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राजस्थान भूदान यज्ञ अधिधनयम, 1954 राजस्थान भारत राजस्थान भूदान यज्ञ अधिधनयम, 1954 1954 का अधिधनयम 14 31 अकू्टबर 1955 को प्रकाशित 31 अकू्टबर 1955 को प्रारंभ हुआ [यह इस दस्तावेज़ का 31 अकू्टबर 1955 का संस्करण है।] [नोट: मूल प्रकािन दस्तावेज़ उपलब्ध नह ंहै और इस सामग्र को सत्याशपत नह ंशकया जा सका।] राजस्थान भूदान यज्ञ अशिशनयम, 19541954 का अशिशनयम संख्या 14 उदे्दश्ो ंएवं कारणो ंका कथन.- भूदान भूशम का आवंटन भूदान अशिशनयम, 1954 क िारा 24 के अन्तर्गत शकया जाता है, शजसके अनुसार भूदान भूशम का िारक बोर्ग क पूवग स्व कृशत के शबना भूशम में कोई शहत अन्तररत नह ंकरेर्ा तथा भूशम को उपपटे्ट पर नह ंदेर्ा। शजन अनुदानग्राह को भूदान भूशम आवंशटत क र्ई थ , वे लमे्ब समय से खातेदार अशिकार प्रदान करने क मांर् कर रहे थे। अशिशनयम क िारा 24 को इस उदे्दश् से प्रशतस्थाशपत शकया जाएर्ा शक इस अशिशनयम के अन्तर्गत आवंशटत भूशम, इस अशिशनयम या शकस अन्य तत्समय प्रवृत्त शवशि में अन्तशवगष्ट शकस बात के होते हुए भ , उक्त अशिशनयम के प्रारम्भ क शतशथ से या आवंटन क शतशथ से, जो भ बाद में हो, राज्य सरकार में शनशहत मान जाएर् तथा ऐस भूशम का अनुदानग्राह उक्त शतशथ से उस भूशम का खातेदार काश्तकार बन जाएर्ा तथा राजस्थान काश्तकार अशिशनयम, 1955 के उपबन्ो ं के अन्तर्गत खातेदार काश्तकार पर अशिरोशपत समस्त दाशयत्ो ंके अि न होर्ा।इस शविेयक का उदे्दश् उपयुगक्त उदे्दश्ो ंको प्राप्त करना है।राजस्थान राजपत्र असािारण भार् III-A शदनांक 20.2.2008, पृष्ठ 21 (2) = 2008RSCS/भार् II/पृष्ठ 453/H. 274उदे्दश्ो ंएवं कारणो ंका कथन (अशिशनयम 20, 2008).- भूदान भूशम भूदान अशिशनयम, 1954 क िारा 24 के अन्तर्गत आवंशटत क जात है, शजसके अन्तर्गत भूदान भूशम का िारक भूशम में कोई शहत अन्तररत नह ंकरेर्ा तथा बोर्ग क पूवग स्व कृशत के शबना भूशम को उपपटे्ट पर दे सकेर्ा। शजस अनुदानग्राह को भूदान भूशम आवंशटत क र्ई थ , वह लमे्ब समय से खातेदार अशिकार प्रदान करने क मांर् कर रहा था। अशिशनयम क िारा 24 को इस उदे्दश् से प्रशतस्थाशपत शकया जाएर्ा शक इस अशिशनयम के अन्तर्गत आवंशटत भूशम, इस अशिशनयम या शकस अन्य तत्समय प्रवृत्त शवशि में शकस बात के होते हुए भ , उक्त अशिशनयम क शतशथ से या आवंटन क शतशथ से, जो भ बाद में हो, राज्य सरकार में शनशहत हो जाएर् तथा ऐस भूशम का अनुदानग्राह उक्त शतशथ से उस भूशम का खातेदार काश्तकार हो जाएर्ा तथा राजस्थान काश्तकार अशिशनयम, 1955 के उपबन्ो ंके अन्तर्गत खातेदार काश्तकार पर अशिरोशपत समस्त दाशयत्ो ंके अि न होर्ा।इस शविेयक का उदे्दश् उपयुगक्त उदे्दश्ो ंको प्राप्त करना है।(6 अर्स्त, 1954 को महामशहम राजप्रमुख क स्व कृशत प्राप्त हुई)श्र आचायग https://indiankanoon.org/doc/74877500/ शवनोबा भावे द्वारा िुरू शकए र्ए भूदान यज्ञ से संबंशित र्शतशवशियो ंको सुशविाजनक बनाने और भूदान यज्ञ बोर्ग के र्ठन, उक्त बोर्ग को भूशम दान करने, दान में प्राप्त भूशम को भूशमह न व्यक्तक्तयो ं या सामुदाशयक प्रयोजनो ंके शलए शवतररत करने तथा उससे संबंशित शवषयो ंका उपबंि करने के शलए अशिशनयम।[हमारे र्णतन्त्र के पांचवें वषग में राजस्थान राज्य शविानमण्डल द्वारा शनम्नशलक्तखत रूप में यह अशिशनयम बनाया जाएर्ा:] [उदे्दश्ो ंऔर कारणो ंके कथन के शलए, राजस्थान राजपत्र, भार् III, शदनांक 10.9.1953 देखें।] - 1. संधिप्त नाम, धिस्तार और प्रारंभ। (1)इस अशिशनयम को राजस्थान भूदान यज्ञ अशिशनयम, 1954 कहा जा सकता है।(2)इसका शवस्तार समू्पणग राजस्थान राज्य पर है, शजसमें आबू, अजमेर और सुनेल के्षत्र िाशमल हैं, शकनु्त राजस्थान अशिशनयम 17 सन् 1961, शदनांक 31-5-1961 (1-9-1961 से प्रभाव ) [ राज्य पुनर्गठन अशिशनयम, 1956 (1956 का 37) क िारा 9 क उपिारा (1) के खण्ड (र्) में शवशनशदगष्ट शसरोजं उपखण्ड को छोड़कर] [ अशिसूचना संख्या एफ 2(II)/राजस्व/ब /59, शदनांक 12.5.1960 द्वारा जोड़ा र्या-राजस्थान राजपत्र, असािारण, भार् IV-स , शदनांक 13.5.1960 में प्रकाशित। ](3)यह तत्काल प्रभाव से लारू् होर्ा। 