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कृषि और प्रससं्कृत खाद्य उत्पाद षिर्ाात षिकास
प्राषिकरण अषिषिर्म, 1985
(1986 का अषिषिर्म सखंर्ाकं 2)
[8 जििरी, 1986]
कुछ कृषि और प्रससं्कृत खाद्य उत्पादों के षिकास और षिर्ाात के
सिंिाि के षिए एक प्राषिकरण की स्थापिा का
और उसस ेसम्बषधित षििर्ों का उपबंि
करि ेके षिए
अषिषिर्म
भारत गणराज्र् के छत्तीसिें ििा में संसद ्द्वारा षिम् िषिषखत रूप में र्ह अषिषिर्षमत हो :—
अध्र्ार् 1
प्रारषम्भक
1. सषंिप् त िाम, षिस्तार और प्रारम्भ—(1) इस अषिषिर्म का संषिप् त िाम कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद षिर्ाात षिकास
प्राषिकरण अषिषिर्म, 1985 ह ै।
(2) इसका षिस्तार सम्पूणा भारत पर ह ै।
(3) र्ह उस तारीख को प्रिृत्त होगा, जो केधरीर् सरकार, राजपत्र में अषिसूचिा द्वारा, षिर्त करे और इस अषिषिर्म के
षभध ि-षभध ि उपबंिों के षिए षभध ि-षभध ि तारीखें षिर्त की जा सकें गी ।
2. पररभािाएं—इस अषिषिर्म में, जब तक कक संदभा से अधर्था अपेषित ि हो,—
(क) “प्राषिकरण” से िारा 4 के अिीि स्थाषपत कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद षिर्ाात षिकास प्राषिकरण
अषभप्रेत ह ै;
(ख) “अध्र्ि” से प्राषिकरण का अध्र्ि अषभप्रेत है ;
(ग) “षिर्ाात” से भूषम, समुर र्ा िार्ुमागा द्वारा भारत से बाहर िे जािा अषभप्रेत है ;
(घ) “षिर्ाातकताा” से ऐसा व्यष त अषभप्रेत ह ैजो िारा 12 के अिीि, अिुसूषचत उत्पादों के षिर्ाातकताा के रूप में
रषजस्रीकृत ह ै;
(ङ) “सदस्र्” से प्राषिकरण का सदस्र् अषभप्रेत ह ैऔर इसके अधतगात अध्र्ि भी ह ै;
(च) “षिषहत” से इस अषिषिर्म के अिीि बिाए गए षिर्मों द्वारा षिषहत अषभप्रेत है ;
(छ) 1[र्थाषस्थषत, अिुसषूचत उत्पादों र्ा षिशेि उत्पादों] के सम्बधि में, “प्रसंस्करण” के अधतगात ऐसे उत्पादों के
परररिण की प्रकिर्ा, जैसे षिब्बों में भरिा, ठण्िा करिा, सुखािा, िमक िगािा, िूमि करिा, छीििा र्ा टुकडे करिा तथा
प्रसंस्करण का कोई अधर् ऐसा ढंग ह ैजो प्राषिकरण, राजपत्र में अषिसूचिा द्वारा, इस षिषमत्त षिषिर्दाष् ट करे ;
(ज) “षिषिर्म” से इस अषिषिर्म के अिीि बिाए गए षिषिर्म अषभप्रेत हैं ;
(झ) “अिुसूषचत उत्पाद” से 1[पहिी अिुसूची] में सषम्मषित कृषि र्ा प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों में से कोई उत्पाद
अषभप्रेत ह ै;
2[(ञ) “षिशेि उत्पाद” से दसूरी अिुसूची में सषम्मषित कृषि र्ा प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों में से कोई उत्पाद
अषभप्रेत ह ै।]
3[3. अिसुचूी का सशंोिि करि ेकी शष त—केधरीर् सरकार इस अषिषिर्म के उद्देश्र्ों का ध्र्ाि में रखते हुए और र्कद िह
ऐसा करिा आिश्र्क र्ा समीचीि समझती ह ैतो राजपत्र में अषिसूचिा द्वारा पहिी अिुसूची र्ा दसूरी अिुसूची में कोई कृषि र्ा
1 2009 के अषिषिर्म सं० 20 की िारा 2 द्वारा प्रषतस्थाषपत ।
2 2009 के अषिषिर्म सं० 20 की िारा 2 द्वारा अंतःस्थाषपत ।
3 2009 के अषिषिर्म सं० 20 की िारा 3 द्वारा प्रषतस्थाषपत ।
2
प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद, र्थाषस्थषत, जोड सकेगी र्ा उसका उसमें स ेिोप कर सकेगी और, र्थाषस्थषत, ऐसे जोडे जािे र्ा िोप ककए
जािे पर ऐसा उत्पाद, र्थाषस्थषत, अिुसूषचत उत्पाद र्ा षिशेि उत्पाद हो जाएगा र्ा िहीं रहगेा ।] ।
अध्र्ार् 2
कृषि और प्रससं्कृत खाद्य उत्पाद षिर्ाात षिकास प्राषिकरण
4. प्राषिकरण की स्थापिा और उसका गठि—(1) ऐसी तारीख से, जो केधरीर् सरकार, राजपत्र में अषिसूचिा द्वारा, इस
षिषमत्त षिर्त करे, इस अषिषिर्म के प्रर्ोजिों के षिए एक प्राषिकरण स्थाषपत ककर्ा जाएगा षजसका िाम कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य
उत्पाद षिर्ाात षिकास प्राषिकरण होगा ।
(2) प्राषिकरण पूिो त िाम का शाश् ित उत्तराषिकार और सामाधर् मुरा िािा षिगषमत षिकार् होगा षजसे जंगम और
स्थािर दोिों प्रकार की सम्पषत्त का अजाि, िारण और व्यर्ि करिे की तथा संषिदा करिे की शष त होगी और उ त िाम से िह िाद
िाएगा और उस पर िाद िार्ा जाएगा ।
(3) प्राषिकरण का प्रिाि कार्ाािर् कदल्िी में होगा और प्राषिकरण केधरीर् सरकार के पूिा अिुमोदि से, भारत में र्ा भारत
के बाहर अधर् स्थािों पर कार्ाािर् र्ा अषभकरण स्थाषपत कर सकेगा ।
(4) प्राषिकरण षिम् िषिषखत सदस्र्ों से षमिकर बिेगा, अथाात् :—
(क) अध्र्ि, जो केधरीर् सरकार द्वारा षिर्ु त ककर्ा जाएगा ;
(ख) भारत सरकार का कृषि षिपणि सिाहकार, पदिे ;
(ग) एक सदस्र्, जो र्ोजिा आर्ोग का प्रषतषिषित्ि करिे के षिए केधरीर् सरकार द्वारा षिर्ु त ककर्ा जाएगा ;
(घ) संसद ्के तीि सदस्र्, षजिमें से दो िोक सभा द्वारा षििााषचत ककए जाएंगे और एक राज्र् सभा द्वारा षििााषचत
ककर्ा जाएगा ;
(ङ) आठ सदस्र्, जो िमशः षिम् िषिषखत से सम्बषधित केधरीर् सरकार के मंत्रािर्ों का प्रषतषिषित्ि करिे के षिए
केधरीर् सरकार द्वारा षिर्ु त ककए जाएंगे :—
(i) कृषि और ग्रामीण षिकास ;
(ii) िाषणज्र् ;
(iii) षित्त ;
(iv) उद्योग ;
(v) खाद्य ;
(vi) िागररक पूर्ता ;
(vii) िागर षिमािि ;
(viii) िौिहि और पररिहि ;
(च) पांच सदस्र्, जो राज्र्ों और संघ राज्र्िेत्रों का प्रषतषिषित्ि करिे के षिए िणािमािुसार चिािुिम से केधरीर्
