्षर... . 11. राज्य पशु चिकित्सा रजिस्टर में प्रस्थापक का रजिस्ट्रीकृत संख्या और (वर्ष बताते हुये ) उक्त रजिस्टर या उसकी अनुपूर्ति में वह पृष्ठ संख्या जिस पर नाम है | 12. नामावली में क्रम सं, 13. समर्थक का नाम 14, समर्थक के हस्ताक्षर . . 15. राज्य पशु चिकित्सा रजिस्टर में समर्थक की रजिस्ट्रीकृत संख्या और (वर्ष बताते हुए) उक्त रजिस्टर या उसकी अनुपूर्ति में वह पृष्ठ संख्या जिस पर नाम है....................................................८८. 16. नामावली में क्रम संख्या अभ्यर्थी द्वारा घोषणा मैं इसके द्वारा घोषणा करता हूँ निर्देशन के लिए सहमत हूं। (अभ्यर्थी के हस्ताक्षर) यह नामनिर्देशन पत्र मेरे द्वारा: (स्थान) TR 'तारीख) को (समय) बजे प्राप्त किया गया | (रिटर्निंग आफिसर के हस्ताक्षर) अनुदेश ऐसे नाम निर्देशन पत्र, जो रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा:.......................................... (तारीख) समय) बजे के पहले प्राप्त नहीं होते हैं, अविधि-मान्य होंगे । प्ररूप-4 (नियम 3 (14) () देखिये) मतपत्र मतपत्र की क्रम सं. भारतीय पशु-चिकित्सा परिषद् अधिनियम, 1984 (1984 का 52) के अधीन राजस्थान राज्य पशु चिकित्सा परिषद् के लिए .....................................««« सदस्य (सदस्यों) का निर्वाचन किया जाना है | क्रम सं. सम्यक रूप से नाम निर्दिष्ट अभ्यार्थियों के मत नाम और पत्ते संख्यांक उप-दर्शित किया जाये | रिटर्निंग ऑफिसर के आद्क्षर / प्रतिरूप हस्ताक्षर अनुदेश 1. प्रत्येक निर्वाचक को उतने अभ्यर्थियों को मत देने का अधिकार है जितनी निर्वाचित किए जाने वाले सदस्यों की संख्या है। 2. वह उस अभ्यर्थी (अभ्यर्थियों) के, जिसे (जिन्हें) वह मत देना चाहता है, नाम (नामों) के सामने X चिह्न लगाकर मत देगा | 3. मत-पत्र अविधिमान्य हो जायेगा यदिः- (@) उस पर रिटर्निंग आफिसर के आदयक्षर या प्रतिरूप हस्ताक्षर नहीं है; या. (ख) मतदाता उस पर अपना नाम हस्ताक्षरित करता है या उस पर कोई ऐसा शब्द लिखता है या कोई ऐसा चिह्न बनाता है जिसके द्वारा वह उसके मतपत्र के रूप में पहचानने योग्य हो जाये; या (ग) उस पर कोई मत अभिलिखित नहीं किया जाता है; या (घ) यदि X" चिह्न इस प्रकार लगाया जाता है कि उससे यह संदेह उत्पन्न हो जाये कि वह किस अभ्यर्थी को लागू होने के लिए आशयित है या यदि उसे निर्वाचित किए जाने के लिए अपेक्षित अभ्यर्थियों से अधिक अभ्यर्थियों के नामों के सामने लगाया जाता है | प्ररूप-5 (नियम 3 (14 (i) देखिए) घोषणा-पत्र भारतीय पशु चिकित्सा परिषद् अधिनियम, 1984 ( 1984 का 52 ) की धारा 32 1) (क). के अधीन राजस्थान राज्य पशु चिकित्सा परिषद् के लिए निर्वाचन। मतदाता का नाम राज्य पशु-चिकित्सा रजिस्टर में सख्यांक और (वर्ष बताते हुए) उस रजिस्टर या उसकी अनुपूर्ति में वह पृष्ठ संख्यांक जिस पर नाम है. मतदाता की घोषणा मैं (पूरा नाम, और पदनाम, यदि कोई है) घोषणा करता हूं कि मैं भारतीय पशु चिकित्सा परिषद् अधिनियम, 1984 (1984 का 52) की धारा 32 को उप-धारा (1) के खण्ड (@) के अधीन सदस्यों के निर्वाचन के लिए मतदाता हूं और मैंने इस निर्वाचन में कोई अन्य मतपत्र प्रस्तुत नहीं किया है। स्थान; मतदाता के हस्ताक्षर: प्ररूप-6 (नियम 3 (14) (i) देखिए) सूचना-पत्र महोदय/ महोदया, वे