2. व्याख्या. (1)इस अशिशनयम में, जब तक शक संदभग से अन्यथा अपेशक्षत न हो,- (ए)"भूदान यज्ञ" से तात्पयग श्र आचायग शवनोबा भावे द्वारा सै्वक्तिक दान के माध्यम से भूशम अशिग्रहण के शलए िुरू शकया र्या आंदोलन है, शजसका उदे्दश् भूशमह न व्यक्तक्तयो ं को इसे शवतररत करना या सामुदाशयक उदे्दश्ो ंके शलए इसका उपयोर् करना है; (ब )"भूदान घोषणा" से इस अशिशनयम क िारा 11 के अि न क र्ई या क र्ई समझ र्ई घोषणा अशभपे्रत है; (स )"बोर्ग" से इस अशिशनयम क िारा 3 के अि न स्थाशपत भूदान यज्ञ बोर्ग अशभपे्रत है; (र् )"सामुदाशयक प्रयोजन" से तात्पयग शकस भ सावगजशनक उपयोशर्ता के उदे्दश् से है, शजसमें खाद र्ड्ो ंके शलए स्थल, सावगजशनक िौचालयो ंके शलए स्थल, सू्कलो ंया सू्कल फामों के शलए स्थल, स्वास्थ्य केन्द्ो ंके शलए स्थल, मनोरंजन के शलए स्थल, चराई के शलए स्थल और अन्य समान प्रयोजन िाशमल हैं; (इ)"अनुदान प्राप्तकताग" का तात्पयग उस व्यक्तक्त से है शजसे इस अशिशनयम के अंतर्गत भूदान यज्ञ के अनुसरण में भूशम प्रदान क र्ई है; (एफ)"भूशम" का तात्पयग ऐस भूशम से है जो कृशष प्रयोजनो ंके शलए या कृशष के अि न प्रयोजनो ंके शलए या चारार्ाह के शलए अशिरृ्ह त या पटे्ट पर द र्ई हो; (ज )"स्वाम " का तात्पयग ऐसे व्यक्तक्त से है शजसके पास भूशम पर माशलकाना या अशिभोर् शकरायेदार का अशिकार है और इसमें राज्य अनुदानकताग भ िाशमल है; (एच)"भूशमह न व्यक्तक्त" से तात्पयग ऐसे व्यक्तक्त से है शजसके पास इस संबंि में शनिागररत के्षत्रफल से कम भूशम नह ंहै; (मैं)इस अशिशनयम के शकस भ प्राविान में "राजस्व अशिकार " का अथग तहस लदार या कोई अन्य राजस्व अशिकार है, शजसे राज्य सरकार द्वारा इस अशिशनयम के प्रयोजनो ं के शलए [राजपत्र] [िारा 4 (ए) राजस्थान अशिशनयम 17, 1961 द्वारा प्रशतस्थाशपत, राजस्थान राजपत्र https://indiankanoon.org/doc/66665330/ https://indiankanoon.org/doc/29879618/ https://indiankanoon.org/doc/48907524/ https://indiankanoon.org/doc/56330947/ https://indiankanoon.org/doc/41449847/ https://indiankanoon.org/doc/128798819/ https://indiankanoon.org/doc/51436077/ https://indiankanoon.org/doc/64278787/ https://indiankanoon.org/doc/111408153/ https://indiankanoon.org/doc/116736350/ https://indiankanoon.org/doc/64635757/ https://indiankanoon.org/doc/23292357/ https://indiankanoon.org/doc/164251950/ https://indiankanoon.org/doc/126538805/ https://indiankanoon.org/doc/195412471/ असािारण भार् IV-ए शदनांक 31-5-1961 (1-9-1961 से) में प्रकाशित] में अशिसूचना द्वारा शनयुक्त शकया जा सकता है ; (जे)"शनिागररत" का तात्पयग इस अशिशनयम के अि न बनाए र्ए शनयमो ंद्वारा शनिागररत है; और (क)[ xxx] [राजस्थान राजपत्र असािारण भार् IV-ए शदनांक 31-5-1961 में प्रकाशित राजस्थान अशिशनयम 17 सन् 1961 क िारा 4(ख) द्वारा लोशपत (1-9-1961 से प्रभाव )।]स्पष्ट करण.- इस अशिशनयम में पररभाशषत न शकए र्ए िब्ो ंऔर अशभव्यक्तक्तयो ंका वह अथग होर्ा जो भूशम-पट्टो ं से संबंशित तत्समय प्रवृत्त शवशि में है। (2)[ xxx] [राजस्थान राजपत्र असािारण भार् IV-ए शदनांक 31-5-1961 में प्रकाशित राजस्थान अशिशनयम 17 सन् 1961 क िारा 4(ख) द्वारा लोशपत (1-9-1961 से प्रभाव )।] 3. भूदान यज्ञ बोर्ड की स्थापना एिं धनगमन। (1)राजस्थान भूदान यज्ञ बोर्ग के नाम से एक बोर्ग स्थाशपत शकया जाएर्ा। (2)बोर्ग एक शनर्शमत शनकाय होर्ा, शजसका िाश्वत उत्तराशिकार और सामान्य मुहर होर् तथा उसे चल और अचल दोनो ंप्रकार क सम्पशत्त अशजगत करने, िारण करने, प्रिासन करने, अंतररत करने और शनपटाने क िक्तक्त होर् , तथा वह उक्त नाम से वाद लाएर्ा और उस पर वाद चलाया जाएर्ा। 4. बोर्ड का गठन। (1)बोर्ग में शनम्नशलक्तखत सदस्य िाशमल होरें्, अथागत्:- (ए)अध्यक्ष और सशचव को राज्य सरकार द्वारा नाशमत शकया जाएर्ा [ राजस्थान अशिशनयम 6, 1984 क िारा 2 (ए) (आई), 2 (ए) (आई) और 2 (ए) (iii) द्वारा प्रशतस्थाशपत और हटाया र्या, जो राजस्थान राजपत्र असािारण भार् IV-ए में शदनांक 13-4-1984 को प्रकाशित हुआ (13-4-1984 से प्रभाव )।] , और (ब )छह या अशिक शकनु्त दस से अनशिक सदस्य, जो राज्य सरकार द्वारा मनोन त शकये जायेंरे्। [राजस्थान अशिशनयम 6 सन् 1984, जो राजस्थान राजपत्र असािारण भार् IV-A शदनांक 13-4- 1984 में प्रकाशित हुआ, क िारा 2 (क)(i), 2(क)(i) तथा 2(क)(iii) द्वारा प्रशतस्थाशपत तथा हटाया र्या (13-4-1984 से प्रभाव )। ][xxx] [राजस्थान