Central · Act 26 of 1994

The Manipur Panchayati Raj Act, 1994

An Act to provide for the constitution and organisation of Panchayats as units of local self-Government in the rural areas of Manipur and for matters connected therewith and incidental thereto.

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मणिपुर पंचायती राज अणिणियम, 1994 

(1994 का अणिणियम सखं याकं 26) 

[23 अप्रैल, 1994]  

मणिपरु के ग्रामीि क्षते्रों में स् थािीय स् वशासि 

की इकाई के रूप में पचंायतों के गठि और  

सगंठि के णलए तथा उसस ेसंबणंित  

और उसके आिषुणंगक णवषयों  

का उपबंि करि ेके णलए 

 अणिणियम  

 यह समीचीि ह ैकक जिता की और अणिक सहभागीदारी तथा ग्रामीि णवकास काययक्रमों के अणिक प्रभावी रूप से कायायन् वयि 

के णलए पंचायतों से संबंणित सांणविाणिक उपबंिों के अिुसार मणिपुर में दो स् तरीय पंचायती राज प्रिाली स् थाणपत करिे के णलए 

णजसमें ग्राम और णजला स् तरों पर णिवायणचत णिकाय होंगे, व् यापक अणिणियणमणत द्वारा राज् य के ग्रामीि क्षेत्रों में पंचायतों का पुिगयठि 

ककया जाए ।  

 भारत गिराज् य के पैंतालीसवें वषय में संसद ्द्वारा णिम् िणलणित रूप में यह अणिणियणमत हो :––  

अध् याय 1 

प्रारंणभक 

1. सणंक्षप् त िाम, णवस् तार और प्रारंभ––(1) इस अणिणियम का संणक्षप् त िाम मणिपुर पंचायती राज अणिणियम, 1994 ह ै।   

(2) इसका णवस् तार ऐसे ककसी क्षेत्र के णसवाय संपूिय मणिपुर पर ह,ै णजस पर मणिपुर (पहाडी क्षेत्र) णजला पररषद ्अणिणियम, 

1971 (1971 का 76)  या मणिपुर (पहाडी क्षेत्र ग्राम प्राणिकारी) अणिणियम, 1956 (1956 का 80) का णवस् तार होता है या जो तत् समय 

प्रवृत्त ककसी णवणि के अिीि ककसी िगरपाणलका के रूप में घोणषत या उसमें सणम् मणलत ककया गया ह ैया इसके पश् चात् घोणषत या उसमें 

सणम् मणलत ककया जाए, या जो छाविी अणिणियम, 1924 (1924 का 2) के अिीि छाविी के रूप में घोणषत या उसमें सणम् मणलत ककया 

गया ह ैया इसके पश् चात् घोणषत या उसमें सणम् मणलत ककया जाए ।   

(3) यह उस तारीि को प्रवृत्त होगा जो सरकार, राजपत्र में अणिसूचिा द्वारा, णियत करे ; और इस अणिणियम के णभन् ि-णभन् ि 

उपबंिों के णलए णभन् ि-णभन् ि तारीिें णियत की जा सकें गी ।   

2. पररभाषाएं––इस अणिणियम में, जब तक कक संदभय से अन् यथा अपेणक्षत ि हो,–– 

(क) “अध् यक्ष” और “उपाध् यक्ष” से इस अणिणियम की िारा 54 के अिीि णिवायणचत णजला पररषद ्का अध् यक्ष और 

उपाध् यक्ष अणभप्रेत ह ै;   

(ि) “सभापणत” से इस अणिणियम के उपबंिों के अिीि गरठत, यथाणस् थणत, णजला पररषद ्या ग्राम पंचायत की 

स् थायी सणमणत का सभापणत अणभप्रेत ह ै;   

(ग) “मुख य काययपालक अणिकारी” से इस अणिणियम की िारा 75 के अिीि णियुक् त ककसी णजला पररषद ्का मुख य 

काययपालक अणिकारी अणभप्रेत ह ै;   

(घ) “आयुक् त” से णवकास और पंचायती राज में सरकार का आयुक् त या ऐसा अन् य व् यणक् त अणभप्रेत ह ैजो इस 

अणिणियम के अिीि आयुक् त की शणक् तयों का प्रयोग करिे के णलए राज् य सरकार द्वारा णियुक् त ककया जाए ;  

(ङ) “णजला” से राजस् व णजला अणभप्रेत ह ै;  

(च) “उपायुक् त” से ककसी णजले का उपायुक् त अणभप्रेत ह ै;  

(छ) “सरकार” से मणिपुर की राज् य सरकार अणभप्रेत ह ै;  

(ज) “ग्राम सभा” से ग्राम स् तर पर पंचायत-क्षेत्र के भीतर समाणवष् ट ककसी ग्राम स ेसंबंणित णिवायचक िामावली में 

रणजस् रीकृत व् यणक् तयों से णमलकर बिा णिकाय अणभप्रेत ह ै;  

(झ) “ग्राम पंचायत” से इस अणिणियम के अिीि गरठत ग्राम पंचायत अणभप्रेत ह ै;  

(ञ) “राजपत्र” से मणिपुर राजपत्र अणभप्रेत ह ै; 

(ट) “पंचायत” से इस अणिणियम के उपबंिों के अिीि गरठत ग्राम पंचायत और णजला पररषद ्अणभप्रेत ह ै;  



 2 

(ठ) “पंचायत क्षेत्र” से पंचायत का प्रादणेशक क्षेत्र अणभप्रेत ह ै;   

(ड) “जिसंख या” से ऐसी अणंतम पवूयवती जिगििा में अणभणिणश् चत की गई जिसंख या अणभप्रेत ह ैणजसके सुसंगत 

आंकडे प्रकाणशत हो गए हैं ;   

(ढ) “प्रिाि” से इस अणिणियम की िारा 21 के अिीि णिवायणचत ककसी ग्राम पंचायत का प्रिाि अणभप्रेत ह ै;  

(ि) “णवणहत” से इस अणिणियम के अिीि बिाए गए णियमों द्वारा णवणहत अणभप्रेत ह ै;  

(त) “सणचव” से इस अणिणियम के अिीि णियुक् त ककसी ग्राम पंचायत का सणचव अणभप्रेत ह ै;  

(थ) “स् थायी सणमणत” से इस अणिणियम के अिीि ककसी णजला पररषद ्या ककसी ग्राम पंचायत द्वारा गरठत कोई 

स् थायी सणमणत अणभप्रेत ह ै;  

(द) “उप-प्रिाि” से इस अणिणियम की िारा 24 के अिीि णिवायणचत ककसी ग्राम पंचायत का उप-प्रिाि              

अणभप्रेत ह ै;  

(ि) “ग्राम” से राज् यपाल द्वारा इस अणिणियम के प्रयोजि के णलए, लोक अणिसूचिा द्वारा ग्राम के रूप में, 

णवणिर्दयष् ट ग्राम अणभप्रेत ह ैऔर इसके अंतगयत इस प्रकार णवणिर्दयष् ट ग्रामों का समूह भी ह ै; और  

(ि) “णजला पररषद”् से इस अणिणियम की िारा 48 के अिीि गरठत ककसी णजले की णजला पररषद ्अणभप्रेत ह ै।   

अध् याय 2 

ग्राम सभा 

3. ग्राम सभा की सदस् यता और णिरहयता––(1) ग्राम सभा में, उपिारा (2) के अिीि रहते हुए, वे सभी व् यणक् त होंगे, णजिके 

िाम ग्राम सभा क्षेत्र के भीतर िारा 15 में णिर्दयष् ट णिवायचक िामावली में सणम् मणलत हैं :  

परन् तु कोई भी व् यणक् त एक से अणिक ग्राम सभा का सदस् य िहीं होगा ।  

(2) कोई व् यणक् त ग्राम सभा का सदस् य होिे के णलए णिरर्हयत होगा,–– 

(क) यकद वह भारत का िागररक िहीं ह ै; या  

(ि) यकद वह णवकृतणचत का ह ैऔर सक्षम न् यायालय की ऐसी घोषिा णवद्यमाि ह ै; या   

(ग) यकद वह राज् य णविाि-मंडल के णिवायचि के संबंि में भ्रष् ट आचरिों और अन् य अपरािों से संबंणित ककसी णवणि 

के उपबंिों के अिीि मत दिेे से तत् समय णिरर्हयत कर कदया जाता ह ै।  

4. सदस् यता की समाणप् त––(1) ग्राम सभा का कोई सदस् य, सदस् य िहीं रहगेा, यकद वह ग्राम सभा क्षेत्र के भीतर मामूली तौर 

से णिवासी िहीं रह गया ह ै। 

(2) जहां कोई व् यणक् त उपिारा (1) के अिीि ककसी ग्राम सभा का सदस् य िहीं रह जाता है वहां उसका ककसी ऐसे पद को 

िारि करिा भी समाप् त हो जाएगा णजसके णलए उसके उस ग्राम सभा का सदस् य होिे के आिार पर उसे णिवायणचत या णियुक् त ककया 

गया होता ।   

5. अणिवशेिों की काणलकता––ग्राम सभा का अणिवेशि समय-समय पर होगा ककन् तु ककन् हीं दो अवणिवेशिों के बीच छह 

मास का अंतर िहीं होगा ।  

6. अणिवशेि बुलािा––ग्राम सभा का अणिवेशि उस प्रकक्रया के अिुसार, जो णवणहत की जाए, आयोणजत ककया जाएगा ।  

7. गिपरू्तय––(1) ग्राम सभा के अणिवेशि के णलए गिपूर्तय उसकी कुल सदस् यता का दसवां भाग होगी ।  

(2) यकद अणिवेशि के णलए णियत समय पर गिपूर्तय उपणस् थत िहीं ह ैतो पीठासीि व् यणक् त तीस णमिट तक प्रतीक्षा करेगा 

और यकद उस अवणि के भीतर गिपूर्तय िहीं होती ह ैतो पीठासीि व् यणक् त उस अणिवेशि को आगामी सप् ताह में उसी कदि और उसी 

समय के णलए स् थणगत करेगा । इसी प्रकार, यकद अणिवेशि आरम् भ होिे के पश् चात्, ककसी समय गिपूर्तय की कमी की ओर ध् याि 

आकर्षयत ककया जाता ह े तो वह तीस णमिट तक प्रतीक्षा करिे के पश् चात् अणिवेशि स् थणगत करेगा । इस प्रकार णियत ककए गए 

अणिवेशि की सूचिा ग्राम पंचायत के कायायलय में लगाई जाएगी । ऐसे कारबार को, णजस पर गिपूर्तय के अभाव में इस प्रकार मुल् तवी 

अणिवेशि में णवचार िहीं ककया जा सका था, इस प्रकार णियत अणिवेशि या ककसी पश् चातवती स् थणगत ऐसे अणिवेशि के, णजसमें 

गिपूर्तय हो, समक्ष लाया जाएगा और उसका णिपटारा ककया जाएगा ।  

8. ग्राम सभा का अणिवशेि––ग्राम सभा का प्रत् येक अणिवेशि सम् बद्ध ग्राम पंचायत के प्रिाि की अध् यक्षता में और उसकी 

अिुपणस् थणत में उप-प्रिाि की अध् यक्षता में तथा दोिों की अिुपणस् थणत में ग्राम पंचायत के ऐसे सदस् य की अध् यक्षता में होगा जो पंचायत 

के सदस् यों में से चुिा जाएगा ।  



 3 

9. काययसचूी––ग्राम पंचायत, ग्राम सभा के णवचार-णवमशय के णलए काययसूची तैयार करेगी । ऐसे णवषय णिम् िणलणित स े

संबंणित होंगे, अथायत् :–– 

(क) ग्राम पंचायत के लेिाओं का वार्षयक णववरि, पूवयवती णवत्तीय वषय के णलए प्रशासि की ररपोटय और अंणतम 

लेिा-परीक्षा रटप् पि और उसके कदए गए उत्तर, यकद कोई हों ;   

(ि) अगले णवत्तीय वषय के णलए ग्राम पंचायत का बजट ; और   

(ग) पूवयवती वषय से संबंणित ग्राम पंचायत के णवकास काययक्रमों और चालू वषय के दौराि ककए जािे वाले प्रस् ताणवत 

णवकास काययक्रमों की बाबत ररपोटय ।   

10. संकल् प––िारा 11 के अिीि ग्राम सभा को सौंपे गए कृत् यों से संबंणित कोई संकल् प, ग्राम सभा के अणिवेशि में उपणस् थत 

और मतदाि करिे वाले सदस् यों के बहुमत से पाररत ककया जाएगा ।   

11. ग्राम सभा के कृत् य––ग्राम सभा णिम् िणलणित कृत् य करेगी, अथायत् :–– 

(क) ग्राम की बाबत णवकास स् कीमों के कायायन् वयि में सहायता प्रदाि करिा ;  

(ि) ग्राम की बाबत णवकास स् कीमों के कायायन् वयि के णलए णहताणिकाररयों की पहचाि करिा :  

परन् तु यकद ग्राम सभा युणक् तयुक् त समय के भीतर णहताणिकाररयों की पहचाि करिे में असफल रहती ह ैतो ग्राम 

पंचायत णहताणिकाररयों की पहचाि कर सकती है ;   

(ग) सामुदाणयक कल् याि काययक्रमों के णलए स् वैण‍ छक श्रम संचाररत करिा और वस् तु रूप में या िकद अथवा दोिों 

में अणभदाय करिा ;  

(घ) ग्राम के भीतर प्रौढ़ णशक्षा और पररवार कल् याि का संवियि करिा ;   

(ङ) ग्राम में समाज के सभी वगों के बीच एकता और सामंजस् य का संवियि करिा ;   

(च) ऐसे अन् य णवषय, जो णवणहत ककए जाएं ।   

12. सतकय ता सणमणत––ग्राम सभा, ग्राम पंचायत के कायों, स् कीमों और अन् य कक्रयाकलापों के पययवेक्षि के णलए तथा इसकी 

बैठक में इससे संबंणित ररपोटय प्रस् तुत करिे के णलए एक या अणिक सतकय ता सणमणतयां बिा सकेगी जो ऐसे व् यणक् तयों से णमलकर बिेगी 

जो ग्राम पंचायत के सदस् य ि हों ।  

अध् याय 3 

ग्राम पचंायत 

13. ग्राम पचंायत का गठि––(1) प्रत् येक ग्राम सभा के णलए एक ग्राम पंचायत का गठि ककया जाएगा ।   

(2) उपिारा (1) के अिीि गरठत ग्राम पंचायत को राजपत्र में अणिसूणचत ककया जाएगा और वह इसके प्रथम अणिवेशि की 

तारीि से गरठत हुई समझी जाएगी ।  

(3) प्रत् येक व् यणक् त, ग्राम पंचायत के णिवायचकों की सूची में सणम् मणलत ककए जािे के णलए हकदार होगा यकद वह उपिारा (1) 

के अिीि इसके प्रकाशि की तारीि को 18 वषय से कम आयु का िहीं ह ैऔर ग्राम पंचायत के क्षेत्र के भीतर मामूली तौर से णिवासी ह ै: 

परन् तु कोई भी व् यणक् त, एक ग्राम पंचायत से अणिक ककसी ग्राम पंचायत के णिवायचकों की सूची में सणम् मणलत ककए जािे के 

णलए हकदार िहीं होगा और कोई भी व् यणक् त ककसी ग्राम पंचायत की णिवायचक िामावली में एक से अणिक बार सणम् मणलत ककए जािे के 

णलए हकदार िहीं होगा :  

परन् तु यह और कक यकद आवेदक ककसी अन् य ग्राम पंचायत की णिवायचक िामावली में सणम् मणलत ककया गया ह ैतो उसका िाम 

सणम् मणलत करिे वाला अणिकारी, उस अन् य ग्राम पंचायत की णिवायचक िामावली प्रकाणशत करिे वाले अणिकारी को इसकी सूचिा देगा 

और वह अन् य अणिकारी सूचिा प्राप् त करिे पर उस सूची से आवेदक का िाम काट दगेा ।   

स् पष् टीकरि––इस उपिारा के प्रयोजि के णलए “मामूली तौर से णिवासी” पद का वही अथय होगा जो लोक प्रणतणिणित् व 

अणिणियम, 1950 (1950 का 43) की िारा 20 में ह ै।  

(4) णिवायचकों की सूची में सणम् मणलत ककसी ऐसे व् यणक् त के िाम को, जो सूची में उसका िाम प्रणवष् ट ककए जािे के पश् चात ्

ककसी समय णिरर्हयत हो जाता ह,ै ऐसी सूची से णजसमें वह सणम् मणलत ह,ै तुरन् त काट कदया जाएगा :  

परन् तु िारा 3 की उपिारा (2) के िंड (ग) के अिीि ककसी णिरहयता के कारि णिवायचक िामावली से काटे गए ककसी व् यणक् त 

के िाम को, सूची में तुरन् त पुि:स् थाणपत कर कदया जाएगा, यकद ऐसा व् यणक् त णिरहयक िहीं रहा ह ै।   



 4 

(5) उपिारा (2) और उपिारा (4) के अिीि पाररत ककसी आदशे के णवरुद्ध कोई अपील, ऐसे समय के भीतर और ऐसी रीणत 

में तथा ऐसे प्राणिकारी को की जाएगी, जो णवणहत ककया जाए ।   

14. ग्राम पचंायत का णिगमि––प्रत् येक ग्राम पंचायत िारा 13 के अिीि राजपत्र में अणिसूणचत िाम से शाश् वत उत्तराणिकार 

और सामान् य मुद्रा वाली णिगणमत णिकाय होगी, णजसे संपणत्त को अर्जयत करिे, िारि करिे और उसका व् ययि करिे की, और संणवदा 

करिे की शणक् त होगी और वह उक् त िाम से वाद लाएगी और उसके णवरुद्ध वादा लाया जाएगा ।  

15. ग्राम पचंायत की णिवायचक िामावली––लोक प्रणतणिणित् व अणिणियम, 1950 (1950 का 43) के उपबंिों के अिीि तैयार 

की गई मणिपुर णविाि सभा की णिवायचक िामावली जो ऐसी तारीि को प्रवृत्त ह,ै णजसे राज् य सरकार णविाि सभा के णिवायचि क्षेत्र के 

ऐसे भाग के णलए जो ग्राम सभा में सणम् मणलत ह,ै इस णिणमत्त सािारि या णवशेष आदशे द्वारा सूणचत करे, ऐसी ग्राम पंचायत के णलए 

णिवायचकों की सूची होगी ।   

16. ग्राम पचंायत की णिवायचक िामावली का प्रकाशि––(1) िारा 15 णिर्दयष् ट मतदाताओं की सूची उस रीणत में और ऐस े

प्राणिकार से, जो णवणहत ककया जाए, प्रकाणशत की जाएगी ।   

(2) कोई व् यणक् त, णजसका िाम उपिारा (1) के अिीि प्रकाणशत णिवायचकों की सूची में सणम् मणलत िहीं ह,ै इसके प्रकाशि से 

दस कदि के भीतर उसमें अपिे िाम को सणम् मणलत ककए जािे के णलए उसे प्रकाणशत करिे वाले अणिकारी को आवेदि कर सकेगा और 

संबंणित अणिकारी, यकद ऐसी जाचं करिे के पश् चात्, जो णवणहत की जाए, उसका यह समािाि हो जाता ह ैकक आवेदक उपिारा (3) में 

उणल् लणित शतों को पूरा करता है और िारा 15 के अिीि णिवायचकों की सूची में सणम् मणलत ककए जािे से णिरर्हयत िहीं ह ैतो उसका 

िाम णिवायचकों की सूची में सणम् मणलत ककए जािे का णिदशे करेगा ।    

17. ग्रमा पंचायत की संरचिा––ग्राम पंचायत में प्रिाि और उतिे प्रत् यक्ष रूप से णिवार्चयत सदस् य होंगे जो राज् य सरकार 

द्वारा समय-समय पर अणिसूणचत ककए जाएं और पंचायत क्षेत्र की प्रत् येक 350 की जिसंख या या उसके भाग के णलए एक सदस् य ऐसी 

पंचायत के सदस् य के रूप में णिवायणचत ककया जाएगा ।   

18. ग्राम सभा का प्रादणेशक णिवायचि क्षते्रों में णवभाजि––(1) उपायकु् त णिवायचि के संचालि के णलए––  

(i) ग्राम सभा क्षेत्र को प्रादणेशक णिवायचि क्षेत्रों में ऐसी रीणत से णवभाणजत करेगा कक प्रत् येक णिवायचि-क्षेत्र की 

जिसंख या का उसको आबंरटत स् थािों की संख या के बीच अिुपात समस् त ग्राम सभा क्षेत्र में यथासाध् य एक ही हो ;  

(ii) प्रत् येक णिवायचि क्षेत्र को आबंरटत स् थािों की संख या अविाररत करेगा ।  

(2) ग्राम पंचायत के णलए प्रत् येक प्रादणेशक णिवायचि-क्षेत्र से प्रत् यक्ष णिवायचि द्वारा एक सदस् य णिवायणचत ककया जाएगा ।   

19. स् थािों का आरक्षि––(1) प्रत् यके ग्राम पंचायत में अिुसणूचत जाणतयों और अिुसणूचत जिजाणतयों के णलए स् थाि आरणक्षत 

होंगे, और इस प्रकार आरणक्षत स् थािों की संख या का अिुपात, उस पंचायत में प्रत् यक्ष णिवायचि द्वारा भरे जािे वाले स् थािों की कुल संख या 

से यथाशक् य वही होगा जो उस पंचायत क्षेत्र में अिुसणूचत जाणतयों की अथवा अिुसूणचत जिजाणतयों की जिसंख या का अिुपात उस 

क्षेत्र की कुल जिसंख या से ह ैऔर ऐसे स् थाि ऐसी ग्राम पंचायत में णभन् ि-णभन् ि णिवायचि क्षेत्रों को चक्रािुक्रम से ऐसी रीणत से आबंरटत 

ककए जा सकें गे जो णवणहत की जाए ।  

(2) उपिारा (1) के अिीि आरणक्षत स् थािों की कुल संख या के कम से से कम एक णतहाई स् थाि, यथाणस् थणत, अिुसूणचत 

जाणतयों या अिुसूणचत जिजाणतयों की णस् त्रयों के णलए आरणक्षत रहेंगे ।   

(3) प्रत् येक ग्राम पंचायत में प्रत् यक्ष णिवायचि द्वारा भरे जािे वाले स् थािों की कुल संख या के कम से कम एक णतहाई स् थाि 

(णजिके अन् तगयत अिुसूणचत जाणतयों और अिुसूणचत जिजाणतयों की णस् त्रयों के णलए आरणक्षत स् थािों की संख या भी ह)ै, णस् त्रयों के णलए 

आरणक्षत रहेंगे और ऐसे स् थाि, ककसी ग्राम पंचायत में णभन् ि-णभन् ि णिवायचि क्षेत्र को चकािुक्रम में ऐसी रीणत में आबंरटत ककए जा सकें गे 

जो णवणहत की जाए ।   

20. ग्राम पंचायत की अवणि––(1) प्रत् येक ग्राम पंचायत अपिे प्रथम अणिवेशि के णलए णियत तारीि से पांच वषय की अवणि 

के णलए बिी रहगेी, इससे अणिक िहीं :  

परन् तु ऐसी ग्राम पंचायत जो इस अणिणियम के प्रारम् भ के ठीक पूवय कायय कर रही ह,ै अपिी अवणि की समाणप् त तक बिी 

रहगेी ।  

(2) ककसी ग्राम पंचायत का गठि करिे के णलए णिवायचि :–– 

(क) उपिारा (1) में णवणिर्दयष् ट उसकी अवणि की समाणप् त से पूवय ; और   

(ि) णवघटि की दशा में, णवघटि की तारीि से छह मास की अवणि की समाणप् त से पूवय,  

पूरा ककया जाएगा :  



 5 

 परन् तु जहां वह शेष अवणि णजसके णलए कोई णवघरटत ग्राम पंचायत बिी रहती, छह मास से कम ह,ै वहां ऐसी अवणि के णलए 

उस ग्राम पंचायत का गठि करिे के णलए इस िंड के अिीि कोई णिवायचि करािा आवश् यक िहीं होगा ।   

(3) ककसी ग्राम पंचायत की अवणि की समाणप् त से पूवय उस ग्राम पंचायत के णवघटि पर गरठत की गई ग्राम पंचायत केवल उस 

अवणि के शेष भाग के णलए बिी रहगेी, णजसके णलए णवघरटत ग्राम पंचायत उपिारा (1) के अिीि बिी रहती यकद वह इस प्रकार 

णवघरटत िहीं की जाती ।   

21. ग्राम पंचायत के प्रिाि और सदस् यों का णिवायचि––ग्राम पंचायत का प्रिाि और सदस् य, ग्राम सभा के सदस् यों द्वारा अपिे 

में से गुप् त मतदाि के अिीि प्रत् यक्ष णिवायचि द्वारा उस रीणत में, जो णवणहत की जाए, णिवायणचत ककए जाएंगे ।  

22. ग्राम पंचायत के सदस् यों को णिवायणचत करि ेमें असफल रहि ेपर और अन् य दशाओं में प्रशासणिक सणमणत या प्रशासक की 

णियणुक् त––(1) (क) यकद उपायुक् त का यह समािाि हो जाता ह ैकक ककसी ग्राम या ग्रामों के समूह के णलए ग्राम पंचायत का गठि उक् त 

ग्राम पंचायत की स् थापिा के तुरन् त पश् चात् णिम् िणलणित कारिों से िहीं ककया जा सकता ह ै:–– 

(i) ग्राम पंचायत के सदस् यों का णिवायचि करािे में कोई करठिाई ; या  

(ii) िारा 17 के अिीि हुए दो आिुक्रणमक णिवायचिों में उक् त सदस् यों का णिवायचि करिे में असफल होिा ; या   

(iii) कोई अन् य पयायप् त कारि, चाह ेजो भी हो ।   

(ि) यकद ककसी ग्राम पंचायत के ककसी सािारि णिवायचि पर कोई सदस् य णिवायणचत िहीं होता ह ैया कुल सदस् य संख या के दो 

णतहाई से कम सदस् य णिवायणचत होते हैं,  

तो उपायुक् त अणिसूचिा द्वारा या तो,–– 

(i) एक प्रशासणिक सणमणत णियुक् त करेगा, जो णिवायणचत होिे के णलए अर्हयत व् यणक् तयों से णमलकर बिेगी, णजसमें 

उक् त व् यणक् तयों की संख या िारा 17 के अिीि अविाररत सदस् यों की संख या के बराबर होगी ; या    

(ii) कोई प्रशासक णियुक् त करेगा ।   

(2) प्रशासणिक सणमणत के सदस् य या प्रशासक ऐसी अवि के णलए जो छह मास से अणिक की िहीं होगी, पद िारि करेगा, जो 