व्यक्ति, जिनके नाम संलग्न मतपत्र पर छपे हुए हैं, भारतीय पशु- चिकित्सा परिषद् अधिनियम, 1984 ( 1984 का 52 ) की धारा 32 (1) (@) के अधीन राजस्थान राज्य पशु-चिकित्सा परिषद् के निर्वाचन के लिए अभ्यर्थियों के रूप में सम्यक् रूप से नाम निर्दिष्ट किये गये हैं। यदि आप निर्वाचन में मत देना चाहते हैं तो मैं अनुरोध करता हूं कि आप - (@) घोषणा-पत्र (प्ररूप-5) भरें और उस पर हस्ताक्षर करें; (ख) मतपत्र पर निदेश दिये गये अनुसार मतपत्र (प्ररूप- 4) में उस प्रयोजन के लिए उपब्धित स्तम्भ में अपना मत चिह्नित करें; () मतपत्र को छोटे लिफाफे में डालकर उसे चिपका दें; और (घ) उस छोटे लिफाफे और घोषणा-पत्र को बाहम लिफाफे में जो काफी बड़ा है और जिस पर मेरा पता पहले से ही छपा हुआ है, बन्द करें और उसे अपने खर्चे पर डाक द्वारा मेरे पास लौटा दें या उसे स्वयं मेरे कार्यालय में परिदत्त करें जिससे कि वह. 19 को. बजे तक मेरे पास पहुँच जाये | 2. मतपत्र को उस दशा में नामन्जूर कर दिया जायेगा, यदि (@) वह बाहा लिफाफा, जिसमें मतपत्र वाला लिफाफा और घोषणा-पत्र बन्द है, डाक द्वारा नहीं भेजा जाता है या स्वयं मेरे कार्यालय में परिदत्त नहीं किया जाता है या मतदान बन्द होने के लिए नियत समय के पश्चात् प्राप्त होता है या (ख) बाह्य लिफाफे में छोटे लिफाफे के बाहर कोई घोषणा पत्र नहीं है; या (ग) मतपत्र को मतपत्र वाले लिफाफे के बाहर रखा गया है ; या (घ) घोषणा-पत्र वह नहीं है जो रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा मतदाता को भेजा गया था । या (ड)एक से अधिक घोषणा-पत्र या मतपत्र वाले लिफाफे, एक ही STl लिफाफे में बन्द किये गये हैं; या (च) घोषणा पर मतदाता द्वारा हस्ताक्षर नहीं किये गये हैं; या (छ) मतपत्र अविधिमान्य है । 3. मतपत्र उस दशा में अविधिमान्य हो जायेगा, यदि-- (i) उस पर रिटर्निंग आफिसर के आदक्षर या प्रतिरूप हस्ताक्षर नहीं है; या, () मतदाता मतपत्र पर अपना नाम हस्ताक्षरित करता है या उस पर कोई ऐसा शब्द लिखता है या कोई ऐसा चिह्न बनाता है जिसके द्वारा वह उसके मतपत्र के रूप में पहचानने योग्य हो जाये; या (1) उस पर कोई मत अभिलिखित नहीं किया जाता है; या कि उस पर अभिलिखित मतों की संख्या भरी जाने वाली संख्या से अधिक हो जाती प्या (v) वह प्रयोग किये गये मत की अनिश्चितता के कारण शून्य हो जाता है । 4. यदि कोई मतदाता किसी मतपत्र को अवधानता से खराब कर देता है तो वह उसे मतदान के लिए नियत की गई तारीख के पन्द्रह दिन पहले रिटर्निंग आफिसर को लौटा सकता है, जो, यदि उसका उस अनवधानता के बारे में समाधान हो गया है तो उसे दूसरा मतपत्र जारी करेगा | 5. मतों की संवीक्षा और गणना को.................(समय) बजे प्रारम्भ होगी 6. संवीक्षा और गणना के समय, रिटर्निंग आफिसर, ऐसे अन्य व्यक्तियों, जिन्हें वह अपनी सहायता करने के लिए नियुक्त करे, अभ्यर्थियों या उनके सम्यक् रूप से प्राधिकृत प्रतिनिधियों के अलावा कोई अन्य व्यक्ति उपस्थित नहीं रहेगा | रिटर्निंग ऑफिसर प्ररूप-7 (नियम 4 (1) देखिये) राजस्थान राज्य पशु चिकित्सा परिषद् के सदस्यों का रजिस्टर क्र. सं. नाम (मोटे पता क्या निर्वाचन... खण्ड जिसके अक्षरों में) और हुए या नाम... अधीन निर्वाचन जन्म तारीख निदेशित हुए. हुए या नाम N निदेशितहुए 1 2 3 4 5 शासकोय / पदावधि UG