Uttar Pradesh · Act 64 of 1950

The Road Transport Corporations Act, 1950

An Act to provide for the incorporation and regulation of Road Transport Corporations.

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सड़क परिवहन ननगम अनिननयम, 1950 

(1950 का अनिननयम सखं याकं 64) 

[4 दिसम् बि, 1950] 

सड़क परिवहन ननगमों के ननगमन औि नवननयमन  

का उपबन् ि किन ेके निए 

अनिननयम  

संसि ्द्वािा ननम् ननिनित रूप में यह अनिननयनमत हो :—  

अध् याय 1 

प्रािनम् िक 

1. सनंिप् त नाम, नवस् ताि औि प्रािम् ि—(1) इस अनिननयम का संनिप् त नाम सड़क परिवहन ननगम अनिननयम, 1950 ह ै। 

(2) इसका नवस् ताि 1***सम् पूर्ण िाित पि ह ै। 

2[पिन् तु दिल् िी सड़क परिवहन नवनि )संशोिन( अनिननयम, 1971 के प्रािम् ि पि औि से उक् त अनिननयम द्वािा यथा 

संशोनित इस अनिननयम का नवस् ताि दिल् िी संघ िाज् यिेत्र पि हो जाएगा औि यह वहां प्रवृत्त होगा ।] 

3[पिन् तु यह औि दक सड़क परिवहन ननगम )संशोिन( अनिननयम, 1982 के प्रािम् ि पि औि से उक् त अनिननयम द्वािा तथा 

संशोनित इस अनिननयम का नवस् ताि नमजोिम संघ िाज् यिेत्र पि हो जाएगा ।] 

(3) यह दकसी िाज् य में ऐसी तािीि4 को प्रवृत्त होगा नजसे केन् रीय सिकाि िाजपत्र में अनिसूचना द्वािा ऐसे िाज् य के निए इस 

नननमत्त ननयत किे औि नवनिन् न िाज् यों के निए नवनिन् न तािीिें ननयत की जा सकें गी । 

2. परििाषाएं—इस अनिननयम में, जब तक दक संििण से अन् यथा अपेनित न हो,— 

                                                 
1 इस अनिननयम का नवस् ताि पांनिचेिी )नवनि नवस् ताि( अनिननयम, 1968 (1968 का 26) की िािा 3 औि अनुसूची द्वािा पांनिचेिी पि दकया गया है । 
2 1971 के अनिननयम सं० 71 की िािा 2 द्वािा (3-11-1971 से) अंत:स् थानपत । 
3 1982 के अनिननयम सं० 63 की िािा 2 द्वािा (13-11-1982 से) अंत:स् थानपत । 
4 यह अनिननयम ननम् न सािर्ी के स् तंि 1 में वर्र्णत िाज् यों में उनके सामने िी गई तािीि से प्रिावी दकया गया है :— 

 

िाज् य प्रािंि की तािीि अनिसूचना सं० तथा कहां प्रकानशत दकया गया 

1 2 3 

मुम् बई 6-12-1950 26-टी (28) ज ेिाित का िाजपत्र, 1950 िाग-2, अनुिाग 3, पृष् ठ 1089 

नबहाि 1-9-1952 का० नन० आ०1526, िाित का िाजपत्र, 1952, पृष् ठ 1386 

मैसूि 15-9-1952 का० नन० आ० 1607, िाित का िाजपत्र, 1952, पृष् ठ 1492 

हैििाबाि 1-12-1952 का० नन० आ० 1969, िाित का िाजपत्र, 1952, पषृ् ठ 1492 

कच् छ 1-12-1952 का० नन० आ० 1968, िाित का िाजपत्र, 1952, पषृ् ठ 1746 

पन‍ चम बंगाि 2-3-1953 का० नन० आ० 375, िाित का िाजपत्र, 1953, पषृ् ठ 249 

सौिाष् र 1-8-1953 का० नन० आ० 1494, िाित का िाजपत्र, 1953, पषृ् ठ 1214  

मध् य प्रिशे 1-1-1954 का० नन० आ० 2227, िाित का िाजपत्र, 1953, पषृ् ठ 1996 

पंजाब 10-8-1954 का० नन० आ० 2629, िाित का िाजपत्र, 1954, पषृ् ठ 1959  

मध् य िाित 2-10-1954 का० नन० आ० 2771, िाित का िाजपत्र, 1954, पषृ् ठ 2078 

परटयािा औि पूवी 10-3-1955 का० नन० आ० 513, िाित का िाजपत्र, 1955, पषृ् ठ 452 

पंजाब संघ िाज् य 

उड़ीसा 1-6-1956 का० नन० आ० 1204, िाित का िाजपत्र, 1956, पषृ् ठ 794 

आन् र 1-12-1957 का० नन० आ० 3813, िाित का िाजपत्र, 1957, पषृ् ठ 2776 

नहमाचि प्रिेश 28-3-1958 का० आ०, 372क, िाित का िाजपत्र, 1958, िाग 2, अनुिाग 3(2), असािािर्, पृष् ठ 421/1 

मैसूि )नया िाज् य( 1-8-1958 का० आ०, 1410, िाित का िाजपत्र, 1958, पषृ् ठ 1229 

नत्रपुिा 1-3-1961 का० आ०, 491, िाित का िाजपत्र, 1961, पृष् ठ 567 

मध् य प्रिशे )नया िाज् य( 1-4-1961 का० आ०, 524, िाित का िाजपत्र, 1961, पृष् ठ 573 

िाजस् थान 5-9-1964 का० आ०, 3049, िाित का िाजपत्र, 1964, पषृ् ठ 3417 

केिि 1-9-1961 का० आ०, 38, िाित का िाजपत्र, 1965, पृष् ठ 20 

असम 10-3-1970 का० आ०, 968, िाित का िाजपत्र, 1970, पृष् ठ 1311 

दिल् िी 3-11-1971 का० आ०, 5081, िाित का िाजपत्र, 1971, पषृ् ठ 3057 

उत्ति प्रिेश 1-4-1972 का० आ०, 1074, िाित का िाजपत्र, 1972, पषृ् ठ 1698 

जम् मू-क‍ मीि 1-4-1976 का० आ०, 263)अ(, तािीि 31-3-1976, िाित का िाजपत्र, असािािर्, िाग 2, िण् ि 3(i), पषृ् ठ 719 

 



 2 

)क( “अनुषंगी सेवा” से दकसी ननगम की दकसी सड़क परिवहन सेवा का उपयोग किने वािे व् यनक् तयों को           

सुि-सुनविाएं या सुनविाएं िनेे वािी कोई समनुषंगी सेवा अनिप्रेत है; 

1[)कक( “बोिण” से ननगम का ननिशेक बोिण अनिप्रेत है;] 

(ि( “ननगम” से िािा 13 के अिीन स् थानपत सड़क परिवहन ननगम का ननिशेक बोिण अनिप्रेत है;  

1[(िि( “ननिशेक” से बोिण का सिस् य अनिप्रेत ह;ै] 

)ग( “नवस् तारित िेत्र” से ऐसा कोई िेत्र या िास् ता )प्रयार् मागण( अनिप्रेत ह,ै नजस पि ननगम की दकसी सड़क 

परिवहन सेवा का प्रचािन िािा 20 में उपबंनित िीनत से नवस् तारित कि दिया गया ह;ै 

)घ( “नवनहत” से इस अनिननयम के अिीन बनाए गए ननयमों द्वािा नवनहत अनिप्रेत है; 

)ङ( “सड़क परिवहन सेवा” से, दकिाए या पारितोनषक के निए यान में सड़क द्वािा यानत्रयों या माि या िोनों को, 

िे जाने की सेवा अनिप्रेत है; 

)च( “यान” से ऐसा यंत्र-नोदित यान अनिप्रेत ह,ै जो सड़क परिवहन के प्रयोजन के निए उपयोग दकया जाता ह ैया 

उपयोग दकए जाने के योग् य ह ैऔि इसके अन् तगणत राम-काि )राम गाड़ी(, रािीयान )गाड़ी( औि रेिि हैं; 

)छ( इस अनिननयम में जो शब् ि औि पि प्रयुक् त हैं दकन् तु परििानषत नहीं हैं औि मोटि यान अनिननयम, 1939 

(1939 का 4) में परििानषत हैं उनके वही अथण हैं जो उन् हें उस अनिननयम में दिए गए हैं । 

2*   *   *   *   * 

अध् याय 2 

सड़क परिवहन ननगम 

 3. िाज् यों में सड़क परिवहन ननगमों की स् थापना—िाज् य सिकाि— 

  )क( सड़क परिवहन के नवकास द्वािा जनता, व् यापाि औि उद्योग को पहचंाए जाने वािे फायिों; 

  )ि( दकसी प्रकाि के सड़क परिवहन को दकसी अन् य प्रकाि के परिवहन से समन् वयन की वांछनीयता;   

)ग( दकसी िेत्र में सड़क परिवहन के निए सुनविाओं को नवस् तृत औि उनमें सुिाि किने तथा वहां पि िि औि 

नमत्तव् ययी सड़क परिवहन प्रर्ािी की व् यवस् था किने की वांछनीयता,  

को ध् यान में ििते हए, िाजपत्र में अनिसूचना द्वािा िाज् य के पूिे या दकसी िाग के निए ऐसे नाम का, जो अनिसूचना में नवननर्िणष् ट 

दकया जाए, एक सड़क परिवहन ननगम स् थानपत कि सकेगी । 

4. ननगमन—प्रत् येक ननगम, िािा 3 के अिीन अनिसनूचत नाम का एक ननगनमत ननकाय होगा, नजसका शा‍ वत उत्तिानिकाि 

औि एक सामान् य मुरा होगी औि उस नाम से वह वाि िा सकेगा औि उन पि वाि िाया जा सकेगा । 

3[5. ननगम औि ननिशेक बोिण का प्रबंि—(1) ननगम के कायणकिाप औि कामकाज का सािािर् अिीिर्, ननिशेन औि प्रबंि 

एक ननिशेक बोिण में नननहत होगा जो अपनी सनमनतयों औि प्रबंि ननिशेक की सहायता से ऐसी सिी शनक् तयों का प्रयोग औि ऐसे सिी 

कायण औि बातें कि सकेगा नजनका ननगम द्वािा प्रयोग दकया जा सकता ह ैया जो ननगम द्वािा की जा सकती ह ै। 

(2) बोिण एक अध् यि औि पांच से अन् यून औि सत्रह से अननिक उतने अन् य ननिशेकों से नमिकि बनेगा नजतने िाज् य सिकाि 

ननयुक् त किना ठीक समझे । 

(3) यदि िाज् य सिकाि ऐसा किना ठीक समझे तो वह अन् य ननिशेकों में से एक को बोिण का उपाध् यि ननयुक् त कि सकेगी । 

(4) इस अनिननयम के अिीन बनाए गए ननयम, बोिण में केन् रीय सिकाि औि सम् बनन् ित िाज् य सिकाि िोनों का, ऐसे अनुपात 

में, जो िोनों सिकािों द्वािा तय पाया जाए, प्रनतनननित् व दकए जाने के निए औि उसमें हि एक सिकाि द्वािा अपने-अपने प्रनतनननियों 

की ननयुनक् त की जाने के निए उपबंि किेंग,े औि जहां िािा 23 की उपिािा (3) के अिीन अन् य पिकािों को शेयिों के ननगणमन द्वािा 

ननगम की पूंजी समुत् थानपत की जाती है वहां बोिण में ऐसे शेयििािकों के प्रनतनननित् व के निए औि उस िीनत के निए नजससे ऐसे 

शेयििािकों द्वािा प्रनतनननि ननवाणनचत दकए जाएंगे, उपबंि िी दकया जाएगा । 

(5) ननिशेकों की पिावनि औि उनमें हई आकनस् मक रिनक् तयों को ििने की िीनत ऐसी होगी जैसी नवनहत की जाए ।] 

                                                 
1 1982 के अनिननयम सं० 63 की िािा 16 औि अनुसूची द्वािा (13-11-1982 से) अंत:स् थानपत । 
2 नवनि अनकूुिन (सं० 3) आिेश, 1956 द्वािा िंि )ज( का िोप दकया गया ।  
3 1982 के अनिननयम सं० 63 की िािा 3 द्वािा (13-11-1982 से) प्रनतस् थानपत । 



 3 

6. 1[ननगम का ननिशेक] होन ेया चनु ेजान ेके निए अनहणता—1[(1)] 2[ननगम का ननिशेक] होने या चुने जाने के निए कोई 

