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क्रम-संख्या-252 रजिस्ट्रेशन नम्बर एस०एस०पी० /एल०
डब्लू० / एन०पी०-91/2014-16
लाइसेन्स टू पोस्ट ऐट कन्सेशनल रेट
i
सरकारी गजट, उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेशीय सरकार द्वारा प्रकाशित
असाधारण
विधायी परिशिष्ट
भाग-1, खण्ड (क)
(उत्तर प्रदेश अधिनियम)
लखनऊ, मंगलवार, 13 दिसम्बर, 2022
अग्रहायण 22, 1944 शक सम्वत्
उत्तर प्रदेश शासन
विधायी अनुभाग-1
संख्या 682/79-वि-1-22-1-क-17-2022
लखनऊ, 13 दिसम्बरं, 2022
अधिसूचना
विविध
"भारत का संविधान" के अनुच्छेद 200 के अधीन श्री राज्यपाल ने उत्तर प्रदेश श्री नैमिषारण्य धाम तीर्थ
विकास परिषद, विधेयक, 2022 जिससे पर्यटन अनुभाग प्रशासनिक रूप से सम्बन्धित है, पर दिनांक 13 दिसम्बर,
2022 को अनुमति प्रदान की और वह उत्तर प्रदेश अधिनियम संख्या 17 सन् 2022 के रूप में सर्वसाधारण की
सूचनार्थ इस अधिसूचना द्वारा प्रकाशित किया जाता है।
उत्तर प्रदेश श्री नैमिषारण्य धाम तीर्थ विकास परिषद अधिनियम, 2022
(उत्तर प्रदेश अधिनियम संख्या 17 सन् 2022)
[जैसा उत्तर प्रदेश विधान मण्डल द्वारा पारित हुआ
नैमिषारण्य की समस्त प्रकार की सांस्कृतिक, पारिस्थितिकीय तथा स्थापत्य सम्बंधी विरासत की सौंदर्यपरक
गुणवत्ता को परिरक्षित करने, विकसित करने तथा अनुरक्षित करने की योजना तैयार करने, ऐसी योजना के
क्रियान्वयन का समन्वय एवं अनुश्रवण करने और क्षेत्र में एकीकृत पर्यटन विकास तथा विरासत संरक्षण एवं प्रबंधन
हेतु संगत नीतियां विकसित करने, जिला सीतापुर / हरदोई के किसी विभाग / स्थानीय निकाय /प्राधिकरण को
नैमिषारण्य क्षेत्र के विरासतीय संसाधनों को प्रभावित करने वाली या सम्भावित रूप में प्रभावित करने वा
ली किसी
योजना, परियोजना या किसी विकासगत प्रस्ताव के सम्बंध में परामर्श एवं मार्गदर्शन प्रदान करने के लिये
श्री नैमिषारण्य धाम तीर्थ विकास परिषद का गठन करने और उससे सम्बंधित या आनुषंगिक विषयों का उपबंध
करने के लिये
अधिनियम
भारत गणराज्य के तिहत्तरखें वर्ष में निम्नलिखित अधिनियम बनाया जाता है :-
अध्याय-एक
प्रारम्भिक
1- (1) यह अधिनियम उत्तर प्रदेश श्री नैमिषारण्य धाम तीर्थ विकास परिषद अधिनियम,
2022 कहा जायेगा।
संक्षिप्त नाम,
विस्तार और
प्रारम्भ
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2
परिभाषाएं
उत्तर प्रदेश असाधारण गजट, 13 दिसम्बर, 2022
(2) इसका विस्तार उत्तर प्रदेश में राजस्व जिला सीतापुर/ हरदोई के भीतर स्थित
नैमिषारण्य क्षेत्र में होगा। नैमिषारण्य के अधीन क्षेत्र में सीतापुर के छत्तीस ग्राम सम्मिलित हैं,
जिसका क्षेत्रफल 8511.284 हेक्टेयर है और जिसमें ग्यारह गंतव्य स्थान सम्मिलित हैं, जिसमें
से सात गंतव्य स्थान जिला सीतापुर के अधीन आते हैं, ये कोरोना, जरीगवां, नैमिषारण्य,
देवगवां, मदरूवा, कोलूहता बरेठी और मिश्रीट हैं और चार अवस्थान जिला हरदोई के अधीन
आते हैं, जो हरैया, नगवा कोठावा, गीरधरपुर उमरारी और साक्षी गोपालपुर हैं। सम्पूर्ण परिपथ
209 मील अथवा 84 कोष का है। छत्तीस ग्राम अर्वापुर, सहसामऊ, ठाकुरनगर, लकैरामऊ
बीठौली, नरसीधौली, मधवापुर, नरायनपुर, परसौली, सनजराबाद, घरवांसपारा कलां,
घरवांसपारा खुर्द, मिश्रीख, सरैयबीबी, जसरायपुर, करमैसपुर, लक्षरपुर, रूपपुर, ऊतरधौना,
खरगपुर, कल्ली, लोकनापुर, करखीला, मरैली, तरसवां, लोहगांपुर, बीजगरांट, बीनौरा, भानपुर,
अटवा, मनिकापुर, लेखनपुर, लक्ष्मणनगर, नैमिषारण्य, भैरमपुर और अजीजपुर हैं।
(3) यह ऐसे दिनांक को प्रवृत्त होगा, जैसा कि राज्य सरकार गजट में अधिसूचना
द्वारा नियत करे।
(2) जब तक कि अन्यथा अपेक्षित न हो, इस अधिनियम में,
(क) मुख्य कार्यपालक अधिकारी का तात्पर्य धारा 4 के अधीन नियुक्त
परिषद् के मुख्य कार्यपालक अधिकारी से है;
(ख) "कार्यपालक समिति का तात्पर्य धारा 5 की उपधारा (1) के अधीन
गठित कार्यपालक समिति से है;
(ग) "कार्यपालक उपाध्यक्ष का तात्पर्य धारा 4 के अधीन नियुक्त परिषद
कार्यपालक उपाध्यक्ष से है;
के
(घ) "क्रियान्वयनकर्ता अभिकरण का तात्पर्य राज्य सरकार के किसी विभाग
या राज्य सरकार या केन्द्र सरकार की अधिकारिता के अधीन किसी परियोजनागत
योजना को तैयार करने और / या उसे क्रियान्वित करने के लिये चयनित किसी
सार्वजनिक उपक्रम से है;
(ङ) "भूमि के अन्तर्गत भूमि से उद्भूत होने वाली प्रसुविधाएं और भू-बद्ध
चीजें या भू-बद्ध किसी चीज से स्थायी रूप में आबद्ध चीजें सम्मिलित हैं;
(च) स्थानीय निकाय का तात्पर्य किसी विकास प्राधिकरण, नगर निकाय या
नैमिषारण्य क्षेत्र के भीतर नगरीय विकास से सम्बंधित किसी 'अन्य स्थानीय
प्राधिकरण या तद्धीन किसी ग्राम पंचायत से है;
(छ) "सदस्य का तात्पर्यं ऐसे परिषद या नियोजन तथा विकास समिति के
किसी सदस्य से है और जिसमें उनके अध्यक्ष सम्मिलित हैं:
(ज) 'नैमिषारण्य क्षेत्र" का तात्पर्य उत्तर प्रदेश में राजस्व जिला
सीतापुर / हरदोई के भीतर के सम्पूर्ण क्षेत्र से है, जिसमें 84 कोस परिक्रमा क्षेत्र
सम्मिलित है;
(झ) "परिषद् का तात्पर्य धारा 3 के अधीन गठित श्री नैमिषारण्य धाम तीर्थ
विकास परिषद् से है;
(ञ)...'सहभागी विभाग का तात्पर्य राज्य सरकार के विभाग या
सीतापुर/ हरदोई जिला के किसी ऐसे स्थानीय निकाय से है जिसके क्रियाकलाप,
1. परिषद के कृत्यों से सम्बंधित हों या उससे सम्बंधित होना संभाव्य हों;
(ट) "योजना" का तात्पर्य श्री नैमिषारण्य धाम तीर्थ विकास योजना से है;
(ठ) "नियोजन तथा विकास समिति का तात्पर्य धारा 6 के अधीन गठित
नियोजन तथा विकास समिति से है;
है;
(ड) "परियोजनागत योजना का तात्पर्य योजना के लिए एक या उससे
अधिक अवयवों को क्रियान्वित करने हेतु तैयार की गयी किसी विस्तृत योजना से
(ढ) विनियमावली" का तात्पर्य इस अधिनियम के अधीन परिषद द्वारा बनायी
'गयी विनियमावली से है;
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उत्तर प्रदेश असाधारण गजट, 13 दिसम्बर, 2022