उपायुक् त उपिारा (1) के अिीि अणिसूचिा में णवणिर्दयष् ट करे ।  

(3) उपिारा (1) के अिीि ककसी प्रशासणिक सणमणत या ककसी प्रशासक की णियुणक् त पर, ऐसी णियुणक् त से पूवय ग्राम पंचायत 

के सदस् यों के रूप में चयि ककए गए व् यणक् त, यकद कोई हों, ग्राम पंचायत के सदस् य िहीं रहेंगे और ग्राम पंचायत की सभी शणक् तयों का 

प्रयोग और कतयव् यों का पालि ऐसी प्रशासणिक सणमणत या प्रशासक द्वारा ककया जाएगा ।   

(4) पूवयगामी उपबंिों में अंतर्वयष् ट ककसी बात के होते हुए भी प्रशासणिक सणमणत या प्रशासक इस अणिणियम के प्रयोजि के 

णलए सम् यक् रूप से गरठत ग्राम पंचायत समझे जाएंगे :  

परन् तु यकद उपिारा (1) के अिीि प्रशासणिक सणमणत या प्रशासक की णियुणक् त के पश् चात् ककसी समय उपायुक् त का यह 

समािाि हो जाता ह ैकक सदस् यों के णिवायचि द्वारा ग्राम पंचायत का सम् यक् रूप से गठि करिे में कोई करठिाई िहीं ह ैतो उपायुक् त, 

इस बात के होते हुए भी कक उस पद की वह अवणि समाप् त िहीं हुई है णजसके णलए प्रशासणिक सणमणत के सदस् यों या प्रशासक की 

णियुणक् त की गई थी, अणिसूचिा द्वारा यह णिदशे दे सकेगा कक, यथाणस् थणत, प्रशासणिक सणमणत के सदस् य या प्रशासक, ऐसी तारीि से, 

जो उस अणिसूचिा में णवणिर्दयष् ट की जाए, पद िारि िहीं करेंगे ।  

23. प्रिाि और सदस् य के पद में आकणस् मक ररणक् त का भरा जािा––(1) ककसी ग्राम पंचायत के प्रिाि या सदस् य के पद में 

मृत् यु, त् यागपत्र, हटाए जािे के कारि या अन् यथा होिे वाली ककसी ररणक् त की दशा में, ररणक् त को णवणहत रीणत में णिवायचि द्वारा भरा 

जाएगा ।  

(2) ककसी आकणस् मक ररणक् त को भरिे के णलए णिवायणचत प्रत् येक प्रिाि और प्रत् येक सदस् य उस व् यणक् त की, णजसके स् थाि पर 

वह इस प्रकार णिवायणचत हुआ है, पदावणि के शेष भाग के णलए पद िारि करेंगे :  

परन् तु यकद ररणक् त छह मास से कम की अवणि के णलए ह,ै तो आकणस् मक ररणक् त को भरिे के णलए कोई णिवायचि िहीं होगा ।   

24. उप-प्रिाि का णिवायचि––(1) प्रत् येक ग्राम पंचायत, यथाशक् यशीघ्र, इसके एक सदस् य को उप-प्रिाि णिवायणचत करेगी ।   

(2) उप-प्रिाि के पद में मृत् यु, त् यागपत्र, हटाए जािे के कारि या अन् यथा होिे वाली ककसी ररणक् त की दशा में ग्राम पंचायत, 

ककसी दसूरे सदस् य को उप-प्रिाि णिवायणचत करेगी :  

परन् तु यकद ररणक् त छह मास के कम अवणि के णलए ह,ै तो कोई णिवायचि िहीं होगा ।  

25. प्रिाि और उप-प्रिाि के णलए स् थािों का आरक्षि––उपायकु् त सरकार के सािारि या णवशेष आदशे के अिीि           

रहते हुए, –– 



 6 

(i) णजले में ग्राम पंचायत के प्रिाि और उप-प्रिाि के पदों की ऐसी संख या अिुसूणचत जाणतयों और अिुसूणचत 

जिजाणतयों के णलए आरणक्षत रिेगा और इस प्रकार आरणक्षत पदों की संख या का अिुपात उस णजले में पदों की कुल संख या से 

यथाशक् य वही होगा जो उस णजले में अिुसूणचत जाणतयों या अिुसूणचत जिजाणतयों की जिसंख या का अिुपात उस णजले की 

कुल जिसंख या से ह ै;  

(ii) णजले में ग्राम पंचायत के, यथाणस् थणत, प्रिाि या उप-प्रिाि के पदों की कुल संख या के कम से कम एक णतहाई 

पद णस् त्रयों के णलए आरणक्षत रहेंगे :  

परन् तु इस िारा के अिीि आरणक्षत पद णभन् ि-णभन् ि ग्राम पंचायतों को चक्रािुक्रम से ऐसी रीणत में आबंरटत ककए 

जाएंगे, जो णवणहत की जाए ।  

26. ग्राम पचंायत स् थाणपत होि ेपर उप-प्रिाि के णिवायचि के णलए प्रकक्रया––इस अणिणियम के अिीि पहली बार, ग्राम 

पंचायत की स् थापिा होि ेपर या िारा 20 के अिीि पुिगयठि या स् थापिा पर, णवणहत अणिकारी द्वारा ग्राम पंचायत का अणिवेशि 

तुरन् त बुलाया जाएगा, जो स् वयं अणिवेशि की अध् यक्षता करेगा, परन् तु उसे मत दिेे का कोई अणिकार िहीं होगा और उक् त अणिवेशि 

में उप-प्रिाि णिवायणचत ककया जाएगा ।  

27. प्रिाि और उप-प्रिाि की पदावणि––(1) ग्राम पंचायत के प्रत् येक प्रिाि और उप-प्रिाि की पदावणि, इस अणिणियम में 

अन् यथा उपबंणित के णसवाय, ग्राम पंचायत की अवणि की समाणप् त पर, समाप् त हो जाएगी ।   

(2) प्रिाि और उप-प्रिाि ऐसे मािदये और भत्तों के हकदार होंगे जो णवणहत ककए जाएं ।  

(3) ग्राम पंचायत का प्रत् येक सदस् य ऐसे मािदये और भते्त प्राप् त करिे का हकदार होगा, जो सरकार द्वारा समय-समय पर 

णियत ककए जाएं ।  

28. प्रिाि और उप-प्रिाि की शणक् तया ंकृत् य और कतयव् य––(1) प्रिाि,––   

(क) ग्राम सभा का अणिवेशि बुलािे के णलए उत्तरदायी होगा और उसके अणिवेशि की अध् यक्षता करेगा ;  

(ि) ग्राम पंचायत का अणिवेशि बुलािे के णलए उत्तरदायी होगा और उसके अणिवेशि की अध् यक्षता करेगा ;  

(ग) ग्राम पंचायत के अणभलेिों के अिुरक्षि के णलए उत्तरदायी होगा ;  

(घ) ग्राम पंचायत के णवत्तीय और काययकारी प्रशासि के णलए सािारि रूप से उत्तरदायी होगा ;   

(ङ) ग्राम पंचायत के कमयचाररवृन् द और ऐसे अणिकाररयों और कमयचाररयों के, णजिकी सेवाएं ककसी अन् य 

प्राणिकारी द्वारा ग्राम पंचायत के अणिकारािीि रिी गई हों, कायय पर प्रशासणिक अिीक्षि और णियंत्रि करेगा ;  

(च) इस अणिणियम से संबंणित कारबार के संव् यवहार के णलए या उसके द्वारा प्राणिकृत कोई आदशे करिे के णलए 

ऐसी शणक् तयों का प्रयोग करेगा, ऐसे कृत् यों का पालि करेगा और ऐसे कतयव् यों का णिवयहि करेगा, जो इस अणिणियम या 

तद ्िीि बिाए गए णियमों के अिीि ग्राम पंचायत द्वारा, प्रयोग, पालि या णिवयहि ककए जाते हों :  

परन् तु प्रिाि ऐसी शणक् तयों का प्रयोग, ऐसे कृत् यों का पालि या ऐसे कतयव् यों का णिवयहि िहीं करेगा णजिका इस 

अणिणियम के अिीि बिाए गए णियमों द्वारा ककसी अणिवेशि में ग्राम पंचायत द्वारा प्रयोग ककया जािा, पालि या णिवयहि 

ककया जािा अपेणक्षत हो ;  

(छ) ऐसे अन् य शणक् तयों का प्रयोग, ऐसे अन् य कृत् यों का पालि और ऐसे अन् य कतयव् यों का णिवयहि करेगा, जो ग्राम 

पंचायत, सािारि या णवशेष संकल् प द्वारा णिदशे द ेया सरकार इस बाबत बिाए गए णियमों द्वारा णवणहत करे ।  

(2) उप-प्रिाि,–– 

(क) प्रिाि की ऐसी शणक् तयों का प्रयोग करेगा, ऐसे कृत् यों का पालि करेगा और ऐसे कतयव् यों का णिवयहि करेगा, जो 

प्रिाि, इस णिणमत्त सरकार द्वारा बिाए गए णियमों के अिीि रहते हुए समय-समय पर णलणित आदशे द्वारा उसे 

प्रत् यायोणजत करे : 

परन् तु प्रिाि उप-प्रिाि को इस प्रकार प्रत् यायोणजत सभी या ककन् हीं शणक् तयों, कृत् यों और कतयव् यों को ककसी भी 

समय वापस ले सकेगा ;  

(ि) प्रिाि की अिुपणस् थणत के दौराि, प्रिाि की सभी शणक् तयों का प्रयोग, सभी कृत् यों का पालि और सभी कतयव् यों 

का णिवयहि करेगा ;   

(ग) ऐसी अन् य शणक् तयों का प्रयोग, ऐसे अन् य कृत् यों का पालि और ऐसे अन् य कतयव् यों का णिवयहि करेगा जो ग्राम 

पंचायत सािारि या णवशेष संकल् प द्वारा, णिदशे द ेया जो सरकार इस णिणमत बिाए गए णियमों द्वारा णवणहत करे ।   

29. प्रिाि और उप-प्रिाि का त् यागपत्र––(1) यथाणस् थणत, प्रिाि और उप-प्रिाि, णवणहत प्राणिकारी को संबोणित अपि े

हस् ताक्षर सणहत लेि द्वारा अपिा पद त् याग सकेगे ।   



 7 

(2) उपिारा (1) के अिीि प्रत् येक त् यागपत्र, णवणहत प्राणिकारी द्वारा इसकी प्राणप् त की तारीि से पन् द्रह कदि की समाणप् त पर 

प्रभावी होगा, जब तक कक वह पन् द्रह कदि की इस अवणि के भीतर णवणहत प्राणिकारी को संबोणित अपिे हस् ताक्षर सणहत लेि द्वारा 

ऐसा त् यागपत्र वापस िहीं ले लेता ।   

(3) प्रत् येक उप-प्रिाि, ग्राम पंचायत का सदस् य ि रहिे पर, पद को ररक् त करेगा । 

30. प्रिाि और उप-प्रिाि के णवरुद्ध अणवश् वास प्रस् ताव––(1) प्रत् यके प्रिाि और उप-प्रिाि द्वारा, यकद उसमें णवश् वास की 

कमी अणभव् यक् त करिे वाला कोई संकल् प, इस प्रयोजि के णलए णवशेष रूप से बुलाए गए अणिवेशि में ग्राम पंचायत के उपणस् थत और 

मत दिेे वाले सदस् यों के कम से कम दो णतहाई बहुमत द्वारा पाररत ककया जाता ह,ै तुरन् त पद ररक् त कर कदया गया समझा जाएगा । 

उक् त णवशेष अणिवेशि के संबंि में अध् यपेक्षा, ग्राम पंचायत के सदस् यों की कुल संख या के कम से कम आिे सदस् यों द्वारा हस् ताक्षररत की 

जाएगी और णवणहत प्राणिकारी को पररदत्त की जाएगी । णवणहत प्राणिकारी अध् यपेक्षा की प्राणप् त की तारीि से सात कदि के भीतर ग्राम 

पंचायत का णवशेष अणिवेशि बुलाएगा । अणिवेशि का आयोजि अणिवेशि की सूचिा जारी करिे की तारीि से पन् द्रह कदि के पश् चात ्

ककसी कदि ककया जाएगा । अणिवेशि की अध् यक्षता णवणहत प्राणिकारी द्वारा की जाएगी । ककसी ग्राम पंचायत के प्रिाि या उप-प्रिाि 

के रूप में उिकी अवणि के प्रारंणभक दो वषों में, उिके णवरुद्ध ऐसा कोई अणवश् वास प्रस् ताव िहीं लाया जाएगा । यकद अणवश् वास का 

प्रस् ताव, एक बार अस् वीकार कर कदया जाता ह ैतो अणवश् वास का कोई िया प्रस् ताव, प्रस् ताव के इस प्रकार अस् वीकार ककए जािे की 

तारीि से एक वषय की अवणि के भीतर ग्राम पंचायत के समक्ष िहीं लाया जाएगा ।   

(2) इस अणिणियम के अिीि उपबंिों पर प्रणतकूल प्रभाव डाले णबिा, कोई प्रिाि और उप-प्रिाि अपिे कतयव् यों के णिवयहि में 

अवचार या अपिे कतयव् यों का पालि करिे में उपेक्षा या असमथयता के णलए या उसके णिवयहि में लगातार असाविाि रहिे या ककसी 

णिकृष् ट आचरि का दोषी होिे पर सरकार द्वारा पर से हटाया जा सकेगा :  

परन् तु ककसी ऐसे प्रिाि या उप-प्रिाि को पद से तब तक हटाया िहीं जाएगा जब तक कक उसे अपिी प्रणतरक्षा करिे के णलए 

युणक् तयुक् त अवसर िहीं कदया गया ह ै।  

(3) उपिारा (2) के अिीि हटाया गया प्रिाि या उप-प्रिाि शेष पदावणि के दौराि प्रिाि या उप-प्रिाि के रूप में 

पुिर्ियवायचि के णलए पात्र िहीं होगा ।   

(4) उपिारा (2) के अिीि उसके पद से हटाया गया प्रिाि या उप-प्रिाि ग्राम पंचायत का सदस् य िहीं रहगेा ।   

31. सदस् यों का त् यागपत्र––ग्राम पंचायत का कोई सदस् य ग्राम पंचायत के प्रिाि को संबोणित अपिे हस् ताक्षर सणहत लेि 

द्वारा अपिी सदस् यता का त् याग कर सकेगा और उसका स् थाि उक् त त् यागपत्र की तारीि से पन् द्रह स् पष् ट कदि की समाणप् त पर ररक् त हो 

जाएगा, जब तक कक पन् द्रह कदि की अवणि के भीतर वह, प्रिाि को संबोणित अपिे हस् ताक्षर सणहत लेि द्वारा, उक् त त् यागपत्र को 

वापस िहीं ले लेता ह ै।  

32. ग्राम पचंायत का अणिवशेि––(1) ग्राम पंचायत का, कारबार के संव् यवहार के णलए ग्राम पंचायत के कायायलय में दो मास 

में कम से कम एक बार और ऐसे समय पर जो प्रिाि अविाररत करे, अणिवेशि होगा ।   

(2) प्रिाि, जब कभी वह उपयुक् त समझे और सदस् यों की कुल संख या के कम से कम एक णतहाई सदस् यों के णलणित अिुरोि 

पर और ऐसे अिुरोि की प्राणप् त से पन् द्रह कदि के भीतर ककसी कदि, णवशेष अणिवेशि बुलाएगा ।  

(3) सणचव द्वारा ककसी सािारि अणिवेशि के संबंि में सात स् पष् ट कदिों की सूचिा और णवशेष अणिवेशि के णलए तीि स् पष् ट 

कदिों की सूचिा णजसमें ऐसे अणिवेशि का स् थाि, तारीि और समय और उसमें संव् यवहार ककए जािे वाले कारबार णवणिर्दयष् ट होंगे, 

सदस् यों और ऐसे अणिकाररयों को दी जाएगी, णजन् हें सरकार णवणहत करे तथा वह ग्राम पंचायत के सूचिा पट्ट पर णचपकाई जाएगी ।  

(4) ऐसे अणिकारी, णजन् हें उपिारा (3) के अिीि सूचिा दी जाती ह ै और ग्राम पंचायत क्षेत्र या उसके ककसी भाग पर 

अणिकाररता रििे वाले अन् य सरकारी अणिकारी ग्राम पंचायत के प्रत् येक अणिवेशि में उपणस् थत होि ेऔर काययवाणहयों में भाग लेिे के 

हकदार होंगे परन् तु मत दिेे के हकदार िहीं होंगे ।   

(5) यकद प्रिाि उपिारा (2) में यथा उपबंणित णवशेष अणिवेशि बुलािे में असफल रहता ह,ै तो उप-प्रिाि या उसकी 

अिुपणस् थणत में सदस् यों की कुल संख या के एक णतहाई सदस् य उसके पश् चात् पन् द्रह कदि से अिणिक में एक कदि के णलए णवशेष अणिवेशि 

बुला सकें गे और सणचव से सदस् यों को सूचिा दिेे और अणिवेशि बुलािे के णलए आवश् यक कारयवाई करिे की अपेक्षा करेंगे ।   

33. काययवतृ्त––(1) ग्राम पंचायत के प्रत् येक अणिवेशि में उपणस् थत सदस् यों और अणिकाररयों, यकद कोई हों, के िामों के संबंि 

में और काययवाणहयों के संबंि में और उस अणिवेशि में ककसी उपणस् थत सदस् य की इ‍ छा पर ककसी संकल् प के क्रमश: पक्ष में या णवरोि में 

मतदाि करिे वाले सदस् य के िामों के संबंि में इस प्रयोजि के णलए उपलब् ि कराई गई पुस् तक में काययवृत्त रिा जाएगा और उन् हें सुिाए 

जािे और उस पर सहमणत के पश् चात् उस पर प्रिाि और उप-प्रिाि या उसकी अिुपणस् थणत में ऐसी सभा की अध् यक्षता करिे वाला 

व् यणक् त हस् ताक्षर करेगा और वह ग्राम पंचायत के ककसी भी सदस् य द्वारा णिरीक्षि ककए जािे के णलए सभी युणक् तयुक् त समयों पर िुला 

रहगेा । कोई भी व् यणक् त अणिवेशि के काययवृत्त की प्रणत का णिरीक्षि कर सकेगा । काययवृत्त पुस् तक, सदवै ग्राम पंचायत के कायायलय में 

रिी जाएगी और वह ग्राम पंचायत के सणचव की अणभरक्षा में रहेगी ।  



 8 

(2) ग्राम पंचायत द्वारा पाररत ककए गए प्रत् येक संकल् प की एक प्रणत अणिवेशि की तारीि से दस कदि के भीतर, सणचव द्वारा 

मुख य काययपालक अणिकारी को अग्रेणषत की जाएगी ।  

34. गिपरू्तय और प्रकक्रया––(1) ग्राम पंचायत के अणिवेशि के णलए गिपूर्तय सदस् यों की कुल संख या की आिी होगी । यकद 

अणिवेशि के णलए णियत समय पर, गिपूर्तय िहीं ह,ै तो पीठासीि प्राणिकारी तीस णमिट तक प्रतीक्षा करेगा और यकद उस अवणि के 

भीतर गिपूर्तय िहीं होती ह ैतो पीठासीि प्राणिकारी, अणिवेशि को अगले कदि या भणवष् य में ऐसे ककसी कदि, ऐसे समय के णलए 

स् थणगत करेगा जो वह णियत करे । यकद ककसी अणिवेशि के आरम् भ होिे के पश् चात् गिपूर्तय की ओर ध् याि आकर्षयत कराया जाता ह ैतो 

वह, इसी प्रकार तीस णमिट तक प्रतीक्षा करिे के पश् चात् अणिवेशि को स् थणगत करेगा । इस प्रकार णियत ककए गए अणिवेशि के संबंि 

में सूचिा ग्राम पंचायत के कायायलय में णचपकाई जाएगी । इस प्रकार मुल् तवी ककए गए अणिवेशि में, ऐसे कारबार को, णजस पर 

गिूपर्तय के अभाव में णवचार िहीं ककया जा सका था, प्रस् तुत ककया जाएगा और उसे इस प्रकार णियत अणिवेशि में या ककसी अन् य 

स् थणगत पश् चात् वती अणिवेशि में, णजसमें गिपूर्तय हो, णिपटाया जाएगा ।   

(2) इस अणिणियम के अिीि या इसके द्वारा अन् यथा उपबंणित के णसवाय ग्राम पंचायत के प्रत् येक अणिवेशि में प्रिाि या 

उसकी अिुपणस् थणत में उप-प्रिाि पीठासीि होगा और दोिों की अिपुणस् थणत में उपणस् थत सदस् य अपि ेमें से ककसी एक को उस अवसर 

पर पीठसीि होिे के णलए णिवायणचत करेंगे ।  

(3) सभी प्रश् िों का णवणिश् चय जब तक कक णवणिर्दयष् ट रूप से अन् यथा उपबंणित ि हो, उपणस् थत और मत दिेे वाले सदस् यों के 

बहुमत द्वारा ककया जाएगा । यथाणस् थणत, प्रिाि या उप-प्रिाि या पीठासीि व् यणक् त जब तक कक वह मत दिेे से णवरत िहीं रहता है 

अपिा मत ककसी प्रश् ि के पक्ष में या णवपक्ष में मतों की संख या की घोषिा करिे से पूवय देगा और मतों के बराबर रहिे की दशा में वह 

अपिा णििाययक मत दगेा ।  

(4) ग्राम पंचायत का कोई सदस् य ग्राम पंचायत के अणिवेशि में णवचार के णलए आिे वाले ककसी ऐसे प्रश् ि पर मत िहीं देगा 

या उस पर चचाय में भाग िहीं लेगा यकद वह ऐसा प्रश् ि ह ैणजसमें जिता को उसके सािारि उपयोजि के अणतररक् त उसका कोई ििीय 

णहत ह ैऔर यकद पीठासीि व् यणक् त का ऐसा णहत ह ैतो वह उस अणिवेशि में पीठासीि िहीं होगा जब ऐसा प्रश् ि णवचार के णलए आता है 

।  

(5) यकद अणिवेशि में उपणस् थत ककसी सदस् य द्वारा पीठासीि व् यणक् त के बारे में यह णवश् वास ककया जाता ह ैकक उस णवषय में 

णजस पर णवचार ककया जा रहा है, उसका ििीय णहत है और यकद उस आशय का प्रस् ताव लाया जाता ह ैतो वह ऐसे णवचार णवमशय के 

दौराि पीठासीि िहीं होगा या उस पर मत िहीं दगेा या उसमें भाग िहीं लेगा । ग्राम पंचायत का कोई सदस् य ऐसा णवचार णवमशय 

जारी रहिे के दौराि अणिवेशि में पीठासीि होिे के णलए चुिा जा सकता ह ै।  

35. ग्राम पचंायत के कृत् य––ऐसी शतों के जो सरकार द्वारा समय-समय पर णवणिर्दयष् ट की जाएं, अिीि रहते हुए ग्राम 

पंचायत िीचे णवणिर्दयष् ट कृत् य करेगी,–– 

(1) सािारि कृत् य :   

(क) पंचायत क्षेत्र के णवकास के णलए वार्षयक योजिा तैयार करिा ;   

(ि) वार्षयक बजट तैयार करिा ;  

(ग) प्राकृणतक णवपणत्तयों में राहत जुटािे की शणक् त ;   

(घ) लोक संपणत पर से अणतक्रमि हटािा ;  

(ङ) स् वणै‍ छक श्रम और सामुदाणयक कायय के णलए अणभदाय की व् यवस् था करिा ; और  

(च) ग्राम (ग्रामों) के अत् यावश् यक आंकडे रििा ।  

(2) कृणष, णजसके अन् तगयत कृणष णवस् तार ह ै:   

(क) कृणष और उद्याि–कृणष की अणभवृणद्ध और णवकास ;  

(ि) बंजर भूणम का णवकास ;  

(ग) चरागाहों का णवकास और अिुरक्षि तथा उिके अप्राणिकृत अन् य संक्रामि का णिवारि करिा ;  

(घ) भूणम णवकास और मृदा भूणम संरक्षि अध् युपायों को अग्रसर करिा ;    

(ङ) भूणम सुिार और चकबन् दी के कायायन् वयि के णलए अध् युपायों को अग्रसर करिा ।  

(3) पशुपालि, डेरी उद्योग और कुक् कुट पालि ;  

(क) पशु, कुक् कुट और अन् य पशुिि की िस्लों का सुिार ;  

(ि) डेरी फामय उद्योग, कुक् कुट पालि और सूअर पालि का संवियि ; और  



 9 

(ग) घास स् थली का णवकास ।  

(4) मत् स् य उद्योग ;  

 ग्राम (ग्रामों) में मत् स्य उद्योग का णवकास ।   

(5) समाणजक और फामय वाणिकी, लघु वि उपज, ईंिि और चारा : 

(क) सडकों के ककिारों और इसके णियंत्रि के अिीि अन् य सावयजणिक भूणमयों पर वृक्षों का रोपि और 

उिका पररक्षि ;  

(ि) ईिि, पौि रोपि और चारा णवकास ;  

(ग) फामय वाणिकी का संवियि ; और  

(घ) सामाणजक वाणिकी का णवकास ।  

(6) िादी ग्रामोद्योग और कुटीर उद्योग :   

(क) ग्रामीि उद्योग और कुटीर उद्योग की अणभवृणद्ध ;  

(ि) ग्रामीि क्षेत्रों के फायद ेके णलए जागरूकता णशणवरों, संगोणष् ठयों और प्रणशक्षि काययक्रमों, कृणष और 

उद्योग प्रदशयणियों का आयोजि करिा ; और  

(ग) लघु उद्योगों के णवकास और िाद्य संस् करि इकाइयों के प्रचार के क्षेत्र में पारंपररक कौशल का पता 

लगािा ।   

(7) ग्रामीि आवासि :   

(क) गृह-णिमायि काययक्रमों का कायायन् वयि ; और  

(ि) गृहों, स् थलों और अन् य प्राइवेट तथा सावयजणिक संपणत्तयों से संबंणित अणभलेि रििा ।  

(8) पेय जल :   

(क) पेय जल के कुओं, तालाबों और कंुडों का सणन् िमायि, मरम् मत और अिुरक्षि ;  

(ि) जल प्रदषूि का णिवारि और णियंत्रि ; और  

(ग) ग्रामीि जल प्रदाय स् कीमों का अिुरक्षि ।  

(9) सडकें , भवि, पुणलया, पुल, फेरी, जल मागय और अन् य संचार सािि :   

