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2[गर्भधारण पूर्भ और प्रसर्पूर्भ निदाि-तकिीक
(ल िंग चयि प्रनतषेध)] अनधनियम, 1994
(1994 का अनधनियम सिंखयािंक 57)
[20 नसतम् बर, 1994]
1 [गर्भधारण स ेपूर्भ या उसके पश् चात ्ल िंग चयि के प्रनतषधे का और
आिरु्िंनिकी अप्रसामान् यताओं या मटेाबो ी नर्कारों या गणुसतू्री
अप्रसामान् यताओं या कनतपय जन् मजात नर्कृनतयों या
ल िंग-सह ग् ि नर्कारों का पता गाि ेके प्रयोजिों
के न ए प्रसर्परू्भ निदाि तकिीकों के नर्नियमि
का तथा ल िंग अर्धारण के न ए ऐसी तकिीकों
के, नजिके कारण स्त त्री-ल िंगी भ्रणूर्ध हो
सकता हो, दरुुपयोग के निर्ारण का
तथा उिस ेसिंबिंनधत या उिके
आिषुिंनगक नर्षयों का
उपबिंध करि ेके न ए
अनधनियम]
र्ारत गणराज् य के पैंता ीसर्ें र्षभ में सिंसद ्द्वारा निम् िन नित रूप में यह अनधनियनमत हो :––
अध् याय 1
प्रारिंनर्क
1. सिंनिप् त िाम, नर्स्त तार और प्रारम् र्––(1) इस अनधनियम का सिंनिप् त िाम 2[गर्भधारण पूर्भ और प्रसर्पूर्भ निदाि-तकिीक
(ल िंग चयि प्रनतषेध)] अनधनियम, 1994 ह ै।
(2) इसका नर्स्त तार 3*** सम् पूणभ र्ारत पर ह ै।
(3) यह उस तारीि को प्रर्ृत्त होगा जो केन् रीय सरकार, राजपत्र में अनधसूचिा द्वारा, नियत करे ।
2. पररर्ाषाएिं––इस अनधनियम में, जब तक कक सिंदर्भ से अन् यथा अपेनित ि हो,––
(क) “समुनचत प्रानधकारी” से धारा 17 के अधीि नियुक् त समुनचत प्रानधकारी अनर्प्रेत ह ै;
(ि) “बोर्भ” से धारा 7 के अधीि गरित केन् रीय पयभर्ेिण बोर्भ अनर्प्रेत ह ै;
4[(िक) “गर्भ उत् पाद” से गर्ाभधाि से जन् म होिे तक नर्कास के ककसी र्ी प्रक्रम पर गर्भधारण का कोई उत् पाद
अनर्प्रेत ह,ै नजसमें अनतररक् त भू्रण-निल् ी तथा भू्रण या गर्भ सनम् मन त ह ै;
(िि) “भ्रूण” से गर्ाभधाि के पश् चात् आि सप् ताह (छप् पि कदि) के अिंत तक कोई नर्कासोन् मुि मािर् जीर्
अनर्प्रेत ह ै;
(िग) “गर्भ’ से गर्ाभधाि या सृजि से अिुगामी सत्तार्िर्ें कदि से प्रारिंर् होकर (नजसमें कोई ऐसा समय अपर्र्जभत
करके नजसमें उसका नर्कास नि िंनबत रहा हो) और जन् म पर समाप् त होिे र्ा ी इसकी नर्कास की अर्नध के दौराि कोई
मािर् जीर् अनर्प्रेत ह ै;]
(ग) “आिुर्िंनिकी स ाह केन् र” से रोनगयों को आिुर्िंनिकी स ाह दिेे के न ए कोई सिंस्त था, अस्त पता , पररचयाभगृह
या कोई स्त थाि, चाह ेर्ह ककसी र्ी िाम से ज्ञात हो, अनर्प्रेत ह ै;
(घ) “आिुर्िंनिकी नक् निक” से अनर्प्रेत ह,ै कोई नक् निक, सिंस्त था, अस्त पता , पररचयाभगृह या कोई स्त थाि, चाह ेर्ह
ककसी र्ी िाम से ज्ञात हो, नजसका प्रसर्पूर्भ निदाि प्रकक्रयाएिं करिे के न ए उपयोग ककया जाता ह ै।
1 2003 के अनधनियम सिं० 14 की धारा 2 द्वारा प्रनतस्त थानपत ।
2 2003 के अनधनियम सिं० 14 की धारा 3 द्वारा प्रनतस्त थानपत ।
3 2019 के अनधनियम सिं० 34 की धारा 95 और पािंचर्ी अिुसूची द्वारा (31-10-2019 से) “जम्मू-कश्मीर राज्य के नसर्ाय” िब् दों का ोप ककया गया ।
4 2003 के अनधनियम सिं० 14 की धारा 4 द्वारा अिंत:स्त थानपत ।
2
1[स्त पष् टीकरण––इस ििंर् के प्रयोजिों के न ए, “आिुर्िंनिकी नक् निक” में कोई ऐसा याि सनम् मन त है नजसमें
अल् रासाउिंर् मिीि या इमेलजिंग मिीि या स्त कैिर अथर्ा ऐसे अन् य उपस्त कर का जो गर्भ के ल िंग का अर्धारण करिे में सिम
हो या ककसी ऐसे र्हिीय उपस्त कर का जो गर्ाभर्स्त था के दौराि ल िंग का पता गािे के न ए या गर्भधारण से पूर्भ ल िंग चयि
के न ए समि ह,ै उपयोग ककया जाता है ;]
(ङ) “आिुर्िंनिकी प्रयोगिा ा” से कोई प्रयोगिा ा अनर्प्रेत है और इसके अन् तगभत कोई ऐसा स्त थाि र्ी ह ैजहािं
आिुर्िंनिकी नक् निक से प्रसर्पूर्भ निदाि-परीिण के न ए प्राप् त िमूिों का नर्श् ेषण या परीिण करिे की सुनर्धाएिं
दी जाती ह ै।
1[स्त पष् टीकरण––इस ििंर् के प्रयोजिों के न ए “आिुर्िंनिकी प्रयोगिा ा” में कोई ऐसा स्त थाि सनम् मन त है, जहािं
अल् रासाउिंर् मिीि या इमेलजिंग मिीि या स्त कैिर अथर्ा ऐसे अन् य उपस्त कर का, जो गर्भ के ल िंग का अर्धारण करिे में सिम
ह ैया ककसी ऐसे र्हिीय उपस्त कर का जो गर्ाभर्स्त था के दौराि ल िंग का पता गािे या गर्भधारण से पूर्भ ल िंग चयि करिे में
समि ह,ै उपयोग ककया जाता है ; ]
(च) “स्त त्री रोग नर्िेषज्ञ” से ऐसा व् यनक् त अनर्प्रेत ह ै नजसके पास स्त त्री रोग नर्ज्ञाि और प्रसूनत नर्ज्ञाि में
स्त िातकोत्तर अहभता ह ै;
2[(छ) “नचककत् सा आिुर्िंनिकीनर्ज्ञ” में ऐसा व् यनक् त सनम् मन त ह ै नजसके पास ल िंग चयि और प्रसर्पूर्भ
निदाि-तकिीकों के िेत्रों में आिुर्िंनिकी नर्ज्ञाि में कोई उपानध या नर्प् ोमा ह ैया निम् िन नित अहभता अनर्प्राप् त करिे के
पश् चात् इिमें से ककसी िेत्र में कम से कम दो र्षभ का अिुर्र् ह ै:––
(i) र्ारतीय आयुर्र्भज्ञाि पररषद ्अनधनियम, 1956 (1956 का 102) के अधीि मान् यताप्राप् त नचककत् सा
अहभताओं में से कोई ; या
(ii) जैर्-नर्ज्ञाि में कोई स्त िातकोत्तर उपानध ;]
(ज) “बा नचककत् सक” से ऐसा व् यनक् त अनर्प्रेत ह ैनजसके पास बा नचककत् सा नर्ज्ञाि में स्त िातकोत्तर अहभता ह ै;
2[(ि) “प्रसर्पूर्भ निदाि प्रकक्रया” से अनर्प्रेत ह ैसर्ी स्त त्री रोग सिंबिंधी या प्रसूनत नर्ज्ञाि सिंबिंधी या नचककत् सा सिंबिंधी
प्रकक्रयाएिं, जैसे कक पराश्रव् य ेिि, भ्रूण दार्िभकी, गर्भधारण के पूर्भ या पश् चात् ल िंग चयि के न ए, ककसी प्रकार के ककसी
नर्श् ेषण या प्रसर्पूर्भ निदाि परीिण के न ए, ककसी पुरुष या स्त त्री के, उल् र्-तर , जरायु अिंकुररका, भ्रूण, रक् त या ककसी
अन् य रटिू या तर का ककसी आिुर्िंनिकी प्रयोगिा ा या आिुर्िंनिकी नक् निक में रे्जिे के न ए िमूिा ेिा या निका िा ;]
(ञ) “प्रसर्पूर्भ निदाि-तकिीक” के अन् तगभत सर्ी प्रसर्पूर्भ निदाि प्रकक्रयाएिं और प्रसर्पूर्भ निदाि परीिण हैं ;
2[(ट) “प्रसर्पूर्भ निदाि परीिण” से ककसी गर्भर्ती स्त त्री या गर्भ उत् पाद के आिुर्िंनिकी या मेटाबो ी नर्कारों या
गुणसूत्री अप्रसामान् यताओं या जन् मजात असिंगनतयों या हीमोग् ोनबि नर्कृनतयों या ल िंग सह ग् ि रोगों का पता गािे के
न ए ककया गया पराश्रव् य ेिि या उसके उल् र्-तर , जरायु अिंकुररका, रक् त या ककसी रटिू या तर का कोई परीिण या
नर्श् ेषण अनर्प्रेत है ;]
(ि) “नर्नहत” से इस अनधनियम के अधीि बिाए गए नियमों द्वारा नर्नहत अनर्प्रेत ह ै;
(र्) “रनजस्त रीकृत नचककत् सा व् यर्सायी” से ऐसा नचककत् सा व् यर्सायी अनर्प्रेत ह,ै नजसके पास र्ारतीय आयुर्र्भज्ञाि
पररषद ्अनधनियम, 1956 (1956 का 102) की धारा 2 के ििंर् (ज) में पररर्ानषत कोई मान् यताप्राप् त नचककत् सा अहभता ह ैऔर
नजसका िाम राज् य नचककत् सा रनजस्त टर में प्रनर्ष् ट ह ै;
(ढ) “नर्नियम” से इस अनधनियम के अधीि बोर्भ द्वारा नर्रनचत नर्नियम अनर्प्रेत ह ै;
1[(ण) “ल िंग चयि” के अिंतगभत इस बात को सुनिनश् चत करिे या उसकी सिंर्ाव् यता को र्र्धभत करिे के प्रयोजि के
न ए कक भू्रण ककसी नर्निष् ट ल िंग का होगा कोई प्रकक्रया, तकिीक, परीिण या कोई प्रयोग या िुस्त िा या व् यर्स्त था ह ै;
(त) “सोिो ोनजस्त ट या नचत्रण नर्िेषज्ञ” से कोई ऐसा व् यनक् त अनर्प्रेत ह ैनजसके पास र्ारतीय आयरु्र्भज्ञाि पररषद ्
अनधनियम, 1956 (1956 का 102) के अधीि मान् यताप्राप् त कोई नचककत् सा अहभता है या नजसके पास पराश्रव् य ेिि या
इमेलजिंग तकिीकों या नर्ककरण नर्ज्ञाि में कोई स्त िातकोत्तर अहभता ह ै;
(थ) “राज् य बोर्भ” से धारा 16क के अधीि गरित कोई राज् य पयभर्ेिण बोर्भ या कोई सिंघ राज् यिेत्र पयभर्ेिण बोर्भ