(ण) श्री नैमिषारण्य धाम तीर्थ विकास योजना का तात्पर्य इस अधिनियम के
अधीन नैमिषारण्य क्षेत्र के विकास के लिये और पर्यटन तथा संस्कृति विशेष रूप से
धार्मिक क्रियाकलापों तथा अध्यात्मिक पर्यटन हेतु अवसंरचनात्मक सुविधाओं के विकास
के लिए तैयार की गयी योजना से है। न्यास के कृत्य नैमिषारण्य क्षेत्र की दोनों मूर्त
और अमूर्त विरासत के संरक्षण के लिये होंगे।
अध्याय-दो
श्री नैमिषारण्य धाम तीर्थ विकास परिषद
3- (1) राज्य सरकार इस अधिनियम के लिये गजट में अधिसूचना द्वारा एक परिषद
का गठन करेगी जिसे "श्री नैमिषारण्य धाम तीर्थ विकास परिषद" के रूप में जाना जायेगा।
(2) परिषद एक निगमित निकाय होगी।
(3) परिषद में निम्नलिखित सदस्य होंगे,अर्थात्ः-
पदेन;
(क) मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश, जो परिषद के अध्यक्ष होंगे;
(ख) उपाध्यक्ष मंत्री पर्यटन विभाग, उत्तर प्रदेश, सरकार;
(ग) कार्यपालक उपाध्यक्ष, जो मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश द्वारा नियुक्त होंगे;
(घ) सदस्य सह-संयोजक प्रमुख सचिव, उत्तर प्रदेश शासन, पर्यटन विभाग,
(ङ) प्रमुख सचिव, उत्तर प्रदेश शासन, आवास एवं नगर नियोजन विभाग, पदेन;
(च) प्रमुख सचिव, उत्तर प्रदेश शासन, वित्त विभाग, पदेन,
(छ) प्रमुख सचिव,उत्तर प्रदेश शासन, संस्कृति विभाग, पदेन;
(ज) प्रमुख सचिव, उत्तर प्रदेश शासन, धर्मार्थ कार्य विभाग,पदेन;
(झ) प्रमुख सचिव, उत्तर प्रदेश शासन, नगर विकास विभाग,पदेन;
(ञ) प्रमुख सचिव, उत्तर प्रदेश शासन, परिवहन विभाग,पदेन;
(ट) प्रमुख सचिव, उत्तर प्रदेश शासन, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन
विभाग,पदेन;
(ठ) प्रमुख सचिव, उत्तर प्रदेश शासन, लोक निर्माण विभाग, पदेन;
(ड) आयुक्त, लखनऊ मण्डल, लखनऊ, पदेन;
(ढ) जिला मजिस्ट्रेट, सीतापुर, पदेन;
(ग) मुख्य नगर एवं ग्राम नियोजक, उत्तर प्रदेश, पदेन;
(त) परिषद का मुख्य कार्यपालक अधिकारी जो सदस्य सचिव होगा;
(थ) कार्यपालक अधिकारी, नैमिषारण्य नगर पालिका परिषद, पदेन;
(द) नैमिषारण्य क्षेत्र के विरासत के संरक्षण का ज्ञान, अनुभव, अभिदर्शन तथा
तनिमित्त कृत प्रयासों के ट्रैक अभिलेख वाले ऐसे पांच प्रख्यात व्यक्ति, जो राज्य
सरकार के परामर्श से अध्यक्ष द्वारा नाम निर्दिष्ट किये जायेंगे,
(ध) एक करोड़ रूपये या उससे अधिक का दान करने वाले दानकर्तागण,
परिषद के अनुमोदन से तीन वर्ष की अवधि के लिये नाम निर्दिष्ट सदस्य के रूप में
विचार किये जाने हेतु पात्र होंगे;
(4) उपधारा (3) के खण्ड (ध) और (न) के अधीन नाम निर्दिष्ट सदस्यों के पद
निबंधन और शर्तें वही होंगी जैसा कि विहित किया जाय।
की
4- (1) परिषद का एक कार्यपालक उपाध्यक्ष होगा, जो मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश द्वारा
नियुक्त किया जायेगा;
(2) परिषद का एक मुख्य कार्यपालक अधिकारी होगा, जो राज्य सरकार के विशेष
सचिव की श्रेणी से अनिम्न अधिकारियों में से राज्य सरकार द्वारा नियुक्त किया जायेगा;
(3) मुख्य कार्यपालक अधिकारी परिषद का अधिकारी होगा और राज्य सरकार द्वारा
प्रतिनियुक्ति के आधार पर नियुक्त किये गये या संविदा पर रखे गये समस्त अधिकारी तथा
कर्मचारी, मुख्य कार्यपालक अधिकारी के प्रशासनिक नियन्त्रणाधीन होंगे;
(4) कार्यपालक उपाध्यक्ष और मुख्य कार्यपालक अधिकारी परिषद की निधि से ऐसे
वेतन और भत्ते प्राप्त करने के हकदार होंगे और ऐसी सेवा शर्तों द्वारा शासित होंगे जैसा कि
इस निमित्त जारी किये गये राज्य सरकार के सामान्य या विशेष आदेश
द्वारा अवधारित किया
जाय;
(5) परिषद के समस्त आदेश और विनिश्चय तथा अन्य लिखत, मुख्य कार्यपालक
अधिकारी के हस्ताक्षर से अधिप्रमाणित होंगे;
श्री नैमिषारण्य
धाम तीर्थ
विकास परिषद
का गठन और
निगमन
कार्यपालक
उपाध्यक्ष तथा
मुख्य कार्यपालक
अधिकारी
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3
4
कार्यपालक समिति
नियोजन तथा
विकास समिति की
संरचना
उत्तर प्रदेश असाधारण गजट, 13 दिसम्बर, 2022
(6) मुख्य कार्यपालक अधिकारी की सहायता, सहायक मुख्य कार्यपालक अधिकारी
करेगा जो अपर जिला मजिस्ट्रेट की श्रेणी का होगा। मुख्य कार्यपालक अधिकारी की सहायता
एक नगर योजनाकार, दो कार्यपालक अभियन्ता, चार सहायक अभियन्ता; छः अवर अभियन्ता
और चार प्रशासनिक कर्मचारिवर्ग करेंगे, जो राज्य सरकार के विभिन्न विभागों से प्रतिनियुक्ति
पर होंगे। कर्मचारिवर्ग के वेतन तथा भत्ते वहीं होंगे जो इनके पैतृक विभाग में होंगे। चतुर्थ
श्रेणी के कर्मचारी संविदा के आधार पर नियोजित किये जायेंगे और उनकी परिलब्धियों तथा
वेतन संरचना का विनिश्चय परिषद द्वारा किया जायेगा। इसके अतिरिक्त उनकी भर्ती तथा
वेतन संरचना, न्यासी मण्डल के अनुमोदन के आधार पर होगी;
(7) न्यासी मण्डल के पास अपेक्षानुसार अधिकारियों या कर्मचारिवर्ग की संख्या को
घटाने या उसमें कमी करने का अधिकार होगा।
5- (1) जब सम्पूर्ण परिषद का सम्मेलन करना व्यवहारिक न हो तब किसी आपात
या अन्य सामयिक संवेदनशील मामला होने की दशा में परिषद की शक्तियों और उसके कृत्यों
का प्रयोग करने के लिए एक कार्यपालक समिति होगी। कार्यपालक समिति में परिषद के
समस्त पदेन सदस्य सम्मिलित होंगे और उसकी अध्यक्षता उपाध्यक्ष करेंगे;
(2) परिषद अपनी अगली बैठक में कार्यपालक समिति के कार्यवृत्त की समीक्षा
करेगी और कार्यपालक समिति द्वारा कृत कार्यवाही का उपान्तरण कर सकती है, उसे
अस्वीकृत कर सकती है या उसमें सुधार कर सकती है।
6- (1) इस अधिनियम के प्रारम्भ होने के पश्चात् परिषद, यथाशक्य शीघ्र, अपने
कृत्यों का निर्वहन करने में अपनी सहायता हेतु एक नियोजन तथा विकास समिति का गठन
करेगी।
(2) नियोजन तथा विकास समिति में निम्नलिखित सदस्य होंगे अर्थात् :-
(क) जिला मजिस्ट्रेट, सीतापुर, जो अध्यक्ष होगा, पदेन;
(ख) मुख्य कार्यपालक अधिकारी, जो सदस्य सचिव होगा;
(ग) वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक,सीतापुर, पदेन;
