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अनाथालय और अन् य पूर्त आश्रम (पयतवके्षण और
ननयंत्रण) अनिननयम, 1960
(1960 का अनिननयम सखं याकं 10)
[9 अप्रलै, 1960]
अनाथालयों, उपनेक्षर् न् त्रयों या बालकों के नलए आश्रमों और ऐसी
ही अन् य सं् थाओं के पयतवके्षण और ननयतं्रण और उनस े
सम् बनन् िर् नवषयों का उपबन् ि
करन ेके नलए
अनिननयम
भारर् गणराज् य के ग् यारहवें वषत में संसद ्द्वारा ननम् ननलनिर् रूप में यह अनिननयनमर् हो :––
अध् याय 1
प्रारनम् भक
1. सनंक्षप् र् नाम, नव् र्ार और प्रारम् भ––(1) इस अनिननयम का संनक्षप् र् नाम अनाथालय और अन् य पूर्त आश्रम (पयतवके्षण और
ननयंत्रण) अनिननयम, 1960 ह ै।
(2) इसका नव् र्ार जम् मू-कश् मीर राज् य के नसवाय सम् पूणत भारर् पर ह ै।
(3) यह ककसी राज् य में उस र्ारीि को प्रवृत्त होगा नजसे राज् य सरकार, राजपत्र में अनिसूचना द्वारा, ननयर् करे ।
2. पररभाषाएं––इस अनिननयम में, जब र्क कक सन् दभत से अन् यथा अपेनक्षर् न हो,––
(क) “बोर्त” से िारा 5 के अिीन ् थानपर् ननयंत्रण बोर्त अनभप्रेर् ह;ै
(ि) “प्रमाणपत्र” से िारा 15 के अिीन अनुदत्त मान् यर्ा प्रमाणपत्र अनभप्रेर् ह;ै
(ग) “बालक” से ऐसा लड़का या लड़की अनभप्रेर् ह ैनजसने अठारह वषत की आयु पूरी नहीं की है;
(घ) “आश्रम” से वह सं् था अनभप्रेर् ह ैजो न् त्रयों या बालकों के ग्रहण, दिेभाल, संरक्षण और कल् याण के नलए
चलाई जार्ी ह ैया इनके नलए नजसका चलाया जाना आशनयर् ह,ै चाह ेवह अनाथालय, उपेनक्षर् न् त्रयों या बालकों के नलए
आश्रम, नविवा आश्रम या ककसी अन् य नाम से ज्ञार् हो;
(ङ) “प्रबन् िक” से प्रबन् ि सनमनर् का कोई सद् य अनभप्रेर् ह ै जो िारा 20 के अिीन सनमनर् द्वारा इस रूप में
ननयुक् र् ककया गया ह;ै
(च) “प्रबन् ध् ाा सनमनर्” से िारा 20 में ननर्दतष् ट प्रबन् ि सनमनर् अनभप्रेर् ह;ै
(छ) “मान् यर्ाप्राप् र् आश्रम” से ऐसा आश्रम अनभप्रेर् ह ैनजसके संबंि में प्रमाणपत्र अनुदत्त कर कदया गया ह;ै
(ज) “नवनहर्” से इस अनिननयम के अिीन बनाए गए ननयमों द्वारा नवनहर् अनभप्रेर् ह ै;
(झ) “् त्री” से ऐसी मनहला अनभप्रेर् ह ैनजसने अठारह वषत की आयु पूरी कर ली है ।
3. अनिननयम का कनर्पय सं् थाओं को लाग ू न होना––इस अनिननयम की कोई भी बार् ननम् ननलनिर् को लागू
नहीं होगी :––
(क) ककसी शैक्षनणक सं् था से संबद्ध या उसके द्वारा ननयनन् त्रर् या मान् यर्ाप्राप् र् छात्रावास या बोर्र्िंग हाऊस; या
(ि) ् त्री र्था लड़की अनैनर्क व् यापार दमन अनिननयम, 1956 (1956 का 104) के अिीन ् थानपर् संरक्षा गृह; या
(ग) र्त् समय प्रवृत्त ककसी अनिननयनमनर् द्वारा शानसर् सुिारालय, प्रमानणर् या अन् य ् कूल या आश्रम या कायतगृह ।
4. अनिननयम का मान् यर्ाप्राप् र् आश्रमों को शानसर् करन े वाली नलिर्ों पर प्रभाव––इस अनिननयम के उपबन् ध् ाा ककसी
मान् यर्ाप्राप् र् आश्रम को शानसर् करने वाली ककसी भी नलिर् में उससे असंगर् ककसी बार् के होर्े हुए भी प्रभावी होंगे ।
इस अनिननयम को जम्मू-कश्मीर संघ राज्यके्षत्र और लद्दाि संघ राज्यके्षत्र में अनिसूचना सं. सा. का. 3912(अ), र्ारीि, 30 अक्टूबर, 2019 से लागू ककया गया ।
2
अध् याय 2
ननयतं्रण बोर्त और उसकी शनक् र्या ंऔर कृत् य
5. ननयतं्रण बोर्त, उसका गठन आकद––(1) राज् य सरकार, राजपत्र में अनिसूचना द्वारा, राज् य में आश्रमों के पयतवेक्षण और