अनर्प्रेत ह ै;
(द) नर्धाि-मिंर् र्ा े सिंघ राज् यिेत्र के सिंबिंध में “राज् य सरकार” से सिंनर्धाि के अिुच् छेद 239 के अधीि राष् रपनत
द्वारा नियुक् त उस सिंघ राज् यिेत्र का प्रिासक अनर्प्रेत ह ै।]
1 2003 के अनधनियम सिं० 14 की धारा 4 द्वारा अिंत:स्त थानपत ।
2 2003 के अनधनियम सिं० 14 की धारा 4 द्वारा प्रनतस्त थानपत ।
3
अध् याय 2
आिरु्िंनिकी स ाह केन् रों, आिरु्िंनिकी प्रयोगिा ाओं और आिरु्िंनिकी नक् निकों का नर्नियमि
3. आिरु्िंनिकी स ाह केन् रों, आिरु्िंनिकी प्रयोगिा ाओं और आिरु्िंनिकी नक् निकों का नर्नियमि––इस अनधनियम के
प्रारिंर् से ही,––
(1) कोई र्ी आिुर्िंनिकी स ाह केन् र, आिुर्िंनिकी प्रयोगिा ा या आिुर्िंनिकी नक् निक जब तक कक र्ह इस
अनधनियम के अधीि रनजस्त रीकृत ि हो, प्रसर्पूर्भ निदाि-तकिीकों से सिंबिंनधत कोई कक्रयाक ाप िहीं करेगा या ऐसे
कक्रयाक ापों के ककए जािे में सहबद्ध या सहायक िहीं होगा ।
1[(2) कोई र्ी आिुर्िंनिकी स ाह केन् र या आिुर्िंनिकी प्रयोगिा ा या आिुर्िंनिकी नक् निक ककसी ऐसे व् यनक् त को
नजसके पास ऐसी अहभताएिं, जो नर्नहत की जाएिं, िहीं हैं, मािाथभ या सिंदाय पर नियोनजत िहीं करेगा या नियोनजत िहीं
कराएगा या उसकी सेर्ाएिं िहीं ेगा ।]
(3) कोई र्ी नचककत् सा आिुर्िंनिकीनर्ज्ञ, स्त त्री रोग नर्िेषज्ञ, बा नचककत् सक, रनजस्त रीकृत नचककत् सा व् यर्सायी या
कोई अन् य व् यनक् त, इस अनधनियम के अधीि रनजस्त रीकृत स्त थाि से नर्न् ि ककसी स्त थाि पर कोई प्रसर्पूर्भ निदाि-तकिीक
प्रकक्रया स्त र्यिं या ककसी अन् य व् यनक् त के माध् यम से उपयोग िहीं करेगा या िहीं कराएगा या उसके उपयोग में सहायता िहीं
करेगा ।
2[3क. ल िंग चयि पर प्रनतषेध––कोई व् यनक् त, नजसमें बिंध् यता के िेत्र में कोई नर्िेषज्ञ या नर्िेषज्ञों का द सनम् मन त ह,ै
ककसी स्त त्री या ककसी पुरुष या दोिों पर अथर्ा उिमें स ेककसी स ेया दोिों से न ए गए ककसी रटिू, भ्रूण गर्भ उत् पाद, तर या गेमीट पर
स्त र्यिं ल िंग चयि िहीं करेगा या ककसी अन् य व् यनक् त से िहीं कराएगा अथर्ा ऐसा करिे में स्त र्यिं सहायता िहीं करेगा या ककसी अन् य
व् यनक् त से सहायता िहीं ेगा ।
3ि. ऐसे व् यनक् तयों, प्रयोगिा ाओं, नक् निकों, आकद को, जो अनधनियम के अधीि रनजस्त रीकृत िहीं हैं, पराश्रव् य मिीि के
नर्क्रय पर प्रनतषेध––कोई व् यनक् त ऐसे ककसी आिुर्िंनिकी स ाह केन् र, आिुर्िंनिकी प्रयोगिा ा, आिुर्िंनिकी नक् निक या ककसी अन् य
व् यनक् त को जो अनधनियम के अधीि रनजस्त रीकृत िहीं ह,ै पराश्रव् य मिीि, इमेलजिंग मिीि या स्त कैिर या भ्रूण के ल िंग का पता गािे के
न ए सिम ककसी अन् य उपस्त कर का नर्क्रय िहीं करेगा ।]
अध् याय 3
प्रसर्परू्भ निदाि तकिीकों का नर्नियमि
4. प्रसर्पूर्भ निदाि-तकिीकों का नर्नियमि––इस अनधनियम के प्रारिंर् से ही,––
(1) ऐसे ककसी र्ी स्त थाि का, नजसके अन् तगभत रनजस्त रीकृत आिुर्िंनिकी स ाह केन् र या आिुर्िंनिकी प्रयोगिा ा या
आिुर्िंनिकी नक् निक ह,ै ककसी व् यनक् त द्वारा, ििंर् (2) में नर्निर्दभष् ट प्रयोजिों और ििंर् (3) में नर्निर्दभष् ट ककन् हीं बातों को पूरा
करिे के पश् चात् के नसर्ाय, प्रसर्पूर्भ निदाि-तकिीक प्रकक्रया करिे के न ए उपयोग िहीं ककया जाएगा अथर्ा उपयोग िहीं
कराया जाएगा ।
(2) कोई र्ी प्रसर्पूर्भ निदाि-तकिीक का निम् िन नित अप्रसामान् यताओं में से ककसी का पता गािे के प्रयोजिों के
नसर्ाय, उपयोग िहीं ककया जाएगा :––
(i) गुणसूत्री अप्रसामान् यताएिं ;
(ii) आिुर्िंनिकी मेटाबो ी रोग ;
(iii) हीमोग् ोनबि नर्कृनतयािं ;
(iv) ल िंग सह ग् ि आिुर्िंनिकी रोग ;
(v) जन् मजात असिंगनतयािं ;
(vi) ऐसी कोई अप्रसामान् यताएिं या रोग जो केन् रीय पयभर्ेिण बोर्भ द्वारा नर्निर्दभष् ट ककए जाएिं ।
3[(3) ककसी र्ी प्रसर्पूर्भ निदाि-तकिीक का उपयोग या पररचा ि तर्ी ककया जाएगा जब ऐसा करिे के न ए अर्हभत व् यनक् त
का उि कारणों से जो ेिबद्ध ककए जाएिंगे, यह समाधाि हो जाता ह ैकक निम् िन नित ककसी ितभ की पूर्तभ हो गई है, अथाभत् :––
(i) गर्भर्ती स्त त्री की आयु पैंतीस र्षभ से अनधक ह ै;
1 2003 के अनधनियम सिं० 14 की धारा 5 द्वारा प्रनतस्त थानपत ।
2 2003 के अनधनियम सिं० 14 की धारा 6 द्वारा अिंत:स्त थानपत ।
3 2003 के अनधनियम सिं० 14 की धारा 7 द्वारा प्रनतस्त थानपत ।
4
(ii) गर्भर्ती स्त त्री के दो या दो से अनधक स्त र्त: गर्भपात हुए हैं या भू्रण हानि हुई ह ै;
(iii) गर्भर्ती स्त त्री, नर्र्र् नर्रुपजिकों, जैसे कक ओषनधयों, नर्ककरणों, सिंक्रमण या रसायिों से प्रर्ानर्त हुई ह ै;
(iv) गर्भर्ती स्त त्री या उसके पनत के कुटुम् ब में मािनसक मिंदता या िारीररक नर्रूनपता जैसे कक सिंस्त तम् र्ता या ककसी
अन् य आिुर्िंनिकी रोग का पररर्ार र्ृत ह ै;
(v) कोई अन् य ितभ जो बोर्भ द्वारा नर्निर्दभष् ट की जाए :
परिंतु ककसी गर्भर्ती स्त त्री पर पराश्रव् य ेिि करिे र्ा ा व् यनक् त नक् निक में ऐसी रीनत में जो नर्नहत की जाए, उसका पूरा
अनर् ेि रिेगा और उसमें पाई गई कोई कमी या अिुनद्ध या धारा 5 या धारा 6 के उपबिंधों का उल् िंघि मािी जाएगी जब तक कक
ऐसा पराश्रव् य ेिि करिे र्ा ा व् यनक् त उसके नर्परीत सानबत िहीं कर दतेा ह ै।
(4) कोई व् यनक् त नजसमें गर्भर्ती स्त त्री का िातेदार या पनत सनम् मन त ह,ै ििंर् (2) में नर्निर्दभष् ट प्रयोजिों के नसर्ाय, उस पर
ककसी प्रसर्पूर्भ निदाि-तकिीक का उपयोग िहीं कराएगा या उसे प्रोत् सानहत िहीं करेगा ।
(5) कोई व् यनक् त नजसमें ककसी स्त त्री का कोई िातेदार या पनत सनम् मन त ह,ै उस स्त त्री पर या उसके िातेदार या पनत पर या
दोिों पर ककसी ल िंग चयि करिे र्ा ी तकिीक का प्रयोग िहीं कराएगा या करािे के न ए उन् हें प्रोत् सानहत िहीं करेगा ।]
5. गर्भर्ती स्त त्री की न नित सहमनत और भ्रणू के ल िंग की सिंसचूिा का प्रनतषेध––(1) धारा 3 के ििंर् (2) में निर्दभष् ट कोई र्ी
व् यनक् त, प्रसर्पूर्भ-निदाि प्रकक्रयाओं का उपयोग तब करेगा जब––
(क) उसिे सिंबिंनधत गर्भर्ती स्त त्री को ऐसी प्रकक्रयाओं के सर्ी ज्ञात अिुषिंगी प्रर्ार्ों और अिुर्ती प्रर्ार्ों को स्त पष् ट
कर कदया हो ;
(ि) उसिे ऐसी प्रकक्रयाएिं करािे की उसकी न नित सहमनत ऐसी र्ाषा में, जो र्ह समिती है ; नर्नहत प्ररूप में
प्राप् त कर ी हो ;
(ग) ििंर् (ि) के अधीि प्राप् त उसकी न नित सहमनत की प्रनत गर्भर्ती स्त त्री को द ेदी हो ।
1[(2) कोई व् यनक् त, नजसमें प्रसर्पूर्भ निदाि-प्रकक्रया करिे र्ा ा व् यनक् त सम् म् न न त ह,ै सिंबिंनधत गर्भर्ती स्त त्री या उसके
िातेदारों या ककसी अन् य व् यनक् त को िब् दों, सिंकेतों द्वारा या ककसी अन् य रीनत से भू्रण का ल िंग सिंसूनचत िहीं करेगा ।]
6. ल िंग अर्धारण का प्रनतषेध––इस अनधनियम के प्रारिंर् से ही,––
(क) कोई र्ी आिुर्िंनिकी स ाह केन् र या आिुर्िंनिकी प्रयोगिा ा या आिुर्िंनिकी नक् निक ककसी प्रसर्पूर्भ
निदाि-तकिीक का, नजसके अन् तगभत भ्रूण के ल िंग का अर्धारण करिे के प्रयोजि के न ए पराश्रव् य ेिि ह,ै अपिे केन् र,
प्रयोगिा ा या नक् निक में उपयोग िहीं करेगा या िहीं कराएगा ;
(ि) कोई र्ी व् यनक् त, ककसी भ्रूण के ल िंग का अर्धारण करिे के प्रयोजि के न ए ककसी प्रसर्पूर्भ निदाि-तकिीक
का, नजसके अन् तगभत पराश्रव् य ेिि ह,ै उपयोग िहीं करेगा या िहीं कराएगा ;
2[(ग) कोई र्ी व् यनक् त, गर्भ धारण से पूर्भ या उसके पश् चात् ल िंग का चयि ककसी र्ी ढिंग से काररत िहीं करेगा या