(घ) मुख्य विकास अधिकारी, हरदोई, पदेन
(ङ) अपर पुलिस अधीक्षक, हरदोई, पदेन;
(च) कार्यपालक अधिकारी, नैमिषारण्य नगर पालिका परिषद, पदेन;
(छ) सहयुक्त नियोजक, नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग, लखनऊ,
उत्तर प्रदेश, पदेन;
(ज) अधीक्षण अभियन्ता,लोक निर्माण विभाग, सीतापुर, पदेन
(झ) अधीक्षण अभियंता, सिंचाई कार्य मण्डल, सिंचाई एवं जल संसाधन
विभाग, सीतापुर, पदेन;
(ञ) अधीक्षण अभियन्ता, मध्यांचल विद्युत वितरण निगम (नगरीय एवं ग्रामीण),
सीतापुर, पदेन;
(८) अधीक्षण अभियन्ता, उत्तर प्रदेश जल निगम सीतापुर, पदेनः
(ठ) प्रभागीय वन अधिकारी, सीतापुर, पदेन;
(ड) क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, सीतापुर, पदेन
(ढ) अधीक्षक पुरातत्वविद, लखनऊ, पदेन;
(ग) क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी, लखनऊ, पदेन;
(त) एक दृश्यभूमि अभिकल्पक एवं भाषान्तरण योजनाकार, जो राज्य सरकार
द्वारा नामनिर्दिष्ट किया जायेगा;
(थ) एक पर्यावरण विद, जो राज्य सरकार द्वारा नामनिर्दिष्ट किया जायेगा;
(द) राज्य के सांस्कृतिक एवं पौराणिक इतिहास का अनुभव रखने वाला एक
प्रख्यात इतिहासकार, जो राज्य सरकार द्वारा नामनिर्दिष्ट किया जायेगा;
(घ) राज्य का अनुभव रखने वाला एक प्रख्यात साहित्यकार या कलाकार, जो
राज्य सरकार द्वारा नामनिर्दिष्ट किया जायेगा;
(न) एक प्रख्यात विधिवक्ता, जो राज्य सरकार द्वारा नामनिर्दिष्ट किया
जायेगा;
(प) दो प्रख्यात लोकप्रतिनिधि या सामाजिक कार्यकर्ता, जो राज्य सरकार
द्वारा नामनिर्दिष्ट किये जायेंगे;
(3) उपधारा (2) के खण्ड (त), (थ), (द),(घ), (न) और (प) के अधीन नामनिर्दिष्ट
सदस्यों के पद की निबंधन एवं शर्तें वही होंगी जैसा कि विहित किया जाय।
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उत्तर प्रदेश असाधारण गजट, 13 दिसम्बर, 2022
7-(1) परिषद या नियोजन तथा विकास समिति, किसी समय बैठक कर सकती है सहयोजित करने
और ऐसी अवधि, जैसा कि वह उचित समझे, के लिए किसी व्यक्ति या की शक्ति
व्यक्तियों को परिषद के या नियोजन तथा विकास समिति के सदस्य या सदस्यों के रूप में
सहयोजित कर सकती है;
(2) उपधारा (1) के अधीन सहयोजित कोई व्यक्ति परिषद के, या नियोजन तथा
विकास समिति के सदस्य की समस्त शक्तियों और कृत्यों का प्रयोग करेगा तथा उनका निर्वहन
करेगा किन्तु उसे मत देने का हक नहीं होगा।
(8) परिषद का मुख्यालय सीतापुर में होगा।
(9) परिषद ऐसे समयों और स्थानों पर बैठक करेगी जैसा कि परिषद द्वारा
समय-समय पर अवधारित किया जाय;
(10) नियोजन तथा विकास समिति ऐसे समयों पर बैठक करेगी जैसा कि नियोजन
तथा विकास समिति के अध्यक्ष द्वारा विनिश्चय किया जाय या परिषद के उपाध्यक्ष द्वारा
निदेशित किया जाय किन्तु दो निरन्तर बैठकों के मध्य का समय साठ दिन से अधिक का नहीं
होगा।
(11) परिषद या नियोजन तथा विकास समिति का कोई कार्य या कार्यवाही,
यथास्थिति, परिषद या नियोजन तथा विकास समिति के गठन में किसी रिक्ति या किसी त्रुटि
के विद्यमान होने के कारण मात्र से अविधिमान्य नहीं होगी।
(12) परिषद और नियोजन तथा विकास समिति की बैठकों की गणपूर्ति दो तिहाई
सदस्यों से होगी।
अध्याय - तीन
परिषद और नियोजन तथा विकास समिति की शक्तियाँ और कृत्य
13-परिषद की शक्तियों में निम्नलिखित शक्तियाँ सम्मिलित होंगी -
(क) योजना और परियोजनाओं को तैयार करने, प्रवर्तित करने और उन्हें
क्रियान्वित करने के सम्बंध में सहभागी विभागों से रिपोर्ट और सूचना मांगना;
(ख) यह सुनिश्चित करना कि यथास्थिति, योजना या परियोजना, की तैयारी,
प्रवर्तन तथा क्रियान्वयन, नैमिषारण्य की संस्कृति और उसकी स्थापत्यकला के अनुरूप
हो;
(ग) योजना के क्रियान्वयन प्रक्रमों को संसूचित करना;
(घ) योजना और परियोजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा करना;
(ङ) सहभागी विभागों से व्यापक परियोजनाएं चयनित करना और उन्हें
अनुमोदित करना, प्राथमिकता वाली विकास की मांग करना और उन परियोजनाओं के
क्रियान्वयन हेतु ऐसी सहायता का उपबंध करना जैसा कि परिषद उचित समझे;
(च) सेवाएं तथा सुविधाएं उपबंधित करने या उनके अनुरक्षण एवं विकास हेतु
पर्यटकों से शुल्क या प्रभार उग्रहीत करना;
और
(छ) स्वप्रेरणा से सम्पूर्ण नैमिषारण्य क्षेत्र में किसी क्षेत्र के विकास, पुनर्विकास
सौन्दर्गीकरण का सम्वर्द्धन करने तथा उसे सुरक्षित रखने के लिए
कार्य / परियोजना प्रारम्भ करना
रीति
कोई
(ज) राज्य सरकार के नियमों तथा विनियमों का अनुसरण करते हुए पारदर्शी
से किसी परियोजनागत योजना को तैयार करने तथा उसे क्रियान्वित करने
लिए क्रियान्वयनकर्ता अभिकरण का चयन करना;
के
(झ) नियोजन तथा विकास समिति को ऐसे अन्य कृत्यों को सौंपना जैसा कि
वह इस अधिनियम के उपबंधों को क्रियान्वित करने के लिये आवश्यक समझे ।
14-परिषद के कृत्य निम्नलिखित होंग -े
(क) योजना तैयार करना;
(ख) सहभागी विभागों (राज्य सरकार के समस्त विभाग) में से किसी सहभागी
विभाग द्वारा परियोजनाओं को तैयार करने की व्यवस्था करना;
(ग) किसी एक या उससे अधिक सहभागी विभाग / विभागों या क्रियान्वयनकर्ता
अभिकरण / अभिकरणों के माध्यम से योजना एवं परियोजनाओं के प्रवर्तन तथा
क्रियान्वयन का समन्वय करना;
परिषद का
मुख्यालय
परिषद की
बैठकें
नियोजन तथा
विकास समिति
की बैठकें
रिक्तियां इत्यादि
जिनसे परिषद
या नियोजन
तथा विकास
समिति की
कार्यवाहियां
अविधिमान्य नहीं
होंगी
बैठक की
गणपूर्ति
परिषद की
शक्ति
परिषद के कृत्य
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5
6
नियोजन तथा विकास
समिति के कृत्य
योजना की विषयवस्तु
उत्तर प्रदेश असाधारण गजट, 13 दिसम्बर, 2022
(घ) नैमिषारण्य क्षेत्र में परियोजना की संरचना करने, प्राथमिकताओं का
अवधारण करने और उक्त योजना में संसूचित प्रक्रमों के अनुसार पर्यटन हेतु
अवसंरचनात्मक सुविधाओं के विकास की प्रावस्था निर्धारित करने तथा नैमिषारण्य