ननयंत्रण के नलए ननयंत्रण बोर्त ् थानपर् कर सकर्ी है ।
(2) बोर्त का गठन ननम् ननलनिर् सद् यों से होगा, अथातर्् :––
(क) राज् य नविान-मंर्ल के र्ीन सद् य नजनका ननवातचन उसके सद् यों द्वारा होगा; परन् र्ु जहां राज् य नविान-मंर्ल
दो सदनों से नमलकर बनर्ा ह ैवहां नविान-सभा के सद् य अपने में से दो सद् यों को ननवातनचर् करेंगे और नविान पररषद ्के
सद् य अपने में से एक सद् य ननवातनचर् करेंगे;
(ि) राज् य में प्रबन् ि सनमनर्यों के पांच संद् य, नजनका ननवातचन ऐसी सनमनर्यों द्वारा अपने में से ही होगा, हर एक
ऐसी सनमनर् का इस प्रयोजन के नलए एक मर् होगा ;
(ग) राज् य में समाज कल् याण कायत का भारसािक अनिकारी, जो राज् य सरकार द्वारा नामननर्दतष् ट ककया जाएगा;
(घ) राज् य सरकार द्वारा नामननर्दतष् ट छह सद् य नजनमें से एक से अनिक व् यनक् र् उस राज् य से संसद ्का सद् य नहीं
होगा और कम से कम र्ीन न् त्रयां होंगी ।
(3) यकद उपिारा (2) के िण् र् (ग) में ननर्दतष् ट अनिकारी बोर्त के अनिवेशन में ककसी कारणवश उपन् थर् होने में असमथत ह ैर्ो
वह अपने अिीन् थ ककसी अनिकारी को ऐसे अनिवेशन में उपन् थर् होने के नलए प्रनर्ननयुक् र् कर सकेगा ।
(4) बोर्त का अध् यक्ष बोर्त के सद् यों द्वारा अपने में से ननवातनचर् ककया जाएगा :
परन् र्ु राज् य सरकार बोर्त के प्रथम गठन के समय बोर्त के एक सद् य को उसका अध् यक्ष होने के नलए नामननर्दतष् ट करेगी ।
6. पदावनि और आकन् मक ररनक् र्या–ं–(1) इस िारा में जैसा उपबनन् िर् ह ैउसके नसवाय, बोर्त के सद् य की पदावनि उसके
ननवातचन या नामननदशेन की र्ारीि से पांच वषत या र्ब र्क होगी जब उसका उत्तरवर्ी सम् यक् रूप से ननवातनचर् या नामननदनेशर् कर
कदया जाए, इनमें से जो भी अनिक हो :
परन् र्ु िारा 5 की उपिारा (2) के िण् र् (क) या िण् र् (ि) के अिीन ननवातनचर् सद् य या िारा 5 की उपिारा (2) के िण् र्
(घ) के अिीन नामननर्दतष् ट ससंद ्सद् य की पदावनि जैसे ही वह, यथान् थनर्, उस राज् य नविान-मरं्ल के सदन का, नजसने उसको
ननवातनचर् ककया ह,ै उस प्रबन् ि सनमनर् या संसद ्का सद् य नहीं रहर्ा ह,ै वैसे ही समाप् र् हो जाएगी ।
(2) कोई सद् य ककसी भी समय राज् य सरकार को नलनिर् सूचना दकेर अपना पद त् याग कर सकर्ा है और राज् य सरकार
द्वारा राजपत्र में ऐसा त् यागपत्र अनिसूनचर् ककए जाने पर, ऐसे सद् य का ् थान ररक् र् हो जाएगा ।
(3) बोर्त में आकन् मक ररनक् र् को, यथान् थनर्, नव ननवातचन या नामननदशेन द्वारा भरा जाएगा; और ऐसी ररनक् र् को भरने के
नलए ननवातनचर् या नामननर्दतष् ट सद् य की पदावनि उस सद् य की शेष अवनि होगी नजसके ् थान पर उसे ननवातनचर् या नामाननर्दतष् ट
ककया गया ह ै।
(4) बोर्त के सद् य पुन: ननवातचन या पुन: नामननदशेन के पात्र होंगे ।
(5) बोर्त द्वारा ककया गया कोई भी कायत या की गई कायतवाही केवल बोर्त में ककसी ररनक् र् के या उसके गठन में त्रुरट नवद्यमान
होने के आिार पर प्रश् नगर् नहीं की जाएगी ।
7. बोर्त के कृत् य––(1) बोर्त का कर्तव् य होगा कक वह इस अनिननयम के उपबन् िों के अनुसार आश्रमों के प्रबंि से संबंनिर् सभी
नवषयों का सािारणर्: पयतवेक्ष ााण और ननयंत्रण करे, और ऐसी अन् य शनक् र्यों का प्रयोग करे र्था ऐसे अन् य कृत् य करे जो इस
अनिननयम द्वारा या उसके अिीन नवनहर् ककए जाएं ।