व् यनक् त अनहण होगा,— 

 )क( यदि वह पागि या नवकृतनचत्त व् यनक् त पाया जाता ह;ै या 

)ि( यदि उसे दिवानिया न् यायननर्ीत कि दिया जाता है; या 

)ग( यदि वह नैनतक अिमता वािे अपिाि के निए िोषनसद्ध ठहिाया गया ह;ै या 

)घ( यदि उसने ननगनमत कम् पनी में )ननिशेक से निन् न( अंश )शेयि( िािक की हनैसयत के नसवाय ननगम से या 

उसके निए कोई काम दकए जाने के निए संनविा की है, पिन् तु जहां दक वह अंश )शेयि( िािक ह ैवहां वह अपने द्वािा ऐसी 

कम् पनी में िृत अंशों )शेयिों( का स् वरूप औि परिमार् िाज् य सिकाि पि प्रकट किेगा; या 

)ङ( यदि वह दकसी अन् य सड़क परिवहन उपक्रम में नवत्तीय नहत ििता ह ै। 

3[(2) उपिािा (1) के िण् ि )घ( की कोई िी बात, ननगम के 4[प्रबन् ि ननिशेक] को उसका एक 5[ननिशेक] होने या चुने जान ेके 

निए अनहण किने वािी नहीं समझी जाएगी ।] 

6[(3) उपिािा (1) के िण् ि )ङ( की दकसी बात की बाबत यह नहीं समझा जाएगा दक वह— 

)क( सिकाि के दकसी अनिकािी या अन् य कमणचािी को ननगम का ननिशेक चुने जाने या होने के निए; 

)ि( ननगम के दकसी अनिकािी या अन् य कमणचािी को दकसी अन् य ननगम का ननिशेक चुने जाने या होने के निए, 

ननिर्हणत किती ह ै।] 

7. अध् यि या 7[ननिशेक] द्वािा पि का त् याग—ननगम का अध् यि या कोई अन् य 4[ननिशेक] िाज् य सिकाि को निनित सूचना 

िकेि अपने पि का त् याग कि सकेगा औि उसके बािे में यह समझा जाएगा दक उस सिकाि द्वािा ऐसे त् याग-पत्र की मंजूिी पि उसने 

अपना पि रिक् त कि दिया ह ै।  

8. अध् यि औि 8[ननिशेकों] का पि स ेहटाया जाना—9[(1)] िाज् य सिकाि, ननगम के ऐसे अध् यि या दकसी अन् य 8[ननिशेक] 

का पि से हटा सकेगा जो—  

 )क( िािा 6 में उनल् िनित दकन् हीं ननिहणताओं से ग्रस् त ह ैया हो जाता ह;ै या 

)ि( िाज् य सिकाि की िाय में पयाणप् त प्रनतहतेु के नबना 10[बोिण] की क्रमवती चाि से अनिक बैठकों से अनुपनस् थत 

िहा ह ै: 

 पिन् तु केन् रीय सिकाि द्वािा 11[ननयुक् त] कोई िी 11[ननिशेक] उस सिकाि की सहमनत के नबना अपने पि से हटाया              

नहीं जाएगा ।  

6[(2) िाज् य सिकाि दकसी ननिशेक की ननयुनक् त, उसको ऐसी अवनि की सूचना िनेे के प‍ चात् जो नवनहत की जाए दकन् तु जो 

एक मास से कम की नहीं होगी(, समाप् त कि सकेगी :  

पिन् तु केन् रीय सिकाि द्वािा ननयुक् त दकए गए दकसी ननिशेक की ननयुनक् त को, उस सिकाि की सहमनत के नबना, इस उपिािा 

के अिीन समाप् त नहीं दकया जाएगा ।] 

9. सिस् यों की रिनक् तया ं या गठन में कोई त्ररुट, 12[ननगम या उसके बोिण] के कायों या कायणवानहयों को अनवनिमान् य            

नहीं किेगी—12[ननगम या उसके बोिण] का कोई िी कायण या कायणवाही 13[उसके बोिण में] कोई रिनक् त नवद्यमान होने या उसके गठन में 

कोई त्रुरट होने के कािर् ही अनवनिमान् य नहीं होगी । 

                                                 
1 1982 के अनिननयम सं० 63 की िािा 4 द्वािा (13-11-1982 से) “ननगम का सिस् य” के स् थान पि प्रनतस् थानपत । 
2 1959 के अनिननयम सं० 28 की िािा 2 द्वािा िािा 6 को उसकी उपिािा (1) के रूप में पुन:संख यांदकत दकया गया । 
3 1959 के अनिननयम सं० 28 की िािा 2 द्वािा अंत:स् थानपत । 
4 1982 के अनिननयम सं० 63 की िािा 4 द्वािा (13-11-1982 से) क्रमश: “मुख य कायणपािक अनिकािी या महाप्रबंिक” के स् थान पि प्रनतस् थानपत । 
5 1982 के अनिननयम सं० 63 की िािा 4 द्वािा (13-11-1982 से) “सिस् य” के स् थान पि प्रनतस् थानपत ।  
6 1982 के अनिननयम सं० 63 की िािा 4 द्वािा (13-11-1982 से) अंत:स् थानपत । 
7 1982 के अनिननयम सं० 63 की िािा 16 औि अनुसूची द्वािा (13-11-1982 से) “सिस् य” के स् थान पि प्रनतस् थानपत ।  
8 1982 के अनिननयम सं० 63 की िािा 5 द्वािा (13-11-1982 से) “सिस् य” के स् थान पि प्रनतस् थानपत ।  
9 1982 के अनिननयम सं० 63 की िािा 5 द्वािा (13-11-1982 से) पुन:संख यांदकत दकया गया । 
10 1982 के अनिननयम सं० 63 की िािा 5 द्वािा (13-11-1982 से) “ननगम” के स् थान पि प्रनतस् थानपत ।   
11 1982 के अनिननयम सं० 63 की िािा 5 द्वािा (13-11-1982 से) “नामननर्िणष् ट कोई िी सिस् य” के स् थान पि प्रनतस् थानपत ।  
12 1982 के अनिननयम सं० 63 की िािा 16 औि अनुसूची द्वािा (13-11-1982 से) प्रनतस् थानपत । 
13 1982 के अनिननयम सं० 63 की िािा 16 औि अनुसूची द्वािा (13-11-1982 से) “इसके सिस् यों में” के स् थान पि प्रनतस् थानपत ।  



 4 

10. नवशेष प्रयोजनों के निए व् यनक् तयों का 1[बोिण] के साथ अस् थायी रूप स ेसहयुक् त दकया जाना—(1) 1[बोिण] दकसी व् यनक् त 

को, नजसकी सहायता या सिाह की उसे वांछा ह,ै दकसी नवशेष प्रयोजन के निए, ऐसी िीनत से जो इस अनिननयम के अिीन बनाए गए 

नवननयमों द्वािा अविारित की जाएं, अपने साथ सहयुक् त कि सकेगा ।  

(2) उपिािा (1) के अिीन दकसी प्रयोजन के निए 1[बोिण] के साथ सहयुक् त दकए गए व् यनक् त को, उस प्रयोजन से सम् बनन् ित 
1[बोिण] के नवचाि-नवमशण में िाग िेने का अनिकाि होगा दकन् तु उसे 1[बोिण] की बैठक में मत िनेे का अनिकाि नहीं होगा ।  

11. 1[बोिण] के अनिवशेन—(1) 1[बोिण] का अनिवेशन ऐसे समय औि स् थानों पि होगा औि उपिािा (2) औि (3) के उपबंिों 

के अिीन िहते हए, अपने अनिवेशनों के कामकाज के संव् यवहाि में प्रदक्रया के ऐसे ननयमों का अनुपािन किेगा, जो इस अनिननयम के 

अिीन बनाए गए नवननयमों द्वािा उपबनन् ित दकए जाएं : 

पिन् तु 1[बोिण] हि तीन मास में कम से कम एक बाि अपना अनिवेशन किेगा । 

 (2) 1[बोिण] के अनिवेशनों में सिापनतत् व उसका अध् यि किेगा अथवा उसकी अनुपनस् थनत में उसका उपाध् यि, यदि कोई हो, 

किेगा अथवा यदि अध् यि औि उपाध् यि िोनों अनुपनस् थत हों तो 2[ऐसा ननिशेक किेगा नजसे उपनस् थत ननिशेकों ने] सिापनतत् व किने 

के निए अपने में से चुना हो । 

(3) 1[बोिण] की बैठक में सिी प्र‍ न उपनस् थत सिस् यों के बहमत से नवननन‍ चत दकए जाएंगे औि मतों के बिाबि होने की िशा 

में, अध् यि का या उसकी अनुपनस् थनत में सिापनतत् व किने वािे दकसी अन् य व् यनक् त का िसूिा या ननर्ाणयक मत होगा । 

12. सनमनतया ं ननयकु् त किन ेऔि कृत् यों के प्रत् यायोनजत किन ेकी शनक् त—3[(1)] 4[बोिण] समय-समय पि अपनी बैठक में 

पारित संकल् प द्वािा— 

)क( ऐसे कृत् यों को किने के निए, जो उस संकल् प में नवननर्िणष् ट दकए जाएं, 5[ननिशेकों से गरठत होने वािी 

सनमनतयां] ननयुक् त कि सकेगा; 

)ि( ऐसी शतों औि परिसीमाओं के अिीन िहते हए, यदि कोई हों, जो उस सकंल् प में नवननर्िणष् ट की जाएं, दकसी 

ऐसी सनमनत या अध् यि या उपाध् यि को अपनी ऐसी शनक् तयां औि कतणव् य, जो वह उनचत समझे, प्रत् यायोनजत कि सकेगा; 

)ग( अपने कािबाि के प्रनतदिन के िि प्रशासन के निए, ऐसी शतों औि परिसीमाओं के अिीन िहते हए, यदि कोई 

हों, जो उस संकल् प में नवननर्िणष् ट की जाएं, 6[प्रबन् ि ननिशेक] 7[या ननगम के दकसी अन् य अनिकािी को] ऐसी शनक् तयों के 

प्रयोग औि ऐसे कतणव् य किने के निए, जैसा वह आव‍ यक समझे, प्रानिकृत कि सकेगा ।  

8[(2) अध् यि, उपाध् यि या प्रबन् ि ननिशेक अपनी शनक् तयों औि कतणव् यों में से नजनके अन् तगणत उपिािा (1) के अिीन उसे 

प्रत् यायोनजत शनक् तयां औि कतणव् य िी हैं] कोई शनक् तयां औि कतणव् य ननगम के दकसी िी अनिकािी को प्रत् यायोनजत कि सकेगा, तथा वह 

अनिकािी नजसे ऐसी शनक् तयां औि कतणव् य प्रत् यायोनजत दकए जाते हैं, ऐसी शनक् तयों का प्रयोग औि कतणव् यों का पािन, प्रबन् ि ननिशेक 

के ननयंत्रर् औि पयणवेिर् के अिीन किेगा ।] 

9[13. आिेशों औि अन् य निितों का अनिप्रमार्ीकिर्—बोिण के सिी आिशे औि नवनन‍ चय ननगम के सनचव के हस् तािि 

द्वािा या उसके दकसी अन् य ऐसे अनिकािी द्वािा, जो बोिण द्वािा इस नननमत्त या िािा 45 के अिीन बनाए गए नवननयमों के अिीन 

प्रानिकृत दकया जाए, अनिप्रमानर्त दकए जाएंगे, तथा बोिण द्वािा जािी की गई अन् य सिी निितें प्रबन् ि ननिशेक या ननगम के इस 

नननमत्त उसी िीनत से प्रानिकृत दकसी अन् य अनिकािी के हस् तािि द्वािा अनिप्रमानर्त की जाएंगी ।] 

14. ननगम के अनिकािी औि सेवक—10[(1) हि ननगम का िाज् य सिकाि द्वािा ननयुक् त एक प्रबन् ि ननिेशक, एक मुख य िेिा 

अनिकािी औि एक नवत्त सिाहकाि होगा :] 

पिन् तु एक ही व् यनक् त को मुख य िेिा अनिकािी औि नवत्त सिाहकाि ननयुक् त दकया जा सकेगा ।] 

(2) ननगम अपने कृत् यों के िि पािन के निए 11[एक सनचव औि ऐसे अन् य अनिकािी औि कमणचािी] ननयुक् त कि सकेगा जैसे 