*की विरासत के संरक्षण के संबंध में सहभागी विभागों द्वारा समुचित तथा व्यवस्थित
कार्यक्रम सुनिश्चित करना;
(ङ) अमूर्त सांस्कृतिक विरासत में जागरूकता तथा अभिरुचि की अभिवृद्धि
करने के निमित्त समेकित प्रयास करना और उसका सुव्यवस्थित रूप में
दस्तावेजीकरण करना, उसे संरक्षित रखना, सुरक्षित रखना, संवर्धित करना, प्रदर्शित
करना और प्रसारित करना;
(च) क्षेत्र के विरासत के सम्बन्ध में अनुसंधान का दायित्व ग्रहण करना तथा
उसे प्रोत्साहित करना;
(छ) नैमिषारण्य क्षेत्र में नदियों तथा जलाशयों तथा उनके जलागम क्षेत्रों का
संरक्षण तथा विकास करने हेतु उनमें प्रदूषण नियंत्रण का उपाय करने तथा नदी
तटों एवं जलाशयों का विकास करने के लिए दायित्व ग्रहण करना;
(ज) उक्त क्षेत्र के विरासतीय स्थापत्य कला के अनुरूप भवनों तथा
संरचनाओं में एकरूपता लाने हेतु स्थापत्य विनियमावली बनाना;
(झ) नैमिषारण्य क्षेत्र के समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सशक्त करने, संरक्षित
करने, सुरक्षित रखने तथा उसे संवर्धित करने के लिए पर्यटन अवसंरचना तथा
क्रियाकलापों / परियोजनाओं के एकीकृत विकास के लिए विभिन्न
पदधारकों सरकारी विभागों स्थानीय निकायों, मंदिर प्रबन्धन /न्यासों, स्वयं सहायता
समूहों, अनुसंधानकर्ताओं और विद्वानों के मध्य समन्वयन सुनिश्चित करने की
नीतियों का सूत्रपात करना;
(ञ) नैमिषारण्य क्षेत्र में राज्य निधियों तथा अन्य राजस्व स्रोतों यथा मंदिर
न्यासों, दानों, गैर सरकारी संगठन कम्पनी / फर्मों तथा पर्यटकों आदि से प्राप्त
निधियों के माध्यम से चयनित विकास परियोजनाओं की वित्त व्यवस्था करना तथा
उसका पर्यवेक्षण करना;
(ट) नैमिषारण्य क्षेत्र में व्यवहारिक रूप में सौहार्द संवर्द्धन की छाप रख चुके
या रखने वाले प्राधिकारियों के साथ समीपस्त क्षेत्रों में तत्सम्बन्धी मामलों तथा
क्रिया-कलापों में समन्वय करना;
15 (1) नियोजन तथा विकास समिति के कृत्य, परिषद की निम्नलिखित के संबंध
में सहायता करने होंगे:-
(क) योजना तथा परियोजनाओं की तैयारी करना एवं उसके क्रियान्वयन का
समन्वय करना;
(ख) सहभागी विभाग या किसी क्रियान्वयनकर्ता अभिकरण की परियोजनाओं
की यह सुनिश्चित करने के लिए संवीक्षा करना कि वे योजना के अनुरूप हों;
(ग) परिषद को ऐसी संस्तुतियां करना जैसा कि वह किसी योजना का
संशोधन या उपान्तरण करने के लिए आवश्यक समझे;
का
(घ) नैमिषारण्य क्षेत्र योजना के अनुरूप जिला स्तर पर विभिन्न परियोजनाओं
समन्वय तथा क्रियान्वयन करना;
(ङ) इस अधिनियम के प्रशासन के संबंध में ऐसे अन्य कृत्यों का निष्पादन
करना जैसा कि उसे परिषद द्वारा सोपे जायं ।
2-जिला में विभागीय आय-व्ययक संबंधी स्वीकृतियों वाले विभिन्न सरकारी विभागों
और अन्य क्रियान्वयनकर्ता अभिकरणों को नियोजन तथा विकास समिति के साथ उक्त
योजना के अधीन उनकी विद्यमान योजनाओं / परियोजनाओं की समाभिरूपता तथा समन्वय
सुनिश्चित करने हेतु समन्वय भी करना होगा।
अध्याय-चार
योजना तथा परियोजनागत योजनाएं
16(1) योजना एक लिखित विवरण होगी और उसके साथ ऐसे मानचित्र, रेखाचित्र,
दृष्टांत तथा विवरणात्मक मामले संलग्न होंगे जैसा कि परिषद योजना में अन्तर्विष्ट प्रस्तावों
की व्याख्या करने या दृष्टांत देने के प्रयोजनार्थ उपयुक्त समझे और ऐसे प्रत्येक मानचित्र,
रेखाचित्र, दृष्टांत और विवरणात्मक मामले योजना के अंग समझे जायेंगे;
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उत्तर प्रदेश असाधारण गजट, 13 दिसम्बर, 2022
(2) उक्त योजना में ऐसी रीति संसूचित होगी जिसमें नैमिषारण्य क्षेत्र में विकास
सम्बन्धी क्रिया कलाप या संरक्षण तथा ऐसे अन्य मामले ग्रहण किये जायेंगे, जिनका
नैमिषारण्य क्षेत्र में पर्यटन के विकास तथा नैमिषारण्य की विरासत के संरक्षण पर कोई
महत्वपूर्ण प्रभाव हो या होना सम्भावित हो । उक्त योजना में योजना के लक्ष्यों को प्राप्त करने
के लिए आवश्यक निम्नलिखित तत्व सम्मिलित होंगे, अर्थात्-
(क) विभिन्न प्रयोगों के लिये भू-उपयोग तथा भूमि आवंटन को विनियमित
करने की नीति;
(ख) प्रमुख नगरीय व्यवस्थापन प्रणाली तथा स्थापत्य विनियमावली के लिए
प्रस्ताव;
(ग) भावी विकास के लिए उपयुक्त आर्थिक आधार का उपबन्ध करने के लिए
प्रस्ताव;
(घ) स्थानीय परिवहन सहित क्षेत्र के लिए सहायक रेलवे तथा मुख्य मार्गों से
युक्त परिवहन तथा संचार से सम्बंधित प्रस्ताव
(ङ) नगरीय सेवाओं यथा पेयजल, मलजल तथा जल निकास व्यवस्था
लिए प्रस्ताव
(च) ऐसे क्षेत्रों को संसूचित करना जिनकी प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के रूप
तत्काल विकास की आवश्यकता हो
के
में
(छ) अमूर्त सांस्कृतिक विरासत में जागरूकता और अभिरूचि की अभिवृद्धि
करने के लिए प्रस्ताव और इसे सुव्यवस्थित रूप में दस्तावेजी कृत करना, संरक्षित
करना, सुरक्षित करना, संवर्द्धित करना, प्रदर्शित करना और प्रसारित करना;
(ज) नैमिषारण्य क्षेत्र के संतुलित विकास तथा अभिवृद्धि के लिए समुचित
योजना बनाने हेतु सम्बंधित सहभागी विभागों के साथ परामर्श करके परिषद द्वारा
सम्मिलित किये जाने वाले अन्य मामले ।
17-उक्त योजना तैयार करने के लिए परिषद ऐसी सहभागी विभागों या व्यक्तियों, सर्वेक्षण और
जिन्हें वह इस निमित्त नियुक्त करे, द्वारा, ऐसे सर्वेक्षण तथा अध्ययन करा सकती है जैसा कि अध्ययन
वह ऐसा किये जाने के लिए आवश्यक समझे, और ऐसे विनिर्दिष्ट मामलों के सम्बन्ध में
अध्ययन कराने के लिए ऐसे विशषज्ञों या परामर्शदाताओं को भी सहयोजित कर सकती है,
जैसाकि उसके द्वारा अवधारित किया जाय।
18-(1) उक्त योजना का अन्तिम रूप प्रदान करने के पूर्व, परिषद, नियोजन तथा
विकास समिति की सहायता से योजना का एक प्रारूप तैयार करेगी और उसे उसकी एक
प्रतिलिपि निरीक्षण हेतु उपलब्ध कराते हुए तथा यथाविहित प्रारूप में और रीति से एक नोटिस
ऐसे दिनांक के पूर्व जैसा कि नोटिस में विनिर्दिष्ट किया जाय, प्रकाशित कराते हुए योजना के