अशिशनयम 6, 1984, जो राजस्थान राजपत्र असािारण भार् IV-ए शदनांक 13-4-1984 में प्रकाशित हुआ, क िारा 2 (ए)(i), 2(ए)(i) तथा 2(ए)(iii) द्वारा क्रमिः प्रशतस्थाशपत एवं हटाया र्या।] (2)अध्यक्ष, सशचव और सदस्य का नामांकन [राजस्थान राजपत्र] में अशिसूशचत शकया जाएर्ा [िारा 4 (ए) राजस्थान अशिशनयम 17, 1961 द्वारा प्रशतस्थाशपत, राजस्थान राजपत्र असािारण भार् IV- ए में शदनांक 31-5-1961 को प्रकाशित (1-9-1961 से)।] [xxx] [राजस्थान अशिशनयम 24, 1956 क िारा 2 द्वारा लोप , राजस्थान राजपत्र असािारण भार् IV-ए में शदनांक 16-7-1956 को प्रकाशित।] (3)बोर्ग के अध्यक्ष, सशचव और सदस्य उपिारा (2) के अि न अशिसूचना क तार ख से चार वषग तक पद िारण करें रे् और पुनः नामांकन के शलए पात्र होरें्:[बिते शक राजस्थान सरकार के राजस्व (गु्रप-IV) शवभार् क अशिसूचना संख्या एफ. 8(26) राजस्व/ब -68, शदनांक 22 जून, 1976 के अि न नामशनदेशित बोर्ग के अध्यक्ष, सशचव एवं सदस्य, जो आज क तार ख के राजस्थान राजपत्र (असािारण भार् IV-C) में प्रकाशित हो, राजस्थान भूदान यज्ञ (संिोिन एवं शवशिमान्यकरण) अशिशनयम, 1984 के प्रारंभ से साठ शदन क अवशि तक अथवा नये बोर्ग के र्ठन होने तक, जो https://indiankanoon.org/doc/25798107/ https://indiankanoon.org/doc/65988422/ https://indiankanoon.org/doc/174982859/ https://indiankanoon.org/doc/152020422/ https://indiankanoon.org/doc/107714413/ https://indiankanoon.org/doc/117044050/ https://indiankanoon.org/doc/97446336/ https://indiankanoon.org/doc/44947470/ https://indiankanoon.org/doc/176920642/ https://indiankanoon.org/doc/170093573/ https://indiankanoon.org/doc/10034416/ https://indiankanoon.org/doc/103341533/ https://indiankanoon.org/doc/103341533/ https://indiankanoon.org/doc/58476835/ भ पहले हो, पद िारण करें रे्:] [राजस्थान राजपत्र असािारण भार् IV-A, शदनांक 13-4-1984 में प्रकाशित, 1984 के राजस्थान अशिशनयम 6 क िारा 2(ब )(i) द्वारा अंतःस्थाशपत (13-4-1984 से प्रभाव )।]बिते शक [आरे्] [िारा 2(ब )(ii) राजस्थान अशिशनयम 6, 1984 द्वारा सक्तिशलत और हटाया र्या, राजस्थान राजपत्र असािारण भार् IV-ए में प्रकाशित, शदनांक 13-4-1984 (13-4- 1984 से)] शक राज्य सरकार [xxx] [िारा 2(ब )(ii) राजस्थान अशिशनयम 6, 1984 द्वारा सक्तिशलत और हटाया र्या, राजस्थान राजपत्र असािारण भार् IV-ए में प्रकाशित, शदनांक 13-4-1984 (13- 4-1984 से)] बोर्ग के शकस भ सदस्य को पद से हटा सके , शजसे [xxx] [िारा 2(ब )(ii) राजस्थान अशिशनयम 6, 1984 द्वारा सक्तिशलत और हटाया र्या, राजस्थान राजपत्र असािारण भार् IV-ए में प्रकाशित, शदनांक 13-4-1984 (13-4-1984 से)] नैशतक अिमता से संबंशित शकस अपराि में दोष ठहराया र्या हो और कोई भ सदस्य जो-(ए)ऐसे सदस्य के रूप में कायग करने में िार ररक या मानशसक रूप से अक्षम हो र्या है, या(ब )अपने पद का इस प्रकार दुरुपयोर् शकया है शक उसका पद पर बने रहना लोकशहत के शलए हाशनकारक है, या(स )अपने कतगव्यो ंका पालन करने में शवफल रहा है। 5. बोर्ड का धिघटन। (1)[राज्य सरकार] [िारा 3 द्वारा प्रशतस्थाशपत, राजस्थान अशिशनयम 6 सन् 1984, राजस्थान राजपत्र असािारण भार् IV-ए, शदनांक 13-4-1984 में प्रकाशित (13-4-1984 से)।] शकस भ समय बोर्ग को शवघशटत कर सकेर् और इस अशिशनयम के उपबंिो ंके अनुसार बोर्ग का पुनर्गठन कर सकेर् । (2)बोर्ग को शवघशटत करने वाला आदेि राजस्थान राजपत्र में अशिसूशचत शकया जाएर्ा तथा वह अशिसूशचत शतशथ से प्रभाव होर्ा। 6. बोर्ड में आकस्मिक ररस्मियां तथा अन्य मामले। बोर्ग में आकक्तिक ररक्तक्तयो ंको भरने क पद्धशत, उसके कायग करने क प्रशक्रया तथा उसके कारबार का संचालन ऐसा होर्ा जैसा शवशहत शकया जाए। 7. बोर्ड के कतडव्य. (1)बोर्ग का यह कतगव्य होर्ा शक वह भूदान यज्ञ के प्रयोजन के शलए उसमें शनशहत समस्त भूशम का प्रिासन करे।(2)बोर्ग भूदान यज्ञ के प्रयोजनो ं के शलए ऐसे अन्य कायग करेर्ा तथा ऐस अन्य िक्तक्तयां रखेर्ा, जो ऐस भूशम के संबंि में आवश्क हो।ं 8. कायडिाही की िैिता. इस अशिशनयम के अि न शकए र्ए शकस कायग या क र्ई शकस कायगवाह पर बोर्ग में शकस ररक्तक्त या बोर्ग के अध्यक्ष, सशचव या शकस सदस्य के नामांकन में शकस तु्रशट या अशनयशमतता के कारण प्रश्न नह ंउठाया जाएर्ा। 