काररत करर्ािे के न ए अिुज्ञात िहीं करेगा ।]
अध् याय 4
केन् रीय पयभर्िेण बोर्भ
7. केन् रीय पयभर्िेण बोर्भ का गिि––(1) केन् रीय सरकार, इस अनधनियम के अधीि बोर्भ को प्रदत्त िनक् तयों का प्रयोग और
कृत् यों का पा ि करिे के न ए एक बोर्भ का, जो केन् रीय पयभर्ेिण बोर्भ के िाम से ज्ञात होगा, गिि करेगी ।
(2) बोर्भ निम् िन नित से नम कर बिेगा, अथाभत् :––
(क) पररर्ार कल् याण मिंत्रा य या नर्र्ाग का र्ारसाधक मिंत्री, जो पदिे अध् यि होगा ;
(ि) र्ारत सरकार का सनचर् जो पररर्ार कल् याण नर्र्ाग का र्ारसाधक ह,ै पदिे उपाध् यि होगा ;
3[(ग) कें रीय सरकार द्वारा मनह ा और बा नर्कास, नर्नध और न् याय मिंत्रा य के नर्नध कायभ नर्र्ाग या नर्धायी
नर्र्ाग तथा आयुर्र्भज्ञाि और होम् योपैथी की र्ारतीय पद्धनत के र्ारसाधक केन् रीय सरकार के मिंत्रा यों का प्रनतनिनधत् र्
करिे के न ए, नियुक् त ककए गए तीि पदिे सदस्त य ;]
1 2003 के अनधनियम सिं० 14 की धारा 7 द्वारा प्रनतस्त थानपत ।
2 2003 के अनधनियम सिं० 14 की धारा 9 द्वारा अिंत:स्त थानपत ।
3 2003 के अनधनियम सिं० 14 की धारा 10 द्वारा प्रनतस्त थानपत ।
5
(घ) केन् रीय सरकार का स्त र्ास्त थ सेर्ा महानिदिेक, पदिे ;
(ङ) दस सदस्त य, जो निम् िन नित में से दो-दो केन् रीय सरकार द्वारा नियुक् त ककए जाएिंगे––
(i) नर्ख यात नचककत् सा आिुर्िंनिकीनर्ज्ञ ;
1[(ii) नर्ख यात स्त त्री रोग नर्ज्ञािी और प्रसूनतरोग नर्ज्ञािी या स्त त्री रोग या प्रसूनत तिंत्र का नर्िेषज्ञ ;]
(iii) नर्ख यात बा नचककत् सा नर्ज्ञािी ;
(iv) नर्ख यात समाज नर्ज्ञािी ; और
(v) मनह ा कल् याण सिंगििों के प्रनतनिनध ;
(च) तीि मनह ा सिंसद ्सदस्त य, नजिमें से दो ोक सर्ा द्वारा और एक राज् य सर्ा द्वारा निर्ाभनचत की जाएिंगी ;
(छ) चार-सदस्त य, जो राज् यों और सिंघ राज् यिेत्रों का प्रनतनिनधत् र् करिे के न ए दो र्णाभिुक्रम में और दो उ टे
र्णाभिुक्रम में केन् रीय सरकार द्वारा चक्रािुक्रम से नियुक् त ककए जाएिंगे :
परन् तु इस ििंर् के अधीि कोई नियुनक् त, यथानस्त थनत, राज् य सरकार या सिंघ राज् यिेत्र की सरकार की नसफाररि पर
ही की जाएगी, अन् यथा िहीं ;
(ज) केन् रीय सरकार के सिंयुक् त सनचर् की पिंनक् त से अनिम् ि पिंनक् त का या उसके समतुल् य पिंनक् त का अनधकारी, जो
पररर्ा कल् याण का र्ारसाधक है, पदिे सदस्त य-सनचर् होगा ।
8. सदस्त यों की पदार्नध––(1) पदिे सदस्त य से नर्न् ि सदस्त य की पदार्नध,––
(क) धारा 7 की उपधारा (2) के ििंर् (ङ) या ििंर् (च) के अधीि नियुनक् त की दिा में, तीि र्षभ होगी ; 2* * *
3[परिंतु धारा 7 की उपधारा (2) के ििंर् (च) के अधीि निर्ाभनचत सदस्त य की पदार्नध, जैसे ही र्ह सदस्त य, मिंत्री या
राज् य मिंत्री या उप मिंत्री अथर्ा ोक सर्ा की अध् यि या उपाध् यि अथर्ा राज् य सर्ा की उप सर्ापनत हो जाती ह ैअथर्ा
उस सदि की सदस्त य िहीं रह जाती ह,ै नजससे र्ह निर्ाभनचत की गई थी, समाप् त हो जाएगी ; और]
(ि) उक् त उपधारा के ििंर् (छ) के अधीि नियुनक् त की दिा में, एक र्षभ होगी ।
(2) यकद ककसी अन् य सदस्त य के पद में कोई आकनस्त मक ररनक् त, चाह े र्ह उसकी मृत् यु, पदत् याग या रुग् णता अथर्ा अन् य
असमथभता के कारण अपिे कृत् यों के निर्हभि में अयोग् यता के कारण होती ह ैतो ऐसी ररनक् त, केन् रीय सरकार द्वारा िए नसरे से नियुनक् त
करके र्री जाएगी और इस प्रकार नियुक् त सदस्त य, उस व् यनक् त की, नजसके स्त थाि पर उसे ऐसे नियुक् त ककया गया ह,ै िेष पदार्नध के
न ए, पद धारण करेगा ।
(3) उपाध् यि ऐसे कृत् यों का पा ि करेगा जो, समय-समय पर, अध् यि द्वारा उसे सौंपे जाएिं ।
(4) सदस्त यों द्वारा अपिे कृत् यों के निर्भहि में अिुसरण की जािे र्ा ी प्रकक्रया र्ह होगी, जो नर्नहत की जाए ।
9. बोर्भ के अनधर्िेि––(1) बोर्भ का अनधरे्िि ऐसे समय और स्त थाि पर होगा और र्ह अपिे अनधर्ेििों में कारबार के
सिंव् यर्हार के बारे में (नजसके अन् तगभत ऐसे अनधरे्ििों में गणपूर्तभ ह)ै प्रकक्रया के ऐसे नियमों का पा ि करेगा जो नर्नियमों द्वारा
उपबिंनधत ककए जाएिं :
परन् तु बोर्भ का अनधरे्िि छह माह में कम से कम एक बार होगा ।
(2) अध् यि और उसकी अिुपनस्त थनत में उपाध् यि बोर्भ के अनधरे्ििों की अध् यिता करेगा ।
(3) यकद ककसी कारणर्ि अध् यि या उपाध् यि बोर्भ के ककसी अनधरे्िि में उपनस्त थत होिे में असमथभ ह ै तो अनधरे्िि में
उपनस्त थत सदस्त यों द्वारा चुिा गया कोई अन् य सदस्त य अनधरे्िि की अध् यिता करेगा ।
(4) ऐसे सर्ी प्रश् ि जो बोर्भ के ककसी अनधरे्िि के समि आएिं, उपनस्त थत और मतदाि करिे र्ा े सदस्त यों के बहुमत द्वारा
नर्निनश् चत ककए जाएिंगे और मत बराबर होिे की नस्त थनत में, अध् यि या उसकी अिुपनस्त थनत में पीिासीि व् यनक् त का नद्वतीय या निणाभयक
मत होगा और र्ह उसका प्रयोग करेगा ।
(5) पदिे सदस्त यों से नर्न् ि सदस्त य बोर्भ से, ऐसे र्ते्त, यकद कोई हों, प्राप् त करेंगे, जो नर्नहत ककए जाएिं ।
10. ररनक् तयों, आकद से बोर्भ की कायभर्ानहयों का अनर्नधमान् य ि होिा––बोर्भ का कोई कायभ या कायभर्ाही, केर् इस कारण
अनर्नधमान् य िहीं होगी कक,––
1 2003 के अनधनियम सिं० 14 की धारा 10 द्वारा अिंत:स्त थानपत ।
2 2001 के अनधनियम सिं० 32 की धारा 2 द्वारा ोप ककया गया ।
3 2001 के अनधनियम सिं० 32 की धारा 2 द्वारा अिंत:स्त थानपत ।
6
(क) बोर्भ में कोई ररनक् त ह ैया उसके गिि में कोई त्रुरट है ; या
(ि) बोर्भ के सदस्त य के रूप में कायभ करिे र्ा े ककसी व् यनक् त की नियुनक् त में कोई त्रुरट है ; या
(ग) बोर्भ की प्रकक्रया में कोई ऐसी अनियनमतता ह,ै जो माम े के गुणागुण पर प्रर्ार् िहीं र्ा ती ह ै।
11. नर्निष् ट प्रयोजिों के न ए बोर्भ के साथ व् यनक् तयों का अस्त थायी सहयोजि––(1) बोर्भ अपिे साथ ऐसी रीनत स ेऔर ऐस े
प्रयोजिों के न ए जो नर्नियमों द्वारा अर्धाररत ककए जाएिं, ककसी ऐसे व् यनक् त को सहयोनजत कर सकेगा नजसकी सहायता या स ाह
की र्ह इस अनधनियम के ककसी उपबन् ध को कायाभनन् र्त करिे के न ए र्ािंछा करे ।
(2) उपधारा (1) के अधीि ककसी प्रयोजि के न ए, बोर्भ द्वारा अपिे साथ सहयोनजत व् यनक् त को उस प्रयोजि से सुसिंगत चचाभ
में र्ाग ेिे का अनधकार होगा ककन् तु उसे बोर्भ के अनधरे्िि में मत दिेे का अनधकार िहीं होगा और र्ह ककसी अन् य प्रयोजि के न ए
सदस्त य िहीं होगा ।
12. बोर्भ के अनधकाररयों और अन् य कमभचाररयों की नियनुक् त––(1) इस अनधनियम के अधीि अपिे कृत् यों के दिातापूणभ
निर्भहि में बोर्भ को समथभ बिािे के प्रयोजि के न ए बोर्भ, ऐसे नर्नियमों के अधीि रहते हुए, जो इस निनमत्त बिाए जाएिं, उति े
अनधकाररयों या अन् य कमभचाररयों को (चाह ेप्रनतनियुनक् त पर या अन् यथा) नियुक् त कर सकेगा, नजतिे र्ह आर्श् यक समिे :
परन् तु अनधकाररयों के ऐसे प्रर्गभ की नियुनक् त, नजन् हें ऐसे नर्नियमों में नर्निर्दभष् ट ककया जाए, केन् रीय सरकार के अिुमोदि से
की जाएगी ।
(2) बोर्भ द्वारा नियुक् त प्रत् येक अनधकारी या अन् य कमभचारी, सेर्ा की ऐसी ितों के अधीि होगा और ऐसे पाररश्रनमक का
हकदार होगा, जो नर्नियमों में नर्निकदष् ट ककया जाए ।
13. बोर्भ के आदिेों और अन् य न ितों का अनधप्रमाणि––बोर्भ के सर्ी आदिे और नर्निश् चय अध् यि के या इस निनमत्त बोर्भ
द्वारा प्रानधकृत ककसी अन् य सदस्त य के हस्त तािर से अनधप्रमानणत ककए जाएिंगे और बोर्भ द्वारा जारी की गई सर्ी अन् य न ितें, बोर्भ के