प्रारूप के संबंध में किसी भी व्यक्ति से आपत्तियाँ तथा सुझाव आमंत्रित करते हुए प्रकाशित
करायेगी:
(2) परिषद प्रत्येक ऐसे स्थानीय प्राधिकरण / विभाग जिसकी स्थानीय सीमाओं के
भीतर उक्त योजना द्वारा किसी भी रूप में प्रभावित कोई भूमि स्थित हो, को योजना के प्ररूप
के संबंध में कोई प्रत्यावेदन करने के लिए युक्तियुक्त अवसर भी प्रदान करेगी;
(3) परिषद द्वारा प्राप्त की गयी समस्त आपत्तियों, सुझावों तथा प्रत्यावेदनों पर
विचार करने के पश्चात् परिषद अन्तिम रूप से योजना तैयार करेगी;
19-उक्त योजना को अन्तिम रूप से तैयार किये जाने के तत्काल पश्चात् परिषद
यह उल्लेख करते हुए कि उसके द्वारा योजना अन्तिम रूप से तैयार कर ली गयी है और ऐसे
स्थानों को नामित कर दिया गया है जहाँ योजना की प्रतिलिपि का समस्त युक्तियुक्त समयों
पर निरीक्षण किया जा सकता है, यथा विहित रीति से एक नोटिस प्रकाशित करायेगी और
पूर्वोक्त नोटिस के प्रथम प्रकाशन के दिनांक को उक्त योजना प्रवर्तित होगी और सम्यक रूप
से तैयार की गयी समझी जायेगी।
योजना तैयार करने
के लिए अपनायी
जाने वाली प्रक्रिया
योजना को प्रवर्तित
किये जाने का
दिनांक
20 (1) परिषद उपधारा (2) के उपबन्धों के अध्यधीन योजना में ऐसे उपान्तरण, योजना का
जैसा कि वह उचित समझे,कर सकती है, जो उसकी राय में योजना की महत्वपूर्ण प्रकृति को उपान्तरण
प्रभावित न करे और जो भू-उपयोगों की सीमा या जनसंख्या घनत्व के मानकों से सम्बंधित न
हो;
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7
8
योजना की समीक्षा
और उसका
पुनरीक्षण
परियोजनागत
योजना की तैयारी,
समन्वय और
सहभागिता
सरकार द्वारा
अनुदान अग्रिम और
ऋण
निधि का गठन
उत्तर प्रदेश असाधारण गजट, 13 दिसम्बर, 2022
(2) अन्तिम रूप से तैयार की गयी योजना में कोई उपान्तरण करने के पूर्व, परिषद
यथा विहित प्रारूप में तथा रीति से एक नोटिस, अन्तिम रूप से तैयार की गयी योजना में
प्रस्तावित किये जाने वाले उपान्तरणों को संसूचित करते हुए और नोटिस में यथाविनिर्दिष्ट
दिनांक के पूर्व प्रस्तावित उपान्तरणों के सम्बंध में किसी व्यक्ति से आपत्तियां एवं सुझाव
आमंत्रित करते हुए प्रकाशित करेगी और स्वयं द्वारा यथा विनिर्दिष्ट दिनांक को या उसके पूर्व
प्राप्त की जाने वाली समस्त आपत्तियों एवं सुझावों पर विचार करेगी;
(3) इस धारा के अधीन किये गये प्रत्येक उपान्तरण को परिषद द्वारा विनिर्दिष्ट की
जाने वाली रीति से प्रकाशित की जायेगी और उक्त उपान्तरण ऐसे प्रकाशन के दिनांक को
अथवा ऐसे पश्चातवर्ती दिनांक को, जैसा कि परिषद नियत करे, प्रवर्तित होगा;
(4) यदि कोई प्रश्न उठता है कि प्रस्तावित किये जाने वाले उपान्तरण ऐसे
उपान्तरण हैं जिनसे योजना की महत्वपूर्ण प्रकृति प्रभावित होती हो तो इसका विनिश्चय
परिषद द्वारा किया जायेगा जिस पर उसका विनिश्चय अन्तिम होगा।
21- (1) अन्तिम रूप से तैयार की गयी योजना को प्रवर्तित किये जाने के दिनांक से
प्रत्येक पांच वर्ष के पश्चात् परिषद ऐसी समीक्षा के पश्चात् उसकी समग्रता में ऐसी योजना
की समीक्षा कर सकती है, और ऐसी समीक्षा के पश्चात् इसके स्थान पर नई योजना ला
सकती है या उसमें ऐसे उपान्तरण या परिवर्तन कर सकती है जैसा कि नियोजन तथा
विकास समिति की सहमति से उसके द्वारा आवश्यक पाया जाय;
(2) जहाँ उक्त योजना के स्थान पर नई योजना रखने का प्रस्ताव किया जाय या
जहाँ ऐसे उपान्तरण या परिवर्तन का प्रस्ताव हो वहाँ, यथा स्थिति, ऐसी नई योजना या ऐसे
उपान्तरण या परिवर्तन उसी रीति से प्रकाशित एवं व्यवहुत किये जायेंगे मानों यह ऐसी
योजना हो, जो धारा 18 और 19 में निर्दिष्ट हो या मानों वे धारा 20 के अधीन बनायी गयी
योजना में उपान्तरण या परिवर्तन हों।
22- (1) सहभागी विभाग स्वयं अथवा, यथास्थिति, एक या उससे अधिक सहभागी
विभागों के सहयोग से परियोजनागत योजनाओं की एक या उससे अधिक तत्वों को तैयार
कर सकता है;
(2) राज्य सरकार द्वारा अनुमोदित अनुदान, ऋण या आय व्ययक प्राप्त करने वाले
जिला के विभिन्न सहभागी विभागों को, उक्त योजना के अधीन योजनाओं / परियोजनाओं
सहित अपने विभागीय योजनाओं की समभिरूपता /समन्वय को सुनिश्चित करना होगा।
अध्याय - पांच
वित्त, लेखा और लेखा परीक्षा
23 राज्य सरकार, विधान मण्डल द्वारा इस निमित्त विधि के माध्यम से किये गये
सम्यक विनियोजन के पश्चात् परिषद को ऐसी धनराशि का अनुदान, अग्रिम तथा ऋण प्रदान
कर सकती है जैसा कि वह इस अधिनियम के अधीन कृत्यों को क्रियान्वित करने के लिए
परिषद को समर्थ बनाने हेतु आवश्यक समझे ।
24 (1) परिषद की अपनी एक पृथक बैंक खाता में अनुरक्षित की जाने वाली एक
निधि का गठन किया जायेगा, जिसे श्री नैमिषारण्य धाम विकास परिषद निधि कहा जायेगा
और उसमें निम्नलिखित धनराशियाँ जमा की जायेंगी-
(क) धारा 23 के अधीन राज्य सरकार द्वारा परिषद को प्रदान किया गया
कोई अनुदान तथा ऋण;
(ख) सहभागी विभागों द्वारा परिषद को संदत्त की गई समस्त धनराशि,
(ग) अन्य स्रोतों यथा मन्दिर न्यासों से प्राप्त धनराशि, गैर सरकारी संगठन,
कम्पनियों, फर्मों तथा व्यक्तियों आदि से प्राप्त दान, और
(घ) परिषद द्वारा ऐसे अन्य स्रोतों से प्राप्त कोई अन्य धनराशि, जैसा
राज्य सरकार द्वारा परिषद के परामर्श से विनिश्चित किया जाय।
कि
(2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट निधि में जमा की गई धनराशि का उपयोग निम्नलिखित
के लिये किया जायेगा-
(क) कार्यपालक उपाध्यक्ष, मुख्य कार्यपालक अधिकारी, अपर मुख्य कार्यपालक
अधिकारी, वित्त अधिकारी तथा परिषद के अन्य अधिकारियों तथा कर्मचारियों के
वेतनों, भत्तों और अन्य पारिश्रमिक की पूर्ति करना तथा परिषद के अन्य प्रशासनिक
व्ययों की पूर्ति करना;
(ख) नैमिषारण्य क्षेत्र के लिए सर्वेक्षण तथा प्रारम्भिक अध्ययन संचालित
करना और तनिमित्त योजनाएं / परियोजनाएं अभिकल्पित करना;
(ग) योजना तथा परियोजनाओं के क्रियान्वयन हेतु सहभागी विभागों और