(2) इस अनिननयम के अिीन अपने कृत् यों का पालन करर्े समय, बोर्त ऐसे ननदशेों से आबद्ध होगा जो राज् य सरकार
उसको द े।
8. मान् यर्ाप्राप् र् आश्रम के प्रबन् िक को ननदशे दने ेकी बोर्त की शनक् र्––िारा 7 की उपिारा (2) के अिीन कदए गए ननदशेों
के, यकद कोई हों अिीन रहर्े हुए बोर्त समय-समय पर मान् यर्ाप्राप् र् आश्रम के प्रबन् िक को ऐसे सािारण या नवशेष ननदशे द ेसकर्ा ह,ै
जो वह आश्रम के दक्षर्ापूणत प्रबन् ि के नलए ठीक समझे, और प्रबन् िक ऐसे ननदशेों का पालन करेगा ।
9. ननरीक्षण की शनक् र्––बोर्त का कोई सद् य इस नननमत्त सािारण या नवशेष आदशे द्वारा नलनिर् रूप से प्रानिकृर् बोर्त का
कोई अनिकारी ककसी भी आश्रम में यह अनभनननश् चर् करने के प्रयोजन के नलए कक क् या इस अनिननयम के उपबन् िों या र्द ्िीन ककन् हीं
3
ननयमों, नवननयमों, ननदशेों या आदशेों का पालन ककया जा रहा ह,ै युनक् र्युक् र् समय पर प्रवेश कर सकर्ा ह ैऔर उसमें रिी ककसी भी
द् र्ावेज, बही, रनज् टर या अनभलेि को अपने ननरीक्ष ााण के नलए पेश ककए जाने की अपेक्षा कर सकर्ा ह ैऔर आश्रम के कायतकरण स े
संबंनिर् ककसी भी जानकारी की मांग कर सकर्ा ह ै:
परन् र्ु ऐसा कोई भी सद् य या अनिकारी ककसी ऐसे आश्रम या उसके ककसी भाग में जहां मनहलाएं हैं, उस पररक्ष ाोत्र की दो
प्रनर्नष् ठर् न् त्रयों की उपन् थनर् के नबना प्रवेश नहीं करेगा ।
10. बोर्त की नननिया–ं–बोर्त की नननियां,––
(क) ककसी व् यनक् र् द्वारा उसको कदए गए अनभदाय, चन् द,े संदान या की गई वसीयर्; और
(ि) राज् य सरकार या ककसी ् थानीय या अन् य लोक ननकाय द्वारा उसको कदए गए अनुदान,
से नमलकर बनेंगी ।
11. बोर्त के कमतचाररवनृ् द––ऐसे ननयमों के अिीन रहर्े हुए, जो राज् य सरकार द्वारा इस नननमत्त बनए जाएं, बोर्त ् वर्: को
इस अनिननयम के अिीन अपने कृत् यों का दक्षर्ापूणत पालन करने या शनक् र्यों का प्रयोग करने के नलए समथत बनाने के प्रयोजन के नलए,
ऐसे अनिकारी या अन् य कमतचाररयों को, नजन् हें वह ठीक समझे, ननयुक् र् कर सकर्ा ह ैऔर उनके कृत् य और सेवा की शर्ें अविाररर् कर
सकर्ा ह ै।
12. शनक् र्यों का प्रत् यायोजन––राज् य सरकार के ननयन् त्रण के अिीन रहर्े हुए, बोर्त सािारण या नवशेष नलनिर् आदशे द्वारा,
और ऐसी शर्ों और मयातदाओं के, यकद कोई हों, अिीन रहर्े हुए, जो उसमें नवननर्दतष् ट की जाएं, अध् यक्ष या उसके ककसी अन् य सद् य या
ककसी अनिकारी को इस अनिननयम के अिीन अपनी ऐसी शनक् र्या ंया कृत् य, जो वह अपने प्रशासन के दक्षर्ापूणत संचालन के नलए
आवश् यक समझे, प्रत् यायोनजर् कर सकर्ा ह ै।
अध् याय 3
आश्रमों को मान् यर्ा
13. प्रमाणपत्र के नबना आश्रमों का न चलाया जाना––इस अनिननयम के प्रारम् भ ाा के पश् चार््, इस अनिननयम के अिीन
अनुदत्त मान् यर्ा प्रमाणपत्र की शर्ों के अिीन और उनके अनुसार के नसवाय, कोई व् यनक् र् कोई आश्रम नहीं रिेगा या संचानलर् करेगा ।
14. प्रमाणपत्र के नलए आवदेन––प्रत् येक व् यनक् र्, जो आश्रम रिना या संचानलर् करना चाहर्ा ह,ै बोर्त को मान् यर्ा प्रमाणपत्र
के नलए ऐसे प्ररूप में और ऐसी नवनशनष् टयां अन् र्र्वतष् ट करर्े हुए, जो नवनहर् की जाएं, आवेदन करेगा :
परन् र्ु इस अनिननयम के प्रारम् भ पर आश्रम रिने या संचानलर् करने वाले व् यनक् र् को, ऐसे प्रमाणपत्र के नलए आवदने करने के