सरकार द्वारा षिर्ु त ककए जाएंगे :
परधतु इस खंि के अिीि कोई षिर्ुष त, र्थाषस्थषत, सम्बषधित राज्र् र्ा संघ राज्र्िेत्र की सरकार की षसफाररश
पर की जाएगी ;
(छ) सात सदस्र्, जो षिम् िषिषखत का प्रषतषिषित्ि करिे के षिए केधरीर् सरकार द्वारा षिर्ु त ककए जाएंगे :—
(i) भारतीर् कृषि अिुसंिाि पररिद ्;
(ii) राष् रीर् उद्याि-कृषि बोिा ;
(iii) राष् रीर् कृषि सहकारी षिपणि पररसंघ ;
(iv) केधरीर् खाद्य प्रौद्योषगक अिुसंिाि संस्थाि ;
(v) भारतीर् पैकेजजंग संस्थाि ;
(vi) मसािा षिर्ाात संििाि पररिद ्; और
(vii) काजू षिर्ाात संििाि पररिद ्;
3
(ज) बारह सदस्र्, जो षिम् िषिषखत का प्रषतषिषित्ि करिे के षिए केधरीर् सरकार द्वारा षिर्ु त ककए
जाएंगे, अथाात् :—
(i) फि और ििस्पषत उत्पाद उद्योग ;
(ii) मांस कुकुट-पािि और िेरी उत्पाद उद्योग ;
1[(iii) अधर् अिुसूषचत उत्पाद र्ा षिशेि उत्पाद उद्योग ;]
(iv) पैकेजजंग उद्योग ;
परधतु उपखंि (i) से (iii) तक में षिषिर्दाष् ट उद्योगों के समूहों में से ककसी का र्ा उपखंि (iv) में षिषिर्दाष् ट उद्योग
का प्रषतषिषित्ि करिे के षिए षिर्ु त सदस्र्ों की संखर्ा ककसी भी दशा में दो से कम िहीं होगी,
(झ) दो सदस्र्, जो कृषि अथाशास् त्र और अिुसूषचत उत्पादों के षिपणि के िेत्र में षिशेिज्ञों और िैज्ञाषिकों में से
केधरीर् सरकार द्वारा षिर्ु त ककए जाएंगे ।
(5) उपिारा (4) के खंि (ख) में षिर्दाष् ट सदस्र् से षभध ि सदस्र्ों की, पदािषि और ऐसे सदस्र्ों में होिे िािी ररष तर्ों को
भरिे की रीषत तथा सदस्र्ों द्वारा अपिे कृत्र्ों के षििाहि में अिुसरण की जािे िािी प्रकिर्ा ऐसी होगी, जो षिषहत की जाए ।
(6) जब केधरीर् सरकार के ककसी ऐसे अषिकारी को, जो प्राषिकरण का सदस्र् िहीं ह,ै उस सरकार द्वारा इस षिषमत्त
प्रषतषिर्ु त ककर्ा जाता ह ैतब उसे प्राषिकरण के अषििेशिों में उपषस्थत होिे और उसकी कार्ािाषहर्ों में भाग िेिे का अषिकार होगा
ककधतु िह मत दिेे का हकदार िहीं होगा ।
(7) प्राषिकरण का र्ा िारा 9 के अिीि उसके द्वारा षिर्ु त ककसी सषमषत का कोई कार्ा र्ा कार्ािाही केिि इस कारण
अषिषिमाधर् िहीं होगी कक—
(क) प्राषिकरण र्ा ऐसी सषमषत में कोई ररष त ह ैर्ा उसके गठि में कोई त्रुरट ह ै; र्ा
(ख) प्राषिकरण र्ा ऐसी सषमषत के सदस्र् के रूप में कार्ा करिे िािे ककसी व्यष त की षिर्ुष त में कोई त्रुरट ह ै; र्ा
(ग) प्राषिकरण र्ा ऐसी सषमषत की प्रकिर्ा में कोई ऐसी अषिर्षमतता ह ै षजसका मामिे के गुणागुण पर कोई
प्रभाि िहीं पडता है ।
(8) प्राषिकरण ऐसे समर्ों और स्थािों पर अषििेशि करेगा और अपिे अषििेशिों में कारबार के संव्यिहार के (षजसके
अधतगात उसके अषििेशिों में गणपूर्ता भी ह)ै सम्बधि में प्रकिर्ा के ऐसे षिर्मों का पािि करेगा जो षिषिर्मों द्वारा उपबंषित
ककए जाएंगे ।
5. अध्र्ि का ितेि और भत्त ेतथा सिेा की अधर् शतें और सदस्र्ों के भत्ते—(1) अध्र्ि ऐसे िेति और भत्तों का हकदार होगा
तथा छुट्टी, पेंशि, भषिष्र् षिषि और अधर् षििर्ों की बाबत सेिा की ऐसी शतों के अिीि होगा जो केधरीर् सरकार द्वारा, समर्-समर्
पर, षिर्त की जाएं ।
(2) प्राषिकरण के अधर् सदस्र् ऐसे भते्त प्राप् त करेंगे जो केधरीर् सरकार द्वारा षिर्त ककए जाएं ।
(3) पदिे सदस्र् से षभध ि कोई सदस्र् केधरीर् सरकार को षिषखत सूचिा दकेर अपिा पद त्र्ाग सकेगा और ऐसे त्र्ागपत्र के
स्िीकार कर षिए जािे पर उसके बारे में र्ह समझा जाएगा कक उसिे अपिा पद रर त कर कदर्ा ह ै।
6. अध्र्ि का मखुर् कार्ापािक होिा—अध्र्ि, प्राषिकरण का मुखर् कार्ापािक होगा और ऐसी शष तर्ों का प्रर्ोग और ऐसे
कताव्यों का पािि करेगा जो षिषहत ककए जाएं ।
7. प्राषिकरण का सषचि और अधर् कमाचाररिधृद—(1) केधरीर् सरकार प्राषिकरण के षिए एक सषचि षिर्ु त करेगी जो
ऐसी शष तर्ों का प्रर्ोग करेगा और ऐसे कताव्यों का पािि करेगा जो षिषहत ककए जाएं र्ा अध्र्ि द्वारा उसे प्रत्र्ार्ोषजत ककए जाएं ।
(2) सषचि ऐसे िेति और भत्तों का हकदार होगा तथा छुट्टी, पेंशि, भषिष्र् षिषि और अधर् षििर्ों की बाबत सेिा की ऐसी
शतों के अिीि होगा जो केधरीर् सरकार द्वारा, समर्-समर् पर, षिर्त की जाएं ।
(3) प्राषिकरण ऐसे षिर्ंत्रण और षिबाधििों के अिीि रहते हुए जो षिषहत ककए जाएं, ऐसे अधर् अषिकारी और कमाचारी
षिर्ु त कर सकेगा जो उसके कृत्र्ों के दि पािि के षिए आिश्र्क हों, और प्राषिकरण के ऐसे अधर् अषिकाररर्ों और कमाचाररर्ों की
षिर्ुष त का ढंग, िेतिमाि और भते्त तथा सेिा की अधर् शतें ऐसी होंगी जो प्राषिकरण द्वारा, षिषिर्मों द्वारा, उपबंषित की जाएं ।
(4) प्राषिकरण का अध्र्ि, सषचि और अधर् अषिकारी तथा कमाचारी केधरीर् सरकार की अिुज्ञा के षबिा इस अषिषिर्म के
अिीि अपिे कताव्यों से असंबद्ध ककसी कार्ा को अपिे हाथ में िहीं िेंगे ।
1 2009 के अषिषिर्म सं० 20 की िारा 4 द्वारा प्रषतस्थाषपत ।
4
8. प्राषिकरण को कमाचाररर्ों का अतंरण करि ेके षिए षिशेि उपबिं—(1) प्राषिकरण की स्थापिा पर, केधरीर् सरकार के
षिए र्ह षिषिपूणा होगा कक िह आदशे द्वारा और ऐसी तारीख र्ा तारीखों से जो आदशे में षिषिर्दाष् ट की जाएं, ऐसे ककसी अषिकारी र्ा
अधर् कमाचारी को, जो ऐसी तारीख के, षजसको प्राषिकरण स्थाषपत ककर्ा जाता ह,ै ठीक पूिा प्रसंस्कृत खाद्य षिर्ाात संििाि पररिद ्में