क्रियान्वयनकर्ता अभिकरणों को वित्तीय सहायता उपबन्धित करना;
(घ) इस अधिनियम का प्रशासनीकरण करने में परिषद द्वारा उपगत किन्ही
अन्य व्ययों की पूर्ति करना;
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उत्तर प्रदेश असाधारण गजट, 13 दिसम्बर, 2022
25-परिषद प्रत्येक वर्ष ऐसे प्रारूप में तथा ऐसे समय पर, जैसा कि राज्य सरकार
विनिर्दिष्ट करे, अगले आगामी वित्तीय वर्ष के लिये एक आय-व्ययक तैयार करेगी और उसे
वित्तीय वर्ष के प्रारम्भ होने के न्यूनतम नब्बे दिन पूर्व राज्य सरकार को अग्रसारित करेगी;
26-परिषद प्रत्येक वर्ष अपने उस वर्ष के क्रिया कलापों की एक रिपोर्ट तैयार करेगी
और उक्त रिपोर्ट राज्य सरकार को ऐसे प्रारूप में तथा ऐसे दिनांक को या उसके पूर्व,जैसा
कि राज्य सरकार विनिर्दिष्ट करे, प्रस्तुत करेगी और ऐसी रिपोर्ट राज्य विधान मण्डल के दोनों
सदनों के समक्ष रखी जायेगी;
27 (1) परिषद समुचित लेखाओं तथा अन्य सुसंगत अभिलेखों का अनुरक्षण करेगी
और ऐसे प्रारूप में जैसा कि राज्य सरकार विनिर्दिष्ट करे, तुलन-पत्र सहित वार्षिक लेखा
विवरण तैयार करेगी;
(2) परिषद के लेखाओं की वार्षिक लेखा परीक्षा, परीक्षक, स्थानीय निधि लेखा द्वारा
करायी जायेगी और / या राज्य सरकार, उक्त लेखा परीक्षा, महालेखाकार उत्तर प्रदेश या
भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक को या किसी अन्य लेखा परीक्षक को ऐसे निबंधन एवं
शर्तों पर, ऐसी रीति से, ऐसी अवधि के लिए और ऐसे समय में सौप सकती है जैसाकि उसके
एवं राज्य सरकार के मध्य सहमति हो;
(3) उपधारा (2) के अधीन लेखा परीक्षा संचालित करने वाले किसी व्यक्ति
अधिकार, प्राधिकार और विशेषाधिकार :-
के
(क) परीक्षक स्थानीय निधि लेखा के मामले में, वही होंगे जैसा कि उसके
पास स्थानीय प्राधिकरण के लेखाओं की लेखा परीक्षा के सम्बन्ध में हो;
(ख) महालेखाकार, उत्तर प्रदेश या भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक के
मामले में वही होंगे, जैसाकि उसके पास सरकारी लेखाओं की लेखा परीक्षा के
सम्बन्ध में हों; और
जाय;
(ग) किसी अन्य लेखा परीक्षक के मामले में वहीं होंगे जैसा कि विहित किया
(4) परिषद राज्य सरकार को वार्षिक रूप में या ऐसे समय में, जैसा कि उसके द्वारा
निदेशित किया जाय, लेखा परीक्षित लेखाओं की उस पर लेखा परीक्षक रिपोर्ट सहित
प्रतिलिपि प्रस्तुत करेगी;
28-राज्य सरकार वार्षिक रिपोर्ट और लेखा परीक्षक रिपोर्ट प्राप्त किये जाने के
पश्चात् राज्य विधान मण्डल, जब वह सत्र में हो, के प्रत्येक सदन के पटल पर यथाशक्य
शीघ्र उन्हें रखवायेगी।
9
आय-व्ययक
वार्षिक रिपोर्ट
लेखा और लेखा-
परीक्षा
राज्य विधान
मण्डल के समक्ष
रखी जाने वाली
वार्षिक रिपोर्ट तथा
लेखा परीक्षक
रिपोर्ट
अध्याय-छः
भूमि का अर्जन और निस्तारण
29 (1) यदि राज्य सरकार की राय में इस अधिनियम के अधीन विकास के
प्रयोजनार्थ या किसी अन्य प्रयोजनार्थ किसी भूमि का विकास हेतु अर्जन किया जाना अपेक्षित
हो तो राज्य सरकार भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और
पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 (अधिनियम संख्या 30 सन् 2013) के उपबन्धों के
अधीन ऐसी भूमि को अर्जित कर सकती है;
(2) जहाँ राज्य सरकार द्वारा कोई भूमि अर्जित की गई हो वहाँ वह उक्त भूमि का
कब्जा प्राप्त करने के पश्चात् उक्त भूमि, परिषद को ऐसे प्रयोजन के लिए अन्तरित कर सकती
है जिसके लिए उपधारा (1) में निर्दिष्ट अधिनियम के अधीन प्रदत्त प्रतिकर का, और अर्जन के
सम्बन्ध में राज्य सरकार द्वारा उपगत प्रभारों का, परिषद द्वारा, संदाय किये जाने पर उक्त
भूमि अर्जित की गई हो;
(3) राज्य सरकार द्वारा इस निमित्त प्रदान किये गये किन्हीं निर्देशों के अध्यधीन
राज्य सरकार द्वारा अर्जित की गई और परिषद को अन्तरित की गई भूमि, परिषद द्वारा राज्य
सरकार के स्वमित्वाधीन या नियंत्रणाधीन अभिकरण को ऐसी रीति से और ऐसी निबंधन एवं
शर्तों के अध्यधीन अन्तरित की जा सकती है जैसाकि वह इस अधिनियम के प्रयोजनार्थ उसके
द्वारा उचित समझे जाने वाले विकास का दायित्व ग्रहण करने या उसे क्रियान्वित करने के
पश्चात् नैमिषारण्य क्षेत्र के विकास को संरक्षित करने के लिए समीचीन समझे
।
अधिनियम के
प्रयोजनार्थ भूमि
अर्जित किया जाना
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10
प्रयोजन में परिवर्तन
किया जाना अनुज्ञात
नहीं है
अप्रयुक्त भूमि का वापस
किया जाना
विद्यमान विधियों के
अतिरिक्त किये जाने
वाले उपबन्ध
राज्य सरकार की
निदेश देने की शक्ति
परिषद / नियोजन
तथा विकास समिति को
प्राविधिक सहायता
दिया जाना
परिषद के अधिकारी
एवं कर्मचारी
प्रत्यायोजन
उत्तर प्रदेश असाधारण गजट, 13 दिसम्बर, 2022
30 ऐसे प्रयोजन या सम्बंधित प्रयोजनों, जिसके / जिनके लिये मूल रूप में भूमि
अर्जित की जानी अपेक्षित हो, में कोई परिवर्तन की अनुज्ञा, इसके सिवाय नहीं प्रदान की
जायेगी जैसा कि अधिनियम की धारा 29 की उपधारा (1) में यथाउपबन्धित रूप में निर्दिष्ट
हो।
31-जब इस अधिनियम के प्रयोजनार्थ अर्जित की गई भूमि अप्रयुक्त रहती है तो
• इसका निस्तारण अधिनियम की धारा 29 की उपधारा (1) में निर्दिष्ट उपबन्धों के अनुसार
किया जायेगा।
अध्याय-सात
प्रकीर्ण
32-इस अधिनियम के उपबन्ध किसी अन्य अधिनियम या तत्समय प्रवृत्त किसी
विधि के उपबन्धों के अतिरिक्त होंगे न कि उसके अल्पीकरण में होंगे।
33-राज्य सरकार समय-समय पर परिषद को ऐसे निर्देश दे सकती है जैसा
कि वह इस अधिनियम के दक्ष प्रशासनीकरण के लिए उपयुक्त समझे और परिषद ऐसे
निदेशों का अनुपालन करने के लिए बाध्य होगा।
34 (1) राज्य सरकार अपने किसी भी विभाग को यह निर्देश दे सकती है कि
वह ऐसी निबंधन एवं शत, जैसा कि पारस्परिक रूप में सहमति हो, पर परिषद को ऐसी
प्राविधिक सहायता उपबन्धित करे जैसा कि वह आवश्यक समझे;
(2) नियोजन तथा विकास समिति को अपने कृत्यों का सम्पादन करने के लिए