नलए ऐसे प्रारम् भ से र्ीन मास की कालावनि अनुज्ञार् की जाएगी ।
15. प्रमाणपत्र का अनदुान या इंकार––(1) िारा 14 के अिीन, आवेदन की प्रानप् र् पर, बोर्त ऐसी जांच करने के पश् चार्् जैसी
वह आवश् यक समझे, नलनिर् आदेश द्वारा, या र्ो प्रमाणपत्र अनुदत्त कर दगेा या अनुदान करने से इंकार कर देगा ।
(2) प्रमाणपत्र के अनुदान से इन् कार करने का आदशे र्ब र्क नहीं ककया जाएगा जब र्क कक मामले में आवेदक को सुनवाई
का अवसर न कदया गया हो और जहां प्रमाणपत्र के अनुदान से इन् कार ककया गया ह,ै वहां ऐसे इन् कार करने के आिार आवेदक को
नवनहर् रीनर् में संसूनचर् ककए जाएंगे ।
(3) प्रमाणपत्र के अनुदान के नलए कोई शुल् क प्रभाररर् नहीं ककया जाएगा ।
(4) प्रमाणपत्र अरं्रणीय नहीं होगा ।
16. प्रमाणपत्र की अन् र्वत् र्–ु–(1) प्रमाणपत्र में ननम् ननलनिर् नवननर्दतष् ट होंगे :––
(क) मान् यर्ाप्राप् र् आश्रम का नाम और उसका अव् थान;
(ि) उसके प्रबन् िक का नाम;
(ग) आश्रम की प्रकृनर्, क् या वह सािारणर्: न् त्रयों के नलए या नविवाओं के नलए या सािारणर्: बालकों के नलए
या अनाथों के नलए या इनमें से एक या अनिक वगों के नलए ह;ै
(घ) आश्रम द्वारा नलए जाने वाले वानसयों की संख या;
(ङ) भोजन, वाससनुविा, कपडे़, ् वच् छर्ा, ् वा् ् य और ् व् थवृत्त के नवषय में न् यूनर्म मानक नजनका उस पररक्षते्र
की, नजसमें मान् यर्ाप्राप् र् आश्रम न् थर् ह,ै दशाओं का और सािनों का ध् यान रिर्े हुए; उस आश्रम में अनुपालन ककया जाना
चानहए;
4
(च) आश्रम के वानसयों को दी जाने वाली नशक्षा या प्रनशक्षण का मानक यकद उसके वानसयों की नशक्षा या प्रनशक्षण
का भार नलया गया ह;ै और
(छ) ऐसी अन् य शर्ें और नवनशनष् टयां जो नवनहर् की जाएं :
परन् र्ु मनहलाओं के नलए आश्रम के सम् बन् ि में अनुदत्त प्रमाणपत्र में इस प्रभाव की एक शर्त सनम् मनलर् की हुई समझी जाएगी
कक उसका भारसािक व् यनक् र्, चाह ेउसका नाम अिीक्षक या अन् य कोई हो, सामान् यर्: ् त्री होगी ।
(2) बोर्त, ककसी मान् यर्ाप्राप् र् आश्रम में ् त्री पुरुष दोनों को एक साथ आश्रम के वानसयों के रूप में ग्रहण करने की अनुज्ञा
सामान् यर्: नहीं दगेा ककन् र्ु ककन् हीं कारणों से, जो अनभनलनिर् ककए जाएंगे और ऐसी शर्ों या मयातदाओं के अिीन रहर्े हुए, जो उसे
लोकनहर् में प्रर्ीर् हो, ऐसा कर सकर्ा ह ै।
(3) बोर्त की नलनिर् पूवातनुमनर् के नबना, कोई भी मान् यर्ाप्राप् र् आश्रम––
(क) अपने सम् बन् ि में प्रमाणपत्र में यथानवननर्दतष् ट अपना नाम या अव् थान नहीं बदलेगा; या
(ि) उसमें नवननर्दतष् ट ककसी सेवा के प्रयोजन में पररवर्तन नहीं करेगा ।
17. प्रमाणपत्र का प्रनर्सहंरण––(1) ककसी अन् य शान् र् पर, नजसके नलए वह व् यनक् र् नजसे प्रमाणपत्र अनुदत्त कर कदया गया
ह,ै इस अनिननयम के अिीन दायी हो प्रनर्कूल प्रभाव र्ाले नबना, बोर्त प्रमाणपत्र का प्रनर्संहरण कर सकर्ा है––
(क) यकद उसका यह समािान हो जार्ा है कक आश्रम का संचालन प्रमाणपत्र में अनिकनथर् शर्ों के अनुसार नहीं
ककया जा रहा ह;ै या
(ि) आश्रम का प्रबन् ि बराबर असमािानप्रद रीनर् से चल रहा है या इस रीनर् से चलाया जा रहा है कक आश्रम के
वानसयों की नैनर्क और शारीररक भलाई पर अत् यन् र् प्रनर्कूल प्रभाव पड़ रहा ह;ै या
(ग) बोर्त की राय में आश्रम उस प्रयोजन के नलए अन् यथा अनुपयुक् र् हो गया ह ै:
परन् र्ु प्रनर्संहरण का कोई भी आदशे इस उपिारा के अिीन र्ब र्क नहीं ककया जाएगा जब र्क कक उस व् यनक् र्
को यह हरे्ुक दर्शतर् करने के नलए अवसर न कदया गया हो कक क् यों न प्रमाणपत्र का प्रनर्संहरण ककया जाए,
और प्रनर्संहरण के हर मामले में, उसके आिार उस व् यनक् र् को नवनहर् रीनर् में संसूनचर् ककए जाएंगे ।
(2) जहां उपिारा (1) के अिीन आश्रम के सम् बन् ि में प्रमाणपत्र प्रनर्संहृर् कर कदया गया ह ैवहां ऐसा आश्रम––
(क) जहां प्रनर्संहरण के आदशे के नवरुद्ध िारा 18 के अिीन अपील नहीं की गई ह ैवहां, ऐसी अपील के नलए
नवनहर् कालावनि के अवसान पर र्ुरन् र्; या
(ि) जहां ऐसी अपील की गई ह,ै ककन् र्ु प्रनर्संहरण के आदशे की पुनष् ट की गई ह ैवहां, अपीली आदशे की र्ारीि से,
काम करना समाप् र् कर दगेा ।
(3) उपिारा (2) के अिीन जहां कोई आश्रम काम करना समाप् र् कर दरे्ा ह ैवहां बोर्त ननदशे द ेसकर्ा ह ैकक कोई भी ् त्री या
बालक जो ऐसे आश्रम का वासी है––
(क) यथान् थनर्, अपने मार्ा-नपर्ा, पनर् या नवनिपूणत संरक्षक की अनभरक्षा में वापस कदया जाएगा; या
(ि) ककसी अन् य मान् यर्ाप्राप् र् आश्रम को अन् र्ररर् ककया जाएगा; या
(ग) ककसी अन् य योग् य व् यनक् र् की देिरेि में सौंप कदया जाएगा :
परन् र्ु कोई भी ् त्री, ् त्री से नभन् न ककसी अन् य व् यनक् र् की दिेरेि में नहीं सौंपी जाएगी ।
18. अपीलें––प्रमाणपत्र के अनुदान से इंकार या प्रमाणपत्र का प्रनर्संहरण करने वाले बोर्त के आदशे से व् यनथर् कोई व् यनक् र्,
ऐसी रीनर् में और ऐसी कालावनि के अन् दर, जो नवनहर् की जाए, राज् य सरकार या ऐसे प्रानिकारी से, जो उसके द्वारा नवननर्दतष् ट ककया
जाए, ऐसे इन् कार या प्रनर्संहरण के नवरुद्ध अपील कर सकेगा :
परन् र्ु यकद, यथान् थनर्, राज् य सरकार या इस प्रकार नवननर्दतष् ट प्रानिकारी का यह समािान हो जार्ा है कक अपीलाथी
पयातप् र् कारणवश समय से अपील करने से ननवाररर् रहा था र्ो वह इस प्रकार नवनहर् कालावनि के अवसान पर अपील ग्रहण कर
सकर्ा ह ै।
19. प्रमाणपत्र का अभ यपतण और उसका प्रभाव––(1) यकद ककसी आश्रम का प्रबन् िक प्रबन् ि सनमनर् के प्र् र्ाव द्वारा इस
नननमत्त नवशेषर्: प्रानिकृर् ह ैर्ो वह, बोर्त को ऐसा करने के अपने आशय की छह मास की नलनिर् सूचना दकेर, उस आश्रम के संबंि में
अनुदत्त प्रमाणपत्र को वापस लेने के नलए आवेदन कर सकर्ा ह ैऔर सूचना की र्ारीि से उक् र् कालावनि के अवसान पर प्रमाणपत्र,
यकद उस समय से पूवत सूचना वापस नहीं ली जार्ी ह ैर्ो प्रभावी नहीं रहगेा और आश्रम काम करना समाप् र् कर देगा ।
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(2) कोई भी ् त्री या बालक ऐसी सूचना की र्ारीि के पश् चार् ्ककसी ऐसे आश्रम में ग्रहण नहीं ककए जाएंगे; ककन् र्ु जब र्क
प्रमाणपत्र उपिारा (1) के अिीन प्रभावहीन नहीं हो जार्ा ह ैइस िारा की ककसी भी बार् का यह अथत नहीं लगाया जाएगा कक वह इस
अनिननयम और र्द ्िीन ननयमों, नवननयमों, ननदशेों और आदशेों की सभी अपेक्षाओं का पालन करने की प्रबन् िक की बाध् यर्ा पर प्रभाव
र्ालर्ी ह ै।
अध् याय 4
मान् यर्ाप्राप् र् आश्रमों का प्रबन् ि
20. प्रबन् ि सनमनर्––(1) प्रत् येक मान् यर्ाप्राप् र् आश्रम के प्रबन् ि की भारसािक एक प्रबन् ि सनमनर् होगी और प्रबन् ि सनमनर् के
सद् य ऐसी सनमनर् के एक सद् य को इस अनिननयम के प्रयोजनों के नलए ऐसे आश्रम का प्रबन् िक ननयुक् र् करेंगे ।