(षजसे इस िारा में इसके पश् चात् पररिद ्कहा गर्ा ह)ै उस रूप में पद िारण कर रहा था, प्राषिकरण को स्थािाधतररत कर द े:
परधतु प्राषिकरण में उस पद का, षजस पर ऐसे अषिकारी र्ा अधर् कमाचारी का अंतरण ककर्ा जाता ह,ै िेतिमाि उस पद के
िेतिमाि स ेकम िहीं होगा षजसे िह ऐसे अंतरण के ठीक पूिा िारण कर रहा था, और उस पद की, षजस पर उसका अंतरण ककर्ा जाता
ह,ै सेिा के अधर् षिबधिि और शतें (षजिके अंतगात पेंशि, छुट्टी, भषिष्र् षिषि और षचककत्सा प्रसुषििाएं हैं) ऐसे अंतरण के ठीक पूिा
उसके द्वारा िाररत पद से संबंषित सेिा के षिबधििों और शतों से कम अिुकूि िहीं होंगी ।
(2) उपिारा (1) के अिीि कोई आदशे इस प्रकार ककर्ा जा सकेगा कक उसका ऐसी तारीख से जो इस अषिषिर्म के प्रारंभ की
तारीख से पूिातर ि हो, भूतििी प्रभाि हो ।
(3) उपिारा (1) के अिीि ककसी आदशे के जारी ककए जािे के पूिा, पररिद ्के सभी अषिकाररर्ों और कमाचाररर्ों को, ऐसे
प्ररूप में, जो षिषहत ककर्ा जाए, और इतिे समर् के भीतर जो केधरीर् सरकार द्वारा इस षिषमत्त षिषिर्दाष् ट ककर्ा जाए, र्ह षिकल्प
कदर्ा जाएगा कक िे र्ह बताएं कक िे प्राषिकरण के कमाचारी बििे के षिए रजामधद हैं र्ा िहीं और एक बार षिकल्प का प्रर्ोग करिे
पर िह अंषतम होगा :
परधतु उपिारा (1) के अिीि कोई आदशे, पररिद ्के ऐसे ककसी अषिकारी र्ा कमाचारी के सम्बधि में जारी िहीं ककर्ा जाएगा
षजसिे इस षिषमत्त षिषिर्दाष् ट समर् के भीतर प्राषिकरण का कमाचारी ि बििे के अपिे आशर् की सूचिा द ेदी है :
परधतु र्ह और कक पररिद ् के ऐसे अषिकाररर्ों और कमाचारीर्ों के साथ, जो इस षिषमत्त षिषिर्दाष् ट समर् के भीतर
प्राषिकरण के कमाचारी बििे का अपिा आशर् प्रकट िहीं करते हैं, उसी रीषत से और उधहीं षिषिर्ों और स्थार्ी आदशेों के अिुसार
कारािाई की जाएगी जो पररिद ्के अषिकाररर्ों और कमाचाररर्ों की संखर्ा में कमी की जािे की दशा में पररिद ्के कमाचाररर्ों को इस
अषिषिर्म के प्रारंभ के ठीक पूिा िागू हुए होते ।
(4) उपिारा (1) के अिीि ककए गए ककसी आदशे द्वारा अंतररत कोई अषिकारी र्ा अधर् कमाचारी, अंतरण की तारीख से ही
पररिद ्का कमाचारी िहीं रहगेा और ऐसे पदाषभिाि से प्राषिकरण का अषिकारी र्ा कमाचारी बि जाएगा जो प्राषिकरण अििाररत
करे और उपिारा (1) के परधतुक के उपबंिों के अिीि रहते हुए, पाररश्रषमक और सेिा की अधर् शतों के (षजिके अधतगात पेंशि, छुट्टी,
भषिष्र् षिषि और षचककत्सा प्रसषुििाएं भी हैं) संबंि में इस अषिषिर्म के अिीि प्राषिकरण द्वारा बिाए गए षिषिर्मों द्वारा शाषसत
होगा और तब तक प्राषिकरण का अषिकारी र्ा अधर् कमाचारी बिा रहगेा जब तक उसका षिर्ोजि प्राषिकरण द्वारा सम्र्क् रूप से
समाप् त िहीं कर कदर्ा जाता ह ै:
परधतु जब तक प्राषिकरण के अषिकाररर्ों र्ा अधर् कमाचाररर्ों की सेिा की शतों को शाषसत करिे िािे ऊपर षिर्दाष् ट
षिषिर्म प्राषिकरण द्वारा िहीं बिाए जाते हैं तब तक पररिद ्के अषिकाररर्ों और कमाचाररर्ों को िागू होिे िािी सुसंगत षिषिर्ा ं
और स्थार्ी आदशे उिको िागू बिे रहेंगे ।
(5) र्कद कोई प्रश् ि उठता ह ैकक र्ा ककसी षििर् के बारे में, षजसके अंतगात पाररश्रषमक, पेंशि, छुट्टी, भषिष्र् षिषि और
षचककत्सा प्रसुषििाएं भी हैं, प्राषिकरण द्वारा बिाए गए षिषिर्मों में षिषहत सेिा के षिबधिि और शतें, ककसी अषिकारी र्ा अधर्
कमाचारी के प्राषिकरण में उसके अंतरण के ठीक पूिा उसके द्वारा िाररत पद से संिग् ि षिबधििों और शतों से कम अिुकूि हैं तो इस
षििर् में केधरीर् सरकार का षिषिश् चर् अंषतम होगा ।
9. प्राषिकरण की सषमषतर्ां—(1) प्राषिकरण ऐसी सषमषतर्ा ंषिर्ु त कर सकेगा जो इस अषिषिर्म के अिीि उसके कताव्यों
के दि षििाहि और कृत्र्ों के दि पािि के षिए आिश्र्क हों ।
(2) प्राषिकरण को र्ह शष त होगी कक िह ऐसे अधर् व्यष तर्ों को, जो प्राषिकरण के सदस्र् िहीं हैं, उतिी संखर्ा में, षजतिी
िह ठीक समझे, उपिारा (1) के अिीि षिर्ु त ककसी सषमषत के सदस्र्ों के रूप में सहर्ोषजत करें और इस प्रकार सहर्ोषजत व्यष तर्ों
को सषमषत के अषििेशिों में उपषस्थत होिे और उसकी कार्ािाषहर्ों में भाग िेिे का अषिकार होगा ककधतु मत दिेे का अषिकार िहीं
होगा ।
(3) उपिारा (2) के अिीि ककसी सषमषत के सदस्र्ों के रूप में सहर्ोषजत व्यष त, सषमषत के अषििेशिों में उपषस्थत होिे के
षिए ऐसे भते्त प्राप् त करिे के हकदार होंगे जो केधरीर् सरकार द्वारा षिर्त ककए जाएं ।
10. प्राषिकरण के कृत्र्—(1) प्राषिकरण का र्ह कताव्य होगा कक िह ऐसे उपार्ों द्वारा, जो िह ठीक समझे, केधरीर् सरकार
के षिर्धत्रण के अिीि, अिुसूषचत उत्पादों के षिर्ाात के षिकास और संििाि का षजम्मा िे ।
(2) उपिारा (1) के उपबधिों की व्यापकता पर प्रषतकूि प्रभाि िािे षबिा, उसमें षिर्दाष् ट उपार्ों द्वारा षिम् िषिषखत के षिए
उपबधि ककर्ा जा सकेगा, अथाात्—
5
(क) सिेिण और साध्र्ता सम्बधिी अध्र्र्ि करिे के षिए षित्तीर् सहार्ता की व्यिस्था करके र्ा अधर्था, संर्ु त
प्रोद्यमों के माध्र्म से सािारण पूजंी में भाग िेकर और अधर् अिुतोिों और सहार्की स्कीमों के रूप में षिर्ाात के षिए
अिुसूषचत उत्पादों से सम्बषधित उद्योगों का षिकास ;
(ख) व्यष तर्ों का अिुसूषचत उत्पादों के षिर्ाातकतााओं के रूप में ऐसी फीस का जो षिषहत की जाए, संदार् ककए