(क) ग्राम सडकों, िाणलयों और पुणलयाओं का सणन् िमायि और अिुरक्षि ;  

(ि) इसके णियंत्रिािीि या सरकार या ककसी लोक प्राणिकारी द्वारा इसे अंतररत भविों का       

अिुरक्षि ; और   

(ग) िावों, फेररयों और जलमागों का अिुरक्षि ।  

(10) अपारंपररक ऊजाय स्रोत :  

(क) अपारंपररक ऊजाय स् कीमों की अणभवृणद्ध और णवकास ;  

(ि) सामुदाणयक, अपारंपररक ऊजाय युणक् तयों का, णजसके अंतगयत बायो गैस संयंत्र ह,ै अिुरक्षि ; और  

(ग) णवकणसत चूल् हों और अन् य दक्ष ऊजाय युणक् तयों का प्रचार ।  

(11) गरीबी उन् मूलि काययक्रम ;   

(क) पूिय णियोजि और उत् पादक आणस् तयों के सृजि के णलए गरीबी उन् मूलि काययक्रमों के बारे में 

सावयजणिक जागरूकता और सहभाणगता की अणभवृणद्ध ;  

(ि) ग्राम सभा के माध् यम से णवणभन् ि काययक्रमों के अिीि णहताणिकाररयों का चयि ;  

(ग) प्रभावी कायायन् वयि और मािीटर करिे में सहभाणगता ।   

(12) णशक्षा, णजसके अन् तगयत प्राथणमक णवद्यालय और माध् यणमक णवद्यालय भी हैं :   

(क) तकिीकी प्रणशक्षि और व् यावसाणयक णशक्षा पर णवशेष जोर दिेे के साथ प्राथणमक णशक्षा और 

माध् यणमक णशक्षा के बारे में सावयजणिक जागरूकता और सहभाणगता की अणभवृणद्ध ; और  



 10 

(ि) प्राथणमक और माध् यणमक णवद्यालयों में पूिय िामांकि और उपणस् थणत तथा उसका प्रबंि सुणिणश् चत 

करिा ।  

(13) प्रौढ़ और अिौपचाररक णशक्षा :  

प्रौढ़ साक्षरता की अणभवृणद्ध ।   

(14) पुस् तकालय ;  

ग्राम पुस् तकालय और वाचिालय ।  

(15) सांस् कृणतक कक्रयाकलाप :  

सामाणजक और सांस् कृणत कक्रयाकलापों की अणभवृणद्ध ।  

(16) बाजार और मेले :  

मेलों (णजिके अंतगयत पशु मेले भी हैं) और उत् सवों का णवणियमि ।  

(17) ग्रामीि स् व‍ छता : 

(क) सािारि स् व‍ छता बिाए रििा ;  

(ि) सावयजणिक सडकों, िाणलयों, तालाबों, कुओं और अन् य सावयजणिक स् थािों की सफाई ;  

(ग) श् मशाि और कणिस् ताि का अिुरक्षि और णवणियमि ;  

(घ) सावयजणिक शौचालयों का सणन् िमायि और अिुरक्षि ;  

(ङ) िुलाई घाटों और स् िाि घाटों का प्रबंि और णियंत्रि ।  

(18) लोक स् वास् ् य और पररवार कल् याि :  

(क) पररवार कल् याि काययक्रमों का कायायन् वयि ;  

(ि) महामाररयों का णिवारि और उिके णवरुद्ध उपचारी अध् युपाय ;  

(ग) मांस, मछली और अन् य णविश् वर िाद्य वस् तुओं के णवक्रय का णवणियमि ;  

(घ) मािव और पशु टीकाकरि काययक्रमों में सहभाणगता ;  

(ङ) भोजि और मिोरंजि स् थापिों का णवणियमि ;   

(च) आवारा कुत्तों का िष् ट ककया जािा ;   

(छ) िाल और चमडे का संसािि, शोिि और रंगाई का णवणियमि ; और   

(ज) क् लेशकर और ितरिाक व् यापार का णवणियमि ।   

(19) मणहला और बाल णवकास : 

(क) मणहला और बाल कल् याि काययक्रमों के कायायन् वयि में सहभाणगता ; और   

(ि) णवद्यालय स् वास् ् य और पोषि काययक्रमों का उन् ियि ।   

(20) समाज कल् याि, णजसके अंतगयत णवकलांगों और मािणसक रूप में मंद व् यणक् तयों का कल् याि भी ह ै:  

(क) सामाणजक काययक्रमों के, णजसके अंतगयत णवकलांग, मािणसक रूप से मंद व् यणक् तयों और दीिहीि का 

कल् याि भी ह,ै कायायन् वयि में सहभाणगता ; और  

(ि) वृद्ध और णविवा पेंशि स् कीमों को मािीटर करिा ।   

(21)   दबुयल वगों का और णवणशष् टतया अिुसूणचत जाणतयों और अिसुूणचत जिजाणतयों का कल् याि ;  

(क) अिुसूणचत जाणतयों, अिुसूणचत जिजाणतयों और अन् य दबुयल वगों के कल् याि के बारे में सावयजणिक 

जागरूकता की अणभवृणद्ध ; और   

(ि) दबुयल वगों के कल् याि के णलए णवणिर्दयष् ट काययक्रमों के कायायन् वयि में सहभाणगता ।   

(22) सावयजणिक णवतरि प्रिाली :  

(क) आवश् यक वस् तुओं के णवतरि के संबंि में सावयजणिक जागरूकता की अणभवृणद्ध ; और  



 11 

(ि) सावयजणिक णवतरि प्रिाली को मािीटर करिा ।  

(23) सामुदाणयक आणस् तयों का अिरुक्षि ;   

(क) सामुदाणयक आणस् तयों का अिरुक्षि ; और  

(ि) अन् य सामुदाणयक आणस् तयों का परररक्षि और अिुरक्षि ।  

(24) िमयशालाओं, छत्रों और उसी प्रकार की संस् थाओं का सणन् िमायि और अिुरक्षि । 

(25) पशु शेड, कांजी हाऊस और गाडी स् टैंड का सणन् िमायि और अिरुक्षि ।  

(26) विशाला का सणन् िमायि और अिुरक्षि ।  

(27) सावयजणिक पाकय , िेल के मैदािों, आकद का अिुरक्षि ।  

(28) सावयजणिक स् थािों में िाद के गड्ढों का णवणियमि । 

(29) शैंडीज की स् थापिा और णियतं्रि, और  

(30) ससंचाई, जल प्रबंि और जल णवभाजक णवकास ;  

(क) लघु ससंचाई संकमय और जल णवभाजक णवकास काययक्रमों के सणन् िमायि और अिुरक्षि के णलए 

अध् युपायों की अणभवृणद्ध ;  

(ि) भू-जल संसाििों का णवकास ; और  

(ग) ससंचाई जल के समय से और साम् यापूिय णवतरि के णलए व् यवस् था करिा ।  

(31) ग्रामीि णवद्युतीकरि, णजसके अंतगयत णवद्युत का णवतरि भी ह ै: 

(क) अणवद्युतीकृत क्षेत्रों में णवद्युत णवस् तार की अणभवृणद्ध ;  

(ि) णवद्युत के अवैि टैप करिे के णिवारि में सहायता ; और  

(ग) णवद्युत शोध् यों की वसूली और संग्रहि में सहायता ।   

(32) ऐसे अन् य कृत् य, जो सौंपे जाए ।   

36. कृत् यों का समिदुशेि––सरकार, अणिसूचिा द्वारा और ऐसी शतों के अिीि रहते हुए, जो उसमें णवणिर्दयष् ट की जाए :––  

(क) ककसी ग्राम पंचायत को पंचायत क्षेत्र में णस् थत वि का प्रबंि और अिुरक्षि अंतररत कर सकेगी ;  

(ि) ग्राम पंचायत को पंचायत क्षेत्र में णस् थत सरकार की बंजर भूणम, चरागाह या िाली पडी भूणम सौंप सकेगी ;   

(ग) ग्राम पंचायत को सरकार की ओर से भू-राजस् व का संग्रहि और ऐसे अणभलेिों का, जो उससे संबंणित हैं, 

अिुरक्षि सौंप सकेगी ; और  

(घ) ऐसे अन् य कृत् य सौंप सकेगी, जो णवणहत ककए जाएं :  

परन् तु िंड (ग) के अिीि कोई कृत् य संबंणित ग्राम पंचायत की सहमणत के णबिा िहीं सौंप, जाएगा :   

परंतु यह और कक जब िंड (क) के अिीि ककसी वि का प्रबंि और अिुरक्षि अंतररत ककया जाता ह,ै तब सरकार यह णिदशे 

दगेी कक ऐसे प्रबंि और अिुरक्षि के णलए अपेणक्षत रकम या ऐसे वि से आय का पयायप् त अंश ग्राम पचंायत के अणिकारािीि द ेकदया 

जाए ।  

37. ग्राम पंचायत की सािारि शणक् तया–ं–ग्राम पंचायत को उसे सौंपे गए, समिुदणेशत या प्रत् यायोणजत कृत् यों के कायायन् वयि 

के णलए आवश् यक या आिुषंणगक सभी कायय करिे की और णवणशष् टतया तथा पूवयगामी शणक् तयों पर प्रणतकूल प्रभाव डाले णबिा इस 

अणिणियम के अिीि णवणिर्दयष् ट सभी शणक् तयों का प्रयोग करिे की शणक् त होगी ।  

38. स् थायी सणमणतया–ं–(1) प्रत् येक ग्राम पंचायत णिवायचि द्वारा णिम् िणलणित सणमणतयों का गठि करेगी :–– 

(i) कृणष उत् पादि, पशुपालि और ग्रामोद्योग तथा गरीबी उन् मूलि काययक्रमों से संबंणित कृत् य करिे के णलए उत् पादि 

सणमणत :   

(ii) सामाणजक न् याय सणमणत जो णिम् िणलणित से संबंणित कृत् य करेगी––  

(क) अिुसूणचत जाणतयों, अिुसूणचत जिजाणतयों और णपछडे वगों के णशक्षा, आर्थयक, सामाणजक, 

सांस् कृणतक और अन् य णहतों की अणभवृणद्ध ;   



 12 

(ि) ऐसी जाणतयों और वगों का सामाणजक अन् याय और ककसी प्रकार के शोषि से संरक्षि ; और  

 (ग) मणहलाओं और ब‍ चों का कल् याि ;   

(iii) णशक्षा, लोक स् वास् ् य, लोक संकमय और ग्राम पंचायत के अन् य कृत् यों की बाबत कृत् य करिे के णलए सुि-सुणविा 

सणमणत ।   

(2) (क) प्रत् येक सणमणत में कम से कम तीि और अणिक से अणिक पांच सदस् य होंगे णजसके अंतगयत, यथाणस् थणत, प्रिाि और 

उप-प्रिाि भी हैं । प्रिाि उत् पादि सणमणत और सुि-सणुविा सणमणत का पदिे सदस् य और सभापणत होगा । प्रिाि सामाणजक न् याय 

सणमणत का पदिे सदस् य और सभापणत होगा :   

 परन् तु सामाणजक न् याय सणमणत में कम से कम एक मणहला सदस् य और एक सदस् य अिुसूणचत जाणत या अिुसणूचत जिजाणत 

का होगा ।  

(ि) प्रत् येक सणमणत कृषक, क् लब, मणहला, मंडल, युवक मंडल और सरकार द्वारा मान् यताप्राप् त इसी प्रकार के अन् य णिकायों के 

सदस् यों को ऐसी रीणत में, जो णवणहत की जाए, सहयोणजत करिे के णलए सक्षम होगी । पंचायत क्षेत्रों में सहकारी सोसाइरटयों का एक 

प्रणतणिणि उत् पादि सणमणत में सहयोणजत ककया जाएगा । सहयोणजत सदस् यों के अणिकार और दाणयत् व वहीं होंगे जो णवणहत ककए जाएं ।   

(3) स् थायी सणमणत ऊपर णिर्दयष् ट कृत् यों को उस सीमा तक करेगी णजस तक ग्राम पंचायत द्वारा उसको शणक् तयां प्रत् यायोणजत 

की गई हैं ।  

39. सपंणत्त और णिणियां––(1) प्रत् येक ग्राम पंचायत के णलए एक ग्राम पंचायत णिणि गरठत की जाएगी जो उस ग्राम पंचायत 

के िाम से होगी और उसके िाते में णिम् िणलणित जमा होगा :––  

(क) केन् द्रीय सरकार या राज् य सरकार द्वारा ककए गए अणभदाय और कदए गए अिुदाि, यकद कोई हों ;  

(ि) णजला पररषद ् या ककसी अन् य स् थािीय प्राणिकरि द्वारा ककए गए अणभदाय और कदए गए अिुदाि, यकद        

कोई हों ;  

(ग) केन् द्रीय सरकार या राज् य सरकार द्वारा कदए गए ऋि, यकद कोई हों ;  

(घ) इसके द्वारा उद्गृहीत कर, रेट और फीस मद्दे सभी प्राणप् तयां ;  

(ङ) अन् य ग्राम पंचायत द्वारा या उिकी ओर से प्राप् त अन् य सभी रकम ।  

(2) प्रत् येक ग्राम पंचायत प्रणतवषय ऐसी रकम अलग रि लेगी और उपयोणजत करेगी जो णिम् िणलणित को पूरा करिे के णलए 

अपेणक्षत हो :––  

(क) अपिे स् वयं के प्रशासि का िचय, णजसके अंतगयत अणिकाररयों और कमयचाररयों तथा सणचव को वेति, भते्त, 

भणवष् य-णिणि और अणिवार्षयकी का संदाय भी ह ै:  

परंतु स् थापि पर कुल व् यय ककसी वषय में ग्राम पंचायत के कुल व् यय के एक णतहाई से अणिक िहीं होगा ;  

(ि) प्रत् येक ग्राम पंचायत को ऐसी रकम िचय करिे की शणक् त होगी जो वह इस अणिणियम के प्रयोजिों के 

कायायन् वयि के णलए उणचत समझती ह ै;  

(ग) ग्राम पंचायत णिणि ग्राम पंचायत में णिणहत होगी और णिणि में जमा का अणतशेष ऐसी अणभरक्षा में रिा 

जाएगा, जो णवणहत की जाए ।  

40. करािाि––(1) ऐसे णियमों के अिीि रहते हुए जो इस णिणमत्त बिाए जाएं ग्राम पंचायत प्रणतवषय अपिी अणिकाररता की 

स् थािीय सीमाओं के भीतर भूणम और भविों पर कर अणिरोणपत करेगी ।   

(2) ऐसी अणिकतम दरों के अिीि रहते हुए, जो सरकार णवणहत करे, ग्राम पंचायत णिम् िणलणित फीस और रेट 

उद्गृहीत कर सकेगी, अथायत् :–– 

(क) इसकी अणिकाररता के भीतर उपासिा स् थलों या तीथयस् थािों, बाजारों और मेलों में स् व‍ छता 

व् यवस् था उपलब् ि करािे के णलए फीस, जो सरकार द्वारा, अणिसूचिा द्वारा, णवणहत की जाए ;   

(ि) प्रकाश रेट, जहां ग्राम पंचायत द्वारा अपिी अणिकाररता के भीतर सावयजणिक मागों और स् थािों पर 

प्रकाश की व् यवस् था की जाती ह ै;   

(ग) सफाई रेट, जहां ग्राम पंचायत द्वारा, अपिी अणिकाररता के भीतर प्राइवेट शौचालयों, मूत्रालयों और 

हौकदयों को साफ करिे के णलए व् यवस् था की जाती ह ै।  



 13 

41. ग्राम पचंायतों को णवत्तीय सहायता––इस िारा के उपबिों के अिीि रहते हुए प्रत् येक ग्राम पंचायत, इस णिणमत्त णवणि 

द्वारा, पुिर्वयणियोग ककए जािे के पश् चात्, इस अणिणियम की िारा 97 के अिीि गरठत राज् य णवत्त आयोग द्वारा णसफाररश के अिुसार 

राज् य की संणचत णिणि में से सहायता अिुदाि प्राप् त करिे की हकदार होगी ।  

42. ग्राम पंचायत का बजट––(1) प्रत् येक ग्राम पंचायत ऐसे समय पर और ऐसी रीणत में, जो णवणहत की जाए, प्रत् येक वषय के 

दौराि आगामी वषय के णलए अपिी प्राक् कणलत प्राणप् तयों और संणवतरिों का बजट तैयार करेगी और उक् त बजट को उस णजला पररषद ्

को प्रस् तुत करेगी जो ग्राम पंचायत क्षेत्र पर अणिकाररता रिती ह ै।   

(2) णजला पररषद,् ऐसे समय के भीतर, जो णवणहत ककए जाए या तो बजट का अिुमोदि कर सकेगी अथवा बजट को ग्राम 

पंचायत को ऐसे उपांतरि के णलए वापस कर सकेगी जो वह णिदेश द े। ऐसे उपांतरि ककए जािे पर बजट ऐसे समय के भीतर जो 

णवणहत ककया जाए, अिुमोदि के णलए णजला पररषद ्को पुि: प्रस् तुत ककया जाएगा ।  

(3) जब तक णजला पररषद ्द्वारा बजट का अिुमोदि िहीं कर कदया जाता ह,ै कोई व् यय उपगत िहीं ककया जाएगा । यकद 

णजला पररषद ्इस प्रयोजि के णलए णवणहत समय के भीतर अपिा अिुमोदि िहीं भेजती ह ैतो यह माि णलया जाएगा कक बजट का 

णजला पररषद ्द्वारा अिुमोदि कर कदया गया ह ै।  

43. लिेा––प्रत् येक ग्राम पंचायत के आय और व् यय का लेिा ऐसे प्ररूप में और ऐसी रीणत में रिा जाएगा जो, णवणहत          

की जाए ।   

44. सपंरीक्षा––(1) ग्राम पंचायत के लेिाओं की संपरीक्षा, मणिपरु सरकार के स् थािीय णिणि लेिा और लेिा संपरीक्षा 

णिदशेक ऐसी रीणत में की जाएगी, जो णवणहत की जाए और संपरीक्षा ररपोटय की एक प्रणत संपरीक्षा पूरी होिे के एक मास के भीतर ग्राम 

पंचायत को भेजी जाएगी ।   

(2) उपिारा (1) में णिर्दयष् ट संपरीक्षा ररपोटय प्राप् त होिे पर ग्राम पंचायत उि त्रुरटयों या अणियणमतताओं को दरू करेगी, जो 

संपरीक्षा ररपोटय में उणल् लणित है और णजला पररषद ्को तीि मास के भीतर इस प्रकार दरू कर कदए जािे की सूचिा भेजेगी या उक् त 

अवणि के भीतर ऐसी त्रुरटयों या अणियणमतताओं के संबंि में णवणहत प्राणिकारी को ऐसा अणतररक् त स् पष् टीकरि दे सकेगी, णजसे प्रस् तुत 

करिे की उससे अपेक्षा की जाती ह ै।   

45. ग्राम पचंायत के कमयचाररवनृ् द––(1) प्रत् येक ग्राम पंचायत के णलए एक सणचव होगा जो ऐसी रीणत में णियुक् त ककया 

जाएगा, जो णवणहत की जाए और वह अपिा वेति और भत्ता ग्राम पंचायत णिणि से लेगा ।   

(2) सणचव, ग्राम पंचायत के कायायलय का भारसािक होगा और वह इस अणिणियम या तद ्िीि बिाए गए ककन् हीं णियमों या 

उप णवणि द्वारा या उसके अिीि उस पर अणिरोणपत या उसे प्रदत्त सभी कतयव् यों का पालि करेगा और सभी शणक् तयों का प्रयोग करेगा ।  

(3) सरकार सणचव की भती की पद्धणत और सेवा के णिबंिि और शतों णजिके अन् तगयत वेति और भते्त, अणिवर्षयता,              

भणवष् य-णिणि और अणिवार्षयकी भी ह,ै संबंणित णियम बिाएगी ।    

(4) ऐसे णियमों के अिीि रहते हुए जो अिुशासि और णियंत्रि के संबंि में सरकार द्वारा णवणहत ककए जाएं, सणचव सभी 

मामलों में ग्राम पंचायत के णियंत्रि के अिीि कायय करेगा ।   

46. कमयचाररवनृ् द संबिंी पटैिय और कमयचाररयों का प्रवगय––(1) सरकार, आदशे द्वारा, ग्राम पंचायत के कमयचाररवृन् द संबंिी 

पैटिय, वेतिमाि और कमयचाररवृन् द की भती की पद्धणत णवणिर्दयष् ट कर सकेगी ।   

(2) ग्राम पंचायत उपिारा (1) के अिीि रहते हुए, कमयचाररयों के प्रवगय का पदिाम और श्रेिी और इस अणिणियम द्वारा या 

इसके अिीि ग्राम पर अणिरोणपत कतयव् यों के पालि के णलए अपेणक्षत सणचव से णभन् ि अपिे अन् य अणिकाररयों को संदये वेति और भत्तों 

का अविारि करेगी और मुख य काययपालक अणिकारी को अिुमोदि के णलए प्रस् तुत करेगी ।   

47. कमयचाररयों की णियणुक् त और णियतं्रि––ग्राम पंचायत िारा 45 और िारा 46 के उपबंिों के अिीि रहते हुए, मुख य 

काययपालक अणिकारी के पूवय अिुमोदि से ग्राम पंचायत के अन् य कमयचाररयों की णियुणक् त कर सकेगी और उिके वेति का ग्राम पंचायत 

णिणि से संदाय कर सकेगी :  

परन् तु णियुणक् तयां करते समय, अिुसूणचत आणतयों, अिुसणूचत जिजाणतयों और िागररकों के सामाणजक और शैणक्षक रूप से 

णपछडें वगों के णलए उसी रीणत से और उस सीमा तक पद आरणक्षत ककए जाएंगे जो राज् य णसणवल सेवा के पदों की भती के णलए लागू ह ै।  

अध् याय 5 

णजला पररषद ्

48. णजला पररषद ्की स् थापिा––(1) राज् यपाल, राजपत्र में अणिसूचिा द्वारा, णजले के णलए, णजस पर वह अणिकाररता रिता 

हो, एक णजला पररषद ्की स् थापिा करेगा, जो उस तारीि से प्रभावी होगी जो णवणिर्दयष् ट की जाए ।   

(2) प्रत् येक णजला पररषद ्उसके णजले के िाम से णिगणमत णिकाय होगी णजसका शाश् वत उत्तराणिकार और सामान् य मुद्रा होगी 

और जो ऐसे णिबंििों के अिीि होगी जो इस या ककसी अन् य अणिणियणमणत द्वारा या उसके अिीि अणिरोणपत ककए जाएं । उसमें अपि े



 14 

णिगणमत िाम से वाद लािे या उसके णवरुद्ध वाद लाए जािे की, स् थावर या जंगम संपणत्त चाहे वह उस क्षेत्र की सीमाओं के बाहर हों या 

भीतर हों णजस पर उसका प्राणिकार हो, अर्जयत करिे, उसे िारि और अंतरि करिे की, संणवदाएं करिे की और ऐसी सभी बातें करिे 

की क्षमता णिणहत होगी जो उस प्रयोजि के णलए, णजसके णलए यह गरठत की गई ह,ै आवश् यक, उणचत या समीचीि हो ।   

49. णजला पररषद ्की सरंचिा––णजला पररषद ्णिम् िणलणित से णमलकर बिेगी,––  

(क) िारा 50 के अिीि णजले में प्रादणेशक णिवायचि-क्षेत्रों से प्रत् यक्ष रूप से णिवायणचत सदस् य ;   

(ि) लोक सभा के ऐसे सदस् य और राज् य की णविाि सभा के ऐसे सदस् य, जो उस णजले के एक भाग का या संपूिय 

णजले का प्रणतणिणित् व करते हैं, णजिका णिवायचि-क्षेत्र उस णजले में पडता ह ै; और   

(ग) णजले में ग्राम पंचायतों के दस प्रणतशत प्रिाि :  

  परन् तु जब िंड (ि) और (ग) के अिीि सदस् यों की कुल संख या िंड (क) के अिीि सदस् यों की कुल संख या से अणिक हो जाती 

तो िंड (ग) के अिीि केवल एक णतहाई सदस् यों का चयि इस शतय के अिीि रहते हुए कक ऐसा प्रिाि जो इस िंड के अिीि एक वषय के 

णलए सदस् य रह चुका ह,ै प्रिाि के रूप में उसकी शेष पदावणि के दौराि दसूरी अवणि के णलए सदस् य होिे के णलए पात्र िहीं होगा, 

चक्रािुक्रम से लोट द्वारा एक वषय की अवणि के णलए ककया जाएगा जैसा सरकार समय-समय पर और अलग-अलग णजले के णलए अलग-

अलग णवणिणश् चत करे :  

 परन् तु यह और कक णजला पररषद ्के सभी सदस् यों को, चाहे वे णजला पररषद ्क्षेत्र में प्रादणेशक णिवायचि-क्षेत्रों से णिवायणचत हों 

अथवा िहीं, अध् यक्ष और उपाध् यक्ष के णिवायचि के णसवाय, णजला पररषद ्के अणिवेशि में मत दिेे का अणिकार होगा ।   

50. णिवायणचत सदस् य––(1) सरकार, प्रत् येक 15000 की जिसंख या पर एक सदस् य की दर से णजले या उसके भाग की कुल 

जिसंख या को ध् याि में रिते हुए प्रादणेशक णिवायचि क्षेत्रों से प्रत् यक्ष रूप से णिवायणचत सदस् यों की संख या, राजपत्र में अणिसूचिा द्वारा, 

अविाररत कर सकेगी ।  

(2) णिवायचि के संचालि के णलए णवणहत प्राणिकारी, ऐसे णियमों के अिुसार, जो सरकार द्वारा इस णिणमत्त णवणहत              

ककए जाएं,––  

(क) णजला पररषद ्के क्षेत्र को प्रादणेशक णिवायचि-क्षेत्रों में ऐसी रीणत से णवभाणजत करेगा कक प्रत् येक णिवायचि-क्षेत्र 

की जिसंख या का उसको आबंरटत स् थािों की संख या से अिुपात, समस् त पंचायत क्षेत्र में यथासाध् य एक ही हो, और प्रत् येक 

णिवायचि-क्षेत्र को आबंरटत स् थािों की संख या अविाररत करेगा ;   

(ि) प्रत् येक प्रादणेशक णिवायचि क्षते्र की बाबत णवणहत रीणत में प्रत् यक्ष णिवायचि के माध् यम से एक या अणिक सदस् य 

णिवायणचत करेगा ।   

51. आकणस् मक ररणक् त का भरा जािा––यकद णजला पररषद ्के ककसी सदस् य का स् थाि त् यागपत्र, मृत् य हटाए जािे के कारि या 