सदस्त य-सनचर्, या र्ैसी ही रीनत से इस निनमत्त प्रानधकृत बोर्भ के ककसी अन् य अनधकारी के हस्त तािर से अनधप्रमानणत की जाएिंगी ।
14. सदस्त य के रूप के नियनुक् त के न ए निरहभताएिं––कोई व् यनक् त सदस्त य के रूप में नियुनक् त के न ए निरर्हभत होगा, यकद र्ह––
(क) ककसी ऐसे अपराध के न ए दोषनसद्ध िहराया गया है और कारार्ास से दिंर्ाकदष् ट ककया गया ह,ै नजसमें,
केन् रीय सरकार की राय में, िैनतक अधमता अन् तर्भन त ह ै; या
(ि) अिुन् मोनचत कदर्ान या ह ै; या
(ग) नर्कृतनचत्त का ह,ै और उसे सिम न् याया य द्वारा ऐसा घोनषत कर कदया गया ह ै; या
(घ) सरकार की या सरकार के स्त र्ानमत् र् या नियिंत्रण में के ककसी निगम की सेर्ा से हटा कदया गया ह ैया पदच् युत
कर कदया गया ह ै; या
(ङ) केन् रीय सरकार की राय में बोर्भ में ऐसा नर्त्तीय या अन् य नहत रिता ह ैनजसके कारण उसके द्वारा सदस्त य के रूप
में अपिे कृत् यों के निर्भहि पर प्रनतकू प्रर्ार् पड़िे की सिंर्ार्िा ह ै; या
1[(च) कें रीय सरकार की राय में, ल िंग के अर्धारण के न ए प्रसर्पूर्भ निदाि-तकिीक के उपयोग या उन् ियि में या
ककसी ल िंग चयि तकिीक में सहयुक् त रहा ह ै।]
15. पिु: नियनुक् त के न ए सदस्त य की पात्रता––सेर्ा के ऐसे अन् य निबिंधिों और ितों के अधीि रहते हुए जो नर्नहत की जाएिं,
कोई व् यनक् त जो सदस्त य िहीं रह जाता ह,ै ऐसे सदस्त य के रूप में पुि: नियुनक् त के न ए पात्र होगा :
2[परिंतु पदिे सदस्त य से नर्न् ि कोई सदस्त य गातार दो अर्नधयों से अनधक के न ए नियुक् त िहीं ककया जाएगा ।]
1[16. बोर्भ के कृत् य––बोर्भ के निम् िन नित कृत् य होंगे, अथाभत् :––
(i) प्रसर्पूर्भ निदाि-तकिीकों, ल िंग चयि तकिीकों के उपयोग और उिके दरुुपयोग के नर्रुद्ध िीनत-नर्षयक
माम ों पर कें रीय सरकार को स ाह दिेा ;
(ii) अनधनियम और उसके अधीि बिाए गए नियमों के कायाभन् र्यि का पुिर्र्भ ोकि करिा और उन् हें मािीटर
करिा तथा कें रीय सरकार को उक् त अनधनियम और नियमों में पररर्तभि करिे के न ए नसफाररि करिा ;
(iii) गर्भधारण पूर्भ ल िंग चयि और गर्भ के ल िंग का प्रसर्पूर्भ अर्धारण करिे की प्रथा के नर्रुद्ध, नजसके कारण स्त त्री
ल िंगी भ्रूण र्ध हो, ोक जागृनत पैदा करिा ;
1 2003 के अनधनियम सिं० 14 की धारा 11 द्वारा प्रनतस्त थानपत ।
2 2003 के अनधनियम सिं० 14 की धारा 12 द्वारा अिंत:स्त थानपत ।
7
(iv) आिुर्िंनिकी स ाह केन् रों, आिुर्िंनिकी प्रयोगिा ाओं और आिुर्िंनिकी नक् निकों में कायभरत व् यनक् तयों द्वारा
अिुपा ि की जािे र्ा ी आचार सिंनहता अनधकनथत करिा ;
(v) अनधनियम के अधीि गरित नर्नर्न् ि निकायों के कायभपा ि का निरीिण करिा और उसके समुनचत और
प्रर्ार्ी कक्रयान् र्यि को सुनिनश् चत करिे के न ए समुनचत कदम उिािा ;
(vi) कोई अन् य कृत् य जो अनधनियम के अधीि नर्नहत ककए जाएिं ।]
1[16क. राज् य पयभर्िेण बोर्भ और सिंघ राज् यिते्र पयभर्िेण बोर्भ का गिि––(1) नर्धाि-मिंर् र्ा ा प्रत् येक राज् य और सिंघ
राज् यिेत्र, यथानस्त थनत, राज् य पयभर्ेिण बोर्भ या सिंघ राज् यिेत्र पयभर्ेिण बोर्भ के िाम से ज्ञात एक बोर्भ का गिि करेगा नजसके
निम् िन नित कृत् य होंगे :––
(i) राज् य में गर्भधारणपूर्भ ल िंग चयि और गर्भ के ल िंग का प्रसर्पूर्भ अर्धारण करिे की प्रथा के नर्रुद्ध, नजसके
कारण स्त त्रील िंगी भू्रणर्ध हो, ोक जागृनत पैदा करिा ;
(ii) राज् य में कायभरत समुनचत प्रानधकाररयों के कक्रयाक ापों का पुिर्र्भ ोकि करिा और उिके नर्रुद्ध समुनचत
कारभर्ाई की नसफाररि करिा ;
(iii) अनधनियम और नियमों के उपबिंधों के कायाभन् र्यि को मािीटर करिा और उिके सिंबिंध में बोर्भ को उपयुक् त
नसफाररिें करिा ;
(iv) अनधनियम के अधीि राज् य में ककए गए नर्नर्न् ि कक्रयाक ापों की बाबत बोर्भ और केन् रीय सरकार को ऐसी
समेककत ररपोटें र्ेजिा, जो नर्नहत की जाएिं ; और
(v) ऐसे अन् य कृत् य, जो अनधनियम के अधीि नर्नहत ककए जाएिं ।
(2) राज् य बोर्भ निम् िन नित से नम कर बिेगा :––
(क) राज् य में स्त र्ास्त ् य और पररर्ार कल् याण का र्ारसाधक मिंत्री, जो पदिे अध् यि होगा ;
(ि) स्त र्ास्त ् य और पररर्ार कल् याण नर्र्ाग का र्ारसाधक सनचर्, जो पदिे उपाध् यि होगा ;
(ग) मनह ा और बा नर्कास, समाज कल् याण, नर्नध और आयुर्र्भज्ञाि तथा होम् योपैथी की र्ारतीय पद्धनत
नर्र्ागों के र्ारसाधक पदिे सनचर् या आयुक् त अथर्ा उिके प्रनतनिनध ;
(घ) राज् य सरकार के स्त र्ास्त ् य और पररर्ार कल् याण या आयुर्र्भज्ञाि तथा होम् योपैथी की र्ारतीय पद्धनत का पदिे
निदिेक ;
(ङ) नर्धाि सर्ा या नर्धाि पररषद ्की तीि मनह ा सदस्त य ;
(च) राज् य सरकार द्वारा नियुक् त ककए गए दस सदस्त य, नजिमें से प्रत् येक दो निम् िन नित प्रर्गों से होंगे :––
(i) नर्ख यात समाज नर्ज्ञािी और नर्नध नर्िेषज्ञ ;
(ii) गैर सरकारी सिंगििों से या अन् यथा नर्ख यात मनह ा सकक्रयतार्ादी ;
(iii) नर्ख यात स्त त्री रोग नर्ज्ञािी और प्रसूनत नर्ज्ञािी या स्त त्री रोग या प्रसूनत तिंत्र के नर्िेषज्ञ ;
(iv) नर्ख यात बा नचककत् सक या नचककत् सीय आिुर्िंनिकी-नर्ज्ञािी ;
(v) नर्ख यात नर्ककरण नचककत् सा नर्ज्ञािी या सोिो ोनजस्त ट ;
(छ) एक अनधकारी, जो पररर्ार कल् याण के र्ारसाधक सिंयुक् त निदेिक की पिंनक् त से िीचे का ि हो और जो पदिे
सदस्त य-सनचर् होगा ।
(3) राज् य बोर्भ की बैिक चार मास में कम से कम एक बार होगी ।
(4) पदिे सदस्त य से नर्न् ि ककसी सदस्त य की पदार्नध तीि र्षभ की होगी ।
(5) पदिे सदस्त य से नर्न् ि ककसी सदस्त य के पद में ररनक् त होिे की दिा में, उसे िई नियुनक् त करके र्रा जाएगा ।
(6) यकद नर्धाि सर्ा का कोई सदस्त य या नर्धाि पररषद ्का कोई सदस्त य, जो राज् य बोर्भ का सदस्त य ह,ै मिंत्री या नर्धाि सर्ा
का अध् यि या उपाध् यि अथर्ा नर्धाि पररषद ्का सर्ापनत या उपसर्ापनत हो जाता ह ैतो र्ह राज् य बोर्भ का सदस्त य िहीं रहेगा ।
(7) राज् य बोर्भ की गणपूर्तभ इसकी कु सदस्त य सिंख या के एक-नतहाई से होगी ।
1 2003 के अनधनियम सिं० 14 की धारा 12 द्वारा अिंत:स्त थानपत ।
8
(8) राज् य बोर्भ, जब कर्ी अपेनित हो, एक सदस्त य को सहयोनजत कर सकता ह ैपरन् तु सहयोनजत सदस्त यों की सिंख या राज् य
बोर्भ की कु सदस्त य सिंख या के एक-नतहाई से अनधक िहीं होगी ।
(9) सहयोनजत सदस्त यों की, मतानधकार के नसर्ाय, र्ही िनक् तयािं और कृत् य होंगे जो अन् य सदस्त यों के हैं और र्े नियमों तथा
नर्नियमों का पा ि करेंगे ।
(10) उि नर्षयों के सिंबिंध में, जो इस धारा में नर्निर्दभष् ट िहीं हैं, राज् य बोर्भ उन् हीं प्रकक्रयाओं तथा ितों का अिुसरण करेगा,
जो बोर्भ को ागू हैं ।]
अध् याय 5
समनुचत प्रानधकारी और स ाहकार सनमनत
17. समनुचत प्रानधकारी और स ाहकार सनमनत––(1) केन् रीय सरकार, इस अनधनियम के प्रयोजिों के न ए राजपत्र में
अनधसूचिा द्वारा, एक या अनधक समुनचत प्रानधकाररयों को, प्रत् येक सिंघ राज् यिेत्र के न ए नियुक् त करेगी ।
(2) राज् य सरकार, इस अनधनियम के प्रयोजिों के न ए, राजपत्र में अनधसूचिा द्वारा, एक या अनधक समुनचत प्रानधकाररयों
को, सिंपूणभ राज् य या उसके र्ाग के न ए प्रसर्पूर्भ ल िंग अर्धारण की समस्त या की व् यापकता को, नजससे स्त त्रील िंगी, भ्रूणर्ध होता है,
ध् याि में रिते हुए, नियुक् त करेगी ।
(3) उपधारा (1) या उपधारा (2) के अधीि समुनचत प्रानधकाररयों के रूप में नियुक् त अनधकारी,––
1[(क) जब सिंपूणभ राज् य या सिंघ राज् यिेत्र के न ए नियुक् त ककए जाएिं, तब र्े निम् िन नित तीि सदस्त यों से नम कर
बिेंगे :––