जािे पर रषजस्रीकरण ;
(ग) षिर्ाात के प्रर्ोजिों के षिए अिुसूषचत उत्पादों के मािक और षिषिदशे षस्थर करिा ;
(घ) मांस और मांस उत्पादों का ककसी ििशािा प्रसंस्करण संर्ंत्र, भण्िारकरण पररसर, प्रिहण र्ा ऐसे अधर्
स्थािों में जहां ऐसे उत्पाद रखे जाते हैं र्ा उिकी दखेभाि की जाती ह,ै ऐसे उत्पादों की िाषिटी सुषिषश् चत करिे के प्रर्ोजि
के षिए षिरीिण करिा ;
(ङ) अिुसूषचत उत्पादों के पैकेजजंग में सुिार करिा ;
(च) अिुसूषचत उत्पादों के भारत से बाहर षिपणि में सुिार करिा ;
(छ) अिुसूषचत उत्पादों के षिर्ाातोधमुखी उत्पादि का संििाि और उसका षिकास ;
(ज) अिुसूषचत उत्पादों के उत्पादि, प्रसंस्करण, पैकेजजंग, षिपणि र्ा षिर्ाात में िगे हुए कारखािों र्ा स्थापिों के
स्िाषमर्ों र्ा ऐसे अधर् व्यष तर्ों से, जो षिषहत ककए जाएं, अिुसूषचत उत्पादों से सम्बषधित ककसी षििर् पर आंकडों का
संग्रहण और इस प्रकार संगृहीत आंकडों र्ा उिके ककधहीं भागों का र्ा उिसे उद्धरणों का प्रकाशि ;
(झ) अिुसूषचत उत्पादों से सम्बषधित उद्योगों के षिषभध ि पहिुओं का प्रषशिण ;
(ञ) ऐसे अधर् षििर् जो षिषहत ककए जाएं ।
1[10क. षिशिे उत्पादों, आकद के सबंंि में कृत्र्—तत्समर् प्रिृत्त ककसी षिषि पर प्रषतकूि प्रभाि िािे षबिा, प्राषिकरण का
र्ह कताव्य होगा कक िह भारत में र्ा भारत के बाहर षिशेि उत्पादों की बाबत बौषद्धक संपदा अषिकारों के रषजस्रीकरण और संरिण
के षिए ऐसे उपार् करे जो केधरीर् सरकार द्वारा षिषहत ककए जाएं ।
स्पष् टीकरण—इस िारा के प्रर्ोजि के षिए “बौषद्धक संपदा” से अमूता संपषत्त अथाात ्तत्समर् प्रिृत्त ककसी षिषि के अिीि
व्यापार षचह्िों, षिजाइिों, पेटेंटों, भौगोषिक उपदशािों र्ा ककसी ऐसी ही अधर् अमूता संपषत्त पर कोई अषिकार अषभप्रेत ह ै।]
11. प्राषिकरण का अषििमण करि ेकी शष त—(1) र्कद केधरीर् सरकार की र्ह रार् हो कक प्राषिकरण उस कताव्य का, जो
उस पर इस अषिषिर्म द्वारा र्ा उसके अिीि अषिरोषपत ककर्ा गर्ा ह,ै पािि करिे में असमथा है र्ा उसके पािि में उसिे िगातार
व्यषतिम ककर्ा ह ैअथिा अपिी शष तर्ों का अषतिमण र्ा दरुुपर्ोग ककर्ा ह ैअथिा िह जािबूझकर र्ा पर्ााप् त कारण के षबिा, िारा
20 के अिीि केधरीर् सरकार द्वारा जारी ककए गए ककसी षिदशे का अिुपािि करिे में असफि रहा है तो केधरीर् सरकार, राजपत्र में
अषिसूचिा द्वारा, प्राषिकरण का ऐसी अिषि के षिए जो अषिसूचिा में षिषिर्दाष् ट की जाए, अषििमण कर सकेगी :
परधतु इस उपिारा के अिीि अषिसूचिा जारी करिे के पहिे, केधरीर् सरकार प्राषिकरण को इस बात का हतेुक दर्शात करिे
के षिए कक उसका अषििमण र्ों ि ककर्ा जाए, र्ुष तर्ु त समर् दगेी तथा प्राषिकरण के स्पष् टीकरण और आिेपों पर, र्कद कोई हों,
षिचार करेगी ।
(2) प्राषिकरण का अषििमण करिे िािी उपिारा (1) के अिीि अषिसूचिा के प्रकाशि पर,—
(क) प्राषिकरण के सभी सदस्र्, इस बात के होते हुए भी कक उिकी पदािषि समाप् त िहीं हुई ह,ै अषििमण की
तारीख से, ऐसे सदस्र्ों के रूप में अपिे पद रर त कर देंगे ;
(ख) ऐसी सभी शष तर्ों और कताव्यों का, षजिका इस अषिषिर्म के उपबंिों द्वारा र्ा उिके अिीि, प्राषिकरण
द्वारा र्ा उसकी ओर से प्रर्ोग र्ा पािि ककर्ा जा सकता ह,ै अषििमण की अिषि के दौराि ऐसे व्यष त र्ा व्यष तर्ों द्वारा
प्रर्ोग और पािि ककर्ा जा सकेगा, षजसे र्ा षजधहें केधरीर् सरकार षिदशे द े;
(ग) प्राषिकरण में षिषहत सब सम्पषत्त, अषििमण की अिषि के दौराि, केधरीर् सरकार में षिषहत होगी ।
(3) उपिारा (1) के अिीि जारी की गई अषिसूचिा में षिषिर्दाष् ट अषििमण की अिषि के अिसाि पर, केधरीर् सरकार—
(क) अषििमण की अिषि का ऐसी अषतरर त अिषि के षिए, षजसे िह आिश्र्क समझे, षिस्तार कर सकेगी ; र्ा
(ख) प्राषिकरण का, िारा 4 में उपबंषित रीषत से पुिगाठि कर सकेगी ।
1 2009 के अषिषिर्म सं० 20 की िारा 5 द्वारा अंतःस्थाषपत ।
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अध्र्ार् 3
रषजस्रीकरण
12. षिर्ाातकतााओं का रषजस्रीकरण—(1) अिुसूषचत उत्पादों में से ककसी एक र्ा अषिक उत्पादों का षिर्ाात करिे िािा
प्रत्र्ेक व्यष त, उस तारीख से, षजसको िह ऐसा षिर्ाात करता ह,ै एक मास के अिसाि के पूिा र्ा इस िारा के प्रिृत्त होिे की तारीख से
तीि मास की समाषप् त के पूिा, इिमें से जो भी पश् चात्िती हो, अिुसषूचत उत्पाद र्ा अिुसूषचत उत्पादों के षिर्ाातकताा के रूप में अपि े
रषजस्रीकरण के षिए प्राषिकरण को आिेदि करेगा :
परधतु प्राषिकरण, रषजस्रीकरण के षिए समर्-सीमा को पर्ााप् त कारण से उतिी अिषि के षिए बढा सकेगा षजतिी िह
ठीक समझे ।
(2) एक बार ककर्ा गर्ा रषजस्रीकरण तब तक प्रिृत्त बिा रहेगा जब तक िह प्राषिकरण द्वारा रद्द िहीं कर कदर्ा जाता ह ै।
13. रषजस्रीकरण के षिए आिेदि, उसका रद्दकरण, उसके षिए संदरे् फीस और उसस ेसबंषंित अधर् षििर्—िारा 12 के
अिीि रषजस्रीकरण के षिए और ऐसे रषजस्रीकरण के रद्दकरण के षिए आिेदि का प्ररूप, ऐसे आिेदिों पर संदरे् फीस, ऐसे आिेदिों
में सषम्मषित की जािे िािी षिषशषष् टर्ां, रषजस्रीकरण करिे और उसे रद्द करिे में अिुसरण की जािे िािी प्रकिर्ा और प्राषिकरण
द्वारा रखे जािे िािे रषजस्टर ऐसे होंगे जो षिषहत ककए जाएं ।
14. षिर्ाातकतााओं द्वारा षििरषणर्ों का कदर्ा जािा—(1) िारा 12 की उपिारा (1) में षिर्दाष् ट प्रत्र्ेक षिर्ाातकताा षिषहत