9. अधिकाररयो ंएिं कमडचाररयो ंकी धनयुस्मि। - बोर्ग, [राज्य सरकार द्वारा जार शकए र्ए शकस भ सामान्य या शविेष शनदेिो ं के अि न] [राजस्थान अशिशनयम संख्या 21, 1962 क दूसर अनुसूच द्वारा सक्तिशलत , राजस्थान राजपत्र, असािारण, भार् IV-ए, शदनांक 15.12.1962 में प्रकाशित।] ऐसे अशिकाररयो ं और कमगचाररयो ं को शनयुक्त कर सकता है, शजन्हें वह अपने कायों के कुिल शनष्पादन के शलए https://indiankanoon.org/doc/151948766/ https://indiankanoon.org/doc/35211045/ https://indiankanoon.org/doc/174936461/ https://indiankanoon.org/doc/112704759/ https://indiankanoon.org/doc/53684854/ https://indiankanoon.org/doc/195153351/ https://indiankanoon.org/doc/19891103/ https://indiankanoon.org/doc/157172675/ https://indiankanoon.org/doc/109925086/ https://indiankanoon.org/doc/156410282/ https://indiankanoon.org/doc/135423671/ https://indiankanoon.org/doc/112599368/ https://indiankanoon.org/doc/97920630/ आवश्क समझे:[बिते शक बोर्ग, पूवोक्त के अि न रहते हुए, शनदेि दे सकेर्ा शक शकन्ह ंदो या अशिक अशिकाररयो ंके कतगव्यो ंका शनवगहन करने के शलए एक व्यक्तक्त शनयुक्त शकया जाएर्ा] [राजस्थान अशिशनयम संख्या 21 सन् 1962 क शद्वत य अनुसूच द्वारा जोड़ा र्या , जो राजस्थान राजपत्र, असािारण, भार् IV-ए, शदनांक 15.12.1962 में प्रकाशित हुआ।] , 10. अधिकाररयो ंऔर सेिको ंकी सेिा की शते। पाररश्रशमक और सेवा क अन्य ितें - बोर्ग के अशिकाररयो ंऔर कमगचाररयो ंका पाररश्रशमक और सेवा क अन्य ितें ऐस होरं् , जो शनयमो ंद्वारा शनिागररत क जाएंर् । 11. भूदान यज्ञ हेतु भूधम दान। (1)वतगमान में लारू् शकस कानून में शकस बात के होते हुए भ , कोई भ व्यक्तक्त, जो भूशम का स्वाम है, भूदान यज्ञ बोर्ग को उस संबंि में शनिागररत तर के से शलक्तखत घोषणा करके भूशम दान कर सकता है। (2)भूदान घोषणापत्र तहस लदार के पास दाक्तखल शकया जाएर्ा। 12. बोर्ड की धनधियााँ। - बोर्ग के पास अपन स्वयं क शनशि होर् , और वह बोर्ग के सभ या शकस भ प्रयोजन के शलए केन्द् य या राज्य सरकार या स्थान य प्राशिकरण या शकस व्यक्तक्त या शनकाय से, चाहे वह शनर्शमत हो या नह ,ं अनुदान, दान, उपहार या ऋण स्व कार कर सकेर्ा। 13. धनधियो ंका उपयोग. बोर्ग में शनशहत सभ संपशत्त, शनशियां और अन्य सभ पररसंपशत्तयां, इस अशिशनयम के प्राविानो ं और प्रयोजनो ंके अि न रहते हुए, बोर्ग द्वारा िारण क जाएंर् और उनका उपयोर् शकया जाएर्ा। 14. तहसील सधमधतयां। (1)बोर्ग, शकस तहस ल के शलए, जहां वह ऐसा करना आवश्क समझे, तहस ल सशमशतयां र्शठत कर सकेर्ा, शजनमें कम से कम त न और अशिक से अशिक सात सदस्य होरें्, शजन्हें बोर्ग द्वारा शनयुक्त शकया जाएर्ा। (2)तहस ल सशमशतयो ंके सदस्यो ंका चयन बोर्ग द्वारा [सामान्यतया] [राजस्थान अशिशनयम 14, 1955 क िारा 2 द्वारा सक्तिशलत, राजस्थान राजपत्र असािारण भार् IV-ए, शदनांक 31-10-1955 में प्रकाशित।] तहस ल के के्षत्र में रहने वाले व्यक्तक्तयो ंमें से शकया जाएर्ा:बिते शक, यशद शकस तहस ल के शलए कोई तहस ल सशमशत र्शठत नह ंक र्ई है, तो अशिशनयम के अि न तहस ल सशमशत के कायग बोर्ग द्वारा शनष्पाशदत शकए जाएंरे्। 15. घोषणा का प्रकाशन और उस पर जांच। (1)भूदान घोषणा प्राप्त होने पर, तहस लदार ऐस भूशम में दाता के अशिकार, स्वाशमत् या शहत के बारे में प्रारंशभक जांच करेर्ा, और ऐस जांच के पररणाम को सलाह के शलए बोर्ग को भेजेर्ा। (2)यशद दानकताग का अशिकार, ि षगक या शहत दोषपूणग प्रत त होता है, तो बोर्ग तहस लदार को घोषणा को अस्व कार करने क सलाह दे सकता है और घोषणा तदनुसार अस्व कार कर द जाएर् । https://indiankanoon.org/doc/97920630/ https://indiankanoon.org/doc/132308385/ https://indiankanoon.org/doc/156724591/ https://indiankanoon.org/doc/86010266/ https://indiankanoon.org/doc/140418775/ https://indiankanoon.org/doc/49432067/ https://indiankanoon.org/doc/172343627/ https://indiankanoon.org/doc/148575160/ https://indiankanoon.org/doc/133218841/ https://indiankanoon.org/doc/128618921/ https://indiankanoon.org/doc/72061456/ https://indiankanoon.org/doc/22681692/ https://indiankanoon.org/doc/53182046/ (3)यशद बोर्ग तहस लदार को घोषणा क पुशष्ट के शलए कारगवाई करने क सलाह देता है, तो उसे उस समय वह तार ख भ बतान होर् जब बोर्ग भूदान यज्ञ योजना के अनुसार भूशम को पटे्ट पर देने क क्तस्थशत में होर्ा। (4)तहस लदार आपशत्तयां आमंशत्रत करने के शलए घोषणा को बोर्ग द्वारा पूवगवती उपिारा में शनशदगष्ट शतशथ से पूवग 4 माह के भ तर शनयत क र्ई शकस भ शतशथ को प्रकाशित करेर्ा। 