(i) स्त र्ास्त ् य और पररर्ार कल् याण के सिंयुक् त निदिेक की या उससे ऊपर की पिंनक् त का एक अनधकारी या
अध् यि ;
(ii) मनह ा सिंगिि का प्रनतनिनधत् र् करिे र्ा ी एक नर्ख यात मनह ा ; और
(iii) सिंबिंनधत राज् य या सिंघ राज् यिेत्र के नर्नध नर्र्ाग का एक अनधकारी :
परन् तु यह सिंबिंनधत राज् य या सिंघ राज् यिेत्र का कतभव् य होगा कक र्ह प्रसर्पूर्भ निदाि-तकिीक (नर्नियमि और
दरुुपयोग निर्ारण) सिंिोधि अनधनियम, 2002 के प्रर्ृत्त होिे के तीि मास के र्ीतर राज् य या सिंघ राज् यिेत्र स्त तरीय
बहुसदस्त यीय समुनचत प्रानधकरण का गिि करे :
परन् तु यह और कक उसमें होिे र्ा ी ककसी ररनक् त को, उसके होिे के तीि मास के र्ीतर र्रा जाएगा ;]
(ि) जब राज् य या सिंघ राज् यिेत्र के ककसी र्ाग के न ए नियुक् त ककए जाएिं ऐसी अन् य पिंनक् त के होंगे, जो,
यथानस्त थनत, राज् य सरकार या केन् रीय सरकार उनचत समिे ।
(4) समनुचत प्रानधकारी के निम् िन नित कृत् य होंगे, अथाभत् :––
(क) आिुर्िंनिकी स ाह केन् र, आिुर्िंनिकी प्रयोगिा ा या आिुर्िंनिकी नक् निक के न ए रनजस्त रीकरण मिंजूर,
नि िंनबत या रद्द करिा ;
(ि) आिुर्िंनिकी स ाह केन् र, आिुर्िंनिकी प्रयोगिा ा और आिुर्िंनिकी नक् निक के न ए नर्नहत मािक ागू
करिा ;
(ग) इस अनधनियम और उसके अधीि बिाए गए नियमों के उपबिंधों के र्िंग से सिंबिंनधत पररर्ादों का अन् र्ेषण
करिा और तत् का कारभर्ाई करिा ;
(घ) रनजस्त रीकरण के आर्ेदिों पर तथा रनजस्त रीकरण के नि िंबि या रद्दकरण की निकायतों पर उपधारा (5) के
अधीि गरित स ाहकार सनमनत की स ाह ेिा और उस पर नर्चार करिा ;
2[(ङ) ककसी व् यनक् त द्वारा ककसी स्त थाि पर ककसी ल िंग चयि तकिीक के उपयोग के नर्रुद्ध स्त र्प्रेरणा से या उसकी
जािकारी में ाए जािे पर उपयुक् त नर्नधक कारभर्ाई करिा और ऐसे माम े में स्त र्तिंत्र रूप से अन् र्ेषण र्ी आरिंर् करिा ;
(च) ल िंग चयि या प्रसर्पूर्भ ल िंग अर्धारण की प्रथा के नर्रुद्ध जिसाधारण में जागरुकता पैदा करिा ;
(छ) अनधनियम और नियमों के उपबिंधों के कायाभन् र्यि का पयभर्ेिण करिा ;
1 2003 के अनधनियम सिं० 14 की धारा 15 द्वारा प्रनतस्त थानपत ।
2 2003 के अनधनियम सिं० 14 की धारा 15 द्वारा अिंत:स्त थानपत ।
9
(ज) प्रौद्योनगकी या सामानजक दिाओं में पररर्तभिों के अिुसार नियमों में अपनेित उपािंतरणों के सिंबिंध में बोर्भ और
राज् य बोर्ों को नसफाररि करिा ;
(ि) रनजस्त रीकरण के नि िंबि या रद्दकरण के न ए पररर्ाद के अन् र्ेषण के पश् चात् स ाहकार सनमनत द्वारा की गई
नसफाररिों पर कारभर्ाई करिा ।]
(5) यथानस्त थनत, केन् रीय सरकार या राज् य सरकार समुनचत प्रानधकारी को उसके कृत् यों के निर्भहि में सहायता और स ाह दिेे
के न ए प्रत् येक समुनचत प्रानधकारी के न ए एक स ाहकार सनमनत गरित करेगी और स ाहकार सनमनत के सदस्त यों में से एक को उसका
अध् यि नियुक् त करेगी ।
(6) स ाहकार सनमनत निम् िन नित से नम कर बिेगी, अथाभत् :––
(क) स्त त्री रोग नर्िेषज्ञ, प्रसूनत नर्ज्ञािी, बा नचककत् सा नर्ज्ञािी और नचककत् सा आिुर्िंनिकीनर्ज्ञों में से तीि
आयुर्र्भज्ञाि नर्िेषज्ञ ;
(ि) एक नर्नध नर्िेषज्ञ ;
(ग) यथानस्त थनत, राज् य सरकार या सिंघ राज् यिेत्र के सूचिा और प्रचार से सिंबिंनधत नर्र्ाग का प्रनतनिनधत् र् करिे के
न ए अनधकारी ;
(घ) तीि नर्ख यात सामानजक कायभकताभ नजिमें कम से कम एक मनह ा सिंगििों के प्रनतनिनधयों में से होगा ।
1[(7) कोई र्ी व् यनक् त, जो ल िंग के अर्धारण या ल िंग चयि की प्रसर्पूर्भ निदाि-तकिीकों के उपयोग या उन् ियि में सहयुक् त
रहा ह,ै स ाहकार सनमनत का सदस्त य नियुक् त िहीं ककया जाएगा ।]
(8) स ाहकार सनमनत का अनधरे्िि, रनजस्त रीकरण के ककसी आर्ेदि पर या रनजस्त रीकरण के नि िंबि या रद्दकरण के ककसी
पररर्ाद पर नर्चार करिे के न ए और उस पर स ाह दिेे के न ए जब कर्ी र्ह उनचत समिे या समुनचत प्रानधकारी के अिुरोध पर
ककया जा सकेगा :
परन् तु दो अनधरे्ििों के बीच की अर्नध नर्नहत अर्नध से अनधक िहीं होगी ।
(9) र्े निबन् ध और ितें नजिके अधीि रहते हुए कोई व् यनक् त स ाहकार सनमनत में नियुक् त ककया जा सकेगा और ऐसी सनमनत
द्वारा अपिे कृत् यों के निर्भहि में अिुसरण की जािे र्ा ी प्रकक्रया र्ह होगी, जो नर्नहत की जाए ।
2[17क. समनुचत प्रानधकाररयों की िनक् तयािं––समनुचत प्रानधकारी को निम् िन नित नर्षयों की बाबत िनक् तयािं होंगी,
अथाभत् :––
(क) ऐसे ककसी व् यनक् त को समि करिा, नजसके कब् जे में इस अनधनियम या इसके अधीि बिाए गए नियमों के
उपबिंधों के उल् िंघि से सिंबिंनधत कोई जािकारी ह ै;
(ि) ििंर् (क) से सिंबिंनधत ककसी दस्त तार्ेज या र्ौनतक पदाथभ को पेि करिा ;
(ग) ऐसे ककसी स्त थाि के सिंबिंध में त ािी र्ारिंट जारी करिा, नजसके बारे में सिंदेह है कक र्ह ल िंग चयि तकिीक या
प्रसर्पूर्भ ल िंग अर्धारण में न प् त ह ै; और
(घ) ऐसा कोई अन् य नर्षय, जो नर्नहत ककया जाए ।]
अध् याय 6
आिरु्िंनिकी स ाह केन् रों, आिरु्िंनिकी प्रयोगिा ाओं और आिरु्िंनिकी नक् निकों का रनजस्त रीकरण
3[18. आिरु्िंनिकी स ाह केन् रों, आिरु्िंनिकी प्रयोगिा ाओं या आिरु्िंनिकी नक् निकों का रनजस्त रीकरण––(1) कोई र्ी
व् यनक् त, प्रसर्पूर्भ निदाि-तकिीक (नर्नियमि और दरुुपयोग निर्ारण) सिंिोधि अनधनियम, 2002 के प्रारिंर् के पश् चात् कोई
आिुर्िंनिकी स ाह कें र, आिुर्िंनिकी प्रयोगिा ा या आिुर्िंनिकी नक् निक, नजसके अिंतगभत ऐसा नक् निक, प्रयोगिा ा या कें र र्ी ह,ै
नजसमें अल् रासािंउर् मिीि या इमेलजिंग मिीि या स्त कैिर या कोई अन् य ऐसी प्रौद्योनगकी ह,ै जो भ्रूण के ल िंग का अर्धारण करिे और
ल िंग का चयि करिे में समथभ ह,ै या उिमें से कोई सेर्ाएिं प्रदाि करता ह ैतब तक िहीं िो ेगा जब तक कक ऐसा कें र, प्रयोगिा ा या
नक् निक इस अनधनियम के अधीि सम् यक् रूप से रनजस्त रीकृत िहीं ककया जाता ह ै।]
(2) उपधारा (1) के अधीि रनजस्त रीकरण के न ए प्रत् येक आर्ेदि समुनचत अनधकारी को ऐसे प्ररूप में और ऐसी रीनत से ककया
जाएगा और उसके साथ ऐसी फीस होगी, जो नर्नहत की जाए ।
1 2003 के अनधनियम सिं० 14 की धारा 15 द्वारा प्रनतस्त थानपत ।
2 2003 के अनधनियम सिं० 14 की धारा 16 द्वारा अिंत:स्त थानपत ।
3 2003 के अनधनियम सिं० 14 की धारा 17 द्वारा प्रनतस्त थानपत ।
10
(3) प्रत् येक आिुर्िंनिकी स ाह केन् र, आिुर्िंनिकी प्रयोगिा ा या आिुर्िंनिकी नक् निक जो र्ागत: या अिन् यत: इस
अनधनियम के प्रारिंर् के िीक पूर्भ धारा 4 में उनल् नित ककसी प्रयोजि के न ए प्रसर्पूर्भ निदाि-तकिीक सिंबिंधी स ाह दिेे या उिके
उपयोग करिे में गा हुआ ह,ै ऐसे प्रारिंर् की तारीि से साि कदि के र्ीतर रनजस्त रीकरण के न ए आर्ेदि करेगा ।
(4) धारा 6 के उपबन् धों के अधीि रहते हुए, प्रत् येक ऐसा आिुर्िंनिकी स ाह केन् र, आिुर्िंनिकी प्रयोगिा ा या आिुर्िंनिकी
नक् निक जो प्रसर्पूर्भ निदाि-तकिीक सिंबिंधी स ाह दिेे या उिके उपयोग करिे में गा हुआ ह,ै इस अनधनियम के प्रारिंर् की तारीि से
छह मास की समानप् त पर, जब तक कक ऐसे केन् र, प्रयोगिा ा या नक् निक द्वारा रनजस्त रीकरण के न ए आर्ेदि िहीं ककया गया हो और
उसका इस प्रकार पृथक्त: या सिंयुक् तत:, रनजस्त रीकरण िहीं ककया जाता ह ैअथर्ा तब जब कक ऐसे आर्दिे का निपटारा कर कदया जाता
ह,ै इिमें से जो र्ी पूर्भतर हो, ऐसी ककसी तकिीक सिंबिंधी स ाह दिेा या उिका उपयोग बन् द कर दगेा ।
(5) कोई आिुर्िंनिकी स ाह केन् र, आिुर्िंनिकी प्रयोगिा ा या आिुर्िंनिकी नक् निक इस अनधनियम के अधीि तब तक