समर् पर और षिषहत रीषत से प्राषिकरण को ऐसी षििरषणर्ां दगेा जो षिषहत की जाएं ।
(2) प्राषिकरण, इस िारा के अिीि दी गई ककसी षििरणी की शुद्धता को सत्र्ाषपत करिे के षिए ककसी प्रसंस्करण संर्ंत्र र्ा
षिर्ाातकताा के ककसी अधर् स्थापि का ककसी भी समर् षिरीिण करिे के षिए ककसी सदस्र् र्ा अपिे अषिकाररर्ों में से ककसी को
प्राषिकृत कर सकेगा ।
अध्र्ार् 4
षित्त, िखेा और िखेा परीिा
15. केधरीर् सरकार द्वारा अिदुाि र्ा उिार—केधरीर् सरकार, संसद ्द्वारा इस षिषमत्त षिषि द्वारा सम्र्क् षिषिर्ोग ककए
जािे के पश् चात्, प्राषिकरण को ऐसी ििराषशर्ों का अिुदािों र्ा उिारों के रूप में संदार् कर सकेगी जो केधरीर् सरकार इस
अषिषिर्म के प्रर्ोजिों के षिए उपर्ोग ककए जािे के षिए, ठीक समझे ।
16. कृषि और प्रससं्कृत खाद्य उत्पाद षिर्ाात षिकास षिषि का गठि—कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद षिर्ाात षिकास षिषि
के िाम से एक षिषि बिाई जाएगी और उसमें षिम् िषिषखत जमा ककए जाएंगे :—
(क) ऐसी ििराषशर्ां जो केधरीर् सरकार, संसद ् द्वारा इस षिषमत्त षिषि द्वारा सम्र्क् षिषिर्ोग ककए जािे के
पश् चात्, कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद षिर्ाात उपकर अषिषिर्म, 1985 (1986 का 3) की िारा 4 के अिीि जमा ककए गए
उपकर के संग्रहण के व्यर् और िापस की गई रकम की, र्कद कोई हो, कटौती करिे के पश् चात् उसमें द े;
(ख) इस अषिषिर्म र्ा इसके अिीि बिाए गए षिर्मों के अिीि रषजस्रीकरण और अधर् षििर्ों की बाबत
उद्गृहीत और संगृहीत सभी फीसें ;
(ग) िारा 15 के अिीि इस अषिषिर्म के प्रर्ोजिों के षिए केधरीर् सरकार द्वारा कदए गए कोई अिुदाि र्ा
उिार ; और
(घ) कोई अिुदाि र्ा उिार जो इस अषिषिर्म के प्रर्ोजिों के षिए ककसी राज्र् सरकार, स्िर्ंसेिी संगठि र्ा अधर्
संस्था द्वारा कदए जाएं :
परधतु षिषि में ऐसा कोई अिुदाि, उिार र्ा संदाि केधरीर् सरकार के पूिा अिुमोदि से ही जमा ककर्ा जाएगा, अधर्था िहीं ।
(2) षिषि का उपर्ोग षिम् िषिषखत के षिए ककर्ा जाएगा, अथाात् :—
(क) िारा 10 में षिर्दाष् ट उपार्ों की िागत को चुकािा ;
(ख) प्राषिकरण के, र्थाषस्थषत, सदस्र्ों, अषिकाररर्ों और अधर् कमाचाररर्ों के िेति, भते्त और अधर् पाररश्रषमक
को चुकािा ;
(ग) प्राषिकरण के अधर् प्रशासषिक खचों और इस अषिषिर्म द्वारा र्ा इसके अिीि प्राषिकृत अधर् खचों को
चुकािा ; और
(घ) ककसी उिार का प्रषतसंदार् करिा ।
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17. उिार ििे ेकी प्राषिकरण की शष तर्ां—ऐसे षिर्मों के अिीि रहते हुए जो इस षिषमत्त बिाए जाएं, प्राषिकरण को, इस
अषिषिर्म के प्रर्ोजिों को कार्ााषधित करिे के षिए, कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद षिर्ाात षिकास षिषि र्ा ककसी अधर् आषस्त की
प्रषतभूषत पर उिार िेिे की शष त होगी ।
18. िखेा और िखेा परीिा—(1) प्राषिकरण उषचत िेखा और अधर् सुसंगत अषभिेख रखेगा और िेखाओं का एक िार्िाक
षििरण ऐसे प्ररूप में तैर्ार करेगा जो केधरीर् सरकार भारत के षिर्ंत्रक-महािेखापरीिक से परामशा करके षिषहत करे ।
(2) प्राषिकरण के िेखाओं की िेखा परीिा, भारत के षिर्धत्रक-महािेखापरीिक द्वारा ऐसे अधतरािों पर की जाएगी जो
उसके द्वारा षिषिर्दाष् ट ककए जाएं और ऐसी िेखा परीिा के सम्बधि में उपगत कोई व्यर् प्राषिकरण द्वारा षिर्ंत्रक-महािेखापरीिक को
संदरे् होगा ।
(3) भारत के षिर्ंत्रक-महािेखापरीिक को और प्राषिकरण के िेखाओं की िेखापरीिा के सम्बधि में उसके द्वारा षिर्ु त
ककसी व्यष त को ऐसी िेखा परीिा के सम्बधि में िे अषिकार और षिशेिाषिकार तथा प्राषिकार होंगे जो षिर्ंत्रक-महािेखापरीिक को
सरकारी िेखाओं की िेखा परीिा के सम्बधि में सािारणतर्ा होते हैं और षिषशष् टतर्ा उसे बषहर्ों, िेखाओं, सम्बद्ध िाउचरों तथा अधर्
दस्तािेज और कागज-पत्रों के पेश ककए जािे की मांग करिे और प्राषिकरण के कार्ाािर्ों में से ककसी भी कार्ाािर् का षिरीिण करिे
का अषिकार होगा ।
(4) भारत के षिर्ंत्रक-महािेखापरीिक द्वारा र्ा इस षिषमत्त उसके द्वारा षिर्ु त ककसी अधर् व्यष त द्वारा प्रमाषणत
प्राषिकरण के िेखा और उिकी िेखा परीिा की ररपोटा, केधरीर् सरकार को प्रषतििा भेजी जाएगी और िह सरकार उधहें संसद ्के प्रत्र्ेक
सदि के समि रखिाएगी ।
अध्र्ार् 5
केधरीर् सरकार द्वारा षिर्तं्रण
19. अिसुषूचत उत्पादों के आर्ात और षिर्ाात को प्रषतषिद्ध र्ा षिर्षंत्रत करि ेकी शष त—(1) केधरीर् सरकार, राजपत्र में
प्रकाषशत आदशे द्वारा, अिुसूषचत उत्पादों के आर्ात र्ा षिर्ाात को र्ा तो सािारणतर्ा र्ा षिषिर्दाष् ट िगों के मामिों में प्रषतषिद्ध, र्ा
अधर्था षिर्ंषत्रत करिे का उपबधि कर सकेगी ।
(2) ऐसे सभी अिुसूषचत उत्पाद, षजिको उपिारा (1) के अिीि ककर्ा गर्ा कोई आदशे िागू होता ह,ै ऐसे माि समझे जाएंगे
षजिका षिर्ाात सीमाशुल्क अषिषिर्म, 1962 (1962 का 52) की िारा 11 के अिीि प्रषतषिद्ध ककर्ा गर्ा ह ैऔर उस अषिषिर्म के
सभी उपबधि तदिुसार प्रभािी होंगे ।
(3) र्कद कोई व्यष त उपिारा (1) के अिीि ककए गए ककसी आदेश का उल्िंघि करेगा तो िह, ऐसे ककसी अषिहरण र्ा