(2) प्रबन् ि सनमनर् का गठन, शनक् र्यां और कृत् य और उसके सद् यों की पदावनि ऐसी होगी जो ऐस ेआश्रम के संनविान में
उपबंनिर् की जाएं ।
21. प्रबन् िक का कर्तव् य––प्रबन् िक का यह कर्तव् य होगा कक वह मान् यर्ाप्राप् र् आश्रम में गृहीर् प्रत् येक ् त्री या बालक के संबंि
में इस अनिननयम या र्द ्िीन ननयमों, नवननयमों, ननदशेों और आदशेों की सभी अपेक्षाओं का र्ब र्क पालन करे, जब र्क ् त्री
पुनवातनसर् नहीं हो जार्ी ह ैया बालक अठारह वषत की आयु पूरी नहीं कर लेर्ा ह ैया जब र्क प्रमाणपत्र प्रभावहीन नहीं हो जार्ा ह ै।
22. आश्रम के वानसयों का उन् मोचन––(1) बोर्त द्वारा बनाए गए नवननयमों के, यकद कोई हों, अिीन रहर्े हुए यकद ककसी
आश्रम की प्रबन् ि सनमनर् का समािान हो जार्ा ह ैकक आश्रम का कोई वासी अपनी जीनवकोपाजतन करने के नलए योग् य हो गया ह ैया
अन् यथा आश्रम से उन् मोचन के नलए उपयुक् र् है र्ो प्रबंिक ऐसे वासी को उन् मोनचर् कर सकेगा ।
(2) उपिारा (1) में ककसी बार् के होर्े हुए भी, आश्रम की कोई भी मनहला वासी र्ब र्क उन् मोनचर् नहीं की जाएगी या
नववाह में नहीं दी जाएगी या ककसी अन् य व् यनक् र् की दिेरेि में सौंपी नहीं जाएगी जब र्क ऐसी मनहला ने बोर्त या इस नननमत्त उसके
द्वारा नवननर्दतष् ट अनिकारी के समक्ष घोषणा नहीं कर दी है कक वह, यथान् थनर्, ऐसे उन् मोचन, नववाह या सौंपने की सम् मनर् दरे्ी है
और यकद नववाह में दी जाने वाली वासी अप्राप् र्व् य ह ैर्ो, यथान् थनर्, बोर्त या अनिकारी ने, कारणों को लेिबद्ध करने के पश् चार््,
उसके नलए अपना अनुमोदन नहीं द ेकदया ह ै।
23. वानसयों की मतृ् य ुके बारे में ररपोटत––प्रबन् िक, आश्रम के वानसयों में से ककसी की मृत् यु हो जान ेके र्ुरन् र् पश् चार्् अपनी
सवोत्तम जानकारी के आिार पर मृत् यु का कारण ् पष् ट करर्े हुए बोर्त को उसकी एक नलनिर् ररपोटत भेजेगा ।
अध् याय 5
प्रकीणत
24. शान् र्या–ं–कोई व् यनक् र्, जो इस अनिननयम के या र्द ्िीन ककसी ननयम, नवननयम, ननदशे या आदशे के ककसी उपबन् ि
या प्रमाणपत्र की ककसी शर्त का पालन करने में असफल रहगेा, प्रथम अपराि की दशा में कारावास से, नजसकी अवनि र्ीन मास र्क
की हो सकेगी, या जुमातने से, जो दो सौ पचास रुपए र्क का हो सकेगा, या दोनों से, और नद्वर्ीय या पश् चात्वर्ी अपराि की दशा में
कारावास से, नजसकी अवनि छह मास र्क की हो सकेगी, या जुमातने से, जो एक हजार रुपए र्क का हो सकेगा, या दोनों से, दण् र्नीय
होगा ।
25. अनभयोजन के नलए मंजरूी––इस अनिननयम के अिीन कोई अनभयोजन, यथान् थनर्, नजला मनज् रेट या मुख य प्रेनसर्ेंसी
मनज् रेट की पूवत मंजूरी के नबना, संन् थर् नहीं ककया जाएगा ।
26. अनिननयम के अिीन कृत् य का पालन करन ेवाल ेव् यनक् र्यों का लोक सवेक होना––बोर्त के सद् य और इस अनिननयम के
अिीन बोर्त द्वारा उसकी शनक् र्यों में से ककसी शनक् र् का प्रयोग करने के नलए सशक् र् प्रत् येक व् यनक् र् भारर्ीय दण् र् संनहर्ा
(1860 का 45) की िारा 21 के अथातन् र्गतर् लोक सेवक समझा जाएगा ।
27. सद्भावपवूतक ककए गए कायों का संरक्षण––कोई भी वाद, अनभयोजन या अन् य नवनिक कायतवाही ककसी भी ऐसी बार् के
बारे में, जो इस अनिननयम या र्द ्िीन ककसी ननयम, नवननयम, ननदशे या आदशे के अिीन सद्भावपूवतक की गई हो या की जाने के नलए