समाप्ति... नियत दिनांक... टिप्पणियां, यदि राजपत्र में नाम... प्रारम्भ का का नियत से पूर्व पद कोई हों की अधिसूचना दिनांक दिनांक समाप्ति, यदि सं. और दिनांक कोई हो, का कारण और दिनांक 6 7 8 9 10 प्ररूप - 8 (नियम 9 देखिये) भारतीय पशु-चिकित्सा परिषद् अधिनियम, 1984 ( 1984 का 52) की धारा 44 के अधीन रखा गया राजस्थान राज्य पशु चिकित्सा रजिस्टर क्रसं. Q@AW निवासका. राज्य पशु. रजिस्ट्रीकरण के लिए (मोटे लि पता... चिकित्सा SRl अक्षरों में). राष्ट्रीयता रजिस्टर में आता... वर्ष और जन्म. प्रवेश (अहता तारीख तारीख की तारीख सहित) 1 2 3 4 5 6 7 अहंता प्रदान करने वाला... व्यवसायिक पता यदि कोई. स्थाई पता यदि कोई हो प्राधिकरण हो (महाविद्यालय और विश्वविद्यालय) 8 9 10 अन्य शैक्षिक अहता यदि कोई हों वर्तमान उपजिविका .. अहता... वह संस्था... वर्ष... सरकारी... प्राईविट . सेवानिवृत्त. ्पणायां जहां से (तारीख सेवा व्यवसाय यदि कोई हों। अभिपरा्त सहित) 11 12 13 14 15 16 17 प्ररूप- 9 (नियम 10 (1) देखिए) भारतीय पशु चिकित्सा परिषद् अधिनियम, 1984 ( 1984 का 52) के अधीन रजिस्ट्रीकृत पशु-चिकित्सा व्यवसायी के रूप में रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन प्रेषिति, सचिव, रजिस्ट्रार, रजिस्ट्रीकरण अधिकरण, ... और/या राजस्थान राज्य राजस्थान राज्य, पशु-चिकित्सा परिषद जयपुर। जयपुर। महोदय, में अनुरोध करता हूँ कि मेरा नाम, पता, अरहताएं और इसके नीचे दी गयी अन्य विशिष्टियां भारतीय पशु-चिकित्सा परिषद् अधिनियम, 1984 ( 1984 का 52) के अधीन आपके द्वारा रखे जाने वाले / रखे जा रहे राजस्थान राज्य पशु चिकित्सा रजिस्टर में रजिस्ट्रीकृत की जाये और कि मुझे ऐसे रजिस्ट्रीकरण का प्रमाण-पत्र सम्यक् अनुक्रम में जारी किया जाये | 2. मैं अपनी अर्हताओं के समर्थन में अपनी मूल डिग्रियां/डिप्लोगे आपके सत्यापन के लिए इसके साथ संलग्न कर रहा हूं और अनुरोध करता हूँ कि उन्हें, उद्देश्य पूरा हो जाने पर मुझे लौटा दें। मैं आपके अभिलेख के लिए उनकी अनुप्रमाणित प्रतियां भी संलग्न कर रहा हूँ | 3. 25.00 रुपये (पच्चीस रुपये) की विहित रजिस्ट्रीकरण फीस भी डिमाण्ड ड्राफ्ट /भारतीय पोस्टल आर्डर द्वारा, जिसकी सं. और तारीख है और जो रेखांकित है और जयपुर में आपको संदेय है, इसके साथ भेजी जा रही है. 4.मेरी ऊपर निर्दिष्ट विशिष्टियां निम्नानुसार हैं:- (क) पूरा नाम ( मोटे अक्षरों में) ... (ख) जन्म का स्थान और तारी (ग) राष्ट्रीयता (घ) निवास का पता () व्यवसायिक पता (च) स्थायी पता (छ) पशु-चिकित्सा अहताएं आता उत्तीर्ण करने की तारीख और वर्ष संस्था या विश्वविद्यालय (ज) अन्य शैक्षिक अर्हताएं, यदि कोई हों:- (झ) वर्तमान उपजीविका:- (क) सरकारी सेवा (ख) प्राइवेट व्यवसाय (ग) सेवानिवृत्त व्यक्ति (अ) अन्य कोई सुसंगत सूचना 5. मैं प्रतिज्ञान करता हूं कि ऊपर दी गयीं सभी विशिष्टियां सही हैं । भवदीय तारीख I (आवेदक के हस्ताक्षर) प्ररूप-10 (नियम 10 (3) देखिये) राजस्थान पशु चिकित्सा परिषद् रजिस्ट्रीकरण प्रमाण-पत्र प्रमाणित किया जाता है कि डॉ. निवासी: .