रनजस्त रीकृत िहीं ककया जाएगा जब तक कक समुनचत प्रानधकारी का यह समाधाि िहीं हो जाता ह ै कक ऐसा केन् र, प्रयोगिा ा या
नक् निक ऐसी सुनर्धाएिं प्रदाि करिे, ऐसे उपस्त कर का अिुरिण करिे और स्त तरमाि बिाए रििे की नस्त थनत में हैं, जो नर्नहत
ककए जाएिं ।
19. रनजस्त रीकरण प्रमाणपत्र––(1) समुनचत प्रानधकारी, जािंच करिे के पश् चात् और अपिा यह समाधाि कर ेिे के पश् चात्
कक आर्ेदक िे इस अनधनियम और इसके अधीि बिाए गए नियमों की सर्ी अपेिाओं का अिुपा ि कर कदया ह,ै और इस निनमत्त
स ाहकार सनमनत की स ाह को ध् याि में रिते हुए, यथानस्त थनत, आिुर्िंनिकी स ाह केन् र, आिुर्िंनिकी प्रयोगिा ा या आिुर्िंनिकी
नक् निक को, पृथक्त: या सिंयुक् तत: नर्नहत प्ररूप में रनजस्त रीकरण प्रमाणपत्र दगेा ।
(2) यकद, जािंच करिे के पश् चात् और आर्ेदक को सुिर्ाई का अर्सर दिेे के पश् चात् और स ाहकार सनमनत की स ाह को
ध् याि में रिते हुए, समुनचत प्रानधकारी का यह समाधाि हो जाता ह ै कक आर्ेदक िे इस अनधनियम या नियमों की अपेिाओं का
अिुपा ि िहीं ककया ह ैतो र्ह रनजस्त रीकरण सिंबिंधी आर्ेदि को, ऐसे कारणों से जो ेिबद्ध ककए जाएिंगे, िामिंजूर कर देगा ।
(3) प्रत् येक रनजस्त रीकरण प्रमाणपत्र का, ऐसी रीनत से और ऐसी अर्नध के पश् चात् तथा ऐसी फीस का सिंदाय ककए जािे पर,
जो नर्नहत की जाए, िर्ीकरण ककया जाएगा ।
(4) रनजस्त रीकरण प्रमाणपत्र, रनजस्त रीकृत आिुर्िंनिकी स ाह केन् र, आिुर्िंनिकी प्रयोगिा ा या आिुर्िंनिकी नक् निक द्वारा
अपिे कारबार के स्त थाि में ककसी सहजदशृ् य स्त थाि पर प्रदर्िभत ककया जाएगा ।
20. रनजस्त रीकरण का रद्दकरण या नि म् बि––(1) समनुचत प्रानधकारी, स्त र्प्रेरणा से या पररर्ाद ककए जािे पर, आिुर्िंनिकी
स ाह केन् र, आिुर्िंनिकी प्रयोगिा ा या आिुर्िंनिकी नक् निक को यह हतेुक दर्िभत करिे के न ए सूचिा जारी कर सकेगा कक उसका
रनजस्त रीकरण, सूचिा में उनल् नित कारणों से नि नम् बत या रद्द क् यों ि कर कदया जाए ।
(2) यकद आिुर्िंनिकी स ाह केन् र, आिुर्िंनिकी प्रयोगिा ा या आिुर्िंनिकी नक् निक को सुिर्ाई का युनक् तयुक् त अर्सर दिेे
के पश् चात् और स ाहकार सनमनत की स ाह को ध् याि में रिते हुए, समुनचत प्रानधकारी का यह समाधाि हो जाता ह ै कक इस
अनधनियम या नियमों के उपबन् धों में से ककसी को र्िंग ककया गया ह ैतो र्ह ककसी दािंनर्क कायभर्ाही पर, जो र्ह ऐसे केन् र, प्रयोगिा ा
या नक् निक के नर्रुद्ध कर सकेगा, प्रनतकू प्रर्ार् र्ा े नबिा, यथानस्त थनत, उसके रनजस्त रीकरण को, ऐसी अर्नध के न ए जो र्ह उनचत
समिे, नि नम् बत कर सकेगा या, उसके रनजस्त रीकरण को रद्द कर सकेगा ।
(3) उपधारा (1) और उपधारा (2) में ककसी बात के होते हुए र्ी, यकद समुनचत प्रानधकारी की यह राय है कक ोकनहत में
ऐसा करिा आर्श् यक या समीचीि ह ैतो र्ह, उसके न ए जो कारण ह ैउन् हें ेिबद्ध करके, उपधारा (1) में निर्दभष् ट ऐसी कोई सूचिा
जारी ककए नबिा, ककसी आिुर्िंनिकी स ाह केन् र, आिुर्िंनिकी प्रयोगिा ा या आिुर्िंनिकी नक् निक के रनजस्त रीकरण को नि िंनबत कर
सकेगा ।
21. अपी ––आिुर्िंनिकी स ाह केन् र, आिुर्िंनिकी प्रयोगिा ा या आिुर्िंनिकी नक् निक, समुनचत प्रानधकारी द्वारा धारा 20
के अधीि पाररत रनजस्त रीकरण के नि िंबि या रद्दकरण के आदेि की तारीि से तीस कदि के र्ीतर, ऐसे आदिे के नर्रुद्ध नर्नहत
रीनत से,––
(i) जहािं र्ह अपी केन् रीय समुनचत प्रानधकारी के आदिे के नर्रुद्ध है र्हािं केन् रीय सरकार को; और
(ii) जहािं र्ह अपी राज् य के समुनचत प्रानधकारी के आदिे के नर्रुद्ध ह ैर्हािं राज् य सरकार को,
अपी कर सकेगा ।
11
अध् याय 7
अपराध और िानस्त तयािं
1[22. गर्भधारण परू्भ और प्रसर्परू्भ ल िंग अर्धारण सिंबिंधी नर्ज्ञापि का प्रनतषेध और उसके उल् िंघि के न ए दिंर्––(1) कोई
र्ी व् यनक् त, सिंगिि, आिुर्िंनिकी स ाह कें र, आिुर्िंनिकी प्रयोगिा ा या आिुर्िंनिकी नक् निक, नजसके अिंतगभत ऐसा नक् निक,
प्रयोगिा ा या कें र र्ी ह,ै नजसमें अल् रासाउिंर् मिीि, इमेलजिंग मिीि या स्त कैिर या कोई अन् य ऐसी प्रौद्योनगकी ह,ै जो भ्रूण के ल िंग का
अर्धारण करिे और ल िंग चयि करिे में समथभ ह,ै प्रसर्पूर्भ ल िंग अर्धारण या गर्भधारण पूर्भ ल िंग चयि की सुनर्धाओं के बारे में, जो
ऐसे केन् र, प्रयोगिा ा, नक् निक या ककसी अन् य स्त थाि पर उप ब् ध ह,ै कोई नर्ज्ञापि, ककसी र्ी रूप में, नजसके अिंतगभत इिंटरिेट र्ी ह,ै
जारी, प्रकानित, नर्तररत या सिंसूनचत िहीं करेगा या जारी, प्रकानित, नर्तररत या सिंसूनचत िहीं करर्ाएगा ।
(2) कोई र्ी व् यनक् त या सिंगिि, नजसके अिंतगभत आिुर्िंनिकी स ाह कें र, आिुर्िंनिकी प्रयोगिा ा या आिुर्िंनिकी नक् निक र्ी
ह,ै ककसी र्ी प्रकार के साधिों के द्वारा, चाह ेर्ैज्ञानिक हो या अन् यथा, ल िंग के प्रसर्पूर्भ अर्धारण या गर्भधारण पूर्भ चयि के सिंबिंध में
ककसी रीनत में कोई नर्ज्ञापि जारी, प्रकानित, नर्तररत, सिंसूनचत िहीं करेगा या जारी, प्रकानित, नर्तररत या सिंसूनचत
िहीं करर्ाएगा ।
(3) ऐसा कोई व् यनक् त, जो उपधारा (1) या उपधारा (2) के उपबिंधों का उल् िंघि करेगा, ऐसे कारार्ास से नजसकी अर्नध तीि
र्षभ तक की हो सकेगी और जुमाभिे से, जो दस हजार रुपए तक का हो सकेगा, दिंर्िीय होगा ।
स्त पष् टीकरण––इस धारा के प्रयोजिों के न ए, “नर्ज्ञापि” के अिंतगभत कोई सूचिा, पररपत्र, ेब , आर्ेष् टक या कोई अन् य
दस्त तार्ेज ह,ै नजसके अिंतगभत इ ैक् रानिक या मकुरत रूप में इिंटरिेट के या ककसी अन् य मीनर्या के माध् यम से नर्ज्ञापि र्ी ह ैतथा इसमें
पट्ट नर्ज्ञापि, कदर्ार-पेंटटिंग, सिंकेत, प्रकाि, ध् र्नि, धुिंआ या गैस के माध् यम से ककया गया कोई दशृ् यरूपण र्ी ह ै।]
23. अपराध और िानस्त तयािं––(1) कोई नचककत् सा आिुर्िंनिकीनर्ज्ञ, स्त त्री रोग नर्िेषज्ञ, रनजस्त रीकृत नचककत् सा व् यर्सायी या
कोई व् यनक् त, जो आिुर्िंनिकी स ाह केन् र, आिुर्िंनिकी प्रयोगिा ा या आिुर्िंनिकी नक् निक का स्त र्ामी ह ैया ऐसे केन् र, प्रयोगिा ा या
नक् निक में नियोनजत ह ैतथा अपिी र्ृनत्तक या तकिीकी सेर्ाएिं, ऐसे केन् र, प्रयोगिा ा या नक् निक को चाह ेर्े अर्ैतनिक आधार पर
हों या अन् यथा, प्रदाि करता ह,ै और जो इस अनधनियम या इसके अधीि बिाए गए नियमों के ककन् हीं उपबिंधों का उल् िंघि करेगा,
कारार्ास से, नजसकी अर्नध तीि र्षभ तक की हो सकेगी और जुमाभिे से, जो दस हजार रुपए तक का हो सकेगा और ककसी पश् चात्र्ती
दोषनसनद्ध पर, कारार्ास से, नजसकी अर्नध पािंच र्षभ तक की हो सकेगी और जुमाभिे से, जो पचास हजार रुपए तक का हो सकेगा,
दिंर्िीय होगा ।
1[(2) रनजस्त टीकृत नचककत् सा व् यर्सायी का िाम समुनचत प्रानधकारी द्वारा सिंबिंनधत राज् य आयुर्र्भज्ञाि पररषद ्को आर्श् यक
कारभर्ाई करिे के न ए, नजसके अिंतगभत रनजस्त रीकरण का नि िंबि, यकद न् याया य द्वारा आरोप नर्रनचत ककए जाते हैं, और माम े के
निपटाए जािे तक, और नसद्धदोष िहराए जािे पर उसके िाम को प्रथम अपराध के न ए पािंच र्षभ की अर्नध के न ए और पश् चात्र्ती
अपराध के न ए स्त थायी रूप से पररषद ्के रनजस्त टर से हटाया जािा र्ी ह,ै ररपोटभ ककया जाएगा ।
(3) कोई व् यनक् त, जो ककसी आिुर्िंनिकी स ाह कें र, आिुर्िंनिकी प्रयोगिा ा या आिुर्िंनिकी नक् निक या अल् रासाउिंर्
नक् निक या इमेलजिंग नक् निक की या ककसी नचककत् सा आिुर्िंनिकीनर्ज्ञािी, स्त त्री रोग नर्िेषज्ञ, सोिो ोनजस्त ट, इमेलजिंग नर्िेषज्ञ या