अन् यथा ररक् त हो जाता ह ैतो ररणक् त णवणहत रीणत से णिवायचि द्वारा भरी जाएगी :   

परन् तु आकणस् मक ररणक् त को भरिे के णलए कोई णिवायचि िहीं कराया जाएगा यकद ररणक् त छह मास से कम अवणि के णलए ह ै।  

52. आरक्षि––(1) प्रत् येक णजला पररषद ्में,––  

(क) अिुसूणचत जाणतयों ;   

(ि) अिुसणूचत जिजाणतयों,  

के णलए स् थाि आरणक्षत रहेंगे और इस प्रकार आरणक्षत स् थािों की संख या का अिुपात उस णजला पररषद ्में प्रत् यक्ष णिवायचि द्वारा भरे 

जािे वाले स् थािों की कुल संख या से यथाशक् य वही होगा जो उस णजला पररषद ्क्षेत्र में अिुसूणचत जाणतयों की अथवा उस णजला पररषद ्

क्षेत्र में अिुसूणचत जिजाणतयां की जिसंख या का अिुपात उस क्षेत्र की कुल जिसंख या से है । ऐसे स् थाि ककसी णजला पररषद ्में णभन् ि-

णभन् ि णिवायचि-क्षेत्रों को चक्रािुक्रम से ऐसी रीणत में आबंरटत ककए जा सकें गे जो णवणहत की जाए ।  

(2) उपिारा (1) के अिीि आरणक्षत स् थािों की कुल संख या के कम से कम एक णतहाई स् थाि, यथाणस् थणत, अिुसूणचत जाणतयों 

या अिुसूणचत जिजाणतयों की णस् त्रयों के णलए आरणक्षत रहेंगे ।   

(3) प्रत् येक णजला पररषद ्में प्रत् यक्ष णिवायचि द्वारा भरे जािे वाले स् थािों की कुल संख या के कम से कम एक णतहाई स् थाि 

(णजिके अन् तगयत अिुसूणचत जाणतयों और अिुसूणचत जिजाणतयों की णस् त्रयों के णलए आरणक्षत स् थािों की संख या भी ह)ै णस् त्रयों के णलए 

आरणक्षत रहेंगे और ऐसे स् थाि ककसी णजला पररषद ्में णभन् ि-णभन् ि णिवायचि-क्षेत्रों को चक्रािुक्रम से ऐसी रीणत में आबरंटत ककए जा 

सकें गे, जो णवणहत की जाए ।    

53. णजला पररषद ्की अवणि––(1) प्रत् येक णजला पररषद ्अपिे प्रथम अणिवेशि की तारीि से पांच वषय तक बिी रहेगी :  

परन् तु ऐसी कोई णजला पररषद ्जो इस अणिणियम के प्रारंभ से ठीक पूवय कायय कर रही ह,ै इसकी अवणि की समाणप् त तक बिी 

रहगेी ।  



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(2) ककसी णजला पररषद ्का गठि करिे के णलए णिवायचि–– 

(क) उपिारा (1) में णवणिर्दयष् ट उसकी अवणि की समाणप् त के पूवय ; और   

(ि) उसके णवघटि की दशा में, ऐसे णवघटि की तारीि से छह मास की अवणि की समाणप् त से पूवय,   

पूरा ककया जाएगा :  

 परन् तु जहां वह शेष अवणि, णजसके णलए कोई णवघरटत णजला पररषद ्बिी रहती, छह मास से कम ह,ै वहां ऐसी अवणि के 

णलए इस िण् ड के अिीि कोई णिवायचि करािा आवश् यक िहीं होगा ।   

(3) ककसी णजला पररषद ्की अवणि की समाणप् त से पूवय उस णजला पररषद ्के णवघटि पर गरठत की गई कोई णजला पररषद ्

उस अवणि के केवल शेष भाग के णलए बिी रहगेी, णजसके णलए णवघरटत णजला पररषद ्उपिारा (1) के अिीि बिी रहती, यकद वह इस 

प्रकार णवघरटत िहीं की जाती ।   

54. अध् यक्ष और उपाध् यक्ष का णिवायचि––(1) िारा 50 में णिर्दयष् ट णजला पररषद ्के णिवायणचत सदस् य यथासंभव शीघ्र अपिे में 

से दो सदस् यों को क्रमश: उसका अध् यक्ष और उपाध् यक्ष णिवायणचत करेंगे और जब भी अध् यक्ष और उपाध् यक्ष के पद में आकणस् मक ररणक् त 

हो, वे अपिे में से ककसी अन् य सदस् य को यथाणस् थणत, अध् यक्ष या उपाध् यक्ष णिवायणचत करेंगे :   

परन् तु यकद ररणक् त एक मास से कम अवणि की ह ैतो कोई णिवायचि िहीं कराया जाएगा ।  

(2) राज् य सरकार णवणहत रीणत में,–– 

(क) अिुसूणचत जाणतयों और अिसुूणचत जिजाणतयों के व् यणक् तयों के णलए राज् य में णजला पररषद ्के अध् यक्ष और 

उपाध् यक्ष के पदों की उतिी संख या आरणक्षत रिेगी णजसका अिुपात राज् य में णजला पररषदों में से ऐसे पदों की कुल संख या से 

यथाशक् य वही होगा जो उस राज् य में अिसुूणचत जाणतयों अथवा जिजाणतयों की जिसंख या का अिपुात उस राज् य की कुल 

जिसंख या से ह ै;   

(ि) राज् य में प्रत् येक प्रवगय से, जो अिुसूणचत जाणतयों, अिुसूणचत जिजाणतयों के व् यणक् तयों के णलए आरणक्षत हैं और 

वे जो अिारणक्षत हैं, अध् यक्ष और उपाध् यक्ष के पदों की कुल संख या के कम से कम एक णतहाई स् थाि णस् त्रयों के णलए                

आरणक्षत करेगी ।  

55. अध् यक्ष और उपाध् यक्ष तथा अन् य सदस् यों के वतेि और भत्ते––(1) अध् यक्ष और उपाध् यक्ष के वेति और भते्त वे होंगे, जो 

णवणहत ककए जाएं ।  

(2) अध् यक्ष और उपाध् यक्ष के अलावा णजला पररषद ्का प्रत् येक सदस् य ऐसी बैठक फीस और भते्त प्राप् त करिे के णलए हकदार 

होगा, जो णवणहत ककए, जाएं ।   

56. अध् यक्ष और उपाध् यक्ष की शणक् तया,ं कृत् य और कतयव् य––(1) अध् यक्ष––  

(क) इस अणिणियम और तद ्िीि बिाए गए णियमों के अिीि अध् यक्ष पर अणिरोणपत सभी कतयव् यों का पालि 

करेगा और उस को प्रदत्त सभी शणक् तयों का प्रयोग करेगा ;   

(ि) णजला पररषद ्के अणिवेशि आयोणजत करेगा और उसमें पीठासीि होगा तथा उिका संचालि करेगा ;  

(ग) मुख य काययपालक अणिकारी पर और उसके माध् यम से णजला पररषद ् के सभी अणिकाररयों और अन् य 

कमयचाररयों पर, तथा उि अणिकाररयों और कमयचाररयों पर, णजिकी सेवाएं राज् य सरकार द्वारा णजला पररषद ् के 

अणिकारािीि रिी जाएं, प्रशासणिक पययवेक्षि और णियंत्रि रिेगा ; 

(घ) ऐसी अन् य शणक् तयों का प्रयोग, ऐसे अन् य कृत् यों का पालि और ऐसे अन् य कतयव् यों का णिवयहि करेगा, जो णजला 

पररषद ्सािारि संकल् प द्वारा णिदेणशत करे या जो सरकार इस णिणमत्त बिाए गए णियमों द्वारा णवणहत करे ;  

(ङ) णजला पररषद ्के णवत्तीय और काययकारी प्रशासि का संपूिय पययवेक्षि करेगा और उससे संबंणित ऐसे सभी प्रश् ि 

णजला पररषद ्के समक्ष रिेगा, जो उसे उसके आदशेों के णलए अपेणक्षत प्रतीत हों और इस प्रयोजि के णलए णजला पररषद् के 

अणभलेि मंगा सकेगा ; और  

(च) उसे उि व् यणक् तयों को, जो णजले में प्राकृणतक णवपणत्तयों द्वारा प्रभाणवत हुए हों, तत् काल राहत दिेे के प्रयोजि के 

णलए एक वषय में कुल एक लाि रुपए तक की राणश की मंजूरी दिेे की शणक् त होगी :  

परन् तु अध् यक्ष ऐसी मंजूररयों के ब् यौरे णजला पररषद ्के आगामी अणिवेशि में उसके अिुसमथयि के णलए रिेगा ।  

(2) उपाध् यक्ष––   

(क) अध् यक्ष की अिुपणस् थणत में णजला पररषद ्के अणिवेशिों में पीठासीि होगा : 



 16 

(ि) अध् यक्ष की ऐसी शणक् तयों का प्रयोग और ऐसे कतयव् यों का पालि करेगा जो अध् यक्ष समय-समय पर ऐसे णियमों 

के अिीि रहते हुए जो णवणहत ककए जाएं, णलणित आदेश द्वारा उसे प्रत् यायोणजत करे ; और  

(ग) अध् यक्ष के णिवायचि के लंणबत रहिे तक या णजले से अध् यक्ष की अिुपणस् थणत के दौराि, या तीस कदि से अणिक 

की अवणि तक छुट्टी पर रहिे के कारि, अध् यक्ष की शणक् तयों का प्रयोग और कतयव् यों का पालि करेगा ।  

57. अध् यक्ष और उपाध् यक्ष का त् यागपत्र या हटाया जािा––(1) अध् यक्ष आयुक् त को संबोणित अपिे हस् ताक्षर सणहत लेि द्वारा 

अपिा पद त् याग सकेगा और उपाध् यक्ष अध् यक्ष को संबोणित अपिे हस् ताक्षर सणहत लेि द्वारा अपिा पद त् याग सकेगा ।   

(2) उपिारा (1) के अिीि प्रत् येक त् यागपत्र णवणहत प्राणिकारी द्वारा उसकी प्राणप् त की तारीि से पन् द्रह कदि की समाणप् त पर 

तब तक प्रभावी होगा, जब तक वह इस पन् द्रह कदि की अवणि के भीतर णवणहत प्राणिकारी को संबोणित अपिे हस् ताक्षर सणहत लेि द्वारा 

ऐसा त् यागपत्र वापस िहीं ले लेता ह ै।   

(3) प्रत् येक अध् यक्ष या उपाध् यक्ष णजला पररषद ्का सदस् य ि रहिे पर अपिा पद ररक् त कर देगा ।   

(4) प्रत् येक अध् यक्ष या उपाध् यक्ष द्वारा, यकद उसमें णवश् वास की कमी प्रकट करिे वाला संकल् प इस प्रयोजि के णलए णवशेष रूप 

से बुलाए गए अणिवेशि में णजला पररषद ्के प्रादणेशक णिवायचि-क्षेत्रों के णिवायणचत सदस् यों की कुल संख या के बहुमत द्वारा पाररत कर 

कदया जाता ह,ै तुरंत अपिा पद ररक् त कर कदया गया समझा जाएगा । ऐसे णवशेष अणिवेशि के णलए अध् यपेक्षा णजला पररषद ्के कुल 

सदस् यों के कम से कम एक बटा पांच सदस् यों द्वारा हस् ताक्षररत होगी और वह अध् यक्ष को पररदत्त की जाएगी । अध् यक्ष ऐसी अध् यपेक्षा 

की प्राणप् त की तारीि से सात कदि के भीतर णजला पररषद ्का णवशेष अणिवेशि बुलाएगा । यह अणिवेशि इसकी सूचिा के जारी करिे 

की तारीि से पन् द्रह कदि के अपश् चात् ककसी कदि आयोणजत ककया जाएगा । अध् यक्ष उक् त अणिवेशि में पीठासीि होगा, यकद प्रस् ताव 

उपाध् यक्ष के णवरुद्ध ह ैऔर अध् यक्ष के मामले में उपाध् यक्ष अणिवेशि में पीठासीि होगा, यकद यह दोिों के णवरुद्ध ह,ै तो ऐसे अणिवेशि में 

उपणस् थत सदस् यों द्वारा अपि े में से िामणिदणेशत सदस् य अणिवेशि में पीठासीि होगा । यथाणस् थणत, णजला पररषद ् के अध् यक्ष या 

उपाध् यक्ष के रूप में उिकी पदावणि के आरणम् भक दो वषों में उिके णवरुद्ध कोई अणवश् वास प्रस् ताव िहीं लाया जाएगा ।   

(5) यकद अध् यक्ष या उपाध् यक्ष अथवा दोिों के णवरुद्ध अणवश् वास प्रस् ताव एक बार िामंजूर हो जाता ह,ै तो, यथाणस् थणत, 

अध् यक्ष या उपाध् यक्ष अथवा दोिों के णवरुद्ध कोई िया अणवश् वास उस प्रस् ताव की ऐसी िामंजूरी की तारीि से एक वषय की अवणि के 

भीतर णजला पररषद ्के समक्ष िहीं लाया जाएगा ।   

58. सदस् यों का त् यागपत्र––ककसी णजला पररषद ्का कोई सदस् य णजला पररषद ्के अध् यक्ष को संबोणित अपिे हस् ताक्षर सणहत 

लेि द्वारा अपिी सदस् यता त् याग सकेगा और उक् त त् यागपत्र की तारीि से स् पष् ट पन् द्रह कदिों की समाणप् त पर उसका स् थाि ररक् त हो 

जाएगा, जब तक कक पन् द्रह कदि की उक् त अवणि के भीतर वह अध् यक्ष को संबोणित अपिे हस् ताक्षर सणहत लेि द्वारा उक् त त् यागपत्र को 

वापस िहीं ले लेता ह ै।   

59. णजला पररषद ्का अणिवशेि––(1) प्रत् येक णजला पररषद,् प्रत् येक तीि मास में कम से कम एक बार, संबंणित णजले की 

स् थािीय सीमाओं के भीतर ऐसे समय और ऐसे स् थाि पर, जो णजला पररषद ्ठीक पूवयवती अणिवेशि में णियत करे, अणिवेशि आयोणजत 

करेगा :  

परन् तु ककसी िई गरठत णजला पररषद ्का पहला अणिवेशि संबंणित णजले की स् थािीय सीमाओं के भीतर ऐसे समय और ऐसे 

स् थाि पर आयोणजत ककया जाएगा, जो णवणहत प्राणिकारी णियत करे :  

परन् तु यह और कक अध् यक्ष से जब भी णजला पररषद ्के एक बटा पांच सदस् यों द्वारा णलणित में कोई अणिवेशि बुलािे के णलए 

अपेक्षा की जाए, तो वह दस कदि के भीतर अणिवेशि बुलाएगा, णजसमें असफल रहिे पर उपयुयक् त सदस् य णवणहत प्राणिकारी को सूचिा 

दिेे और णजला पररषद ्के अध् यक्ष तथा अन् य सदस् यों को सात स् पष् ट कदि की सूचिा दिेे के पश् चात् अणिवेशि बुला सकें गे ।  

(2) णजला पररषद ्के कुल सदस् यों के एक-णतहाई सदस् य णजला पररषद ्के अणिवेशि में कारबार का संव् यवहार करिे के णलए 

गिपूर्तय करेंगे ।  

(3) णजला पररषद ्के समक्ष आिे वाले सभी प्रश् ि बहुमत द्वारा णवणिणश् चत ककए जाएंगे, परंतु मतों की बराबरी की दशा में, 

अध् यक्ष या पीठासीि सदस् य का णििाययक मत होगा ।  

(4) प्रत् येक अणिवेशि में अध् यक्ष अथवा यकद वह अिुपणस् थत ह ैतो उपाध् यक्ष पीठासीि होगा और यकद अध् यक्ष और उपाध् यक्ष 

दोिों ही अिुपणस् थत हैं या यकद अध् यक्ष अिुपणस् थत ह ै और कोई उपाध् यक्ष िहीं ह ै तो उपणस् थत सदस् य अपिे में से एक सदस् य को 

अणिवेशि में पीठासीि होिे के णलए णिवायणचत करेंगे ।  

60. काययवतृ्त––(1) उपणस् थत सदस् यों और अणिकाररयों के, यकद कोई ह,ै िामों को और णजला पररषद ्के प्रत् येक अणिवेशि की 

काययवाणहयों को और यकद अणिवेशि में उपणस् थत कोई सदस् य वांछा करे तो ककसी संकल् प के णलए या उसके णवरुद्ध क्रमश: मत दिेे वाले 

सदस् यों के िामों को इस प्रयोजि के णलए उपलब् ि कराई गई ककसी पुणस् तका में काययवृत्त में रिा जाएगा और उन् हें पढ़ कर सुिाए जािे के 

पश् चात् और सहमत होिे पर अध् यक्ष या उपाध् यक्ष या उक् त अणिवेशि में पीठासीि व् यणक् त द्वारा उस पर हस् ताक्षर ककए जाएंगे, और वह 

सभी उणचत समयों पर णजला पररषद ्के ककसी सदस् य द्वारा णिरीक्षि के णलए िुली रहगेी । कोई भी व् यणक् त, अणिवेशि के काययवृत्त की 



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प्रणत का णिरीक्षि कर सकेगा । काययवृत्त पुणस् तका हमेशा णजला पररषद ् के कायायलय में रिी जाएगी और णजला पररषद ् के मुख य 

काययपालक अणिकारी की अणभरक्षा में रहगेी ।  

(2) णजला पररषद ्द्वारा पाररत प्रत् येक संकल् प की एक प्रणत, अणिवेशि में इसके पाररत होिे की तारीि से दस कदि के भीतर, 

मुख य काययपालक अणिकारी द्वारा सरकार को भेजी जाएगी ।  

61. णजला पररषद ्के कृत् य और शणक् तया–ं–(1) णजला पररषद ्को ककसी णवषय का कोई अंतरि समय-समय पर सरकार के 

अिुमोदि से ककया जाएगा ।   

(2) ऐसी शतों और अपवादों के अिीि रहते हुए जो सरकार समय-समय पर अणिरोणपत करे, णजला पररषद ्का यह कृत् य 

होगा कक वह णजले के आर्थयक णवकास और सामाणजक न् याय के णलए योजिा तैयार करे और ऐसे णवषयों की बाबत णजिमें िीचे 

उणल् लणित णवषय भी हैं, ऐसी योजिाओं के समणन् वत कायायन् वयि को सुणिणश् चत करे, अथायत् :–– 

1. कृणष और कृणष सबंिंी णवस् तार :  

(i) कृणष-उत् पादि में वृणद्ध करिे और समुन् ित कृणष उपकरिों के उपयोग को और समुन् ित कृणष पद्धणतयों को 

लोकणप्रय बिािे के उपायों का संवियि ;  

(ii) गोदामों की स् थापिा और उिका रिरिाव ;  

(iii) कृणष मेलों और प्रदशयणियों का संचालि करिा ;  

(iv) कृषकों का प्रणशक्षि ;   

(v) भूणम णवकास और भूणम संरक्षि ; और  

(vi) कृणष-णवस् तार संबंिी संकमय का संवियि ।  

2. ससचंाई भ-ूजल ससंाििों और जल णवभाजक का णवकास :  

(i) लघु ससंचाई संकमय और उत् थापक ससंचाई का सणन् िमायि, िवीकरि और रिरिाव  

(ii) णजला पररषद ्के णियंत्रिािीि ससंचाई योजिाओं के अन् तगयत जल का समयािुसार और साम् यापूिय णवतरि और 

पूिय उपयोग के णलए व् यवस् था करिा ;  

(iii) भू-जल संसाििों का णवकास ;  

(iv) सामुदाणयक पंप सेटों का प्रणतस् थापि ; और  

(v) जल णवभाजक णवकास काययक्रम ।  

3. उद्याि कृणष : 

(i) ग्रामीि पाकों और उद्यािों का संवियि ;  

(ii) फलों और सणब् जयों की िेती का संवियि ; और  

(iii) फामों का संवियि । 

4. साणंख यकी : 

(i) ग्राम पंचायतों और णजला पररषदों के कक्रयाकलापों से संबंणित सांणख यकीय और अन् य जािकाररयों का प्रकाशि ;  

(ii) ग्राम पंचायतों और णजला पररषदों के कक्रयाकलापों के णलए अपेणक्षत सांणख यकी और अन् य जािकाररयों का 

समन् वय और उपयोग ; और  

(iii) ग्राम पंचायतों और णजला पररषदों को सौंपी गई पररयोजिाओं और काययक्रमों का काणलक पययवेक्षि और 

मूल् यांकि । 

5. आवश् यक वस् तओुं का णवतरि ।  

6. भणूम सरंक्षि और भणूम सिुार :   

(i) भूणम संरक्षि उपाय ;  

(ii) भूणम उद्धार और भूणम णवकास संकमय ; और  

(iii) भूणम सुिारों और भूणम चकबंदी के कायायन् वयि की अणभवृणद्ध ।  



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7. णवपिि : 

(i) णवणियणमत बाजारों और णवपिि याडों का णवकास ; और  

(ii) कृणष उत् पादों का श्रेिीकरि और क् वाणलटी णियंत्रि ।  

8. सामाणजक वाणिकी :  

(i) वृक्षारोपि के णलए प्रचार का आयोजि ;   

(ii) वृक्षारोपि और उिका रिरिाव ।  

9. पशपुालि और डेरी उद्योग :  

(i) गाय और सुअर की िस् ल का सुिार ;  

(ii) कुक् कुट पालि ; बत्ति पालि और बकरी पालि फामों का संवियि ।  

(iii) चारा णवकास काययक्रमों का संवियि ;  

(iv) डेरी उद्योग, कुक् कुट पालि और सुअर पालि का संवियि ;  

(v) महामारी और सांसर्गयक रोगों का णिवारि ।  

10. लघवुि उपज, ईंिि तथा चारा : 

(i) सामाणजक और फामय विोद्योग, ईंिि रोपि और चारा णवकास का संवियि ।  

(ii) सामुदाणयक भूणम में उगाए गए बिों की लघुवि उपज का प्रबंि ; और  

(iii) बंजर भूणम का णवकास ;  

11. मत् स् य उद्योग :   

(i) मत् स् य बीज उत् पादि और णवतरि का संवियि ;  

(ii) णिजी और सामुदाणयक तालाबों में मत् स् यपालि का णवकास ;  

(iii) अंतदशेीय मत् स् य उद्योग का णवकास ;  

(iv) मत् स् य संसािि और शुष् कीकरि का संवियि ;  

(v) परंपरागत रूप से मछली पकडिे में सहायता ;  

(vi) मछली णवपिि सहकारी सणमणतयों का आयोजि ; और  

(vii) मछुआरों के उत् थाि और णवकास के णलए कल् यािकारी स् कीमें ।  

12. घरेल ूउद्योग : (णजसके अंतगयत िाद्य प्रसंस् करि भी ह)ै  

(i) पररक्षेत्र में परंपरागत कुशलता की पहचाि और घरेलू उद्योगों की अणभवृणद्ध ;  

(ii) हस् त णशल् पकारों और कारीगरों के णलए प्रणशक्षि काययक्रमों का आयोजि ;  

(iii) घरेलू उद्योगों के णलए बैंक प्रत् यय प्राप् त करिे के णलए सम् पकय  करिा ;  

(iv) पररसाणित उत् पादों को लोकणप्रय बिािा और उिका णवपिि ; और  

(v) िादी, हथकरघा, हस् तणशल् प और ग्रामीि तथा कुटीर उद्योगों को संगरठत करिा ।  

13. ग्रामीि सडकें  और अतंदशेीय जलमागय : 

(i) राष् रीय, राज् य राजमागों और अन् य णजला सडकों से णभन् ि सडकों का सणन् िमायि और रिरिाव ;  

(ii) मद (i) के अंतगयत आिे वाली सडकों के मागय में आिे वाले पुल और पुणलया ;   

(iii) णजला पररषद ्के कायायलय भविों का सणन् िमायि और रिरिाव ;  

(iv) बजारों, शैणक्षक संस् थाओं, स् वास् ्  य केन् द्रों को जोडिे वाले बडे संपकय  मागों की पहचाि करिा ; और  

(v) िई सडकों के णलए और णवद्यमाि सडकों को चौडा करिे के णलए भूणम का स् वै‍ छया अभ् यपयि आयोणजत करिा ।  

 



 19 

14. स् वास् ्  य और स् व‍ छता :  

(i) प्रणतरक्षि और टीकाकरि काययक्रमों का कायायन् वयि ;  

(ii) अस् पतालों, प्राथणमक स् वास् ्  य केन् द्रों और औषिालयों में स् वास् ्  य णशक्षा कक्रयाकलाप ;  

(iii) प्रसूणत और बाल स् वास् ्  य सेवा कक्रयाकलाप ;  

(iv) पररवार कल् याि संबंिी कक्रयाकलाप ;  

(v) ग्राम पंचायतों के साथ स् वास् ्  य णशणवरों का आयोजि ; और  

(vi) पयायवरि प्रदषूि के णवरुद्ध उपाय ।  

15. ग्रामीि आवासि :   

(i) गृहहीि कुटुम् बों की पहचाि ;  

(ii) णजले में गृह णिमायि काययक्रमों का कक्रयान् वयि ; और  

(iii) कम लागत के गृह णिमायि को लोकणप्रय बिािा ।  

16. णशक्षा :  

(i) शैणक्षक कक्रयाकलापों, णजसके अंतगयत प्राथणमक और माध् यणमक णवद्यालयों की स् थापिा और रिरिाव भी ह,ै का 

उन् ियि ;  

(ii) प्रौढ़ णशक्षा और पुस् तकालय सुणविाओं के णलए काययक्रमों की योजिा बिािा ;   

(iii) तकिीकी प्रणशक्षि और व् यावसाणयक णशक्षा का प्रचार ; और  

(iv) ग्रामीि क्षेत्रों तक  णवज्ञाि और प्रौद्योणगकी के प्रचार के णलए णवस् तारि कायय ।  

17. समाज कल् याि तथा दबुयल वगों और णवकलांग व् यणक् तयों का कल् याि :  

(i) णवकलांग और मािणसक रूप से मंद व् यणक् तयों पर बल दतेे हुए समाज कल् याि के काययक्रमों और समाज कल् याि 

के कक्रयाकलापों की अणभवृणद्ध ;  

(ii) णिरक्षरता का उन् मूलि करिे और सामान् य णशक्षा दिेे के णलए िसयरी णवद्यालयों, बालवाणडयों, राणत्र णवद्यालयों 

और पुस् तकालयों का आयोजि करिा ; और  

(iii) अिुसूणचत जाणतयों और अिुसणूचत जिजाणतयों की सहकारी सणमणतयां संगरठत करिा ।  

18. गरीबी उन् मूलि काययक्रम :  