शाषस्त पर प्रषतकूि प्रभाि िािे षबिा, षजसके षिए िह उपिारा (2) द्वारा र्था िागू सीमाशुल्क अषिषिर्म, 1962 (1962 का 52) के
उपबंिों के अिीि दार्ी हो, कारािास से, षजसकी अिषि एक ििा तक हो सकेगी, र्ा जुमाािे से, र्ा दोिों से, दण्ििीर् होगा ।
20. केधरीर् सरकार द्वारा षिदशे—प्राषिकरण ऐसे षिदशेों का पािि करेगा जो उसे इस अषिषिर्म के दि प्रशासि के षिए
केधरीर् सरकार द्वारा समर्-समर् पर कदए जाएं ।
21. षििरषणर्ा ंऔर ररपोटें—(1) प्राषिकरण, केधरीर् सरकार को ऐसे समर् पर और ऐसे प्ररूप में, तथा ऐसी रीषत से, जो
षिषहत की जाए र्ा जो केधरीर् सरकार षिर्दाष् ट करे, ऐसी षििरषणर्ां और कथि तथा अिुसूषचत उत्पादों के षिर्ाात के संििाि और
षिकास के षिए ककसी प्रस्थाषपत र्ा षिद्यमाि कार्ािम की बाबत ऐसी षिषशषष् टर्ां दगेा, षजिकी केधरीर् सरकार समर्-समर् पर
अपेिा करे ।
(2) उपिारा (1) के उपबंिों पर प्रषतकूि प्रभाि िािे षबिा, प्राषिकरण प्रत्र्ेक षित्तीर् ििा की समाषप् त के पश् चात् र्थाशीघ्र,
केधरीर् सरकार को ऐसे प्ररूप में और ऐसी तारीख के पूिा, जो षिषहत की जाए, ररपोटा दगेा षजसमें पिूािती षित्तीर् ििा के दौराि उसके
किर्ाकिापों, िीषत और कार्ािमों का सही और पूरा षििरण कदर्ा जाएगा ।
(3) उपिारा (2) के अिीि प्राप् त ररपोटा की प्रषत, उसके प्राप् त होिे के पश् चात् र्थाशीघ्र संसद ् के प्रत्र्ेक सदि के समि
रखी जाएगी ।
अध्र्ार् 6
प्रकीणा
22. षमथ्र्ा षििरषणर्ा ंदिे ेके षिए शाषस्त—कोई व्यष त, जो इस अषिषिर्म द्वारा र्ा इसके अिीि ककसी षििरणी के कदए
जािे की अपेिा ककए जािे पर ऐसी षििरणी दिेे में असफि रहगेा र्ा ऐसी षििरणी दगेा षजसमें ऐसी कोई षिषशषष् ट है जो षमथ्र्ा है
और षजसके बारे में िह जािता ह ैकक िह षमथ्र्ा ह ैर्ा षिश् िास िहीं करता ह ैकक िह सत्र् ह,ै जुमाािे से, जो पांच हजार रुपए तक का
हो सकेगा, दण्ििीर् होगा ।
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23. प्राषिकरण के ककसी सदस्र् र्ा अषिकारी को अपि ेकताव्य के षििाहि में बािा पहुचंाि ेतथा बषहर्ों और अषभिेख पशे
करि ेमें असफि रहि ेके षिए शाषस्तर्ां—कोई व्यष त—
(क) जो अध्र्ि द्वारा षिषखत रूप में प्राषिकृत ककसी सदस्र् को अथिा केधरीर् सरकार द्वारा र्ा प्राषिकरण द्वारा
इस षिषमत्त प्राषिकृत प्राषिकरण के ककसी अषिकारी र्ा अधर् कमाचारी को इस अषिषिर्म द्वारा र्ा इसके अिीि उसको प्रदत्त
ककसी शष त के प्रर्ोग में र्ा उस पर अषिरोषपत ककसी कताव्य के षििाहि में बािा पहुचंाएगा ; र्ा
(ख) जो ककसी िेखा-बही र्ा अधर् अषभिेख को जो उसके षिर्ंत्रण र्ा अषभरिा में ह,ै इस अषिषिर्म द्वारा र्ा
इसके अिीि ऐसी बही र्ा अषभिेख को पेश करिे की अपेिा ककए जािे पर पेश करिे में असफि रहेगा,
िह कारािास से, षजसकी अिषि छह मास तक की हो सकेगी, र्ा जुमाािे से, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, र्ा दोिों से,
दिंिीर् होगा ।
24. अधर् शाषस्तर्ा—ंजो कोई इस अषिषिर्म र्ा इसके अिीि बिाए गए षिर्मों के उपबंिों का, उि उपबधिों को छोडकर
षजिके उल्िंघि के षिए दिं का उपबंि िारा 19, िारा 22 और िारा 23 में ककर्ा गर्ा ह,ै उल्िंघि करेगा र्ा उल्िंघि करिे का प्रर्त् ि
करेगा र्ा उल्िंघि का दषु्प्रेरण करेगा िह कारािास से, षजसकी अिषि छह मास तक की हो सकेगी, र्ा जुमाािे से, जो एक हजार रुपए
तक का हो सकेगा, र्ा दोिों से, दंििीर् होगा और चािू रहिे िािे उल्िंघि की दशा में, अषतरर त जुमाािे से, जो प्रथम उल्िंघि के
षिए दोिषसषद्ध के पश् चात् ऐसे प्रत्र्ेक कदि के षिए, षजसके दौराि ऐसा उल्िंघि चािू रहता ह,ै पचास रुपए तक का हो सकेगा,
दिंिीर् होगा ।
25. कंपषिर्ों द्वारा अपराि—(1) जहां इस अषिषिर्म के अिीि कोई अपराि ककसी कम्पिी द्वारा ककर्ा गर्ा ह ैिहां प्रत्र्ेक
व्यष त, जो उस अपराि के ककए जािे के समर् उस कम्पिी के कारबार के संचािि के षिए उस कंपिी का भारसािक और उसके प्रषत
उत्तरदार्ी था, और साथ ही िह कंपिी भी ऐसे अपराि के दोिी समझे जाएंगे और तदिुसार अपिे षिरुद्ध कार्ािाही की जािे और
दषंित ककए जािे के भागी होंगे :
परधतु इस उपिारा की कोई बात ककसी ऐसे व्यष त को दंि का भागी िहीं बिाएगी र्कद िह र्ह साषबत कर दतेा ह ै कक
अपराि उसकी जािकारी के षबिा ककर्ा गर्ा था र्ा उसिे ऐसे अपराि के ककए जािे का षििारण करिे के षिए सब सम्र्क् तत्परता
बरती थी ।
(2) उपिारा (1) में ककसी बात के होते हुए भी, जहां उस अषिषिर्म के अिीि कोई अपराि ककसी कंपिी द्वारा ककर्ा गर्ा ह ै
और र्ह साषबत हो जाता ह ै कक िह अपराि कम्पिी के ककसी षिदशेक, प्रबधिक, सषचि र्ा अधर् अषिकारी की सहमषत र्ा
मौिािुकूिता स ेककर्ा गर्ा ह ैर्ा उस अपराि का ककर्ा जािा उसकी ककसी उपेिा के कारण मािा जा सकता ह ैिहां ऐसा षिदशेक,
प्रबधिक, सषचि र्ा अधर् अषिकारी भी उस अपराि का दोिी समझा जाएगा और तदिुसार अपिे षिरुद्ध कार्ािाही की जािे और
दषण्ित ककए जािे का भागी होगा ।
स्पष् टीकरण—इस िारा के प्रर्ोजिों के षिए—
(क) “कम्पिी” से कोई षिगषमत षिकार् अषभप्रेत ह ैऔर इसके अधतगात फमा र्ा व्यषष् टर्ों का अधर् संगम ह ै; और
(ख) फमा के संबंि में, “षिदशेक” से उस फमा का भागीदार अषभप्रेत ह ै।
26. धर्ार्ािर् की अषिकाररता—महािगर मषजस्रेट र्ा प्रथम िगा मषजस्रेट से अिर कोई धर्ार्ािर् इस अषिषिर्म के