वह आव‍ यक समझे । 

                                                 
1 1982 के अनिननयम सं० 63 की िािा 16 औि अनुसूची द्वािा (13-11-1982 से) प्रनतस् थानपत । 
2 1982 के अनिननयम सं० 63 की िािा 16 औि अनुसूची द्वािा (13-11-1982 से) कनतपय शब् िों के स् थान पि प्रनतस् थानपत । 
3 1982 के अनिननयम सं० 63 की िािा 6 द्वािा (13-11-1982 से) िािा 12 को उसकी उपिािा (1) के रूप में पुन:संख यांदकत दकया गया ।   
4 1982 के अनिननयम सं० 63 की िािा 6 द्वािा (13-11-1982 से) प्रनतस् थानपत । 
5 1982 के अनिननयम सं० 63 की िािा 6 द्वािा (13-11-1982 से) “अपने सिस् यों की सनमनतयां” के स् थान पि प्रनतस् थानपत । 
6 1982 के अनिननयम सं० 63 की िािा 6 द्वािा (13-11-1982 से) “मुख य कायणपािक अनिकािी या प्रिान प्रबिंक” के स् थान पि प्रनतस् थानपत । 
7 1959 के अनिननयम सं० 28 की िािा 3 द्वािा अंत:स् थानपत । 
8 1982 के अनिननयम सं० 63 की िािा 6 द्वािा (13-11-1982 से) अंत:स् थानपत । 
9 1982 के अनिननयम सं० 63 की िािा 7 द्वािा (13-11-1982 से) िािा 13 प्रनतस् थानपत । 
10 1982 के अनिननयम सं० 63 की िािा 8 द्वािा (13-11-1982 से) उपिािा (1) के स् थान पि प्रनतस् थानपत । 
11 1982 के अनिननयम सं० 63 की िािा 8 द्वािा (13-11-1982 से) “ऐसे अन् य अनिकािी औि सेवक” के स् थान पि प्रनतस् थानपत । 



 5 

1[(3) ननगम के अनिकारियों औि कमणचारियों की ननयुनक् त औि सेवा की शतें औि वेतनमान— 

)क( यथानस् थनत, प्रबन् ि ननिशेक, मुख य िेिा अनिकािी औि नवत्त सिाहकाि या मुख य िेिा अनिकािी-सह-नवत्त 

सिाहकाि के संबंि में ऐसे होंगे जो नवनहत दकए जाएं, औि 

)ि( अन् य अनिकारियों औि कमणचारियों के संबंि में ऐसे होंगे जो िािा 34 के उपबंिों के अिीन िहते हए, इस 

अनिननयम के अिीन बनाए गए नवननयमों द्वािा अविारित दकए जाएं ।] 

2[15. प्रबन् ि ननिशेक, मखु य ििेा अनिकािी औि नवत्त सिाहकाि—(1) प्रबन् ि ननिशेक, ननगम का कायणपािक प्रिान होगा 

औि ननगम के सिी अन् य अनिकािी औि कमणचािी उसके अिीनस् थ होंगे । 

(2) प्रबन् ि ननिशेक ऐसी हि प्रस् थापना पि, नजसमें ननगम के िाजस् व या उसकी नननि में से व् यय अन् तवणनित ह,ै यथानस् थनत, 

मुख य िेिा अनिकािी औि नवत्त सिाहकाि अथवा मुख य िेिा अनिकािी-सह-नवत्त सिाहकाि के नवचाि अनिप्राप् त किेगा तथा इसके 

पूवण दक बोिण ऐसी प्रस् थापना पि नवचाि किे, ऐसे नवचाि बोिण के समि ििवाएगा ।] 

16. सिी अनिकारियों औि सवेकों की सािािर् अनहणता—जो कोई व् यनक् त ननगम के द्वािा या उसकी ओि से की गई संनविा 

में अथवा दकसी अन् य सड़क परिवहन उपक्रम में कोई अंश )शेयि( या नहत चाह ेतो स् वयं, चाह ेअपने िागीिाि या अनिकताण के जरिए 

प्रत् यित: या अप्रत् यित: ििता ह,ै वह ननगम का 3[अनिकािी या अन् य कमणचािी] न तो होगा औि न बना िहगेा । 

17. सिाहकाि परिषि की ननयनुक् त—िाज् य सिकाि, ननगम के नवचाि अनिननन‍ चत किने के प‍ चात् िाजपत्र में अनिसूचना 

द्वािा इतने व् यनक् तयों से नमिकि बनने वािी एक या अनिक सिाहकाि परिषिें, ऐसे ननबन् िनों पि औि ननगम को ऐसे नवषयों पि, जो 

उस अनिसूचना में नवननर्िणष् ट दकए जाएं, सिाह िनेे के प्रयोजन से गरठत कि सकेगी ।  

4[अध् याय 2क 

समनषुगंी ननगम 

17क. समनषुंगी ननगमों की स् थापना—(1) जहां दकसी ननगम का )नजसे इस िािा में इसके प‍ चात् मूि ननगम कहा गया ह(ै 

यह समािान हो जाता ह ैदक इस अनिननयम के अिीन अपने कृत् यों के अनिक िि ननवणहन के निए ऐसा किना समीचीन या आव‍ यक ह,ै 

वहां वह िाज् य सिकाि औि केन् रीय सिकाि की सहमनत से, िाजपत्र में अनिसूचना द्वािा, ऐसी स् कीम या स् कीमें नविनचत कि सकेगा जो 

एक या अनिक समनुषंगी ननगमों की स् थापना का उपबन् ि किती है ।  

(2) उपिािा (1) के अिीन नविनचत स् कीम में उस या उन समनुषंगी ननगम या ननगमों का, जो उसके अिीन स् थानपत हो 

जाएंगी, उस तािीि या उन तािीिों का नजससे या नजनसे वे ऐस ेस् थानपत की जाएंगी, मूि ननगम की उन शनक् तयों औि कृत् यों का, 

नजनका ऐसा या ऐस ेसमनुषंगी ननगम प्रयोग औि ननवहणन कि सकें गे, उन शतों औि परिसीमाओं का नजनके अिीन िहते हए ऐसी 

शनक् तयों का प्रयोग दकया जा सकेगा, ऐसे प्रत् येक समनुषंगी ननगम के कायणकिाप के ननिशेक बोिण द्वािा प्रबन् िकिर् का, ऐसे प्रत् येक 

समनुषंगी ननगम की पूंजी का तथा उन नवनिन् न नवषयों के, नजनके निए इस अनिननयम में मूि ननगम की बाबत उपबन् ि दकए गए हैं, 

तत् स् थानी ऐसे समनुषंगी ननगमों स ेसंबंनित सिी अन् य नवषयों का नवननिशे होगा : 

पिन् तु— 

)क( कोई समनुषंगी ननगम दकसी नए रूट पि, मूि ननगम के पूवण अनुमोिन के नबना, प्रचािन आिम् ि नहीं किेगा; 

)ि( दकसी समनुषंगी ननगम के ननिशेक बोिण में केन् रीय सिकाि के प्रनतनननि, मूि ननगम की पूंजी में उसके 

अनििाय के अनुपात में होंगे; 

)ग( समनुषंगी ननगम की पूंजी में या मूि ननगम में अनििाय किने के केन् रीय सिकाि के िानयत् व में, केन् रीय सिकाि 

के अनुमोिन के नबना, वृनद्ध नहीं की जाएगी;  

)घ( समनुषंगी ननगम में एक प्रबन् ि ननिशेक, एक मुख य िेिा अनिकािी औि एक नवत्त सिाहकाि या एक मुख य 

िेिा अनिकािी-सह-नवत्त सिाहकाि होंगे तथा ऐसे अनिकािी िाज् य सिकाि द्वािा ननयुक् त दकए जाएंगे; 

)ङ( िाज् य सिकाि औि मूि ननगम को दकसी नवषय की बाबत दकसी समनुषंगी ननगम को ननिशे िेने की शनक् त 

होगी, नजनके अन् तगणत समनुषंगी ननगम के कमणचारियों की िती, सेवा की शतों औि प्रनशिर् से संबंनित ननिशे, ऐसे 

कमणचारियों को संिाय की जाने वािी मजििूी औि समनुषंगी ननगम द्वािा ििी जाने वािी आिनित नननियां िी हैं,  

                                                 
1 1982 के अनिननयम सं० 63 की िािा 8 द्वािा (13-11-1982 से) उपिािा (3) प्रनतस् थानपत । 
2 1982 के अनिननयम सं० 63 की िािा 9 द्वािा (13-11-1982 से) िािा 15 के स् थान पि प्रनतस् थानपत । 
3 1982 के अनिननयम सं० 63 की िािा 16 द्वािा (13-11-1982 से) “अनिकािी  या सेवक” के स् थान पि प्रनतस् थानपत । 
4 1982 के अनिननयम सं० 63 की िािा 10 द्वािा (13-11-1982 से) अंत:स् थानपत ।   



 6 

)च( समनुषंगी ननगम का पूंजी बजट, िाजस् व बजट औि वार्षणक नवकास योजनाएं मूि ननगम को अनुमोिन के निए 

प्रस् तुत की जाएंगी औि जहां ऐसे बजट या योजना में कोई कमी अन् तवणनित हो, वहां, वे िाज् य सिकाि को िी अनुमोिन के 

निए प्रस् तुत की जाएंगी । 

 (3) उपिािा (1) के अिीन नविनचत स् कीम के अिीन स् थानपत प्रत् येक समनुषंगी ननगम, स् कीम में नवननर्िणष् ट नाम से ननगनमत 

ननकाय होगा नजसका शा‍ वत उत्तिानिकाि औि एक सामान् य मुरा होगी औि वह उक् त नाम से वाि िा सकेगा औि उसके नवरुद्ध वाि 

िाया जा सकेगा ।] 

अध् याय 3 

ननगम की शनक् तया ंऔि कतणव् य 

 18. ननगम का सािािर् कतणव् य—ननगम का यह सािािर् कतणव् य होगा दक वह अपनी शनक् तयों का प्रयोग ऐसे प्रगनतशीि रूप 

में )अनिकानिक उत्तिोत्ति( किे दक नजस िाज् य या िाज् य के नजस िाग के निए वह स् थानपत दकया गया ह ैउसमें या दकसी बढाए गए िेत्र 

में िि, पयाणप् त नमतव् ययी औि उनचत तौि से समनन् वत सड़क परिवहन सेवा प्रर्ािी का प्रबन् ि हो जाए या उसका प्रबन् ि सुननन‍ चत या 

उसमें अनिवृनद्ध हो जाए : 

 पिन् तु इस िािा की दकसी बात का यह अथण नहीं िगाया जाएगा दक वह दकसी न् यायािय या अनिकिर् के समि कायणवानहयों 

द्वािा प्रवतणनीय दकसी प्रकाि का ऐसा कोई कतणव् य या िानयत् व ननगम पि प्रत् यित: या अप्रत् यित: अनििोनपत किती ह ैनजसके अिीन वह 

अन् यथा नहीं होता । 

19. ननगम की शनक् तयां—(1) इस अनिननयम के उपबन् िों के अिीन िहते हए ननगम को यह शनक् त होगी दक वह,— 

 )क( िाज् य में तथा दकसी बढाए गए िेत्र में सड़क परिवहन सेवा चिाए;  

 )ि( दकसी अनुषंगी सेवा के निए व् यवस् था किे;  

)ग( अपने कमणचारियों के निए सेवा की शतों के बािे में नजसके अन् तगणत उनचत मजििूी, िनवष् य-नननि की स् थापना, 

ननवास सुनविा, नवश्राम औि आमोि-प्रमोि के निए स् थान तथा अन् य सुि-सुनविाएं आती हैं, उपबन् ि किे; 

1[)घ( अपने कमणचारियों औि अन् य व् यनक् तयों को िचण नबना या रियायती िि पि, औि ऐसी शतों पि, जैसी 

अनििोनपत किना वह उनचत समझे, पासों का दिया जाना प्रानिकृत किे; 

)ङ( उपयोग में न िाई गई रटकटों औि रियायती पासों के निए प्रनतिाय दकया जाना प्रानिकृत किे ।] 

(2) इस अनिननयम के उपबन् िों के अिीन िहते हए, उपिािा (1) द्वािा प्रित्त शनक् तयों के अन् तगणत ननम् ननिनित शनक् तया ं

आती हैं,— 

)क( चिस् टाक, यानों, सानित्रों, संयंत्र, उपस् कि या अन् य दकसी चीज का जो ननगम के उपिािा (1) में ननर्िणष् ट 

दक्रयाकिाप के निए अपेनित है, नवननमाणर्, क्रय या उन् हें बनाए ििना या उनकी मिम् मत किना । 

स् पष् टीकिर्—इस िंि में “नवननमाणर्” पि के अन् तगणत पूिे मोटि यान को प्रयोगात् मक या अनुसंिान के प्रयोजन से 

बनाने के नसवाय, उसका बनाना नहीं आता; 