16. भूधम दान करने के धलए सिम दाता। राजस्थान भूशम सुिार और जार् र पुनग्रगहण अशिशनयम, 1952 (1952 का सं. VI) या भूशम स्वाशमत् से संबंशित शकस अन्य कानून में, जो भ लारू् हो, शकस बात के होते हुए भ , कोई स्वाम इस अशिशनयम के प्रयोजनो ंके शलए, अपने द्वारा िाररत भूशम को भूदान यज्ञ बोर्ग को दान करने के शलए सक्षम होर्ा। 17. आपधियां दास्मिल करना, सुनिाई करना एिं धनपटाना। (1)कोई भ व्यक्तक्त, शजसके शहत िारा 11 के अि न क र्ई भूदान घोषणा से प्रभाशवत होते हैं, प्रकािन के त स शदन के भ तर, तहस लदार के समक्ष उस पर आपशत्तयां दजग करा सकेर्ा। (2)तहस लदार प्रते्यक ऐस आपशत्त को पंज कृत करेर्ा तथा सुनवाई क तार ख शनशित करेर्ा, शजसक सूचना घोषणाकताग तथा आपशत्तकताग को शबना कोई प्रशक्रया िुल्क या अन्य िुल्क वसूले द जाएर् । [xxx] [राजस्थान राजपत्र असािारण भार् IV-ए, शदनांक 31-10-1955 में प्रकाशित, राजस्थान अशिशनयम 14 सन् 1955 क िारा 3(ii) द्वारा लोप।] (3)सुनवाई क तार ख को या शकस अन्य तार ख को, शजसके शलए इसे स्थशर्त शकया जा सकता है, तहस लदार आपशत्त क जांच और शनपटान करने के शलए आरे् बढेर्ा और िारा 21 के प्राविानो ं के अि न होर्ा-(ए)या तो भूदान घोषणा क पुशष्ट करें , या(ब )उस का स्थान ले लें। (4)यशद तहस लदार भूदान घोषणा क पुशष्ट कर देता है तो, तत्समय प्रवृत्त शकस कानून में शकस बात के होते हुए भ , ऐस भूशम में स्वाम के सभ अशिकार, हक और शहत, भूदान यज्ञ के प्रयोजनो ं के शलए भूदान बोर्ग को हस्तांतररत और उसमें शनशहत हो जाएंरे्। (5)जहां भूदान घोषणा को उपिारा (3) के अि न तहस लदार द्वारा शनरस्त कर शदया जाता है, वहां दान रद्द हो जाएर्ा और स्वाम के बारे में यह समझा जाएर्ा शक वह ऐस भूशम पर अपने सभ अशिकार, शहत और हक बरकरार रखेर्ा, मानो ऐसा कोई दान ह नह ंशकया र्या था। 18. राजस्व अधिकारी का आदेश, धसधिल िाद का धिषय। - इस अशिशनयम के अि न शकस आपशत्त को खाररज करने संबंि राजस्व अशिकार का आदेि अप ल या पुनर क्षण के अि न नह ंहोर्ा:परनु्त आदेि से व्यशथत कोई पक्षकार या भूशम में शहतबद्ध कोई अन्य व्यक्तक्त, शजसे कायगवाह क सूचना नह ंथ , ऐसे आदेि क तार ख से छह मास के भ तर, उस आदेि को अपास्त कराने क अशिकाररता रखने वाले शसशवल न्यायालय में वाद संक्तस्थत कर सकेर्ा और ऐसे न्यायालय का शनणगय बोर्ग पर आबद्धकर होर्ा; और ऐसे वाद के पररणाम, यशद कोई हो, के अि न रहते हुए, राजस्व अशिकार का आदेि शनणागयक होर्ा। 19. उपहार अपररितडनीय होगें। - भूशम का प्रते्यक दान शजसके संबंि में िारा 17 के अि न आदेि पाररत शकया र्या है, आदेि क तार ख के पिात् अपररवतगन य होर्ा। 20. बोर्ड में धनधहत भूधम कुकड नही ंकी जा सकेगी। https://indiankanoon.org/doc/14740237/ https://indiankanoon.org/doc/68327569/ https://indiankanoon.org/doc/187894042/ https://indiankanoon.org/doc/15420106/ https://indiankanoon.org/doc/132654312/ https://indiankanoon.org/doc/105685357/ https://indiankanoon.org/doc/160933951/ https://indiankanoon.org/doc/18321228/ https://indiankanoon.org/doc/66683238/ https://indiankanoon.org/doc/188613958/ https://indiankanoon.org/doc/53281874/ https://indiankanoon.org/doc/119180377/ https://indiankanoon.org/doc/88355479/ https://indiankanoon.org/doc/76580197/ - बोर्ग में शनशहत भूशम, बोर्ग के शवरुद्ध शसशवल न्यायालय द्वारा पाररत शकस शर्क्र या आदेि के शनष्पादन में कुकी या शबक्र के शलए उत्तरदाय नह ंहोर् । 21. ऐसी भूधम जो दान नही ंकी जा सकती। भूशम दान करने का अशिकार - शकस कानून में शकस बात के होते हुए भ , कोई स्वाम इस अशिशनयम के प्रयोजनो ंके शलए शनम्नशलक्तखत शे्रशणयो ंमें से शकस में आने वाल भूशम दान करने का हकदार नह ं होर्ा, अथागत:-(ए)भूशम जो पाररवाररक संपशत्त का शहस्सा है और शजसे संपूणग पाररवाररक संपशत्त के शवभाजन के शबना हस्तांतररत नह ंशकया जा सकता;(ब )भूशम जो दान क शतशथ पर सामान्य चारार्ाह भूशम, श्मिान या कशिस्तान, तालाब, पथ-मार्ग या खशलहान या खेल के मैदान के रूप में दजग है, और(स )ऐस अन्य भूशम शजसे राज्य सरकार, समय-समय पर राजस्थान राजपत्र में अशिसूचना द्वारा शवशनशदगष्ट करे। 