 ऐसे गरीबी उन् मूलि काययक्रमों का णियोजि, पययवेक्षि, मािीटर और कायायन् वयि ।  

19. पये जल : 

(i) पेय जल के कुओं, तालाबों और कंुडों का सणन् िमायि, मरम् मत और अिुरक्षि ;  

(ii) जल प्रदषूि का णिवारि और णियंत्रि ।  

20. ग्रामीि णवद्यतुीकरि : 

(i) अणवद्युतीकृत क्षेत्रों तक णवद्युत णवस् तारि की अणभवृणद्ध ;  

(ii) णवद्युत के अवैि प्रयोग के णिवारि में सहायता ; और  

(iii) णवद्युत दये की वसूली और संग्रहि में सहायता ।  

21. अपारंपररक ऊजाय स्रोत : 

(i) अपारंपररक ऊजाय स् कीमों का संवियि और णवकास ; और  

(ii) दक्ष ऊजाय युणक् तयों का प्रचार ।  

22. समाज सिुार कक्रयाकलाप : 

(i) मणहला संगठिों और कल् याि की अणभवृणद्ध ;  

(ii) बाल संगठिों और कल् याि की अणभवृणद्ध ;  



 20 

(iii) सांस् कृणतक और आमोद-प्रमोद के कक्रयाकलाप आयोणजत करिा ;   

(iv)  िेलों और क्रीडाओं को प्रोत् साणहत करिा और ग्रामीि स् टेणडयमों का सणन् िमायि ;  

(v) णिम् िणलणित के माध् यम से प्रत् यय और बचत का संवियि :–– 

  (क) बचत करिे की आदतों की अणभवृणद्ध ;   

(ि) अल् प बचत अणभयाि ;   

(ग) अवैि सहकारी व् यवहारों और ग्रामीि ऋि ग्रस् तता के णवरुद्ध लडाई ।   

(3) इिके अणतररणक् त णजला पररषद ्णिम् िणलणित कर सकती ह ै:–– 

(क) ककसी लोकोपयोगी या इसमें णिणहत या इसके णियंत्रि और प्रबंि के अिीि ककसी संस् थाि के ककसी कायय का 

प्रबंि या अिुरक्षि ;   

(ि) गांव की हाटों और बाजारो का अजयि और अिुरक्षि ;  

(ग) ग्राम पंचायतों को अिुदाि दिेा ;  

(घ) णवपणत्त ग्रस् त व् यणक् तयों की सहायता के णलए उपाय अपिािा ;  

(ङ) णजले में ग्राम पंचायतों द्वारा तैयार की गई णवकास योजिाओं और स् कीमों को समणन् वत और समेककत करिा ;  

(च) णजले में ग्राम पंचायत के बजट प्राक् कलिों की जांच और उन् हें मंजूर करिा ;  

(छ) संपूिय णजले या उसके भाग तक णवस् ताररत की जािे वाली ककसी स् कीम का णजम् मा लेिा और उस ेणिष् पाकदत 

करिा ; और   

(ज) ककसी प्राइवेट स् वामी या ककसी अन् य प्राणिकरि से संबंणित ककसी ग्रामीि पुल, तालाब, घाट, कुएं, जलसरिी 

या िाणलयों के रिरिाव और णियंत्रि को ऐसे णिबंििों और शतों पर लेिा, जैसी करार पाई जाएं ;   

 (4) दो या अणिक साथ लगे हुए णजलों की णजला पररषद ् ककसी णवकास स् कीम को, ऐसे णिबंििों और शतों पर, जैसी 

पारस् पररक रूप से करार पाई जाएं, संयुक् त रूप से प्रारंभ और णिष् पाकदत कर सकती हैं :  

परंतु सरकार अणिसूचिा द्वारा और ऐसी शतों के अिीि रहते हुए, जो यह अणिरोणपत करे, णजला पररषद ्को अणतररक् त कृत् य 

अंतररत कर सकती ह ै।  

62. णजला पररषद ्की सािारि शणक् तया–ं–(1) सरकार के सािारि या णवशेष आदशेों के अिीि रहते हुए, णजला पररषद,्––  

(क) अपिी अणिकाररता से बाहर णशक्षा या णचककत् सा-सहायता पर व् यय उपगत कर सकेगी ;  

(ि) णजले के णिवाणसयों की भलाई के णलए स् वास् ्  य, सुरक्षा, णशक्षा, आराम, सुणविा या सामाणजक या आर्थयक या 

सांस् कृणतक अणभवृणद्ध के णलए संभाणवत कोई कायय करिे या उपाय करिे की व् यवस् था कर सकेगी ;  

(ग) स् थािीय सरकार के संप्रवतयि से संबंणित सभी अणिल भारतीय, राज् य या अन् तरराज् यीय स् तर के संगमों और 

ग्राम पंचायत और णजला पररषद ्के कक्रयाकलापों से संबंणित प्रदशयिी, संगोष् ठी और सम् मेलि णजले के भीतर आयोणजत करिे 

के णलए अणभदाय कर सकेगी ; और  

(घ) ककसी व् यणक् त को णजले में कोई कक्रयाकलाप, जो इसके ककन् हीं कृत् यों से संबंणित हैं, करिे के णलए णवत्तीय या 

अन् य सहायता द ेसकेगी ।   

(2) णजला पररषद ्को इसे सौंपे गए या प्रत् यायोणजत ककए गए कृत् यों को करिे के णलए आवश् यक या उससे आिुषंणगक सभी 

कायों को करिे और णवणशष् ट रूप से और पूवयगामी शणक् तयों पर प्रणतकूल प्रभाव डाले णबिा, इस अणिणियम के अिीि णवणिर्दयष् ट सभी 

शणक् तयों का प्रयोग करिे की शणक् त होगी ।  

63. कृत् यों का समिदुशेि––(1) सरकार णजला पररषद ्को ऐसे ककसी णवषय के संबंि में, णजसके णलए सरकार का काययपालक 

प्राणिकार णवस् ताररत होता ह ै या ऐसे कृत् यों की बाबत, जो केन् द्रीय सरकार द्वारा राज् य सरकार को समिुदणेशत ककए गए हैं, कृत् य 

समिुदणेशत कर सकेगी ।  

(2) सरकार, अणिसूचिा द्वारा, उपिारा (1) के अिीि समिुदणेशत कायों को वापस ले सकेगी या उपांतररत कर सकेगी ।   

64. शणक् तयों का प्रत् यायोजि––णजला पररषद ्अणिसूचिा द्वारा इस अणिणियम द्वारा या उसके अिीि णजला पररषद ्को प्रदत्त 

ककन् हीं शणक् तयों को मुख य काययपालक अणिकारी या अन् य अणिकारी को प्रत् यायोणजत कर सकें गी ।   

65. स् थायी सणमणतया–ं–(1) णजला पररषद ्की णिम् िणलणित स् थायी सणमणतयां होंगी, अथायत् :––   



 21 

 

(क) सािारि स् थायी सणमणत ;  

(ि) णवत्त, लेिापरीक्षा और योजिा सणमणत ;  

(ग) सामाणजक न् याय सणमणत ;  

(घ) णशक्षा और स् वास् ् य सणमणत ;  

(ङ) कृणष और उद्योग सणमणत ; और  

(च) णिमायि सणमणत ।  

(2) प्रत् येक स् थायी सणमणत णिवायणचत सदस् यों में से णजला पररषद ्के सदस् यों द्वारा णिवायणचत सभापणत सणहत कम से कम पांच 

सदस् यों से णमलकर बिेगी ।  

(3) अध् यक्ष, सािारि स् थायी सणमणत और णवत्त, लेिापरीक्षा और योजिा सणमणत का पदिे सदस् य और सभापणत होगा । 

उपाध् यक्ष सामाणजक न् याय सणमणत का पदिे सदस् य और सभापणत होगा । अन् य स् थायी सणमणत अपिे सदस् यों में से सभापणत को 

णिवायणचत करेगी ।   

(4) णजला पररषद ्का कोई भी सदस् य दो स् थायी सणमणतयों से अणिक में सेवा करिे का पात्र िहीं होगा ।   

(5) मुख य काययपालक अणिकारी सािारि स् थायी सणमणत और णवत्त, लेिापररक्षा और योजिा सणमणत का पदिे सणचव होगा 

और वह शेष स् थायी सणमणतयों में से प्रत् येक के णलए पदिे सणचव के रूप में ककसी एक उप सणचव को िामणिर्दयष् ट करेगा । मुख य 

काययपालक अणिकारी सभी स् थायी सणमणतयों के अणिवेशिों में उपणस् थत होिे का हकदार होगा ।   

66. स् थायी सणमणतयों के कृत् य––(1) सािारि स् थायी सणमणत स् थापि णवषयों में संबंणित कृत् य और संचार, भविों, ग्रामीि 

आवास, ग्राम णवस् तारि, प्राकृणतक णवपणत्तयों में राहत और सहबद्ध णवषयों तथा शेष सभी अन् य णवषयों से संबंणिि कृत् यों को करेगी ।  

(2) णवत्त, लेिापरीक्षा और योजिा सणमणत, णिम् िणलणित से संबंणित कृत् यों को करेगी :––  

(क) णजला पररषद ्की णवत्त व् यवस् था, बजट तैयार करिा; राजस् व में वृणद्ध के प्रस् तावों की संवीक्षा करिा, प्राणप् त 

और व् यय णववरिों की परीक्षा, णजला पररषद ्की णवत्त व् यवस् था को प्रभाणवत करिे वाले सभी प्रस् तावों पर णवचार करिा और 

णजला पररषद ्के राजस् व और व् यय का सािारि पययवेक्षि ;   

(ि) योजिा पूर्वयकताएं, णवकास के णलए पूंजी पररव् यय का आबंटि; अिुप्रस् थ और ऊध् वयस् थ संयोजि, सरकार द्वारा 

जारी ककए गए मागयदशयक णसद्धातों का कायायन् वयि, णियोजि काययक्रमों का णियणमत पुिर्वयलोकि, महत् वपूिय काययक्रमों और 

लघु बचत स् कीमों का मूल् यांकि ।  

(3) सामाणजक न् याय सणमणत णिम् िणलणित से संबंणित कृत् यों को करेगी :–– 

(क) अिुसूणचत जाणतयों, अिुसूणचत जिजाणतयों और णपछडे वगों के व् यणक् तयों की णशक्षा, आर्थयक, सामाणजक, 

सांस् कृणतक और अन् य रुणचयों की अणभवृणद्ध ;  

(ि) उिका सामाणजक अन् याय और अन् य प्रकार के शोषिों से संरक्षि ;  

(ग) अिुसूणचत जाणतयों, अिुसूणचत जिजाणतयों और णपछडे वगों का सुिार ;  

(घ) अिुसूणचत जाणतयों, अिुसूणचत जिजाणतयों, णस् त्रयों और समाज के अन् य कमजोर वगों को सामाणजक न् याय 

कदलािा ।  

(4) णशक्षा और स् वास् ्  य सणमणत :––  

(क) णजला पररषद ्के सभी णशक्षा संबंिी कक्रयाकलापों की भारसािक होगी ;  

(ि) राष् रीय िीणत तथा राष् रीय और राज् य योजिाओं की रूपरेिा के भीतर णजले में णशक्षा की योजिा का       

णजम् मा लेगी ;  

(ग) णजला पररषद ्के शैणक्षक कक्रयाकलापों का सवेक्षि और मूल् यांकि करेगी ;  

(घ) णशक्षा, प्रौढ़ साक्षरता और सासं् कृणतक कक्रयाकलापों से संबंणित ऐसे अन् य कतयव् यों का पालि करेगी, जो णजला 

पररषद ्इसे समिुदणेशत करे ;  

(ङ) स् वास् ्  य सेवाएं, अस् पताल, जल प्रदाय, पररवार कल् याि और अन् य संबंणित णवषयों के कायय करेगी ।   

(5) कृणष और उद्योग सणमणत णिम् िणलणित से संबंणित कृत् य करेगी :–– 



 22 

(क) कृणष उत् पादि, पशुपालि, सहकाररता, समु‍ चय बांि और भूणम उद्धार ;  

(ि) ग्रामीि और कुटीर उद्योग ; और   

(ग) णजले के औद्योणगक णवकास की अणभवृणद्ध ।   

(6) णिमायि सणमणत, णिम् िणलणित के रिरिाव से संबंणित कृत् य करेगी :–– 

(क) सडक णजसके अंतगयत णजला सडकें  भी हैं, पुल और पुणलया,  

(ि) इसके णियंत्रिािीि या सरकार या ककसी लोक प्राणिकारी द्वारा इसको अंतररत भविों का रिरिाव ; और   

(ग) िौकाओं, फेरी, जल मागों आकद का रिरिाव ।   

(7) उपिारा (1) से उपिारा (6) में णिर्दयष् ट स् थायी सणमणतयां, ऊपर णिर्दयष् ट कृत् य उस सीमा तक करेगी णजतिी शणक् तया ं

उन् हें णजला पररषद ्द्वारा प्रत् यायोणजत की गई हैं ।   

(8) स् थायी सणमणतयां, उिको समिदुणेशत णवषयों की बाबत ऐसे अणतररक् त कतयव् यों का पालि करेंगी जो णवणहत ककए जाएं ।  

67. सणमणतयों की प्रकक्रया––(1) णजला पररषद ्सणमणतयों के सदस् यों के णिवायचि, उिमें कारबार के संचालि और सणमणतयों स े

संबंणित अन् य सभी णवषयों के संबंि में णवणियम बिा सकेगी ।  

(2) प्रत् येक स् थायी सणमणत का सभापणत उस सणमणत के कायय की बाबत णजला पररषद ्के अणिकारी से कोई सूचिा, णववरिी, 

णववरि या ररपोटय मांगिे और णजला पररषद ्की ककसी स् थावर संपणत्त में या सणमणत से संबंणित ऐसे संकमय में, जो प्रगणत पर हैं, प्रवेश 

करिे और णिरीक्षि करिे का हकदार होगा ।  

(3) प्रत् येक स् थायी सणमणत अपिे अणिवेशिों में णजला पररषद ्के ककसी अणिकारी की, जो सणमणत के कायय से संबंि रिता ह,ै 

उपणस् थणत की अपेक्षा करिे की हकदार होगी । मुख य काययपालक अणिकारी सणमणत के अिुदशेों के अिीि रहते हुए सूचिाएं जारी करेगा 

और उस अणिकारी की उपणस् थणत सुणिणश् चत करेगा ।  

68. सपंणत्त के अजयि िारि और व् ययि की शणक् त––(1) णजला पररषद ्को संपणत्त का अजयि, िारि करिे और व् ययि करिे की 

और संणवदा करिे की शणक् त होगी :  

परन् तु स् थावर संपणत्त के अजयि या व् ययि के सभी मामलों में णजला पररषद ्सरकार का पूवय अिुमोदि अणभप्राप् त करेगी । 

(2) णजला पररषद ्द्वारा अपिी णिणि से सणन् िर्मयत सभी सडकें , भवि या अन् य संकमय उसमें णिणहत होंगे ।  

(3) सरकार णजला पररषद ्को उसकी अणिकाररता के भीतर णस् थत कोई लोक संपणत्त आबंरटत कर सकेगी और तत् पश् चात् ऐसी 

संपणत्त णजला पररषद ्में णिणहत हो जाएगी ।  

(4)  जहां णजला पररषद ्को इस अणिणियम के ककसी प्रयोजि को कायायणन् वत करिे के णलए भूणम की आवश् यकता ह,ै वहां वह 

उक् त भूणम में णहत रििे वाले व् यणक् त या व् यणक् तयों से बातचीत करेगी और यकद वह करार करिे में असफल रहती है तो वह उपायुक् त 

भूणम के अजयि के णलए आवेदि करेगी और उपायुक् त, जब उसका यह समािाि हो जाता ह ैकक भूणम की सावयजणिक प्रयोजि के णलए 

आवश् यकता ह,ै तो वह भूणम अजयि अणिणियम, 1894 के उपबंिों के अिीि भूणम का अजयि करिे के णलए कदम उठाएगा और अजयि पर 

ऐसी भूणम णजला पररषद ्में णिणहत हो जाएगी ।  

69. णजला पररषद ्णिणि––(1) प्रत् येक णजला पररषद ्के णलए उस णजला पररषद ् के िाम से णजला पररषद ्णिणि गरठत की 

जाएगी और उसके िाते में णिम् िणलणित जमा होंगे :––  

(क) केन् द्रीय सरकार या राज् य सरकार द्वारा ककए गए अणभदाय या अिुदाि, यकद कोई हो, णजसके अंतगयत राज् य में 

संगृहीत वह भू-राजस् व भी ह ै; जो सरकार अविाररत करे ;    

(ि) ग्राम पंचायत या अन् य ककसी स् थािीय प्राणिकारी द्वारा ककए गए अणभदाय और अिुदाि, यकद कोई हों ;  

(ग) केन् द्रीय सरकार या राज् य सरकार द्वारा अिुदत्त या अपिी आणस् तयों की प्रणतभूणत पर णजला पररषद ्द्वारा णलया 

गया ऋि, यकद कोई हो ;  

(घ) णजले में उद्गृहीत सडक उपकर और लोक संकमय उपकर के आगम ;  

(ङ) णजला पररषद ्द्वारा उद्गृहीत पथकर रेट और फीस मद्ध ेसभी प्राणप् तयां ;  

(च) णजला पररषद ् में णिणहत, उसके द्वारा सणन् िर्मयत या उसके णियंत्रि और प्रबंि के अिीि रिे गए ककसी 

णवद्यालय, णचककत् सालय, औषिालय, भवि, संस् था या संकमय की बाबत सभी प्राणप् तयां ;  

(छ) दाि या अणभदाय के रूप में प्राप् त सभी रकमें और णजला पररषद ्के पक्ष में ककए गए ककसी न् यास या णवन् यास 

से सभी आय ;  



 23 

(ज) इस अणिणियम के या तद ्िीि बिाई गई उपणवणि के उपबंिों के अिीि अणिरोणपत और वसूल ककए गए सभी 

जुमायिे या शाणस् तयां जो णवणहत की जाएं ; और  

(झ) णजला पररषद ्द्वारा या उसकी ओर से प्राप् त अन् य सभी रकमें ।  

(2) प्रत् येक णजला पररषद ्अपिे प्रशासि के िचय को, णजसके अंतगयत अणिकाररयों और कमयचाररयों को वेति, भते्त, भणवष् य 

णिणि और अणिवार्षयकी का संदाय भी ह,ै पूरा करिे के णलए वार्षयक रूप से ऐसी रकम, जो अपेणक्षत हो, पृथक् करेगा और उपयोणजत 

करेगा । स् थापि पर संपूिय व् यय कुल व् यय के एक णतहाई से अणिक िहीं होगा ।   

(3) प्रत् येक णजला पररषद ्को इस अणिणियम के प्रयोजि को कायायणन् वत करिे के णलए ऐसी रकम, जो वह उणचत समझे, िचय 

करिे की शणक् त होगी ।  

(4) णजला पररषद ्णिणि, णजला पररषद ्में णिणहत होगी और णिणि के िाते में जमा रकम ऐसी अणभरक्षा में रिी जाएगी या 

ऐसी रीणत में णवणिणहत की जाएगी जो राज् य सरकार समय-समय पर णिदशे द े।  

70. करािाि––(1) ऐसी अणिकतम दर के अिीि रहते हुए जो सरकार द्वारा णवणहत की जाए, णजला पररषद ्:––  

(क) उसके द्वारा क‍ ची सडक से णभन् ि ककसी सडक पर या उसमें णिणहत या इसके प्रबंि के अिीि ककसी पुल पर 

स् थाणपत ककसी पथकर-रोि पर व् यणक् तयों, यािों या पशुओं या उिके ककसी वगय पर पथकर उद्गृहीत कर सकेगी ;  

(ि) उसके द्वारा या उसके प्रबंि के अिीि स् थाणपत ककसी फेरी की बाबत पथकर उद्गृहीत कर सकेगी ;  

(ग) सडक उपकर और लोक णिमायि उपकर उद्गृहीत कर सकेगी ;   

(घ) णिम् िणलणित फीस और रेट उद्गृहीत कर सकेगी, अथायत् :––  

(i) िावों या यािों के रणजस् रीकरि की फीस ;  

(ii) इसकी अणिकाररता के भीतर ऐसे स् थािों या तीथयस् थािों, हाट या मेलों में जो सरकार द्वारा 

अणिसूचिा द्वारा णवणिर्दयष् ट ककए जाएं, स् व‍ छता सुणविाएं उपलब् ि करािे के णलए फीस ;  

(iii) हाट या मेलों की अिुज्ञणप् त के णलए फीस ;  

(iv) प्रकाश रेट, जहां णजला पररषद ्द्वारा उसकी अणिकाररता की भीतर सावयजणिक मागों और स् थािों 

पर प्रकाश के णलए व् यवस् था की जाती ह ै; और  

(v) जल रेट, यहां णजला पररषद ्द्वारा अपिी अणिकाररता के भीतर पीिे, ससंचाई या ककसी अन् य प्रयोजि 

के णलए पािी का प्रदाय ककया जाता ह ै।  

(2) णजला पररषद ् ककसी याि का रणजस् रीकरि या उसके णलए फीस का उद ्ग्रहि िहीं करेगी और अपिी अणिकाररता के 

भीतर उपासिा स् थलों या तीथस् थािों, हाट और मेलों में स् व‍ छता व् यवस् था उपलब् ि िहीं कराएगी या उसके णलए फीस का उद ्ग्रहि 

िहीं करेगी यकद ऐसे याि का तत् समय प्रवृत्त ककसी णवणि के अिीि ककसी अन् य प्राणिकारी द्वारा रणजस् रीकरि ककया जा चुका है या 

स् व‍ छता व् यवस् था के णलए ककसी अन् य स् थािीय प्राणिकारी द्वारा इंतजाम ककया जा चुका ह ै।  

(3) पथकर, फीस या रेट का माि और उिके अणिरोपि के णलए णिबंिि और शतें ऐसी होंगी जो णवणियम द्वारा उपबंणित की 

जाएं । ऐसे णवणियम में ककसी वगय के मामले में सभी या ककसी पथकर, फीस या रेट से छूट के णलए उपबंि ककया जा सकेगा ।  

71. णजला पररषद ्का णवत्तीय इंतजाम––(1) णजला पररषद ्स् थािीय प्राणिकाररयों द्वारा ऋि लेिे से संबंणित तत् समय प्रवृत्त 

ककसी णवणि के उपबंिों के अिीि रहते हुए समय-समय पर सरकार के अिुमोदि से अणिणियम के प्रयोजि के णलए ऋि ले सकेगी और 

ऐसे ऋिों के प्रणतसंदाय के णलए णिक्षेप णिणि सृणजत कर सकेगी ।   

(2) उपिारा (1) में ककसी बात के होते हुए भी णजला पररषद ्सरकार से या सरकार की पूवय मंजूरी से बैंकों या अन् य णवत्तीय 

संस् थाओं से णवणिर्दयष् ट स् कीम के, जो उस प्रयोजि के णलए णजला पररषद ्द्वारा बिाई जाए, आिार पर अपिे उद्देश् यों को अग्रसर करिे के 

णलए िि उिार ले सकेगी ।  

72. बजट––(1) प्रत् येक णजला पररषद,् ऐसे समय पर और ऐसी रीणत से, जो णवणहत की जाए, आगामी वषय के णलए प्रत् येक वषय 

अपिी प्राक् कणलत प्राणप् तयों और संणवतरि का बजट तैयार करेगी और उसे सरकार को प्रस् तुत करेगी ।  

(2) सरकार ऐसे समय के भीतर, जो णवणहत ककया जाए, या तो बजट का अिुमोदि कर सकेगी या उसे ऐसे उपातंरिों के 

णलए, जो वह णिर्दयष् ट करे, णजला पररषद ्को वापस कर सकेगी । ऐसे उपांतरि ककए जािे पर, बजट ऐसे समय के भीतर, जो णवणहत 

ककया जाए, सरकार के अिुमोदि के णलए पुि: प्रस् तुत ककया जाएगा । यकद सरकार का अिुमादिे णवत्तीय वषय की अंणतम तारीि तक 

णजला पररषद ्को प्राप् त िहीं होता ह ैतो बजट सरकार द्वारा अिुमोकदत ककया गया समझा जाएगा ।  

(3) कोई भी व् यय तब तक उपगत िहीं ककया जाएगा जब तक बजट सरकार द्वारा अिुमोकदत िहीं ककया जाता ह ै।  



 24 

(4) णजला पररषद ्प्रत् येक वषय में एक अिुपूरक प्राक् कलि तैयार कर सकेगी, णजसमें अपिे बजट के ककसी उपान् तरि के णलए 

उपबंि होगा, और उसे ऐस समय के भीतर और ऐसी रीणत में जो णवणहत की जाए, अिुमोदि के णलए सरकार को प्रस् तुत कर सकेगी ।  

73. लिेा––णजला पररषद ्ऐसी रीणत में लेिे रिेगी, जो णवणहत की जाए ।   

74. सपंरीक्षा––(1) णजला पररषद ्के लेिाओं की संपरीक्षा ऐसे प्राणिकारी द्वारा की जाएगी, जो सरकार द्वारा णवणहत ककया 

जाए और संपरीक्षा रटप् पि की एक प्रणत संपरीक्षा के पूरा होिे के एक मास के भीतर णजला पररषद ्को अग्रेणषत की जाएगी ।   

(2) उपिारा (1) में णिर्दयष् ट संपरीक्षा ररपोटय की प्राणप् त पर, णजला पररषद ्या तो ककन् हीं ऐसी त्रुरटयों या अणियणमतताओं को 

सुिारेगी, जो संपरीक्षा में इंणगत की गई हैं और ऐसा करिे की सूचिा तीि मास के भीतर सरकार को भेजेगी या उक् त अवणि के भीतर 

ऐसी त्रुरटयों या अणियणमतताओं के संबंि में णवणहत प्राणिकारी को कोई और स् पष् टीकरि देगी, णजसकी उसके द्वारा कदए जािे की अपेक्षा 

की जाए ।   

75. णजला पररषद ् के कमयचाररवनृ् द––(1) उपायुक् त की पंणक् त का कोई अणिकारी णजला पररषद ् का मुख य काययपालक 

अणिकारी होगा जो सरकार द्वारा णियुक् त ककया जाएगा । सरकार ऐसे णिबंििों और शतों पर जो णवणहत ककए जाएं, णजला पररषद ्के 

णलए एक अपर मुख य काययपालक अणिकारी भी णियुक् त कर सकेगी ।  

(2) सरकार प्रत् येक णजला पररषद ्के णलए ऐसे णिबंििों और शतों पर जो णवणहत की जाएं, एक मुख य लेिा अणिकारी और 