)ि( उक् त दक्रयाकिाप के प्रयोजन के निए स् थावि औि जंगम िोनों प्रकाि की सम् पनत्त का अजणन औि िािर् किना, 

जैसा ननगम आव‍ यक समझे, तथा अपने द्वािा िृत दकसी सम् पनत्त को पटे्ट पि िनेा, बेचना या अन् यथा अन् तरित किना;  

)ग( दकसी अन् य व् यनक् त के सम् पूर्ण उपक्रम या उसके दकसी िाग का, वहां तक दक जहां तक उसके दक्रयाकिाप उस 

िाज् य में या दकसी नवस् तारित िेत्र में सड़क परिवहन सेवा चिाने के रूप में हैं चाह ेआत् यनन् तक रूप से या दकसी अवनि के निए 

अजणन किने के निए स् कीम तैयाि किना तथा किाि द्वािा या संबंनित िाज् य में तत् समय प्रवृत्त अननवायणत: अजणन किने के निए 

नवनि के औि ऐसी प्रदक्रया के, जो नवनहत की जाए, अनुसाि अजणन किना; 

)घ( दकसी किाि द्वािा दकसी िूनम का क्रय किना या उसे पटे्ट पि या अनििृनत के दकसी रूप के अिीन िेना औि 

उस पि ऐसा िवन बनाना जो उसके उपक्रम को चिाने के प्रयोजन के निए आव‍ यक हों; 

)ङ( स् के्रप गानड़यों, पुिाने टायिों, प्रयुक् त तेिों, 2[स् के्रप मूल् य के अन् य स् टोिों या ऐसे अन् य स् टोिों के जो नवनहत िीनत 

से बेकाि घोनषत दकए जाएं, व् ययन को] प्रानिकृत किना; 

)च( ऐसी सिी संनविाएं किना औि उनका पािन किना जो इस अनिननयम के अिीन उसे अपने कतणव् य के पािन 

के निए औि अपनी शनक् तयों का प्रयोग किने के निए आव‍ यक हो; 

                                                 
1 1959 के अनिननयम सं० 28 की िािा 4 द्वािा अंत:स् थानपत ।    
2 1982 के अनिननयम सं० 63 की िािा 11 द्वािा (13-11-1982 से) “या स् के्रप मूल् य के अन् य स् टोिों” के स् थान पि प्रनतस् थानपत । 



 7 

)छ( इस प्रकाि के यानों का क्रय किना जो ननगम द्वािा सड़क परिवहन सेवा चिाने के वास् ते उपयोग में िाने के 

निए उपयुक् त हों; 

)ज( ननगम द्वािा अपने उपक्रम के प्रयोजनों के निए, दकसी अन् य उपक्रम के स् वामी द्वािा िृत या कब् ज ेमें के यानों, 

गेिाजों, सायबानों, कायाणिय िवनों, निपो, िूनम, कमणशािाओं, उपस् किों, औजािों, यानों के निए उपसािन औि फािते पुजों 

या अन् य वस् तुओं का अपने उपयोग के निए क्रय किना या किाि द्वािा अन् यथा प्राप् त किना; 

)झ( ननगम द्वािा ननयोनजत व् यनक् तयों के कौशि में, या ननगम के उपस् कि के उपयोग में, ििता की या उस उपस् कि 

के प्रचिन के ढंग में सुिाि किने के प्रयोजन के निए दकसी िी कायण का किना नजसके अन् तगणत ननगम द्वािा प्रनशिर्, नशिा 

या अनुसंिान की सुनविाओं की व् यवस् था औि ननगम द्वािा िसूिों को उन व् यवस् थाओं में सहायता पहचंाना आता है; 

)ञ( यानत्रयों या माि के वाहक के रूप में कािबाि किने वािे दकसी व् यनक् त के साथ, जो ननगम की ओि से 

पािगामी यात्रा िाडे़ या माि िाडे़ पि यानत्रयों या माि के वहन की व् यवस् था कि िहा ह ैउस व् यनक् त के साथ किाि किना 

औि उसे कायाणनन् वत किना;  

)ट( माि के पिेषर्, िण् िािकिर् औि परििान की सुनविाओं के निए व् यवस् था किना; 

)ठ( पचों औि नवज्ञापन फिकों )पट्टों( पि औि ननगम के यानों औि परिसिों में तथा जनता को ननगम द्वािा िी गई 

रटकटों औि अन् य फामों पि प्रिशणन किने के निए संनविा किना;  

)ि( िाज् य सिकाि के पूवण अनुमोिन से ऐसे अन् य सिी कायण किना नजससे ननगम को उनचत रूप से कािबाि चिाने 

में सुनविा हो । 

 (3) इस िािा में दकसी बात का यह अथण नहीं िगाया जाएगा दक वह ननगम को यह प्रानिकाि ितेी ह ैदक िाज् य सिकाि की 

पूवण अनुमनत के नबना वह,— 

(i) दकसी ऐसी चीज का नवननमाणर् किे या उसे बनाए जो ननगम के उपक्रम के प्रयोजन के निए प्रयत् यित: या 

अप्रत् यित: उपयोग दकए जाने के निए अपेनित नहीं ह ैअथवा दकसी यान की, जो ननगम का नहीं ह,ै या जो प्रत् यित: या 

अप्रत् यित: उसके उपक्रम के निए उपयोग में नहीं िाया जाता है, मिम् मत किना, उसका संग्रहर् किना या तद्हतेु सेवा चिाने 

के निए उपबन् ि किना; 

(ii) कोई यान, अन् य व् यनक् त को बेचने के प्रयोजन के निए क्रय किे; 

(iii) दकसी व् यनक् त को यानों के निए या उपसािन के रूप में स् नहके, फाितू पुजे या उपस् कि का नवक्रय या             

प्रिाय किे;  

(iv) इस अनिननयम के अिीन या द्वािा अनिव् यक् त रूप से उपबनन् ित के नसवाय यानों को यानत्रयों या माि के वहन 

के निए िाडे़ पि िनेे ।  

(4) इस अनिननयम द्वािा अन् यथा उपबनन् ित के नसवाय, पूवणगामी उपबन् िों की दकसी बात का यह अथण नहीं िगाया जाएगा 

दक वह ननगम को तत् समय प्रवृत्त दकसी नवनि की अवहेिना किने के निए प्रानिकृत किती ह ै। 

 (5) जहां दक ननगम दकसी अन् य व् यनक् त का सम् पूर्ण उपक्रम या उसका िाग अजणन किता ह ैवहां ननगम अपने 1[अनिकारियों 

औि अन् य कमणचारियों] की ननयुनक् त किते समय उस उपक्रम में ननयोनजत कमणचारियों के हकों का िी ध् यान ििेगा । 

(6) इस िािा के उपबन् िों का यह अथण नहीं िगाया जाएगा दक वह इस अनिननयम के प‍ चात् वती दकसी उपबन् ि के द्वािा या 

अिीन ननगम को प्रित्त दकसी शनक् त को परिसीनमत किती ह ै। 

20. ननगम की सड़क परिवहन सवेा के चिान ेका दकसी अन् य िाज् य के िते्र में नवस् ताि—(1) यदि ननगम यह बात िोकनहत में 

समीचीन समझता ह ै दक अपनी दकन् हीं सड़क परिवहन सेवाओं के चिाए जाने का दकसी अन् य िाज् य में नस् थत दकसी मागण या िेत्र           

में नवस् ताि कि दिया जाए तो िाज् य सिकाि की अनुज्ञा से वह प्रस् थानपत नवस् ताि के नवषय में उस अन् य िाज् य की सिकाि से बातचीत 

कि सकेगा । 

(2) यदि उस अन् य िाज् य की सिकाि प्रस् थानपत नवस् ताि का अनुमोिन कि ितेी है तो ननगम इस प्रयोजन के निए एक स् कीम 

तैयाि किेगा औि उस अन् य सिकाि की सम् मनत के निए उसे िेजेगा औि ऐसी सम् मनत प्राप् त होन ेपि ननगम उस िाज् य सिकाि की पूवण 

अनुमनत से उस स् कीम को मंजूि कि सकेगा । 

(3) स् कीम के इस प्रकाि मंजूि हो जाने के प‍ चात्, ननगम ऐसे मागण या िेत्र में अपनी सड़क परिवहन सेवा के चिाए जाने का 

नवस् ताि किने के निए सिम होगा औि जबदक ऐसी सेवा का चिाया जाना नवस् तारित कि दिया जाता ह ैतब ननगम उस मागण पि या 

उस िेत्र में, उस अन् य िाज् य की, नजसमें ऐसा मागण या िेत्र नस् थत ह,ै प्रवृत्त नवनि के उपबन् िों के अिीन िहते हए उस सेवा को चिाएगा । 

                                                 
1 1982 के अनिननयम सं० 63 की िािा 11 द्वािा (13-11-1982 से) “अनिकारियों औि सेवकों” के स् थान पि प्रनतस् थानपत ।  



 8 

(4) ननगम उपिािा (2) के अिीन मंजूि की गई स् कीम को, इस िािा के पूवणगामी उपबन् िों में उपबनन् ित िीनत से तैयाि औि 

मंजूि की गई अनुपूिक स् कीम द्वािा, समय-समय पि परिवर्तणत या नवस् तारित कि सकेगा । 

21. िाक का वहन—यदि केन् रीय सिकाि ऐसा अपेनित किे तो, ननगम ऐसी िि औि शतों औि ननबंिनों पि, जो केन् रीय 

सिकाि द्वािा िाज् य सिकाि के पिामशण से इस नननमत्त नवननर्िणष् ट की जाएं, िाक का वहन मोटियान अनिननयम, 1939 (1939 का 4) में 

दकसी बात के होते हए िी किेगा । 

अध् याय 4 

नवत्त, ििेा औि ििेापिीिा 

22. ननगम के नवत्त के सािािर् नसद्धातं—यह ननगम का सािािर् नसद्धांत होगा दक वह अपने उपक्रम को चिाने में, कािबािी 

नसद्धांतों पि चिे । 

23. ननगम की पूजंी—(1) िाज् य सिकाि द्वािा स् थानपत ननगम के निए केन् रीय सिकाि औि िाज् य सिकाि ऐसे अनुपात में जो 

िोनों सिकािों द्वािा किाि पाया जाए, ऐसी पूंजी की व् यवस् था, जो ननगम द्वािा उस उपक्रम के चिाने के प्रयोजन के निए या उससे 

सम् बनन् ित प्रयोजनों के निए अपेनित ह ैइस अनिननयम के उपबन् िों से अनुसंगत ऐसी शतों औि ननबन् िनों पि, कि सकें गी जो िाज् य 

सिकाि की पूवण अनुमनत से अविारित किे । 

1[(2) ननगम, चाह ेउसके निए उपिािा (1) के अिीन दकसी पूंजी की व् यवस् था की गई हो या नहीं, शेयि ननगणनमत किके ऐसी 

पूंजी )नजसे इस िािा में इसके प‍ चात् “प्रानिकृत शेयि पूंजी” कहा गया ह(ै, जो िाज् य सिकाि द्वािा इस नननमत्त प्रानिकृत की जाए, 

समुत् थानपत कि सकेगा : 

पिन् तु जहां ननगम के निए उपिािा (1) के अिीन दकसी पूंजी की व् यवस् था की जाती ह,ै वहां इस उपिािा के अिीन दकसी 

पूंजी का समुत् थान केन् रीय सिकाि के पूवण अनुमोिन के नबना नहीं दकया जा सकेगा । 

(2क) केन् रीय सिकाि के पूवण अनुमोिन से उपिािा (2) के अिीन समुत् थानपत कोई पूंजी— 

 )क( उस पूंजी के अनतरिक् त हो सकेगी नजसकी दक ननगम की उपिािा (1) के अिीन व् यवस् था की गई ह;ै 

)ि( यथानस् थनत, केन् रीय सिकाि या िाज् य सिकाि द्वािा, उस सम् पूर्ण पूंजी या उसके दकसी िाग को, नजसकी ननगम 

के निए व् यवस् था उपिािा (1) के अिीन उस सिकाि द्वािा की गई है, [सड़क परिवहन ननगम )संशोिन( अनिननयम, 1982 

(1982 का 63) के प्रािम् ि के पहिे या उसके प‍ चात्] संपरिवर्तणत किके प्रनतश्रुत की जा सकेगी ।]  

 (3) ननगम की 2[प्रानिकृत शेयि पूंजी], इतने अंशों )शेयिों( में नविानजत की जाएगी नजतने िाज् य सिकाि अविारित किे तथा 