22. इस अधिधनयम के प्रारंभ से पूिड दान की गई भूधम। (1)जहां कोई भूशम भूदान यज्ञ के शलए दान क र्ई हो [राजस्थान भूदान यज्ञ संिोध्न अशिशनयम, 1955 (अशिशनयम संख्या 14, सन 1955) के लारू् होने से पूवग] [राजस्थान अशिशनयम संख्या 24 सन् 1956 क िारा 3 द्वारा प्रशतस्थाशपत , राजस्थान राजपत्र, असािारण, भार् IV-ए, शदनांक 16.7.1956 में प्रकाशित।] बोर्ग ऐस समस्त भूशमयो ंक सूच तैयार करेर्ा, शसवाय उन भूशमयो ंके शजन पर िारा 21 के उपबंि लारू् होते हैं, शजसमें यह दिागया जाएर्ा-(ए)भूशम का के्षत्रफल और अन्य शववरण;(ब )दाता का नाम;(स )भूशम में दाता के शहत क प्रकृशत;(र् )यशद भूशम भूदान यज्ञ के अनुसरण में शकस व्यक्तक्त को पहले ह प्रदान कर द र्ई है; उस व्यक्तक्त का नाम शजसे भूशम प्रदान क र्ई है;(इ)उप-खण्ड (घ) के अंतर्गत अनुदान क तार ख; तथा(एफ)अन्य शववरण जो शनिागररत शकए जा सकते हैं।(2)(ए)इस प्रकार तैयार क र्ई सूच उस तहस लदार को भेज जाएर् शजसके अशिकार के्षत्र में भूशम क्तस्थत है;(ब )तहस लदार शनिागररत तर के से सूच प्रकाशित करेर्ा। (3)ऐस सूच प्राप्त होने पर तहस लदार सूच में वशणगत भूशम के संबंि में िारा 15 के अनुसार कारगवाई कराएर्ा। (4)िारा 15 से 18 के प्राविान उक्त भूशम के सभ दान के संबंि में उस प्रकार लारू् होरें् जैसे वे इस अशिशनयम के प्रारंभ के पिात शकए र्ए भूशम के सभ दान के संबंि में लारू् होते हैं:परनु्त जहां िारा 17 क उपिारा (4) के अि न तहस लदार द्वारा आदेि शदया जाता है, वहां दान उस तार ख से स्व कार शकया हुआ समझा जाएर्ा, शजसको भूशम का दान शकया र्या था और इस प्रयोजन के शलए यह अशिशनयम ऐस तार ख को प्रवृत्त हुआ समझा जाएर्ा। (5)उपिारा (2) के अि न सूच के प्रकािन पर तथा शकस शवशि में इसके प्रशतकूल शकस बात के होते हुए भ -(ए)ऐस भूशम में दानकताग का अशिकार, हक और शहत दान क तार ख से भूदान यज्ञ बोर्ग को हस्तांतररत और उसमें शनशहत समझा जाएर्ा, मानो िारा 11 और िारा 17 क उपिारा (3) के अि न उसके संबंि में भूदान यज्ञ घोषणा शवशिवत क र्ई हो और उसक पुशष्ट क र्ई हो।(ब )जहां ऐस भूशम भूदान यज्ञ के अनुसरण में शकस व्यक्तक्त को प्रदान क र्ई है, वहां वह अनुदान क तार ख से िारा 23 के उपबंिो ंके अि न तथा उनके अनुसार अनुदान प्राप्तकताग को प्रदान क र्ई समझ जाएर् । 23. भूधमहीन व्यस्मियो ंको भूधम का अनुदान। https://indiankanoon.org/doc/148805576/ https://indiankanoon.org/doc/76687700/ https://indiankanoon.org/doc/18467349/ https://indiankanoon.org/doc/12403267/ https://indiankanoon.org/doc/136956778/ https://indiankanoon.org/doc/89045210/ https://indiankanoon.org/doc/103341533/ https://indiankanoon.org/doc/103341533/ https://indiankanoon.org/doc/198167013/ https://indiankanoon.org/doc/173337637/ https://indiankanoon.org/doc/132177954/ https://indiankanoon.org/doc/191069740/ https://indiankanoon.org/doc/57948810/ https://indiankanoon.org/doc/114949626/ https://indiankanoon.org/doc/144730945/ https://indiankanoon.org/doc/144730945/ https://indiankanoon.org/doc/4334922/ https://indiankanoon.org/doc/111268134/ https://indiankanoon.org/doc/155494923/ https://indiankanoon.org/doc/190937705/ https://indiankanoon.org/doc/41392380/ https://indiankanoon.org/doc/138471487/ https://indiankanoon.org/doc/156535208/ भूशमह न व्यक्तक्त को भूशम प्रदान कर सकेर्ा - तहस ल सशमशत का बोर्ग या ऐसा अन्य प्राशिकार या व्यक्तक्त, शजसे बोर्ग सामान्यतः या शकस के्षत्र के संबंि में शवशनशदगष्ट करे, शवशहत र शत से ऐस भूशम प्रदान कर सकेर्ा जो भूशमह न व्यक्तक्त में शनशहत हो।