एक मुख य योजिा अणिकारी भी णियुक् त करेगी ।   

(3) सरकार प्रत् येक णजला पररषद ्में समय-समय पर राज् य सेवा के समूह क, ि और ग के उतिे अणिकारी (णजिके अंतगयत 

णवद्यमाि स् थािीय प्राणिकारी द्वारा णियोणजत व् यणक् तयों में से ऐसी सेवा के णलए णियुक् त कोई अणिकारी भी है) और सरकार के अिीि 

सेवा करिे के णलए आबंरटत अणिल भारतीय सेवा के उतिे अणिकारी णजतिे सरकार आवश् यक समझे, तैिात करेगी ।  

(4) इस अणिणियम में या तत् समय प्रवृत्त ककसी अन् य णवणि में ककसी बात के होते हुए भी, सरकार या ककसी अन् य आणिकारी 

या इस णिणमत्त उसके द्वारा प्राणिकृत अन् य अणिकारी को एक णजले से दसूरे णजले में इस प्रकार तैिात ककए गए अणिकाररयों और 

पदिाररयों के स् थािान् तरि करिे की शणक् त होगी । 

(5) सरकार, ऐसी तारीि से जो णवणिर्दयष् ट की जाए, प्रत् येक णजला पररषद ्के णलए ऐसी सेवाएं गरठत कर सकेगी, जो णवणहत 

की जाएं ।  

76. मखु य काययपालक अणिकारी और अन् य अणिकाररयों के कृत् य––(1) इस अणिणियम द्वारा या उसके अिीि जैसा उपबंणित 

ह ैउसके णसवाय, मुख य काययपालक अणिकारी–– 

(क) णजला पररषद ्की िीणतयों और णिदशेों को कायायणन् वत करेगा और णजला पररषद ्के सभी संकमों और णवकास 

संबंिी स् कीमों के शीघ्रता से णिष् पादि के णलए आवश् यक अध् युपाय करेगा ;  

(ि) इस अणिणियम या उसके अिीि बिाए गए णियमों और णवणियमों द्वारा या उिके अिीि उस पर अणिरोणपत 

कतयव् यों का णिवयहि करेगा ;  

(ग) णजला पररषद ्के अध् यक्ष के सािारि अिीक्षि और णियंत्रि के ऐसे णियमों के, जो णवणहत ककए जाएं, अिीि 

रहते हुए णजला पररषद ्के अणिकाररयों और सेवकों पर णियंत्रि रिेगा ;  

(घ) णजला पररषद ्से संबंणित सभी कागज-पत्रों और दस् तावेजों को अपिी अणभरक्षा में रिेगा ; और  

(ङ) णजला पररषद ्णिणि में से िि णिकालेगा और उसका संणवतरि करेगा तथा ऐसी अन् य शणक् तयों का प्रयोग और 

ऐसे अन् य कृत् यों का पालि करेगा, जो णवणहत ककए जाएं ।  

(2) मुख य काययपालक अणिकारी णजला पररषद ्के प्रत् येक अणिवेशि में उपणस् थत होगा और णवचार-णवमशय में भाग ले सकेगा 

ककन् तु उसे कोई संकल् प प्रस् ताणवत करिे अथवा मतदाि करिे का अणिकार िहीं होगा । यकद मुख य काययपालक अणिकारी की राय में 

णजला पररषद ्के समक्ष कोई प्रस् ताव इस अणिणियम, या ककसी अन् य णवणि या तद ्िीि बिाए गए णियमों के उपबंिों के अणतक्रमि में है 

या उससे असंगत ह ैतो उसे णजला पररषद ्के ध् याि में लािा उसका कत्तयव् य होगा ।  

(3) मुख य लेिा अणिकारी णवत्तीय िीणत णवषयक मामलों में णजला पररषद ्को सलाह देगा और णजला पररषद ्के लेिाओं से 

संबंणित सभी मामलों के णलए, णजसके अंतगयत लेिा और बजट तैयार करिा भी है, उत्तरदायी होगा । 

(4) मुख य लेिा अणिकारी यह सुणिणश् चत करेगा कक उणचत मंजूरी के अिीि और इस अणिणियम तथा तद ्िीि बिाए गए 

णियमों और णवणियमों के अिुसार ही कोई व् यय उपगत हुआ ह ैऔर ककसी ऐसे व् यय को अिुज्ञात िहीं करेगा जो इस अणिणियम या 

णियमों और णवणियमों द्वारा अणिकदष् ट िहीं ह ैया णजसके णलए बजट में कोई उपबंि िहीं ककया गया है ।  

(5) अपर मुख य काययपालक अणिकारी मुख य काययपालक अणिकारी की उसके कतयव् यों के णिवयहि में सहायता करेगा ।  



 25 

(6) मुख य योजिा अणिकारी योजिा बिािे के णवषय में णजला पररषद ्को सलाह दगेा और णजला पररषद ्की योजिा से 

संबंणित सभी णवषयों के बारे में, णजसके अंतगयत आर्थयक णवकास और सामाणजक न् याय की योजिाएं तथा णजले की वार्षयक योजिा तैयार 

करिा भी ह,ै उत्तरदायी होगा ।  

77. अणभलिेों की मागं करि ेऔर िि आकद की वसलूी करि ेका अणिकार––(1) ग्राम पंचायत या णजला पररषद ्से संबंणित 

िि, लेिाओं, अणभलेिों और अन् य संपणत्त का कब् जा रििे वाला प्रत् येक व् यणक् त, इस प्रयोजि के णलए मुख य काययपालक अणिकारी की 

णलणित मांग पर तत् काल ऐसा िि या ऐसा लेिा, दस् तावेज या अन् य संपणत्त मुख य काययपालक अणिकारी को या उसे प्राप् त करिे के णलए 

मांग में प्राणिकृत व् यणक् त को सुपुदय करेगा या उिको पररदत्त करेगा ।  

(2) मुख य काययपालक अणिकारी ऐसे व् यणक् त द्वारा दये ककसी िि की वसूली के णलए उसी रीणत में और उन् हीं उपबन् िों के 

अिीि रहते हुए, जैसे कक व् यणक् तक्रणमयों से भू-राजस् व की बकाया की वसूली के णलए सुसंगत भू-राजस् व अणिणियम में हैं, कारयवाई भी 

कर सकेगा और ग्राम पंचायत या णजला पररषद ्से संबंणित लेिाओं और अणभलेिों की मांग करिे या ककसी अन् य संपणत्त की वसूली के 

प्रयोजि के णलए तलाशी वारंट जारी कर सकेगा तथा उसके बारे में ऐसी सभी शणक् तयों का प्रयोग कर सकेगा, जो दडं प्रकक्रया संणहता, 

1973 (1974 का 2) के अध् याय 7 के उपबंिों के अिीि ककसी मणजस् रेट द्वारा णवणिपूवयक प्रयोग की जा सकती ह ै।  

(3) ऐसा प्रत् येक व् यणक् त, णजसे यह जािकारी ह ैकक ककसी ग्राम पंचायत या णजला पररषद ्का कोई िि, लेिा, अणभलेि या 

अन् य संपणत्त कहां णछपाई गई ह,ै मुख य काययपालक अणिकारी को उसकी जािकारी देिे के णलए आबद्ध होगा ।  

(4) इस िारा के अिीि मुख य काययपालक अणिकारी के आदशे के णवरुद्ध अपील सरकार को होगी ।  

अध् याय 5 

प्रकीिय 

78. सणमणतयों के णवणिश् चयों को पिुरीणक्षत उपातंररत करि ेकी शणक् तया–ं–प्रत् येक ग्राम पंचायत और प्रत् येक णजला पररषद ्को 

उसकी ककसी सणमणत द्वारा ककए गए ककसी णवणिश् चय को पुिरीणक्षत या उपांतररत करिे की शणक् त होगी ।  

79. ग्राम पचंायतों की उपणवणि बिाि ेकी शणक् तया–ं–(1) ग्राम पंचायत, इस अणिणियम और तद ्िीि बिाए गए णियमों के 

उपबंिों के अिीि रहते हुए और णजला पररषद ्की पूवय मंजूरी से इस अणिणियम के प्रयोजिों को कायायणन् वत करिे के णलए उपणवणि बिा 

सकेगी ।  

(2) ग्राम पंचायत उपिारा (1) के अिीि कोई उपणवणि बिािे में यह उपबन् ि कर सकेगी कक उसका उल् लंघि ऐसे जुमायिे स े

जो णवणहत ककया जाए, दण् डिीय होगा ।   

(3) ककसी ऐसी उपणवणि में यह भी उपबन् ि हो सकेगा कक उसका उल् लंघि करिे वाले व् यणक् त से यह अपेणक्षत होगा कक वह, 

जहां तक उसकी शणक् त में ह,ै ऐसे उल् लंघि द्वारा काररत ररणष् ट का, यकद कोई हो, उपचार करे ।  

(4) इस िारा के अिीि बिाई गई सभी उपणवणियां पूवय प्रकाशि की शतय की अिीि होंगी और ऐसा प्रकाशि उस रीणत में 

होगा जो णवणहत की जाए ।  

80. णजला पररषद ्की णवणियम बिाि ेकी शणक् तया–ं–(1) णजला पररषद ्इस अणिणियम और तद ्िीि बिाए गए णियमों के 

उपबंिों के अिीि रहते हुए और सरकार की पूवय मंजूरी से अणिसूचिा द्वारा इस अणिणियम के प्रयोजिों को, जहां तक वे उसकी 

शणक् तयों और कतयव् यों से संबंणित ह,ै कायायणन् वत करिे के णलए णवणियम बिा सकेगी ।   

(2) उपिारा (1) के अिीि बिाए गए णवणियम पूवय प्रकाशि की शतय के अिीि होंगे और ऐसा प्रकाशि ऐसी रीणत में होगा जो 

णवणहत की जाए ।  

81. सरकार की आदशय णवणियम और उपणवणि बिाि ेकी शणक् तया–ं–(1) सरकार, इस अणिणियम और तद ्िीि बिाए गए 

णियमों के उपबन् िों के अिीि रहते हुए और प्ररूप के पूवय प्रकाशि के पश् चात ्एक मास से अन् यूि क्रमश: णजला पररषदों और ग्राम 

पंचायतों के णलए आदशय णवणियम और उपणवणि बिा सकेगी ।  

(2) ग्राम पंचायत या णजला पररषद ्संकल् प द्वारा उपिारा (1) के अिीि बिाई गई यथाणस् थणत, आदशय उपणवणि या णवणियम 

को अंगीकृत कर सकेगी और ऐसी उपणवणि और णवणियम ग्राम पंचायत या णजला पररषद ्की अणिकाररता के भीतर उस तारीि से प्रवृत्त 

हो जाएंगे, जो, यथाणस् थणत, ग्राम पंचायत या णजला पररषद ्णवणहत रीणत में प्रकाणशत सूचिा में णवणिर्दयष् ट करे ।  

82.क्षते्र में पररवतयि की दशा में सरकार की ग्राम पचंायत और णजला पररषद ् को णवघरटत और पिुगयरठत करि े                  

की शणक् त––(1) जब ककसी ग्राम पंचायत या णजला पररषद ्के क्षेत्र की पररसीमा में पररवतयि हो गया ह ैतब सरकार राजपत्र मे प्रकाणशत 

आदशे द्वारा, ऐसी पंचायत या पररषद ्को उस तारीि से जो आदेश में णवणिर्दयष् ट ह,ै णवघरटत कर सकेगी और णिदशे दे सकेगी कक 

संबंणित ग्राम पंचायत या णजला पररषद ्:–– 

(i) उस पंचायत क्षेत्र के णलए, णजसकी ग्राम पंचायत या उस णजले के णलए, णजसकी णजला पररषद ्णवघरटत कर दी 

गई है, पुिगयरठत की जाए ;   



 26 

(ii) ऐसे पंचायत क्षेत्र या णजला के णलए, णजिका दबुारा गठि ककया गया ह,ै स् थाणपत की जाए ।  

(2) उस ग्राम पंचायत या णजला पररषद ् के, जो उपिारा (1) के अिीि णवघरटत की गई ह,ै सदस् य सरकार के आदशे में 

णवणिर्दयष् ट तारीि से अपिा पद ररक् त कर देंगे ।  

(3) उपिारा (1) के उपबंिों के अिीि पुिगयरठत या स् थाणपत ग्राम पंचायत या णजला पररषद ्ऐसे सदस् यों से णमलकर बिेगी 

जो सरकार द्वारा िामणिर्दयष् ट ककए जाएं और जहां तक साध् य हो ऐसे सदस् य ऐसे व् यणक् त होंगे जो उस ग्राम पंचायत या णजला पररषद ्के 

सदस् य हैं, जो उपिारा (1) के अिीि णवघरटत की गई है ।   

(4) ग्राम पंचायत या णजला पररषद ्का अध् यक्ष इस अणिणियम में उपबंणित रीणत में णिवायणचत ककया जाएगा ।  

(5) इस प्रकार पुिगयरठत या स् थाणपत ग्राम पंचायत या णजला पररषद ्की अवणि छह मास से अिणिक इतिी अवणि की होगी 

जो सरकार आदशे में णवणिर्दयष् ट करेगी ।  

(6) उपिारा (5) के उपबंिों के अिुसार गरठत ग्राम पंचायत या णजला पररषद ्की अवणि की समाणप् त से पूवय ग्राम पंचायत या 

णजला पररषद ्का गठि इस अणिणियम के अिीि उपबंणित रीणत से ककया जाएगा :  

परन् तु जहां वह शेष अवणि णजसके णलए णवघरटत ग्राम पंचायत या णजला पररषद ्बिी रही होती, छह मास से कम ह,ै वहां  

यह आवश् यक िहीं होगा कक ऐसी अवणि के णलए ग्राम पंचायत या णजला पररषद ्का गठि करिे के णलए इस िारा के अिीि णिवायचि 

कराया जाए ।  

(7) उपिारा (1) के अिीि गरठत ग्राम पंचायत या णजला पररषद ्उस शेष अवणि के णलए ही बिी रहेगी णजस तक णवघरटत 

ग्राम पंचायत या णजला पररषद ्बिी रहती यकद उसका इस प्रकार णवघटि ि ककया गया होता ।   

(8) जब ककसी ग्राम पंचायत या णजला पररषद ्का णवघटि कर कदया गया है और इस िारा के अिीि उसका पुिगयठि या 

उसकी स् थापिा की गई ह ैतो ग्राम पंचायत या णजला पररषद ्की उतिी णिणि और अन् य संपणत्त जो उस ग्राम पंचायत या णजला पररषद ्

में णिणहत ह,ै णजसका णवघटि हो गया ह,ै इस िारा के अिीि पुिगयरठत या स् थाणपत ग्राम पंचायत या णजला पररषद ्में णिणहत हो 

जाएगी और ऋि और बाध् यताओं का ऐसा प्रभाग इिको अंतररत हो जाएगा, जैसा सरकार णलणित रूप में णिदशे द े। 

(9) णवघरटत ग्राम पंचायत या णजला पररषद ्के उस क्षेत्र के ककसी भाग से जो इस प्रकार पुिगयरठत या स् थाणपत ग्राम पंचायत 

या णजला पररषद ्के प्राणिकार के अिीि ह,ै उद्भूत होिे वाली या उससे संबंणित णसणवल और दांणडक काययवाणहयों, संणवदाओं, करारों 

और अन् य णवषयों या बातों से संबंणित अणिकार और दाणयत् व ऐसी ग्राम पंचायत या णजला पररषद ्में णिणहत हो जाएगे ।  

(10) उस ग्राम पंचायत या णजला पररषद ्द्वारा, जो णवघरटत कर दी गई ह,ै उस क्षेत्र के ककसी भाग की बाबत जो उस ग्राम 

पंचायत या णजला पररषद,् जो पुिगयरठत या स् थाणपत की गई ह,ै के प्राणिकार के अिीि ह,ै की गई या जारी की गई, अणिरोणपत या 

अिुदत्त ककसी णियुणक् त, अणिसूचिा, सूचिा, कर, आदशे, स् कीम, अिुज्ञणप् त, अिुज्ञा, णियम, णवणियम या प्ररूप के बारे में यह समझा 

जाएगा कक वे ऐसी ग्राम पंचायत या णजला पररषद ्द्वारा की गई, जारी की गई, अणिरोणपत या अिुदत्त की गई ह ैजब तक उसे ऐसी 

ग्राम पंचायत या णजला पररषद ्द्वारा की गई, जारी की गई, अणिरोणपत या अिुदत्त ककसी णियुणक् त, अणिसूचिा, सूचिा, प्ररूप, आदशे, 

स् कीम, अिुज्ञणप् त, अिुज्ञा, णियम और णवणियम द्वारा णिलंणबत िहीं ककया जाता ह ै।  

83. कणतपय अन् य दशाओं में ग्राम पचंायतों और णजला पररषदों का णवघटि––(1) यकद णजला पररषद ्की राय में, कोई ग्राम 

पंचायत अपिी शणक् तयों से आगे जाती ह ैया उिका दरुुपयोग करती ह ैया उिका पालि करिे में सक्षम िहीं ह ैया इस अणिणियम अथवा 

तत् समय प्रवृत्त ककसी अन् य णवणि के अिीि इस पर अणिरोणपत कतयव् यों का पालि करिे में बार-बार व् यणतक्रम करती ह ैतो णजला पररषद ्

राजपत्र में प्रकाणशत आदशे द्वारा, ऐसी ग्राम पंचायत को णवघरटत कर सकेगी ।  

(2) यकद सरकार की राय में, कोई णजला पररषद ्अपिी शणक् तयों से आगे जाती है या उिका दरुुपयोग करती है या उिका 

पालि करिे में सक्षम िहीं ह ैया इस अणिणियम अथवा तत् समय प्रवृत्त ककसी अन् य णवणि के अिीि इस पर अणिरोणपत कतयव् यों का 

पालि करिे में बार-बार व् यणक् तक्रम करती ह ै तो सरकार, राजपत्र में प्रकाणशत आदशे द्वारा, ऐसी णजला पररषद ् को णवघरटत            

कर सकेगी ।  

(3) णजला पररषद ्या सरकार, उपिारा (1) या उपिारा (2) के अिीि कोई आदशे प्रकाणशत करिे से पहले, यथाणस् थणत, ग्राम 

पंचायत या णजला पररषद ्को ऐसे आिारों से संसूणचत करेगी णजि पर वह ऐसा करिे का प्रस् ताव करती ह,ै और संबंणित पंचायत को 

प्रस् ताव के णवरुद्ध कारि दर्शयत करिे के णलए एक युणक् तयुक् त अवणि णियत करेगी और उसके स् पष् टीकरि और आक्षेपों, यकद कोई हों, 

पर णवचार करेगी ।   

(4) जब कोई ग्राम पंचायत या णजला पररषद ्णवघरटत कर दी जाती ह ैतब, ग्राम पंचायत या णजला पररषद ्के सभी सदस् य, 

आदशे में णवणिर्दयष् ट तारीि से सदस् यों के रूप में अपिे पद ररक् त कर देंगे ।  

(5) यकद कोई ग्राम पंचायत या णजला पररषद ्णवघरटत कर दी जाती ह ैतो :–– 



 27 

(क) ग्राम पंचायत और णजला पररषद ्की सभी शणक् तयों और कतयव् यों का इसके णवघटि की अवणि के दौराि ऐसे 

व् यणक् त या व् यणक् तयों द्वारा प्रयोग या अिुपालि ककया जाएगा, णजन् हें यथाणस् थणत णजला पररषद ्या सरकार, समय-समय पर 

इस णिणमत्त णियुक् त करे ।  

(ि) ग्राम पंचायत या णजला पररषद ्में णिणहत सभी संपणत्त णवघटि की अवणि के दौराि यथाणस् थणत, णजला पररषद ्

या सरकार में णिणहत रहेगी ; और   

(ग) णवघटि पर पद ररक् त करिे वाले व् यणक् त पुिर्ियवायचि के णलए पात्र होंगे ।   

84. सरकार द्वारा पचंायतों के कामकाज की जाचं––(1) सरकार, ककसी भी समय, ऐसे कारिों से, जो लेिबद्ध ककए जाएंगे, 

ककसी ग्राम पंचायत या णजला पररषद ्से संबंणित णवषयों के संबंि में या ऐसे ककसी णवषय की बाबत णजसके णलए, इस अणिणियम के 

अिीि सरकार की मंजूरी, अिुमोदि, सहमणत या आदशे अपेणक्षत ह,ै अपिे ककसी अणिकारी से जांच करा सकेगी ।   

(2) ऐसे जांच करिे वाले अणिकारी को णसणवल प्रकक्रया संणहता, 1908 (1908 का 5) के अिीि णसणवल न् यायालय की जांच के 

प्रयोजि के णलए साक्ष् य लेिे और साणक्षयों को उपणस् थत करािे और दस् तावेज प्रस् तुत करिे के णलए णववश करिे की शणक् तयां होंगी ।  

(3) सरकार उपिारा (1) के अिीि की गई जांचों के िचय के बारे में और उि पक्षकारों के, णजिके द्वारा तथा उस णिणि के बारे 

में णजसमें से उसका संदाय ककया जाएगा, आदशे कर सकेगी, और ऐसे आदशे का आयुक् त के या उसमें िामणिर्दयष् ट ककसी व् यणक् त के 

आवेदि पर ऐसे णिष् पादि ककया जाएगा मािो वह णसणवल न् यायालय की णडक्री हो ।   

85. णवकास स् कीमों का णिरीक्षि––(1) ग्राम पंचायत या णजला पररषद ्द्वारा ककए गए ककसी संकमय या णवकास स् कीमों के 

दक्षतापूिय और णमतव् ययी णिष् पादि के प्रयोजि के णलए सरकार का कोई अणिकारी या सािारि अथवा णवशेष आदशे द्वारा प्राणिकृत 

कोई व् यणक् त, यकद वह ग्राम पंचायत या णजला पररषद ्के या उसके अिीि ककसी ऐसे अणिकारी को जो ऐसे ककसी संकमय या णवकास 

स् कीम के णिष् पादि या अिुरक्षि का भारसािक है, तकिीकी मागयदशयि या सहायता दिेा आवश् यक समझाता ह ैतब वह अणिकारी या 

प्राणिकृत व् यणक् त, ऐसे संकमय या णवकास स् कीमों का, ऐसा मागयदशयि, सहायता या सलाह दिेे के णलए जो वह संकमय या णवकास स् कीमों के 

संबंि में आवश् यक समझता ह,ै काणलक णिरीक्षि कर सकेगा और ककए गए णिरीक्षि की ररपोटय ग्राम पंचायत या णजला पररषद ्को 

अग्रेणषत करेगा णजसमें पाई गई अणियणमतताओं और सुिार के णलए सुझावों का उल् लेि होगा ।  

(2) योजिा या स् कीम के कायायन् वयि में सरकारी णवभागों में क्रय, णिणवदा, गुिवत्ता णियंत्रि, तकिीकी मंजूरी लेिा और 

संपरीक्षा तथा पययवेक्षि के णलए लागू णियम ककसी पंचायत की दशा में यथावश् यक पररवतयिों सणहत लागू होंगे ।  

86. सरकार स े णिदशे––(1) इस अणिणियम में अन् तर्वयष् ट ककसी बात के होते हुए भी सरकार के णलए राज् य और राष् रीय 

िीणतयों से संबंणित मामलों में ग्राम पंचायत या णजला पररषद ्को णिदशे दिेा णवणिपूिय होगा और ऐसे णिदशे ग्राम पंचायत या णजला 

पररषद ्पर आबद्धकारी होंगे ।  

(2) सरकार,–– 

(क) ककसी ग्राम पंचायत या णजला पररषद ्के कब् जे में या उसके णियंत्रि के अिीि कोई अणभलेि रणजस् टर या कोई 

अन् य दस् तावेज मंगा सकेगी ;  

(ि) ककसी ग्राम पंचायत या णजला पररषद ्से णववरिी, योजिा, प्राक् कलि, णववरि, लेिा या आंकडे प्रस् तुत करिे 

की अपेक्षा कर सकेगी ; और  

(ग) ककसी ग्राम पंचायत या णजला पररषद ्से ऐसी ग्राम पंचायत या णजला पररषद ्से संबंणित ककसी णवषय के बारे 

में कोई सूचिा या ररपोटय प्रस् तुत करिे की अपेक्षा कर सकेगी ।   

87. ग्राम पचंायत और णजला पररषद ्की बाबत आयकु् त और मुख य काययपालक अणिकारी की शणक् तया–ं–(1) मुख य काययपालक 

अणिकारी ग्राम पंचायत की बाबत णिम् िणलणित शणक् तयों का प्रयोग कर सकेगा, अथायत् :–– 

(क) ककसी ग्राम पंचायत की काययवाणहयों या ग्राम पंचायत के कब् जे में की या उसके णियंत्रि के अिीि ककसी पुस् तक 

या दस् तावेज का कोई उद्धरि या कोई णववरिी या लेिा णववरि या ररपोटय मंगा सकेगा ;  

(ि) ककसी ग्राम पंचायत से ककसी ऐसे आक्षेप पर, जो उसे ऐसा प्रतीत होता ह ैकक वह ऐसी ककसी बात के ककए जािे 

से णवद्यमाि ह ैजो ऐसी ग्राम पंचायत द्वारा की जािे वाली ह ैया की जा रही है या ऐसी ककसी सूचिा पर, जो उसे ऐसी प्रतीत 

होती ह ैकक वह ऐसी ग्राम पंचायत द्वारा कोई बात ककया जािा आवश् यक बिाती ह,ै ऐसे समय के भीतर जो वह णियत करे, 

णवचार करिे की अपेक्षा कर सकेगा ;  

(ग) ककसी कतयव् य को णवणिर्दयष् ट अवणि के भीतर पूरा करिे का आदेश द ेसकेगा यकद ग्राम पंचायत िे ककसी कतयव् य 

के पालि में व् यणतक्रम ककया ह ैऔर यकद ऐसे कतयव् य का णवणिर्दयष् ट अवणि के भीतर पालि िहीं ककया जाता ह ैतो ककसी 

व् यणक् त को ऐसे कतयव् य का पालि करिे के णलए णियुक् त कर सकेगा और णिदशे द ेसकेगा कक उसके व् यय का संदाय व् यणतक्रमी 

ग्राम पंचायत द्वारा इतिी अवणि के भीतर जो वह णियत करे, ककया जाएगा ;  



 28 

(घ) ककसी ग्राम पंचायत को कोई कर उद्गृहीत करिे का णिदशे दे सकेगा यकद वह इस अणिणियम के उपबंिों के 