नजतने अंश )शेयि( िाज् य सिकाि, केन् रीय सिकाि औि )उन व् यनक् तयों सनहत नजनके उपक्रम ननगम द्वािा अर्जणत कि निए गए हैं( अन् य 

पिकािों द्वािा प्रनतश्रुत दकए जाएंगे, वह िाज् य सिकाि द्वािा केन् रीय सिकाि के पिामशण से अविारित दकए जा सकें गे ।    

(4) उपिािा (3) में उनल् िनित अन् य पिकािों को अंशों )शेयिों( का आबंटन ननगम द्वािा ऐसी िीनत से दकया जाएगा, जो 

नवनहत की जाए । 

(5) ननगम के अंश )शेयि(, इस अनिननयम के अिीन बनाए गए ननयमों के अनुसाि अन् तिर्ीय होने के नसवाय, अन् तिर्ीय 

नहीं होंगे ।  

(6) ननगम दकसी िी समय िाज् य सिकाि की पूवण मंजूिी से उपिािा (4) के अिीन अन् य पिकािों को ननगणनमत दकए गए अंशों 

)शेयिों( का, ऐसी िीनत से, जो नवनहत की जाए, मोचन किा सकेगा । 

24. ननगम की अनतरिक् त पूजंी—यदि िािा 23 के अिीन अंश )शेयि( ननगणनमत किने के प‍ चात् ननगम को अनतरिक् त पूंजी की 

आव‍ यकता होती ह ैतो ननगम, िाज् य सिकाि की पूवण मंजूिी से नए अंश )शेयि( ननगणनमत किके ऐसी अनतरिक् त पूंजी की व् यवस् था कि 

सकेगा तथा उक् त िािा की उपिािा (2), 3[(2क),] (3), (4), (5) औि (6) के उपबन् ि ऐसे अंश )शेयि( के ननगणमन को िागू होंगे ।  

25. िाज् य सिकाि द्वािा प्रत् यािनूत—ननगम के अंशों )शेयिों( के ननगणमन के समय िाजपत्र में प्रकानशत अनिसूचना द्वािा िाज् य 

सिकाि द्वािा यथाननयत न् यूनतम िि पि वार्षणक िािांश की आिायगी तथा मूि की अिायगी किने नवषयक प्रत् यािूनत ननगम के अंशों 

)शेयिों( के नवषय में िाज् य सिकाि द्वािा की जाएगी । 

4[26. उिाि िने ेकी शनक् तयां—ननगम, िाज् य सिकाि के पूवण अनुमोिन से, अपनी कामकाज पूंजी को समुत् थानपत किने या 

पूंजी स् वरूपी दकसी व् यय को पूिा किने के प्रयोजन के निए, िुिे बाजाि से या बैंककािी कम् पनी )उपक्रमों का अजणन औि अन् तिर्( 

अनिननयम, 1970 (1970 का 5) की िािा 3 के अिीन, या बैंककािी कम् पनी )उपक्रमों का अजणन औि अन् तिर्( अनिननयम, 1980 (1980 

                                                 
1 1982 के अनिननयम सं० 63 की िािा 12 द्वािा (13-11-1982 से) उपिािा (2) के स् थान पि प्रनतस् थानपत । 
2 1982 के अनिननयम सं० 63 की िािा 12 द्वािा (13-11-1982 से) “प्रानिकृत पूंजी” के स् थान पि प्रनतस् थानपत ।   
3 1982 के अनिननयम सं० 63 की िािा 16 औि अनुसूची द्वािा (13-11-1982 से) अन् त:स् थानपत ।  
4 1982 के अनिननयम सं० 63 की िािा 13 द्वािा (13-11-1982 से) िािा 26 के स् थान पि प्रनतस् थानपत । 



 9 

का 40) की िािा 3 के अिीन गरठत दकसी तत् स् थानी नए बैंक से, िाज् य नवत्तीय ननगम अनिननयम, 1951 (1951 का 63) की िािा 3 के 

अिीन स् थानपत दकसी िाज् य नवत्त ननगम से, औद्योनगक नवत्त ननगम अनिननयम, 1948 (1948 का 15) की िािा 3 के अिीन स् थानपत 

िाितीय औद्योनगक नवत्त ननगम से, िाितीय औद्योनगक नवकास बैंक अनिननयम, 1964 (1964 का 18) की िािा 3 के अिीन स् थानपत 

िाितीय औद्योनगक नवकास बैंक से, जीवन बीमा ननगम अनिननयम, 1956 (1956 का 31) की िािा 3 के अिीन स् थानपत िाितीय 

जीवन बीमा ननगम से या ऋर् की व् यवस् था किने वािी दकसी अन् य ऐसी नवत्तीय संस् था से जो िाितीय रिज़वण बैंक के ननयंत्रर् के अिीन 

ह,ै िन उिाि िे सकेगा ।] 

27. ननगम की नननि—(1) प्रत् येक ननगम की अपनी नननि होगी औि ननगम की सिी प्रानप् तया ंउसमें जमा की जाएंगी औि 

ननगम द्वािा की गई अिायनगयां उसमें से की जाएंगी ।  

(2) िाज् य सिकाि द्वािा अन् यथा ननदिष् ट के नसवाय, उस नननि की सब िनिानशयां िाितीय रिजवण बैंक में या िाितीय रिजवण 

बैंक के ऐजेंटों के यहां 1[या बैंककािी कम् पनी )उपक्रमों का अजणन औि अन् तिर्( अनिननयम, 1970 (1970 का 5) की िािा 3 के अिीन, 

या बैंककािी कम् पनी )उपक्रमों का अजणन औि अन् तिर्( अनिननयम, 1980 (1980 का 40) की िािा 3 के अिीन, गरठत तत् स् थानी नए 

बैंकों में] नननिप् त की जाएंगी या ऐसी प्रनतिूनतयों में, जो िाज् य सिकाि द्वािा अनुमोदित की गई हो, नवनननहत की जाएंगी । 

28. ब् याज औि िािाशं का दिया जाना—(1) जहां दक िािा 23 की उपिािा (1) के अिीन 2[ननगम की सम् पूर्ण पूंजी या  

उसके दकसी िाग] की व् यवस् था केन् रीय सिकाि औि िाज् य सिकाि द्वािा की गई ह ैवहां ननगम ऐसी पूंजी पि ऐसी िि से, जो समय-

समय पि केन् रीय सिकाि के पिामशण से िाज् य सिकाि द्वािा ननयत की जाए, ब् याज िगेा औि ऐसा ब् याज, ननगम के व् यय का एक िाग 

समझा जाएगा ।  

(2) जहां दक ननगम ने अंशों )शेयिों( के ननगणमन द्वािा 3[अपनी सम् पूर्ण पूंजी या उसका कोई िाग समुत् थानपत दकया ह]ै वहां 

वह ऐसे अंशों )शेयिों( पि ऐसी िि से उन पि िािांश िगेा जो ऐसी दकन् हीं सािािर् परिसीमाओं के अिीन िहते हए जो िाज् य सिकाि 

द्वािा केन् रीय सिकाि से पिामशण किके अनििोनपत की जाए, ननगम द्वािा समय-समय पि ननयत की जाएं तथा ऐसा िािांश ननगम के 

व् यय का एक िाग समझा जाएगा ।  

29. अवियर् तथा आििर् औि अन् य नननियों के निए उपबिं—(1) ननगम अवियर् के निए तथा आििर् औि अन् य 

नननियों के निए ऐसा उपबन् ि किेगा जैसा िाज् य सिकाि समय-समय पि ननदिष् ट किे । 

(2) उक् त नननियों के प्रबन् ि का, समय-समय पि उनमें जमा िाते में िािी जाने वािी िानशयों का औि उनमें समानवष् ट 

िनिानशयों के उपयोजन का आिािर् ननगम द्वािा दकया जाएगा :  

पिन् तु िाज् य सिकाि के पूवण अनुमोिन के नबना दकसी नननि का उपयोग, दकसी ऐसे प्रयोजन से निन् न उपयोजन के निए नहीं 

दकया जाएगा नजस के निए उसका सृजप दकया गया ह ै।  

30. शदु्ध िाि का व् ययन—िािा 28 के अिीन ब् याज औि िािांश के, औि िािा 29 के अिीन अवियर्, आििर् औि अन् य 

नननियों के दिए जाने के निए उपबन् ि किने के प‍ चात्, ननगम अपने वार्षणक शुद्ध िाि का इतना प्रनतशत, नजतना इस नननमत्त िाज् य 

सिकाि द्वािा नवननर्िणष् ट दकया जाए, सड़क परिवहन सेवा का उपयोग किने वािे यानत्रयों की सुि-सुनविाओं का उपबन् ि किने के निए 

ननगम द्वािा ननयोजन श्रनमकों के कल् यार् के निए औि ऐसे अन् य प्रयोजनों के निए जो केन् रीय सिकाि की पूवण अनुमनत स ेनवनहत दकए 

जाएं, उपयोग कि सकेगा 4[औि अनतशेष में से इतनी िकम, नजतनी िाज् य सिकाि औि केन् रीय सिकाि की पूवण अनुमनत स ेननगम द्वािा 

इस नननमत्त नवननर्िणष् ट की जाए, ननगम के नवस् ताि कायणक्रमों के नवत्तपोषर् के निए उपयोग की जा सकेगी औि यदि कुछ शेष बचे तो 

वह शेष िकम सड़क नवकास के निए िाज् य सिकाि को सौंप िी जाएगी ।] 

31. व् यय किने की ननगम की शनक् त—ननगम को यह शनक् त प्राप् त होगी दक वह इतनी िनिानश नजतनी वह ठीक समझता है 

उन उद्दे‍ यों पि व् यय किे जो इस अनिननयम के अिीन प्रानिकृत ह ैऔि ऐसी िनिानश ऐसा व् यय समझा जाएगा जो ननगम की नननियों 

में से िये ह ै। 

32. बजट—(1) हि ननगम, हि एक वषण की ऐसी तािीि तक, जो नवनहत की जाए, आगामी नवत्तीय वषण के निए उस नवत्तीय 

वषण की प्राक् कनित प्रानप् तयों औि व् यय को ऐसे प्ररूप में, जो नवनहत दकया जाए, दििाते हए बजट तैयाि किेगा औि िाज् य सिकाि के 

अनुमोिन के निए उसे उस सिकाि के समि पेश किेगा । 

(2) उपिािा (3) औि (4) के उपबन् िों के अिीन िहते हए, कोई िी िनिानश ननगम द्वािा या उसकी ओि से तब तक व् यय नहीं 

की जाएगी जब तक दक उसका व् यय, िाज् य सिकाि द्वािा अनुमोदित चािू बजट अनुमान के अन् तगणत नहीं आ जाता ह ै। 

(3) 5[ननगम, ऐसी शतों पि औि ऐसे ननबन् िनों के अिीन िहते हए, जो इस नननमत्त िाज् य सिकाि द्वािा नवननर्िणष् ट दकए 

जाएं,] एक शीषण )मि( के निए अनिुत्त िकम को व् यय के एक शीषण से िसूिे शीषण में अथवा एक स् कीम के निए उपबनन् ित िानश को दकसी 

                                                 
1 1982 के अनिननयम सं० 63 की िािा 14 द्वािा (13-11-1982 से) अन् त:स् थानपत ।  
2 1982 के अनिननयम सं० 63 की िािा 16 द्वािा (13-11-1982 से) कनतपय शब् िों के स् थान पि प्रनतस् थानपत । 
3 1982 के अनिननयम सं० 63 की िािा 16 औि अनुसूची द्वािा (13-11-1982 से) कनतपय शब् िों के स् थान पि प्रनतस् थानपत । 
4 1959 के अनिननयम सं० 28 की िािा 6 द्वािा कनतपय शब् िों के स् थान पि प्रनतस् थानपत । 
5 1959 के अनिननयम सं० 28 की िािा 7 द्वािा “ननगम मंजूिी िे सकेगा” के स् थान पि प्रनतस् थानपत । 



 10 

िसूिी स् कीम के निए पुनर्वणननयोनजत किने की 5[मंजूिी ि ेसकेगा] दकन् तु इस शतण पि ही ऐसा दकया जा सकेगा दक कुि बजट अनुित्त 

िानश से अनिक न हो । 

(4) ननगम, ऐसी परिसीमाओं के अन् तगणत औि ऐसी शतों पि, जो नवनहत की जाएं, व् यय के दकसी शीषण के अिीन या दकसी 

नवशेष स् कीम के सम् बन् ि में उस सीमा से अनिक व् यय उपगत कि सकेगा जो िाज् य सिकाि द्वािा अनुमोदित बजट में उपबनन् ित ह ै।  