समर्थ बनाने की दृष्टि से परिषद, उपधारा (1) के अधीन अपने द्वारा प्राप्त की गई
प्राविधिक सहायता में से नियोजन तथा विकास समिति को ऐसी प्राविधिक सहायता
उपलब्ध करायेगी जैसा कि नियोजन तथा विकास समिति अपेक्षा करे।
35-(1) राज्य सरकार क्रमशः दो उपयुक्त व्यक्तियों को परिषद के अपर मुख्य
कार्यपालक अधिकारी और वित्त अधिकारी के रूप में नियुक्त कर सकती है जो ऐसी
शक्तियों का प्रयोग करेंगे और ऐसे कर्तव्यों का निर्वहन करेंगे जैसा कि विनियमावली द्वारा
विहित किया जाय या उन्हें परिषद अथवा मुख्य कार्यपालक अधिकारी द्वारा प्रत्यायोजित
किया जाय;
(2) ऐसे नियंत्रण और निर्बन्धनों के अध्यधीन, जैसा कि राज्य सरकार के
सामान्य या विशेष आदेश द्वारा अवधारित किया जाय परिषद इस निमित्त बनायी जाने
वाली किन्हीं नियमों के अध्यधीन ऐसे पद पर नियुक्तियाँ कर सकती है और इस प्रकार
नियुक्त किये गये व्यक्तियों के पदनामों एवं ग्रेडों का अवधारण कर सकती है जैसाकि इस
अधिनियम के अधीन कृत्यों का दक्षतापूर्वक निष्पादन करने के लिए आवश्यक हो;
(3) विधिक मामलों में परिषद को सलाह देने के लिये एक विधि सलाहकार
होगा जिसकी नियुक्ति राज्य सरकार के न्याय विभाग के परामर्श से की जायेगी;
(4) उपधारा (2) के अधीन नियुक्त अधिकारियों तथा कर्मचारियों की अर्हता, सेवा
की निबंधन एवं शर्तें तथा उनके कृत्य एवं कर्तव्य यथा विहित रूप में होंगे;
(5) परिषद के अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी, वित्त अधिकारी तथा अन्य
अधिकारी एवं कर्मचारी, राज्य सरकार के अनुमोदन से. न्यूनतम 03 वर्ष की अवधि और
अधिकतम 05 वर्ष की अवधि के लिए किसी विभाग से प्रतिनियुक्ति के आधार पर
प्रतिनियुक्त किये जायेंगे और वे परिषद की निधियों से वेतन तथा भत्तों के लिए हकदार
होंगे;
36-परिषद सामान्य या विशेष आदेश द्वारा यह निदेश दे सकती है कि किसी
कृत्य या शक्ति (योजना, और उसमें किये जाने वाले उपान्तरणों तथा परिवर्तनों को
अनुमोदित करने और विनियमावली बनाने की शक्ति से भिन्न) या उसके द्वारा इस
अधिनियम या तद्धीन बनायी गयी नियमावली के अधीन निष्पादित किये गये, प्रयुक्त किये
गये या निर्वहन किये गये कर्तव्य, ऐसी शर्तों, यदि कोई हों,जिन्हें ऐसे आदेश में विनिर्दिष्ट
किया जाय, का निष्पादन प्रयोग या निर्वहन ऐसे अधिकारी द्वारा भी किया जायेगा जैसा
कि उक्त आदेश में विनिर्दिष्ट किया जाय और जहाँ ऐसी शक्ति प्रत्यायोजित की जाय
वहाँ ऐसा अधिकारी, जिसे ऐसी शक्ति प्रत्यायोजित की जाय, उन शक्तियों का निष्पादन,
प्रयोग या निर्वहन करेगा।
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उत्तर प्रदेश असाधारण गजट, 13 दिसम्बर, 2022
37-इस निमित्त बनायी गयी किसी नियमावली के अध्यधीन परिषद द्वारा इस निमित्त
सामान्यतः या विशिष्टतः प्राधिकृत कोई व्यक्ति, किसी भूमि या परिसर में समस्त युक्तियुक्त
समयों पर प्रवेश कर सकता है और वहाँ पर ऐसी चीजें कर सकता है जो किसी कार्य को
विधिसम्मत रूप से करने के प्रयोजन के लिए या इस अधिनियम के अधीन परिषद द्वारा किसी
शक्ति का प्रयोग करने या किसी कृत्य का निष्पादन करने के लिए प्रारम्भिक या आनुषंगिक कोई
सर्वेक्षण, परीक्षण या जाँच करना आवश्यक होः
परन्तु यह कि ऐसा कोई व्यक्ति, किसी भवन या किसी परिवेष्ठित प्रांगण या किसी
निवास गृह से संलग्न उद्यान में प्रवेश, उसके अधिभोगी को ऐसा करने के अपनी आशय की
लिखित रूप में कम से कम तीन दिन पूर्व नोटिस दिये बिना, नहीं करेगा।
38-परिषद के अधिकारी और अन्य कर्मचारी, जब वे इस अधिनियम के किसी उपबन्ध
के अनुसरण में कार्य कर रहे हों या कार्य करना तात्पर्थित हों, भारतीय दण्ड संहित, 1860
(अधिनियम संख्या 45. सन् 1860) की धारा 31 के अर्थातर्गत लोक सेवक समझे जायेंगे।
39 इस अधिनियम के अधीन सद्भावनापूर्वक की गई या किये जाने हेतु आशयित
किसी बात के लिये परिषद, नियोजन तथा विकास समिति, उसके सदस्यों, अधिकारियों या
कर्मचारियों, जिनमें इस अधिनियम के अधीन किसी शक्ति का प्रयोग करने या किसी कृत्य का
निर्वहन करने के लिये उनके द्वारा प्राधिकृत कोई अन्य व्यक्ति सम्मिलित है, के विरुद्ध कोई वाद,
अभियोग या अन्य विधिक कार्यवाही नही होगी।
40-(1) राज्य सरकार इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए गजट
में अधिसूचना द्वारा नियमावली बना सकती है;
(2) पूर्ववर्ती शक्तियों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना ऐसी नियमावली में
निम्नलिखित समस्त या कोई विषय उपबंधित किये जा सकते हैं; अर्थात् :-
(क) धारा 3 की उपधारा (4) और धारा 6 की उपधारा (3) की अपेक्षानुसार
सदस्यों के पदों की निबंधन एवं शर्ते;
(ख) प्रारूप और रीति, जिसमें धारा 18 की उपधारा (1) और धारा 20
उपधारा (2) के अधीन नोटिस प्रकाशित की जायेगी;
जायेगी
की
(ग) रीति, जिसमें धारा 19 की उपधारा (1) के अधीन नोटिस प्रकाशित की
(घ) कोई अन्य मामला, जो विहित किया जाना हो या किया जा सकता है
अथवा जिसके सम्बन्ध में नियमावली द्वारा उपबन्ध किया जाना हो या किया जा सकता
हैं।
प्रवेश करने की
शक्ति
परिषद के
अधिकारी और
कर्मचारी लोक
सेवक होंगे
सद्भावनापूर्वक
कृत कार्यवाही
का संरक्षण
नियमावली
बनाने की
शक्ति
विनियम बनाने
41- (1) परिषद इस अधिनियम के उपबन्धों को कार्यान्वित करने के लिए राज्य सरकार
के पूर्व अनुमोदन से गजट में अधिसूचना द्वारा ऐसी विनियमावली बना सकती है जो इस की शक्ति
अधिनियम और तद्धीन बनायी गई नियमावली से असम्बद्ध न हो;
(2) विशिष्टतः और पूर्ववर्ती शक्तियों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना ऐसी
विनियमावली में निम्नलिखित कोई या समस्त मामले उपबंधित हो सकते हैं; अर्थात् -
(क) रीति, जिसमें और प्रयोजन, जिसके लिये परिषद धारा 17 के अधीन अपने
साथ किसी व्यक्ति को सहयोजित कर सकती है;
(ख) धारा 35 की उपधारा (4) के अधीन परिषद के अधिकारियों और कर्मचारियों
की सेवा की निबन्धन एवं शर्ते;