अिीि दिंिीर् ककसी अपराि का षिचारण िहीं करेगा ।
27. केधरीर् सरकार की पिूा मजंरूी—इस अषिषिर्म के अिीि दिंिीर् ककसी अपराि के षिए कोई अषभर्ोजि केधरीर्
सरकार की पूिा मंजूरी से ही संषस्थत ककर्ा जाएगा, अधर्था िहीं ।
28. सद्भािपिूाक की गई कारािाई के षिए सरंिण—इस अषिषिर्म र्ा इसके अिीि बिाए गए षिर्मों के अिीि
सद्भािपूिाक की गई र्ा की जािे के षिए आशषर्त ककसी बात के षिए कोई भी िाद, अषभर्ोजि र्ा अधर् षिषिक कार्ािाही केधरीर्
सरकार र्ा प्राषिकरण अथिा उसके द्वारा षिर्ु त ककसी सषमषत अथिा प्राषिकरण र्ा ऐसी सषमषत के ककसी सदस्र् अथिा केधरीर्
सरकार र्ा प्राषिकरण के ककसी अषिकारी र्ा अधर् कमाचारी अथिा केधरीर् सरकार र्ा प्राषिकरण द्वारा प्राषिकृत ककसी अधर् व्यष त के
षिरुद्ध िहीं होगी ।
29. प्रत्र्ार्ोजि करि ेकी शष त—केधरीर् सरकार, राजपत्र में प्रकाषशत आदशे द्वारा, र्ह षिदशे द ेसकेगी कक इस अषिषिर्म
के अिीि उसके द्वारा प्रर्ो तव्य कोई शष त (जो िारा 32 के अिीि षिर्म बिािे की शष त िहीं ह)ै, ऐसे मामिों में और ऐसी शतों के,
र्कद कोई हों, अिीि रहते हुए, जो आदशे में षिषिर्दाष् ट की जाएं, ऐसे अषिकारी र्ा प्राषिकरण द्वारा भी, जो उसमें षिषिर्दाष् ट ककर्ा
जाए प्रर्ु त की जा सकेगी ।
30. इस अषिषिर्म के प्रिताि का षििंबि—(1) र्कद केधरीर् सरकार का र्ह समािाि हो जाता ह ैकक ऐसी पररषस्थषतर्ां
उत्पध ि हो गई हैं, षजिके कारण र्ह आिश्र्क हो गर्ा ह ैकक इस अषिषिर्म द्वारा अषिरोषपत कुछ षिबंिि, अषिरोषपत िहीं ककए जािे
चाषहएं र्ा िह ऐसा करिा िोकषहत में आिश्र्क र्ा समीचीि समझती ह ैतो िह राजपत्र में अषिसूचिा द्वारा, इस अषिषिर्म के सभी
9
र्ा ककधहीं उपबंिों का प्रिताि उस सीमा तक और अषिषश् चत काि के षिए र्ा ऐसी अिषि के षिए, जो अषिसूचिा में षिषिर्दाष् ट की
जाए, षििंषबत र्ा षशषथि कर सकेगी ।
(2) जहां उपिारा (1) के अिीि इस अषिषिर्म के ककसी उपबंि का प्रिताि अषिषश् चत काि के षिए षििंषबत र्ा षशषथि कर
कदर्ा गर्ा है िहां ऐसा षििंबि र्ा षशषथिीकरण ककसी भी समर्, जब िह अषिषिर्म प्रिृत्त रहता ह,ै केधरीर् सरकार द्वारा, राजपत्र में
अषिसूचिा द्वारा, हटार्ा जा सकेगा ।
31. अधर् षिषिर्ों का िागू ककर्ा जािा िर्जात ि होिा—इस अषिषिर्म के उपबधि तत्समर् प्रिृत्त ककसी अधर् षिषि के
उपबधिों के अषतरर त होंगे, ि कक उिके अल्पीकरण में ।
32. षिर्म बिाि ेकी शष त—(1) केधरीर् सरकार, राजपत्र में अषिसूचिा द्वारा, इस अषिषिर्म के प्रर्ोजिों को कार्ााषधित
करिे के षिए षिर्म बिा सकेगी ।
(2) षिषशष् टतर्ा और पूिागामी शष त की व्यापकता पर प्रषतकूि प्रभाि िािे षबिा, ऐसे षिर्म षिम् िषिषखत सभी षििर्ों र्ा
उिमें से ककसी के षिए उपबधि कर सकें गे, अथाात् :—
(क) िारा 4 की उपिारा (5) के अिीि सदस्र्ों की (जो िारा 4 की उपिारा (4) के खंि (ख) में षिर्दाष् ट सदस्र् से
षभध ि ह)ै पदािषि और सदस्र्ों में होिे िािी ररष तर्ों को भरिे की रीषत और ऐसे सदस्र्ों द्वारा अपिे कृत्र्ों के षििाहि में
अिुसरण की जािे िािी प्रकिर्ा ;
(ख) िे शष तर्ां षजिका प्रर्ोग और िे कताव्य षजिका पािि िारा 6 के अिीि प्राषिकरण के मुखर् कार्ापािक के
रूप में अध्र्ि द्वारा ककर्ा जा सकेगा ;
(ग) िे शष तर्ां षजिका प्रर्ोग िारा 7 की उपिारा (1) के अिीि प्राषिकरण के सषचि द्वारा ककर्ा जा सकेगा और
िे कताव्य षजिका पािि िारा 7 की उपिारा (1) के अिीि प्राषिकरण के सषचि द्वारा ककर्ा जा सकेगा ;
(घ) िह षिर्ंत्रण और िे षिबाधिि षजिके अिीि रहते हुए िारा 7 की उपिारा (3) के अिीि प्राषिकरण द्वारा अधर्
अषिकारी और कमाचारी षिर्ु त ककए जा सकें गे ;
(ङ) िह प्ररूप षजसमें और िह समर् षजसके भीतर िारा 8 की उपिारा (3) के अिीि प्रसंस्कृत खाद्य षिर्ाात
संििाि पररिद ्के अषिकाररर्ों और कमाचाररर्ों द्वारा षिकल्प कदर्ा जा सकेगा ;
(च) िारा 10 की उपिारा (2) के खंि (ख) के अिीि अिुसूषचत उत्पादों के षिर्ाातकतााओं के रषजस्रीकरण के षिए
फीस का संदार् ;
(छ) स्िाषमर्ों से षभध ि िे व्यष त षजिसे अिुसूषचत उत्पादों से संबंषित ककसी षििर् की बाबत आकडों का संग्रहण,
िारा 10 की उपिारा (2) के खंि (ज) के अिीि ककर्ा जा सकेगा ;
(ज) िे अषतरर त षििर् षजिकी बाबत प्राषिकरण िारा 10 की उपिारा (2) के खंि (ञ) के अिीि अपिे कृत्र्ों के
षििाहि में उपार् कर सकेगा ;
1[(जक) िारा 10क के अिीि बौषद्धक संपदा अषिकारों के रषजस्रीकरण और संरिण के षिए उपार् ;]
(झ) िारा 13 के अिीि रषजस्रीकरण के षिए और रषजस्रीकरण के रद्दकरण के षिए आिेदि का प्ररूप और रीषत,
ऐसे आिेदि के संबंि में संदरे् फीस तथा रषजस्रीकरण करिे और उसे रद्द करिे में अिुसरण की जािे िािी प्रकिर्ा तथा ऐसे
रषजस्रीकरण को शाषसत करिे िािी शतें ;
(ञ) िह समर् षजस पर और िह रीषत षजससे षिर्ाातकताा, िारा 14 की उपिारा (1) के अिीि प्राषिकरण को
षििरषणर्ां दगेा ;
(ट) िह प्ररूप षजसमें िारा 18 की उपिारा (1) के अिीि प्राषिकरण के िेखे रखे जाएंगे ;
(ठ) िह प्ररूप षजसमें और िह रीषत षजससे और िह समर् षजस पर प्राषिकरण िारा 21 की उपिारा (1) के अिीि
केधरीर् सरकार को षििरषणर्ां और कथि दगेा ;
(ि) िह प्ररूप षजसमें और िह तारीख षजसके पूिा प्राषिकरण िारा 21 की उपिारा (2) के अिीि अपिे
किर्ाकिापों और कार्ािम की ररपोटा केधरीर् सरकार को देगा ;