रनजस्त रीकृत नचककत् सा व् यर्सायी या ककसी अन् य व् यनक् त की, धारा 4 की उपधारा (2) में नर्निर्दभष् ट प्रयोजिों से नर्न् ि प्रयोजिों के न ए
ककसी गर्भर्ती स्त त्री पर ल िंग चयि के न ए या प्रसर्पूर्भ निदाि तकिीक का उपयोग करिे के न ए सहायता ेगा, प्रथम अपराध के न ए
कारार्ास से, नजसकी अर्नध तीि र्षभ तक की हो सकेगी और जुमाभिे से, जो पचास हजार रुपए तक का हो सकेगा और ककसी
पश् चात्र्ती अपराध के न ए, कारार्ास से नजसकी अर्नध पािंच र्षभ तक की हो सकेगी और जुमाभिे से जो एक ाि रुपए तक का हो
सकेगा दिंर्िीय होगा ।
(4) ििंकाओं को दरू करिे के न ए, यह उपबिंध ककया जाता ह ैकक उपधारा (3) के उपबिंध ऐसी स्त त्री को ागू िहीं होंगे नजसे
ऐसी निदाि तकिीक करािे या ऐसा ल िंग चयि करिे के न ए नर्र्ि ककया गया हो ।]
1[24. प्रसर्परू्भ निदाि-तकिीकों के सिंचा ि की दिा में उपधारणा––र्ारतीय साक्ष् य अनधनियम, 1872 (1872 का 1)
में ककसी बात के होते हुए र्ी, न् याया य, जब तक प्रनतकू सानबत िहीं कर कदया जाता ह,ै यह उपधारणा करेगा कक गर्भर्ती स्त त्री
प्रसर्पूर्भ निदाि-तकिीक का धारा 4 की उपधारा (2) में नर्निर्दभष् ट प्रयोजिों से नर्न् ि प्रयोजि के न ए उपयोग करािे के न ए,
यथानस्त थनत, उसके पनत या ककसी अन् य िातेदार द्वारा नर्र्ि की गई थी और ऐसा व् यनक् त धारा 23 की उपधारा (3) के अधीि अपराध
के दषु् प्रेरण के न ए दायी होगा और उस धारा के अधीि नर्निर्दभष् ट अपराध के न ए दिंर्िीय होगा ।]
25. अनधनियम या नियमों के उि उपबिंधों के उल् िंघि के न ए िानस्त त नजिके न ए ककसी नर्निर्दभष् ट दिंर् का उपबिंध िहीं
ककया गया है––जो कोई इस अनधनियम के या इसके अधीि बिाए गए ककन् हीं नियमों के उि उपबिंधों का उल् िंघि करेगा, नजिके न ए
इस अनधनियम में अन् य ककसी िानस्त त का उपबिंध िहीं ह ैर्ह कारार्ास से, नजसकी अर्नध तीि मास तक की हो सकेगी या जुमाभिे से, जो
एक हजार रुपए तक का हो सकेगा या दोिों से और जहािं ऐसा उल् िंघि जारी रहता ह ैर्हािं अनतररक् त जुमाभिे से जो ऐसे प्रत् येक कदि के
1 2003 के अनधनियम सिं० 14 की धारा 18 द्वारा प्रनतस्त थानपत ।
12
न ए, नजसके दौराि ऐसा उल् िंघि ऐसे प्रथम उल् िंघि के न ए दोषनसनद्ध के पश् चात् जारी रहता ह,ै पािंच सौ रुपए तक का हो सकेगा,
दिंर्िीय होगा ।
26. कम् पनियों द्वारा अपराध––(1) जहािं इस अनधनियम के अधीि दिंर्िीय कोई अपराध ककसी कम् पिी द्वारा ककया गया ह ै
र्हािं ऐसा प्रत् येक व् यनक् त, जो उस अपराध के ककए जािे के समय उस कम् पिी के कारबार के सिंचा ि के न ए उस कम् पिी का र्ारसाधक
और उसके प्रनत उत्तरदायी था और साथ ही र्ह कम् पिी र्ी, ऐसे अपराध के दोषी समिे जाएिंगे और तद्िुसार अपिे नर्रुद्ध कायभर्ाही
ककए जािे और दिंनर्त ककए जािे के र्ागी होंगे :
परन् तु इस उपधारा की कोई बात ककसी ऐसे व् यनक् त को दिंर् का र्ागी िहीं बिाएगी यकद र्ह यह सानबत कर दतेा ह ै कक
अपराध उसकी जािकारी के नबिा ककया गया था या उसिे ऐसे अपराध के ककए जािे का निर्ारण करिे के न ए सर्ी सम् यक् तत् परता
बरती थी ।
(2) उपधारा (1) में ककसी बात के होते हुए र्ी, जहािं इस अनधनियम के अधीि दिंर्िीय कोई अपराध, ककसी कम् पिी द्वारा
ककया गया ह ैऔर यह सानबत हो जाता ह ैकक र्ह अपराध कम् पिी के ककसी निदिेक, प्रबिंधक, सनचर् या अन् य अनधकारी की सहमनत या
मौिािुकू ता से ककया गया ह ैया उस अपराध का ककया जािा उसकी ककसी उपेिा के कारण मािा जा सकता ह ैर्हािं ऐसा निदिेक,
प्रबिंधक, सनचर् या अन् य अनधकारी र्ी उस अपराध का दोषी समिा जाएगा और तद्िुसार अपि े नर्रुद्ध कायभर्ाही ककए जािे और
दिंनर्त ककए जािे का र्ागी होगा ।
स्त पष् टीकरण––इस धारा के प्रयोजिों के न ए,––
(क) “कम् पिी” से कोई निगनमत निकाय अनर्प्रेत ह ैऔर इसके अन् तगभत फमभ या व् यनष् टयों का अन् य सिंगम ह ै; और
(ि) फमभ के सिंबध में, “निदिेक” से उस फमभ का र्ागीदार अनर्प्रेत ह ै।
27. अपराध का सिंज्ञये, अजमाितीय और अिमिीय होिा––इस अनधनियम के अधीि प्रत् येक अपराध सिंज्ञेय, अजमाितीय
और अिमिीय होगा ।
28. अपराधों का सिंज्ञाि––(1) कोई र्ी न् याया य, इस अनधनियम के अधीि ककसी अपराध का सिंज्ञाि,––
(क) सिंबिंनधत समुनचत प्रानधकारी द्वारा अथर्ा, यथानस्त थनत, केन् रीय सरकार या राज् य सरकार या समुनचत
प्रानधकारी द्वारा इस निनमत्त प्रानधकृत ककसी अनधकारी द्वारा ; या
(ि) ऐसे व् यनक् त द्वारा नजसिे अनर्कनथत अपराध की और न् याया य में पररर्ाद करिे के अपिे आिय की कम से
कम 1[पन् रह कदि] की सूचिा नर्नहत रीनत से समुनचत प्रानधकारी को दी ह,ै
ककए गए पररर्ाद पर ही करेगा अन् यथा िहीं ।
स्त पष् टीकरण––इस ििंर् के प्रयोजि के न ए “व् यनक् त” के अन् तगभत कोई सामानजक सिंगिि ह ै।
(2) महािगर मनजस्त रेट या प्रथम र्गभ न् यानयक मनजस्त रेट से नर्न् ि कोई न् याया य इस अनधनियम के अधीि दिंर्िीय ककसी
अपराध का नर्चारण िहीं करेगा ।
(3) जहािं कोई पररर्ाद उपधारा (1) के ििंर् (ि) के अधीि ककया गया ह ैर्हािं न् याया य, ऐसे व् यनक् त द्वारा मािंग ककए जाि े
पर, समुनचत प्रानधकारी को, उसके कब् जे में के सुसिंगत अनर् ेिों की प्रनतयािं ऐसे व् यनक् त को उप ब् ध करािे का निदिे द ेसकेगा ।
अध् याय 8
प्रकीणभ
29. अनर् िे का रिा जािा––(1) इस अनधनियम और नियमों के अधीि रिे जािे के न ए अपेनित सर्ी अनर् ेिों, चाटों,
प्ररूपों, ररपोटों, सहमनत पत्रों तथा अन् य सर्ी दस्त तार्ेजों का, दो र्षभ की अर्नध तक या ऐसी अर्नध तक, जो नर्नहत की जाए, परररिण
ककया जाएगा :
परन् तु यकद ककसी आिुर्िंनिकी स ाह केन् र, आिुर्िंनिकी प्रयोगिा ा या आिुर्िंनिकी नक् निक के नर्रुद्ध कोई दािंनर्क या अन् य
कायभर्ाही सिंनस्त थत की जाती ह ैतो ऐसे केन् र, प्रयोगिा ा या नक् निक के अनर् ेिों और अन् य सर्ी दस्त तार्ेजों का ऐसी कायभर्ाही के
अिंनतम निपटारे तक परररिण ककया जाएगा ।
(2) ऐसे सर्ी अनर् ेि, सर्ी युनक् तयुक् त समयों पर, समुनचत प्रानधकारी को या समुनचत प्रानधकारी द्वारा इस निनमत्त
प्रानधकृत ककसी अन् य व् यनक् त को निरीिण के न ए उप ब् ध कराए जाएिंगे ।
1 2003 के अनधनियम सिं० 14 की धारा 21 द्वारा प्रनतस्त थानपत ।
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30. त ािी िे ेऔर अनर् िेों, आकद के अनर्ग्रहण करि ेकी िनक् त––1[(1) यकद समुनचत प्रानधकारी के पास यह नर्श् र्ास
करिे का कारण ह ैकक इस अनधनियम के अधीि कोई अपराध, ककसी आिुर्िंनिकी स ाह कें र, आिुर्िंनिकी प्रयोगिा ा या आिुर्िंनिकी
नक् निक या ककसी अन् य स्त थाि में ककया गया है या ककया जा रहा ह ैतो ऐसा प्रानधकारी या इस निनमत्त प्रानधकृत कोई अनधकारी, ऐसे
नियमों के अधीि रहते हुए, जो नर्नहत ककए जाएिं, सर्ी युनक् तयुक् त समयों पर, ऐसे आिुर्िंनिकी स ाह कें र, आिुर्िंनिकी प्रयोगिा ा,
आिुर्िंनिकी नक् निक या ककसी अन् य स्त थाि में, ऐसी सहायता के साथ, यकद कोई हो, जैसी ऐसा प्रानधकारी या अनधकारी आर्श् यक
समिे, प्रर्ेि कर सकेगा और त ािी े सकेगा और र्हािं पाए गए ककसी अनर् ेि, रनजस्त टर, दस्त तार्ेज, पुस्त तक, पुनस्त तका, नर्ज्ञापि या
ककसी अन् य र्ौनतक पदाथभ की परीिा कर सकेगा और उसे अनर्गृहीत और मुहरबन् द कर सकेगा, यकद ऐसे प्रानधकारी या अनधकारी के
पास यह नर्श् र्ास करिे का कारण ह ै कक उससे इस अनधनियम के अधीि दिंर्िीय ककसी अपराध के ककए जािे का साक्ष् य
नम सकता ह ै।]
(2) दिंर् प्रकक्रया सिंनहता, 1973 (1974 का 2) के त ािी और अनर्ग्रहण से सिंबिंनधत उपबन् ध, जहािं तक हो सके, इस अनधनियम