आशनयर् हो, इस अनिननयम के अिीन कृत् य करने वाले ककसी व् यनक् र् के नवरुद्ध न होगी ।
28. आश्रमों को राज् य सरकार की छूट दने ेकी शनक् र्––(1) यकद बोर्त से परामशत के पश् चार््, राज् य सरकार का समािान हो
जार्ा ह ैकक ककसी आश्रम या आश्रमों के वगत के संबंि में पररन् थनर्यां ऐसी है कक ऐसा करना आवश् यक या समीचीन ह ैर्ो वह, राजपत्र
में अनिसूचना द्वारा, और उसमें नवननर्दतष् ट कारणों से, ऐसी शर्ों, ननबतन् िनों या मयातदाओं के अिीन, यकद कोई हों, नजन् हें अनिरोनपर्
करना वह ठीक समझे, यथान् थनर्, ऐसे आश्रम या आश्रमों के वगत को, इस अनिननयम या र्द ्िीन बनाए गए ककसी ननयम या नवननयम
के उपबंिों में सभी या ककसी के प्रवर्तन से छूट दे सकर्ी ह ै।
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(2) इस िारा के अिीन जारी कक गई छूट अनुदत्त करने वाली प्रत् येक अनिसूचना का पुनर्वतलोकन दो वषत से अननिक के
अन् र्रालों पर बोर्त के परामशत से ककया जाएगा, ककन् र्ु इसमें अन् र्र्वतष् ट ककसी बार् का प्रभाव राज् य सरकार की ककसी भी समय बोर्त के
परामशत से ऐसी अनिसूचना में संशोिन करने, फेरफार करने या उसका नविंर्न करने की शनक् र् पर नहीं पडे़गा ।
29. राज् य सरकार की ननयम बनान ेकी शनक् र्––(1) राज् य सरकार, राजपत्र में अनिसूचना द्वारा, इस अनिननयम के प्रयोजनों
को कायातनन् वर् करने के नलए ननयम बना सकेगी ।
(2) नवनशष् टर्या और पूवतगामी शनक् र् की व् यापकर्ा पर प्रनर्कूल प्रभाव र्ाले नबना, ऐसे ननयम ननम् ननलनिर् सभी या ककसी
बार् के नलए उपबन् ि कर सकें गे, अथातर्् :––
(क) िारा 5 की उपिारा (2) के िण् र् (ि) के अिीन बोर्त के ननवातचन संबंिी या उससे संसक् र् सभी नवषय और
अध् यक्ष का ननवातचन;
(ि) बोर्त की सद् यर्ा के नलए ननरहतर्ाएं और ऐसे सद् य को, जो ककसी ननरतहर्ा से ग्र् र् ह ैया हो जार्ा ह,ै हटाने
के नलए अपनाई जाने वाली प्रकिया;
(ग) बोर्त की नननियां;
(घ) बोर्त के सद् यों द्वारा नलए जाने वाले यात्रा र्था अन् य भते्त;
(ङ) इस अनिननयम के अिीन बोर्त को अपने कृत् यों का दक्षर्ापूणत पालन करने के नलए समथत बनाने के नलए
कमतचाररवृन् द की ननयुनक् र् और उनकी भर्ी और सेवा की शर्ें;
(च) राज् य सरकार द्वारा बोर्त या प्रबन् ध् ाा सनमनर्यों से नववरनणयों र्था अन् य जानकारी की मांग;
(छ) वह प्ररूप नजसमें मान् यर्ा प्रमाणपत्र के नलए आवेदन ककया जा सकर्ा ह,ै ऐसे आवेदन में अन् र्र्वतष् ट की जान े
वाली नवनशनष् टयां और वह प्ररूप नजसमें और वे शर्ें नजनके अिीन ऐसा प्रमाणपत्र अनुदत्त ककया जा सकर्ा ह;ै
(ज) बोर्त द्वारा रनज् टरों और लेिाओं का रिा जाना और उसके लेिाओं की संपरीक्षा;
(झ) कोई अन् य नवषय जो नवनहर् ककया जार्ा ह ैया ककया जाए ।
(3) इस अनिननयम के अिीन बनाए गए सभी ननयम बनाए जाने के पश् चार्् यथाशक् र् शीघ्र राज् य नविान-मण् र्ल के समक्ष ाा
रिे जाएंगे ।
30. बोर्त की नवननयम बनान े की शनक् र्––(1) बोर्त, राज् य सरकार के पूवत अनुमोदन से, राजपत्र में अनिसूचना द्वारा इस
अनिननयम के अिीन अपने कृत् यों का पालन करने के नलए अपने को समथत बनाने के नलए ऐसे नवननयम बना सकेगा जो इस अनिननयम
र्था र्द ्िीन बनाए गए ननयमों स ेअसंगर् न हों ।
(2) नवनशष् टर्या और पूवतगामी शनक् र् की व् यापकर्ा पर प्रनर्कूल प्रभाव र्ाले नबना, ऐसे नवननयम ननम् ननलनिर् सभी या