(ग) कोई अन्य मामला, जिसके सम्बन्ध में विनियमावली द्वारा उपबन्ध किया
जाना हो या किया जा सकता है।
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11
12
परिषद का
विघटन
कठिनाईया दूर
करने की शक्ति
उत्तर प्रदेश असाधारण गजट, 13 दिसम्बर, 2022
42-(1) जहाँ राज्य सरकार का यह समाधान हो जाय कि उन प्रयोजनों, जिनके
लिये इस अधिनियम के अधीन परिषद की स्थापना की गयी थी, को मौलिक रूप से प्राप्त
कर लिया गया है या परिषद अपने लक्ष्यों में विफल हो गयी है जिसके फलस्वरूप राज्य
सरकार की राय में परिषद का निरन्तर बना रहना अनावश्यक हो गया है, वहाँ राज्य सरकार
गजट में अधिसूचना द्वारा यह घोषणा कर सकती है कि परिषद को ऐसे दिनांक से विघटित
कर दिया जायेगा जैसा कि अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किया जाय, और परिषद तदनुसार
विघटित की गयी समझी जायेगी।
(2) उक्त दिनांक से-
(क) समस्त सम्पत्तियां, निधियां और देय, जो परिषद में निहित हैं या उसके
द्वारा वसूल किये जाने योग्य हैं, राज्य सरकार में निहित हो जायेंगी या उसके द्वारा
वसूल किये जाने योग्य होंगी;
(ख) समस्त देनदारियां, जो परिषद के सापेक्ष प्रवर्तनीय हैं, राज्य सरकार
सापेक्ष प्रवर्तनीय होंगी;
के
(ग) परिषद द्वारा पूर्णतः कार्यान्वित न किये गये कोई कार्य करने के लिये
और खण्ड (क) में निर्दिष्ट सम्पत्तियों, निधियों और देयों को वसूल करने के लिये
परिषद के कृत्यों का निर्वहन, राज्य सरकार द्वारा किया जायेगा।
(3) इस अधिनियम के उपबन्धों के अनुसार इस धारा की कोई बात राज्य सरकार
को परिषद का पुनर्गठन करने से रोकने के रूप में नहीं माना जायेगा।
43 (1) यदि इस अधिनियम के उपबन्धों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उत्पन्न
होती है तो राज्य सरकार ऐसी कठिनाइयों को दूर करने के लिए गजट में प्रकाशित आदेश
द्वारा यह निदेश दे सकती है कि इस अधिनियम के उपबन्ध, आदेश में विनिर्दिष्ट की जाने
वाली अवधि के दौरान उपान्तरण, परिवर्द्धन या चूक के माध्यम से ऐसे अनुकूलनों, जैसाकि
वह आवश्यक और समीचीन समझे, के अध्यधीन प्रभावी होंगे;
(2) इस अधिनियम के प्रारम्भ होने के दिनांक से दो वर्ष की अवधि की समाप्ति के
पश्चात् उपधारा (1) के अधीन कोई आदेश नहीं किया जायेगा;
(3). उपधारा (1) के अधीन किया गया प्रत्येक आदेश, किये जाने के पश्चात
यथाशीघ्र राज्य विधान मण्डल के प्रत्येक सदन के समक्ष रखा जायेगा।
उद्देश्य और कारण
नैमिषारण्य की समस्त प्रकार की सांस्कृतिक, पारिस्थितिकीय तथा स्थापत्य सम्बंधी विरासत की सौंदर्यपरक
गुणवत्ता को परिरक्षित करने, विकसित करने तथा अनुरक्षित करने की योजना तैयार करने तथा उसे क्रियान्वित करने और
क्षेत्र में एकीकृत पर्यटन विकास तथा विरासत संरक्षण एवं प्रबंधन हेतु संगत नीतियां विकसित करने, जिला सीतापुर हरदोई
के किसी विभाग/स्थानीय निकाय प्राधिकरण को नैमिषारण्य क्षेत्र के विरासतीय संसाधनों को प्रभावित करने वाली या
सम्भावित रूप में प्रभावित करने वाली किसी योजना, परियोजना या किसी विकासगत प्रस्ताव के सम्बंध में परामर्श एवं
मार्गदर्शन प्रदान करके श्री नैमिषारण्य धाम तीर्थ विकास परिषद का गठन करने की आवश्यकता का अनुभव किया गया है,
अतः श्री नैमिषारण्य धाम तीर्थ विकास परिषद की स्थापना का उपबंध करने के लिये एक विधि बनाये जाने का विनिश्चय
किया गया है।
तदनुसार उत्तर प्रदेश श्री नैमिषारण्य धाम तीर्थ विकास परिषद विधेयक, 2022 पुरः स्थापित किया जाता है।
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आज्ञा से,
अतुल श्रीवास्तव,
*प्रमुख सचिव ।
Open official source version ↗About this act
- Jurisdiction
- Uttar Pradesh
- Enactment date
- 2022-12-13
- Sections available
- 43
Read the sections
1Sort title, extent and commencement→2Definitions→3Constitution and incorporation of Shree Naimisharanya Dham Teerth Vikas Parishad→4The Executive Vice-Chairperson and The Chief Executive Officer→5The Executive Committee→6Composition of the Planning and Development Committee→7Power to co-opt→8Headquarters of the Parishad→9Meetings of the Parishad→10Meetings of the Planning and Development Committee→11Vacancies, etc. not to invalidate proceedings of the Parishad or the Planning and Development Committee→12Quorum of the meeting→13Power of the Parishad→14Functions of the Parishad→15Functions of the Planning and Development Committee→16Contents of the Plan→17Surveys and Studies→18Procedure to be followed for preparation of the Plan→19Date of the coming into operation of the Plan→20Modifications of the Plan→21Review and revision of the plan→22Preparation of the project plan, co-ordination and convergence→23Grants, Advances, loans by the government→24Constitution of the fund→25Budget→26Annual report→27Accounts and Audit→28Annual report and Auditor's report to be laid before the State legislature→29Acquisition of Land for purpose of the Act→30No change of purpose allowed→31Return of unutilized land→32Provisions to be in addition to existing laws→33Power of the State Government to give directions→34Technical Assistances to the Parishad/Planning and Development Committee→35Officers and employees of the Parishad→36Delegation→37Power of entry→38Officers and employees of the Parishad to be public servants→39Protection of action taken in good faith→40Power to make rules→41Power to make regulations→42Dissolution of the Parishad→43Power to remove difficulties→
India Code, Government of India. Text fetched 23 Oct 2026. Check the linked official text and subsequent notifications when applying a provision.