को रजिस्ट्रीकृत पशु-चिकित्सा व्यवसायी के रूप में सम्यक् रूप से रजिस्ट्रीकृ त कर लिया है और वे भारतीय पशु चिकित्सा परिषद् अधिनियम, 1984 (1984 का 52) के अधीन o0 व्यव- साथियों को दिये गये सभी विशेषाधिकारों के हकदार हैं, यह रजिस्ट्रीकरण उक्त अधिनियम के अधीन राजस्थान राज्य पशु-चिकित्सा परिषद् द्वारा किया गया है | जिसके साक्ष्यस्वरूप इस पर राजस्थान राज्य पशु-चिकित्सा परिषद् की मुद्रा लगायी जाती है और उक्त राज्य परिषद् के रजिस्ट्रार के हस्ताक्षर किये जाते हैं। (पुद्रा) (रजिस्ट्रार के हस्ताक्षर) (यह प्रमाण-पत्र भारतीय पशु चिकित्सा परिषद् अधिनियम, 1984 (1984 का 52) की धारा 32 के अधीन स्थापित राजस्थान राज्य पशु चिकित्सा परिषद् की सम्पत्ति है और ऊपर उल्लिखित रजिस्ट्रीकृत व्यवसायी को राजस्थान राज्य पशु चिकित्सा परिषद् नियम, 1988 के नियम 10 (3) के अधीन जारी किया जाता है 1) प्ररूप- 11 (नियम 14 (1) देखिये) रजिस्ट्रीकृत पशु-चिकित्सा व्यवसायी के नाम के एक राज्य से ट्रसरे राज्य में अन्तरण .के लिए आवेदन प्रेषिति, सचिव, भारतीय पशु चिकित्सा परिषद् | . का निवासी हूँ और इस पशु चिकित्सा आर्युविज्ञान में हूँ रजिस्ट्रीकृत पशु-चिकित्सा व्यवसायी हूँ जिसका नाम और अन्य विशिष्टियां भारतीय पशु चिकित्सा परिषद् अधिनियम, 1984 ( 1984 का 52 ) के अधीन की राजस्थान राज्य पशु चिकित्सा परिषद् में रजिस्ट्रीकृत है उक्त राज्य के पशु-चिकित्सा रजिस्टर. में मेरा रजिस्ट्रीकृत संख्यांक है और वह उक्त रजिस्टर /उसकी अनुपूर्ति के पृष्ठ सं. .. (वर्ष सहित) पर है । 2. चूंकि मैं अपना नाम और विशिष्टयां उपर्युक्त रजिस्टर से के राज्य पशु-चिकित्सा रजिस्टर में अन्तरित करवाने का इच्छुक हूँ जहां पर मैं इन दिनों पशु चिकित्सा. आयुर्विज्ञान में व्यवसाय कर रहा हूँ । इसलिए मैं अनुरोध करता हूँ कि राजस्थान और की राज्य पशु चिकित्सा परिषदों को इस आशय के निदेश जारी किये जायें कि मेरा नाम और विशिष्टियां राजस्थान राज्य पशु-चिकित्सा रजिस्टर से हटा दी जायें और राज्य पशु चिकित्सा रजिस्टर में प्रविष्ट की जायें | रुपये की विहित फिस (जो कि दूसरे राज्य में रजिस्ट्रीकरण की नवीनीकरण फीस के बराबर है जैसा कि अधिनियम की धारा 52 के अधीन उपबंधित है) का डिमाण्ड ड्राफ्ट / भारतीय पोस्टल आर्डर सं. दिनांक द्वारा की रेखांकित है और उपर्युक्त G राज्य की परिषद् के रजिस्ट्रार को संदेय है, इसके साथ भेजी जा रही है । स्थान o भवदीय तारीख o (आवेदक के हस्ताक्षर ) प्ररूप- 12 (नियम 15 देखिये) रजिस्ट्रीकरण प्रमाण-पत्र की दूसरी प्रति/रजिस्ट्रीकरण का नवीकरण रजिस्ट्रीकरण प्रमाण-पत्र की दूसरी प्रति या रजिस्ट्रीकरण का नवीकरण उसी रीति से होगा जिससे मूल प्रमाण-पत्र होता है, परन्तु शब्द दूसरी प्रति, उक्त प्रमाण-पत्र के दाहिने हाथ के शीर्ष कोने पर लाल स्याही से मुद्रित किया जायेगा | (सं. एफ. 2 (64) एग्री/ग्र. ए - 6/87/एक्ट्स) राज्यपाल के आदेश से, उप शासन सचिव, कृषि (युप- 6) विभाग। किसी भी विवाद की स्थिति में अंग्रेजी संस्करण मान्य होगाOpen official source version ↗
About this act
- Jurisdiction
- Rajasthan
- Enactment date
- 1984-08-18
- Sections available
- 67
Commencement information from the source
18-08-1984
Read the sections
India Code, Government of India. Text fetched 17 Oct 2026. Source metadata reports last modification: 2025-06-02. Check the linked official text and subsequent notifications when applying a provision.