[24. भूशम का शनशहत होना और अनुदान प्राप्तकताग के अशिकार। - इस अशिशनयम या शकस अन्य समय प्रवृत्त शवशि में शकस बात के होते हुए भ , शकनु्त इस अशिशनयम क िारा 26 के उपबंिो ंके अि न रहते हुए, इस अशिशनयम के अि न द र्ई भूशम राजस्थान भूदान यज्ञ (संिोिन) अशिशनयम, 2008 (अशिशनयम संख्या 20, 2008) के प्रारंभ क तार ख से या अनुदान क तार ख से, जो भ बाद में हो, राज्य सरकार में शनशहत हो जाएर् और ऐस भूशम का अनुदान प्राप्तकताग उक्त तार ख से उसका खातेदार काश्तकार बन जाएर्ा और राजस्थान काश्तकार अशिशनयम, 1955 (अशिशनयम संख्या 3, 1955) के उपबंिो ंके अि न खातेदार काश्तकार को प्रदत्त सभ अशिकारो ंका हकदार होर्ा और उन पर अशिरोशपत सभ दाशयत्ो ंके अि न होर्ा] [राजस्थान अशिशनयम संख्या 20, 2008, शदनांक 13.5.2008 से लारू्-अशिसूचना संख्या एफ 2(15) शवशि/2/2008, शदनांक 14.05.2008 13.5.2008- राजस्थान राजपत्र, असािारण, भार् IV-ए, शदनांक 16.5.2008, पृष्ठ 23(1) = 2008 आरएसस एस/भार् II/ पृष्ठ 370/एच. 177] 25. [ राजस्थान अधिधनयम संख्या 20 सन् 2008, धदनांक 13.5.2008 से लागू-अधिसूचना संख्या एफ. 2(15) धिधि/2/2008, धदनांक 13.5.2008-राजस्थान राजपत्र, असािारण, भाग IV-ए, धदनांक 16.5.2008, पृष्ठ 23(1) = 2008 आरएससीएस/भाग II/ पृष्ठ 370/एच. 177] XXX] 26. भूदान यज्ञ योजना के अनुसार अनुदान धदया जाएगा। (1)सभ अनुदान, जहां तक संभव हो, भूदान यज्ञ क योजना के अनुसार शदए जाएंरे्:परनु्त यशद बोर्ग अपने पास शनशहत शकस भूशम को आवंशटत करने में या शकस सामुदाशयक प्रयोजन के शलए ऐस भूशम का उपयोर् करने में असमथग है, तो उसे ऐस भूशम को अन्य उपयुक्त भूशम के साथ शवशनमय करने या इस अशिशनयम के उपबंिो ंके अनुसार शवतरण के शलए दूसर भूशम क्रय करने के शलए उसे बेचने क िक्तक्त होर् । (2)[जहां यह प्रश्न उठता है शक क्या इस अशिशनयम के उपबंिो ंया भूदान यज्ञ योजना के उलं्लघन में भूशम का कोई अनुदान या आबंटन शकया र्या है, वहां राज्य सरकार या उसके द्वारा इस शनशमत्त शविेष रूप से प्राशिकृत शकस अशिकार द्वारा इसक जांच क जा सकेर् और ऐस जांच के पिात् यह शनष्कषग शदए जाने पर शक ऐसा उलं्लघन शकया र्या है, अनुदान या आबंटन रद्द शकया जा सकेर्ा और राज्य सरकार द्वारा भूशम बोर्ग को अंतररत क जा सकेर् :परनु्त यह शक अनुदान प्राप्तकताग या आबंट को सुनवाई का युक्तक्तयुक्त अवसर शदए शबना कोई अनुदान या आबंटन रद्द नह ंशकया जाएर्ा।] [राजस्थान अशिशनयम 41 सन् 1987, शदनांक 5-12-1987 द्वारा िारा संिोशित क र्ई तथा उपिारा (2) अंतःस्थाशपत क र्ई (7-12-1987 से)।] 27. अधितररत भूधम का धनपटान। - यशद बोर्ग शकस दान क र्ई भूशम को योजना के अनुसार शवतररत नह ंकर सकता है तो वह ऐस भूशम को राज्य सरकार को हस्तांतररत कर देर्ा। (2)[यशद बोर्ग शकस दान क र्ई भूशम को उशचत समय के भ तर शवतररत करने में असफल रहता है, तो राज्य सरकार, उशचत समझ र्ई जांच के आिार पर, ऐस भूशम को राज्य सरकार को https://indiankanoon.org/doc/81081037/ https://indiankanoon.org/doc/135815585/ https://indiankanoon.org/doc/87622967/ https://indiankanoon.org/doc/143263876/ https://indiankanoon.org/doc/49440077/ https://indiankanoon.org/doc/14121992/ हस्तांतररत करने का आदेि दे सकत है:परनु्त बोर्ग को सुनवाई का युक्तक्तयुक्त अवसर शदए शबना कोई आदेि नह ंशकया जाएर्ा।] [राजस्थान अशिशनयम 41 सन् 1987, शदनांक 5-12-1987 द्वारा िारा संिोशित तथा उपिारा (2) अंतःस्थाशपत (7-12-1987 से)] 28. स्टाम्प शुल्क और पंजीकरण से छूट। िारा 11 के अि न क र्ई या क र्ई समझ र्ई भूदान घोषणा [या भूदान घोषणा क पुशष्ट करने वाला िारा 17 के अि न जार आदेि] [राजस्थान अशिशनयम 24, 1956 क िारा 6 द्वारा अशिरोशपत , राजस्थान राजपत्र असािारण भार् IV-A, शदनांक 16-7-1956 में प्रकाशित।] या िारा 23 के अि न क र्ई या क र्ई समझ र्ई भूशम का अनुदान, शकस भ शवपर त कानून के होते हुए भ , स्टाम्प िुल्क के संदाय से तथा दस्तावेजो ंके पंज करण और शनष्पादन से संबंशित कानून के अि न पंज करण या सत्यापन से सदैव मुक्त माना जाएर्ा। 29. अिैि रूप से कब्जा करने िाले व्यस्मियो ंको बेदिल करना। िारा 17 के अि न पाररत आदेि क तार ख को भूशम पर कब्जा रखने वाले शकस व्यक्तक्त और बोर्ग में शनशहत भूशम पर कानून के अनुसार नह ंबक्तल्क अन्यथा कब्जा लेने वाले शकस व्यक्तक्त को, बोर्ग या संबंशित पटे्टदार द्वारा राजस्व अशिकार को आवेदन करने पर, बेदखल शकया जा सकता है। 