अिुसार कर उद्गृहीत करिे में असफल रही ह ै;  

(ङ) ग्राम पंचायत या उसकी ककसी सणमणत का अणिवेशि बुला सकेगा यकद उस ग्राम पंचायत या उसकी सणमणत का 

इस अणिणियम या तद ्िीि बिाए गए णियमों के उपबंिों के अिुसार कोई अणिवेशि िहीं हुआ ह ै।  

(2) ग्राम पंचायत मुख य काययपालक अणिकारी द्वारा उपिारा (1) के िंड (ग) के अिीि ककए गए ककसी आदशे के णवरुद्ध ऐसे 

आदशे की तारीि से तीस कदि के भीतर आयुक् त को अपील कर सकेगी ।  

(3) आयुक् त णजला पररषद ्की बाबत णिम् िणलणित शणक् तयों का प्रयोग कर सकेगा, अथायत् :–– 

(क) ककसी णजला पररषद ्की काययवाणहयों या णजला पररषद ् के कब् जे में की या उसके णियंत्रि के अिीि ककसी 

पुस् तक या दस् तावेज का कोई उद्धरि या कोई णववरिी या लेिा णववरि या ररपोटय मंगा सकेगा ;  

(ि) ककसी णजला पररषद ्से ककसी ऐसे आक्षेप पर, जो उसे ऐसा प्रतीत होता ह ैकक यह ऐसी बात के ककए जािे से 

णवद्यमाि ह,ै जो ऐस ेणजला पररषद ्द्वारा की जािे वाली ह ैया की जा रही ह ैया ऐसी ककसी सूचिा पर, जो उसे ऐसी प्रतीत 

होती ह ैकक वह ऐसी णजला पररषद ्द्वारा कोई बात ककया जािा आवश् यक बिाती ह,ै ऐसे समय के भीतर जो वह णियत करे, 

णवचार करिे की अपेक्षा कर सकेगा ;  

(ग) ककसी कतयव् य को णवणिर्दयष् ट अवणि के भीतर पूरा करिे का आदेश द ेसकेगा यकद णजला पररषद ्िे ककसी कतयव् य 

के पालि में व् यणतक्रम ककया है और यकद ऐसे कतयव् य का णवणिर्दयष् ट अवणि के भीतर पालि िहीं ककया जाता ह,ै तो ककसी 

व् यणक् त को ऐसे कतयव् य का पालि करिे के णलए णियत कर सकेगा और णिदशे द ेसकेगा कक उसके व् यय का संदाय व् यणतक्रमी 

णजला पररषद ्द्वारा ऐसी अवणि के भीतर, जो वह णियत करे, ककया जाएगा ;  

(घ) णजला पररषद ्या उसकी ककसी सणमणत का अणिवेशि बुला सकेगा यकद उस णजला पररषद ्या उसकी ककसी 

सणमणत का इस अणिणियम या तद ्िीि बिाए गए णियमों के उपबंिों के अिुसार कोई अणिवेशि िहीं हुआ ह ै।   

(4) णजला पररषद ्आयुक् त द्वारा उपिारा (3) के िंड (ग) के अिीि ककए गए ककसी आदशे के णवरुद्ध ऐसे आदेश की तारीि स े

तीस कदि के भीतर सरकार को अपील कर सकेगी ।   

88. सरकार और मखु य काययपालक अणिकारी की ग्राम पचंायत या णजला पररषद ्के व् यणतक्रम करि ेपर कतयव् यों के पालि की 

व् यवस् था करि ेकी शणक् त––जब णजला पररषद ्की दशा में सरकार को और ग्राम पचंायत की दशा में मुख य काययपालक अणिकारी को 

ककए गए पररवाद पर या अन् यथा सूणचत ककया जाता ह ैकक ककसी णजला पररषद ्या ग्राम पंचायत िे इस अणिणियम द्वारा या उसके 

अिीि या तत् समय प्रवृत्त ककसी णवणि द्वारा या उसके अिीि उस पर अणिरोणपत ककसी कतयव् य का पालि करिे में व् यणतक्रम ककया है और 

यकद सम् यक् रूप से जांच करिे के पश् चात्, यथाणस् थणत, सरकार या मुख य काययपालक अणिकारी का यह समािाि हो जाता ह ैकक कोई 

णजला पररषद ्या ग्राम पंचायत उक् त कतयव् य का पालि करिे में असफल रही है तो, यथाणस् थणत, सरकार या मुख य काययपालक अणिकारी 

उक् त कतयव् य का पालि ककए जािे के णलए कोई अवणि णियत कर सकेगा :  

परन् तु ऐसी कोई अवणि तब तक णियत िहीं की जाएगी जब तक कक संबंणित णजला पररषद ्या ग्राम पंचायत को यह कारि 

दर्शयत करिे का कोई अवसर ि द ेकदया गया हो कक ऐसा कोई आदशे क् यों िहीं ककया जाए ।  

89. णजला पररषद ्की ग्राम पचंायत के आदशेों आकद के णिष् पादि को णिलणंबत करि ेकी शणक् त––(1) यकद णजला पररषद ्की 

राय में, ग्राम पंचायत के ककसी आदशे या संकल् प या ग्राम पंचायत के ककसी प्राणिकारी या अणिकारी के ककसी आदशे का णिष् पादि या 

ककसी ऐसी बात का ककया जािा, णजसे ग्राम पंचायत द्वारा या उसकी ओर से ककया जािा ह ै या ककया जा रहा ह,ै अन् यायपूिय, 

णवणिणवरुद्ध, अिुणचत ह ैया उससे जिता को कोई हाणि या क्षोभ काररत हो रहा ह ैया काररत होिे या शाणन् त भंग होिे की संभाविा ह ै

तो वह ककसी आदशे द्वारा उसके णिष् पादि को णिलंणबत कर सकेगी या उसके ककए जािे को प्रणतणषद्ध कर सकेगी ।   

(2) जब णजला पररषद ्उपिारा (1) के अिीि कोई आदशे करती ह ैतो वह सरकार को और उससे प्रभाणवत ग्राम पंचायत को 

ऐसा करिे के कारिों के णववरि के साथ आदशे की एक-एक प्रणत तुरन् त अग्रेणषत करेगी और यह सरकार का णववेकाणिकार होगा कक वह 

उस आदशे की पुणष् ट करे या उसे णविंणडत करे या यह णिदशे द ेकक वह उपांतरिों सणहत या उिके णबिा स् थायी रूप से या ऐसी अवणि 

के णलए जो वह ठीक समझे, प्रवतयि में बिा रहगेा :  

परन् तु इस िारा के अिीि ककए गए णजला पररषद ् के ककसी भी आदशे को, सरकार द्वारा ग्राम पंचायत को उक् त आदशे के 

णवरुद्ध कारि दर्शयत करिे के णलए युणक् तयुक् त अवसर कदए णबिा पुष् ट, पुिरीणक्षत या उपांतररत िहीं ककया जाएगा ।   

90. सरकार की णवणि णवरुद्ध आदशे या संकल् प के णिष् पादि को णिलणंबत करि े की शणक् त––(1) यकद मुख य काययपालक 

अणिकारी से इस णिणमत्त ककसी ररपोटय की प्राणप् त पर या अन् यथा सरकार की यह राय है कक णजला पररषद ्के ककसी आदशे या संकल् प का 

णिष् पादि या ककसी ऐसी बात का ककया जािा, णजसे णजला पररषद ्द्वारा या उसकी ओर से ककया जािा ह ैया ककया जा रहा ह ै ; 

अन् यायपूिय, णवणिणवरुद्ध या अिुणचत ह ैया जिता को कोई क्षणत या क्षोभ काररत हो रहा ह ैया काररत होिे या शांणत भंग होिे की 

संभाविा ह ैतो वह ककसी आदशे द्वारा उसके णिष् पादि को णिलंणबत कर सकेगी या उसके ककए जािे को प्रणतणषद्ध कर सकेगी ।  



 29 

(2) जब सरकार उपिारा (1) के अिीि कोई आदशे करती ह ैतो वह, उससे प्रभाणवत णजला पररषद ्को आदशे की एक प्रणत 

ऐसा करिे के कारिों के णववरि सणहत तुरन् त अग्रेणषत करेगी और सरकार आदशे की पुणष् ट या उसे णविंणडत कर सकेगी या णिदशे द े

सकेगी कक वह स् थायी रूप से या ऐसी अवणि के णलए जो वह ठीक समझे, उपांतरिों सणहत या उिके णबिा प्रवतयि में बिा रहगेा :  

परन् तु सरकार द्वारा, संबंणित णजला पररषद ्को उक् त आदशे के णवरुद्ध कारि दर्शयत करिे के णलए युणक् तयुक् त अवसर कदए 

णबिा इस उपिारा के अिीि कोई भी आदशे िहीं ककया जाएगा ।   

91. सामाि और उपस् कर का क्रय––(1) सरकार, सािारि या णवशेष आदशे द्वारा णिम् िणलणित सभी या ककसी णवषय के 

संबंि में उपबंि कर सकेगी, अथायत् :––  

(क) ऐसी रीणत, णजसमें णजला पररषद ् तथा ग्राम पंचायत द्वारा अपेणक्षत सामाि, उपस् कर, मशीिरी और अन् य 

वस् तुओं का क्रय ककया जाएगा ;  

(ि) ऐसी रीणत, णजसमें ग्राम पंचायत या णजला पररषद ् द्वारा संकमों, संणवदाओं और प्रदायों के णलए णिणवदा 

आमंणत्रत की जाएगी और उसकी जांच की जाएगी, तथा उसे स् वीकार ककया जाएगा ;   

(ग) ऐसी रीणत, णजसमें संकमों और णवकास की स् कीमों का णिष् पादि और णिरीक्षि ककया जाएगा तथा ऐसे संकमों 

और स् कीमों की बाबत संदाय ककया जा सकेगा; और   

(घ) इस उपिारा के प्रयोजि के णलए सणमणत का गठि ।   

(2) णिणियां णिकालिे, णबलों के प्ररूप, व् यय उपगत करिे, लेिा रििे, णहसाब दिेे से संबंणित अन् य सभी णवषयों तथा ऐसे 

अन् य णवषयों की बाबत, उपिारा (1) में अणभव् यक् त रूप से जैसा अन् यथा उपबंणित ह,ै उसके णसवाय, सरकार के णवभागों को लागू होिे 

वाले कायायन् वयि णियम, ग्राम पंचायत या णजला पररषद ्की दशा में यथा आवश् यक पररवतयि सणहत लागू होंगे ।   

92. कणतपय दशाओं में प्रशासक णियुक् त करि ेकी शणक् त––(1) जब कभी,––  

(क) ककसी सक्षम न् यायालय या प्राणिकारी के ककसी आदशे द्वारा इस अणिणियम के अिीि णजला पररषद ्के ककसी 

सािारि णिवायचि या इसके फलस् वरूप ककन् हीं काययवाणहयों पर रोक लगा दी गई हो; या   

(ि) णजला पररषद ्के सभी सदस् य या उसके दो णतहाई सदस् यों िे त् यागपत्र द ेकदया हो,  

तो, सरकार, राजपत्र में अणिसूचिा द्वारा, ऐसी अवणि के णलए जो अणिसूचिा में णवणहत की जाए, एक प्रशासक णियुक् त करेगी और 

वैसी ही अणिसूचिा द्वारा ऐसी णियुणक् त की अवणि को कम कर सकेगी या बढ़ा सकेगी, तथाणप यह कक ऐसी णियुणक् त की कुल अवणि 

छह मास से अणिक की िहीं होगी ।  

 (2) इस अणिणियम में अन् तर्वयष् ट ककसी बात के होते हुए भी, उपिारा (1) के अिीि प्रशासक के णियुक् त होिे पर, णजला 

पररषद ्और उसकी सणमणतयां तथा उस णजला पररषद ्का अध् यक्ष या उपाध् यक्ष जो इस अणिणियम या ककसी अन् य णवणि के उपबन् िों को 

कायायणन् वत करिे के णलए भारसािक ह,ै इस अणिणियम या ककसी अन् य णवणि द्वारा या इसके अिीि उिको प्रदत्त ककसी शणक् त का प्रयोग 

िहीं करेंगे और उि पर अणिरोणपत कतयव् यों का णिवयहि या कृत् यों का पालि िहीं करेंगे और ऐसी णियुणक् त की अवणि के दौराि ऐसी 

सभी शणक् तयों का प्रयोग और ऐसे सभी कतयव् यों का णिवयहि और कृत् यों का पालि प्रशासक द्वारा ककया जाएगा ।   

93. अवचार, आकद के णलए सदस् यों को हटािा––सरकार, यकद वह ठीक समझे, ग्राम पंचायत या णजला पररषद ्की णसफाररश 

पर या अन् यथा, ककसी सदस् य को, यकद वह सदस् य अपिे कतयव् यों के णिवयहि में अवचार या णिकृष् ट आचरि का दोषी ह ैया वह सदस् य के 

रूप में अपिे कतयव् यों का पालि करिे में सक्षम िहीं रहा ह,ै तो उसे सुिवाई का अवसर दिेे के पश् चात् और ऐसी जांच के पश् चात् जो वह 

ठीक समझे, हटा सकेगी ।  

94. पंचायतों स ेशणक् तयों और कृत् यों को वापस लिे ेपर णिबिंि––इस अणिणियम के अिीि ककसी मामले की बाबत, ककसी 

शणक् त, कृत् यों और कतयव् यों का ककसी पंचायत को अंतरि होते हुए भी सरकार, उस णिणमत्त पंचायत से प्राप् त ककसी प्रस् ताव पर या जहां 

उसका यह समािाि हो जाता ह ैकक णवषय की प्रकृणत में पररवतयि के फलस् वरूप जैसे कक ककसी प्राथणमक स् वास् ् य केन् द्र का माध् यणमक 

स् वास् ्  य केन् द्र या अस् पताल में संपररवतयि या ककसी बीज गुिि फामय का कृणष अिुसंिाि फामय में संपररवतयि या ककसी सडक के राजमागय 

का भाग बि जािे के फलस् वरूप वह णवषय सुसंगत पंचायत की कृत् य सूची का णवषय िहीं रह जाता ह ैऔर ऐसे णवषय की बाबत 

पंचायत की शणक् तयों, कृत् यों और कतयव् यों को वापस लेिा आवश् यक हो जाता ह,ै राजपत्र में अणिसूचिा द्वारा अणिसूचिा में णवणिर्दयष् ट 

तारीि से ऐसी शणक् तयों, कृत् यों और कतयव् यों को वापस ले सकेगी और ऐसे आिुषंणगक तथा पाररिाणमक आदशे कर सकेगी णजिका ऐसे 

णवषयों, णजिके अन् तगयत संपणत्त, अणिकार और दाणयत् वों का, जो पंचायत या कमयचाररवृन् द, में णिणहत हों, यकद कोई हो, ग्रहि करिा भी 

ह ैऔर जो यथाणस् थणत पंचायत को अंतररत ककए गए हों, के णलए उपबंि ककया जािा आवश् यक हो ।  

95. णवकास योजिाओं का तयैार ककया जािा––(1) प्रत् येक ग्राम पंचायत प्रणत वषय एक णवकास योजिा तैयार करेगी और उसे 

ऐसी तारीि से पहले और ऐसे प्ररूप में, जो णवणहत ककया जाए, णजला पररषद ्को प्रस् तुत करेगी ।  

(2) प्रत् येक णजला पररषद ्प्रणत वषय ग्राम पंचायत की णवकास योजिा को शाणमल करिे के पश् चात् णजले की णवकास योजिा 

तैयार करेगी और उसे इस अणिणियम की िारा 96 के अिीि गरठत णजला योजिा सणमणत को प्रस् तुत करेगी ।  



 30 

96. णजला योजिा सणमणत––(1) सरकार, प्रत् येक णजले में णजला पररषद,् ग्राम पंचायतों, िगर पंचायत, िगरपाणलका पररषद ्

और िगर णिगम द्वारा तैयार की गई योजिाओं को समकेकत करिे और संपूिय णजले के णलए प्रारूप णवकास योजिा तैयार करिे के णलए, 

प्रत् येक णजले में एक णजला योजिा सणमणत का गठि करेगी ।   

(2) णजला योजिा सणमणत णिम् िणलणित से णमलकर बिेगी :––  

 (क) लोक सभा के ऐसे सदस् य जो संपूिय णजले या उसके ककसी भाग का प्रणतणिणित् व करते हैं ;   

(ि) राज् य णविाि सभा के सभी सदस् य णजिके णिवायचि-क्षेत्र उस णजले के भीतर आते ह ै;  

(ग) णजला पररषद ्का अध् यक्ष ;  

(घ) िगर णिगम या िगरपाणलका पररषद ् के क्रमश: महापौर या अध् यक्ष, णजिकी णजले के मुख यालय पर 

अणिकाररता ह,ै और   

(ङ) इतिी संख या में व् यणक् त, जो सणमणत की कुल सदस् य संख या के चार बटा पांच से अन् यूि हों, और जो सरकार 

द्वारा णवणहत की जाएं, जो णजले में ग्रामीि क्षेत्रों और शहरी क्षेत्रों की जिसंख या के बीच के समािुपात में, णजले में णजला 

पररषद,् िगर पंचायत और िगर णिगम तथा िगरपाणलका पररषद ्के पाषयदों में से णवणहत रीणत में णिवायणचत हुए हों ।   

(3) णजला सहकारी बैंक और भूणम णवकास बैंक के अध् यक्ष सणमणत के स् थायी आमंणत्रत सदस् य होंगे ।  

(4) मुख य काययपालक अणिकारी सणमणत का सणचव होगा ।  

(5) णजले का उपायुक् त, णजला योजिा सणमणत का अध् यक्ष होगा । 

(6) णजला योजिा सणमणत, णजले में णजला पररषद,् ग्राम पंचायत, िगर पंचायत, िगरपाणलका पररषद ्और िगर णिगम द्वारा 

तैयार की गई योजिओं को समेककत करेगी और संपूिय णजले के णलए एक प्रारूप णवकास योजिा तैयार करेगी ।  

(7) प्रत् येक णजला योजिा सणमणत प्रारूप णवकास योजिा तैयार करिे में :–– 

(क) णिम् िणलणित को ध् याि में रिेगी––   

(i) णजले में णजला पररषद,् ग्राम पंचायतों, िगर पंचायतों, िगर णिगम और िगरपाणलका पररषद ्के बीच 

सामान् य णहत के णवषय, णजसमें स् थाि संबंिी णियोजि, जल और अन् य भौणतक और प्राकृणतक संसािि में णहस् सा 

बांटिा, अवसंरचिा का और पयायवरि संबंिी संरक्षि का एकीकृत णवकास भी सणम् मणलत ह ै;  

(ii) उपलब् ि संसाििों की सीमा और ककस् म, चाह ेणवत्तीय हो या अन् यथा ;  

(ि) ऐसी संस् थाओं और संगठिों से परामशय, णजन् हें सरकार, आदशे द्वारा णवणिर्दयष् ट करे ।   

(8) प्रत् येक णजला योजिा सणमणत का अध् यक्ष, उक् त सणमणत द्वारा णसफाररश ककए गए अिुसार णवकास योजिा सरकार को 

अग्रेणषत करेगी ।   

97. पचंायतों के णलए णवत्त आयोग––(1) राज् यपाल प्रत् येक पांच वषय में एक णवत्त आयोग का गठि करेगा जो णजला पररषदों 

और ग्राम पंचायतों की णवत्तीय णस् थणत का पुिर्वयलोकि करेगा, और जो––  

(क) (i) सरकार द्वारा उद ्ग्रहिीय करों, शुल् कों, पथ करों और फीसों के शुद्ध आगमों, राज् य और णजला पररषदों और 

ग्राम पंचायतों के बीच जो उिके बीच णवभाणजत ककए जाएं, णवतरि को और णजला पररषद ्और ग्राम पंचायतों के बीच ऐस े

आगमों के तत् संबंिी भाग का आबंटि ;  

(ii) ऐसे करों, शुल् कों, पथ करों, और फीसों का अविारि जो णजला पररषद ्और ग्राम पंचायतों को समिुदणेशत की 

जाएं या उिके द्वारा णवणियोणजत की जाएं ;   

(iii) राज् य की संणचत णिणि में से णजला पररषद ् और ग्राम पंचायतों की सहायता अिुदाि शाणसत करिे वाले 

णसद्धांतों के बारे में,   

(ि) णजला पररषद ्और ग्राम पंचायतों की णवत्तीय णस् थणत को सुिारिे के णलए आवश् यक अध् युपायों के बारे में ;  

(ग) णजला पररषदों और ग्राम पंचायतों के सुदढृ़ णवत्तीय णहत ; राज् यपाल द्वारा णवत्त आयोग को णिर्दयष् ट ककए गए 

ककसी अन् य णवषय के बारे में सरकार को णसफाररश करेगा ।  

(2) णवत्त आयोग में एक सदस् य होगा ।  

(3) णवत्त आयोग का सदस् य, ऐसी रीणत में जो णवणहत की जाए, ऐसे व् यणक् तयों में से णियुक् त ककया जाएगा :–– 

(क) जो लोक कायों में अिुभव रिते हैं ; या  



 31 

(ि) जो ककसी उ‍ च न् यायालय के न् यायािीश हैं या रह चुके हैं या न् यायािीश णियुक् त ककए जािे के णलए         

अर्हयत हैं; या  

(ग) णजिको सरकार के णवत्त प्रबंि और लेिाओं का णवशेष ज्ञाि ह ै; या  

(घ) णजन् हें णवत्तीय णवषयों में और प्रशासि का व् यापाक अिुभव रहा ह ै; या  

(ङ) णजन् हें अथयशास् त्र का णवशेष ज्ञाि ह ै।  

(4) णवत्त आयोग अपिी प्रकक्रया अविाररत करेगा ।  

(5) णवत्त आयोग का सदस् य राज् यपाल को संबोणित अपिे हस् ताक्षर सणहत लेि द्वारा अपिा पद त् याग सकेगा, ककन् तु वह तब 

तक पद पर बिा रहगेा जब तक राज् यपाल द्वारा उसका त् यागपत्र स् वीकार िहीं कर णलया जाता ह ै।  

(6) उपिारा (5) के अिीि सदस् य के त् यागपत्र से या ककसी अन् य कारि से हुई आकणस् मक ररणक् त, िई णियुणक् त द्वारा भरी जा 

सकेगी और इस प्रकार णियुक् त कोई सदस् य उस शेष अवणि के णलए पद िारि करेगा, णजसके णलए वह सदस् य, णजसके स् थाि पर वह इस 

प्रकार णियुक् त ककया गया था, पद िारि करता ।  

(7) आयोग को, अपिे कृत् यों का अिुपालि करिे के णलए णिम् िणलणित शणक् तयां होंगी, अथायत् :–– 

(क) ककसी अणिकारी या प्राणिकारी से कोई अणभलेि मंगािा ;   

(ि) ककसी व् यणक् त को साक्ष् य दिेे या अणभलेि प्रस् तुत करिे के णलए समि करिा ; या   

(ग) ऐसी अन् य शणक् तयां जो णवणहत की जाएं ।   

(8) राज् यपाल, इस िारा के अिीि णवत्त आयोग द्वारा की गई प्रत् येक णसफाररश को, उस पर की गई कारवाई के बारे में एक 

स् पष् टीकारक ज्ञापि के साथ राज् य णविाि-मंडल के समक्ष रिवाएगा ।   

98. राज् य णिवायचि आयोग––(1) इस अणिणियम और तद ्िीि बिाए गए णियमों के अिीि राज् य में पचंायत णिकायों के णलए 

सभी णिवायचिों के णलए णियंत्रक िामावणलयां तैयार करािे और उि सभी णिवायचिों के संचालि का अिीक्षि, णिदशेि और णियंत्रि 

करिे के णलए सरकार द्वारा एक राज् य णिवायचि आयोग गरठत ककया जाएगा ।  

(2) आयोग एक राज् य णिवायचि आयुक् त से बिेगा णजसे राज् यपाल द्वारा णियुक् त ककया जाएगा ।  

(3) राज् य णिवायचि आयुक् त की सेवा की शतें और पदावणि ऐसी होंगी जो राज् यपाल णियम द्वारा अविाररत करे :  

परन् तु राज् य णिवायचि आयुक् त को उसके पद से उसी रीणत से और उन् हीं आिारों पर ही हटाया जाएगा अन् यथा िहीं, णजस 

रीणत से और णजि आिारों पर उ‍ च न् यायालय के न् यायािीश को हटाया जाता ह,ै और राज् य णिवायचि आयुक् त की सेवा की शतों में 

उसकी णियुणक् त के पश् चात् उसके णलए अलाभकारी पररवतयि िहीं ककया जाएगा ।  

(4) जब राज् य णिवायचि आयोग ऐसा अिुरोि करे तब सरकार, राज् य णिवायचि आयोग को उतिे कमयचाररवृन् द उपलब् ि 

कराएगा, णजतिे इस अणिणियम के अिीि राज् य णिवायचि आयोग को सौंपे गए कृत् यों के णिवयहि के णलए आवश् यक हैं ।  

99. जिगििा के पश् चात ्णिवायणचत सदस् यों का अविारि––प्रत् येक जिगििा के आकंडों के प्रकाशि पर ककसी पंचायत के 

णिवायणचत सदस् यों की संख या राज् य सरकार द्वारा उस जिगििा पर अणभणिणश् चत पंचायत क्षेत्र की जिसंख या के आिार पर अविाररत 

की जाएगी :  

परन् तु उपरोक् तािुसार सदस् यों की संख या का अविारि, इस िारा के अिीि जिगििा के प्रकाशि के समय णवद्यमाि 

पंचायतों की तत् समय संरचिा पर उसकी अवणि की समाणप् त तक प्रभाव िहीं डालेगा ।  

100. ग्राम पचंायत और णजला पररषद ् की सदस् यता णिवायचि के णलए अहयता––प्रत् येक ऐसा व् यणक् त, णजसका िाम ग्राम 

पंचायत या णजला पररषद ्णिवायचि-क्षेत्र के भीतर मतदाताओं की सूची में है और जो ग्राम पंचायत या णजला पररषद् क्षेत्र के भीतर 

सािारितया णिवासी ह,ै जब तक उसे इस अणिणियम या तत् समय प्रवृत्त ककसी अन् य णवणि के अिीि णिरर्हयत ि ककया गया हो, ग्राम 

पंचायत के सदस् य के रूप में णिवायणचत होिे के णलए अर्हयत होगा :  

परन् तु अिुसूणचत जाणतयों या अिसुूणचत जिजाणतयों या णपछडे वगों और णस् त्रयों के णलए आरणक्षत स् थािों की दशा में, कोई 