1[33. िेिा औि ििेापिीिा—(1) ननगम, उस प्ररूप में जो िाित के ननयंत्रक औि महािेिा पिीिक से पिामशण किके िाज् य 

सिकाि द्वािा नवनहत दकया जाए समुनचत िेिा औि अन् य अनििेि ििेगा औि वार्षणक िेिा नवविर् नजसके अनतगणत िाि हानन िेिा 

वृत्तान् त औि तुिनपत्र आता ह,ै तैयाि किेगा ।  

(2) ननगम के िेिा प्रनतवषण िाित के ननयंत्रक औि महािेिा पिीिक या उसके नामननिनेशती द्वािा संपिीनित दकए जाएंगे 

औि उसके द्वािा ऐसी िेिापिीिा के सम् बन् ि में उपगत व् यय ननगम द्वािा िाित के ननयंत्रक औि महािेिा पिीिक को िये होगा ।  

(3) िाित के ननयंत्रक औि महािेिा पिीिक को तथा ननगम के िेिा की िेिा पिीिा के सम् बन् ि में उसके द्वािा ननयुक् त 

दकसी अन् य व् यनक् त को ऐसी िेिा पिीिा के सम् बन् ि में वही अनिकाि, नवशेषानिकाि औि प्रानिकाि होंगे जो सिकािी िेिा की िेिा 

पिीिा के सम् बन् ि में िाित के ननयंत्रक औि महािेिा पिीिक के हैं तथा उसे नवशेषतया बही, िेिा, सम् बनन् ित वाउचि औि अन् य 

िस् तावेज औि कागज पेश किने की मांग किने औि ननगम के दकसी कायाणिय का ननिीिर् किने का िी अनिकाि होगा । 

(4) िाित के ननयंत्रक औि महािेिा पिीिक या इस नननमत्त उसके द्वािा ननयुक् त व् यनक् त द्वािा यथा प्रमानर्त िेिा औि 

साथ-साथ उस पि की िेिापिीिा रिपोटण प्रनतवषण िाज् य सिकाि को िेजी जाएगी औि वह सिकाि उस िाज् य के नविान-मंिि के समि 

उसे ििवाएगी ।] 

अध् याय 5 

प्रकीर्ण 

34. िाज् य सिकाि द्वािा ननिशे—(1) िाज् य सिकाि, ऐसी सिकाि द्वािा स् थानपत ननगम स ेपिामशण के प‍ चात् ननगम द्वािा 

अनसुिर् दकए जाने के निए सािािर् अनुिशे ननगम को ि ेसकेगी औि ऐसे अनुिशेों के अन् तगणत िती से, उसके कमणचारियों की सेवा की 

शतों औि प्रनशिर् से, कमणचारियों को िी जाने वािी मजििूी से, उसके द्वािा बनाए ििी जाने वािी आिनिनतयों से औि उसके िाि या 

स् टाक के व् ययन से सम् बनन् ित ननिशे िी ह ै।  

(2) इस अनिननयम के अिीन अपनी शनक् तयों का प्रयोग औि कतणव् यों का पािन किने में, ननगम उपिािा (1) के अिीन दिए 

गए दकन् हीं सामान् य अनुिशेों से िाज् य सिकाि की पूवण अनुज्ञा के नबना नहीं हटेगा । 

35. नवविनर्या ंतथा रिपोटण—(1) हि ननगम िाज् य सिकाि को अपनी संपनत्त या दक्रयाकिाप की बाबत या दकसी प्रस् थानपत 

स् कीम के बािे में ऐसी नवविनर्यां, आंकडे़, िेिा औि अन् य जानकािी िगेा, जैसी िाज् य सिकाि समय-समय पि अपेनित किे । 

(2) उपिािा (1) के उपबन् िों पि प्रनतकूि प्रिाव िािे नबना यथासम् िव शीघ्र हि नवत्तीय वषण की समानप् त के प‍ चात् ननगम, 

उस वषण में इस अनिननयम के अिीन अपनी शनक् तयों औि कतणव् यों के प्रयोग औि पािन के बािे में, तथा अपनी नीनत औि कायणक्रम के 

बािे में रिपोटण केन् रीय औि िाज् य सिकाि को िगेा । 

2[(3) िाज् य सिकाि उपिािा (2) में ननर्िणष् ट वार्षणक रिपोटण को उस िाज् य के नविान-मंिि के समि ििवाएगी ।] 

36. जाचं का आिशे िने ेकी शनक् त—(1) िाज् य सिकाि, इस िनृष् ट से दक इस बाबत अपना समािान कि िे दक उस सिकाि 

द्वािा स् थानपत ननगम की शनक् तयों औि कतणव् यों का उनचत रूप से प्रयोग औि पािन दकया जा िहा ह,ै दकसी िी समय ननगम के सिी या 

दकन् हीं दक्रयाकिापों की जांच किने के निए औि िाज् य सिकाि को ऐसी जांच की रिपोटण िनेे के निए दकसी व् यनक् त या दकन् हीं व् यनक् तयों 

को ननयुक् त कि सकेगी ।  

(2) ननगम, इस प्रकाि ननयुक् त व् यनक् त या व् यनक् तयों को जांच का उनचत संचािन किने के निए सिी सुनविाएं िगेा औि 

ननगम के कब् जे में की ऐसी कोई िस् तावेज, िेिा या जानकािी उस व् यनक् त या उन व् यनक् तयों के समि पेश किेगा या िगेा जैसी वह 

व् यनक् त या वे व् यनक् त जांच के प्रयोजनों के निए मांगे । 

37. दकसी ननगम के उपक्रम के िाग का ननयतं्रर् किन ेकी शनक् त—(1) यदि िाज् य सिकाि का समािान िािा 36 के अिीन 

या अन् यथा की गई जांच की रिपोटण नमिने पि हो जाता ह ै दक ऐसा किना िोक नहत में आव‍ यक ह,ै तो िाज् य सिकाि िाजपत्र में 

अनिसूचना द्वािा दकसी व् यनक् त को प्रानिकृत कि सकेगी दक वह व् यनक् त ननगम से उसके उपक्रम के िाग का प्रबन् ि ग्रहर् कि िे औि तब 

तक जब तक वह अनिसूचना द्वािा प्रवृत्त िह,े ननगम के उपक्रम के ऐसे िाग का, जो अनिसूचना में नवनहत दकया जाए, ऐसे ननिशेों के 

अनुसाि जो समय-समय पि िाज् य सिकाि द्वािा दिए जाएं, प्रशासन किे औि इस प्रकाि प्रानिकृत व् यनक् त उपक्रम के उक् त िाग के 

प्रशासन के प्रयोजन के निए इस अनिननयम के अिीन ननगम की या ननगम के दकसी अनिकािी की सिी या दकन् हीं शनक् तयों का प्रयोग 

                                                 
1 1959 के अनिननयम सं० 28 की िािा 8 द्वािा िािा 33 के स् थान पि प्रनतस् थानपत ।  
2 1959 के अनिननयम सं० 28 की िािा 9 द्वािा अन् त:स् थानपत । 



 11 

कि सकेगा, औि वह ननगम के 1[अनिकारियों या अन् य कमणचारियों] को ऐसे ननिशे ि ेसकेगा, जैसे वह ठीक समझे तथा दकसी बाहिी 

अनिकिर् को ननयोनजत कि सकेगा ।   

(2) िाज् य सिकाि ऐसी अनिसूचना द्वािा ननिशे ि ेसकेगी दक इस प्रकाि प्रानिकृत व् यनक् त द्वािा उपगत सिी प्रिाि औि व् यय 

औि साथ-साथ ऐसा पारिश्रनमक, जो िाज् य सिकाि समय-समय पि उस व् यनक् त को अनुज्ञात किे, ननगम की नननि में से, ऐसे समय के 

िीति, जो िाज् य सिकाि ननयत किे, दिए जाएं औि यदि व् यय इस प्रकाि नहीं ि ेदिया जाता तो िाज् य सिकाि उस नननि की अनिििा 

किने वािे व् यनक् त को यह ननिशे ितेे हए आिशे कि सकेगी दक ऐसी नननि पि के दकसी अन् य िाि को पूर्वणकता में, ऐसे व् यय इस प्रकाि 

प्रानिकृत व् यनक् त को िे औि जहां तक उन नननियों का, जो ननगम के जमा िाते में है, यह किना संिव हो वहां तक िाज् य सिकाि उस 

आिशे का अनुपािन किेगी ।  

2[(3) इस िािा के अिीन ननकािी गई हि अनिसूचना औि साथ-साथ उन परिनस् थनतयों को, नजनके कािर् वह ननकािी गई 

थी, रिपोटण िाज् य के नविान-मंिि के समि उनके ननकािे जाने के प‍ चात् यथाशक् य शीघ्र ििी जाएगी ।] 

38. ननगम को अनतनष् ठत किन ेकी शनक् त—(1) जहां दक िाज् य सिकाि की यह िाय ह ैदक उस सिकाि द्वािा स् थानपत ननगम 

इस अनिननयम के उपबन् िों के अिीन या द्वािा उस पि अनििोनपत कतणव् यों का पािन किने में असमथण ह ैया कतणव् यों के पािन में       

बाि-बाि व् यनतक्रम किता िहा ह ैया उसने अपनी शनक् तयों का अनतक्रमर् या िरुुपयोग दकया ह ैवहां केन् रीय सिकाि की पूवण अनुमनत  

से िाज् य सिकाि िाजपत्र में अनिसूचना द्वािा ननगम को इतनी अवनि के निए, जो अनिसूचना में नवननर्िणष् ट की जाए, अनतनष् ठत             

कि सकेगी : 

पिन् तु इस उपिािा के अिीन अनिसूचना ननकािने के पूवण िाज् य सिकाि ननगम को यह हतेुक िर्शणत किने के निए दक उसे 

क् यों न अनतनष् ठत कि दिया जाए युनक् तयुक् त समय िगेी औि ननगम के स् पष् टीकिर्ों औि आिेपों पि, यदि कोई हों, नवचाि किेगी । 

(2) उपिािा (1) के अिीन ननगम के अनतनष् ठत किने वािी अनिसूचना के प्रकाशन पि— 

)क( ननगम के सिी 3[ननिशेक] अनतनष् ठत होने की तािीि से अपने पिों को ऐसे 2[ननिशेकों] की हनैसयत में रिक् त 

कि िेंग;े 

)ि( इस अनिननयम के उपबन् िों या अन् य नवनि के अिीन या द्वािा वे सिी शनक् तयां या कतणव् य नजनका प्रयोग या 

पािन ननगम द्वािा या उसकी ओि से दकया जाना है, दकए जाने की अवनि में, ऐसे व् यनक् त या व् यनक् तयों के द्वािा, जैसा िाज् य 

सिकाि ननिशे ि,े प्रयोग या पािन दकया जाएगा; 

)ग( ननगम में नननहत सिी सम् पनत्त अनतनष् ठत दकए जाने की अवनि में िाज् य सिकाि में नननहत िहेगी । 

 (3) उपिािा (1) के अिीन ननकािी गई अनिसूचना में नवननर्िणष् ट अनतनष् ठत अवनि की सम् पनत्त पि, िाज् य सिकाि— 

  )क( अनतनष् ठत काि को ऐसी अनतरिक् त अवनि के निए, जैसा वह आव‍ यक समझ,े बढा सकेगी;  

  )ि( ननगम का पुनगणठन, िािा 5 में उपबनन् ित िीनत से कि सकेगी । 

 39. ननगम का समापन—(1) कम् पननयों औि ननगमों के परिसमापन से सम् बनन् ित दकसी िी नवनि के उपाबन् ि, ननगम को 

िागू नहीं होंगे औि सम् बनन् ित िाज् य सिकाि के आिशे के नबना औि ऐसी िीनत के नसवाय, जो उस सिकाि द्वािा ननदिष् ट की जाए, 

दकसी िी ननगम का समापन नहीं दकया जाएगा : 

 पिन् तु िाज् य सिकाि द्वािा ऐसा कोई िी आिशे केन् रीय सिकाि की पूवण अनुमनत से दिए जाने के नसवाय नहीं दकया जाएगा । 

 (2) ननगम के समापन की िशा में ननगम की आनस् तयां, ऐसे िानयत् वों के, यदि कोई हों, पूिा किने के प‍ चात् केन् रीय औि िाज् य 

सिकाि औि ऐसे अन् य पिकािों में, यदि कोई हों, नजन् होंने पूंजी के निए प्रनतश्रुनत िी हो, ननगम की कुि पूंजी औि उनमें से प्रत् येक के 