(ढ) कोई अधर् षििर् जो इस अषिषिर्म के अिीि षिषहत ककर्ा जािा ह ैर्ा ककर्ा जाए ।
1 2009 के अषिषिर्म सं० 20 की िारा 6 द्वारा अंतःस्थाषपत ।
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33. षिषिर्म बिाि ेकी शष त—(1) प्राषिकरण, केधरीर् सरकार की पूिा मंजूरी से, राजपत्र में अषिसूचिा द्वारा, ऐसे सभी
षििर्ों के षिए, षजिके षिए इस अषिषिर्म के उपबंिों को प्रभािशीि करिे के प्रर्ोजिों के षिए उपबंि करिा आिश्र्क र्ा समीचीि
ह,ै ऐसे षिषिर्म बिा सकेगा जो इस अषिषिर्म और इसके अिीि बिाए गए षिर्मों के उपबंिों से असंगत ि हों ।
(2) षिषशष् टतर्ा और पूिागामी शष त की व्यापकता पर प्रषतकूि प्रभाि िािे षबिा, ऐसे षिषिर्म षिम् िषिषखत सभी षििर्ों
र्ा उिमें से ककसी के षिए उपबंि कर सकें गे, अथाात् :—
(क) िे समर् और स्थाि षजि पर िारा 4 की उपिारा (8) के अिीि प्राषिकरण र्ा उसकी ककसी सषमषत के
अषििेशि ककए जाएंगे और उिमें अिुसरण की जािे िािी प्रकिर्ा तथा उि सदस्र्ों की संखर्ा षजिसे ककसी अषििेशि में
गणपूर्ता होगी ;
(ख) िारा 7 की उपिारा (3) के अिीि प्राषिकरण के अषिकाररर्ों और अधर् कमाचाररर्ों की षिर्ुष त का ढंग, सेिा
की शतें तथा िेतिमाि और भते्त ;
(ग) सािारणतर्ा प्राषिकरण के कार्ाकिापों का दि संचािि ।
(3) केधरीर् सरकार अपिे द्वारा मंजूर ककए गए ककसी षिषिर्म को, राजपत्र में अषिसूचिा द्वारा, उपांतररत र्ा षिखंषित कर
सकेगी और इस प्रकार उपांतररत र्ा षिखंषित षिषिर्म, र्थाषस्थषत, ऐसे उपांतररत रूप में ही प्रभािी होगा र्ा उसका कोई प्रभाि िहीं
होगा ककंतु ऐसे ककसी उपांतरण र्ा षिखंिि का उस षिषिर्म के अिीि उसके उपांतरण र्ा षिखंिि से पहिे की गई ककसी बात की
षिषिमाधर्ता पर प्रषतकूि प्रभाि िहीं पडेगा ।
34. षिर्मों और षिषिर्मों का ससंद ् के समि रखा जािा—इस अषिषिर्म के अिीि बिार्ा गर्ा प्रत्र्ेक षिर्म और
षिषिर्म, बिाए जािे के पश् चात् र्थाशीघ्र, संसद ्के प्रत्र्ेक सदि के समि, जब िह सत्र में हो, कुि तीस कदि की अिषि के षिए रखा
जाएगा । र्ह अिषि एक सत्र में अथिा दो र्ा अषिक आिुिषमक सत्रों में पूरी हो सकेगी । र्कद उस सत्र के र्ा पूिो त आिुिषमक सत्रों
के ठीक बाद के सत्र के अिसाि के पूिा दोिों सदि उस षिर्म र्ा षिषिर्म में कोई पररिताि करिे के षिए सहमत हो जाएं तो तत्पश् चात ्
िह ऐसे पररिर्तात रूप में ही प्रभािी होगा । र्कद उ त अिसाि के पूिा दोिों सदि सहमत हो जाएं कक िह षिर्म र्ा षिषिर्म िहीं
बिार्ा जािा चाषहए तो तत्पश् चात् िह षिष्प्रभाि हो जाएगा । ककधतु षिर्म र्ा षिषिर्म के ऐस ेपररिर्तात र्ा षिष्प्रभाि होिे स ेउसके
अिीि पहिे की गई ककसी बात की षिषिमाधर्ता पर प्रषतकूि प्रभाि िहीं पडेगा ।
1[35. षिषिमाधर्करण—13 अ तूबर, 2008 को र्ा उसके पश् चात् आरंभ होिे िािी और कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद
षिर्ाात षिकास प्राषिकरण (संशोिि) अषिषिर्म, 2009 के प्रारंभ की तारीख स ेठीक पूिा समाप् त होि ेिािी अिषि के दौराि की गई
र्ा करिे से िोप की गई सभी बातों और की गई र्ा िहीं की गई सभी कारािाइर्ां अथिा ककए र्ा िहीं ककए गए सभी उपार्, जहां तक
िे कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद षिर्ाात षिकास प्राषिकरण (संशोिि) अषिषिर्म, 2009 के अिुरूप हैं, कृषि और प्रसंस्कृत उत्पाद
षिर्ाात षिकास प्राषिकरण (संशोिि) अषिषिर्म, 2009 द्वारा र्थासशंोषित इस अषिषिर्म के उपबंिों के अिीि इस प्रकार की गई र्ा
करिे से िोप की गई र्ा िहीं की गई र्ा ककए गए अथिा िहीं ककए गए समझे जाएंगे, मािो ऐसे उपबंि उस समर् प्रिृत्त रह ेहों, जब
उ त अिषि के दौराि ऐसी बातें की गई थीं र्ा करिे से िोप की गई थीं और कारािाइर्ां की गई र्ा िहीं की गई थीं र्ा उपार् ककए र्ा
िहीं ककए गए थे ।]
1 2009 के अषिषिर्म सं० 20 की िारा 7 द्वारा अंतःस्थाषपत ।
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1[पहिी अिुसचूी]
[िारा 2 (झ) दषेखए]
1. फि, ििस्पषत और उिके उत्पाद ।
2. मांस और मांस उत्पाद ।
3. कुकुट और कुकुट उत्पाद ।
4. िेरी उत्पाद ।
5. षमष् ठािशािा, षबस्कुट और बेकरी उत्पाद ।
6. शहद, गुड और चीिी उत्पाद ।
7. कोको और उसके उत्पाद, सभी प्रकार के चाकिेट ।
8. एल्कोहािी और गैर-एल्कोहािी पेर् ।
9. अिाज उत्पाद ।
10. 2* * *, मूंगफिी, पीिट और अखरोट ।
11. अचार, चटिी और पापड ।
12. ग्िार गोंद ।
13. पुष्प-कृषि और पुष्प-कृषि उत्पाद ।
14. जडी बूटी के और औििीर् पौिे ।
3[15. चािि ।]
4[16. ििण जि में हरी षमचा ।]
5[दसूरी अिुसूची
िारा 2(ञ) दषेखए
बासमती चािि ।]
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1 2009 के अषिषिर्म सं० 20 की िारा 8 द्वारा संखर्ांककत ।
2 का० आ० 183 (अ), ता० 15-02-1988 द्वारा िोप ककर्ा गर्ा ।
3 का० आ० 739 (अ), ता० 30-10-1991 द्वारा जोडा गर्ा ।
4 का० आ० 771 (अ), ता० 16-10-1992 द्वारा जोडा गर्ा ।
5 2009 के अषिषिर्म सं० 20 की िारा 8 द्वारा अंत:स् थाषपत ।
Open official source version ↗About this act
- Jurisdiction
- Central
- Enactment date
- 1985-02-09
- Sections available
- 41
Commencement information from the source
19-10-1984
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