भी ऐसा व् यणक् त जो, यथाणस् थणत, अिुसूणचत जाणत या अिुसूणचत जिजाणत या णपछडा वगय में से ककसी का सदस् य िहीं ह ैया स् त्री िहीं ह,ै 

ऐसे स् थािों पर णिवायणचत होिे के णलए अर्हयत िहीं होगा ।  

101. सदस् यता के णलए णिरहयता––(1) कोई व् यणक् त ककसी ग्राम पंचायत या णजला पररषद ्का सदस् य चुिे जािे के णलए और 

सदस् य होिे के णलए णिरर्हयत होगा,––  

(क) यकद उसिे 21 वषय की आयु प्राप् त िहीं कर ली है ;   



 32 

(ि) यकद वह राज् य के णविाि-मंडल के णिवायचिों के प्रयोजिों के णलए तत् समय प्रवृत्त ककसी णवणि द्वारा या उसके 

अिीि इस प्रकार णिरर्हयत कर कदया जाता ह ै;   

(ग) यकद दडं प्रकक्रया संणहता, 1973 (1974 का 2) की िारा 110 के अिीि संणस् थत काययवाही में उसके णवरुद्ध 

संणहता की िारा 117 के अिीि कोई आदशे पाररत ककया गया है और ऐसे आदशे को तत् पश् चात् उलटा िहीं गया है या 

अणभिंणडत िहीं ककया गया ह ै; या      

(घ) यकद उसे ककसी स् थािीय प्राणिकरि के अिीि सेवा से पद‍ युत कर कदया गया ह ै; या  

(ङ) यकद वह णवणि या णचककत् सा व् यवसायी या चाटडय अकाउंटेंट ह ैऔर सक्षम प्राणिकारी के आदशे द्वारा िामावली 

से उसका िाम हटा कदया गया है या उसे णिलंणबत कर कदया जाता ह ै तो ऐसे णिलंबि के दौराि पश् चात् वती मामले में 

णिरहयताएं प्रवृत्त रहेंगी ; या  

(च) यकद उसे ककसी स् थािीय प्राणिकरि की सदस् यता से हटा कदया गया ह ै; या  

(छ) यकद वह इस अणिणियम के अिीि बिाए गए णियमों द्वारा घोणषत ऐसे पदों से णभन् ि जो िारक को णिरर्हयत 

िहीं करते ह,ै केन् द्रीय सरकार, राज् य सरकार या ककसी अन् य राज् य सरकार के णियंत्रिािीि ककसी स् थािीय या अन् य 

प्राणिकरि के अिीि कोई लाभ का पद िारि करता ह ै।  

स् पष् टीकरि––इस िंड के प्रयोजि के णलए ककसी व् यणक् त को ग्राम पंचायत या णजला पररषद ्के अिीि केवल इस 

कारि से लाभ का पद िारि करिे वाला िहीं समझा जाएगा कक वह ग्राम पंचायत का प्रिाि या उप-प्रिाि ह ैअथवा णजला 

पररषद ्का अध् यक्ष या उपाध् यक्ष ह ै;  

(ज) यकद, इसमें इसके पश् चात् जैसा उपबंणित है उसके णसवाय, वह ग्राम पंचायत या णजला पररषद ्के आदशे द्वारा 

ककए गए ककसी कायय में या ग्राम पंचायत या णजला पररषद ्के साथ, या उसके अिीि या उसके द्वारा या उसकी ओर से ककसी 

संणवदा या णियोजि में प्रत् यक्ष या अप्रत् यक्ष रूप से कोई अंश या णहत रिता है ; या  

(झ) यकद वह ग्राम पंचायत या णजला पररषद ्की ओर से संदत्त णवणि व् यवसायी के रूप में णियोणजत ह ैया ग्राम 

पंचायत अथवा णजला पररषद ्के णवरुद्ध णवणि व् यवसायी के रूप में णियोजि स् वीकार करता ह ै; या  

(ञ) यकद इस अणिणियम के अिीि ग्राम पंचायत या णजला पररषद ्के संबंि में ककसी ककस् म का कोई बकाया उसके 

द्वारा दये ह ै:  

परन् तु,–– 

(क) िंड (ि) में की णिरहयता, उस अवणि की समाणप् त के पश् चात् प्रवतयि में िहीं रहेगी, णजसके दौराि 

ककसी व् यणक् त को प्रणतभूणत दिेे का आदशे कदया गया ह ै;  

(ि) िंड (घ) या िंड (ङ) में की णिरहयता, उक् त दण् डादशे या पद‍ युणत या िामांकि रद्द कर कदए जािे की 

तारीि से पांच वषय की समाणप् त के पश् चात् या सरकार के आदशे द्वारा उससे पूवय से प्रवतयि में िहीं रहगेी ;   

(ग) िंड (च) में की णिरहयता इस प्रकार हटाए जािे की तारीि से पांच वषय की समाणप् त के पश् चात् प्रवतयि 

में िहीं रहगेी ;   

(घ) कोई व् यणक् त, णिम् िणलणित कारिों से िंड (ज) के अिीि णिरहयता उपगत ककया गया िहीं समझा 

जाएगा :––   

(i) ककसी संयुक् त स् टाक कंपिी में उसका कोई शेयर होिे पर या मणिपुर सोसाइटी 

रणजस् रीकरि अणिणियम, 1989 (1990 का 1), के अिीि रणजस् रीकृत ककसी संगम में या ककसी सहकारी 

सोसाइटी में कोई शेयर या णहत होिे पर, जो ग्राम पंचायत या णजला पररषद ्के द्वारा या उसकी ओर से 

संणवदा करेगी या णियोणजत की जाएगी ; या   

(ii) ऐसे ककसी समाचारपत्र में, णजसमें ग्राम पंचायत या णजला पररषद ् के कायों से संबंणित 

कोई णवज्ञापि रिा जाता ह,ै कोई शेयर या णहत होिे पर, या   

(iii) कोई णडबेंचर िारि करिे पर या ग्राम पंचायत या णजला पररषद ्द्वारा या उसकी ओर से 

णलए गए ककसी उिार से अन् यथा संबंि रििे पर । 

(2) यकद यह प्रश् ि उठता ह ैकक ककसी पंचायत का कोई सदस् य ककसी स् तर पर उपिारा (1) में वर्ियत ककसी णिरहयता से ग्रस् त 

हो गया ह ैया िहीं तो वह प्रश् ि णिवायचि अणिकरि को णवणिश् चय के णलए णिदणेशत ककया जाएगा ।  

(3) यकद कोई व् यणक् त, जो पंचायत के सदस् य के रूप में चुिा गया ह,ै लोक सभा, राज् य सभा या राज् य णविाि सभा या राज् य 

णविाि पररषद ्का सदस् य ह ैया सदस् य बि जाता ह ैया िगर पाषयद या ककसी िगर णिगम का पाषयद या सफाई बोडय और अन् य पंचायत 



 33 

का सदस् य ह ैया सदस् य बि जाता ह,ै तो लोक सभा, राज् य सभा, राज् य णविाि सभा या राज् य णविाि पररषद ्के सदस् य की या िगर 

पाषयद या ककसी िगर णिगम के पाषयद या अन् य पंचायत के सदस् य की पदावणि के आरम् भ होिे की तारीि से पन् द्रह कदि के भीतर 

पंचायत में उसका स् थाि ररक् त हो जाएगा, जब तक कक उसिे, यथाणस् थणत, लोक सभा, राज् य सभा, राज् य णविाि सभा या राज् य णविाि 

पररषद ्या िगर णिगम या बोडय या ऐसी अन् य पंचायत से अपिा स् थाि पहले ही ि त् याग कदया हो ।  

102. ककसी ग्राम पचंायत या णजला पररषद ् के संकल् प को णविणंडत या णिलणंबत करि े की राज् य सरकार की                    

शणक् त––(1) राज् य सरकार छह मास की अवणि के भीतर णलणित आदशे द्वारा ककसी ग्राम पंचायत या णजला पररषद ्द्वारा पाररत ककए 

गए ककसी संकल् प को णविंणडत कर सकेगी, यकद उसकी राय में उक् त संकल् प,––   

(क) णवणिक रूप से पाररत िहीं ककया गया ह ै; या  

(ि) इस अणिणियम या तद ्िीि बिाए गए णियमों द्वारा या इिके अिीि प्रदत्त शणक् तयों से अणिक शणक् तयों का 

प्रयोग करके या शणक् तयों का दरुुपयोग करते हुए पाररत ककया गया ह ै।   

(2) राज् य सरकार, उपिारा (1) के अिीि ऐसी कोई कारयवाई करिे से पहले संबंणित ग्राम पंचायत या णजला पररषद ्को, 

प्रस् ताणवत आदशे के णवरुद्ध अभ् यावेदि करिे के णलए अवसर देगी ।   

103. णिवायचि अणिकरि का गठि––(1) सरकार, णिम् िणलणित णवषयों को ऐसी रीणत में णिपटािे के णलए, जो णवणहत की 

जाए, णिवायचि अणिकरि का गठि करेगी, णजसमें एक सदस् य होगा जो उस सरकार द्वारा णियुक् त ककया जाएगा, अथायत् :––  

(i) ककसी पंचायत के णिवायचिों को चुिौती दिेे वाली सभी णिवायचि अर्जययां ;   

(ii) पंचायत के सदस् य की णिरहयता से संबंणित णवषय; और   

(iii) कोई अन् य णिवायचि णवषय । 

(2) अणिकरि का मुख यालय ऐसे स् थाि पर होगा जो अणिसूणचत ककया जाए ।  

(3) उपिारा (1) के अिीि ककया गया णिवायचि अणिकरि का णवणिश् चय अंणतम होगा ।  

104. वार्षयक प्रशासि ररपोटय––(1) प्रत् येक वषय में अप्रैल के प्रथम कदि के पश् चात् यथाशक् य शीघ्र और उस तारीि से 

अपश् चात्, जो सरकार द्वारा णियत की जाए, णजला पररषद ्का मखु य काययपालक अणिकारी पूवयवती वषय के दौराि णजला पररषद ् के 

प्रशासि के संबंि में एक ररपोटय ऐसे प्ररूप में और ऐसे ब् यौरे सणहत, जो सरकार णिदशे करे, तैयार करेगा और उसे णजला पररषद ्को 

प्रस् तुत करेगा । णजला पररषद ्द्वारा अिुमोदि के पश् चात् ररपोटय सरकार को प्रस् तुत की जाएगी ।  

(2) उपिारा (1) के अिीि सरकार को प्रस् तुत की गई ररपोटय सरकार द्वारा णजला पररषद ् के काययकरि के पुिर्वयलोकि से 

संबंणित ज्ञापि के साथ राज् य णविाि-मंडल के सदि के समक्ष रिी जाएगी ।  

105. णियम बिाि ेकी शणक् त––(1) राज् य सरकार, इस अणिणियम के प्रयोजिों को कायायणन् वत करिे के णलए णियम, राजपत्र 

में अणिसूचिा द्वारा, बिा सकेगी ।   

(2) पूवयगामी शणक् त की व् यापकता पर प्रणतकूल प्रभाव डाले णबिा, ऐसे णियमों में णिम् िणलणित सभी या ककन् हीं णवषयों के 

णलए उपबंि ककया जा सकेगा, अथायत् :–– 

(क) िारा 6 के अिीि ग्राम सभा के अणिवेशि बुलािे और आयोणजत करिे की प्रकक्रया ;   

(ि) ग्राम पंचायत की णिवायचक िामावणलयों के प्रकाशि की रीणत और िारा 16 की उपिारा (1) में यथाणिर्दयष् ट 

णिवायचक िामावणलयों का प्रकाशि करिे वाला सक्षम प्राणिकारी ;   

(ग) िारा 13 की उपिारा (5) में यथाणिर्दयष् ट णिवायचक िामावणलयों को प्रकाणशत करिे वाले प्राणिकारी के आदशे 

के णवरुद्ध कोई अपील फाइल करिे की रीणत ;    

(घ) िारा 19 की उपिारा (1) और उपिारा (3) के अिीि ककसी ग्राम पंचायत के णिवायचि-क्षेत्रों में आरणक्षत 

स् थािों का चक्रािुक्रम ;  

(ङ) िारा 21 के अिीि ग्राम पंचायत के प्रिाि और सदस् यों के णिवायचि की प्रकक्रया ;   

(च) िारा 23 की उपिारा (1) में णिर्दयष् ट ग्राम पंचायत में आकणस् मक ररणक् तयों को भरिे की रीणत ;  

(छ) िारा 27 की उपिारा (2) के अिीि प्रिाि और उप-प्रिाि को मािदये और अन् य भत्तों का संदाय ;  

(ज) िारा 28 की उपिारा (1) के िंड (छ) और, उपिारा (2) के िंड (ग) में यथाणिर्दयष् ट प्रिाि और उप-प्रिाि की 

शणक् तयां, कृत् य और कतयव् य ;   

(झ) प्रिाि और उप-प्रिाि का त् यागपत्र प्राप् त करिे और स् वीकार करिे के णलए सक्षम प्राणिकारी ;   



 34 

(ञ) अणिकारी, णजिको िारा 32 की उपिारा (3) के अिीि सणचव द्वारा ग्राम पंचायत के अणिवेशि की सूचिा 

भेजी जाएगी ;  

(ट) िारा 38 की उपिारा (2) के िंड (ि) के अिीि स् थायी सणमणत द्वारा सदस् यों को सहयोणजत करिे की रीणत;  

(ठ) अणभरक्षा, णजसमें िारा 39 की उपिारा (2) के िंड (ग) में यथाणिर्दयष् ट ग्राम पंचायत णिणि रिी जाएगी ;   

(ड) िारा 42 के अिीि ग्राम पंचायत के बजट को तैयार करिे और अिुमोकदत करिे की प्रकक्रया तथा िारा 43 और 

िारा 44 के अिीि लेिाओं के रिे जािे और उिकी संपरीक्षा की प्रकक्रया ;   

(ढ)  िारा 45 में यथाणिर्दयष् ट सणचव की णियुणक् त, सेवा के णिबंिि और शतें, वेति और भते्त और अन् य सेवा शतें ;  

(ि) िारा 50 के अिीि णजला पररषद ्के सदस् यों के णिवायचि की रीणत ; 

(त) िारा 51 में णिर्दयष् ट णजला पररषद ्में आकणस् मक ररणक् तयों को भरिे की रीणत ;   

(थ) िारा 52 की उपिारा (1) और उपिारा (3) के अिीि णजला पररषद ्के णिवायचि-क्षेत्रों में आरणक्षत स् थािों का 

चक्रािुक्रम ;   

(द) िारा 54 की उपिारा (2) में णिर्दयष् ट णजला पररषद ्के अध् यक्ष और उपाध् यक्ष के स् थािों के आरक्षि की रीणत ;   

(ि) िारा 55 के अिीि अध् यक्ष और उपाध् यक्ष के वेति और भते्त तथा बैठक में भाग लेिे के णलए सदस् यों की फीस 

और अन् य भते्त ;   

(ि) िारा 56 में णिर्दयष् ट अध् यक्ष और उपाध् यक्ष की शणक् तयां, कृत् य और कतयव् य ;  

(प) िारा 57 की उपिारा (2) के अिीि अध् यक्ष और उपाध् यक्ष का त् यागपत्र प्राप् त करिे तथा स् वीकार करिे के णलए 

सक्षम प्राणिकारी ;   

(फ) िारा 66 की उपिारा (8) के अिीि सणमणतयों द्वारा णिवयहि ककए जािे वाले अणतररक् त कतयव् य ;   

(ब) णजला पररषद ्द्वारा उद ्ग्रहीत ककए जािे वाले करों की अणिकतम दर ;  

(भ) िारा 72 के अिीि णजला पररषद ्के णलए बजट तैयार करिा और उसका अिुमोदि ;  

(म) िारा 73 और िारा 74 में णिर्दयष् ट णजला पररषद ्के लेिाओं का रिा जािा और उिकी संपरीक्षा ;  

(य) िारा 75 के अिीि अपर मुख य काययपालक अणिकारी, मुख य लेिा अणिकारी, मुख य योजिा अणिकारी और 

अन् य कमयचाररवृन् द सदस् यों की णियुणक् त के णिबंिि और शतें ;  

(यक) िारा 76 की उपिारा (1) के िंड (ग) और िंड (ङ) में णिर्दयष् ट मुख य काययपालक अणिकारी द्वारा णजला 

पररषद ्के कायों का अिीक्षि और णियंत्रि ;   

(यि) िारा 79 की उपिारा (2) के अिीि ग्राम पंचायत द्वारा अणिरोपत ककए जािे वाले जुमायिे की सीमा और 

उक् त िारा की उपिारा (4) के अिीि ग्राम पंचायत की उपणवणियों के प्रकाशि की रीणत ;   

(यग) िारा 97 की उपिारा (3) में णिर्दयष् ट णवत्त आयोग के सदस् य की णियुणक् त की रीणत ।   

(3) इस अणिणियम के अिीि बिाया गया प्रत् येक णियम बिाए जािे के पश् चात् यथाशीघ्र, णविाि सभा के समक्ष, जब वह 

सत्र में हो, कुल बीस कदि की अवणि के णलए रिा जाएगा । यह अवणि एक सत्र में अथवा दो या अणिक आिुक्रणमक सत्रों में पूरी हो 

सकेगी । यकद उस सत्र के या पूवोक् त आिुक्रणमक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसाि के पूवय सदि उस णियम में कोई पररवतयि करिे के 

णलए सहमत हो जाएं तो तत् पश् चात् यह पररवर्तयत रूप में ही प्रभावी होगा । यकद उक् त अवसाि के पूवय सदि सहमत हो जाएं कक वह 

णियम िहीं बिाया जािा चाणहए तो तत् पश् चात्, वह णिष् प्रभाव हो जाएगा । ककन् तु णियम के ऐसे पररवर्तयत या णिष् प्रभाव होिे से उिके 

अिीि पहले की गई ककसी बात की णवणिमान् यता पर प्रणतकूल प्रभाव िहीं पडेगा ।  

106. णिवायचि सबंिंी मामलों में न् यायालयों के हस् तक्षपे का वजयि––इस अणिणियम में ककसी बात के होते हुए भी :–– 

(क) भारत के संणविाि के सुसंगत उपबंि के अिीि बिाई गई या बिाई जािे के णलए तात् पर्ययत ऐसी ककसी णवणि 

की णवणिमान् यता जो णिवायचि-क्षेत्रों के पररसीमि या ऐसे णिवायचि-क्षेत्रों को स् थािों के आबंटि से संबंणित ह,ै ककसी 

न् यायालय में प्रश् िगत िहीं की जाएगी ;  

(ि) ककसी पंचायत के ककसी णिवायचि को ककसी न् यायालय में प्रश् िगत िहीं ककया जाएगा ।   

107. शपथ ग्रहि करिा––णजला पररषद ्का प्रत् येक सदस् य, अध् यक्ष या उपाध् यक्ष और ग्राम पंचायत का प्रत् येक सदस् य, प्रिाि 

या उप-प्रिाि अपिा पद ग्रहि करिे से पहले यथाणस् थणत, णजला पररषद ्या ग्राम पंचायत के अणिवेशि में भारत के संणविाि के प्रणत 

अपिी णिष् ठा की णिम् िणलणित प्ररूप में शपथ ग्रहि करेगा या प्रणतज्ञाि करेगा, अथायत् :––  



 35 

मैं ....................................................जो......................................................................................का 

सदस् य/अध् यक्ष/उपाध् यक्ष/प्रिाि/उप-प्रिाि होिे के िाते, ईश् वर की शपथ लेता हं (या सत् यणिष् ठा से प्रणतज्ञाि करता हं) कक मै णवणि द्वारा 

स् थाणपत भारत के संणविाि के प्रणत स‍ ची श्रद्धा और णिष् ठा रिूंगा और णजस पद को मै ग्रहि करिे वाला ह ं उसके कतयव् यों का 

श्रद्धापूवयक णिवयहि करंूगा ।  

108. णिरसि और व् यावणृत्तयां––(1) मणिपुर पंचायती राज अणिणियम, 1975 इसके द्वारा णिरणसत ककया जाता ह ै।   

(2) मणिपुर पंचायती राज अणिणियम, 1975 (णजसे इसमें इसके पश् चात् णिरणसत अणिणियम कहा गया है) के णिरसि के होते 

हुए भी णिरसि की ककसी बात से णिम् िणलणित पर कोई प्रभाव िहीं पडेगा :–– 

(क) उक् त णिरणसत अणिणियम के पूवय प्रवतयि या उसके अिीि सम्यक् तः की गई या हुई कोई बात ; या    

(ि) उक् त णिरणसत अणिणियम के अिीि अर्जयत, उद्भूत या उपगत कोई अणिकार, णवशेषाणिकार, बाध् यता या 

दाणयत् व ; या   

(ग) उक् त णिरणसत अणिणियम के अिीि काररत ककसी अपराि की बाबत उपगत कोई शाणस् त, समपहरि या       

दण् ड ; या  

(घ) उपरोक् तिुसार ऐसे अणिकार, णवशेषाणिकार, बाध् यता, दाणयत् व, समपहरि या दडं की बाबत कोई अन् वेषि, 

णवणिक काययवाणहयां, या उपचार और ऐसे अन् वेषि, णवणिक काययवाणहयों या उपचारों को उसी प्रकार संणस् थत ककया जा 

सकेगा, जारी रिा जा सकेगा या प्रवृत्त ककया जा सकेगा और ऐसी कोई शाणस् त, समपहरि या दण् ड उसी प्रकार अणिरोणपत 

ककया जा सकेगा मािो यह अणिणियम पाररत ि हुआ हो ।   

109. करठिाइयों को दरू करिा––यकद इस अणिणियम के उपबंिों को प्रभावी करिे में कोई करठिाई उत् पन् ि होती ह ै तो 

सरकार, राजपत्र में प्रकाणशत आदशे द्वारा समय की अपेक्षािुसार कोई ऐसी कारयवाई कर सकेगी णजसे वह करठिाई को दरू करिे के णलए 

आवश् यक समझती ह ै।  

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About this act

Jurisdiction
Central
Enactment date
1994-04-23
Sections available
109

Commencement information from the source

23-04-1994

Read the sections

1Short title, extent and commencement.→2Definitions.→3Membership of Gram Sabha and disqualification.→4Cessation of Membership.→5Periodicity of Meetings.→6Convening of Meetings.→7Quorum.→8Gram Sabha Meetings.→9Agenda.→10Resolution.→11Functions of Gram Sabha.→12Vigilance Committee.→13Constitution of Gram Panchayat.→14Incorporation of Gram Panchayat.→15Electoral Roll of Gram Panchayat.→16Publication of Electoral Roll of Gram Panchayat.→17Composition of Gram Panchayat.→18Division of Gram Sabha into territorial constituencies.→19Reservation of seats.→20Term of the Gram Panchayats.→21Election of the Pradhan and members of Gram Panchayat.→22Appointment of an Administrative Committee or Administrator on failure to elect members of Gram Panchayats and in other cases.→23Filling of casual vacancy in the office of Pradhan and of the member.→24Election of Up-Pradhan.→25Reservation of seats for Pradhan and Up-Pradhan.→26Procedure for election of Up-Pradhan on the establishment of Gram Panchayat.→27Term of the office of the Pradhan and Up-Pradhan.→28Powers, functions and duties of Pradhan and Up-Pradhan.→29Resignation of Pradhan and Up-Pradhan.→30No confidence motion against the Pradhan and Up-Pradhan.→31Resignation of members.→32Meeting of Gram Panchayat.→33Minutes.→34Quorum and procedure.→35Functions of Gram Panchayat.→36Assignment of functions.→37General powers of the Gram Panchayat.→38Standing Committees.→39Property and funds.→40Taxation.→41Financial assistance to Gram Panchayats.→42Budget of the Gram Panchayat.→43Accounts.→44Audit.→45Staff of Gram Panchayat.→46Staffing pattern and category of employees.→47Appointment and control of employees.→48Establishment of Zilla Parishad.→49Composition of Zilla Parishad.→50Elected Members.→51Filling of casual vacancy.→52Reservation.→53Term of a Zilla Parishad.→54Election of Adhyaksha and Up-Adhyaksha.→55Salary and allowances to the Adhyaksha and Up-Adhyaksha and other Members.→56Powers, funtions and duties of the Adhyaksha and Up-Adhyaksha.→57Resignation or removal of the Adhyaksha and Up-Adhyaksha.→58Resignation of Member.→59Meeting of the Zilla Parishad.→60Minutes.→61Functions and powers of Zilla Parishad.→62General powers of Zilla Parishad.→63Assignment of functions.→64Delegation of powers.→65Standing Committees.→66Functions of the Standing Committee.→67Procedure of Committees.→68Power to acquire, hold and dispose of property.→69Zilla Parishad Fund.→70Taxation.→71Financial arrangements of Zilla Parishad.→72Budget.→73Accounts.→74Audit.→75Staff of Zilla Parishad.→76Functions of the Chief Executive Officer and other officers.→77Right to requisition records, recover money, etc.→78Powers to revise or modify decisions of committees.→79Powers of Gram Panchayats to make bye-laws.→80Powers of Zilla Parishad to make regulations.→81Powers of Government to make model regulations and bye-laws.→82Powers of Government to dissolve and reconstitute Gram Panchayat and Zilla Parishad in case of alteration of area.→83Dissolution of Gram Panchayats and Zilla Parishad in certain other cases.→84Inquiry into the afffairs of the Panchayats by the Government.→85Inspection of Development Schemes.→86Directions from the Government.→87Commissioner and Chief Executive officers powers in respect of Gram Panchayat and Zilla Parishad.→88Power of Government and Chief Executive Officer to provide for performance of duties in default of Gram Panchayat or Zilla Parishad→89Zilla Prishads, power of suspending the executions of order, etc., of Gram Panchayat.→90Government’s power of suspending execution of unlawful orders or resolutions.→91Purchase of stores and equipment.→92Power to appoint administrator in certain cases.→93Removal of members for misconduct, etc.→94Restrictions on withdrawal of powers and functions from the Panchayats.→95Preparation of development plans.→96District Planning Committee.→97Finance Commission for Panchyats.→98State Election Commission.→99Determination of elected members after census.→100Qualification of membership for election to Panchayat or Zilla Parishad.→101Disqualification for memberships.→102Power of State Government to rescind or suspend resolution of a Gram Panchayat or Zilla Parishad.→103Constitution of Election Tribunal.→104Annual Administration Report.→105Power to make rules.→106Bar to interference by Courts in electoral matters.→107Taking of oath.→108Repeal and savings.→109Removal of difficulties.→
Source and version

India Code, Government of India. Text fetched 28 Oct 2026. Check the linked official text and subsequent notifications when applying a provision.

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The Manipur Panchayati Raj Act, 1994 — Hindi | NYAYA SIGNAL

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