द्वािा अनििाय के अनुपात में बांट िी जाएंगी । 

 40. सड़क परिवहन उपक्रम अर्जणत किन ेके निए प्रनतकि—जब किी ननगम पूिे उपक्रम को या उसके दकसी िाग को इस 

अनिननयम के अिीन अर्जणत कि िेता ह ैतब ननगम द्वािा प्रनतकि दिया जाएगा नजसकी िकम इसके प‍ चात् इसमें उपवर्र्णत प्रदक्रया के 

अनुसाि औि िीनत से अविारित की जाएगी, अथाणत् :— 

  )क( जहां दक प्रनतकि की िकम किाि द्वािा ननयत की जा सकती ह ैवहां वह ऐसे किाि के अनुसाि िी जाएगी; 

)ि( जहां दक ऐसे किाि नहीं हो पाता वहां वह िकम ऐसे मध् यस् थ अनिकिर् द्वािा अविारित की जाएगी जो 

ननगम के एक नामननिनेशती, उस व् यनक् त के, नजसे प्रनतकि दिया जाना ह ैएक नामननिनेशती, औि संबद्ध िाज् य के सम् बन् ि में 

अनिकारिता का प्रयोग किने वािे उच् च न् यायािय के मुख य न् यायानिपनत द्वािा नामननर्िणष् ट एक अध् यि से नमिकि बनेगा ; 

                                                 
1 1982 के अनिननयम सं० 63 की िािा 16 द्वािा (13-11-1982 से) “अनिकारियों या सेवकों” के स् थान पि प्रनतस् थानपत ।  
2 1959 के अनिननयम सं० 28 की िािा 10 द्वािा अन् त:स् थानपत ।  
3 1982 के अनिननयम सं० 63 की िािा 16 द्वािा (13-11-1982 से) “सिस् यों” के स् थान पि प्रनतस् थानपत ।  



 12 

)ग( उस अनिकिर् के नवनन‍ चय की अपीि उच् च न् यायािय में होगी औि ऐसी अपीि पि उच् च न् यायािय का 

आिशे अनन् तम होगा । 

41. [ननगम का स् थानीय अनिकिर् समझा जाना औि अन् य व् यनक् त जोनिम के बािे में उपबन् ि—सड़क परिवहन ननगम 

)संशोिन( अनिननयम, 1959 (1959 का 28) की िािा 11 द्वािा ननिनसत ।] 

42. प्रवशे किन ेकी शनक् त—जब किी ननगम के निए यह आव‍ यक हो दक वह अपने कोई संकमण दक्रयानन् वत किे या कोई 

सवेिर्, पिीिा या अन् वेषर् किे, जो इस अनिननयम के अिीन शनक् तयों का प्रयोग या कतणव् यों का पािन किने के बािे में प्रािनम् िक 

स् वरूप का ह ैया उनसे आनुषंनगक ह,ै तब ननगम का ऐसा कोई 1[अनिकािी या अन् य कमणचािी], नजसे ननगम द्वािा चाह ेतो सािािर्त: 

चाह ेनवशेषत: सशक् त दकया ह ैनजिा मनजस् रेट की पूवण अनुज्ञा से दकसी िूनम या परिसि में सूयोिय औि सूयाणस् त के बीच प्रवेश उस िूनम 

या परिसि के स् वामी या अनििोगी की निनित सम् मनत से इस प्रयोजन से कि सकेगा दक वहां ऐसे संकमण दकए जाएं या ऐसा सवेिर्, 

पिीिा या अन् वेषर् दकया जाए । 

43. ननगम के सिस् यों, अनिकारियों औि सवेकों का िोक सवेक होना—ननगम के सिी 2[ननिशेक] औि ननगम के सिी 
3[अनिकािी औि अन् य कमणचारियों] की बाबत चाह ेवे िाज् य सिकाि द्वािा चाह ेननगम द्वािा ननयुक् त दकए गए हों, उस समय जब वे इस 

अनिननयम के या दकसी अन् य नवनि के उपबन् िों के अनुसिर् में कायण कि िह ेहैं या उनके द्वािा कायण दकया जाना तात् पर्यणत ह,ै यह समझा 

जाएगा दक वे िाितीय िण् ि संनहता (1860 का 45) की िािा 21 के अथण में िोक सेवक हैं । 

44. ननयम बनान ेकी शनक् त—(1) िाज् य सिकाि इस अनिननयम के उपबन् िों को कायाणनन् वत किने के निए ननयम शासकीय 

िाजपत्र में अनिसूचना द्वािा बना सकेगी ।  

(2) नवनशष् टतया औि पूवणगामी शनक् त की व् यापकता पि प्रनतकूि प्रिाव िािे नबना ऐसे ननयम ननम् ननिनित सिी या दकन् हीं 

बातों के निए उपबन् ि कि सकें ग,े अथाणत् :— 

4[(क( ननगम के ननिशेकों की ननयुनक् त की शतें औि िीनत, बोिण में कें रीय सिकाि औि िाज् य सिकाि का, औि जहां 

दक िािा 23 की उपिािा (3) के अिीन अन् य पिकािों को शेयि ननगणनमत दकए गए हैं वहां ऐसे शेयि िािकों का प्रनतनननित् व, 

औि सािािर्तया बोिण के गठन से सम् बनन् ित सिी नवषय;] 

5[(ि( िािा 10 के अिीन ननगम के ननिशेकों को अथवा बोिण से सहबद्ध अन् य व् यनक् तयों को दिया जाने वािा 

पारिश्रनमक, िते्त या फीसें;] 

)ग( ननगम के 2[ननिशेकों] की पिावनि औि उनमें आकनस् मक रिनक् तयों के ििने की िीनत; 

)घ( 6[बोिण] की बैठक में गर्पूर्तण गरठत किने के निए 2[ननिशेकों] की आव‍ यक संख या; 

)ङ( ननगम के 7[यथानस् थनत प्रबन् ि ननिशेक, मुख य िेिा अनिकािी, नवत्त सिाहकाि या मुख य िेिा                     

अनिकािी-सह-नवत्त सिाहकाि] की ननयुनक् त औि सेवा की शतें औि उनके वेतनमान; 

(च( सिाहकाि परिषि ्के सिस् यों की संख या औि पिावनि, उन् हें दिए जाने वािे िते्त, उनकी आकनस् मक रिनक् तयों 

को ििने की िीनत औि उनके द्वािा अपनाई जाने वािी प्रदक्रया; 

8[)चच( वह प्रदक्रया नजसके अनुसाि कोई स् टोि िािा 19 की उपिािा (2) के अिीन बेकाि घोनषत दकए जा सकें गे;] 

)छ( वह िीनत नजसमें ननगम के अंशों )शेयिों( का आबंटन, अन् तिर् या मोचन दकया जाएगा;  

)ज( वह िीनत नजसमें ननगम के शुद्ध िािों का उपयोग दकया जाएगा;  

)झ( वह तािीि नजस तक औि वह प्ररूप नजसमें िािा 32 की उपिािा (1) के अिीन हि एक वषण में बजट तैयाि 

दकया जाएगा औि ननगम के समि ििा जाएगा;  

9[(ञ) वह प्ररूप नजसमें िेिाओं का वार्षणक नवविर् तैयाि दकया जाएगा;] 

10* * * *  * 

                                                 
1 1982 के अनिननयम सं० 63 की िािा 16 औि अनुसूची द्वािा (13-11-1982 से) “अनिकािी या सेवक” के स् थान पि प्रनतस् थानपत । 
2 1982 के अनिननयम सं० 63 की िािा 16 औि अनुसूची द्वािा (13-11-1982 से) “सिस् यों” के स् थान पि प्रनतस् थानपत ।   
3 1982 के अनिननयम सं० 63 की िािा 16 औि अनुसूची द्वािा (13-11-1982 से) “अनिकािी औि सेवक” के स् थान पि प्रनतस् थानपत ।  
4 1982 के अनिननयम सं० 63 की िािा 16 औि अनुसूची द्वािा (13-11-1982 से) िण् ि )क( के स् थान पि प्रनतस् थानपत ।  
5 1982 के अनिननयम सं० 63 की िािा 16 औि अनुसूची द्वािा (13-11-1982 से) िण् ि )ि( के स् थान पि प्रनतस् थानपत ।  
6 1982 के अनिननयम सं० 63 की िािा 16 औि अनुसूची द्वािा (13-11-1982 से) “ननगम” के स् थान पि प्रनतस् थानपत ।  
7 1982 के अनिननयम सं० 63 की िािा 16 औि अनुसूची द्वािा (13-11-1982 से) कनतपय शब् िों के स् थान पि प्रनतस् थानपत ।  
8 1982 के अनिननयम सं० 63 की िािा 16 औि अनुसूची द्वािा (13-11-1982 से) अंत:स् थानपत । 
9 1959 के अनिननयम सं० 28 की िािा 12 द्वािा िंि )ञ( के स् थान पि प्रनतस् थानपत ।   
10 1959 के अनिननयम सं० 28 की िािा 12 द्वािा िंि )ट( का िोप दकया गया । 



 13 

)ठ( वह प्ररूप नजसमें िािा 35 के अिीन नवविनर्यां, आंकडे़ या रिपोटें िी जाएंगी;  

)ि( िािा 40 के अिीन माध् यस् थम् अनिकिर् द्वािा अपनाई जाने वािी प्रदक्रया;  

)ढ( कोई अन् य नवषय जो नवनहत दकया जाना ह ैया नवनहत दकया जाए । 

 45. नवननयम बनान ेकी शनक् त—(1) ननगम, अपना कायणकिाप चिाने के निए 1[िाज् य सिकाि की पूवण मंजूिी से औि िाजपत्र 

में अनिसूचना द्वािा] ऐसे नवननयम बना सकेगा जो इस अनिननयम औि ति ्िीन बने ननयमों से असंगत न हों । 

(2) नवनशष् टतया औि पूवणगामी शनक् त की व् यापकता पि प्रनतकूि प्रिाव िािे नबना, ऐसे नवननयम ननम् ननिनित सिी या 

दकन् हीं बातों के निए उपबन् ि कि सकें गे, अथाणत् :— 

)क( वह िीनत नजसमें औि वे प्रयोजन नजनके निए िािा 10 के अिीन व् यनक् तयों 2[बोिण] के साथ सहयुक् त दकया         

जा सकेगा : 

)ि( 2[बोिण] की बैठकों का समय औि ध् यान औि ऐसी बैठकों की कायणवाही के संचािन में अपनाई जाने           

वािी प्रदक्रया; 

)ग( 3[यथानस् थनत, प्रबन् िक ननिशेक, मुख य िेिा अनिकािी औि नवत्त सिाहकाि या मुख य िेिा                   

अनिकािी-सह-नवत्त सिाहकाि से निन् न ननगम के अनिकारियों औि अन् य कमणचारियों की] ननयुनक् त औि सेवा की शतें औि 

उनके वेतनमान; 

4[)घ( िािा 19 के अिीन ननगम के कमणचारियों औि अन् य व् यनक् तयों को पास िनेा; 

)ङ( िािा 19 के अिीन अप्रयुक् त रटकटों औि रियायती पासों के सम् बन् ि में प्रनतिाय मंजूि किना ।] 

 5[45क. प्रत् यके ननयम औि नवननयम का िाज् य नविान-मिंि के समि ििा जाना—इस अनिननयम के अिीन बनाया गया 

प्रत् येक ननयम औि प्रत् येक नवननयम, बनाए जाने के प‍ चात,् यथाशीघ्र, िाज् य नविान-मंिि के समि ििा जाएगा ।] 

 46. ननयमों के िगं के निए शानस् त—िाज् य सिकाि, ननयम द्वािा यह उपबन् ि कि सकेगी दक उसके द्वािा िािा 44 के अिीन 

बनाए गए दकन् हीं ननयमों का िंग जुमाणने से िण् िनीय होगा जो पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा औि चािू िहने वािे िंग की िशा में 

प्रथम िोषनसनद्ध की तािीि के प‍ चात ्उस हि दिन के निए, नजसमें अपिािी अपिाि किता िहा है, बीस रुपए से अननिक होगा । 

47. ममु् बई से सबंनंित नवशेष उपबन् ि—(1) उस ननकाय की जो मुम् बई िाज् य सड़क परिवहन ननगम के नाम से ज्ञात ह ैऔि 

उसके बोिण की, नजसके प्रनत ननिशे सं०1780/5 वािी औि तािीि 16 नवम् बि, 1949 वािी मुम् बई सिकाि की अनिसूचना में दकया गया 

ह,ै )नजसे इसमें इसके प‍ चात ्क्रमश: नवद्यमान ननगम औि बोिण कह कि ननर्िणष् ट दकया गया ह(ै बाबत यह बात दक सब नवनिसम् मत 