के अधीि ी गई प्रत् येक त ािी या अनर्ग्रहण को ागू होंगे ।
31. सद्भार्पूर्भक की गई कारभर्ाई के न ए सिंरिण––इस अनधनियम के उपबन् धों के अिुसरण में सद्भार्पूर्भक की गई या की
जािे के न ए आिनयत ककसी बात के न ए कोई र्ी र्ाद, अनर्योजि या अन् य नर्नधक कायभर्ाही केन् रीय सरकार या राज् य सरकार या
समुनचत प्रानधकारी अथर्ा केन् रीय सरकार या राज् य सरकार द्वारा या प्रानधकारी द्वारा प्रानधकृत ककसी अनधकारी के नर्रुद्ध िहीं होगी ।
2[31क. करििाइयों का दरू ककया जािा––(1) यकद प्रसर्पूर्भ निदाि-तकिीक (नर्नियमि और दरुुपयोग निर्ारण) सिंिोधि
अनधनियम, 2002 के उपबिंधों को प्रर्ार्ी करिे में कोई करििाई उत् पन् ि होती ह ैतो कें रीय सरकार, राजपत्र में प्रकानित आदिे द्वारा,
ऐसे उपबिंध बिा सकेगी, जो उक् त अनधनियम के उपबिंधों से असिंगत ि हों, और जो उक् त करििाई को दरू करिे के न ए उसे आर्श् यक या
समीचीि प्रतीत हों :
परिंतु इस धारा के अधीि ऐसा कोई आदिे प्रसर्पूर्भ निदाि-तकिीक (नर्नियमि और दरुुपयोग निर्ारण) सिंिोधि
अनधनियम, 2002 के प्रारिंर् की तारीि से तीि र्षभ की अर्नध की समानप् त के पश् चात् िहीं ककया जाएगा ।
(2) इस धारा के अधीि ककया गया प्रत् येक आदिे, उसके ककए जािे के पश् चात्, यथािीघ्र, सिंसद ्के प्रत् येक सदि के समि रिा
जा सकेगा ।]
32. नियम बिाि े की िनक् त––(1) केन् रीय सरकार इस अनधनियम के उपबिंधों को कायाभनन् र्त करिे के न ए नियम
बिा सकेगी ।
(2) नर्निष् टतया और पूर्भगामी िनक् त की व् यापकता पर प्रनतकू प्रर्ार् र्ा े नबिा ऐसे नियमों में निम् िन नित के न ए
उपबन् ध ककया जा सकेगा, अथाभत् :––
1[(i) धारा 3 की उपधारा (2) के अधीि ककसी रनजस्त रीकृत आिुर्िंनिकी स ाह कें र, आिुर्िंनिकी प्रयोगिा ा या
आिुर्िंनिकी नक् निक में नियोनजत व् यनक् तयों के न ए न् यूितम अहभताएिं ;
(iक) र्ह रीनत, नजसमें धारा 4 की उपधारा (3) के परिंतुक के अधीि ककसी गर्भर्ती स्त त्री पर पराश्रव् य ेिि करिे
र्ा ा व् यनक् त नक् निक में उसका अनर् ेि रिेगा ;]
(ii) र्ह प्ररूप नजसमें गर्भर्ती स्त त्री की धारा 5 के अधीि सहमनत अनर्प्राप् त की जािी ह ै;
(iii) धारा 8 की उपधारा (4) के अधीि केन् रीय पयभर्ेिण बोर्भ के सदस्त यों द्वारा अपिे कृत् यों के निर्भहि में अिुसरण
की जािे र्ा ी प्रकक्रया ;
(iv) पदिे सदस्त यों से नर्न् ि सदस्त यों को धारा 9 की उपधारा (5) के अधीि अिुज्ञेय र्ते्त ;
(v) धारा 17 की उपधारा (8) के परन् तुक के अधीि स ाहकार सनमनत के ककन् हीं दो अनधरे्ििों के बीच की अर्नध ;
3[(ivक) आिुर्िंनिकी स ाह कें र, आिुर्िंनिकी प्रयोगिा ा और आिुर्िंनिकी नक् निकों में कायभरत व् यनक् तयों द्वारा
पा ि की जािे र्ा ी आचार-सिंनहता नजसे धारा 16 के ििंर् (iv) के अधीि केन् रीय पयभर्ेिण बोर्भ द्वारा अनधकनथत ककया
जाएगा ;
(ivि) र्ह रीनत नजसमें राज् य और सिंघ राज् यिेत्र पयभर्ेिण बोर्ों द्वारा धारा 16क की उपधारा (1) के ििंर् (iv) के
अधीि उक् त अनधनियम के अधीि राज् य में ककए गए नर्नर्न् ि कक्रयाक ापों के सिंबिंध में बोर्भ और कें रीय सरकार को ररपोटभ दी
जाएगी ;
(ivग) धारा 17क के ििंर् (घ) के अधीि ककसी अन् य माम े में समुनचत प्रानधकारी को सिक् त करिा ;]
1 2003 के अनधनियम सिं० 14 की धारा 22 द्वारा प्रनतस्त थानपत ।
2 2003 के अनधनियम सिं० 14 की धारा 23 द्वारा अिंत:स्त थानपत ।
3 2003 के अनधनियम सिं० 14 की धारा 24 द्वारा अिंत:स्त थानपत ।
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(vi) र्े निबिंधि और ितें नजिके अधीि रहते हुए ककसी व् यनक् त को स ाहकार सनमनत में नियुक् त ककया जा सकेगा
और ऐसी सनमनत द्वारा धारा 17 की उपधारा (9) के अधीि अिुसरण की जािे र्ा ी प्रकक्रया ;
(vii) र्ह प्ररूप नजसमें और रीनत नजससे धारा 18 की उपधारा (2) के अधीि रनजस्त रीकरण के न ए आर्ेदि ककया
जाएगा और उसके न ए सिंदये फीस ;
(viii) धारा 18 की उपधारा (5) के अधीि आिुर्िंनिकी स ाह केन् र, आिुर्िंनिकी प्रयोगिा ा या आिुर्िंनिकी
नक् निक द्वारा प्रदाि की जािे र्ा ी सुनर्धाएिं, अिुरनित ककए जािे र्ा े उपस्त कर और बिाए रिे जािे र्ा े अन् य मािक ;
(ix) र्ह प्ररूप नजसमें धारा 19 की उपधारा (1) के अधीि रनजस्त रीकरण प्रमाणपत्र कदया जाएगा ;
(x) र्ह रीनत नजससे और र्ह अर्नध नजसके पश् चात् धारा 19 की उपधारा (3) के अधीि रनजस्त रीकरण प्रमाणपत्र
का िर्ीकरण ककया जाएगा और ऐसे िर्ीकरण के न ए सिंदये फीस ;
(xi) र्ह रीनत नजससे धारा 21 के अधीि अपी की जा सकेगी ;
(xii) र्ह अर्नध नजस तक धारा 29 की उपधारा (1) के अधीि अनर् ेिों, चाटों, आकद का परररिण
ककया जाएगा ;
(xiii) र्ह रीनत नजससे दस्त तार्ेज, अनर् ेि, सामग्री आकद का अनर्ग्रहण ककया जाएगा और र्ह रीनत नजसस े
अनर्ग्रहण सूची तैयार की जाएगी तथा उस व् यनक् त को दी जाएगी नजसकी अनर्रिा से ऐसे दस्त तार्ेज, अनर् ेि या सामग्री
धारा 30 की उपधारा (1) के अधीि अनर्गृहीत की गई थी ;
(xiv) कोई अन् य नर्षय जो नर्नहत ककया जािा अपेनित ह ैया नर्नहत ककया जाए ।
33. नर्नियम बिाि ेकी िनक् त––बोर्भ, केन् रीय सरकार की पूर्भ मिंजूरी से, राजपत्र में अनधसूचिा द्वारा, ऐसे नर्नियम, जो इस
अनधनियम और इसके अधीि बिाए गए नियमों के उपबन् धों से असिंगत ि हों, निम् िन नित का उपबन् ध करिे के न ए बिा सकेगा,
अथाभत् :––
(क) धारा 9 की उपधारा (1) के अधीि बोर्भ के अनधर्ििों का समय और स्त थाि तथा ऐसे अनधरे्ििों में कारबार के
सिंव् यर्हार के न ए अिुसरण की जािे र्ा ी प्रकक्रया तथा उि सदस्त यों की सिंख या नजिसे नम कर गणपूर्तभ होगी ;
(ि) र्ह रीनत नजसस ेकोई व् यनक् त धारा 11 की उपधारा (1) के अधीि बोर्भ के साथ अस्त थायी रूप से सहयोनजत
ककया जा सकेगा ;
(ग) धारा 12 के अधीि नियुक् त बोर्भ के अनधकाररयों और अन् य कमभचाररयों की नियुनक् त का ढिंग, सेर्ा की ितें तथा
र्ेतिमाि और र्ते्त ;
(घ) साधारणत: बोर्भ के कायभक ापों का दि सिंचा ि ।
34. नियमों और नर्नियमों का सिंसद ्के समि रिा जािा––इस अनधनियम के अधीि बिाया गया प्रत् येक नियम और प्रत् येक
नर्नियम बिाए जािे के पश् चात् यथािीघ्र, सिंसद ्के प्रत् येक सदि के समि, जब र्ह सत्र में हो, कु तीस कदि की अर्नध के न ए रिा
जाएगा । यह अर्नध एक सत्र में अथर्ा दो या अनधक आिुक्रनमक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यकद उस सत्र के या पूर्ोक् त आिुक्रनमक सत्रों
के िीक बाद के सत्र के अर्साि के पूर्भ दोिों सदि, उस नियम या नर्नियम में कोई पररर्तभि करिे के न ए सहमत हो जाएिं तो
तत् पश् चात् र्ह ऐसे पररर्र्तभत रूप में ही प्रर्ार्ी होगा । यकद उक् त अर्साि के पूर्भ दोिों सदि सहमत हो जाएिं कक र्ह नियम या
नर्नियम िहीं बिाया जािा चानहए तो तत् पश् चात् र्ह निष् प्रर्ार् हो जाएगा । ककन् तु उस नियम या नर्नियम के ऐसे पररर्र्तभत या
निष् प्रर्ार् होिे से उसके पह े की गई ककसी बात की नर्नधमान् यता पर प्रनतकू प्रर्ार् िहीं पडे़गा ।
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Open official source version ↗About this act
- Jurisdiction
- Rajasthan
- Enactment date
- 1994-09-20
- Sections available
- 39
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India Code, Government of India. Text fetched 20 Oct 2026. Source metadata reports last modification: 2025-11-03. Check the linked official text and subsequent notifications when applying a provision.