ककसी बार् के नलए उपबन् ि कर सकें गे, अथातर्् :––
(क) बोर्त के अनिवेशनों का समय और ् थान, ऐसे अनिवेशनों में कायत करने के संबंि में अपनाई जाने वाली प्रकिया
और ऐसे अनिवेशनों में कायत के संव् यवहार के नलए आवश् यक गणपूर्र्त;
(ि) बोर्त के अनिवेशनों का कायतवृत्त रिना और राज् य सरकार को उसकी प्रनर्यों का पारेषण;
(ग) बोर्त को इस अनिननयम के अिीन अपन े कृत् यों का पालन करने में सहायर्ा करने के प्रयोजन से बोर्त द्वारा
उपसनमनर्यों और ् थानीय सनमनर्यों और व् यनक् र्यों की ननयुनक् र्;
(घ) मान् यर्ाप्राप् र् आश्रम के प्रबन् ि का पयतवेक्ष ााण और ननयन् त्रण;
(ङ) आश्रमों का ननरीक्षण;
(च) बोर्त द्वारा प्रबन् ि सनमनर्यों स ेनववरनणयों और अन् य जानकारी की मांग;
(छ) मान् यर्ाप्राप् र् आश्रमों में वानसयों का ग्रहण, दिेरेि, उपचार, भरणपोषण, संरक्षण, प्रनशक्षण, कल् याण,
नशक्षण, ननयंत्रण और अनुशासन;
(ज) मान् यर्ाप्राप् र् आश्रमों के वानसयों से भेंट और उनके साथ सम् पकत और आश्रमों के ऐसे वानसयों को अल् प
कालावनि के नलए अनुपन् थर् रहने की अनुज्ञा दनेा;
(झ) मान् यर्ाप्राप् र् आश्रमों से वानसयों का उन् मोचन, उनका एक मान् यर्ाप्राप् र् आश्रम से दसूरे मान् यर्ाप्राप् र् आश्रम
को अन् र्रण और प्रबन् िक द्वारा बोर्त को भेजी जाने वाली ररपोटत;
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(ञ) कोई अन् य नवषय नजसके संबंि में बोर्त की राय में आश्रमों के दक्ष ाार्ापूणत पयतवेक्षण और ननयंत्रण के नलए
उपबन् ि आवश् यक ह ै।
(3) राज् य सरकार, राजपत्र में अनिसूचना द्वारा, ककसी ऐसे नवननयम में नजसका उसने अनुमोदन ककया ह,ै संशोिन, फरेफार
अथवा नविण् र्न कर सकर्ी ह,ै और र्ब वह नवननयम र्द्नुसार प्रभावी होगा ककन् र्ु उपिारा (1) के अिीन बोर्त की शनक् र्यों के प्रयोग
पर प्रनर्कूल प्रभाव नहीं पडे़गा ।
31. ननरसन और व् यावनृत्त––(1) ककसी भी राज् य में इस अनिननयम के प्रवृत्त होने की र्ारीि से, ् त्री और बालक सं् था
(अनुज्ञापन) अनिननयम, 1956 (1956 का 105) या उस राज् य में ऐसे प्रारम् भ से ठीक पहले प्रवृत्त कोई र्त् ् थानी अनिननयम ननरनसर् हो
जाएगा ।
(2) ऐसे ननरसन के होर्े हुए भी इस अनिननयम के अिीन की गई कोई बार् या कायतवाही (नजसके अन् र्गतर् कदया गया कोई
ननदशे, बनाया गया कोई रनज् टर या ननयम या ककया गया कोई आदशे अथवा अनिरोनपर् कोई ननबतन् ध् ाान भी ह)ै जहां र्क ऐसी बार्
या कायतवाही इस अनिननयम के उपबन् िों से असंगर् नहीं ह,ै पूवोक् र् उपबन् िों के अिीन की गई समझी जाएगी मानो वे उपबन् ि र्ब
प्रवृत्त थे जब ऐसी बार् या ऐसी कारतवाई की गई थी र्द्नुसार र्ब र्क प्रवृत्त बनी रहगेी जब र्क इस अनिननयम के अिीन की गई
ककसी बार् या कायतवाही से अनर्नष् ठर् नहीं हो जार्ी ह ै।
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Open official source version ↗About this act
- Jurisdiction
- Uttar Pradesh
- Enactment date
- 1960-04-09
- Sections available
- Document reader
Commencement information from the source
09-04-1960
India Code, Government of India. Text fetched 14 Oct 2026. Source metadata reports last modification: 2025-08-04. Check the linked official text and subsequent notifications when applying a provision.