30. होस्मडंग का धिभाजन। यशद बोर्ग को दान में द र्ई भूशम शकस जोत का भार् है, तो बोर्ग या संबंशित काश्तकार कबे्ज के शलए सक्षम राजस्व न्यायालय या अशिकार को आवेदन कर सकेर्ा और ऐसा न्यायालय या अशिकार , उस समय लारू् काश्तकार कानून के अनुसार, जोत का शवभाजन कर सकेर्ा, भूशम का स मांकन कर सकेर्ा और शकराये का बंटवारा कर सकेर्ा। 31. भू-राजस्व माफ करने की शस्मि। - यशद राज्य सरकार का यह समािान हो जाए शक बोर्ग शकस वषग भूशम को पटे्ट पर देने में समथग नह ंरहा है तो वह उस वषग के शलए भूशम पर देय भू-राजस्व या लर्ान माफ कर सकेर् । 32. धनयम बनाने की शस्मि। (1)भूदान यज्ञ बोर्ग, राज्य सरकार क पूवग मंजूर से [या राज्य सरकार बोर्ग के परामिग से] [राजस्थान अशिशनयम 41 सन् 1987, शदनांक 5-12-1987 द्वारा अन्तःस्थाशपत (7-12-1987 से)] इस अशिशनयम के उपबन्ो ंको कायागक्तित करने के प्रयोजनाथग शनयम बना सकेर् । (2)पूवगर्ाम िक्तक्त क व्यापकता पर प्रशतकूल प्रभाव र्ाले शबना, ऐसे शनयमो ं में शनम्नशलक्तखत प्राविान हो सकें रे्- (ए)बोर्ग क स्थापना और र्ठन तथा उसके अध्यक्ष या सदस्यो ंके नामांकन से संबंशित मामला, जैसा भ मामला हो; (ब )भूदान घोषणा का प्रारूप और उसे दाक्तखल करने का तर का ;(स )भूदान घोषणा के साथ दाक्तखल शकए जाने वाले दस्तावेज; (र् )भूदान घोषणा के प्रकािन का तर का;(इ)िारा 15 के अंतर्गत जांच क प्रकृशत, दायरा और तर का;(एफ)आपशत्तयां दजग करने और उनके पंज करण का तर का;(ज )आपशत्तयो ंपर सुनवाई एवं शनणगय हेतु शतशथ का शनिागरण;(एच)इस अशिशनयम के अि न नोशटस क ताम ल का तर का https://indiankanoon.org/doc/169938638/ https://indiankanoon.org/doc/103341533/ https://indiankanoon.org/doc/56396447/ https://indiankanoon.org/doc/183399512/ https://indiankanoon.org/doc/74368390/ https://indiankanoon.org/doc/113963913/ https://indiankanoon.org/doc/47109410/ https://indiankanoon.org/doc/194498095/ https://indiankanoon.org/doc/164877364/ https://indiankanoon.org/doc/8751650/ https://indiankanoon.org/doc/68369050/ https://indiankanoon.org/doc/25815235/ https://indiankanoon.org/doc/119880412/ https://indiankanoon.org/doc/87668038/ https://indiankanoon.org/doc/87495301/ https://indiankanoon.org/doc/168025613/ और ढंर्;(मैं)िारा 17 के अंतर्गत आपशत्तयो ं क सुनवाई और शनपटान में अपनाई जाने वाल प्रशक्रया;(जे)भूदान घोषणा क पुशष्ट या अशिक्रमण से संबंशित प्रशक्रया, िारा 17 के तहत आपशत्तयां;(क)िारा 23 के अनुसरण में भूशम अनुदान से संबंशित मामले;(एल)बोर्ग क प्रशक्रया और उसके व्यवसाय के शनपटान को शवशनयशमत करना;(एम)अपने कमगचाररयो ंका पाररश्रशमक और सेवा क ितें;(एन)तहस ल सशमशतयो ंके सदस्यो ंके पदो ंक प्रशक्रया, कामकाज का शनपटान, कायगकाल, आकक्तिक ररक्तक्तयो ंको भरना, शवघटन, काशमगको ंमें पररवतगन और तहस ल सशमशतयो ं का पुनर्गठन शवशनयशमत करना;(ओ)पटे्टदारो ं को ऋण देने के शलए ितें शनिागररत करना;(प )[ XXX] [राजस्थान अशिशनयम 24 सन् 1956 क िारा द्वारा लोप , राजस्थान राजपत्र भार् IV-ए, असािारण, शदनांक 16-7-1956 में प्रकाशित।](कू्य)उप-सशमशत या सशमशतयो ंक शनयुक्तक्त, तथा ऐस सशमशतयो ं क िक्तक्तयो ं का भूदान यज्ञ बोर्ग के व्यक्तक्तर्त सदस्यो ं या पदाशिकाररयो ं को प्रत्यायोजन; तथा(आर)वे शवषय जो शवशहत शकए जाने हैं और शवशहत शकए जा सकते हैं। https://indiankanoon.org/doc/187077537/ https://indiankanoon.org/doc/168098806/ https://indiankanoon.org/doc/187644281/ https://indiankanoon.org/doc/69173686/ https://indiankanoon.org/doc/156055382/ https://indiankanoon.org/doc/61052608/ https://indiankanoon.org/doc/49986929/ https://indiankanoon.org/doc/30461161/ https://indiankanoon.org/doc/103341533/ https://indiankanoon.org/doc/104644571/ https://indiankanoon.org/doc/80334682/Open official source version ↗
About this act
- Jurisdiction
- Rajasthan
- Enactment date
- 1954-08-06
- Sections available
- Document reader
India Code, Government of India. Text fetched 11 Oct 2026. Source metadata reports last modification: 2025-07-14. Check the linked official text and subsequent notifications when applying a provision.