प्रयोजनों के निए वह नवनिमान् यत: गरठत दकया गया ह,ै उस अनिननयनमनत में दकसी त्रुरट या अनवनिमान् यता के होते हए िी, नजसके 

द्वािा वह गरठत दकया गया था ऐसे समझी जाएगी मानो उक् त अनिसूचना के सब उपबन् ि इस िािा में सनम् मनित औि अनिननयनमत 

कि दिए गए थे औि यह िािा उक् त तािीि को औि तिपुिान् त ननिंति प्रवृत्त बनी िही औि तिनुसाि— 

)क( नवद्यमान ननगम या बोिण के द्वािा की गई सिी कायणवाही औि उसके साथ दकए गए ऐसे सिी संव् यवहाि की 

बाबत नजसके अन् तगणत ऐसी कोई कायणवाही या ऐसा संव् यवहाि ह ैनजससे चाह ेसंनविा द्वािा या अन् यथा कोई सम् पनत्त, आनस् त 

या अनिकाि अर्जणत दकया गया था अथवा कोई िानयत् व या बाध् यता उपगत हई थी, यह समझा जाएगा दक वह नवनिमान् यत: 

औि नवनिपूवणक िी गई थी या दकया गया था; औि 

)ि( मुम् बई सिकाि के या बोिण के दकसी सिस् य के अथवा नवद्यमान ननगम के दकसी अनिकािी या सेवक के नवरुद्ध 

कोई िी वाि, अनियोजन या अन् य नवनिक कायणवाही तब नवद्यमान ननगम या बोिण द्वािा की गई या उसकी स् थापना के 

सम् बन् ि में हई दकसी कायणवाही की बाबत केवि इस आिाि पि न होगी दक उस अनिननयनमनत या आिशे में, नजसके अिीन 

नवद्यमान ननगम या बोिण गरठत हआ था, कोई त्रुरट थी या वह अनिननयनमनत अनवनिमान् य थी । 

(2) िािा 3 के अिीन मुम् बई िाज् य में ननगम की, जो इसमें इसके प‍ चात् “नए ननगम” के नाम से ननर्िणष् ट ह,ै स् थापना पि— 

 )क( नवद्यमान ननगम औि बोिण नवघरटत समझे जाएंगे औि अपने कृत् य किने से परिनवित हो जाएंगे; 

 )ि( नवद्यमान ननगम में नननहत सिी सम् पनत्त औि आनस् तयां नए ननगम में नननहत हो जाएंगी; 

)ग( नवद्यमान ननगम के सिी अनिकाि, िानयत् व औि बाध् यताएं, चाह ेवे दकसी संनविा द्वािा या अन् यथा उद्िूत हई 

हों, क्रमश: नए ननगम के अनिकाि, िानयत् व औि बाध् यताएं हो जाएंगी; औि 

                                                 
1 2005 के अनिननयम सं० 4 की िािा 2 औि अनुसूची द्वािा प्रनतस् थानपत । 
2 1982 के अनिननयम सं० 63 की िािा 16 औि अनुसूची द्वािा (13-11-1982 से) “ननगम” के स् थान पि प्रनतस् थानपत ।  
3 1982 के अनिननयम सं० 63 की िािा 16 औि अनुसूची द्वािा (13-11-1982 से) कनतपय शब् िों के स् थान पि प्रनतस् थानपत ।  
4 1959 के अनिननयम सं० 28 की िािा 13 द्वािा अन् त:स् थानपत । 
5 2005 के अनिननयम सं० 4 की िािा 2 औि अनुसूची द्वािा अंत:स् थानपत । 



 14 

)घ( नवद्यमान ननगम या बोिण को अनुित्त सिी अनुज्ञनप् तयों औि अनुज्ञापत्रों के उसके साथ की गई सिी संनविाओं 

औि उसकी ओि से ननष् पादित सिी निितों के बािे में यह समझा जाएगा दक वे नए ननगम को अनुित्त, उसके साथ की गई या 

उसकी ओि से ननष् पादित हैं औि वे तिनुसाि प्रिावी होंगे । 

1[47क. कुछ ननगमों के पनुगणठन या नवघटन के निए नवशेष उपबन् ि—जहां दक िाज् य पुनगणठन अनिननयम, 1956            

(1950 का 37)के अिीन 2[या िाज् यों के पुनगणठन से सम् बनन् ित दकसी अन् य अनिननयनमनत के अिीन िाज् यों के पुनगणठन के कािर्, कोई 

िाज् य या उसका कोई िाग, नजसकी बाबत पुनगणठन होने के दिन के ठीक पूवण ननगम] दक्रयाशीि या प्रवतणनशीि था, दकसी अन् य िाज् य 

को उस दिन अन् तरित कि दिया जाता ह ैऔि ऐसे अन् तिर् के कािर् िाज् य सिकाि को यह आव‍ यक या समुनचत प्रतीत होता ह ैदक 

ननगम चाह ेवह दकसी िी प्रकाि का हो, पुनसंगरठत या पुनगणरठत दकया जाना चानहए या उसे नवघरटत कि दिया जाना चानहए, वहा ं

िाज् य सिकाि उस ननगम के पुनसंगठन, पुनगणठन या नवघटन के निए स् कीम बना सकेगी, नजसके अन् तगणत नए ननगम के बनाए जाने का 

उस ननगम का दकसी अन् य िाज् य सिकाि के ननगम, ननगम ननकाय या वानर्नज् यक उपक्रम के साथ समामेिन का, अथवा उस ननगम की 

सम् पूर्ण आनस् तयों, अनिकािों औि िानयत् वों का या उसका कोई िाग दकसी अन् य िाज् य सिकाि के ननगम, ननगम ननकाय या वानर्नज् यक 

उपक्रम को अन् तरित किने का तथा उस ननगम के दकसी कमणकाि का अन् तिर् या पुनर्नणयोजन किने का प्रस् ताव ह,ै औि िाज् य सिकाि 

उस स् कीम को अनुमोिन के निए केन् रीय सिकाि को अग्रेनषत कि सकेगी । 

 स् पष् टीकिर्—इस उपिािा के अिीन दकसी स् कीम की तैयािी के प्रयोजन के निए “िाज् य सिकाि” से— 

3[(i) मुम् बई िाज् य सड़क परिवहन ननगम के सम् बन् ि में, मुम् बई पुनगणठन अनिननयम, 1960 (1960 का 11) के अिीन 

यथागरठत महािाष् र या गुजिात िाज् य की सिकाि अनिप्रेत होगी;] 

(ii) पेप् सु सड़क परिवहन ननगम के सम् बन् ि में, िाज् य पुनगणठन अनिननयम, 1956 (1956 का 37) के उपबन् िों के 

अिीन यथागरठत पंजाब िाज् य की सिकाि अनिप्रेत होगी; 

4[(iii) असम िाज् य सड़क परिवहन ननगम के सम् बन् ि में, पूवोत्ति िेत्र पुनगणठन अनिननयम, 1971 (1971 का 81) के 

अिीन यथागरठत असम या मेघािय िाज् य की सिकाि अनिप्रेत होगी ।] 

(2) ऐसी दकसी सकीम की प्रानप् त पि, केन् रीय सिकाि सम् बनन् ित िाज् य सिकाि से पिामशण के प‍ चात् स् कीम को उपान् तिों 

सनहत या उनके नबना अनुमोदित कि सकेगी औि अनुमोदित स् कीम को कायाणनन् वत किने के प्रयोजन के निए केन् रीय सिकाि समय-समय 

पि उसके सम् बन् ि में ऐसे आिशे कि सकेगी, जैसे वह ठीक समझे, औि इस प्रकाि दकया गया हि आिशे इस अनिननयम में दकसी बात के 

अन् तर्वणष् ट होते हए िी, प्रिावी होगा ।  

(3) उपिािा (2) के अिीन दकया गया कोई आिशे ननम् ननिनित सिी या दकन् हीं बातों के निए उपबन् ि कि                         

सकेगा, अथाणत् :— 

 )क( िािा 39 में दकसी बात के अन् तर्वणष् ट होते हए िी, ननगम का नवघटन; 

)ि( ननगम का, नजसके अन् तगणत उसका स् थापन ह,ै औि जहां आव‍ यक हो दकसी िाज् य में एक ननगम से अनिक का, 

चाह ेदकसी िी िीनत से पुनसंगठन या पुनगणठन; 

)ग( िो या अनिक ननगमों का, अथवा दकसी एक ननगम का दकसी अन् य िाज् य सिकाि के दकसी अन् य ननगम ननकाय 

या वानर्नज् यक उपक्रम से समामेिन; 

)घ( दकसी ननगम के िेत्र को, नजसके निए वह स् थानपत दकया गया ह,ै नवस् तारित किना या उससे दकसी िेत्र का 

ननकाि िेना;  

)ङ( ननगम की पूिी आनस् तयों, अनिकािों औि िानयत् वों का या उनके िाग का, नजसके अन् तगणत उस ननगम को 

अनुित्त अनुज्ञनप् तयां या अनुज्ञापत्र हैं, दकसी अन् य िाज् य सिकाि का दकसी अन् य ननगम, ननगम ननकाय या वानर्नज् यक उपक्रम 

को अन् तिर्, तथा ऐसे अन् तिर् के ननबन् िन औि शतें;  

)च( ननगम के दकन् हीं कमणकािों का दकसी ऐस ेअन् तरिती को या उसके द्वािा अन् तिर् या पनुर्नणयोजन औि िाज् य 

पुनगणठन अनिननयम, 1956 (1956 का 37) की िािा 111 के उपबन् िों 5[या िाज् यों के पुनगणठन से सम् बनन् ित दकसी अन् य 

अनिननयनमनत] के अिीन ऐसे अन् तिर् या पुनर्नणयोजन के प‍ चात् ऐसे कमणकािों को िागू होने वािी सेवा के ननबन् िन            

औि शतें; 

)छ( ऐसे आनुषंनगक, पारिर्ानमक औि अनुपूिक नवषय जो अनुमोदित स् कीम को कायाणनन् वत किने के निए  

आव‍ यक हों । 

                                                 
1 1956 के अनिननयम सं० 87 की िािा 2 द्वािा अन् त:स् थानपत । 
21960 के अनिननयम सं० 11 की िािा 71 द्वािा (13-11-1982 से) कनतपय शब् िों के स् थान पि प्रनतस् थानपत ।  
3 1960 के अनिननयम सं० 11 की िािा 71 द्वािा िंि (i) के स् थान पि प्रनतस् थानपत । 
4 1971 के अनिननयम सं० 81 की िािा 73 द्वािा (21-1-1972 से) अन् त:स् थानपत ।   
5 1960 के अनिननयम सं० 11 की िािा 71 द्वािा अन् त:स् थानपत ।   



 15 

(4) जहां इस िािा के अिीन ननगम की आनस् तयों, अनिकािों औि िानयत् वों को अन् तरित किने के निए आिशे दकया जाता है 

वहां वे आनस् तयां, अनिकाि औि िानयत् व अन् तरिती में नननहत होंगे औि उसकी आनस् तयां, अनिकाि औि िानयत् व हो जाएंगे ।] 

1[48. ममु् बई िाज् य सड़क परिवहन ननगम स ेसम् बनन् ित सकं्रमर्कािीन उपबन् ि—िािा 47क में दकसी बात के होते हए िी 

मुम् बई िाज् य सिकाि के निए यह नवनिपूर्ण होगा दक उसकी उपिािा (1) के अिीन वह स् कीम तैयाि किे औि उसे 1960 के मई के प्रथम 

दिन के पूवण केन् रीय सिकाि को अग्रेनषत कि िे, औि ऐसी िशा में, उसकी उपिािा (2) के अिीन, आिशे किने की जो शनक् त केन् रीय 

सिकाि को प्रित्त ह,ै उसका उस दिन के पूवण, प्रयोग दकया जा सकेगा दकन् तु इस प्रकाि दकया गया कोई िी आिशे उस दिन तक प्रिावी 

नहीं होगा ।]  

 

 

______ 

                                                 
1 1960 के अनिननयम सं० 11 की िािा 71 द्वािा अन् त:स् थानपत मूि िािा 48 को 1957 के अनिननयम सं० 36 की िािा 2 औि अनुसूची 1 द्वािा ननिनसत दकया गया ।    


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About this act

Jurisdiction
Uttar Pradesh
Enactment date
1950-12-04
Sections available
Document reader

Commencement information from the source

04-12-1950

Source and version

India Code, Government of India. Text fetched 15 Oct 2026. Source metadata reports last modification: 2024-08-27. Check the linked official text and subsequent notifications when applying a provision.

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